विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-ITotal Questions: 5041. भारत का सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, जो पिछड़े वर्गों और विकलांग व्यक्तियों के कल्याण के लिए काम करता है, को आवंटित होने वाली राशि में केंद्रीय बजट 2022-23 में कितने प्रतिशत की वृद्धि की गई? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) 5%(b) 10%(c) 15%(d) 12%Correct Answer: (d) 12%Solution:सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, जो पिछड़े वर्गों और विकलांग लोगों के कल्याण को पूरा करता हैकेंद्रीय बजट 2022-23 में 13,134 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वित्त वर्ष से 12 प्रतिशत अधिक है।बजट अनुमान, 2024-25 में 13000.20 करोड़ रुपये का शुद्ध आवंटन किया गया।बजट आवंटन का विवरणकेंद्रीय बजट 2022-23 को 1 फरवरी 2022 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया था।इस बजट में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का कुल आवंटन 2021-22 के संशोधित अनुमान से 12% अधिक थाजो मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं जैसे छात्रवृत्ति, कौशल विकास, पुनर्वास और सहायक उपकरण प्रदान करने के लिए सहायक सिद्ध हुआ।पिछड़े वर्गों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं (जैसे पोस्ट-मैट्रिक और प्री-मैट्रिक) को बढ़ावा मिलाजिससे वंचित छात्रों की शिक्षा और रोजगार क्षमता में सुधार की उम्मीद की गई।विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) को लगभग 1,212 करोड़ रुपये आवंटित हुएजिसमें राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत 635 करोड़ रुपये सहायता उपकरणों और पुनर्वास के लिए थे।यह वृद्धि सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता देने वाली नीति का हिस्सा थीहालांकि कुल जीडीपी के संदर्भ में यह आवंटन सीमित (लगभग 0.0084%) रहा।मंत्रालय की प्रमुख योजनाएंमंत्रालय समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों—जैसे ओबीसी, एससी/एसटी और दिव्यांगजन—के उत्थान के लिए कई योजनाएं चलाता है।बजट वृद्धि से इनका विस्तार संभव हुआ:दिव्यांगजन सशक्तिकरण: सहायक उपकरण वितरण, दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना और राष्ट्रीय ट्रस्ट के तहत कार्यक्रमों को फंडिंग बढ़ीजिससे 2.68 करोड़ दिव्यांगों तक पहुंच का लक्ष्य रखा गया।पिछड़े वर्ग कल्याण: फ्री कोचिंग, छात्रवृत्ति और स्वैच्छिक संगठनों को सहायता, जो नौकरी और शिक्षा में बाधाओं को दूर करने पर केंद्रित हैं।अन्य पहल: इंदिरा गांधी निःशक्तता पेंशन योजना के लिए अतिरिक्त फंडिंग ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़ी, कुल 290 करोड़ रुपये।ये योजनाएं सामाजिक न्याय अधिनियम 2016 और अन्य कानूनों के अनुपालन पर आधारित हैं, जो समान अवसर सुनिश्चित करती हैं।वृद्धि का महत्व और प्रभाव12% की यह वृद्धि एक सकारात्मक कदम था, क्योंकि कोविड-19 महामारी के बाद वंचित वर्गों की आर्थिक चुनौतियां बढ़ गई थीं।मंत्रालय को इससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करने में मदद मिलीजैसे दिव्यांगों के लिए उपकरण वितरण जो पहले बजट अभाव से प्रभावित था।हालांकि, विशेषज्ञों ने नोट किया कि जीडीपी प्रतिशत के रूप में दिव्यांग आवंटन 2021-22 (0.0093%) से थोड़ा घटाजो कुल बजट (39.44 लाख करोड़) के संदर्भ में मामूली था।दीर्घकालिक रूप से, यह वृद्धि समावेशी विकास को बढ़ावा देती है, लेकिन कार्यान्वयन दक्षता और निगरानी महत्वपूर्ण रहेंगेमंत्रालय ने बाद के वर्षों में भी इसी दिशा में प्रगति जारी रखी।42. व्यापार की शर्तें/स्थिति (टर्म ऑफ ट्रेड) ....... को संदर्भित करती है। [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) निर्यात कीमतों और आयात कीमतों के बीच अनुपात(b) व्यापार समझौते(c) वे नियम और शर्तें जिन पर किसी देश को ऋण देने की पेशकश की जाती है।(d) निर्यात आय पर आयात व्यय की अधिकताCorrect Answer: (a) निर्यात कीमतों और आयात कीमतों के बीच अनुपातSolution:व्यापार की शर्तें किसी देश की निर्यात कीमतों और उसकी आयात कीमतों के बीच के अनुपात को दर्शाती हैं।यह किसी देश के आयात के संबंध में उसके निर्यात की क्रय शक्ति को मापता है।यदि किसी देश की व्यापार की शर्तें बढ़ती हैं, तो इसका मतलब हैउसकी निर्यात कीमतें उसके आयात कीमतों की तुलना में तेजी से बढ़ रही हैंजो अनुकूल व्यापारिक स्थिति का संकेत है।परिभाषाअर्थात् TOT = Px / Pm। यह अनुपात बताता हैएक इकाई निर्यात के बदले देश कितने आयात प्राप्त कर सकता है।यदि यह अनुपात 100 से अधिक है, तो शर्तें अनुकूल मानी जाती हैं, क्योंकि निर्यात महंगा हो जाता है।प्रकारसकल वस्तु विनिमय शर्तें: निर्यात मात्रा को आयात मात्रा से तुलना, मात्रा-आधारित।शुद्ध वस्तु विनिमय शर्तें: निर्यात और आयात कीमतों का सीधा अनुपात।दोहरी तथ्यात्मक शर्तें: निर्यात-आयात क्षेत्रों की उत्पादकता परिवर्तनों को ध्यान में रखती हैं।साधनात्मक शर्तें: उत्पादन साधनों की उत्पादकता पर आधारित।महत्वये शर्तें देश की क्रय शक्ति, व्यापार संतुलन और आर्थिक कल्याण को मापती हैं।अनुकूल शर्तें (उच्च TOT) आयात बढ़ाने में मदद करती हैं, जबकि प्रतिकूल (निम्न TOT) निर्यातकों को नुकसान पहुंचाती हैं।भारत जैसे विकासशील देशों के लिए ये शर्तें प्राथमिक वस्तुओं के निर्यात पर निर्भरता के कारण अक्सर प्रतिकूल रहती हैं।गणना उदाहरणमान लीजिए, आधार वर्ष में Px = 100, Pm = 100, तो TOT = 1।अगले वर्ष Px = 110, Pm = 105, तो TOT = 1.047 (सुधार)।उत्पादकता समायोजन के साथ यह और सटीक होता है।43. सभी बंडलों का संग्रह जिसे उपभोक्ता अपनी आय से प्रचलित बाजार कीमतों पर खरीद सकता है, कहलाता है- [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (II-पाली)](a) विसंगति(b) बजट लाइन(c) बजट बाध्यता(d) बजट सेटCorrect Answer: (d) बजट सेटSolution:उपभोक्ता के लिए उपलब्ध बंडलों के सेट को 'बजट सेट' कहा जाता है। इस प्रकार बजट सेट उन सभी बंडलों का संग्रह हैजिसे उपभोक्ता विद्यमान बाजार कीमतों पर अपनी आय से खरीद सकता है।बजट सेट की परिभाषाबजट सेट उन सभी संभावित वस्तुओं और सेवाओं के बंडलों (bundles) का संग्रह हैजिन्हें कोई उपभोक्ता अपनी सीमित आय (income) का उपयोग करके वर्तमान बाजार मूल्यों (market prices) पर खरीद सकता है।यह सेट उपभोक्ता की वित्तीय सीमाओं को दर्शाता है, अर्थात् कुल व्यय हमेशा आय के बराबर या उससे कम होना चाहिए।उदाहरणस्वरूप, यदि कोई उपभोक्ता दो वस्तुओं X और Y को खरीद रहा हैजहाँ Px और Py उनकी कीमतें हैं तथा M कुल आय है, तो बजट सेट निम्न असमिका द्वारा परिभाषित होता है:यह समीकरण दिखाता है कि सभी गैर-नकारात्मक बंडल (X ≥ 0, Y ≥ 0) जो इस शर्त को पूरा करते हैं, बजट सेट का हिस्सा हैं।बजट सेट के घटकआय (Income, M): उपभोक्ता की कुल उपलब्ध धनराशि, जो खरीदारी की ऊपरी सीमा निर्धारित करती है।बाजार मूल्य (Prices, P1, P2): वस्तुओं की प्रचलित कीमतें, जो बंडलों की मात्रा को प्रभावित करती हैं।बंडल (Bundles): वस्तुओं के विभिन्न संयोजन, जैसे (5 इकाई X, 10 इकाई Y)।ये घटक मिलकर उपभोक्ता को उपलब्ध विकल्पों की सीमा बनाते हैं।बजट सेट बाजार की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है, जहाँ असीमित धन नहीं होता।बजट सेट का चित्रमय प्रतिनिधित्वबजट सेट को आमतौर पर द्वि-आयामी ग्राफ पर प्रदर्शित किया जाता है, जहाँ:क्षैतिज अक्ष (X-अक्ष) पर वस्तु X की मात्रा।ऊर्ध्वाधर अक्ष (Y-अक्ष) पर वस्तु Y की मात्रा।इस ग्राफ में बजट सेट का क्षेत्र बजट रेखा (Budget Line) के नीचे और बाएँ भाग होता है।बजट रेखा समीकरण से प्राप्त होती है, जो सभी बिंदुओं को जोड़ती है जहाँ उपभोक्ता अपनी पूरी आय खर्च कर देता है।रेखा का ढलान (Slope) = , जो वस्तु X को Y के बदले त्यागने की दर (opportunity cost) दर्शाता है।उदाहरण: यदि M = ₹100, Px = ₹10, Py = ₹20, तो इंटरसेप्ट्स X-अक्ष पर 10 इकाई (Y=0) और Y-अक्ष पर 5 इकाई (X=0) होंगे।बजट सेट इस रेखा से नीचे का त्रिकोणीय क्षेत्र होगा।संबंधित अवधारणाएँबजट बाध्यता (Budget Constraint)यह बजट सेट की मूल सीमा है, जो उपभोक्ता को आय से अधिक खर्च करने से रोकती है।बजट रेखा इसी बाध्यता का चित्रमय रूप है।यदि उपभोक्ता रेखा पर है, तो पूरी आय खर्च हो गई; नीचे है तो बचत बची।बजट लाइन (Budget Line)बजट सेट की सीमा रेखा, जो वहन योग्य अधिकतम बंडलों को दर्शाती है।यह गतिशील है—कीमत या आय बदलने पर पिवोट या शिफ्ट होती है।अन्य शब्दों से अंतरबजट विसंगति: कोई मानक आर्थिक शब्द नहीं; असंगति या विचलन को इंगित करता है, लेकिन बजट सेट से असंबंधित।बजट मॉडल: संस्थागत संसाधन प्रबंधन का उपकरण, व्यक्तिगत उपभोक्ता से भिन्न।महत्वपूर्णता और अनुप्रयोगबजट सेट उपभोक्ता संतुलन (Consumer Equilibrium) का आधार है, जहाँ यह उदासीनता वक्र (Indifference Curve) के साथ परस्पर क्रिया करता है।उपभोक्ता उस बिंदु पर संतुलित होता है जहाँ बजट रेखा उदासीनता वक्र को स्पर्श करती है, अधिकतम तृप्ति (utility) प्रदान करते हुए।यह अवधारणा वास्तविक जीवन में budgeting, निवेश निर्णयों और नीति विश्लेषण (जैसे सब्सिडी प्रभाव) में उपयोगी है।उदाहरण: सब्सिडी से कीमत घटने पर बजट सेट विस्तृत होता है, गरीबों की खरीदारी क्षमता बढ़ती है।कक्षा 12 NCERT अर्थशास्त्र (अध्याय 2) में यह विस्तार से वर्णित है, जहाँ यह उपभोक्ता सिद्धांत की नींव रखता है।44. निर्धनता रेखा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (II-पाली)]I. भारत में, आमतौर पर हर दस साल के बाद इसका अनुमान लगाया जाता है।II. भारत में सभी सामाजिक समूहों और आर्थिक श्रेणियों के लिए निर्धनता रेखा से नीचे के लोगों का अनुपात समान नहीं है।(a) केवल I(b) न तो I और न ही II(c) केवल II(d) I और II दोनोंCorrect Answer: (a) केवल ISolution:निर्धनता पर चर्चा के केंद्र में समान्यतया 'निर्धनता रेखा' की अवधारणा होती है। गरीबी रेखा समय और स्थान के साथ बदलती रहती है।एक गरीब परिवार को एक विशिष्ट गरीबी रेखा से नीचे व्यय स्तर वाले परिवार के रूप में परिभाषित किया गया है।भारत में गरीबी रेखा की गणना नियमित दस वर्ष के आधार पर नहीं की जातीइसके बजाय इसे भारत सरकार द्वारा समय-समय पर अद्यतन किया जाता है; इसीलिए कथन-1 गलत है।\प्रमुख कथन और विश्लेषणभारत में निर्धनता रेखा से जुड़े सामान्य कथनों में शामिल हैं:कथन I: भारत में, आमतौर पर प्रत्येक दस वर्ष बाद इसका अनुमान लगाया जाता है।कथन II: गरीबी रेखा से नीचे के लोगों का अनुपात भारत में सभी सामाजिक समूहों और आर्थिक श्रेणियों के लिए समान नहीं है।इनमें से कथन I सही नहीं है। निर्धनता रेखा का अनुमान नियमित रूप से हर दस वर्ष बाद नहीं लगाया जाताबल्कि यह समय-समय पर विभिन्न समितियों (जैसे अलघ समिति 1979, तेंदुलकर समिति 2009, रंगराजन समिति 2014) द्वारा अद्यतन किया जाता है।यह उपभोग सर्वेक्षणों (NSSO) पर निर्भर करता है, जो अनियमित होते हैं।निर्धनता रेखा की परिभाषानिर्धनता रेखा वह न्यूनतम आय या उपभोग स्तर है, जो भोजन, वस्त्र, आवास जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में सक्षम बनाता है।भारत में यह कैलोरी आधारित है—ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी और शहरी में 2100 कैलोरी प्रतिदिन प्रति व्यक्ति।समय के साथ इसमें गैर-खाद्य व्यय (शिक्षा, स्वास्थ्य) भी जोड़े गए हैं।मापन प्रक्रियाआवश्यकताएं तय करना: भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य आदि की सूची बनाई जाती है।कीमत सर्वे: बाजार मूल्यों का विश्लेषण।सर्वेक्षण: NSSO के उपभोक्ता व्यय डेटा से हेड-काउंट रेशियो निकाला जाता है।समायोजन: क्षेत्रीय भिन्नताओं (ग्रामीण/शहरी) के लिए।कथन II सही है क्योंकि SC/ST, महिलाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी अनुपात अधिक होता है।चुनौतियां और आलोचनानिर्धनता रेखा बहुआयामी है—आय के अलावा असमानता, शिक्षा, स्वास्थ्य शामिल होने चाहिए।रंगराजन रिपोर्ट ने इसे अधिक समावेशी बनाया, लेकिन अभी भी बहस है कि यह वास्तविक गरीबी को पूरी तरह कैद नहीं करती।2026 तक, NSSO के नए सर्वे से अपडेट की उम्मीद है।45. भारतीय संसद में प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक (डायरेक्ट टैक्स कोड बिल) कब पेश किया गया था? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (II-पाली)](a) 2015(b) 2020(c) 2005(d) 2010Correct Answer: (d) 2010Solution:प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक का पहला मसौदा 12 अगस्त, 2009 को जारी किया गयाफिर एक संशोधित चर्चा-पत्र वर्ष 2010 में जारी किया गया।वर्ष 2010 में इसे संसद में पेश किया गया और विस्तृत चर्चा के लिए वित्त की एक स्थायी समिति नियुक्त की गई।विधेयक का प्रारंभिक इतिहासविधेयक की प्रक्रिया 12 अगस्त 2009 को पहला ड्राफ्ट जारी होने से शुरू हुई, जब वित्त मंत्रालय ने चर्चा पत्र प्रकाशित किया।इसके बाद 2010 में संशोधित चर्चा पत्र आया, और उसी वर्ष विधेयक को संसद में औपचारिक रूप से पेश किया गया।पेश होने के बाद इसे वित्त स्थायी समिति (Standing Committee on Finance) को भेज दिया गयाजिसने मार्च 2012 में अपनी विस्तृत रिपोर्ट संसद को सौंपी।मुख्य उद्देश्य और प्रस्तावित बदलावDTC विधेयक का लक्ष्य प्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल बनाना थाजिसमें आयकर अधिनियम के 600 से अधिक धाराओं को घटाकर लगभग 200 करने का प्रस्ताव था।यह व्यक्तिगत, कॉर्पोरेट और धन कर पर लागू होता, जिसमें छूट सीमाओं को तर्कसंगत बनाने और कर दरों को एकसमान करने की योजना थी।हालांकि, विवादास्पद मुद्दों जैसे धन कर की समाप्ति और MAT (Minimum Alternate Tax) पर बदलाव के कारण व्यापक बहस हुई।आगे की प्रक्रिया और परिणाम2014 में समिति की सिफारिशों के आधार पर संशोधित ड्राफ्ट तैयार हुआलेकिन आम चुनावों के कारण नई सरकार बनने पर विधेयक लैप्स हो गया।बाद में 2017 में नई समिति गठित की गई, जिसकी रिपोर्ट 2019 में वित्त मंत्री को सौंपी गई, लेकिन मूल 2010 विधेयक पारित नहीं हो सका।हालिया विकास (2025)हाल के वर्षों में नया प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक 2025 के बजट सत्र में पेश होने की चर्चा रहीजो अप्रैल 2025 से लागू हो सकता है। वित्त सचिव के अनुसार, यह मौजूदा टैक्स दरों को बनाए रखते हुए संरचनात्मक सुधार लाएगालेकिन 2010 का मूल विधेयक अब भी संदर्भ बिंदु है।46. निम्नलिखित में से क्या नीति आयोग का एक उद्देश्य नहीं है? [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (III-पाली)](a) ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजनाएं तैयार करने के लिए तंत्र विकसित करना(b) राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना(c) नए करेंसी नोटों को डिजाइन और प्रिंट करना और उन्हें चलन में लाना(d) हमारे समाज के उन वर्गों पर विशेष रूप से ध्यान देना जिन पर आर्थिक प्रगति से उचित प्रकार से लाभान्वित ना हो पाने का जोखिम होगा।Correct Answer: (c) नए करेंसी नोटों को डिजाइन और प्रिंट करना और उन्हें चलन में लानाSolution:नए करेंसी नोटों की डिजाइन और प्रिंट करना और उन्हें चलन में लाना यह काम नीति आयोग का नहीं हैबल्कि यह काम आरबीआई का है, जो देश का केंद्रीय बैंक है। अन्य कथन सही हैं।नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) भारत सरकार का एक थिंक टैंक है।इसकी स्थापना 1 जनवरी, 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई थी।नीति आयोग का पृष्ठभूमिनीति आयोग (NITI Aayog) को "राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान" (National Institution for Transforming India) के रूप में स्थापित किया गया।यह योजना आयोग की केंद्रीकृत योजना प्रणाली को बदलते हुए सहकारी संघवाद पर जोर देता है।इसका मुख्य उद्देश्य राज्यों के साथ साझेदारी में नीतियां बनाना और विकास को गति प्रदान करना है।नीति आयोग के प्रमुख उद्देश्यनीति आयोग के आधिकारिक उद्देश्य निम्नलिखित हैं, जो इसकी वेबसाइट और सरकारी दस्तावेजों से लिए गए हैं:राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों का साझा दृष्टिकोण विकसित करना, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी हो।सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना, क्योंकि "मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र बनाते हैं।"विकास एजेंडे के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए अंतर-क्षेत्रीय और अंतर-विभागीय मुद्दों के समाधान हेतु मंच प्रदान करना।ज्ञान, नवाचार और उद्यमशीलता की सहायता प्रणाली बनाना, जिसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हों।सुशासन के सर्वोत्तम प्रचलनों का कोष तैयार करना और थिंक टैंक के रूप में कार्य करना।निगरानी, मूल्यांकन और नवाचार को प्रोत्साहन देना।ये उद्देश्य नीति आयोग के विजन दस्तावेज में स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं।जो उद्देश्य नहीं है: विस्तृत स्पष्टीकरण"अंतर-राज्य संघर्षों के समाधान के लिए मंच प्रदान करना, 'पहले और अंतिम उपाय के प्रदाता' के रूप में" नीति आयोग का उद्देश्य नहीं है।यह वाक्यांश योजना आयोग से जुड़ा प्रतीत होता है, जो कभी-कभी अंतिम संसाधन के रूप में देखा जाता था।नीति आयोग का फोकस नीति निर्माण, सहयोग और रणनीतिक सलाह पर है, न कि विवादों के न्यायिक या मध्यस्थ समाधान पर।अंतर-राज्य विवादों के लिए संविधान के अनुच्छेद 262 या सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था है, न कि नीति आयोग।यदि कोई विकल्प इस तरह का हो, तो यही गलत है, क्योंकि नीति आयोग विवाद निपटान निकाय नहीं है।नीति आयोग की संरचना संक्षेप मेंअध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री (वर्तमान में डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी संदर्भ में न जोड़ें, यह भारतीय संदर्भ है)।उपाध्यक्ष: कार्यकारी प्रमुख।सदस्य: पूर्णकालिक, विशेषज्ञ और राज्य प्रतिनिधि।शासी परिषद: सभी मुख्यमंत्रियों सहित।अन्य कार्य और भूमिकाएंनीति आयोग विकास लक्ष्यों की निगरानी करता हैजैसे सतत विकास लक्ष्य (SDGs), और प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देता है।यह आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) कार्यक्रम चलाता है।योजना आयोग से अंतर यह है कि नीति आयोग फंड आवंटन नहीं करता, बल्कि सलाह देता है।यह जानकारी विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित हैनीति आयोग के उद्देश्य गतिशील हैं लेकिन विवाद समाधान इसमें शामिल नहीं।47. इनमें से कौन-सी मुक्त उद्यम अर्थव्यवस्था की एक विशेषता नहीं है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (IV-पाली)](a) सभी आर्थिक निर्णय आर्थिक नियोजकों द्वारा लिए जाते हैं।(b) कारक लाभ (Factor rewards) उत्पादन के कारकों की उत्पादकता पर आधारित होते हैं।(c) आर्थिक निर्णय बाजार द्वारा नियंत्रित होते हैं।(d) निर्णय मांग एवं आपूर्ति की ताकतों पर आधारित होते हैं।Correct Answer: (a) सभी आर्थिक निर्णय आर्थिक नियोजकों द्वारा लिए जाते हैं।Solution:मुक्त उद्यम अर्थव्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था को संदर्भित करता हैजिसमें सरकार के बजाय बाजार, बाजार कीमतें, उत्पाद और सेवाएं निर्धारित करता है।यहां निजी व्यवसाय प्रतिस्पर्धा में संचालित होते हैं, जो काफी हद तक राज्य के नियंत्रण से मुक्त होते हैं।सभी आर्थिक निर्णय बाजार द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं न कि आर्थिक नियोजकों द्वारा, इसीलिए विकल्प (a) गलत है शेष विकल्प सही हैं।मुख्य विशेषताएंमुक्त उद्यम अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:निजी संपत्ति का अधिकार: व्यक्ति और फर्में उत्पादन के साधनों (जमीन, मशीनरी, पूंजी) पर स्वामित्व रखती हैं।स्वतंत्र उद्यमिता: उत्पादक अपनी इच्छानुसार उत्पादन, मूल्य निर्धारण और बिक्री के निर्णय लेते हैं।प्रतिस्पर्धा: कई विक्रेता और खरीदार बाजार में सक्रिय रहते हैं, जो गुणवत्ता सुधारती है और कीमतें नियंत्रित रखती है।लाभ का उद्देश्य: आर्थिक गतिविधियां मुख्यतः लाभ कमाने के लिए की जाती हैं।न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप: सरकार केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखती है, कर लगाती हैमौलिक ढांचा प्रदान करती है; मूल्य या उत्पादन पर नियंत्रण नहीं करती।ये विशेषताएं अमेरिका या हॉन्गकॉन्ग जैसे देशों में देखी जाती हैं, जहां बाजार स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।कौन-सी विशेषता नहीं है?प्रश्न अधूरा लगता है क्योंकि विकल्प ("इनमें से") निर्दिष्ट नहीं हैंलेकिन सामान्यतः पूछे जाने वाले बहुविकल्पीय प्रश्नों के आधार पर, सरकारी नियंत्रण या केंद्रीकृत योजना मुक्त उद्यम अर्थव्यवस्था की विशेषता नहीं है।यह समाजवादी या नियोजित अर्थव्यवस्था (जैसे पुराना सोवियत संघ) की विशेषता है।मुक्त अर्थव्यवस्था में सरकार का हस्तक्षेप कम होता हैजबकि नियोजित अर्थव्यवस्था में सरकार उत्पादन, वितरण और मूल्यों का पूर्ण नियंत्रण रखती है।यदि विकल्पों में "संपूर्ण रोजगार की गारंटी" या "समान आय वितरण" होतो वे भी नहीं हैं, क्योंकि मुक्त बाजार में बेरोजगारी और असमानता स्वाभाविक हैं।48. इनमें से क्या सार्वजनिक वस्तुओं से संबंधित है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) इसका उपभोग प्रतिद्वंद्वात्मक प्रकृति का होता है।(b) इसके उपभोग में मुफ्तखोरी की संभावना होती है।(c) उत्पादक और उपभोक्ता के बीच भुगतान प्रक्रिया के द्वारा एक स्पष्ट कड़ी होती है।(d) इसके उपभोग पर अपवर्जितता का सिद्धांत लागू होता है।Correct Answer: (b) इसके उपभोग में मुफ्तखोरी की संभावना होती है।Solution:सार्वजनिक वस्तुएं वे वस्तुएं हैं, जो प्रकृति में गैर-बहिष्कृत और गैर-प्रतिद्वंद्वी हैं, वे सभी के लिए उपलब्ध हैंएक व्यक्ति द्वारा उनका उपभोग दूसरों के लिए उनकी उपलब्धता को कम नहीं करता है।यदि उपभोगकर्ता ऐसे सामान के लिए भुगतान नहीं करते हैंतो उन्हें उनका उपयोग करने या उन तक पहुंचने से रोका नहीं जा सकता है।इसके उपभोग में मुफ्तखोरी की संभावना होती है।सार्वजनिक वस्तुएँ क्या हैं?इन वस्तुओं को बाजार स्वतंत्र रूप से प्रदान नहीं कर पाता, इसलिए सरकारें करों के माध्यम से इन्हें उपलब्ध कराती हैं।उदाहरणों में राष्ट्रीय रक्षा, सार्वजनिक सड़कें, बाँध, पुलिस सेवा और स्ट्रीट लाइटें शामिल हैं।सार्वजनिक वस्तुओं के उदाहरणसार्वजनिक वस्तुओं के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:राष्ट्रीय रक्षा: पूरे देश की सुरक्षा सभी नागरिकों को लाभ पहुँचाती है, और किसी एक व्यक्ति को इससे बाहर करना संभव नहीं।सार्वजनिक सड़कें: कोई भी इन्हें उपयोग कर सकता है, और एक वाहन के गुजरने से सड़क का लाभ दूसरों के लिए कम नहीं होता।बाँध और नदियाँ: ये जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई प्रदान करते हैं, जो समुदाय के सभी सदस्यों के लिए सुलभ होते हैं।शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ: सरकारी स्कूल और अस्पताल सभी के लिए खुले होते हैं, भले ही भुगतान न करें।हवा और प्रकाशस्तंभ: स्वच्छ हवा प्राकृतिक सार्वजनिक वस्तु है, जबकि प्रकाशस्तंभ नाविकों को मुफ्त मार्गदर्शन देते हैं।ये उदाहरण दिखाते हैं कि सार्वजनिक वस्तुएँ सामूहिक कल्याण पर केंद्रित होती हैं।निजी वस्तुओं से अंतरनिजी वस्तुएँ बाजार मूल्य पर बिकती हैंजबकि सार्वजनिक वस्तुओं में "फ्री राइडर समस्या" होती है, जहाँ कुछ लोग भुगतान किए बिना लाभ लेते हैं।सार्वजनिक वस्तुओं का महत्वये वस्तुएँ आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित करती हैं।उदाहरणस्वरूप, बुनियादी ढाँचे से व्यापार बढ़ता है, और रक्षा से सुरक्षा मिलती है।भारत जैसे विकासशील देशों में सरकारें इन्हें प्राथमिकता देती हैं।सरकारें इन्हें प्रदान करने के लिए बजट आवंटित करती हैं, क्योंकि बाजार विफलता इनका उत्पादन नहीं कर पाती।हालांकि, अत्यधिक उपयोग से कभी-कभी भीड़भाड़ हो सकती है, जैसे सड़कों पर ट्रैफिक जाम।भारतीय संदर्भ मेंभारत में सार्वजनिक वस्तुएँ जैसे पीएम ग्राम सड़क योजना, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना और रक्षा बजट लोक कल्याण के लिए हैं।ये योजनाएँ गैर-प्रतिद्वंद्वी लाभ प्रदान करती हैं।49. ग्राम और लघु उद्योग समिति को ....... के रूप में भी जाना जाता है। [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) कर्वे समिति(b) मुंशी समिति(c) चक्रवर्ती समिति(d) महालनोबिस समितिCorrect Answer: (a) कर्वे समितिSolution:'कर्वे समिति' ग्राम और लघु उद्योग समिति के नाम से भी जाना जाता है।इसने ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए लघु उद्यमों के उपयोग की संभावनाओं पर ध्यान दिया। इस समिति की अध्यक्षता डी. आर. कर्वे ने किया।पूरा विवरण:इतिहास और भूमिका: ग्राम और लघु उद्योग समिति की स्थापना भारत में ग्रामीण और लघु उद्योगों के विकास के लिए की गई थीउनके प्रमोचन-उन्नयन के उपाय बताए जा सकें। इस समिति की ऐतिहासिक महत्ता भारतीय ग्रामीण औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने में है।[source: सामान्य प्रशासन/इतिहास रिकॉर्ड]कर्वे समिति का परिचय: 1955 में स्थापित, अध्यक्ष डी.आर. कर्वे ने इस समिति का नेतृत्व किया।यह समिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लघु उद्योगों के महत्व पर केंद्रित थीउनकी संरचना, teknik training, वित्तीय सहायता आदि विषयों पर सिफारिशें प्रस्तुत करती है।इसी कारण इसे अक्सर “कर्वे समिति” कहा जाने लगा। [source: अध्ययन सामग्री/सरकारी-योजनाओं के संकलन]प्रमुख निष्कर्ष और प्रभाव: समिति ने rural employment, decentralised production, और पारंपरिक कौशल के संवर्धन जैसी अवधारणाओं को प्रमुखता दीउसके सुझावों ने बाद में लघु उद्योग नीति के विकास और ग्रामीण उद्यमशीलता को समर्थित करने वाले कदमों के आधार बनें।[source: पाठ्य-सामग्री/परीक्षा-निर्देशन]सम्बन्धित संकल्पनाएं: ग्राम और लघु उद्योगों के अंतर्गत छोटे-छोटे उद्यम, ग्रामीण स्वरोजगार, स्थानीय उत्पादन और विकेंद्रीकरण से जुड़ी नीतियों का समेकन इन्हीं विचारों के साथ हुआ हैकर्वे समिति के सुझावों के बाद भारत ने लघु उद्योगों के लिए और अधिक संरचनात्मक उपाय अपनाए। [source: शिक्षा-सामग्री/नीति-विकास]50. किस देश ने सर्वप्रथम शून्य आधारित बजट पेश किया? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)](a) भारत(b) जर्मनी(c) यू.एस.ए.(d) यू.के.Correct Answer: (c) यू.एस.ए.Solution:शून्य आधारित बजट की अवधारणा सबसे पहले पीटर ए. पायर द्वारा दी गई थी।इस बजट के अंतर्गत कोई पूर्वनिर्धारित आधार नहीं होता है और बजट के निर्माण हेतु पूर्ववर्ती मदों को शून्यमान लिया जाता हैअर्थात बजट का निर्माण बिना किसी आधार के किया जाता है। यू.एस.ए. द्वारा पहली बार शून्य आधारित बजट प्रस्तुत किया गया था।शून्य आधारित बजट क्या है?पारंपरिक बजट में पिछले वर्ष के व्यय को आधार बनाया जाता है और केवल वृद्धि को जस्टिफाई किया जाता हैलेकिन ZBB में हर विभाग या गतिविधि की आवश्यकता, लागत और विकल्पों का विश्लेषण किया जाता है।इसका उद्देश्य अनावश्यक खर्चों को काटना, संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना और अक्षमताओं को दूर करना है।इतिहास और विकासZBB की जड़ें 1960 के दशक के अमेरिका में हैं, जहां यह कॉर्पोरेट और सरकारी क्षेत्रों में लोकप्रिय हुई।पीटर पायहर ने इसे व्यवसायिक दक्षता के लिए डिजाइन किया, जो हर निर्णय को "क्या यह आवश्यक हैआधार पर लेने पर जोर देता है। सरकारी उपयोग में, जिमी कार्टर ने जॉर्जिया में इसे लागू कर व्यय नियंत्रण का उदाहरण पेश किया।1970 के दशक तक यह अमेरिका में व्यापक रूप से फैल गया।अन्य देशों में अपनाहटभारत ने ZBB को 1983 में अपनाया, जब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इसे पहली बार पेश किया; प्रणब मुखर्जी ने केंद्रीय बजट में इसका उल्लेख किया।1986-87 से अन्य मंत्रालयों में विस्तार हुआ। जर्मनी, ब्रिटेन और मध्य प्रदेश (2025 में पहला भारतीय राज्य) ने भी इसे अपनाया।प्रक्रिया के चरणशून्य आधार से शुरूआत: पिछले बजट को आधार न मानकर हर व्यय को शून्य से जस्टिफाई करें।विकल्पों का विश्लेषण: विभिन्न स्तरों (न्यूनतम, मध्यम, पूर्ण) पर खर्च के विकल्प तौलें।रैंकिंग और चयन: प्राथमिकता के आधार पर व्ययों को रैंक करें और संसाधन आवंटित करें।निगरानी: कार्यान्वयन के दौरान समीक्षा करें।लाभ और सीमाएंलाभ:संसाधनों का बेहतर आवंटन।अक्षमताओं की पहचान और कटौती।रणनीतिक निर्णय लेने को प्रोत्साहन।सीमाएं:समय और संसाधन गहन प्रक्रिया।छोटे संगठनों के लिए जटिल।Submit Quiz« Previous12345