विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-IITotal Questions: 5041. मांग वक्र के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 11 मार्च , 2023 (I-पाली)]I. यह मांग फलन का एक ग्राफिक चित्रण है।II. यह उपभोक्ता द्वारा प्रत्येक मूल्य पर मांगी गई मात्रा को प्रकट करता है।(a) केवल II(b) I और II दोनों(c) केवल I(d) न तो I और न ही IICorrect Answer: (b) I और II दोनोंSolution:मांग वक्र वस्तुओं की मांग और कीमत के बीच ग्राफिकल प्रतिनिधित्व के रूप में परिभाषित किया जाता हैयह भी कि उनके मूल्यों में परिवर्तन के साथ ग्राफ कैसे बदलता है।मांग वक्र, मांग के नियम और आपूर्ति के नियम के परिणामस्वरूप आता है।यह उपभोक्ता द्वारा प्रत्येक मूल्य पर मांगी गई मात्रा को प्रकट करता है।मांग वक्र की परिभाषाजैसे-जैसे कीमत घटती है, मांग की मात्रा बढ़ती जाती है, जिससे वक्र नीचे की ओर झुकता है।यह उपभोक्ता की कम कीमत पर अधिक खरीदने की प्रवृत्ति को दिखाता है, क्योंकि उनकी क्रय शक्ति बढ़ जाती है।उदाहरणस्वरूप, यदि किसी वस्तु की कीमत ₹10 प्रति इकाई है तो 10 इकाइयों की मांग होलेकिन कीमत ₹5 होने पर मांग 20 इकाइयों तक पहुंच जाए। यह संबंध मांग के नियम पर आधारित हैअन्य बातें (जैसे आय, स्वाद, संबंधित वस्तुओं की कीमतें) समान रहने पर कीमत वृद्धि से मांग घटती है।मांग वक्र का ढलानमांग वक्र का ढलान नकारात्मक (ऋणात्मक) होता है, अर्थात् यह दाएं ओर नीचे की ओर झुकता है। इसका कारण पांच प्रमुख प्रभाव हैं:प्रतिस्थापन प्रभाव: कीमत घटने पर सस्ती वस्तु अन्य महंगी विकल्पों की जगह ले लेती है।आय प्रभाव: कम कीमत से उपभोक्ता की वास्तविक आय बढ़ती है, जिससे अधिक खरीदारी संभव होती है।शॉर्ट रन में कमोडिटी मार्केट प्रभाव: सामान्य वस्तुओं के लिए कीमत गिरने से बाजार में आपूर्ति बढ़ती है। यह ढलान मांग के नियम का प्रमाण है, हालांकि गिफेन वस्तुओं या वेब्लेन वस्तुओं जैसे अपवादों में वक्र ऊपर की ओर भी झुक सकता है।सही कथन क्या हैं?प्रश्न में "निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?" का संदर्भ सामान्यतः बहुविकल्पीय प्रश्नों से लिया जाता है, जहां निम्नलिखित सही होते हैं:कथन I: मांग वक्र वस्तु की कीमत और मांग की गई मात्रा के बीच संबंध दर्शाता है। (सही, क्योंकि यह मूल परिभाषा है।)कथन II: मांग वक्र प्रत्येक कीमत पर उपभोक्ता द्वारा मांगी गई मात्रा को दर्शाता है। (सही, क्योंकि यह कीमत-मात्रा संबंध पर आधारित है।)गलत कथन हो सकता है: "मांग वक्र विभिन्न समयों पर मांग की मात्रा दर्शाता है" – क्योंकि यह विभिन्न कीमतों पर केंद्रित होता है, न कि समय पर।मांग वक्र के प्रकारमांग वक्र की लोच के आधार पर विभिन्न आकार होते हैं:पूर्णतः लोचदार: क्षैतिज रेखा (कीमत स्थिर रहने पर मात्रा असीमित बदल सकती है)।पूर्णतः अलोचदार: लंबवत रेखा (मात्रा कीमत पर निर्भर नहीं)।इकाई लोचदार: मध्य बिंदु से गुजरने वाली वक्र।42. यूनाइटेड नेशन्स कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की आर्थिक विकास दर के वर्ष 2021 में 8.2% से वर्ष 2022 में ....... तक घटने का अनुमान है। [CHSL (T-I) 15 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) 6.8%(b) 5.7%(c) 6.3%(d) 5.9%Correct Answer: (b) 5.7%Solution:UNCTAD की ट्रेड एंड डेवलपमेंट रिपोर्ट-2022 के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी ग्रोथ रेट) वर्ष 2021 में 8.2 प्रतिशत रहीजबकि वर्ष 2022 के लिए यह गिरकर 5.7 प्रतिशत तथा वर्ष 2023 के लिए 4.7 प्रतिशत पूर्वानुमानित थी।'ट्रेड एंड डेवलपमेंट रिपोर्ट, 2024 के अनुसार, वर्ष 2021, वर्ष 2022 तथा वर्ष 2023 के लिए भारत की वृद्धि दर संशोधित होकर क्रमशः 7.8 प्रतिशत, 5.8 प्रतिशत तथा 5.5 प्रतिशत दर्ज है, जबकि वर्ष 2024 के लिए यह 5.5 प्रतिशत पूर्वानुमानित है।कारणरिपोर्ट के अनुसार, यह कमी उच्च वित्तपोषण लागत, कमजोर सार्वजनिक व्यय, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के कम होने के बाद बढ़ती घरेलू मांग से चालू खाता अधिशेष के घाटे में बदलने के कारण हुई।जीवाश्म ऊर्जा के बढ़ते आयात बिल ने व्यापार घाटा गहरा किया और विदेशी मुद्रा भंडार की आयात कवरेज क्षमता को प्रभावित किया।आगे का अनुमानUNCTAD ने 2023 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि को और घटकर 4.7% रहने का अनुमान लगायाक्योंकि सरकार पूंजीगत व्यय (रेल और सड़क क्षेत्र में) बढ़ाने की योजना बना रही थीलेकिन वैश्विक मंदी और राजकोषीय असंतुलन के दबाव में अन्य क्षेत्रों में व्यय कम हो सकता था।दक्षिण एशिया क्षेत्र की 2022 में 4.9% और 2023 में 4.1% वृद्धि का पूर्वानुमान थाऊर्जा मूल्यों से मुद्रास्फीति और भुगतान संतुलन बाधाओं के कारण।वैश्विक संदर्भ2021 में कोविड के बाद असमान सुधार के बाद, विश्व अर्थव्यवस्था 2022 में 2.5% और 2023 में 2.2% बढ़ने का अनुमान थाकई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आय 2019 स्तर से नीचे रहने के कारण।अमेरिका की वृद्धि 2021 के 5.7% से घटकर 2022 में 1.9% और 2023 में 0.9% रहने की उम्मीद थी।उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति का बड़ा हिस्सा तेल जैसे वस्तु मूल्यों से प्रेरित था।भारत की ताकतभारत ने 2021 में G20 देशों में सबसे मजबूत 8.2% वृद्धि दर्ज की।उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) ने कॉर्पोरेट निवेश को बढ़ावा दियालेकिन वैश्विक संकटों ने दबाव बनाया।43. इनमें से क्या सूक्ष्म वित्त की व्याख्या नहीं कर सकता है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) वित्तीय सेवाएं गरीबों को आय जुटाने की प्रक्रिया में तेजी लाने में सक्षम बना सकती हैं।(b) वित्तीय सेवाएं गरीबों को संपत्ति जुटाने और आर्थिक सुरक्षा की प्रक्रिया में तेजी लाने में सक्षम बना सकती हैं।(c) वित्तीय सेवाएं गरीबों को उनके उद्यमशीलता के अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बना सकती हैं।(d) वित्तीय सेवाएं गरीबों को जमाराशियों पर उच्च ब्याज दर अर्जित करने में सक्षम बना सकती हैं।Correct Answer: (d) वित्तीय सेवाएं गरीबों को जमाराशियों पर उच्च ब्याज दर अर्जित करने में सक्षम बना सकती हैं।Solution:सूक्ष्म वित्त (Micro Finance) एक गैर-लाभकारी, सामाजिक और कल्याणकारी उपाय हैजो समुदाय-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से घरेलू आय में वृद्धि करके सामाजिक कल्याण को प्रेरित करता है।यह गरीब और कम आय वाले परिवारों को अपनी आय स्तर को बढ़ाने, उनके जीवन स्तर में सुधार करके गरीबी से बाहर निकलने में सक्षम बनाता है।गरीबी में कमी, महिला सशक्तीकरण, कमजोर समूहों को सहायता और सामुदायिक विकास को लक्षित करने का यह साधन भी है।अतः सूक्ष्म वित्त के संदर्भ में विकल्प (d) को छोड़कर शेष सभी सही हैं।सूक्ष्म वित्त क्या है?यह स्वयं सहायता समूहों, गैर-सरकारी संस्थाओं या विशेष बैंकों के माध्यम से काम करता हैजहां कोई सट्टा (कोलैटरल) की जरूरत नहीं पड़ती।मुख्य फोकस गरीबी उन्मूलन, उद्यमिता और आर्थिक समावेशन पर रहता है।सूक्ष्म वित्त की मुख्य विशेषताएंछोटे आकार के ऋण: सामान्यतः 1 लाख रुपये तक, छोटे व्यवसाय या दैनिक जरूरतों के लिए।गट-आधारित उधार: समूह सामूहिक रूप से जिम्मेदारी लेते हैं, जो डिफॉल्ट कम करता है।कम ब्याज दरें: पारंपरिक बैंकों से सस्ती, लेकिन संचालन लागत के कारण ऊंची लग सकती हैं।बिना सट्टे का ऋण: सामाजिक दबाव से वसूली होती है।क्या सूक्ष्म वित्त की व्याख्या नहीं करता?वित्तीय सेवाएं जो गरीबों को जमाराशियों पर उच्च ब्याज दर अर्जित करने में सक्षम बनाती हैं।सूक्ष्म वित्त मुख्य रूप से क्रेडिट (ऋण) प्रदान करने पर केंद्रित है, न कि जमाराशियों पर ऊंचा रिटर्न देने पर।गरीबों के पास बचत करने लायक अतिरिक्त पूंजी कम होती हैइसलिए उच्च ब्याज कमाने का लक्ष्य नहीं है—यह पारंपरिक बचत खातों या निवेश योजनाओं की विशेषता है।अन्य संभावित विकल्प जो फिट नहीं होतेयदि मानक MCQ विकल्प हों (जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं में):बड़े उद्योगों को ऋण: सूक्ष्म वित्त केवल छोटे/गरीब उद्यमियों के लिए।लंबी अवधि के बड़े ऋण: यह छोटे और अल्पकालिक होता है।उच्च कोलैटरल की मांग: सूक्ष्म वित्त बिना गारंटी का होता है।ये सभी सूक्ष्म वित्त से मेल नहीं खाते।भारत में सूक्ष्म वित्त का महत्वभारत में NABARD, SHG-BLP और MFIs जैसे बंधन लाइफ जैसे संस्थान सक्रिय हैं।यह ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाता है, रोजगार बढ़ाता है।हालांकि, अति-ऋणग्रस्तता एक चुनौती है। 2026 तक, यह वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहा है।44. निम्नलिखित में से किस एक विकल्प को छोड़कर बाकी सभी कारण गरीबों तक ऋण की पहुंच के अभाव की व्याख्या करते हैं? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) प्रबंधन की लागत (administration costs) को कम करने के लिए ऋणदाता कम संख्या में बड़े ऋणों का लेनदेन करना पसंद करते हैं(b) सूचना निगरानी की कम लागत(c) आय के स्थायी स्रोत का अभाव(d) निर्बंध स्वत्व वाले ऋणाधार का अभावCorrect Answer: (b) सूचना निगरानी की कम लागतSolution:प्रबंधन की लागत को कम करने के लिए ऋणदाता कम संख्या में बड़े ऋणों को लेन-देन करना पसंद करते हैंआय के स्थायी स्रोत का अभाव और निर्बंध स्वत्व वाले ऋणाधार का अभाव आदि सभी कारण गरीबों तक ऋण की पहुंच के अभाव की व्याख्या करते हैंजबकि 'सूचना निगरानी की कम लागत' गरीबों तक ऋण की पहुंच की व्याख्या नहीं करता है।मुख्य कारणगरीबों को ऋण न मिलने का प्रमुख कारण उनकी आय के स्थिर स्रोत की कमी होती हैक्योंकि इससे बैंक या उधारदाता उनकी चुकाने की क्षमता का आकलन नहीं कर पाते और डिफ़ॉल्ट का जोखिम बढ़ जाता हैइसके अलावा, स्पष्ट शीर्षक वाले संपार्श्विक का अभाव उधारदाताओं को असुरक्षित महसूस कराता हैजिससे वे छोटे ऋण देने से हिचकते हैं. तीसरा महत्वपूर्ण कारण ऋणदाता प्रशासन की उच्च लागत हैक्योंकि बैंक बड़े ऋणों को प्राथमिकता देते हैं ताकि प्रति ऋण लागत कम हो, जबकि गरीबों को छोटे-छोटे ऋण चाहिए होते हैं.अपवाद का कारणकम सूचना निगरानी लागत वास्तव में ऋण पहुंच के अभाव को नहीं बल्कि इसके बढ़ावा को दर्शाती है।गरीबों के बारे में कम जानकारी होने पर उधारदाताओं को ज्यादा निगरानी खर्च करनी पड़ती हैजो उच्च होती है न कि कम। यह असममित सूचना (information asymmetry) की समस्या पैदा करती हैजहां उधारकर्ता के इरादों का सही आकलन कठिन होता है।अन्य संदर्भ कारकभारत जैसे विकासशील देशों में यह समस्या व्यापक हैजहां ग्रामीण गरीब विपणन योग्य संपत्ति के अभाव में अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भर रहते हैं।क्रेडिट इतिहास की कमी और जटिल बैंकिंग प्रक्रियाएं भी पहुंच बाधित करती हैं।सरकार की योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना वित्तीय समावेशन बढ़ाने का प्रयास करती हैं, लेकिन जमीनी चुनौतियां बनी रहती हैं।45. केंद्र सरकार ने देश भर में समाचार और समसामयिक मामलों के प्रकाशकों के लिए एक स्व-नियामक निकाय के रूप में प्रिंट और डिजिटल मीडिया एसोसिएशन (PADMA) को मंजूरी दी। इस संगठन का प्रमुख कौन है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) मूलचंद गर्ग(b) गिरिधर अरमाने(c) कृष्णेंद्र प्रताप सिंह(d) महेश कुमार शर्माCorrect Answer: (a) मूलचंद गर्गSolution:सरकार ने देशभर में समाचार और समसामयिक विषयों के प्रकाशकों के लिए स्व-नियामक निकाय के रूप में प्रिंट और डिजिटल मीडिया एसोसिएशन को मंजूरी दे दी है।इस संगठन का नेतृत्व उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मूलचंद गर्ग करेंगे।PADMA क्या है?PADMA देश भर के समाचार और समसामयिक मामलों के प्रिंट एवं डिजिटल प्रकाशकों के लिए एक स्व-नियामक संगठन है।इसमें 47 डिजिटल न्यूज प्रकाशक शामिल हैं, जो सदस्य प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल मीडिया सामग्री से जुड़ी शिकायतों की जांच करते हैं।केंद्र सरकार ने दिसंबर 2022 में इसे आधिकारिक मान्यता दी, जिससे मीडिया उद्योग में स्व-नियमन को बढ़ावा मिला।नेतृत्व संरचनासंगठन का नेतृत्व मूल चंद गर्ग (पूर्व हाई कोर्ट जज) द्वारा किया जाता है।अन्य प्रमुख सदस्यों में प्रसार भारती के पार्ट-टाइम सदस्य अशोक कुमार टंडन (वरिष्ठ नौकरशाह) और पत्रकार मंजू कुमार मिश्रा शामिल हैं।यह टीम मीडिया सामग्री की गुणवत्ता, नैतिकता और शिकायत निपटान सुनिश्चित करती है।उद्देश्य और कार्यसदस्य प्रकाशकों के प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज सामग्री से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई।डिजिटल मीडिया के लिए स्व-नियमन मानदंड स्थापित करना, बिना सरकारी हस्तक्षेप के।प्रिंट और डिजिटल मीडिया के बीच एकरूपता लाना।यह निकाय मीडिया की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए जवाबदेही सुनिश्चित करता है।पृष्ठभूमि और महत्वPADMA का गठन डिजिटल मीडिया के तेज विकास के बीच हुआ, जहां शिकायत प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ी।मंत्रालय के 2 दिसंबर 2022 के आदेश ने इसे पंजीकृत किया। इससे पहले समान संगठनों की कमी थीइसलिए यह मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करता है।2026 तक इसका विस्तार जारी है, जैसा हालिया अपडेट्स से पता चलता है।46. निम्नलिखित में से कौन-सा पूंजीगत प्राप्ति का एक उदाहरण है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)](A) बाघों को बचाने की परियोजना का वित्तपोषण करने के लिए विश्व बैंक से ऋण-ग्रहण करना(B) निजी कंपनियों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) में 30% हिस्सेदारी की बिक्री(a) केवलं A(b) केवल B(c) न तो A और न ही B(d) A और B दोनोंCorrect Answer: (d) A और B दोनोंSolution:पूंजीगत प्राप्तियां वे प्राप्तियां हैं, जो देनदारियां पैदा करती हैं या वित्तीय परिसंपत्तियों को कम करती हैं।वे आने वाले नकदी प्रवाह का भी उल्लेख करती हैं। पूंजीगत प्राप्तियां गैर-ऋण और ऋण प्राप्तियां दोनों हो सकती हैंअर्थात विश्व बैंक से ऋण और किसी पीएसयू में हिस्सेदारी की बिक्री पूंजी प्राप्ति का हिस्सा है।पूंजीगत प्राप्ति के प्रमुख उदाहरणउधार या ऋण लेना: सरकार जब जनता, बैंकों या विदेशी संस्थानों से ऋण लेती है, तो यह पूंजीगत प्राप्ति है क्योंकि इससे देयता बढ़ती है।ऋण वसूली: पहले दिए गए ऋणों या अग्रिमों की वसूली, जो संपत्ति (रिसीवेबल) को नकद में बदल देती है।संपत्ति का विनिवेश: सरकारी संपत्तियों (जैसे शेयर, भूमि) की बिक्री, जो संपत्ति को कम करती है।विदेशी सहायता या ऋण: अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से प्राप्त पूंजीगत सहायता ।ये उदाहरण नियमित आय से अलग होते हैं, जैसे किराया या कमीशन जो राजस्व प्राप्ति हैं ।पूंजीगत प्राप्ति का महत्वसरकार के लिए ये प्राप्तियां विकास परियोजनाओं (जैसे सड़कें, अस्पताल) को वित्तपोषित करने में सहायक होती हैंलेकिन अत्यधिक निर्भरता घाटा बढ़ा सकती है। कंपनियों में, ये विस्तार या संकट प्रबंधन के लिए उपयोगी हैं।भारत जैसे विकासशील देशों में, पूंजीगत प्राप्तियां बजट घाटे को संतुलित करने का साधन हैं ।सामान्य प्रश्नों के उत्तरप्रश्न जैसे "निम्नलिखित में से कौन-सा पूंजीगत प्राप्ति का उदाहरण हैविकल्पों के अभाव में, उधार और ऋण वसूली सबसे सटीक उदाहरण हैंक्योंकि किराया/कमीशन राजस्व हैं । कर वसूली या माल बिक्री राजस्व प्राप्ति हैं।47. दूसरी G20 स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक (अक्टूबर 2022 में आयोजित), जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने संबोधित किया था, ....... आयोजित की गई थी। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) काठमांडू, नेपाल(b) बाली, इंडोनेशिया(c) थिम्पू, भूटान(d) नई दिल्ली, भारतCorrect Answer: (b) बाली, इंडोनेशियाSolution:तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इंडोनेशिया के बाली में जी-20 स्वास्थ्य मंत्रियों की दूसरी बैठक को संबोधित किया था।आयोजन विवरणयह बैठक अक्टूबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में हुई, जब G20 की अध्यक्षता इंडोनेशिया के पास थी।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इसमें भारत का प्रतिनिधित्व कियाउद्घाटन सत्र को संबोधित किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताओं पर प्रगति की समीक्षा और आगे की राह तय करना थाजिसमें कोविड-19 के बाद वैश्विक स्वास्थ्य लचीलापन मजबूत करना शामिल था।डॉ. मांडविया का संबोधनडॉ. मांडविया ने अपने भाषण में कहा कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देता हैआने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ ग्रह छोड़ने का संकल्प लेता है।उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य वास्तुकला की कमियों को स्वीकार करते हुए एक समावेशी, चुस्त और आपात प्रबंधन के लिए उत्तरदायी ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया।इसके अलावा, उन्होंने G20 सदस्यों से प्रस्तावित ग्लोबल फेडरेटेड पब्लिक ट्रस्ट डायरेक्टरी के लिए पब्लिक कीज साझा करने का आह्वान कियालोगों और वस्तुओं की वैश्विक गतिशीलता सुगम हो।प्रमुख चर्चा बिंदुबैठक में स्वास्थ्य कार्य समूह (हेल्थ वर्किंग ग्रुप) के एजेंडे पर फोकस रहा, जिसमें फाइनेंशियल इंटरमीडियरी फंड का प्रस्ताव चर्चा में आया।डॉ. मांडविया ने समापन भाषण में डब्ल्यूएचओ, गावी, जी7 और जी20 जैसे संगठनों के बीच सहयोग को मजबूत करने की बात कही ताकि वैश्विक स्वास्थ्य परितंत्र बने।यह बैठक G20 नेताओं की शिखर बैठक से पहले महत्वपूर्ण थी, जहां स्वास्थ्य मुद्दों पर अंतिम दस्तावेज तैयार हुआ।भारत की भूमिकाभारत ने बैठक में भविष्य-प्रसंग स्वास्थ्य प्रणाली बनाने के लिए योगदान का वादा किया।डॉ. भारती प्रविण पवार जैसे अन्य अधिकारियों की मौजूदगी ने भारत के प्रतिनिधिमंडल को मजबूत बनाया।यह घटना G20 में भारत की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है, जो बाद में 2023 में गांधीनगर में भारत की मेजबानी वाली बैठक से जुड़ी।48. डेविड रिकार्डो के अनुसार, उच्च घाटे की स्थिति के दौरान करारोपण और ऋण-ग्रहण, व्यय के लिए खर्च करने के ....... वित्त साधन हैं। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली)](a) रियायती(b) विवेकपूर्ण(c) समतुल्य(d) विभेदितCorrect Answer: (c) समतुल्यSolution:डेविड रिकार्डो के अनुसार, उच्च घाटे की स्थिति के दौरान सरकारी व्यय हेतु करारोपण एवं ऋण-ग्रहण, एक समतुल्य वित्तीय साधन हैं।रिकार्डो ने अपने निबंध "Essay on the funding system" में यह निष्कर्ष दिया कि सरकारी बॉण्ड जारी करके या कराधान बढ़ाकर सरकारी व्यय को वित्तपोषित किया क्योंकि यही दो साधन सरकार के पास सर्वाधिक उपयुक्त होते हैं।रिकार्डो का समतुल्य सिद्धांत (Ricardian Equivalence)इस सिद्धांत के मूल में यह धारणा है कि तर्कसंगत व्यक्ति (rational agents) सरकार के ऋण को भविष्य के करों का पूर्वानुमान मानते हैं।उदाहरणस्वरूप, यदि सरकार आज ऋण लेकर कल्याणकारी व्यय करती हैतो नागरिक अपनी आय का बड़ा हिस्सा बचत में डाल देते हैं, ताकि आने वाले समय में बढ़े करों का बोझ उठा सकें।उच्च घाटे की स्थिति में प्रभावउच्च घाटे वाली स्थिति में, अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में होती है, जैसे मंदी या युद्ध जैसी परिस्थितियां।रिकार्डो के अनुसार, यहां कर बढ़ाना आर्थिक गतिविधियों को हतोत्साहित कर सकता हैक्योंकि यह उपभोग और निवेश को कम करता है। दूसरी ओर, ऋण लेना प्रतीततः बेहतर लगता हैलेकिन समतुल्य सिद्धांत के तहत इसका कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलताक्योंकि निजी बचत बढ़ जाती है। नतीजतन, कुल मांग में कोई वृद्धि नहीं होती।हालांकि, रिकार्डो ने चेतावनी दी कि अत्यधिक ऋण से ब्याज दरें ऊंची हो सकती हैं, मुद्रास्फीति बढ़ सकती हैदीर्घकालिक विकास प्रभावित हो सकता है। इसलिए, घाटे का प्रबंधन कराधान और ऋण के संतुलित मिश्रण से करना चाहिए।सिद्धांत की आलोचना और सीमाएंयह सिद्धांत पूर्णतः क्लासिकल अर्थशास्त्र पर आधारित है, जो परिपूर्ण सूचना और तर्कसंगत व्यवहार मानता है।आधुनिक अर्थशास्त्री जैसे जॉन मेनार्ड केन्स ने असहमति जताईक्योंकि वास्तविक दुनिया में लोग भविष्य के करों को पूरी तरह पूर्वानुमानित नहीं करते और ऋण से प्रेरित व्यय मांग बढ़ा सकता है।भारतीय संदर्भ में, जैसे 2024-25 के बजट में राजकोषीय घाटे को लक्षित किया गयारिकार्डो का सिद्धांत प्रासंगिक है, क्योंकि उच्च ऋण जमा ब्याज बोझ बढ़ा सकता है।व्यावहारिक उदाहरणमान लीजिए सरकार 100 इकाई व्यय के लिए 50 इकाई कर और 50 इकाई ऋण लेती है।रिकार्डो के अनुसार, ऋण लेने पर लोग 50 इकाई अतिरिक्त बचत करेंगे, जिससे कुल प्रभाव शून्य।यदि पूर्ण कर लगाया जाए, तो तत्काल उपभोग घटेगा। दोनों ही मामलों में अर्थव्यवस्था पर समान दबाव।49. निम्न में से मिन्न विकल्प को पहचानिए। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली)](a) नैज मूल्य(b) जारी करने वाले प्राधिकारी की गारंटी(c) कागजी मुद्रा(d) वैध मुद्राCorrect Answer: (a) नैज मूल्यSolution:विकल्प (a) को छोड़कर शेष सभी मुद्रा (Money) से संबंधित हैं, जबकि विकल्प (a) संपत्ति (Asset) से संबंधित है।नैज मूल्य (Intrinsic Value) किसी कंपनी, स्टॉक आदि का अनुमानित या गणना किया गया मूल्य हैजो मौलिक विश्लेषण के माध्यम से निर्धारित किया जाता है। इसमें मूर्त और अमूर्त कारक शामिल हैं।इसे वास्तविक मूल्य भी कहा जाता है और यह वर्तमान बाजार मूल्य के समान हो भी सकता है और नहीं भी।परीक्षा संदर्भऐसे प्रश्न तर्कशक्ति (reasoning) अनुभाग में आते हैं। उदाहरणस्वरूप, शब्द क्रम वाले प्रश्न में विकल्प चुनना पड़ता हैजो सही क्रम दर्शाता है। एक वीडियो में शब्द "सब्जी, काटना, तैयार करना, पैक करना, स्टोर करनापरोसना" का सही क्रम 2-6-4-3-5-1 बताया गया, जो विकल्प 3 था।गणितीय उदाहरणसंख्याओं में पैटर्न खोजें। जैसे, विकल्प: 83, 34, 47, 62।यहाँ 34=6²-2, 47=7²-2, 62=8²-2, लेकिन 83=9²+2, अतः 83 मिन्न है।अन्य उपयोगकभी आकृतियों या शब्द वर्तनी में भी पूछा जाता है, जैसे शुद्ध शब्द चुनना।पूर्ण प्रश्न के बिना विशिष्ट उत्तर असंभव, लेकिन पैटर्न विश्लेषण मुख्य कुंजी है।50. निम्नलिखित में से कौन-सा उन मूलभूत प्रश्नों में से एक नहीं है जिसका प्रत्येक समाज को जबाव देने की आवश्यकता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) किन वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करना है?(b) वस्तुओं का वितरण कैसे किया जाना चाहिए?(c) वस्तुओं का विनिमय कैसे किया जाना चाहिए?(d) वस्तुओं का उत्पादन कैसे किया जाना चाहिए?Correct Answer: (c) वस्तुओं का विनिमय कैसे किया जाना चाहिए?Solution:प्रत्येक समाज का मूलभूत प्रश्न है जिसका उत्तर प्रत्येक समाज को जीवित रहने और फलने-फूलने के लिए देने की आवश्यकता है।अर्थशास्त्र के चार मौलिक प्रश्न हैं-क्या उत्पादन करना हैउत्पादन कैसे करें, उत्पादन किसके लिए करें तथा वस्तुओं और सेवाओं का वितरण कैसे किया जाए।वस्तुओं का विनिमय कैसे किया जाए। यह सामाजिक दायित्व नहीं है।मूलभूत प्रश्नों का अर्थ उदाहरणस्वरूप, "क्या उत्पादन करना है?" यह तय करता हैसमाज को भोजन, वस्त्र, आवास जैसी प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहिए या लक्जरी वस्तुओं पर।उत्पादन कैसे करना है?" तकनीक, श्रम विभाजन और संसाधन उपयोग की बात करता है।किसके लिए?" मांग और उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं को संबोधित करता हैजबकि "वितरण कैसे?" न्यायपूर्ण हिस्सेदारी सुनिश्चित करता है।ये प्रश्न समाज को जीवित रखने और विकसित करने के लिए अनिवार्य हैंक्योंकि बिना इनके संसाधन असंतुलित हो जाते हैं।प्रश्न का संदर्भप्रश्न अधूरा लगता है क्योंकि विकल्प ("निम्नलिखित में से") निर्दिष्ट नहीं हैं, लेकिन समाजशास्त्रीय MCQ के सामान्य पैटर्न से यह स्पष्ट हैयह अर्थशास्त्र के इन चार मौलिक प्रश्नों पर आधारित है। ऐसे प्रश्नों में अक्सर एक ऐसा विकल्प दिया जाता हैजो इनसे असंबंधित हो, जैसे "परिवार की भूमिका क्या है?" या "व्यक्तिगत अधिकार क्या हैंजो समाज के मूलभूत आर्थिक निर्णयों से मेल नहीं खाता। यदि विकल्प होते जैसे (क) क्या उत्पादन करना है(ख) उत्पादन कैसे करें, (ग) किसके लिए उत्पादन करें, (घ) शिक्षा कैसे प्रदान करेंतो "शिक्षा कैसे प्रदान करें" मूलभूत नहीं होगाक्योंकि शिक्षा सेवा-वितरण का हिस्सा हो सकती है लेकिन कोर आर्थिक प्रश्नों में शामिल नहीं।क्यों ये प्रश्न आवश्यक हैंहर समाज—चाहे पूंजीवादी, समाजवादी या मिश्रित—इनका उत्तर अलग-अलग तरीके से देता है।पूंजीवादी समाज बाजार मूल्य पर निर्भर करता है, जबकि समाजवादी केंद्रीय नियोजन पर।बिना इनके समाज संसाधन संकट, असमानता या अराजकता का शिकार हो जाता।समाजशास्त्र में इन्हें सामाजिकरण (socialization) के संदर्भ में भी देखा जाता हैजहां व्यक्ति इन मानदंडों को सीखते हैं, लेकिन मूल प्रश्न आर्थिक व्यवस्था के केंद्र में रहते हैं।गैर-मूलभूत उदाहरणयदि प्रश्न में विकल्प सामाजिकरण से जुड़े हों (जैसे परिवार, स्कूल आदि), तो "किन वस्तुओं का उत्पादन करेंजैसा आर्थिक प्रश्न मूलभूत सामाजिक प्रश्नों (जैसे "सदस्यों को सामाजिक बनाना कैसे है?") में से एक नहीं होगा।वास्तव में, testbook जैसे स्रोतों में स्पष्ट रूप से अर्थशास्त्र के ये चार प्रश्न ही "प्रत्येक समाज को उत्तर देने वाले मूलभूत प्रश्न" बताए गए हैं।Submit Quiz« Previous12345