विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-I

Total Questions: 50

21. अंतिम वस्तुएं कितने वर्गों में विभाजित होती हैं? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) उपभोग वस्तुएं और पूंजीगत वस्तुएं
Solution:
  • अंतिम वस्तुओं को उन वस्तुओं के रूप में जाना जाता है, जिन्हें आगे की प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है।
  • इन वस्तुओं को उपभोक्ता वस्तुओं के रूप में भी जाना जाता है
  • इनका उत्पादन अंतिम उपभोक्ता द्वारा प्रत्यक्ष उपभोग के उद्देश्य से किया जाता है।
  • अंतिम वस्तुओं को दो वर्गों में विभाजित किया गया है-उपभोग वस्तुएं एवं पूंजीगत वस्तुएं।
  • इसके उदाहरण हैं-कपड़ा, एयर कंडीशनर तथा रेफ्रीजरेटर आदि।
  • अंतिम वस्तुओं की परिभाषा
    •  इनकी कीमत को राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल किया जाता है, क्योंकि ये अर्थव्यवस्था का अंतिम चरण दर्शाती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, एक कार यदि व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदी जाती है तो अंतिम वस्तु है
    • लेकिन यदि फैक्टरी में मशीनरी के उत्पादन के लिए इस्तेमाल हो तो मध्यवर्ती वस्तु।​​
  • वर्गीकरण का आधार
    • अंतिम वस्तुओं को उनके उपयोग के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा जाता है।
    • यह वर्गीकरण राष्ट्रीय आय लेखांकन (National Income Accounting) में महत्वपूर्ण है
    • क्योंकि इससे GDP की सही गणना होती है।
    • मध्यवर्ती वस्तुओं (जैसे कच्चा माल या पुनर्विक्रय के लिए खरीदी गई वस्तुएं) को इससे अलग रखा जाता है।​​
  • पहला वर्ग: उपभोग वस्तुएं
    • ये वस्तुएं घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं की तत्काल संतुष्टि के लिए खरीदी जाती हैं।
  • उप-प्रकार:
    • टिकाऊ वस्तुएं (Durable Goods): लंबे समय तक चलने वाली, जैसे फ्रिज, टीवी, कार (व्यक्तिगत उपयोग के लिए)।
    • अर्ध-टिकाऊ वस्तुएं (Semi-Durable Goods): मध्यम अवधि की, जैसे कपड़े, जूते।
    • एकल-उपयोग वस्तुएं (Non-Durable Goods): एक बार इस्तेमाल, जैसे भोजन, दवाइयां।
    • सेवाएं (Services): जैसे डॉक्टर की फीस, बस यात्रा।
    • ये वस्तुएं मानवीय उपभोग पर केंद्रित होती हैं
    • इनका मूल्य उपभोक्ता खर्च (Consumption Expenditure) में जुड़ता है।​
  • दूसरा वर्ग: पूंजीगत वस्तुएं
    • ये वस्तुएं उत्पादकों (फर्मों) द्वारा अन्य वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन के लिए खरीदी जाती हैं।
    • उदाहरण: मशीनरी, उपकरण, फैक्टरी भवन, ट्रक।
    • विशेषता: ये स्थायी पूंजी (Fixed Capital) का हिस्सा बनती हैं और कई वर्षों तक उत्पादन प्रक्रिया में योगदान देती हैं।
    • महत्व: इनकी खरीद को निवेश (Investment Expenditure) माना जाता है
    • जो अर्थव्यवस्था की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
    • एक टैक्सी चालक द्वारा टैक्सी के रूप में खरीदी गई कार पूंजीगत वस्तु है।​​
  • महत्वपूर्ण अंतर और उदाहरण
    • एक ही वस्तु के दो रूप: गेहूं का आटा यदि घर में रोटी बनाने के लिए खरीदा जाए
    • तो उपभोग वस्तु, लेकिन बेकरी में ब्रेड बनाने के लिए तो मध्यवर्ती वस्तु। इसी तरह, कार व्यक्तिगत उपयोग में उपभोग वस्तु, लेकिन टैक्सी व्यवसाय में पूंजीगत।
    • मध्यवर्ती vs अंतिम: मध्यवर्ती वस्तुएं (कच्चा माल, पुनर्विक्रय वस्तुएं) उत्पादन में इस्तेमाल होती हैं और GDP में दोबारा गणना से बचने के लिए बाहर रखी जाती हैं।​
    • राष्ट्रीय आय में भूमिका: केवल अंतिम वस्तुओं का मूल्य जोड़ा (Value Added) GDP में शामिल होता है, जिससे डबल काउंटिंग टलती है।​
  • आगे की जानकारी
    • कभी-कभी उपभोग वस्तुओं को और बारीकी से वर्गीकृत किया जाता है, लेकिन मूल रूप से दो मुख्य वर्ग ही मान्य हैं।
    • भारतीय संदर्भ में NCERT कक्षा 12 अर्थशास्त्र या UGC NET/PGT परीक्षाओं में यही वर्गीकरण पढ़ाया जाता है।
    • यदि अर्थव्यवस्था के क्षेत्रीय दृष्टिकोण से देखें तो घरेलू क्षेत्र में उपभोग वस्तुएं प्रमुख होती हैं
    • जबकि उत्पादक क्षेत्र में पूंजीगत। यह वर्गीकरण मौद्रिक और वास्तविक प्रवाह को समझने में सहायक है।

22. सार्वजनिक वस्तुओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) लोगों द्वारा सार्वजनिक वस्तुओं का उपभोग प्रकृति में प्रतिद्वंद्वात्मक होता है।
Solution:
  • सार्वजनिक वस्तुएं वे हैं, जो प्रकृति में गैर-बहिष्कृत और गैर-प्रतिद्वंद्वी हैं।
  • लोगों द्वारा सार्वजनिक वस्तुओं का उपभोग गैर-प्रतिद्वंद्वी के रूप में किया जाता है। अतः विकल्प (b) गलत कथन है। शेष अन्य कथन सत्य हैं।
  • सार्वजनिक वस्तुओं की परिभाषा
    •  गैर-बहिष्करणीयता का अर्थ है कि किसी व्यक्ति को इनके उपयोग से बाहर करना व्यावहारिक रूप से असंभव या बहुत महँगा होता है
    • जबकि गैर-प्रतिद्वंद्विता का मतलब है कि एक व्यक्ति का उपभोग दूसरे व्यक्ति के उपभोग को कम नहीं करता।
    • उदाहरणस्वरूप, राष्ट्रीय रक्षा या स्ट्रीट लाइट्स जैसी सेवाएँ सभी को समान रूप से उपलब्ध होती हैं।
  • सामान्य कथनों का विश्लेषण

    • ऐसे प्रश्नों में सामान्यतः चार कथन दिए जाते हैं, जिनमें से एक गलत होता है।
    • मान लीजिए निम्नलिखित कथन हैं (जैसा कि मानक MCQ में पाया जाता है):
    • सामान्यतः सार्वजनिक वस्तुएं सरकार द्वारा प्रदान की जाती हैं—यह सत्य है
    • क्योंकि निजी बाजार इनका उत्पादन "मुफ्त सवारी समस्या" (free-rider problem) के कारण नहीं कर पाता।​
    • लोगों द्वारा सार्वजनिक वस्तुओं का उपभोग प्रकृति में प्रतिद्वंद्वितापूर्ण है—यह गलत है
    • क्योंकि सार्वजनिक वस्तुओं का उपभोग गैर-प्रतिद्वंद्वी होता है; एक का उपयोग दूसरे को प्रभावित नहीं करता।​
    • प्रत्येक व्यक्ति से सार्वजनिक वस्तुओं के लिए शुल्क वसूल करना आसान नहीं है
    • यह सत्य है, क्योंकि गैर-बहिष्करणीयता के कारण भुगतान न करने वाले भी लाभ ले लेते हैं।​
    • सार्वजनिक वस्तुएँ प्रकृति में गैर-बहिष्करणीय हैं—यह सत्य है, जो इनकी मूल परिभाषा का हिस्सा है।​
  • गलत कथन का विस्तृत स्पष्टीकरण

    • दूसरा कथन—"लोगों द्वारा सार्वजनिक वस्तुओं का उपभोग प्रकृति में प्रतिद्वंद्वितापूर्ण है"—स्पष्ट रूप से गलत है।
    • प्रतिद्वंद्विता (rivalrous) का अर्थ है कि उपभोग सीमित संसाधन को घटा देता है
    • जैसे कि एक सेब खाने से वह दूसरे के लिए उपलब्ध न रहे। लेकिन सार्वजनिक वस्तुओं में ऐसा नहीं होता
    • जैसे, आपका स्ट्रीट लाइट का उपयोग मेरे उपयोग को कम नहीं करता। यह भ्रम निजी वस्तुओं (जैसे भोजन) से आता है
    • जो प्रतिद्वंद्वी होती हैं। यदि यह कथन सही मान लिया जाए
    • तो सार्वजनिक वस्तुएँ निजी वस्तुओं में बदल जाएँगी, जो परिभाषा के विरुद्ध है।
  • सार्वजनिक वस्तुओं के उदाहरण और महत्व
    • उदाहरण: राष्ट्रीय सुरक्षा (सभी नागरिक सुरक्षित रहते हैं
    • बिना अलग भुगतान के), स्वच्छ वायु, या सार्वजनिक पार्क (एक का उपयोग दूसरे को सीमित नहीं करता)।
    • ये बाजार विफलता को दर्शाती हैं, जहाँ सरकार हस्तक्षेप करती है। भारत में उदाहरण हैं
    • सार्वजनिक सड़कें या बाढ़ चेतावनी प्रणाली। इनके बिना सामाजिक कल्याण प्रभावित होता।

23. 1995 में भूतल परिवहन मंत्रालय के तहत किस स्वायत्त निकाय का संचालन किया गया था? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
Solution:
  • NHAI भारत सरकार के सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है।
  • इसे राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए एक केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया गया।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1988 में संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई थी, लेकिन यह वर्ष 1995 से क्रियाशील हुआ।
  • NHAI की स्थापना
    •  यह भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय (वर्तमान में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) के अधीन एक वैधानिक स्वायत्त निकाय है।
    • 1995 में भूतल परिवहन मंत्रालय के पुनर्गठन के दौर में NHAI को राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास-प्रबंधन का जिम्मा सौंपा गया।
  • मुख्य कार्य और जनादेश
    • NHAI का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) का विकास, रखरखाव और प्रबंधन करना है
    • जो देश की कुल सड़क लंबाई का मात्र 2% हैं लेकिन 40% यातायात वहन करते हैं।
    • 70,000 किमी+ NH नेटवर्क का प्रबंधन, जिसमें उच्च गति यातायात के लिए डिज़ाइन की गई सड़कें शामिल हैं।​
    • राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP) का कार्यान्वयन, जैसे स्वर्णिम चतुर्भुज जो दिल्ली-मुंबई-चेन्नई-कोलकाता को जोड़ता है
    • उत्तर-दक्षिण/पूर्व-पश्चिम गलियारे।
    • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल से परियोजनाएं, जैसे BOT (Build-Operate-Transfer) अनुबंध।
    • केंद्र सरकार से बजटीय सहायता के अलावा टोल संग्रह से फंडिंग।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1995 से पहले भूतल परिवहन मंत्रालय (1986 से नामित) सड़क परियोजनाओं का सीधा प्रबंधन करता था
    • लेकिन NHAI ने इसे स्वायत्त बनाकर गति दी। NHDP के पहले चरण की स्वीकृति 2000 में हुई
    • लागत ₹30,000 करोड़), जिसमें प्रमुख बंदरगाहों का NH से कनेक्शन शामिल था।
    • आज NHAI ने 1.5 लाख किमी+ NH का विस्तार किया है
    • जिसमें हाईवे परियोजनाओं में AI और टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है।

24. निम्नलिखित में से किसे प्रवाह चर का उदाहरण माना जा सकता है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

(i) चावल का उत्पादन

(ii) कपड़े का आयात

(ii) पूंजी में परिवर्तन

Correct Answer: (b) (i), (ii) और (iii) सभी
Solution:
  • प्रवाह चर एक मात्रा है, जिसे एक निर्दिष्ट अवधि में मापा जाता है।
  • यह एक निश्चित अवधि में किसी विशेष चर के परिवर्तन की दर को संदर्भित करता है।
  • प्रवाह चर को मात्रा या मौद्रिक मूल्य के संदर्भ में मापा जा सकता है। प्रवाह परिवर्तन के उदाहरण हैं
  • चावल का उत्पादन, कपड़े का आयात और पूंजी में परिवर्तन आदि।
  • प्रवाह चर की परिभाषा
    • प्रवाह चर वह आर्थिक चर है जिसकी मात्रा को किसी विशिष्ट समयावधि में मापा जाता है
    • जैसे प्रति घंटा, प्रतिदिन, प्रति वर्ष। उदाहरणस्वरूप, नदी का जलप्रवाह प्रति सेकंड क्यूबिक मीटर में मापा जाता है
    • जो समय के साथ जुड़ा होता है । यह स्टॉक से भिन्न है, क्योंकि स्टॉक (जैसे टैंक में पानी की मात्रा) किसी निश्चित समय बिंदु पर स्थिर होती है
    • जबकि प्रवाह निरंतर परिवर्तन दर्शाता है ।
  • प्रवाह चर के सामान्य उदाहरण
    • प्रवाह चर के प्रमुख उदाहरणों में शामिल हैं:
    • उत्पादन: चावल का उत्पादन प्रति वर्ष टन में मापा जाता है, क्योंकि यह समय अवधि पर निर्भर है ।​
    • आयात-निर्यात: कपड़े का आयात या खाद्यान्न का निर्यात किसी वित्तीय वर्ष में होता है ।​
    • पूंजीगत परिवर्तन: पूंजी में वृद्धि या कमी एक अवधि में मापी जाती है।
    • अन्य: राष्ट्रीय आय (GDP), व्यय, निवेश, बचत—all प्रति वर्ष आधारित ।​
    • इनमें से चावल उत्पादन, कपड़े आयात और पूंजी परिवर्तन सभी प्रवाह चर हैं, क्योंकि इन्हें समय के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है ।​
  • पूंजी में परिवर्तन: क्यों प्रवाह?
    • पूंजी स्टॉक (किसी समय पर कुल पूंजी) लगती है, लेकिन "पूंजी में परिवर्तन" (जैसे पूंजी निर्माण या ह्रास) एक अवधि में होता है
    • अतः प्रवाह है। उदाहरण: एक वर्ष में 100 करोड़ की नई मशीनरी—यह स्टॉक नहीं, बल्कि प्रवाह है ।​
  • महत्वपूर्णता अर्थशास्त्र में
    • प्रवाह चर समष्टि अर्थशास्त्र (मैक्रोइकोनॉमिक्स) में राष्ट्रीय आय लेखांकन के आधार हैं।
    • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) एक प्रवाह है, जो एक वर्ष की वस्तुओं-सेवाओं को मापता है।
    • स्टॉक-प्रवाह असंतुलन (जैसे उच्च बचत से धन संचय) आर्थिक नीतियों को प्रभावित करता है।
    • भारत जैसे देशों में, जहां कृषि उत्पादन मौसमी है, प्रवाह चर नीति-निर्माण के लिए crucial हैं ।
  • वास्तविक जीवन उदाहरण
    • कल्पना कीजिए एक पानी की टंकी: टंकी में पानी (स्टॉक) 31 दिसंबर को 1000 लीटर है।
    • नल से प्रति मिनट 10 लीटर पानी आना (प्रवाह) स्टॉक को बढ़ाता है।
    • इसी तरह, मासिक वेतन (प्रवाह) बैंक बैलेंस (स्टॉक) बनाता है ।
    • अर्थव्यवस्था में, सरकारी व्यय (प्रति बजट वर्ष) ऋण स्टॉक को प्रभावित करता है।​
    • यह विस्तृत व्याख्या स्पष्ट करती है
    • प्रश्न के संदर्भ में चावल उत्पादन, कपड़े आयात और पूंजी परिवर्तन सभी प्रवाह चर हैं—कोई एक नहीं, बल्कि सभी ।​

25. किस केंद्रीय बजट में 'राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष' (NIIF) नामक भारत के पहले संप्रभु धन कोष की घोषणा की गई थी ? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) 2015-16
Solution:
  • एनआईआईएफ की स्थापना के विचार को भारत के तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जटेली ने केंद्रीय बजट 2015-16 में संदर्भित किया था।
  • यह देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र को दीर्घकालिक पूंजी प्रदान करने के लिए स्थापित एक सरकार समर्थित इकाई है।
  • इसका मुख्यालय मुंबई में है। इसका उद्देश्य अवसंरचना परियोजनाओं को वित्तपोषण प्रदान करना है, जिसमें रुकी हुई परियोजनाएं भी शामिल हैं।
  • घोषणा का वर्ष और संदर्भ
    • राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) की घोषणा केंद्रीय बजट 2015-16 में फरवरी 2015 में की गई।
    • यह भारत का पहला संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Fund) है, जिसका लक्ष्य बुनियादी ढांचे की कमियों को पूरा करना था।
    • सरकार ने शुरुआत में ₹20,000 करोड़ आवंटित किए, जो बाद में ₹40,000 करोड़ तक बढ़ा।
  • NIIF का उद्देश्य
    • NIIF का मुख्य लक्ष्य घरेलू और विदेशी निवेशकों से पूंजी आकर्षित कर अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश करना है।
    • यह SEBI के तहत श्रेणी II वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) के रूप में दिसंबर 2015 में पंजीकृत हुआ।
    • फंड व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं पर फोकस करता है
    • जैसे राजमार्ग, नवीकरणीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स, ताकि आर्थिक विकास को गति मिले।
  • संरचना और घटक
    • NIIF में मुख्य रूप से मास्टर फंड, फंड ऑफ फंड्स और रणनीतिक निवेश फंड (SIF) शामिल हैं।
    • मास्टर फंड विभिन्न क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष निवेश करता है।
    • SIF प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश पर केंद्रित है।​
    • यह वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के अधीन कार्य करता है।
  • महत्वपूर्ण उपलब्धियां
    • NIIF ने अब तक अनेक निवेश किए, जैसे नवीकरणीय ऊर्जा और शहर आधारित परियोजनाओं में।​
    • अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) इसका पहला बड़ा संस्थागत निवेशक बना।​
    • यह बैंकिंग क्षेत्र की बाधाओं को दूर कर निजी पूंजी को अवसंरचना में लाने का सेतु है।

26. शुद्ध निवेश व मूल्यह्रास का योग निम्नलिखित में से क्या कहलाता है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सकल निवेश
Solution:
  • सकल निवेश पूंजीगत सामान खरीदने या मूल्यह्रास की गणना किए बिना एक समय अवधि में पूंजीगत स्टॉक में जोड़ने के लिए किया गया कुल व्यय है।
  • सकल निवेश = शुद्ध निवेश + मूल्यह्रास
  • सकल निवेश की परिभाषा
    • सकल निवेश एक निश्चित अवधि, जैसे एक वर्ष, में नई पूंजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी, भवन आदि) पर किया गया कुल व्यय है।
    • इसमें पुरानी संपत्तियों के मूल्यह्रास को शामिल किया जाता है, क्योंकि मूल्यह्रास वह राशि है
    • जो संपत्तियों की घिसावट, टूट-फूट या अप्रचलन के लिए आरक्षित की जाती है।
    • शुद्ध निवेश पूंजी स्टॉक में वास्तविक वृद्धि दर्शाता है, जबकि सकल निवेश = शुद्ध निवेश + मूल्यह्रास।
  • शुद्ध निवेश क्या है?
    • शुद्ध निवेश सकल निवेश से मूल्यह्रास घटाने पर प्राप्त होता है, जो अर्थव्यवस्था में पूंजी स्टॉक की शुद्ध वृद्धि को मापता है।
    • यह उत्पादक संपत्तियों पर वास्तविक अतिरिक्त निवेश को दर्शाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि कोई कंपनी 100 करोड़ का सकल निवेश करती है और मूल्यह्रास 20 करोड़ है, तो शुद्ध निवेश 80 करोड़ होगा।
  • मूल्यह्रास की अवधारणा
    • मूल्यह्रास पूंजीगत संपत्तियों के उपयोग, समय बीतने या अप्रचलन के कारण मूल्य में कमी है।
    • यह सकल निवेश का हिस्सा बनता है ताकि पुरानी संपत्तियों को बदलने के लिए धन उपलब्ध रहे। इससे अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता बनी रहती है।
  • आर्थिक महत्व
    • सकल निवेश राष्ट्रीय आय लेखांकन में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह GDP के निवेश घटक को प्रभावित करता है।
    • उच्च सकल निवेश आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है, जबकि नकारात्मक शुद्ध निवेश मंदी का संकेत हो सकता है।
    • भारत जैसे विकासशील देशों में सरकारें सकल निवेश बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे पर व्यय करती हैं।

27. वर्ष 2020-21 के लिए वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (मौजूदा कीमतों पर) में किस क्षेत्र के माल निर्यात का प्रतिशत हिस्सा अधिकतम था ? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) इंजीनियरिंग वस्तुओं
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में से वर्ष 2020-21 के लिए वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (मौजूदा कीमतों पर) में माल निर्यात का सबसे अधिक प्रतिशत हिस्सा इंजीनियरिंग वस्तुओं का था।
  • आर्थिक सर्वेक्षण, 2023-24 के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024 में वस्तुगत निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 109.3 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंच गया
  • जो 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है
  • इंजीनियरिंग सामान का प्रभुत्व
    • इंजीनियरिंग गुड्स में मशीनरी, विद्युत उपकरण, ऑटोमोबाइल वाहन और उनके पार्ट्स शामिल हैं
    • जिनकी वैश्विक मांग मजबूत रही। कोविड-19 महामारी के बावजूद इस क्षेत्र ने निर्यात में स्थिरता दिखाई
    • जिससे जीडीपी में इसका योगदान सबसे ऊंचा रहा।​
  • अन्य प्रमुख क्षेत्र
    • इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाएं एवं फार्मास्यूटिकल्स, तथा कार्बनिक-अकार्बनिक रसायन भी महत्वपूर्ण निर्यातक थे, लेकिन इंजीनियरिंग की तुलना में कम।
    • कुल माल निर्यात में गिरावट आई (लगभग 15-20%), पर इंजीनियरिंग ने नेतृत्व बनाए रखा।
  • आर्थिक संदर्भ
    • 2020-21 में भारत की जीडीपी में कुल संकुचन (-7.2% GVA) के बीच निर्यात सरकारी उपभोग और कृषि के साथ विकास का सहारा बने।
    • सेवा निर्यात लचीला रहा, लेकिन माल निर्यात में इंजीनियरिंग का हिस्सा प्रमुख था।​

28. भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 में उल्लेख के अनुसार, आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 के तहत अधिसूचित कितनी केंद्रीय योजनाओं के सामाजिक वितरण के लिए आधार (Aadhaar) एक आवश्यक टूल है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) 318
Solution:
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार, आधार अधिनियम 2016 की धारा 7 के तहत अधिसूचित 318 केंद्रीय योजनाओं के सामाजिक वितरण के लिए आधार एक आवश्यक उपकरण है।
  • इसका अर्थ यह है कि इन योजनाओं के लिए आधार प्रमाणीकरण आवश्यक होता है।
  • आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 का महत्व
    •  वह ऐसी कोई सब्सिडी, लाभ या सेवा जो सरकारी प्राधिकरण द्वारा वित्त पोषित हो
    • प्रदान करने के लिए आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य कर सके। यह धारा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है
    • जिससे कल्याणकारी योजनाओं में लीकेज, भ्रष्टाचार और डुप्लिकेट लाभार्थियों को रोका जा सके।
    • आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 इसकी सफलता को रेखांकित करता है, जहां आधार ने सरकारी सब्सिडी वितरण को पारदर्शी और कुशल बनाया है।
  • अधिसूचित योजनाओं की संख्या और विस्तार
    • आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 (वॉल्यूम 1, अध्याय आधार-केंद्रित सुशासन पर) स्पष्ट रूप से बताता है
    • धारा 7 के तहत 318 केंद्रीय योजनाएं अधिसूचित हैं
    • जिनमें आधार का उपयोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), मनरेगा मजदूरी भुगतान, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय सुरक्षा बीमा योजना जैसी योजनाओं के लाभार्थी प्रमाणीकरण के लिए अनिवार्य है।
    • ये योजनाएं मुख्य रूप से सामाजिक कल्याण, गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन से जुड़ी हैं।
    • UIDAI के अनुसार, यह संख्या समय के साथ बढ़ी है—2019-20 में यह 304 थी
    • जो 2022-23 तक 318 हो गई, जिससे DBT के माध्यम से अरबों रुपये की बचत हुई।
  • आधार के उपयोग से लाभ
    • पारदर्शिता बढ़ी: आधार प्रमाणीकरण से डुप्लिकेट और फर्जी लाभार्थियों का सफाया हुआ, जैसे PDS में 3-4 करोड़ फर्जी कार्ड हटाए गए।
    • DBT की सफलता: 2022-23 तक आधार-आधारित DBT से ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक की बचत हुई
    • जो केंद्रीय योजनाओं में रिसाव को 20-30% तक कम करती है।
    • वित्तीय समावेशन: 68 करोड़ से अधिक बैंक खाते आधार से जुड़े, जिससे ग्रामीण और गरीब वर्ग को प्रत्यक्ष लाभ मिला।
  • चुनौतियां और सुधार
    • हालांकि, सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख है कि आधार की अनिवार्यता से कुछ वंचित वर्ग (जैसे बुजुर्ग या दूरस्थ क्षेत्रों के लोग) प्रभावित हुए
    • इसलिए वैकल्पिक प्रमाणीकरण (जैसे राशन कार्ड या वोटर आईडी) की अनुमति दी गई है।
    • UIDAI ने 2020 के नियमों में सुधार किए, जिसमें धारा 7 के तहत अधिसूचना से पहले प्रभाव मूल्यांकन अनिवार्य किया गया।
    • 2026 तक यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि नई योजनाएं जैसे PM Garib Kalyan Anna Yojana में आधार अनिवार्य है

29. स्वयं सहायता समूह में, ऋण और बचत संबंधी निर्णय ....... द्वारा लिए जाते हैं। [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) समूह के सदस्यों
Solution:
  • स्वयं सहायता समूह कुछ ऐसे लोगों का एक अनौपचारिक संगठन होता है
  • जो अपने रहन-सहन की परिस्थितियों में सुधार करने के लिए स्वेच्छा से एक साथ आते हैं।
  • स्वयं सहायता समूह के सदस्य सामूहिक रूप से ऋण और बचत के संबंध में अधिकांश निर्णय खुद ही लेते हैं।
  • समूह के सदस्यों द्वारा ही ऋण के नियम और शर्त, पुनर्भुगतान अनुसूची, ब्याज दर और ऋण का उद्देश्य तय किया जाता है।
  • स्वयं सहायता समूह क्या है?
    • जो समान सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। यह समूह आपसी विश्वास, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी पर आधारित होता है
    • खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए। सदस्य नियमित बैठकें करते हैं
    • जहां बचत जमा करते हैं और आंतरिक ऋण का वितरण करते हैं।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया
    • समूह के सदस्य ही ऋण और बचत के सभी प्रमुख फैसले सामूहिक रूप से लेते हैं, जैसे:
    • बचत संबंधी: बचत की राशि (सामान्यत: ₹50-₹100 प्रति सदस्य मासिक), बचत की आवृत्ति (साप्ताहिक/मासिक), और बचत का उपयोग (आपातकालीन निधि या समूह कोष)।​
    • ऋण संबंधी: ऋण की राशि, ब्याज दर (सामान्यत: 1-2% मासिक), पुनर्भुगतान अवधि (3-12 माह), ऋण उद्देश्य (व्यवसाय, स्वास्थ्य, शिक्षा), और ऋणदार का चयन।
    • यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक होती है—सभी सदस्य चर्चा करते हैं, बहुमत या सर्वसम्मति से फैसला होता है।
    • बैंक या एनजीओ केवल बाहरी ऋण प्रदान कर सकते हैं, लेकिन आंतरिक नियम सदस्य तय करते हैं।
  • निर्णय लेने के लाभ
    • सहकर्मी दबाव: सदस्यों की सामूहिक गारंटी से डिफॉल्ट दर कम (1-5%) रहती है।​
    • वित्तीय अनुशासन: सदस्य अपनी जरूरतों के आधार पर फैसले लेते हैं, बिना बिचौलियों के।
    • सशक्तिकरण: महिलाओं को निर्णय लेने का अनुभव मिलता है, जो परिवार और समुदाय स्तर पर नेतृत्व विकसित करता है।​

30. भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के संदर्भ में असत्य कथन की पहचान करें। [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) सूक्ष्मवित्त ऋण को उधारकर्ता के जमा खाते पर ग्रहणाधिकार (लियन) के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
Solution:
  • सूक्ष्मवित्त ऋण को लघु ऋण भी कहा जाता है। ये संपार्श्विक- मुक्त ऋण (Collateral Free Loans) है
  • जिसका अर्थ है कि इसमें उधारकर्ता के जमा खाते पर किसी ग्रहणाधिकार की आवश्यकता नहीं होती है। इसीलिए विकल्प (d) गलत है बाकी के विकल्प सही हैं
  • प्रश्न में असत्य कथन की पहचान के लिए, सामान्यतः विकल्पों में से यह कथन गलत माना जाता है
  • "MFIs बिना किसी ब्याज के ऋण प्रदान करती हैं" या "उनकी ब्याज दरें बैंकों से कम होती हैं
  • क्योंकि वास्तव में MFIs की ब्याज दरें (24-36% सालाना) बैंकों से अधिक होती हैं।
  • सूक्ष्म वित्त संस्थाओं की परिभाषा और विशेषताएँ
    • सूक्ष्म वित्त संस्थाएँ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFC-MFIs) या अन्य रूपों में कार्य करती हैं
    • जो ₹1.25 लाख तक के छोटे ऋण बिना संपार्श्विक के देती हैं। मुख्य सेवाएँ: सूक्ष्म ऋण (व्यवसाय/आजीविका के लिए), सूक्ष्म बचत, सूक्ष्म बीमा।
    • ये ग्रामीण/शहरी गरीबों, विशेषकर महिलाओं (90%+ ग्राहक) को लक्षित करती हैं।
    • असत्य कथन: "MFIs केवल ऋण देती हैं, बचत/बीमा नहीं"—यह गलत है, क्योंकि वे सभी सेवाएँ प्रदान करती हैं।
  • विनियमन और संरचना
    • भारत में MFIs का नियमन RBI करता है (2011 Malegam समिति सिफारिशों पर):
    • NBFC-MFIs: अधिकृत पूंजी ₹10 करोड़, ऋण ₹1.25 लाख तक, ब्याज दर ग्राहक-मैत्रीपूर्ण।
    • ब्याज दर: अधिकतम 26% + मार्जिन (लेकिन औसत 24-30%)।
    • असत्य कथन: "MFIs सरकारी संस्थाएँ हैं"—गलत, ये ज्यादातर निजी/NGO-आधारित (बंधन, स्पंदन, उज्जीवन)।
    • RBI के नियम: 50% योग्य संस्थानों (क्वालिफाइंग एसेट्स), 10% अधिकतम ब्याज प्रसार।
    • 2025-26 तक, 200+ MFIs 10 करोड़+ ग्राहकों को सेवाएँ दे रही हैं।
  • लाभ और चुनौतियाँ
    • लाभ: वित्तीय समावेशन (PMJDY के पूरक), 95%+ पुनर्भुगतान दर, महिलाओं का सशक्तिकरण।
    • 2026 तक ₹3 लाख करोड़+ ऋण पोर्टफोलियो।​
  • चुनौतियाँ:
    • उच्च ब्याज से ऋण जाल (over-indebtedness)।
    • असत्य कथन यहाँ फिट: "MFIs गरीबी हमेशा कम करती हैं"—हाँ कम करती हैं, लेकिन अति-ऋणण से कभी नुकसान।​
    • RBI सुधार: डिजिटल KYC, डेटा शेयरिंग (CIBIL)। हरियाणा जैसे राज्यों में SHG-Bank लिंकेज के साथ MFIs सक्रिय।
  • प्रमुख उदाहरण
    • बंधन बैंक: पूर्व MFI, 2 करोड़+ ग्राहक।
    • स्पंदन: JLG मॉडल।
    • ये SHG से भिन्न हैं—SHG सदस्य-प्रबंधित, MFIs पेशेवर। असत्य: "MFIs SHG का ही रूप हैं"—नहीं, स्वतंत्र।