विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-I

Total Questions: 50

31. सितंबर, 2021 में पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के लिए प्रवेश आयु को ....... से बढ़ाकर ....... कर दिया। [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 65 वर्ष; 70 वर्ष
Solution:
  • सितंबर, 2021 में पीएफआरडीए ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में प्रवेश की अधिकतम आयु 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी।
  • भारत का नागरिक, निवासी या अनिवासी और भारत का विदेशी नागरिक (ओसीआई) एनपीएस में शामिल हो सकता है।
  • बदलाव का विवरण
    • इस संशोधन के बाद NPS में शामिल होने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष बनी रही
    • जबकि अधिकतम आयु 70 वर्ष हो गई। 65-70 वर्ष के बीच के भारतीय नागरिक—चाहे निवासी, अनिवासी या OCI
    • ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया)—अब NPS खाता खोल सकते हैं और 75 वर्ष तक निवेश जारी रख सकते हैं।
    • पहले 65 वर्ष की आयु सीमा के कारण कई वरिष्ठ नागरिक इससे वंचित रह जाते थे।
  • निकास और पुन: प्रवेश नियम
    • नए दिशानिर्देशों के तहत, जो व्यक्ति पहले NPS से बाहर निकल चुके हैं
    • वे नई आयु सीमा के अनुरूप अपना खाता फिर से सक्रिय कर सकते हैं।
    • सामान्यतः 60 वर्ष या सुपरएन्यूएशन के बाद निकासी संभव है
    • लेकिन 70 वर्ष तक निवेश जारी रखने का विकल्प दिया गया।
    • इससे सब्सक्राइबर्स को लंबी अवधि तक चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलता है।
  • PFRDA और NPS का परिचय
    • PFRDA एक वैधानिक निकाय है जो वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और NPS को विनियमित, प्रचारित तथा विकसित करता है।
    • NPS एक स्वैच्छिक, पोर्टेबल पेंशन योजना है जिसमें योगदान का 60% एंटी (एन्युटी) के लिए और 40% लंपसम निकासी के लिए उपयोग होता है
    • कुछ अपवादों सहित)। यह सभी नागरिकों—सरकारी, निजी क्षेत्र या स्व-रोजगार—के लिए खुली है।​
  • प्रभाव और महत्व
    • यह बदलाव NPS को अधिक समावेशी बनाता है, खासकर रिटायर व्यक्तियों के लिए जो अतिरिक्त पेंशन सुरक्षा चाहते हैं।
    • PFRDA ने प्रवेश-निकास दिशानिर्देशों को भी अपडेट किया ताकि लचीलापन बढ़े।
    • परिणामस्वरूप, अधिक लोग 70 वर्ष तक योगदान जमा कर पेंशन को मजबूत कर सकते हैं।

32. वर्ष 2021 में, किस वित्तीय संस्थान ने रियायती ब्याज दरों पर 1 करोड़ रु. तक की वित्तीय सहायता के साथ सामाजिक प्रभाव ऋण कार्यक्रम के संचालन के लिए गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GIPL) के साथ साझेदारी की? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सिडबी
Solution:
  • सिडबी ने 1 करोड़ रुपये तक की रियायती ब्याज दर पर वित्तीय सहायता के साथ एक सामाजिक प्रभाव ऋण कार्यक्रम शुरू करने के लिए गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदारी की
  • SIDBI ने GIPL के साथ साझेदारी की।
    • वर्ष 2021 में, छोटे उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) ने गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GIPL) के साथ सामाजिक प्रभाव ऋण कार्यक्रम के लिए साझेदारी की।
    • यह कार्यक्रम MSME क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था
    • जिसमें रियायती ब्याज दरों पर 25 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।​
  • कार्यक्रम का उद्देश्य
    • यह पहल मुख्य रूप से 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को लक्षित करती है।
    • SIDBI द्वारा संचालित इस कार्यक्रम के तहत, योग्य MSME को तकनीकी उन्नयन, डिजिटलीकरण और सामाजिक प्रभाव वाली परियोजनाओं के लिए कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
    • GIPL ने इसकी फंडिंग में योगदान दिया, जबकि SIDBI कार्यान्वयन और वितरण का दायित्व निभा रहा है।​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • ऋण सीमा: न्यूनतम 25 लाख रुपये से अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक।
    • ब्याज दर: बाजार दर से रियायती (सब्सिडी प्राप्त), जिससे MSME की वित्तीय बोझ कम होता है।
    • लक्ष्य क्षेत्र: सामाजिक प्रभाव वाली गतिविधियां जैसे पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन।
    • कार्यान्वयन: SIDBI द्वारा सीधे ऋण वितरण और मॉनिटरिंग, GIPL के वित्तीय समर्थन से।​
  • पृष्ठभूमि और महत्व
    • यह साझेदारी नवंबर 2021 में घोषित हुई, जब भारत में MSME कोविड-19 महामारी के बाद आर्थिक पुनरुद्धार के लिए सहायता की आवश्यकता थी।
    • GIPL जैसी बड़ी टेक कंपनी का एक वित्तीय संस्थान के साथ जुड़ाव ने सामाजिक उद्यमिता को बढ़ावा दिया।
    • इससे हजारों MSME को लाभ मिला, जो रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध हुआ।
    • कार्यक्रम अखिल भारतीय स्तर पर लागू है, जिसमें SIDBI की भूमिका केंद्रीय रही।​
  • अन्य विवरण
    • SIDBI, भारत सरकार के स्वामित्व वाला अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान है
    • जो MSME क्षेत्र के विकास के लिए विशेषज्ञता रखता है।
    • GIPL ने इस कार्यक्रम को अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत समर्थित किया।
    • लंबे समय में, यह ऋण MSME को स्केल-अप करने में मदद करता है
    • बिना उच्च ब्याज के बोझ के। कोई अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थान इस विशिष्ट साझेदारी से जुड़ा नहीं दिखता।​

33. वर्ष 2021 में भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) का कौन-सा संस्करण हुआ? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 40वां
Solution:
  • भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (2021) का 40वां संस्करण 14 से 27 नवंबर तक प्रगति मैदान में आयोजित किया गया था।
  • 42वां संस्करण 14-27 नवंबर, 2023 के मध्य आयोजित किया गया।
  • आयोजन तिथियां और उद्घाटन
    • IITF 2021 14 नवंबर से 27 नवंबर तक चला, जो कोविड-19 के बाद सामान्य व्यापार गतिविधियों को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास था।
    • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसका उद्घाटन किया।
    • मेला बी2बी (व्यवसाय से व्यवसाय) और बी2सी (व्यवसाय से उपभोक्ता) दोनों प्रारूपों पर केंद्रित था
    • जिसमें दक्षिण एशिया के प्रमुख व्यापार मेलों में से एक के रूप में लाखों आगंतुकों ने भाग लिया।
  • मुख्य थीम और उद्देश्य
    • इस संस्करण की थीम "आत्मनिर्भर भारत" थी, जो भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला और जनसांख्यिकीय शक्ति को प्रदर्शित करने पर जोर देती थी।
    • मेला व्यवसाय, निवेश अवसरों, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप्स और SMEs को बढ़ावा देने का मंच बना।
    • ITPO ने मोबाइल ऐप, सांस्कृतिक कार्यक्रम और राज्य दिवस समारोहों जैसे आकर्षण जोड़े, जिससे प्रदर्शक, खरीदार, एनजीओ और मीडिया एक साथ जुड़े।
  • भागीदार राज्य और देश
    • बिहार पार्टनर राज्य था, जबकि उत्तर प्रदेश और झारखंड फोकस राज्य थे।
    • विदेशी भागीदारी अफगानिस्तान, बांग्लादेश, बहरीन, किर्गिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, यूएई, ट्यूनीशिया और तुर्की से आई।
    • विभिन्न हॉलों में उत्पाद श्रेणियां जैसे कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, हैंडीक्राफ्ट्स और मशीनरी प्रदर्शित की गईं
    • जो भारत को वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक रहीं।
  • पृष्ठभूमि और महत्व
    • IITF की शुरुआत 1980 में हुई थी और तब से यह प्रतिवर्ष नवंबर में प्रगति मैदान में आयोजित होता है।
    • 40वां संस्करण विशेष रूप से महत्वपूर्ण था क्योंकि यह महामारी के बाद पहला बड़ा व्यापार आयोजन था
    • जिसने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को गति दी।
    • टिकट मूल्य वीकडेज पर वयस्कों के लिए 80 रुपये और वीकेंड पर 150 रुपये रखे गए
    • जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त प्रवेश मिला, तथा भीड़ नियंत्रण के लिए 35-40 हजार आगंतुकों की सीमा लगाई गई।
    • यह मेला न केवल व्यापारिक अवसर प्रदान करता था बल्कि "एक भारत श्रेष्ठ भारत" की भावना को भी मजबूत करता था।

34. सितंबर, 2021 में 'जिला अस्पतालों के प्रदर्शन में सर्वोत्तम अभ्यास' शीर्षक से नीति आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिला अस्पतालों में औसतन प्रति लाख जनसंख्या पर कितने बिस्तर (बेड) हैं? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 24 बिस्तर
Solution:
  • नीति आयोग ने 'जिला अस्पतालों के प्रदर्शन में सर्वोत्तम अभ्यास' शीर्षक से भारत में जिला अस्पतालों की एक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की।
  • यह रिपोर्ट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ भारत के सहयोग का परिणाम है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, औसतन एक जिला अस्पताल में 1 लाख लोगों के लिए 24 बिस्तर उपलब्ध थे।
  • रिपोर्ट का अवलोकन
    • रिपोर्ट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से तैयार की गई थी
    • 707 जिला अस्पतालों के 2017-18 के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) आंकड़ों पर आधारित है।
    • यह जिला अस्पतालों के प्रदर्शन को बिस्तर उपलब्धता, जांच सुविधाओं, पैरामेडिकल स्टाफ, डॉक्टरों और अन्य संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन करती है।
    • भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (IPHS) 2012 के अनुसार, जिला अस्पतालों में प्रति लाख जनसंख्या पर कम से कम 22 बिस्तर होने चाहिए
    • जो इस औसत के करीब है।
  • राज्य-स्तरीय भिन्नताएं
    • पुडुचेरी में प्रति लाख जनसंख्या पर सबसे अधिक 222 बिस्तर उपलब्ध हैं
    • जबकि बिहार में यह संख्या मात्र 6 बिस्तर तक सीमित है।
    • कुल 217 जिला अस्पतालों में IPHS मानक के अनुरूप कम से कम 22 बिस्तर पाए गए
    • लेकिन 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह 22 से कम है।
    • कम आबादी वाले जिलों में बुनियादी ढांचे का प्रदर्शन बेहतर पाया गया।
  • प्रमुख निष्कर्ष और सिफारिशें
    • रिपोर्ट में बिस्तरों की उपलब्धता के अलावा डॉक्टरों, नर्सों और डायग्नोस्टिक सेवाओं पर भी जोर दिया गया है।
    • कोविड-19 महामारी के दौरान बेड की कमी उजागर हुई थी
    • यह रिपोर्ट सुधार के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को रेखांकित करती है।
    • नीति आयोग ने राज्यों को कमजोर क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की सलाह दी है।
  • पृष्ठभूमि संदर्भ
    • यह आंकड़ा 2001 जनगणना पर आधारित IPHS दिशानिर्देशों से मेल खाता है
    • लेकिन वर्तमान जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए अपर्याप्त है।
    • रिपोर्ट नवाचारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जारी की गई
    • जिसमें कुछ अस्पतालों ने विशेष सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाया।
    • कुल मिलाकर, यह स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता पर बल देती है।

35. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प पूंजीगत प्राप्तियों में शामिल नहीं है? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) कर
Solution:
  • सरकार की ऐसी सभी प्राप्तियां, जिनसे देयता पैदा हो या वित्तीय संपत्तियां कम हों, पूंजीगत प्राप्तियां कहलाती हैं।
  • ये प्राप्तियां ऋण उत्पादक या गैर-ऋण उत्पादक हो सकती है अतः विकल्प (a), (c) और (d) सही हैं तथा पूंजीगत प्राप्तियों में शामिल हैं
  • जबकि विकल्प (b) कर राजस्व प्राप्तियों का हिस्सा है, न कि पूंजीगत प्राप्तियों का।
  • पूंजीगत प्राप्तियों की परिभाषा
    • पूंजीगत प्राप्तियाँ गैर-आवर्ती प्रकृति की होती हैं
    • अर्थात् ये बार-बार नहीं होतीं और इनका उपयोग बड़े पूंजीगत व्यय या राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए किया जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, जब सरकार बाजार से उधार लेती है, RBI या वित्तीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त करती है
    • सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयर बेचती है, तो यह पूंजीगत प्राप्ति मानी जाती है।
    • ये प्राप्तियाँ राजस्व प्राप्तियों से भिन्न होती हैं
    • क्योंकि राजस्व प्राप्तियाँ (जैसे कर) नियमित होती हैं और न तो देनदारी बढ़ाती हैं न ही संपत्ति घटाती हैं।
  • पूंजीगत प्राप्तियों के प्रकार
    • पूंजीगत प्राप्तियों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
    • उधार: घरेलू बाजार से बॉन्ड या ट्रेजरी बिल के माध्यम से, RBI से अधिभोग, या विदेशी ऋण।
    • विनिवेश: सरकारी शेयरों या संपत्तियों (जैसे भूमि, भवन) की बिक्री।
    • ऋण वसूली: राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों या अन्य संस्थाओं को पहले दिए ऋणों का पुनर्भुगतान।
    • विविध पूंजीगत प्राप्तियाँ: जैसे बोनस शेयर या आंतरिक स्रोतों से प्राप्तियाँ।
    • ये सभी प्राप्तियाँ पूंजीगत बजट का हिस्सा बनती हैं और सरकार के वित्तीय घाटे को प्रभावित करती हैं।
  • राजस्व प्राप्तियों से अंतर
    • राजस्व प्राप्तियाँ कर (आयकर, GST), गैर-कर राजस्व (शुल्क, लाभांश), और अनुदान जैसी होती हैं
    • जो दैनिक संचालन के लिए उपयोग की जाती हैं। पूंजीगत प्राप्तियाँ इनसे अलग हैं क्योंकि:
  • पूंजीगत प्राप्तियों में शामिल होने वाला विकल्प
    • चूंकि प्रश्न में विकल्प निर्दिष्ट नहीं हैं, सामान्यतः पूंजीगत प्राप्तियों में कर (टैक्स) शामिल नहीं होता।
    • कर राजस्व प्राप्तियों का हिस्सा है, क्योंकि यह नियमित रूप से प्राप्त होता है और न तो नई देनदारी बनाता है न ही संपत्ति बेचता है।
    • अन्य विकल्प जैसे उधार, ऋण वसूली या संपत्ति बिक्री पूंजीगत प्राप्तियों में आते हैं।
    • यदि विकल्प दिए होते जैसे (a) उधार, (b) ऋण वसूली, (c) कर, (d) विनिवेश, तो कर सही उत्तर होता।​
  • महत्वपूर्ण निहितार्थ
    • पूंजीगत प्राप्तियों का अत्यधिक उपयोग राजकोषीय घाटे को बढ़ा सकता है
    • जो मुद्रास्फीति या ऋण बोझ का कारण बनता है।
    • भारत में केंद्र सरकार का बजट इन प्राप्तियों को योजनाबद्ध तरीके से उपयोग करता है
    • जैसे बुनियादी ढांचे पर व्यय के लिए। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी ये प्राप्तियाँ बजट का प्रमुख घटक बनी हुई हैं।

36. भारत के शिक्षित युवाओं में रोजगार योग्य कौशल की कमी के कारण किस प्रकार की बेरोजगारी पैदा हो गई है? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) शिक्षित बेरोजगारी
Solution:
  • शिक्षित बेरोजगारी में शिक्षित लोग अपनी दक्षता के अनुसार, नौकरियों की तलाश करते हैं।
  • हालांकि शिक्षित लोग अपनी खोजों के बावजूद वांछनीय नौकरियां पाने में असमर्थ होते हैं।
  • जिनके पास कभी-कभी कुछ कौशल की कमी होती है, उन्हें शिक्षित बेरोजगारी की श्रेणी में रखा जाता है।
  • अतः सही उत्तर विकल्प (b) होगा, जबकि संरचनात्मक बेरोजगारी बाजार में उपलब्ध नौकरियों और श्रमिकों के कौशल के बीच असंतुलन होने से उत्पन्न बेरोजगारी की एक श्रेणी है।
  • संरचनात्मक बेरोजगारी की परिभाषा
    • जहां शिक्षा प्रणाली सैद्धांतिक ज्ञान पर केंद्रित रहती है
    • लेकिन व्यावहारिक, उद्योग-आधारित कौशल (जैसे AI, डेटा एनालिटिक्स, IoT) की कमी रहती है।
    • भारत में केवल 4.7% श्रम शक्ति ने औपचारिक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया है
    • जिससे शिक्षित युवा बेरोजगार रह जाते हैं जबकि उद्योगों में कुशल श्रमिकों की कमी है।
    • यह विरोधाभास 'शिक्षित बेरोजगारी का पैराडॉक्स' कहलाता है, जहां स्नातक नौकरी के लिए अयोग्य साबित होते हैं।
  • प्रमुख कारण
    • शिक्षा और बाजार का असंतुलन: शिक्षा प्रणाली सैद्धांतिक है, व्यावसायिक कौशल (वोकेशनल स्किल्स) पर कम जोर।
    • उद्योगों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग वाले युवा चाहिए, लेकिन ग्रेजुएट्स में यह कमी है।​​
    • तकनीकी परिवर्तन: तेजी से बदलती तकनीक (ऑटोमेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) पुराने कौशलों को अप्रासंगिक बनाती है, जिससे युवा रीस्किलिंग नहीं कर पाते।​
    • जनसंख्या वृद्धि: शिक्षित युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है (83% बेरोजगार युवा), लेकिन रोजगार अवसर सीमित और कौशल-विशिष्ट हैं।​
    • क्षेत्रीय असमानता: शहरी क्षेत्रों में सफेद कॉलर जॉब्स की मांग, लेकिन ग्रामीण युवाओं में कौशल अंतर।​
  • प्रभाव और आंकड़े
    • यह बेरोजगारी दीर्घकालिक हो जाती है, क्योंकि युवा बदलती मांगों से मेल नहीं खा पाते।
    • PLFS सर्वे के अनुसार, युवा बेरोजगारी दर 2024-25 में 15-20% रही, विशेषकर स्नातकों में।
    • आर्थिक नुकसान: कार्यबल का अपूर्ण उपयोग, GDP ग्रोथ बाधित (मॉर्गन स्टेनली: दोगुनी ग्रोथ जरूरी)।
    • सामाजिक प्रभाव: असंतोष, माइग्रेशन, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं।

37. निम्नलिखित में से कौन-सा उपादान भुगतान का उदाहरण नहीं है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) पेंशन
Solution:
  • उपादान भुगतान, ऐसे संस्थान जहां 10 या 10 से अधिक श्रमिक कार्यरत हों वहां प्रभावशील होता है।
  • कोई भी श्रमिक यदि 5 वर्ष लगातार किसी संस्थान में कार्यकर्ता है, तो उसे उपादान की पात्रता होती है।
  • इस प्रकार इसके उदाहरण में वेतन, किराया और ब्याज को तो शामिल किया जा सकता है, परंतु पेंशन को नहीं।
  • कारक भुगतान क्या होते हैं?
    • कारक भुगतान वे आय हैं जो उत्पादन के कारकों को उनके उत्पादक उपयोग के लिए प्राप्त होती हैं।
    • अर्थशास्त्र में, प्रत्येक कारक का विशिष्ट भुगतान निम्नानुसार होता है:
    • भूमि के लिए किराया (Rent): भूमि या प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का भुगतान।
    • श्रम के लिए मजदूरी/वेतन (Wages/Salary): श्रमिकों की सेवाओं का भुगतान।
    • पूँजी के लिए ब्याज (Interest): मशीनरी, उपकरण या धनराशि के उपयोग का भुगतान।
    • संगठन/उद्यम के लिए लाभ (Profit): जोखिम लेकर उत्पादन आयोजन का भुगतान।
    • ये भुगतान राष्ट्रीय आय के प्रमुख स्रोत हैं और उत्पादन के मूलभूत कारकों से जुड़े होते हैं।​
  • भुगतान का उदाहरण नहीं माना जाने वाला तत्व
    • सामान्यतः इस प्रकार के बहुविकल्पीय प्रश्नों में विकल्प होते हैं जैसे: किराया, मजदूरी, ब्याज, लाभ, और निवेश (Investment)।
    • इनमें निवेश भुगतान का उदाहरण नहीं है। निवेश पूँजीगत व्यय (capital expenditure) है
    • जो भविष्य के उत्पादन के लिए मशीनरी या स्टॉक में किया जाता है।
    • यह कारक भुगतान नहीं, बल्कि पूँजी निर्माण (capital formation) का हिस्सा है।
    • निवेश पहले से उपलब्ध पूँजी या बचत से किया जाता है, न कि किसी कारक के उपयोग के बदले भुगतान के रूप में।
    • उदाहरणस्वरूप, एक कारखाना मशीन खरीदना निवेश है, लेकिन मशीन के उपयोग का ब्याज भुगतान है।​
  • अन्य गैर-उदाहरणों की व्याख्या
    • छात्रवृत्ति या पेंशन: ये स्थानांतरण भुगतान (transfer payments) हैं
    • जो उत्पादन से जुड़े नहीं होते। इन्हें राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता।
    • उपहार या अनुदान: ये भी उत्पादन कारकों से असंबंधित हैं
    • भुगतान शेष (balance of payments) में एक-पक्षीय हस्तांतरण माने जाते हैं।
    • कारक भुगतान हमेशा उत्पादन प्रक्रिया से जुड़े होते हैं
    • जबकि उपरोक्त तत्व सामाजिक या गैर-उत्पादक हस्तांतरण हैं।​
  • राष्ट्रीय आय में भूमिका
    • राष्ट्रीय आय (NDP या GNP) की गणना में केवल कारक भुगतान शामिल होते हैं
    • क्योंकि ये उत्पादन के स्रोत दर्शाते हैं। निवेश को GDP के व्यय पक्ष में गिना जाता है
    • (Y = C + I + G + NX), लेकिन यह कारक आय नहीं है।
    • अतः, प्रश्न के संदर्भ में निवेश सही उत्तर है जो भुगतान का उदाहरण नहीं है।​

38. किस समिति ने NBFC यानी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-सूक्ष्म वित्त संस्था की एक नई श्रेणी के गठन की सिफारिश की? [CHSL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मालेगाम समिति
Solution:
  • सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में कार्यरत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के लिए एक अलग श्रेणी का गठन मालेगाम समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया था।
  • आरबीआई ने माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में मामलों और चिंताओं का अध्ययन करने के लिए इस समिति का गठन वाईएच मालेगाम की अध्यक्षता में की।
  • समिति ने माइक्रोफाइनेंस के लिए NBFC की एक अलग श्रेणी बनाने की सिफारिश की
  • उन्हें प्रभावी ढंग से विनियमित और पर्यवेक्षित किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे निर्धारित मानदंडों और मानकों का अनुपालन करते हैं।
  • समिति का गठन और उद्देश्य
    • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2010 में सूक्ष्म वित्त क्षेत्र की समीक्षा के लिए मालेगाम समिति का गठन किया
    • जिसके अध्यक्ष डॉ. एचआर मालेगाम थे।
    • यह समिति आंध्र प्रदेश में सूक्ष्म वित्त संस्थाओं से जुड़े विवादों और क्षेत्र की तेज़ वृद्धि के बाद बनी
    • उधारकर्ताओं के हितों की रक्षा हो और नियमन मजबूत बने।
    • समिति ने NBFC-MFI के रूप में एक अलग श्रेणी बनाने की सिफारिश की
    • जिससे इन संस्थाओं को बैंकिंग सेवाओं के बिना वित्तीय समावेशन प्रदान करने में मदद मिले।
  • मुख्य सिफारिशें
    • समिति ने NBFC-MFI के लिए सख्त मानदंड सुझाए:
    • पात्रता: न्यूनतम निवल स्वामित्व पूंजी 15 करोड़ रुपये (उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए कम)।
    • ऋण सीमाएँ: प्रति उधारकर्ता अधिकतम 35,000 रुपये ऋण, और 50,000 रुपये कुल।
    • ब्याज दरें: औसत उधारकर्ता ब्याज दर 24% से अधिक न हो, पारदर्शिता अनिवार्य।
    • पुनर्भुगतान: साप्ताहिक या द्विसाप्ताहिक किस्तें, लेकिन कोई अधिकृत वसूली एजेंट।
    • विनियमन: RBI से पंजीकरण, उधारकर्ता शिक्षा, शिकायत निवारण प्रणाली।
  • कार्यान्वयन और प्रभाव
    • RBI ने 2011 में इन सिफारिशों को लागू किया
    • जिससे NBFC-MFI की संख्या नियंत्रित हुई और ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाएँ बेहतर बनीं।
    • इससे पहले असंगठित क्षेत्र में ब्याज की ऊँची दरें और जबरन वसूली की शिकायतें आम थीं।
    • आज NBFC-MFI ग्रामीण गरीबों को सूक्ष्म ऋण, बचत और बीमा प्रदान करते हैं
    • लेकिन SBR (स्केल-बेस्ड रेगुलेशन) जैसे नए ढाँचों ने वर्गीकरण को और परिष्कृत किया।

39. निर्यात और आयात के लिए मांग की लोच का योग ....... होने पर देश अपने भुगतान शेष में अवमूल्यन द्वारा सुधार कर सकता है। [CHSL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) इकाई से अधिक
Solution:
  • अवमूल्यन /मुद्रा का मूल्यह्रास किसी देश की मुद्रा में अन्य मुद्राओं की तुलना में कमी आना है।
  • जब निर्यात और आयात की मांग की लोच का योग एक से अधिक होता है
  • तो अवमूल्यन भुगतान संतुलन में सुधार कर सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अवमूल्यन से निर्यात सस्ता हो जाता है
  • आयात अधिक महंगा हो जाता है, जिससे निर्यात की मांग बढ़ जाती है और आयात की मांग कम हो जाती है।
  • जब निर्यात और आयात की मांग की लोच का योग एक से कम या एक के बराबर होता है
  • तो अवमूल्यन भुगतान संतुलन में सुधार करने में प्रभावी नहीं हो सकता है।
  • अवमूल्यन का प्रभाव
    • अवमूल्यन के बाद निर्यातकों की विदेशी मांग बढ़ती है क्योंकि उनकी वस्तुएं सस्ती हो जाती हैं
    • जबकि आयात महंगे होने से घरेलू मांग घटती है।
    • यदि निर्यात की मांग की लोच (e_x) और आयात की मांग की लोच (e_m) का योग (e_x + e_m > 1) हो
    • तो निर्यात में वृद्धि आयात में कमी से अधिक होती है, जिससे शुद्ध विदेशी मुद्रा प्रवाह सुधरता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि e_x = 0.8 और e_m = 0.6 हो (योग=1.4>1), तो 10% अवमूल्यन से निर्यात 8% बढ़ सकता है
    • आयात 6% घट सकता है, भुगतान शेष अनुकूल होता है।
  • मार्शल-लर्नर शर्त की व्याख्या
    • यह शर्त कहती है: |e_x + e_m| > 1 होने पर अवमूल्यन सफल होता है। ​
    • लोच का अर्थ है कीमत में 1% बदलाव से मांग में कितने प्रतिशत बदलाव—यदि योग एक से अधिक हो
    • तो मूल्य प्रभाव मांग परिणाम से बड़ा होता है। ​ अल्पकाल में लोच कम हो सकती है
    • (J-कर्व प्रभाव: प्रारंभिक घाटा फिर सुधार), लेकिन दीर्घकाल में यह प्रभावी सिद्ध होती है। ​
  • शर्त विफल होने की स्थितियां
    • यदि e_x + e_m < 1 (बेलोचदार मांग): अवमूल्यन से निर्यात वृद्धि कम और आयात बिल कम होते हैं, घाटा बढ़ता है।
    • यदि e_x + e_m = 1: कोई शुद्ध प्रभाव नहीं, भुगतान शेष स्थिर रहता है।​
    • शून्य लोच पर: अवमूल्यन बेकार। विकासशील देशों में अक्सर आयात आवश्यक वस्तुओं (तेल) के होते हैं, जिनकी लोच कम होती है।
  • भुगतान शेष में सुधार की प्रक्रिया
    • भुगतान शेष (BoP) = निर्यात - आयात + पूंजी प्रवाह। अवमूल्यन वर्तमान खाता (व्यापार शेष) सुधारता है
    • यदि लोच शर्त पूरी हो। भारत जैसे देशों में, जहां निर्यात लोचदार (टेक्सटाइल) और आयात अर्ध-लोचदार होते हैं
    • अवमूल्यन अक्सर सफल रहा है। हालांकि, मुद्रास्फीति या प्रतिशोधी अवमूल्यन जोखिम रहते हैं।
  • व्यावहारिक उदाहरण और सीमाएं
    • 1991 में भारत के रुपये के अवमूल्यन के बाद निर्यात बढ़ा क्योंकि e_x + e_m >1 था।
    • सीमाएं: पूर्ण रोजगार न होने पर अवमूल्यन निर्यात बढ़ाने में सीमित; आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में विफल।
    • नीति-निर्माताओं को लोच अनुमानित कर शर्त जांचनी चाहिए।

40. निम्नलिखित में से भारत में 'वित्तीय वर्ष 2022-23' की सही अवधि कौन-सी है? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 1 अप्रैल, 2022 से 31 मार्च, 2023 तक
Solution:
  • भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होती है और अगले वर्ष 31 मार्च को समाप्त होती है।
  • वित्तीय वर्ष की परिभाषा
    • भारत में वित्तीय वर्ष (Financial Year या FY) हमेशा 1 अप्रैल से शुरू होता है
    • अगले वर्ष 31 मार्च को समाप्त होता है। यह व्यवस्था केंद्र और राज्य सरकारों, व्यवसायों तथा व्यक्तिगत आयकर के लिए मानक है।
    • उदाहरणस्वरूप, FY 2022-23 का अर्थ है 2022-23 नामक वर्ष की वह अवधि जो वसंत ऋतु के बाद कृषि चक्र के अनुरूप चुनी गई।
  • क्यों अप्रैल-मार्च?
    • यह प्रथा ब्रिटिश काल से चली आ रही है और मुख्यतः कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ी है
    • जहां फसल कटाई मार्च में पूरी होती है। इससे राजस्व संग्रह और बजट निर्धारण सुगम होता है।
    • अन्य देशों जैसे अमेरिका (1 अक्टूबर से 30 सितंबर) से भिन्न, भारत का FY कैलेंडर वर्ष से अलग है।
  • मूल्यांकन वर्ष से अंतर
    • वित्तीय वर्ष के बाद का वर्ष 'आकलन वर्ष' (Assessment Year या AY) कहलाता है।
    • FY 2022-23 की आय का मूल्यांकन AY 2023-24 में होता है।
    • आयकर अधिनियम 1961 के तहत यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक चलती है।​
  • महत्वपूर्ण उपयोग
    • सरकारी बजट: केंद्रीय बजट FY के लिए बनता है, जैसे बजट 2022-23।​
    • कर संग्रह: प्रत्यक्ष कर FY 2022-23 में 35% बढ़े।​
    • आर्थिक सर्वेक्षण: FY 2022-23 के आंकड़े पूंजीगत व्यय और राजकोषीय घाटे पर आधारित।