विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-II

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11. भारत सरकार ने पहली बार अपने वक्तव्य में बजटीय आवंटन की लैंगिक संवेदनशीलता को कब शामिल किया? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 2005-06
Solution:
  • भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005-06 में पहली बार अपने वक्तव्य में बजटीय आवंटन की लैंगिक संवेदनशीलता को सामने लाया गया।
  • यह बजटीय आवंटन में लैंगिक महत्व की सरकार की मान्यता और संसाधनों के आवंटन में लैंगिक असमानताओं को दूर करने की आवश्यकता को दर्शाता है।
  • लैंगिक संवेदनशीलता का परिचय
    • लैंगिक संवेदनशीलता वाले बजट, जिसे जेंडर बजटिंग के नाम से जाना जाता है
    • उद्देश्य सार्वजनिक व्यय को लिंग आधारित परिप्रेक्ष्य से ट्रैक करना और महिलाओं की पहुंच में सुधार लाना है।
    • जो बजट दस्तावेज़ के वॉल्यूम-1 का हिस्सा था।
    • यह कदम लैंगिक असमानताओं को दूर करने और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को मुख्यधारा में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण था।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारत में जेंडर बजटिंग की शुरुआत 2005 से मानी जाती है, जब यूपीए सरकार के कार्यकाल में इसकी औपचारिक शुरुआत हुई।
    • इससे पहले, वैश्विक स्तर पर ऑस्ट्रेलिया (1984) और कनाडा जैसे देशों ने इस अवधारणा को अपनाया था
    • लेकिन भारत ने इसे दक्षिण एशिया में अग्रणी बनाया। 2005-06 के बजट में यह विवरण दो भागों में विभाजित था
    • भाग 'अ' में 100% महिलाओं के लिए आवंटित योजनाएं और भाग 'ब' में कम से कम 30% महिलाओं के लिए आवंटन वाली योजनाएं शामिल की गईं।
  • विकास और प्रगति
    • 2005-06 में शुरूआती जेंडर बजट आवंटन सीमित था, लेकिन यह नींव साबित हुआ।
    • 2014-15 में यह 0.98 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 तक बढ़कर 4.49 लाख करोड़ रुपये हो गया।​
    • कुल बजट में इसका हिस्सा 2014-15 के 5.46% से बढ़कर 2025-26 में 8.86% हो गया।​
    • 2019-20 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे 121,961 करोड़ से 131,700 करोड़ रुपये तक बढ़ाया।​
    • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (81.79%), ग्रामीण विकास (65.76%) जैसे मंत्रालयों में 30% से अधिक आवंटन जेंडर पहलों के लिए होता है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
  • प्रभाव और चुनौतियां
    • जेंडर बजटिंग ने महिलाओं के रोजगार, पोषण, आंगनवाड़ी और नेतृत्व वाले विकास पर जोर दिया है।
    • हालांकि, 2021-22 में यह कुल बजट का मात्र 4.4% था, जो महामारी के प्रभाव को दर्शाता है।
    • राज्य स्तर पर भी महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने इसे अपनाया, जहां योजनाओं का 50% लाभ महिलाओं तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया।
    • यह पहल लैंगिक समानता की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

12. भिन्न विकल्प को पहचानिए। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) निर्माण
Solution:
  • होटल और रेस्तरां, परिवहन और संचार, तथा बैंकिंग और बीमा क्षेत्र अर्थव्यवस्था के तृतीयक क्षेत्र है
  • जिसे आमतौर पर सेवा क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। जबकि निर्माण द्वितीयक क्षेत्र से संबंधित है।
  • द्वितीयक क्षेत्र में निर्माण, विनिर्माण तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाएं शामिल हैं।
  • मुख्य अवधारणा
    • इस प्रकार के प्रश्नों में सभी विकल्पों में कोई साझा गुण (pattern) होता है
    • सिवाय एक के जो उससे मेल नहीं खाता।
    • उद्देश्य है अवलोकन शक्ति, वर्गीकरण (classification) और तर्क करने की क्षमता का परीक्षण।
    • ये SSC, UPSC, बैंकिंग, रेलवे जैसी परीक्षाओं के सामान्य ज्ञान या रीजनिंग सेक्शन में आते हैं।​​
  • प्रकार
    • शब्दाधारित: शब्दों का अर्थ, वर्ग या विशेषता से भिन्नता।
    • संख्या-आधारित: गणितीय संबंध या गुण।
    • आकृति-आधारित: चित्रों में पैटर्न, दिशा या विभाजन।
    • अक्षर-आधारित: अक्षरों का क्रम या कोड।​​
  • शब्दाधारित उदाहरण
    • निम्न विकल्पों में भिन्न चुनें: (a) धोखा देना (b) सत्य (c) प्रसन्नता (d) ईमानदारी।
    • भिन्न: (a) क्योंकि बाकी सकारात्मक गुण हैं, जबकि धोखा नकारात्मक।​
  • संख्या-आधारित उदाहरण
    • 54:6, 3:27, 81:9, 8:64।
    • भिन्न: (b) क्योंकि बाकी पहला घनमूल से दूसरा (जैसे 54 का घनमूल 3√54≈3.78, लेकिन वास्तव में 54÷6=9 जो 3²; पैटर्न cube:factor जहां cube/factor=cube root।
    • 3:27 विपरीत, 27÷3=9 लेकिन पैटर्न उल्टा। सटीक: बाकी पहला÷दूसरा=क्यूब रूट का वर्ग, लेकिन 3:27=9 लेकिन reverse।​
  • आकृति-आधारित उदाहरण
    • चार आकृतियों में दो समान वस्तुएँ विकर्ण पर हों, एक में समांतर। भिन्न वह जहाँ पैटर्न टूटे।​
  • हल करने की रणनीति
    • सभी विकल्पों का सामान्य गुण खोजें (अर्थ, संख्या, आकार)।
    • प्रत्येक को जाँचें कि कौन सा न मेल खाता।
    • पैटर्न जैसे prime, even-odd, synonyms देखें।
    • समय बचाने हेतु विकल्पों को जोड़ों में तौलें।​​
  • भिन्नों (Fractions) से संबंध
    • कभी "भिन्न" गणितीय भिन्नों को संदर्भित: उचित (अंश<हर), अनुचित (अंश>हर), मिश्रित।
    • लेकिन query context से reasoning अधिक संभावित।​
  • अभ्यास टिप्स
    • रोज 20 प्रश्न हल करें।
    • पैटर्न नोट करें: odd one out।
    • Testbook, Gradeup जैसे प्लेटफॉर्म्स पर प्रैक्टिस। ये परीक्षा में 2-5 अंक के होते हैं।

13. यदि एक आलेख (ग्राफ) में प्रकाशित समग्र मांग और प्रत्याशित समग्र पूर्ति को एक साथ प्लांट किया जाता है, तो किस बिंदु पर संतुलन प्राप्त होगा? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) जहां प्रत्याशित समग्र मांग प्रत्याशित समग्र पूर्ति के बराबर है।
Solution:
  • एक ग्राफिक आरेख में जहां प्रत्याशित समग्र मांग (AD) और प्रत्याशित समग्र आपूर्ति (AS) को एक साथ प्लांट की जाती है
  • तो संतुलन उस बिंदु पर पहुंच जाता है, जहां दो वक्र एक दूसरे को परिच्छेद करते हैं।
  • यह वास्तविक उत्पादन और मूल्य के स्तर का प्रतिनिधित्व करता है
  • जहां मांग की गई वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा (AD) आपूर्ति की मात्रा (AS) के बराबर होती है।
  • समग्र मांग और पूर्ति की अवधारणा
    • समग्र मांग (AD) वह कुल मात्रा है जो विभिन्न मूल्य स्तरों पर अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की मांग की जाती है
    • जिसमें उपभोक्ता व्यय, निवेश, सरकारी खर्च और निर्यात-आयात शामिल होते हैं।
    • दूसरी ओर, प्रत्याशित समग्र पूर्ति (Expected AS) उत्पादकों द्वारा अपेक्षित मूल्य स्तर पर उत्पादित होने वाली कुल मात्रा को दर्शाती है
    • जो अल्पकालिक या दीर्घकालिक आधार पर भिन्न हो सकती है। जब इन्हें एक ही ग्राफ पर प्लॉट किया जाता है
    • जहाँ x-अक्ष पर वास्तविक GDP (Y) और y-अक्ष पर मूल्य स्तर (P) होता है
    • तो AD वक्र नीचे की ओर ढलान वाला और AS वक्र ऊपर की ओर ढलान वाला होता है।​
    • इन वक्रों का प्रतिच्छेदन (Intersection Point) संतुलन बिंदु (Equilibrium Point) कहलाता है
    • जिसे आमतौर पर 'E' से चिह्नित किया जाता है। इस बिंदु पर, AD = AS हो जाता है
    • अर्थात् अर्थव्यवस्था में न तो अधिमांग (Excess Demand) होती है और न ही अधिपूर्ति (Excess Supply)। यदि AD > AS होता है
    • तो मूल्य स्तर बढ़ता है और उत्पादन बढ़ाने का दबाव पड़ता है; वहीं AS > AD होने पर मूल्य गिरते हैं
    • उत्पादन घटता है। यह समायोजन प्रक्रिया स्वतः संतुलन की ओर ले जाती है।​
  • संतुलन बिंदु की प्राप्ति प्रक्रिया
    • मान लीजिए प्रारंभिक संतुलन E0 पर है। यदि प्रत्याशित AS में वृद्धि होती है (वक्र दाईं ओर शिफ्ट), तो नया संतुलन E1 पर स्थापित होता है
    • जहाँ उत्पादन बढ़ता है लेकिन मूल्य स्तर घट सकता है। इसी प्रकार, AD में वृद्धि से E2 पर संतुलन शिफ्ट होता है
    • जहाँ दोनों मूल्य और उत्पादन बढ़ते हैं। ग्राफ में यह स्पष्ट दिखता है कि वक्र जितने अधिक प्रतिच्छेद करते हैं, उतना ही स्थिर संतुलन प्राप्त होता है।​
    • दीर्घकाल में, यदि AS पूरी तरह लंबवत (Vertical) हो जाती है (पूर्ण रोजगार स्तर पर), तो संतुलन केवल उत्पादन को प्रभावित नहीं करता
    • बल्कि केवल मूल्य स्तर बदलता है। किंतु प्रश्न में "प्रत्याशित समग्र पूर्ति" से अल्पकालिक AS का संकेत मिलता है
    • जो क्षैतिज या ऊपर की ओर ढलान वाली होती है।
    • इस स्थिति में संतुलन बिंदु पर वास्तविक GDP और मूल्य स्तर दोनों समायोजित होते हैं।​
  • प्रभाव और उदाहरण
    • उदाहरणस्वरूप, यदि महामारी के बाद सरकारी खर्च बढ़ने से AD शिफ्ट होती है
    • तो AS के साथ नया प्रतिच्छेदन बिंदु उच्च मूल्य और उच्च उत्पादन पर आता है
    • जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है।
    • वास्तविक जीवन में, भारत जैसे विकासशील देशों में RBI की मौद्रिक नीति इसी संतुलन को नियंत्रित करने के लिए उपयोग की जाती है।
    • यह बिंदु आर्थिक स्थिरता का सूचक है, जहाँ बेरोजगारी न्यूनतम और मुद्रास्फीति नियंत्रित रहती है।

14. निम्नलिखित में से कौन-सा पूंजीगत प्राप्ति का उदाहरण है? [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) बारोइंग्स (Borrowings) एवं लोन वसूली
Solution:
  • पूंजीगत प्राप्ति से तात्पर्य किसी पूंजीगत परिसंपत्ति के मूल्य में वृद्धि से है, जब उसे बेचा जाता है।
  • इसके उदाहरण हैं-बाजार ऋण, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विशेष प्रतिभूतियां जारी करना, अल्पकालिक उधार, बारोइंग्स एवं लोन वसूली आदि।
  • पूंजीगत प्राप्ति की परिभाषा
    • पूंजीगत प्राप्ति से तात्पर्य उस आय से है जो किसी कंपनी या सरकार के नियमित व्यावसायिक संचालन से उत्पन्न नहीं होती।
    • सरकारी संदर्भ में, यह ऋण लेना, संपत्ति बेचना या विनिवेश जैसी गतिविधियों से आती है
    • जो भविष्य में चुकानी पड़ सकती है या संपत्ति को प्रभावित करती है।
    • उदाहरणस्वरूप, उधार लेना या पहले दिए ऋण की वसूली पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आती है क्योंकि ये एकमुश्त धनप्रवाह हैं।​
  • सामान्य विकल्प और सही उदाहरण
    • प्रश्न अक्सर बहुविकल्पीय होता है, जैसे:
    • किराया और प्राप्त कमीशन
    • माल की बिक्री और किराया
    • कमीशन एवं प्राप्त लाभांश
    • उधार और ऋण वसूली
    • इनमें उधार और ऋण वसूली पूंजीगत प्राप्ति का सही उदाहरण है।
    • उधार बैंकों या वित्तीय संस्थानों से ली गई राशि है जो दायित्व सृजित करती है
    • जबकि ऋण वसूली पहले दिए गए ऋणों का पुनर्भुगतान है जो नियमित आय नहीं माना जाता।
    • अन्य विकल्प राजस्व प्राप्तियां हैं क्योंकि वे दैनिक संचालन से जुड़े होते हैं।​
  • अन्य प्रमुख उदाहरण
    • सरकार के लिए पूंजीगत प्राप्तियां निम्नलिखित हैं:
    • जनता या बैंकों से लिया गया ऋण।
    • विदेशी संस्थानों से उधार।
    • सार्वजनिक संपत्तियों का विनिवेश (जैसे शेयर बेचना)।
    • ये सभी निधि के अंतर्वाह को बढ़ाते हैं लेकिन स्थायी संपत्ति या दायित्व प्रभावित करते हैं।​
  • महत्वपूर्ण संदर्भ
    • पूंजीगत प्राप्तियां बजट घाटे को प्रभावित करती हैं और आर्थिक नीतियों में उपयोगी होती हैं।
    • कक्षा 12 की अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक (समष्टि भाग) में इकाई 5 में इन्हें विस्तार से समझाया गया है
    • जहां सरकारी बजट के अवयवों में इनका उल्लेख है। गलत विकल्प चुनने से बजट विश्लेषण प्रभावित होता है।​

15. निम्नलिखित में से कौन व्यापार के लिए सहायक या अनुषंगी नहीं है? [CGL (T-I) 03 दिसंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) जमाखोरी
Solution:
  • व्यापार के लिए सहायक या अनुषंगी क्रियाओं के अंतर्गत परिवहन, भंडारण, बीमा, पैकिंग, संचार, विज्ञापन आदि शामिल हैं। जबकि जमाखोरी इसके अंतर्गत नहीं आती है।
  • जमाखोरी क्यों सहायक नहीं?
    • जमाखोरी वह प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति या सट्टेबाज़ भविष्य में कीमतों के बढ़ने की आशा में वस्तुओं को बड़ी मात्रा में खरीदकर जमा कर लेता है
    • जिससे बाज़ार में कृत्रिम कमी पैदा होती है और कीमतें अनावश्यक रूप से बढ़ जाती हैं।
    • यह व्यापार को सुगम बनाने के बजाय बाधा उत्पन्न करती है, क्योंकि इससे सामान्य व्यापारियों और उपभोक्ताओं को नुकसान होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, आवश्यक वस्तुओं जैसे अनाज या दवाओं की जमाखोरी से बाज़ार में आपूर्ति बाधित हो जाती है।
  • व्यापार के प्रमुख सहायक
    • व्यापार सहायक वे हैं जो वस्तुओं के आदान-प्रदान की कठिनाइयों को दूर करते हैं। इनमें शामिल हैं:
    • परिवहन: माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के साधन जैसे रेल, सड़क, जल या वायु मार्ग।
    • यह उत्पादक से उपभोक्ता तक माल की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।​​
    • भंडारण (Warehousing): माल को सुरक्षित रखने और मांग के अनुसार आपूर्ति बनाए रखने की सुविधा। यह व्यापार को निरंतरता प्रदान करता है।​
    • बीमा: परिवहन या भंडारण के दौरान क्षति या हानि से वित्तीय सुरक्षा। यह जोखिम कम करता है।​
    • बैंकिंग: भुगतान, ऋण और वित्तीय लेन-देन की सुविधा, जो नकदी ले जाने के जोखिम को घटाती है।​​
    • संचार: खरीदार-विक्रेता के बीच सूचना आदान-प्रदान, जैसे टेलीफोन या इंटरनेट।​
    • विज्ञापन और बिक्री कला: माल की जानकारी फैलाना और बिक्री बढ़ाना।​
    • ये सभी माल के सुचारू प्रवाह को बढ़ावा देते हैं।​
  • विस्तृत उदाहरण और महत्व
    • व्यापार में बिना सहायकों के माल का प्रवाह असंभव होता।
    • मान लीजिए एक किसान हरियाणा (कैथल) से दिल्ली फल बेचना चाहता है
    • परिवहन से माल पहुँचेगा, भंडारण से मौसमी मांग पूरी होगी, बीमा से क्षति कवर होगी
    • लेकिन यदि कोई जमाखोरी करे तो फल की कीमतें असामान्य रूप से बढ़ेंगी।
    • भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत जमाखोरी दंडनीय है
    • क्योंकि यह व्यापार का शोषण करती है न कि सहायता।

16. ....... सरकार की वह आय है, जो बिना किसी कानूनी उत्तराधिकारी के लोगों द्वारा अदावाकृत संपत्ति से प्राप्त होती है। [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) राजगामी संपत्ति
Solution:
  • बिना किसी कानूनी उत्तराधिकारी या दावा-विहीन संपत्ति राजगामी (Escheat) संपत्ति है
  • अर्थात राजगामी (Escheat) संपत्ति सरकार की वह आय है
  • जो बिना किसी कानूनी उत्तराधिकारी के लोगों द्वारा अदावाकृत संपत्ति से प्राप्त होती है।
  • यह आमतौर पर तब होता है, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत या बिना वारिस के होती है।
  • परिभाषा और उत्पत्ति
    • राजगामित्व एक सामान्य कानूनी अवधारणा है जो तब लागू होती है
    • जब कोई व्यक्ति बिना वसीयत (will) या कानूनी उत्तराधिकारी के मर जाता है
    • ऐसी संपत्ति—जैसे चल-अचल संपत्ति, बैंक बैलेंस, शेयर आदि—राज्य सरकार को हस्तांतरित हो जाती है।
    • यह मध्ययुगीन यूरोपीय कानून से विकसित हुई और भारत सहित विश्व के कई देशों में मान्य है।
    • उद्देश्य है कि संपत्ति लावारिस न रहे और राज्य इसे सार्वजनिक कल्याण के लिए उपयोग कर सके।
    • भारतीय संदर्भ में, यह ब्रिटिश कालीन कानूनों से आती है
    • अब भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (Indian Succession Act) तथा राज्य-विशिष्ट कानूनों द्वारा शासित है।
    • हिंदू, मुस्लिम या ईसाई उत्तराधिकार नियमों के तहत यदि कोई वारिस न हो, तो संपत्ति escheat हो जाती है।​
  • कैसे कार्य करता है राजगामित्व?
    • प्रक्रिया: व्यक्ति की मृत्यु के बाद, यदि कोई कानूनी दावेदार (जैसे पुत्र, पुत्री, पत्नी, भाई-बहन आदि) न हो या संपत्ति पर कोई दावा न किया जाए
    • तो अदालत या प्रशासन जांच करता है। एक निश्चित अवधि (आमतौर पर 7-12 वर्ष) तक दावेदार न मिलने पर संपत्ति राज्य को सौंपी जाती है।
    • जांच: जिला मजिस्ट्रेट या कोर्ट ऑफ वार्ड्स जैसी संस्था संपत्ति का मूल्यांकन करती है। बैंक खाते, शेयर आदि के लिए RBI या SEBI दिशानिर्देश लागू होते हैं।
    • उदाहरण: यदि कोई अविवाहित व्यक्ति बिना वसीयत मर जाए और कोई रिश्तेदार न हो
    • तो उसका घर या बैंक बैलेंस राज्य सरकार की आय बन जाता है।
  • भारतीय कानूनी ढांचा
    • भारत में राजगामित्व राज्य विषय है, इसलिए प्रत्येक राज्य के कानून भिन्न हो सकते हैं:
    • भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925: धारा 29 के तहत, यदि कोई heir न हो, तो संपत्ति सरकार को escheat होती है।
    • हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956: वर्ग I और II वारिसों की सूची समाप्त होने पर escheat लागू।​
    • अन्य: मुस्लिम कानून में "उल्बा" जैसी अवधारणा, लेकिन अंततः राज्य को।
    • अनुच्छेद 300A संविधान में संपत्ति अधिकार की रक्षा करता है, लेकिन escheat अपवाद है क्योंकि यह कानूनी प्रक्रिया से होता है।

17. निम्नलिखित में से किसने कहा था कि 'पुरा' (PURA) उन तंत्रों में से एक है जिसका उपयोग हमारे गांवों को उत्पादक आर्थिक क्षेत्रों में बदलने के लिए किया जाएगा? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
Solution:
  • पुरा (PURA प्रोविजन ऑफ अर्बन एमेनिटीज इन रूलर - एरिया) को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा तीव्र एवं सशक्त ग्रामीण विकास के लिए प्रस्तुत किया गया था।
  • इसका उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी विभाजन को कम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों एवं शहरी सुविधाओं को उपलब्ध कराना है।
  • PURA की अवधारणा
    • PURA का पूरा नाम "Provision of Urban Amenities to Rural Areas" (ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं का प्रावधान) है।
    • यह एक ग्रामीण विकास मॉडल है
    • जो ग्रामीण इलाकों को शहरी स्तर की बुनियादी सुविधाएं प्रदान करके उन्हें आत्मनिर्भर और उत्पादक आर्थिक केंद्र बनाने पर केंद्रित है।
    • डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने इसे अपने विजन 2020 प्रोजेक्ट में प्रस्तावित किया था
    • जिसमें गांवों को रिंग रोड से जोड़कर बाजार, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर एकीकृत करने की बात कही गई।
  • कथन का सटीक संदर्भ
    • डॉ. कलाम ने स्पष्ट रूप से कहा, "PURA उन तंत्रों में से एक है
    • जिसका उपयोग हमारे गांवों को उत्पादक आर्थिक क्षेत्रों में बदलने के लिए किया जाएगा।" यह उद्धरण उनके ग्रामीण विकास दृष्टिकोण का हिस्सा था
    • जो जनवरी 2004 में चंडीगढ़ में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस के 90वें सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया।
    • उनकी पुस्तक "Target 3 Billion" में भी इसकी विस्तृत चर्चा है, जहां उन्होंने ग्रामीण-शहरी असंतुलन को दूर करने पर जोर दिया।
  • कलाम का योगदान
    • पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने PURA को एक नीतिगत उपाय के रूप में पेश किया
    • ग्रामीण प्रवास रुके और गांव आर्थिक रूप से मजबूत बनें। उन्होंने इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित बताया
    • जिसमें बिजली, पानी, सड़कें, स्वच्छता, कौशल विकास और पर्यटन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
    • इसका लक्ष्य 3-5 लाख आबादी वाले क्लस्टर को "आभासी शहर" बनाना था, जहां कृषि से परे उद्योग और सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
  • कार्यान्वयन और उद्देश्य
    • PURA के तहत गांवों को 30 किमी व्यास वाली रिंग रोड से जोड़ा जाता है
    • जिसमें लगातार बस सेवाएं, उच्च तकनीक और बाजार एकीकरण होता है।
    • भारत सरकार ने इसे ग्रामीण विकास योजनाओं में अपनाया, हालांकि पूर्ण कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा।
    • मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की उत्पादकता बढ़ाना, रोजगार सृजन करना और जीवन स्तर सुधारना है, न कि केवल खपत पर निर्भर रहना।
  • महत्वपूर्ण बिंदु
    • आर्थिक रूपांतरण: कृषि को कनेक्टिविटी और उद्योगों से जोड़कर गांवों को उत्पादक बनाना।​
    • सुविधाएं: स्ट्रीट लाइटिंग, ड्रेनेज, टेलीकॉम, स्वास्थ्य और शिक्षा।
    • प्रस्तुति: विजन 2020 और टारगेट 3 बिलियन में वर्णित।
    • यह मॉडल आज भी ग्रामीण भारत के सतत विकास के लिए प्रासंगिक बना हुआ है।

18. इनमें से कौन-सी टिकाऊ वस्तुओं की एक विशेषता नहीं है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) ये बार-बार खरीदी जा सकती हैं।
Solution:
  • टिकाऊ वस्तुएं जिसे उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं भी कहा जाता है, यह एक ऐसी श्रेणी है जो जल्दी खराब नहीं होती है
  • इसलिए उन्हें बार-बार खरीदना नहीं पड़ता है।
  • उदाहरण में बड़े और छोटे उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर और साज-समान शामिल हैं। अतः विकल्प (b) गलत है।
  • टिकाऊ वस्तुओं की परिभाषा
    •  जल्दी खराब नहीं होतीं। उदाहरणों में कार, फ्रिज, टीवी, फर्नीचर और वॉशिंग मशीन जैसे सामान आते हैं
    •  ये वस्तुएं अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का सूचक मानी जाती हैं, क्योंकि इनकी मांग उपभोक्ता विश्वास पर निर्भर करती है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • लंबा जीवनकाल: ये वस्तुएं कई वर्षों तक अपनी उपयोगिता बनाए रखती हैं।
    • बहु-उपयोग: इन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है बिना मूल्य के तेजी से क्षय हुए।
    • कम खरीद आवृत्ति: उपभोक्ताओं को इन्हें बार-बार नहीं खरीदना पड़ता
    • जो इन्हें गैर-टिकाऊ वस्तुओं (जैसे दूध, साबुन) से अलग करता है।​
  • कौन-सी विशेषता नहीं है?
    • "बार-बार खरीदारी के लिए बनी होना" टिकाऊ वस्तुओं की विशेषता नहीं है।
    • यह गैर-टिकाऊ वस्तुओं पर लागू होता है, जो एक बार उपयोग में आकर समाप्त हो जाती हैं।
    • टिकाऊ वस्तुएं ठीक इसके विपरीत होती हैं—ये लंबे समय तक चलने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं।​

19. NAFED के संबंध में दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

i. NAFED बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत है।

ii. इसकी स्थापना किसानों के लाभ के लिए, कृषि उपज के सहकारी विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।

iii. इसकी स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी।

Correct Answer: (a) केवल i और ii
Solution:
  • नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) एक सहकारी समिति है
  • जो बहु-राज्य सरकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत है। इसका उद्देश्य-कृषि उपज के सहकारी विपणन को बढ़ावा देना था
  • जिससे किसानों को लाभ होगा। इसकी स्थापना 2 अक्टूबर, 1958 को हुई थी।
  • NAFED की स्थापना और पंजीकरण
    • NAFED की स्थापना 2 अक्टूबर 1958 को हुई थी।
    • यह बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम के तहत पंजीकृत है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य कृषि सहकारी विपणन को प्रोत्साहित करना है ताकि किसानों को अधिक लाभ मिले।
  • मुख्य उद्देश्य
    • सहकारी विपणन के माध्यम से कृषि, बागवानी और वन उपज का व्यवस्थित विपणन, प्रसंस्करण और भंडारण।
    • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दालें, तिलहन और कपास जैसी फसलों की खरीद।
    • ऑपरेशन ग्रीन्स" के तहत मूल्य स्थिरीकरण के लिए नोडल एजेंसी।
  • प्रमुख कार्य
    • NAFED किसानों के हित में खरीद, भंडारण, वितरण और निर्यात करता है।
    • यह FCI के साथ मिलकर प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) लागू करता है।
    • इसके अलावा, यह जैविक उत्पाद, बीज वितरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है।
  • महत्वपूर्ण कथन और सत्यापन
    • प्रश्न में संदर्भित कथन (जैसा कि सामान्य परीक्षा प्रश्नों में आते हैं) इस प्रकार हैं:
    • NAFED बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम के तहत पंजीकृत है - सही।
    • इसकी स्थापना किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि उपज के सहकारी विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई - सही।
    • इसकी स्थापना 1958 में हुई थी - सही।

20. निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) स्पर्धी परिसंपत्ति बाजार की दशा में बंधपत्र की कीमत अपने वर्तमान मूल्य के बराबर संतुलन की स्थिति में होगी।
Solution:
  • प्रतिस्पर्धी परिसंपत्ति (Competitive Assets) बाजार की स्थिति के तहत संतुलन की स्थिति में बंधपत्र (Bond) की कीमत अपने वर्तमान मूल्य के बराबर होनी चाहिए
  • क्योंकि स्पर्धी बाजार में खरीददारों और विक्रेताओं के पास समान जानकारी तक पहुंच होती है
  • वे बाजार मूल्य पर लेन-देन करने में सक्षम होते हैं, जो बॉण्ड के वर्तमान मूल्य को दर्शाता है।
  • सामान्य उदाहरण
    • कक्षा 6 गणित (पूर्ण संख्याएँ) से एक सामान्य प्रश्न:
    • निम्न कथनों में कौन-सा सत्य है?​
    • कोई पूर्ववर्ती पूर्णांक संख्या नहीं है।
    • पूर्णांक 13, 11 और 12 के बीच आती है।
    • सत्य कथन: (i) सत्य है, क्योंकि पूर्णांक श्रेणी में 0 सबसे छोटी है
    • इसका कोई पूर्ववर्ती नहीं। (ii) असत्य है, क्योंकि 13 इनके बाद आती है।​
  • अन्य उदाहरण
  • भौतिकी (कक्षा 11)
    • निम्न में कौन-सा सत्य है?​
    • विज्ञान पर कोई अंतिम सिद्धांत नहीं है।
    • सत्य: विज्ञान विकसित होता रहता है, कोई स्थायी अंतिम सत्य नहीं।​
  • ज्यामिति (कक्षा 9)
    • एक बिंदु से केवल एक रेखा खींची जा सकती है?​
    • असत्य: एक बिंदु से अनंत रेखाएँ संभव हैं।​