विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-I

Total Questions: 50

11. इनमें से कौन-सा सूक्ष्म वित्त के पीछे के कारणों में से एक नहीं है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) ऋण से अधिक गरीबों को सब्सिडी की आवश्यकता होती है।
Solution:
  • भारत में सूक्ष्म वित्त एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो कम आय वाले लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • सूक्ष्म वित्त के पीछे के कारणों को देखें तो विकल्प (b) 'ऋण से अधिक गरीबों को सब्सिडी की आवश्यकता होती है
  • कथन गलत है; क्योंकि गरीबों को सब्सिडी से अधिक आवश्यकता ऋण की होती है। अतः प्रश्न के संदर्भ में कथन (b) गलत है। शेष सभी कथन सत्य हैं।
  • सूक्ष्म वित्त के पीछे के कारण
    • सूक्ष्म वित्त (Microfinance) मुख्य रूप से गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए विकसित हुआ
    • जो निम्न आय वर्गों को छोटे ऋण, बचत और बीमा जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराता है।
    • इसके पीछे प्रमुख कारणों में औपचारिक बैंकिंग से वंचित ग्रामीण और शहरी गरीबों की सीमित पहुँच, साहूकारों पर निर्भरता, तथा स्वरोजगार को प्रोत्साहन शामिल हैं।
  • प्रमुख कारण
    • औपचारिक वित्तीय संस्थानों की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की अपर्याप्त पहुँच के कारण गरीब साहूकारों पर निर्भर रहते हैं
    • जो उच्च ब्याज लेते हैं। सूक्ष्म वित्त इस अंतर को भरता है।
    • वित्तीय समावेशन की आवश्यकता: निम्न आय समूहों को किफायती ऋण देकर उद्यमिता और आय वृद्धि को बढ़ावा मिलता है।​
    • गरीबी न्यूनीकरण: छोटे ऋण महिलाओं और सीमांत किसानों को स्वरोजगार के अवसर देते हैं, जिससे परिवार की आय बढ़ती है।​
    • बिना जमानत ऋण: पारंपरिक बैंकों के विपरीत, सूक्ष्म वित्त समूह गारंटी पर छोटे ऋण देता है।​
  • जो कारण नहीं है
    • बड़ी मात्रा में ऋण प्रदान करना सूक्ष्म वित्त के पीछे का कारण नहीं है।
    •  सूक्ष्म वित्त की मूल अवधारणा ही छोटे (माइक्रो) ऋणों पर आधारित है, जहाँ भारत में सामान्यतः 1 लाख रुपये से कम के ऋण दिए जाते हैं।
    • बड़ी ऋण राशि सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFI) का मूल सिद्धांत नहीं है, बल्कि यह उनके विपरीत है
    • वे मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता बनाए रखने, ब्याज दर सीमाओं का पालन करने और बाजार को विकृत न करने पर जोर देते हैं।​
  • विस्तृत व्याख्या
    • सूक्ष्म वित्त की उत्पत्ति 1970-80 के दशक में बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक (मोहम्मद यूनुस द्वारा स्थापित) से मानी जाती है
    • जहाँ गरीबी और बेरोजगारी के पीछे वित्तीय बहिष्कार मुख्य समस्या थी।
    • भारत में NABARD और SHG-Bank लिंकेज मॉडल ने इसे बढ़ावा दिया।
    • MFI जैसे संगठन (NBFC-MFI, NGOs) छोटे ऋण देकर जोखिम कम रखते हैं
    • लेकिन चुनौतियाँ जैसे उच्च ब्याज दरें (20-30%) और ऋण चक्र भी उत्पन्न हुई हैं।

12. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

A. बाह्यकरण का प्रभाव सदैव धनात्मक होता है।

B. वास्तविक राष्ट्रीय आय का अर्थ स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय है।

Correct Answer: (d) केवल A
Solution:
  • बाह्यकरण का प्रभाव धनात्मक तथा ऋणात्मक दोनों हो सकता है। अतः कथन A असत्य है।
  • जबकि कथन B 'वास्तविक राष्ट्रीय आय का अर्थ स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय है' सही है।
  • आपका प्रश्न "निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?" अधूरा लगता है
  • क्योंकि इसमें कथनों की कोई सूची या विकल्प प्रदान नहीं किए गए हैं। बिना कथनों के इस प्रकार का प्रश्न हल करना संभव नहीं होता।​
  • समस्या का प्रकार
    • ऐसे प्रश्न आमतौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, बैंकिंग, रेलवे) में आते हैं
    • जहाँ तर्कशक्ति, गणित या सामान्य ज्ञान के 3-4 कथन दिए जाते हैं। उपयोगकर्ता को कथनों को शामिल करना चाहिए।​
  • उदाहरण विश्लेषण
    • एक सामान्य उदाहरण लें (सात व्यक्तियों वाली पंक्ति व्यवस्था से):
    • कथन 1: C ने F से पहले वस्तु खरीदी → असत्य।
    • कथन 2: केवल E ने D के बाद खरीदी → सत्य।
    • कथन 3: G पहला व्यक्ति → सत्य।
    • कथन 4: C और B के बीच कोई नहीं → असत्य।​
    • यहाँ कथन 1 और 4 असत्य हैं।
  • सलाह
    • कृपया पूर्ण प्रश्न पोस्ट करें:
    • सभी कथन सूचीबद्ध करें।
    • विकल्प बताएँ (a, b, c, d)।
    • विषय निर्दिष्ट करें (तर्क, गणित आदि)।

13. इनमें से कौन-सा प्रत्यक्ष परिणामों में से एक नहीं है, जो एक अच्छे औद्योगिक क्षेत्र की व्याख्या कर सकता है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) किसानों की आय दोगुनी करना
Solution:
  • अर्थशास्त्रियों ने ऐसा पाया है कि निर्धन राष्ट्र तभी प्रगति कर पाते हैं, जब उनमें अच्छे औद्योगिक क्षेत्रक होते हैं।
  • उद्योग रोजगार उपलब्ध कराते हैं और यह कृषि में रोजगार की अपेक्षा अधिक स्थायी होते हैं।
  • इनसे आधुनिकीकरण और समग्र समृद्धि को बढ़ावा मिलता है।
  • किसानों की आय दोगुनी करना उद्योग से नहीं, बल्कि किसानों के कल्याण से संबंधित है।
  • प्रत्यक्ष परिणाम क्या होते हैं?
    • औद्योगिक क्षेत्र का मुख्य फोकस विनिर्माण, कारखानों और उत्पादन पर होता है।
    • इसके प्रत्यक्ष परिणामों में स्थिर रोजगार मिलना, नई तकनीकों का अपनाना और बड़े पैमाने पर उपभोक्ता वस्तुओं का उपलब्ध होना शामिल है।​
    • ये परिणाम सीधे उद्योग की गतिविधियों से जुड़े होते हैं, जैसे फैक्टरियां चलाना और उत्पाद बनाना।
  • गैर-प्रत्यक्ष परिणाम की व्याख्या
    • किसानों की आय दोगुनी करना कृषि क्षेत्र से जुड़ा लक्ष्य है, जो औद्योगिक क्षेत्र का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं।
    • यह अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक विकास से प्रभावित हो सकता है
    • लेकिन कृषि नीतियां, बाजार सुधार और तकनीकी सुधार इसके मुख्य कारण होते हैं।​
    • औद्योगिक क्षेत्र किसानों को सीधे प्रभावित नहीं करता; बल्कि, यह रोजगार और वस्तु उत्पादन पर केंद्रित रहता है।
  • विस्तृत संदर्भ
    • भारत जैसे देशों में औद्योगिक विकास लोहा-इस्पात जैसे बुनियादी उद्योगों से जुड़ा है, जो अन्य क्षेत्रों को कच्चा माल देते हैं।​
    • हालांकि, सामाजिक परिणाम जैसे जनसंख्या वृद्धि या आय असमानता अप्रत्यक्ष होते हैं।​
    • एक मजबूत औद्योगिक क्षेत्र आर्थिक वृद्धि को गति देता है
    • लेकिन किसानों की आय जैसे विशिष्ट लक्ष्य इसके दायरे से बाहर हैं।

14. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने किस वर्ष भारत में जीवीए (GVA) अवधारणा को अपनाया? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 2015
Solution:
  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (पूर्व में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय) ने वर्ष 2015 से GVA की अवधारणा शुरू किया। कुल GVA = GDP + सब्सिडी + उत्पादों पर कर
  • GVA अवधारणा का परिचय
    • GVA अर्थव्यवस्था के उत्पादन पक्ष को मापता है, जहां उत्पादन मूल्य से मध्यवर्ती खपत घटाई जाती है।
    • यह श्रम और पूंजी के योगदान को दर्शाता है तथा संयुक्त राष्ट्र की SNA 2008 पद्धति पर आधारित है।​
    • भारत में पहले GDP मुख्य रूप से व्यय पक्ष (Expenditure Approach) पर आधारित था, लेकिन GVA ने उत्पादन दृष्टिकोण को मजबूत किया।
  • अपनाने का वर्ष और कारण
    • जनवरी 2015 में CSO ने आधार वर्ष को 2004-05 से 2011-12 में बदलते हुए GVA को बुनियादी मूल्यों पर अपनाया।
    • यह SNA 1993/2008 के अनुरूप था तथा कर-सब्सिडी समायोजन को स्पष्ट किया।​
    • परिणामस्वरूप, GDP = GVA (at basic prices) + Taxes on Products - Subsidies on Products की नई श्रृंखला शुरू हुई।
  • विस्तृत प्रभाव
    • 2015 के बाद GDP अनुमान CSO (अब NSO का हिस्सा) द्वारा तिमाही और वार्षिक आधार पर जारी होते हैं।​
    • GVA ने क्षेत्रीय योगदान (कृषि, उद्योग, सेवा) को बेहतर ढंग से दर्शाया, जैसे 2014-15 में वास्तविक GVA वृद्धि 7.3% रही।​
    • वित्त मंत्रालय राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों के लिए वर्तमान मूल्यों पर GDP/GVA का उपयोग करता है, जो बजट प्रक्रिया को प्रभावित करता है।​
  • CSO की भूमिका
    • CSO की स्थापना 1951 में हुई, जो राष्ट्रीय लेखा, औद्योगिक आंकड़े और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार करता है।
    • 2019 में CSO और NSSO का विलय NSO में हो गया, लेकिन GVA प्रणाली बरकरार रही।​
    • यह परिवर्तन आर्थिक आंकड़ों की अंतरराष्ट्रीय तुलनायोग्यता बढ़ाने के लिए आवश्यक था।

15. आर्थिक पर्यावरण लेखांकन प्रणाली में अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच अंतर्संबंधों का विश्लेषण ....... द्वारा प्रस्तुत किया। [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) संयुक्त राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय
Solution:
  • आर्थिक पर्यावरण लेखांकन प्रणाली एक ढांचा है
  • जो अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तथा पर्यावरणीय संपत्तियों के स्टॉक और स्टॉक में परिवर्तन के बीच अंतर्संबंधों का अधिक व्यापक और बहुउद्देशीय दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय डेटा को एकीकृत करता है।
  • इसे संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी कार्यालय द्वारा प्रस्तुत किया गया।
  • SEEA का परिचय
    • SEEA एक अंतरराष्ट्रीय मानकीकृत सांख्यिकीय ढांचा है जो पर्यावरणीय आंकड़ों को राष्ट्रीय आर्थिक लेखांकन से जोड़ता है।
    • यह प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, पर्यावरणीय क्षय और आर्थिक गतिविधियों के बीच संबंधों को मापने में मदद करता है।
    • 2012 में संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा अनुमोदित SEEA पारंपरिक जीडीपी जैसे मापदंडों की सीमाओं को दूर करता है
    • जहां प्राकृतिक संसाधनों का ह्रास या प्रदूषण को शामिल नहीं किया जाता।
  • मुख्य घटक
    • केंद्रीय ढांचा: आर्थिक दृष्टिकोण से प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जल, वन, मछली) के उत्पादन, उपभोग और अपशिष्ट उत्सर्जन का विश्लेषण करता है।
    • यह पर्यावरण को आर्थिक प्रक्रियाओं का हिस्सा मानता है।​
    • पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन (SEEA Ecosystem Accounting - SEEA-EA): पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (जैसे जल शुद्धिकरण, जैव विविधता) पर फोकस करता है
    • मानव कल्याण से उनके योगदान को जोड़ता है। यह SEEA-CF को पूरक बनाता है।​
  • अर्थव्यवस्था-पर्यावरण अंतर्संबंध
    • SEEA अर्थव्यवस्था को पर्यावरण से अलग नहीं मानता।
    • उदाहरणस्वरूप, वनों की कटाई आर्थिक विकास दिखा सकती है
    • लेकिन संसाधन क्षय को नजरअंदाज कर देती है।
    • SEEA समायोजित जीडीपी या प्राकृतिक पूंजी खाते बनाकर सतत विकास का मूल्यांकन करता है।
    • यह नीति-निर्माताओं को पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाने में सहायता प्रदान करता है।
  • UNSD की भूमिका
    • संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी कार्यालय वैश्विक सांख्यिकीय मानकों को विकसित और समन्वित करता है।
    • SEEA को लागू करने के लिए UNSD ने विश्व बैंक आदि के साथ सहयोग किया
    • जो मैक्सिको और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों में परीक्षणित हो चुका है।
    • भारत जैसे देशों में भी केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) SEEA को अपनाने की दिशा में कार्यरत है।
  • महत्व और लाभ
    • सतत नीति निर्माण: प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन से साक्ष्य-आधारित निर्णय संभव होते हैं।
    • पर्यावरणीय क्षति मापन: अपशिष्ट, उत्सर्जन और संसाधन ह्रास को मौद्रिक रूप से गणना करता है।
    • वैश्विक पहल: एजेंडा 21 और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़ा, जो पर्यावरण को आर्थिक लेखा में शामिल करने का आह्वान करता है।
  • भारत में प्रासंगिकता
    • भारत में पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन से वन, जल और जैव विविधता के क्षय को जीडीपी में समायोजित किया जा सकता है।
    • NEERI जैसे संस्थान पर्यावरण अनुसंधान में योगदान देते हैं, जबकि CSO सांख्यिकीय समन्वय करता है।
    • यह जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
  • चुनौतियां
    • डेटा संग्रहण में जटिलता, विशेषकर विकासशील देशों में।
    • पारिस्थितिकी सेवाओं का मौद्रिक मूल्यांकन कठिन।
    • राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी। फिर भी, SEEA सतत अर्थव्यवस्था की दिशा में एक मजबूत उपकरण है।​

16. स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के संबंध में गलत कथन/कथनों की पहचान कीजिए। [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

i. इनमें सामाजिक और आर्थिक रूप से एक समान 20 लोगों तक के स्वैच्छिक समूह शामिल होते हैं।

ii. स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए निश्चित नियमों और उपनियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती है।

iii. अप्रैल, 1996 में, आरबीआई ने SHG-BLP को एक प्राथमिकता क्षेत्रक की ऋण गतिविधि के रूप में घोषित किया।

Correct Answer: (b) केवल ii
Solution:
  • स्वयं सहायता समूह समान सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि वाले 10-20 सदस्यों का एक स्वैच्छिक समूह है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल, 1996 में अपने परिपत्र के जरिए स्वयं सहायता समूहों को दिए गए ऋण में प्राथमिकता क्षेत्र अग्रिमों के तहत शामिल किए जाने का निर्देश दिया।
  • विकल्प ii असत्य है; क्योंकि SHGs के लिए निश्चित नियमों और उपनियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
  • SHG की मूल विशेषताएँ
    •  सामान्यतः ये कंपनी अधिनियम 2013 के तहत पंजीकृत औपचारिक इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर स्वैच्छिक संगठन होते हैं ।
  • सामान्य गलत कथन
  • कथन 1: SHG कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत संचालित होते हैं
    • यह कथन गलत है। SHG अनौपचारिक समूह हैं
    • जिन्हें कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकरण या शासन की आवश्यकता नहीं होती।
    • ये सामुदायिक विकास और गरीबी उन्मूलन पर केंद्रित होते हैं, न कि औपचारिक कंपनी के रूप में ।​
  • कथन 2: SHG विभिन्न आय समूहों के व्यक्तियों से बने होते हैं
    • यह भी गलत है। SHG में सदस्य समान सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से होते हैं
    • साझा समस्याओं का समाधान आसान हो।
    • विभिन्न आय वर्गों का मिश्रण समूह की एकता और उद्देश्य को कमजोर कर सकता है ।
  • सही कथन के उदाहरण
    • SHG बिना संपार्श्विक के सीधे बैंक ऋण प्राप्त कर सकते हैं, खासकर NABARD के लिंकेज मॉडल के तहत ।​
    • ये मुख्य रूप से महिलाओं पर केंद्रित होते हैं
    • NRLM जैसी योजनाओं से जुड़े होते हैं, जो आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाते हैं ।
  • SHG की चुनौतियाँ
    • SHG में जागरूकता की कमी, कौशल अभाव, कमजोर वित्तीय प्रबंधन और स्थिरता की समस्या आम हैं
    • उदाहरणस्वरूप, कई समूहों में आय को व्यक्तिगत खर्चों पर उपयोग कर लिया जाता है
    • जो दीर्घकालिक सफलता को प्रभावित करता है। प्रशिक्षण और बाजार संपर्क बढ़ाने से ये मुद्दे हल हो सकते हैं।
  • सरकारी पहल और प्रभाव
    • सरकार का लक्ष्य SHG महिलाओं की आय को 1 लाख रुपये तक बढ़ाना है
    • जैसे लखपति दीदी योजना के तहत । ये समूह वित्तीय समावेशन, सामाजिक न्याय और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई में सहायक हैं
    • कुल मिलाकर, गलत कथनों की पहचान SHG की अनौपचारिक प्रकृति और समरूप सदस्यता पर आधारित होती है 。

17. समष्टि आर्थिक प्रदर्शन का सबसे सामान्यतः उपयोग किया जाने वाला संकेतक कौन-सा है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद
Solution:
  • समष्टि अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र की एक शाखा है, जो समग्र अर्थव्यवस्था के व्यवहार का अध्ययन करती है
  • जिसमें बाजार, व्यवसाय, उपभोक्ता और सरकारें शामिल हैं।
  • यह मुद्रास्फीति, मूल्य स्तर, आर्थिक वृद्धि दर, राष्ट्रीय आय, सकल घरेलू उत्पाद और बेरोजगारी में बदलाव जैसी घटनाओं की जांच करता है।
  • समष्टि आर्थिक प्रदर्शन का सामान्यतः सर्वाधिक उपयोग प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद है।
  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की प्रधानता
    • सकल घरेलू उत्पाद किसी देश की अर्थव्यवस्था में एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य दर्शाता है।
    • यह समष्टि अर्थशास्त्र का मूलभूत संकेतक है क्योंकि यह आर्थिक विकास, उत्पादकता और समग्र स्वास्थ्य को मापता है।
    • बढ़ता GDP अर्थव्यवस्था के विस्तार का संकेत देता है, जबकि गिरावट मंदी की ओर इशारा करती है।
  • गणना के तरीके
    • GDP की गणना तीन मुख्य विधियों से की जाती है:
    • उत्पादन विधि: कुल उत्पादन मूल्य से मध्यवर्ती खपत घटाकर।
    • व्यय विधि: उपभोग + निवेश + सरकारी खर्च + निर्यात - आयात।
    • आय विधि: मजदूरी + लाभ + ब्याज + किराया का योग।
    • ये विधियाँ एक-दूसरे से मेल खानी चाहिए, जो अर्थव्यवस्था के संतुलन को सिद्ध करती हैं।
    • वास्तविक GDP मुद्रास्फीति समायोजित होता है, जबकि नाममात्र GDP वर्तमान कीमतों पर आधारित।​
  • प्रति व्यक्ति GNP का महत्व
    • प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP per capita) समग्र आर्थिक प्रदर्शन का एक और प्रमुख सूचक है
    • जो कुल GNP को जनसंख्या से विभाजित करके निकाला जाता है। GNP में विदेश से प्राप्त आय शामिल होती है
    • जबकि GDP केवल घरेलू उत्पादन। यह जीवन स्तर और आर्थिक कल्याण का बेहतर अनुमान देता है
    • विशेषकर विकासशील देशों में। नीति-निर्माताओं द्वारा देशों की तुलना और विकास रुझानों के आकलन के लिए इसका उपयोग प्रमुख है।​
  • अन्य प्रमुख संकेतक
    • समष्टि प्रदर्शन के लिए मुद्रास्फीति दर (CPI/PPI), बेरोजगारी दर, व्यापार संतुलन और राष्ट्रीय आय भी महत्वपूर्ण हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, कम बेरोजगारी पूर्ण रोजगार की ओर इशारा करती है।
    • ये संकेतक मिलकर व्यापार चक्र (उत्थान-मंदी) का विश्लेषण सक्षम बनाते हैं।
  • भारतीय संदर्भ
    • भारत में GDP विकास दर (वर्तमान में 6-7% वार्षिक) मुख्य संकेतक है, RBI और NSO द्वारा जारी।
    • प्रति व्यक्ति GNP विश्व बैंक के वर्गीकरण के लिए उपयोगी।
    • ये संकेतक सरकारी नीतियों जैसे बजट, मौद्रिक नीति को निर्देशित करते हैं।​

18. इनमें से कौन-सी स्थिति MFIs की अधिक संसाधनों को आकर्षित करने और अपने ग्राहकों के लिए सेवाओं का विस्तार करने की क्षमता को बढ़ाती है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) वित्तीय रूप से व्यवहार्य और आत्मनिर्भर एमएफआई
Solution:
  • समष्टि अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र की एक शाखा है, जो समग्र अर्थव्यवस्था के व्यवहार का अध्ययन करती है
  • जिसमें बाजार, व्यवसाय, उपभोक्ता और सरकारें शामिल हैं। यह मुद्रास्फीति, मूल्य स्तर, आर्थिक वृद्धि दर, राष्ट्रीय आय
  • सकल घरेलू उत्पाद और बेरोजगारी में बदलाव जैसी घटनाओं की जांच करता है।
  • समष्टि आर्थिक प्रदर्शन का सामान्यतः सर्वाधिक उपयोग प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद है।
  • वित्तीय रूप से व्यवहार्य (Financially Viable) होना MFIs की संसाधन आकर्षण और सेवा विस्तार क्षमता को सबसे अधिक बढ़ाता है।​
  • क्यों वित्तीय व्यवहार्यता महत्वपूर्ण है
    • वित्तीय रूप से व्यवहार्य MFIs निवेशकों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण व इक्विटी आसानी से आकर्षित कर पाती हैं।
    • इससे उनका पूंजी आधार मजबूत होता है
    • जो नए ग्राहकों तक सेवाओं (जैसे सूक्ष्म ऋण, बचत, बीमा) का विस्तार करने में मदद करता है।
    • आत्मनिर्भर MFIs अपने लाभ को पुनर्निवेश कर ऑपरेशन बढ़ा सकती हैं बिना बाहरी निर्भरता के।​
  • विस्तृत लाभ और उदाहरण
    • निवेश आकर्षण: व्यवहार्य MFIs को निजी इक्विटी और विदेशी फंड्स मिलते हैं, जैसे 2007 में भारत में 35 अरब रुपये की वृद्धि।​
    • सेवा विस्तार: लाभ से नए क्षेत्रों (ग्रामीण महिलाओं तक) पहुंच, SHG-Bank लिंकेज बढ़ाना।
    • जोखिम न्यूनीकरण: कम NPA दरें बैंकों का भरोसा बढ़ाती हैं, PMMY जैसी योजनाओं से एकीकरण आसान।​
    • दीर्घकालिक प्रभाव: ई-शक्ति जैसी डिजिटल पहलें व्यवहार्य MFIs ही सफलतापूर्वक चला पाती हैं, पारदर्शिता से अधिक फंड।​
  • चुनौतियाँ और समाधान
    • अन्य स्थितियाँ जैसे अत्यधिक कर्ज या OTF संकट (2010 आंध्र प्रदेश) संसाधनों को घटाते हैं।
    • समाधान: MFIN मानदंड अपनाना, जोखिम मूल्यांकन मजबूत करना।
    • वर्तमान में (2026), जेंडर-लेंस निवेश व्यवहार्य महिला-केंद्रित MFIs को प्राथमिकता दे रहे हैं।
    • यह स्थिति MFIs को गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन में सशक्त बनाती है।

19. इनमें से कौन-सी स्थिति MFIs की अधिक संसाधनों को आकर्षित करने और अपने ग्राहकों के लिए सेवाओं का विस्तार करने की क्षमता को बढ़ाती है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) वित्तीय रूप से व्यवहार्य और आत्मनिर्भर एमएफआई
Solution:
  • MFIs एक प्रकार की बैंकिंग सेवा है, जो कम आय वाले उन व्यक्तियों या समूहों को प्रदान की जाती है
  • जिनकी पहुंच उन वित्तीय सेवाओं तक नहीं होती।
  • वित्तीय रूप से व्यवहार्य और आत्मनिर्भर एमएफआई (MFIs) की अधिक संसाधनों को आकर्षित करने और अपने ग्राहकों के लिए सेवाओं का विस्तार करने की क्षमता को बढ़ाती है।
  • वित्तीय व्यवहार्यता क्यों महत्वपूर्ण है?
    • वित्तीय रूप से व्यवहार्य MFIs निवेशकों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं का विश्वास जीत लेती हैं
    • क्योंकि वे लाभदायक संचालन दिखाती हैं। इससे उन्हें बड़े ऋण, इक्विटी निवेश और अनुदान आसानी से मिलते हैं
    • जो नए क्षेत्रों में विस्तार या ग्राहक आधार बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होते हैं।
    • आत्मनिर्भर MFIs अपने लाभ को पुनर्निवेश करके बिना बाहरी सहायता के सेवाओं का विस्तार कर सकती हैं, जैसे बचत खाते, बीमा या डिजिटल लोन जोड़ना।​
  • अन्य स्थितियों से तुलना
    • उच्च ब्याज दरें: ये अल्पकालिक लाभ दे सकती हैं, लेकिन ओवर-इंडेब्टेडनेस का जोखिम बढ़ाती हैं, जो संसाधनों को भगाने का कारण बनता है।
    • सरकारी सब्सिडी: ये अस्थायी मदद देती हैं, लेकिन लंबे समय में निर्भरता बढ़ाती हैं और बाजार प्रतिस्पर्धा कमजोर करती हैं।
    • समूह उधार मॉडल: जोखिम कम करता है, लेकिन संसाधन आकर्षण के लिए पर्याप्त नहीं; वित्तीय स्थिरता ही मुख्य चालक है।
  • विस्तार के व्यावहारिक उदाहरण
    • भारत में Bandhan Bank जैसी MFIs ने व्यवहार्यता से बड़े पैमाने पर विस्तार किया
    • ग्रामीण महिलाओं को लक्षित कर ऋण पुस्तिका 35 बिलियन रुपये तक बढ़ाई।
    • ई-शक्ति जैसी डिजिटल पहलें पारदर्शिता बढ़ाकर बैंकों से अधिक फंडिंग आकर्षित करती हैं।
    • जेंडर-लेंस निवेश भी व्यवहार्य MFIs को प्राथमिकता देते हैं।

20. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण [NFHS-V (2019-2021)] में स्वसूचित (self-reported) गोइटर या थायरॉयड विकार की व्यापकता क्या थी? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) 2.9%
Solution:
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-V (2019-21) में स्व-रिपोर्ट की गई घेघा या थायरॉयड विकार की व्यापकता 2.9 प्रतिशत थी, NFHS-IV (2015-16) में यह 2.2 प्रतिशत थी।
  • लिंग-आधारित अंतर
    • महिलाओं में यह व्यापकता अधिक थी, लगभग 2.7%, जबकि पुरुषों में 0.5%।
    • NFHS-IV में महिलाओं के लिए 2.2% और पुरुषों के लिए 0.5% दर्ज किया गया था।
    • आयु के साथ महिलाओं में यह बढ़ती जाती है, जैसे 15-19 वर्ष में 0.7%, 20-34 वर्ष में 1.8%, और 35-49 वर्ष में 3.4%।
  • राज्यवार विवरण
    • कुछ राज्यों में यह औसत से अधिक था, जैसे केरल (8.7%), दिल्ली (7.6%)।
    • वहीं, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश आदि में NFHS-V में कमी देखी गई।
    • पूर्ण राज्यवार डेटा NFHS आधिकारिक रिपोर्ट में उपलब्ध है।​
  • कारण और संदर्भ
    • आयोडीन सप्लीमेंटेशन के कारण ऑटोइम्यून थायरॉयड डिसफंक्शन में वृद्धि संभव है
    • जो थायरॉयड ग्रंथि को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संवेदनशील बनाता है।
    • भारत आयोडीन की कमी से पूर्णता की ओर अग्रसर है। यह स्वसूचित डेटा है, जो नैदानिक जांच पर आधारित नहीं।
  • NFHS की पृष्ठभूमि
    • NFHS-V भारत में जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण पर डेटा एकत्र करता है।
    • इसमें महिलाओं और पुरुषों से स्व-रिपोर्टेड स्वास्थ्य स्थितियों की जानकारी ली गई। आधिकारिक स्रोत: rchiips.org।