विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-III

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21. भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण का निम्नलिखित में से कौन-सा नकारात्मक प्रभाव है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) नेतृत्व शैलियों के प्रति प्रतिबंधक दृष्टिकोण का उदय
Solution:
  • भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभावों में सापेक्ष अभाव में वृद्धि, रोजगार में महिला भागीदारी में वृद्धि, बाल मजदूरी की समाप्ति को दर्शाता है
  • जबकि नेतृत्व शैलियों के प्रति प्रतिबंधक दृष्टिकोण का उदय नकारात्मक प्रभावों को दर्शाता है।
  • आर्थिक असमानता में वृद्धि
    • वैश्वीकरण ने धन के संकेंद्रण को तेज कर दिया है
    • जहां शहरी अभिजात वर्ग और बड़े उद्योगों को अधिक लाभ हुआ, जबकि ग्रामीण एवं सीमांत समुदाय पीछे रह गए।
    • इससे अमीर-गरीब के बीच आय असमानता बढ़ी है
    • क्योंकि वैश्विक कंपनियां उच्च कुशल श्रमिकों को प्राथमिकता देती हैं
    • जिससे असंगठित क्षेत्र प्रभावित होता है। उदाहरणस्वरूप, IT और सेवा क्षेत्रों में वृद्धि हुई, लेकिन कृषि और लघु उद्योगों में गरीबी उन्मूलन विफल रहा।
  • पारंपरिक उद्योगों का क्षय
    • वैश्विक प्रतिस्पर्धा से हस्तशिल्प, हथकरघा और लघु उद्योग हाशिए पर धकेल दिए गए
    • क्योंकि सस्ते आयातित उत्पाद बाजार पर हावी हो गए।
    • छोटे उत्पादकों को पूंजी व प्रौद्योगिकी की कमी के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला नहीं कर पाते
    • जिससे नौकरियां विलुप्त हुईं। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और वस्त्र उद्योगों में सस्ते आयात ने स्थानीय इकाइयों को बंद होने पर मजबूर किया।​
  • वैश्विक निर्भरता के जोखिम
    • भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भर हो गया है
    • जो कोविड-19 जैसी महामारियों या भू-राजनीतिक तनावों से बाधित हो जाती हैं।
    • फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्र प्रभावित हुए, जिससे उत्पादन बाधित हुआ।
    • इसके अलावा, विदेशी पूंजी (FPI) पर निर्भरता बढ़ी; अक्टूबर 2024 में इक्विटी बाजार से 10,428 मिलियन डॉलर का बहिर्वाह हुआ, जिससे रुपया कमजोर हुआ।​
  • श्रम शोषण एवं रोजगार हानि
    • बहुराष्ट्रीय कंपनियां सस्ते श्रम की तलाश में भारत आती हैं
    • लेकिन कम मजदूरी और खराब कार्यस्थितियों से श्रमिक शोषित होते हैं।
    • नौकरी विस्थापन बढ़ा, क्योंकि सस्ते आयात से घरेलू उद्योग बंद हुए।
    • कृषि क्षेत्र को भी उपेक्षा मिली, जो अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है।
  • पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक हानि
    • औद्योगिक विस्तार से प्रदूषण और संसाधनों का दोहन बढ़ा।
    • विदेशी संस्कृति के प्रभाव से पारंपरिक मूल्य कमजोर हुए, तथा उपभोक्तावाद ने टिकाऊ जीवनशैली को प्रभावित किया।
    • साइबर सुरक्षा खतरे भी बढ़े, क्योंकि डिजिटल एकीकरण तेज हुआ लेकिन विनियमन कमजोर रहा।

22. किसी फर्म की माल-सूची में परिवर्तन को ....... के रूप में समझा जाता है। [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) निवेश
Solution:
  • मालसूची में परिवर्तन को मालसूची निवेश कहा जाता है।
  • यह ऋणात्मक या धनात्मक हो सकता है। यदि मालसूची में वृद्धि होती है
  • तो यह धनात्मक मालसूची निवेश है, जब मालसूची में कमी होगी, तब यह ऋणात्मक मालसूची निवेश है।
  • माल-सूची का अर्थ
    • जो फर्म बिक्री या उत्पादन के लिए रखती है। अर्थशास्त्र में इसे स्टॉक परिवर्तन माना जाता है
    • जहाँ वर्ष की शुरुआत और अंत में इसके मूल्य की तुलना की जाती है।
    • यदि अंत में मूल्य अधिक है तो वृद्धि (संचय), और कम है तो ह्रास (अपसंचय) कहलाता है।
  • निवेश के रूप में क्यों?
    • राष्ट्रीय आय लेखांकन में, माल-सूची में वृद्धि को निवेश (investment) गिना जाता है
    • क्योंकि यह फर्म द्वारा भविष्य की मांग पूरी करने के लिए पूंजी लगाने का संकेत है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि उत्पादन अधिक हो लेकिन बिक्री कम हो, तो अतिरिक्त माल-सूची निवेश के रूप में जुड़ती है।
    • इससे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना में मूल्यवृद्धि = उत्पादन मूल्य - मध्यवर्ती उपभोग + माल-सूची परिवर्तन के सूत्र का उपयोग होता है।
  • प्रकार
    • नियोजित संचय: योजना के अनुसार माल-सूची बढ़ाना, जैसे भविष्य की मांग के लिए।​
    • अनियोजित अपसंचय: अप्रत्याशित मांग वृद्धि से स्टॉक कम होना।
  • महत्व
    • यह परिवर्तन फर्म की तरलता, उत्पादन योजना और आर्थिक विकास को दर्शाता है।
    • राष्ट्रीय आय में अनदेखे निवेश के रूप में इसे शामिल कर GDP सही मापा जाता है।
    • अत्यधिक संचय नकदी बंधन पैदा कर सकता है, जबकि अपसंचय बिक्री हानि का कारण बनता है।

23. बीमा (संशोधन) अधिनियम, 2021 उस प्रावधान को समाप्त कर देता है, जिसके तहत केंद्र सरकार को जनरल इंशोरेंस कंपनी की चार सहायक कंपनियों, अर्थात नेशनल इंशोरेंस, न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस में कम-से-कम ....... स्वामित्व की आवश्यकता होती थी। [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 51%
Solution:
  • बीमा (संशोधन) अधिनियम, 2021 ने उस प्रावधान को समाप्त कर दिया है
  • जिसके लिए केंद्र सरकार को सामान्य बीमा कंपनी की चार सहायक कंपनियों (न्यू इंडिया एंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, राष्ट्रीय बीमा) में कम- से-कम 51 प्रतिशत स्वामित्व की आवश्यकता होती है।
  • पृष्ठभूमि
    • भारत में जनरल इंश्योरेंस क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण 1972 के अधिनियम से हुआ
    • जिसमें 107 निजी कंपनियों को जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (GIC) की चार सहायक कंपनियों में विलय कर दिया गया।
    • इन चारों कंपनियों में केंद्र सरकार को न्यूनतम 51% इक्विटी शेयर कैपिटल रखना पड़ता था, ताकि सरकारी नियंत्रण बना रहे।
  • प्रमुख संशोधन
    • 51% स्वामित्व सीमा हटाना: अधिनियम ने धारा 10B के परंतुक को हटा दिया
    • जिससे केंद्र सरकार अब इन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटा सकती है। इससे निजीकरण और विदेशी निवेश की राह आसान हो गई।
    • नियंत्रण हस्तांतरण: जब सरकार नियंत्रण (जैसे अधिकांश निदेशक नियुक्ति या नीतिगत निर्णय) छोड़ देती है, तब यह प्रावधान लागू नहीं होता।​
    • कर्मचारी सेवा शर्तें: केंद्र सरकार को इन कंपनियों के कर्मचारियों की सेवा शर्तें अधिसूचित करने का अधिकार मिला
    • ऐसी योजनाओं को स्वतः अपनाया गया माना जाएगा।​
    • निदेशक दायित्व: गैर-पूर्णकालिक निदेशकों को केवल विशिष्ट कृत्यों (जैसे स्वविवेक से निर्णय या परिश्रम की कमी) के लिए उत्तरदायी बनाया गया।​
  • प्रभाव और उद्देश्य
    • यह संशोधन बीमा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, पूंजी निवेश आकर्षित करने और कंपनियों को स्वतंत्र बनाने के लिए लाया गया।
    • 1972 अधिनियम के बाद 2002 में GIC से नियंत्रण केंद्र को स्थानांतरित हो चुका था
    • लेकिन 51% हिस्सेदारी की बाधा बनी रही।
    • अब निजीकरण से कंपनियां स्वास्थ्य, मोटर, अग्नि और समुद्री बीमा जैसे क्षेत्रों में अधिक कुशलता से काम कर सकेंगी।
  • संबंधित विकास
    • बीमा (संशोधन) अधिनियम, 2021 ने कुल मिलाकर बीमा अधिनियम, 1938 में भी बदलाव किए
    • जैसे विदेशी निवेश सीमा 49% से 74% (बाद में 100% तक चर्चा में) बढ़ाना।
    • सामान्य बीमा संशोधन विशेष रूप से राष्ट्रीयकरण अधिनियम पर केंद्रित था।

24. तरलता जाल की स्थिति में, सट्टा धन मांग फलन ....... बन जाता है। [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनंत लोचदार
Solution:
  • तरलता जाल तब होता है, जब विस्तारवादी मौद्रिक नीति ब्याज दरें या आय बढ़ाने में विफल रहती है
  • आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में विफल रहती है। ऐसी स्थिति में सट्टा धन मांग फलन अनंत लोचदार हो जाती है
  • क्योंकि लोग कम रिटर्न देने वाली संपत्तियों में निवेश करने के बजाय नकदी रखना पसंद करते हैं।
  • तरलता जाल क्या है?
    • क्योंकि केंद्रीय बैंक द्वारा धन की आपूर्ति बढ़ाने पर भी लोग अतिरिक्त नकदी को जमा करके रख लेते हैं, न कि खर्च या निवेश करते हैं।
    • यह कीन्सियन अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है
    • जहां आर्थिक मंदी के दौरान निवेशक ब्याज दरों में बदलाव के प्रति उदासीन हो जाते हैं।​
  • सट्टा धन मांग फलन की व्याख्या
    • कीन्स के अनुसार, मुद्रा की मांग तीन उद्देश्यों से होती है: सौदा (ट्रांजेक्शन), सावधानी (प्रीकॉशनरी) और सट्टा (स्पेकुलेटिव)।​​
    • सट्टा मांग बॉन्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव से लाभ कमाने की इच्छा से प्रेरित होती है
    • जो ब्याज दर (r) पर निर्भर करती है: L2 = f(r), जहां L2 और r में व्यस्त संबंध होता है।​
    • सामान्यतः सट्टा मांग वक्र नीचे की ओर झुका होता है
    • लेकिन तरलता जाल में यह अनंत लोचदार (पूर्णतः क्षैतिज) हो जाता है
    • अर्थात् न्यूनतम ब्याज दर (जैसे r0) पर लोग असीमित नकदी रखने को तैयार होते हैं।
  • तरलता जाल में प्रभाव
    • तरलता पसंदगी (LP) वक्र बिंदु B के बाद क्षैतिज हो जाता है (BC भाग), जो दर्शाता है कि सट्टा मांग में अनंत लोच आ जाती है।​
    • मौद्रिक नीति विफल हो जाती है, क्योंकि धन आपूर्ति वृद्धि से ब्याज दरें और कम नहीं होतीं; लोग नकदी होल्ड करते रहते हैं।
    • राजकोषीय नीति (सरकारी व्यय या कर कटौती) अधिक प्रभावी सिद्ध होती है।​
  • उदाहरण और चित्रण
    • कल्पना कीजिए ब्याज दर 0.5% पर है। लोग सोचते हैं: "बॉन्ड बेचने पर नुकसान संभव, इसलिए नकदी रखें।
    • धन आपूर्ति दोगुनी करने पर भी वे नकदी जमा करते हैं।​
    • LM वक्र के क्षैतिज भाग में यह दिखता है, जहां IS-LM मॉडल में मौद्रिक नीति बेकार हो जाती है।​
    • वास्तविक उदाहरण: 2008 संकट या जापान की खोई दशक में देखा गया।

25. "मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi)" कार्यक्रम ....... के लिए है। [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) प्रशासनिक सेवक
Solution:
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकारी अधिकारियों के काम करने के तरीके में सुधार के लिए 'मिशन कर्मयोगी' को मंजूरी दी।
  • इस मिशन के तहत सिविल सेवकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • कार्यक्रम का परिचय
    • मिशन कर्मयोगी, जिसे राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (NPCSCB) भी कहा जाता है
    • 2 सितंबर 2020 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया।
    • इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सिविल सेवकों को रचनात्मक, नवाचारी, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम और प्रौद्योगिकी समर्थ बनाना है।
    • यह 2020 से 2025 तक चलने वाली योजना लगभग 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को कवर करती है।
  • प्रमुख उद्देश्य
    • सिविल सेवकों को विशिष्ट भूमिका-दक्षताओं से युक्त बनाकर उच्च गुणवत्ता वाली सेवा सुनिश्चित करना।
    • व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया स्तर पर क्षमता निर्माण की नई राष्ट्रीय वास्तुकला तैयार करना।
    • कर्मचारियों को वैश्विक सर्वोत्तम संस्थानों से सीखने और ऑन-साइट प्रशिक्षण पर जोर देना।
  • मुख्य विशेषताएं
    • iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म: एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण पोर्टल, जो ई-लर्निंग और कौशल विकास प्रदान करता है।
    • विशेष उद्देश्य वाहन (SPV): कंपनी अधिनियम 2013 के तहत गैर-लाभकारी कंपनी का गठन, जो प्लेटफॉर्म का संचालन करेगी।
    • संस्थागत ढांचा: प्रधानमंत्री की सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद, क्षमता निर्माण आयोग और कैबिनेट सचिव की अगुवाई वाली इकाई शामिल।
    • बजट: 510.86 करोड़ रुपये।
  • अपेक्षित लाभ
    • यह योजना कर्मचारियों के व्यक्तिगत मूल्यांकन को वैज्ञानिक तरीके से बदल देगी
    • शासन में सुधार लाएगी और पारदर्शिता बढ़ाएगी।
    • कर्मचारी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, नवाचार जैसी स्किल्स विकसित करेंगे, जिससे देश के विकास लक्ष्यों में योगदान मिलेगा।

26. सरकार का हस्तक्षेप, चाहे वह मांग का विस्तार करने के लिए हो अथवा इसे कम करने के लिए ....... कहलाता है। [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) स्थिरीकरण कार्य
Solution:
  • सरकार का हस्तक्षेप, चाहे वह मांग का विस्तार करने के लिए हो अथवा इसे कम करने के लिए स्थिरीकरण कार्य कहलाता है।
  • यह अर्थव्यवस्था को मंदी में जाने या उच्च मुद्रास्फीति का सामना करने से रोकने के लिए किया जाता है।
  • स्थिरीकरण कार्य क्या है?
    • स्थिरीकरण कार्य (Stabilization Function) सरकार द्वारा कुल मांग (Aggregate Demand) को समायोजित करने की प्रक्रिया है।
    • मंदी के समय मांग बढ़ाने या मुद्रास्फीति के समय मांग कम करने के लिए हस्तक्षेप किया जाता है।
    • इससे रोजगार, उत्पादन और कीमतों में स्थिरता बनी रहती है।
  • क्यों आवश्यक है सरकारी हस्तक्षेप?
    • बाजार अर्थव्यवस्था में स्वाभाविक उतार-चढ़ाव होते हैं, जैसे मंदी में बेरोजगारी बढ़ना या तेज़ी में महँगाई।
    • सरकार आय, व्यय और ऋण उपलब्धता को प्रभावित करके संतुलन बहाल करती है।
    • पूर्ण रोजगार के बिना संसाधन बेकार पड़े रहते हैं, जबकि अतिरिक्त मांग महँगाई पैदा करती है।
  • राजकोषीय नीति के माध्यम से कार्यान्वयन
    • राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) मुख्य साधन है, जिसमें खर्च बढ़ाना या कर घटाना शामिल है।
    • मंदी में: बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ, बेरोजगारी भत्ते या सब्सिडी से मांग बढ़ती है।
    • मुद्रास्फीति में: कर वृद्धि या खर्च कटौती से मांग नियंत्रित होती है।
    • सरकारी स्थानांतरण भुगतान और कर परिवारों की प्रयोज्य आय को प्रभावित करते हैं।
  • मौद्रिक नीति का योगदान
    • मौद्रिक नीति (Monetary Policy) ब्याज दरें समायोजित करके पूरक भूमिका निभाती है।
    • प्रोत्साहन के लिए ब्याज दरें कम कर उधार सस्ता बनाना।
    • नियंत्रण के लिए दरें बढ़ाकर निवेश घटाना।
    • दोनों नीतियाँ मिलकर स्थिरीकरण सुनिश्चित करती हैं।​
  • भारतीय संदर्भ में उदाहरण
    • भारत में बजट प्रक्रिया के तहत वित्त मंत्री स्थिरीकरण पर जोर देते हैं।
    • कोविड-19 जैसी मंदी में आत्मनिर्भर भारत पैकेज ने मांग बढ़ाई।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026) मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए RBI ब्याज दरें समायोजित कर रहा है।​
  • लाभ और सीमाएँ
    • लाभ: आर्थिक चक्र को सुचारू बनाना, बेरोजगारी कम करना।
    • सीमाएँ: समयबद्धता (Time Lags), राजनीतिक दबाव या गलत अनुमान से अप्रभावी हो सकता है।
    • कुल मिलाकर, यह आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं का आधारभूत कार्य है।

27. मध्यम अवधि में अर्थव्यवस्था में तरलता को प्रभावित करने के उद्देश्य से आरबीआई (RBI) द्वारा खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री और खरीद ....... कहलाती है। [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) खुला बाजार परिचालन
Solution:
  • आरबीआई द्वारा अर्थव्यवस्था में तरलता का प्रबंधन करने के लिए खुला बाजार परिचालन को एक मौद्रिक नीति उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • खुला बाजार परिचालन के माध्यम से आरबीआई सरकारी प्रतिभूतियों की खरीददारी करता है या बेचता है।
  • OMO क्या है?
    • खुला बाजार परिचालन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का प्रमुख मौद्रिक नीति उपकरण है
    • जिसमें RBI खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों (जैसे G-Sec) की खरीद-बिक्री करता है।
    • यह प्रक्रिया मुख्य रूप से बैंकिंग सिस्टम में तरलता (liquidity) को नियंत्रित करने के लिए उपयोग की जाती है
    • विशेषकर मध्यम अवधि (कुछ महीनों से एक वर्ष तक) में। जब अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त तरलता होती है
    • RBI प्रतिभूतियां बेचकर धन सोख लेता है, जबकि तरलता की कमी पर खरीदकर धन注入 करता है।
  • OMO का उद्देश्य
    • तरलता प्रबंधन: RBI इसका उपयोग मुद्रा आपूर्ति (money supply) को विनियमित करने के लिए करता है
    • जो मुद्रास्फीति नियंत्रण, ब्याज दरों को स्थिर करने और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करता है।
    • मध्यम अवधि फोकस: यह उपकरण तत्काल (दैनिक) तरलता के बजाय मध्यम अवधि की जरूरतों को पूरा करता है, जैसे मौद्रिक नीति चक्र के दौरान।​
    • ब्याज दर प्रभाव: प्रतिभूतियों की खरीद से ब्याज दरें गिरती हैं (तरलता बढ़ने से), जबकि बिक्री से बढ़ती हैं।​
  • OMO कैसे काम करता है?
    • RBI दो प्रकार के OMO करता है:
    • आउटलाइट OMO: सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद, जिससे बैंकिंग सिस्टम में धन बढ़ता है।
    • RBI चेक या डिजिटल ट्रांसफर से भुगतान करता है, जो बैंकों के रिजर्व को मजबूत बनाता है।
    • इनलाइट OMO: प्रतिभूतियों की बिक्री, जिससे बाजार से धन निकाला जाता है और तरलता कम होती है।​
    • यह प्रक्रिया नीलामी (auctions) या निजी प्लेसमेंट के माध्यम से होती है
    • मुख्य रूप से वाणिज्यिक बैंकों व वित्तीय संस्थानों के साथ।​
  • RBI के अन्य उपकरणों से अंतर
    • चलनिधि समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility - LAF): अल्प अवधि (रात्रि) तरलता के लिए repo/reverse repo का उपयोग।​
    • बाजार स्थिरीकरण योजना (MSS): केवल अतिरिक्त तरलता सोखने के लिए विशेष प्रतिभूतियों की बिक्री।​
    • स्टैंडिंग डिपॉजिट/लोन फैसिलिटी: स्थायी लेकिन सीमित। OMO मध्यम अवधि के लिए अधिक लचीला है।​
  • हालिया उदाहरण (2026 तक)
    • जनवरी 2026 में RBI ने ₹1 लाख करोड़ की OMO की घोषणा की ताकि तरलता注入 की जा सके, जब बॉन्ड यील्ड बढ़ रही थीं।
    • इसी तरह, जनवरी 2026 में ₹1.25 ट्रिलियन की खरीद की योजना बनी।
    • ये कदम आर्थिक मंदी या सरकारी खर्च बढ़ने पर तरलता सुनिश्चित करते हैं।
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • लचीलापन: RBI मात्रा और समय चुन सकता है।​
    • प्रभाव: बैंकों के माध्यम से पूरे अर्थतंत्र पर असर, जैसे ऋण सस्ते/महंगे होना।​
    • जोखिम: अत्यधिक OMO से मुद्रास्फीति या एसेट बबल हो सकता है, इसलिए सावधानीपूर्वक उपयोग।​

28. संयुक्त राष्ट्र द्वारा पीने, धुलाई करने, खाना पकाने और उचित स्वच्छता बनाए रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम पानी की मात्रा, प्रति व्यक्ति प्रति दिन ....... लीटर अनुशंसित की गई है। [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 50
Solution:
  • संयुक्त राष्ट्र ने सिफारिश की है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दैनिक जरूरतों
  • जैसे कि पीने, कपड़े धोने, खाना पकाने और उचित स्वच्छता बनाए रखने के लिए हर दिन लगभग 50 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
  • अनुशंसा का आधार
    • यह मानक संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न रिपोर्टों और दिशानिर्देशों से लिया गया है
    • जो बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निर्धारित किया गया।
    • इसमें पीने के पानी से लेकर स्वच्छता बनाए रखने तक सभी गतिविधियाँ शामिल हैं।
    • यह मात्रा जल संकट वाले क्षेत्रों में जीवनयापन को सुरक्षित रखने के लिए न्यूनतम स्तर मानी जाती है।
  • उपयोग का ब्रेकडाउन
    • पीने के लिए: लगभग 2-3 लीटर प्रतिदिन।
    • खाना पकाने के लिए: 5-10 लीटर।
    • धुलाई और स्वच्छता: शेष 37-43 लीटर, जिसमें हाथ धोना, नहाना और सफाई शामिल।
    • यह कुल 50 लीटर बुनियादी जरूरतों को कवर करता है, लेकिन इसमें कृषि या औद्योगिक उपयोग नहीं आता।
  • वैश्विक संदर्भ
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, केवल पीने के लिए 20 लीटर पर्याप्त हो सकते हैं
    • लेकिन संपूर्ण स्वच्छता के लिए 50 लीटर आवश्यक है।
    • विकासशील देशों में यह मानक अक्सर संकटकालीन स्थितियों (जैसे शरणार्थी शिविर) में लागू होता है।
    • जलवायु और संस्कृति के आधार पर यह थोड़ा भिन्न हो सकता है।​
  • भारत में स्थिति
    • भारत में शहरी क्षेत्रों में औसत उपयोग 150 लीटर प्रतिदिन है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह कम होता है।
    • फिर भी, कई क्षेत्रों में 50 लीटर भी उपलब्ध नहीं होता, जो जल संकट को दर्शाता है।
    • सरकारें और NGOs इस मानक को आधार बनाकर योजनाएँ चला रही हैं।​

29. निम्नलिखित में से किसे वर्ष 1956 में भारत सरकार द्वारा सभी मौजूदा निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करके स्थापित किया गया था? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) भारतीय जीवन बीमा निगम
Solution:
  • भारतीय जीवन बीमा निगम का राष्ट्रीयकरण जनवरी, 1956 में किया गया।
  • भारतीय संसद द्वारा जून, 1956 में जीवन बीमा निगम अधिनियम पारित कर सितंबर, 1956 में भारतीय जीवन बीमा निगम का गठन किया गया।
  • भारतीय जीवन बीमा निगम का स्वामित्व भारत सरकार के पास है
  • इसके प्रशासन की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के पास है। इसका मुख्यालय मुंबई में है।
  • स्थापना का इतिहास
    • 1956 से पहले भारत में जीवन बीमा का व्यवसाय निजी भारतीय और विदेशी कंपनियों के हाथ में था।
    • लगभग 154 भारतीय, 16 विदेशी कंपनियां और 75 भविष्य निधि समितियां सक्रिय थीं।
    • 19 जनवरी 1956 को संसद ने जीवन बीमा निगम अधिनियम पारित किया
    • जिसके तहत 1 सितंबर 1956 को LIC का गठन हुआ।
    • सरकार ने इन सभी 245 इकाइयों का राष्ट्रीयकरण कर LIC के रूप में एकीकृत किया
    • बीमा सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचें और सभी को सस्ता कवर मिले।
  • उद्देश्य और महत्व
    • LIC का मुख्य उद्देश्य जीवन बीमा, पेंशन उत्पाद प्रदान करना और देशभर में वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
    • यह पूरी तरह सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है, जिसका प्रशासन वित्त मंत्रालय के अधीन है।
    • राष्ट्रीयकरण से पहले निजी कंपनियां मुख्यतः शहरी और उच्च वर्ग तक सीमित थीं, लेकिन LIC ने इसे लोकतांत्रिक बनाया।
  • अन्य विकल्पों से अंतर
    • यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस: सामान्य बीमा कंपनी, 1938 में स्थापित; 1972 के सामान्य बीमा राष्ट्रीयकरण से जुड़ी।​
    • न्यू इंडिया एश्योरेंस: 1919 में स्थापित सामान्य बीमा कंपनी, 1972 में राष्ट्रीयकृत।​
    • भारतीय सामान्य बीमा निगम (GIC): 1972 में सामान्य बीमा के लिए स्थापित।​
  • LIC की वर्तमान स्थिति
    • आज LIC के 8 क्षेत्रीय कार्यालय, 2000+ शाखाएं और करोड़ों पॉलिसीधारक हैं।
    • यह भारत की सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक है। 1956 के इस कदम ने बीमा क्षेत्र को मजबूत आधार दिया
    • हालांकि 1999 के IRDA अधिनियम से निजीकरण की शुरुआत हुई।

30. जून 2022 में, "आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति" ने ....... के अविनियमन को मंजूरी दे दी है। [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल की बिक्री
Solution:
  • जून, 2022 में आर्थिक मामलों पर 'मंत्रिमंडलीय समिति' ने घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल की बिक्री के अविनियमन को मंजूरी दी।
  • अविनियमन का मतलब है कि सरकार किसी विशेष उद्योग या बाजार पर नियमों को हटा रही है या कम कर रही है।
  • निर्णय का विवरण
    • यह निर्णय 29 जून 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में CCEA की बैठक में लिया गया।
    • इसका उद्देश्य घरेलू कच्चे तेल उत्पादकों को बाजार-निर्धारित मूल्य पर बिक्री की स्वतंत्रता देना था
    • जिससे पहले सरकारी नियंत्रण के तहत कीमतें तय होती थीं।
    • इससे तेल उत्पादन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
  • पृष्ठभूमि और महत्व
    • भारत में कच्चा तेल मुख्य रूप से ONGC और OIL जैसी सार्वजनिक कंपनियों द्वारा उत्पादित होता है
    • लेकिन उत्पादन कुल मांग का केवल 15% पूरा करता है।
    • अविनियमन से उत्पादक अपनी कीमतें खुद तय कर सकेंगे, जो वैश्विक बाजार दरों से जुड़ी होंगी।
    • इससे ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कुशलता सुधरेगी।​
  • प्रभाव और लाभ
    • उत्पादकों के लिए: अधिक लाभ, जिससे अन्वेषण और उत्पादन बढ़ेगा।
    • उपभोक्ताओं के लिए: लंबे समय में आपूर्ति स्थिर हो सकती है, हालांकि तत्काल कीमतों पर असर कम।
    • अर्थव्यवस्था पर: भारत की तेल आयात निर्भरता (85%) कम करने में मदद, विदेशी मुद्रा बचत।