विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-IIITotal Questions: 5041. कौन-सा वक्र बेरोजगारी की दर और मौद्रिक मजदूरी परिवर्तन की दर के बीच संबंध की जांच करता है? [MTS (T-I) 14 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) अनधिमान वक्र(b) पूर्ति वन(c) मांग वक्र(d) फिलिप्स वक्रCorrect Answer: (d) फिलिप्स वक्रSolution:फिलिप्स वक्र एक आर्थिक सिद्धांत है, जो यह बताता है कि मुद्रास्फीति और बेरोजगारी के बीच एक स्थिर और व्युत्क्रम संबंध पाया जाता है।यह वक्र बेरोजगारी की दर तथा मौद्रिक मजदूरी परिवर्तन की दर के मध्य संबंधों की व्याख्या करता है।फिलिप्स वक्र की उत्पत्तियह अवधारणा 1958 में न्यूजीलैंड के अर्थशास्त्री ए. डब्ल्यू. फिलिप्स (A.W. Phillips) द्वारा प्रस्तुत की गई थी।उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के 1861 से 1957 तक के ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण कियापाया कि बेरोजगारी दर कम होने पर मजदूरी में वृद्धि तेज होती है, जबकि उच्च बेरोजगारी पर मजदूरी स्थिर रहती है।मूल रूप से यह वक्र बेरोजगारी और मौद्रिक मजदूरी परिवर्तन की दर के बीच व्युत्क्रम संबंध दर्शाता है, जो बाद में मुद्रास्फीति से जुड़ गया।मूल सिद्धांतफिलिप्स वक्र के अनुसार, अर्थव्यवस्था में कम बेरोजगारी श्रम बाजार में दबाव बढ़ाती हैजिससे मजदूरी तेजी से बढ़ती है और इससे मुद्रास्फीति बढ़ती है। उच्च बेरोजगारी की स्थिति में मजदूरी वृद्धि धीमी होती हैजिससे मुद्रास्फीति नियंत्रित रहती है। यह एक नीति समझौता (trade-off) प्रस्तुत करता हैनीति निर्माता या तो बेरोजगारी कम कर सकते हैं (मुद्रास्फीति बढ़ाकर) या मुद्रास्फीति नियंत्रित रख सकते हैं (बेरोजगारी बढ़ाकर)।वक्र का आकार और गणितीय रूपवक्र मूल बिंदु की ओर उत्तल (convex to the origin) होता है, जो दर्शाता हैबेरोजगारी कम होने पर मजदूरी परिवर्तन तेजी से बढ़ता है। सरल गणितीय रूप:जहां मौद्रिक मजदूरी परिवर्तन की दर है और बेरोजगारी दर।व्युत्क्रम संबंध: 。 बाद के संस्करणों में इसे मुद्रास्फीति () से जोड़ा गया: , जहां कम से बढ़ता है।अल्पकालिक बनाम दीर्घकालिक फिलिप्स वक्रअल्पकालिक फिलिप्स वक्र (SRPC): नीचे की ओर ढलान वाला, जो अपेक्षाओं के स्थिर रहने पर ट्रेड-ऑफ दिखाता है।मांग बढ़ाने से बेरोजगारी कम होती है, लेकिन मुद्रास्फीति बढ़ती है।दीर्घकालिक फिलिप्स वक्र (LRPC): ऊर्ध्वाधर रेखा, प्राकृतिक बेरोजगारी दर (NAIRU) पर स्थित।दीर्घकाल में कोई ट्रेड-ऑफ नहीं; मुद्रास्फीति अपेक्षाओं पर निर्भर करती है। यदि मुद्रास्फीति अपेक्षा से अधिक हो, तो वक्र दाईं ओर शिफ्ट होता है।आलोचनाएं और सीमाएं1960 के दशक में अमेरिका में स्टैगफ्लेशन (उच्च बेरोजगारी + उच्च मुद्रास्फीति) ने मूल वक्र को चुनौती दी।मिल्टन फ्राइडमैन और अन्य ने तर्क दिया कि यह केवल अल्पकालिक है; दीर्घकाल में अपेक्षाएं इसे अमान्य कर देती हैं।भारतीय संदर्भ में, रिजर्व बैंक इसे मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के लिए इस्तेमाल करता हैलेकिन संरचनात्मक बेरोजगारी (जैसे कौशल असंगति) इसे प्रभावित करती है।आधुनिक प्रासंगिकताआजकल बढ़ी हुई फिलिप्स वक्र (augmented) अपेक्षाओं, आपूर्ति झटकों को शामिल करती है।कोविड-19 के बाद कई देशों में कम बेरोजगारी के बावजूद मुद्रास्फीति नियंत्रित रहीजो वक्र की फ्लैटनेस दिखाती है। भारत में 2025-26 तक बेरोजगारी ~7-8% और मुद्रास्फीति ~4-5% रही, जो आंशिक ट्रेड-ऑफ दर्शाती है।नीति निर्माताओं के लिए यह अभी भी उपयोगी है, लेकिन आपूर्ति-साइड सुधारों के साथ।42. नीति आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2021 के अनुसार, निम्नलिखित में से किस राज्य की कुल जनसंख्या का 1% से भी कम बहुआयामी गरीब है? [MTS (T-I) 14 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) केरल(b) तेलंगाना(c) महाराष्ट्र(d) पंजाबCorrect Answer: (a) केरलSolution:नीति आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 2021 के अनुसार, केरल वह राज्य हैजहां गरीबी जनसंख्या का सबसे कम प्रतिशत अर्थात जनसंख्या का 1 प्रतिशत से भी कम बहुआयामी गरीब है।रिपोर्ट का अवलोकननीति आयोग ने नवंबर 2021 में राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक जारी कियाजो NFHS-4 (2015-16) और NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों पर आधारित है।यह सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन आयामों के 12 संकेतकों (जैसे पोषण, मातृ स्वास्थ्य, विद्यालय में उपस्थिति, स्वच्छ ईंधन आदि) पर बहुआयामी गरीबी मापता है।केरल में MPI मूल्य सबसे कम (0.0055) रहा, जिससे यह देश का सबसे कम गरीब राज्य उभरा।केरल की स्थिति विस्तार सेकेरल में बहुआयामी गरीबी का न्यूनतम स्तर सामाजिक-आर्थिक प्रगति का प्रमाण है।सभी 12 संकेतकों में उच्च प्रदर्शन रहा, विशेषकर शिक्षा (स्कूल उपस्थिति >99%) और स्वास्थ्य (कम कुपोषण) में।यहाँ केवल 0.71% आबादी ही तीन या अधिक अभावों में फँसी, जबकि राष्ट्रीय औसत ~14.96% था।तुलनात्मक रूप से, पुडुचेरी (1.72%) केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे बेहतर रहा।अन्य राज्यों की तुलनाउच्च गरीबी वाले राज्य: बिहार (51.91%), झारखंड (42.16%), उत्तर प्रदेश (37.79%) में आधी से अधिक जनसंख्या प्रभावित।सुधार: 2015-21 के बीच उत्तर प्रदेश में 5.94 करोड़, बिहार में 3.77 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले।कम गरीबी श्रेणी: केरल, गोवा, सिक्किम, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे दक्षिणी/पूर्वोत्तर राज्य शीर्ष पर।पंजाब (~5%) और महाराष्ट्र (~4-6%) में भी कम, लेकिन 1% से ऊपर।MPI की विशेषताएँयह सूचकांक आय-आधारित गरीबी से अलग है, जो अभावों की तीव्रता और घटना दोनों मापता है।राज्यवार और जिला-स्तरीय डेटा नीति-निर्माण के लिए उपयोगी, जैसे लक्षित हस्तक्षेप।रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में 2015-21 में 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से मुक्त हुए।43. निम्नलिखित में से क्या सूक्ष्म वित्त संस्थानों की एक विशेषता है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) वंचित लोगों को वित्तीय सेवा(b) कॉर्पोरेट को वित्तीय सेवा(c) केंद्रीय मंत्रियों को वित्तीय सेवा(d) सरकारी कर्मचारियों को वित्तीय सेवाCorrect Answer: (a) वंचित लोगों को वित्तीय सेवाSolution:सूक्ष्म वित्त संस्थानों की विशेषता वंचित लोगों को वित्तीय सेवा प्रदान करना हैअर्थात कम आय वाले व्यक्तियों या समूहों को प्रदान की जाने वाली एक बैंकिंग सेवा है, जिनके पास अन्यथा वित्तीय सेवाओं तक कोई अन्य पहुंच नहीं होती।परिभाषा और उद्देश्यभारत में 1 लाख रुपये से कम के ऋणों को सूक्ष्म ऋण माना जाता हैजिसमें सूक्ष्म बचत, बीमा और भुगतान सेवाएं भी शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य वित्तीय समावेशन बढ़ाना हैलोग अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें, आय बढ़ा सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।प्रमुख विशेषताएंसूक्ष्म वित्त संस्थानों की कई अनूठी विशेषताएं उन्हें सामान्य बैंकों से अलग बनाती हैं:छोटे ऋण आकार: ये बिना किसी संपार्श्विक (कोलैटरल) के छोटी राशि के ऋण देते हैंजो आमतौर पर 10,000 से 1.25 लाख रुपये तक होते हैं। उदाहरण के लिए, NBCFDC जैसी योजनाओं में प्रति लाभार्थी अधिकतम 1.25 लाख रुपये की सीमा है।समूह आधारित उधार: सबसे प्रमुख विशेषता 'संयुक्त दायित्व समूह' (Joint Liability Group - JLG) मॉडल हैजिसमें 4-10 सदस्य आपसी गारंटी पर ऋण लेते हैं। यदि कोई सदस्य चुकता न करे, तो समूह जिम्मेदार होता है, जो डिफॉल्ट दर को कम रखता है।लक्षित ग्राहक: ये निम्न आय वर्ग, ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं (70% से अधिक उधारकर्ता महिलाएं), बेरोजगारों और दिव्यांगों पर फोकस करते हैंजिनकी पारंपरिक बैंकों तक पहुंच नहीं है।सेवाओं की विविधता: केवल ऋण ही नहीं, बल्कि सूक्ष्म बचत, बीमा, पेंशन और वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं।उच्च ब्याज दरें लेकिन सस्ती: ब्याज दरें 18-24% तक हो सकती हैं (बैंकों से अधिक), लेकिन छोटे ऋणों के जोखिम के कारण।ये गैर-लाभकारी (NGOs) या लाभकारी (NBFC-MFIs) दोनों रूपों में काम करते हैं।कार्यप्रणाली और मॉडलMFIs विभिन्न मॉडलों पर काम करते हैं:स्वयं सहायता समूह (SHG): 10-20 महिलाओं का समूह जो बैंक से लिंकेज के जरिए ऋण लेता है। प्रति SHG अधिकतम 15 लाख रुपये तक ऋण मिल सकता है।ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण: नियमित समूह बैठकें, साप्ताहिक किस्तें (छोटी और आसान), और क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत निगरानी।प्रोviders: NGOs, सहकारी समितियां, NBFCs, बैंक और डाकघर। भारत में SKS Microfinance, Bandhan Bank (पूर्व MFI) जैसी प्रमुख संस्थाएं हैं।लाभ और प्रभावआर्थिक सशक्तिकरण: गरीब परिवारों की आय में 20-30% वृद्धि, रोजगार सृजन और गरीबी में कमी।महिलाओं को सशक्त बनाकर घरेलू निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।जोखिम न्यूनीकरण: बिना जमानत के ऋण से वित्तीय पहुंच आसान। डिफॉल्ट दर पारंपरिक बैंकों से कम (2-5%)।वित्तीय साक्षरता: ग्राहकों को बचत की आदतें सिखाते हैं।चुनौतियांहालांकि विशेषताएं आकर्षक हैं, लेकिन चुनौतियां भी हैं:उच्च ब्याज दरें और ओवर-इंडेब्टेडनेस (एक से अधिक MFIs से ऋण)। आंध्र प्रदेश संकट (2010) इसका उदाहरण है।नियामक ढांचा: RBI द्वारा NBFC-MFIs पर 10% मार्जिन कैप और 24% ब्याज सीमा।COVID-19 के बाद पुनर्भुगतान दबाव।भारत में स्थिति (2026 तक)भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माइक्रोफाइनेंस बाजार है।2025 तक 10 करोड़ से अधिक ग्राहक, जिसमें 80% महिलाएं। Sa-Dhan और MFIN जैसे संगठन नियमन करते हैं।सरकार की योजनाएं जैसे NRLM SHG-Bank Linkage ने वृद्धि की।44. वैश्वीकरण के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]I. इसमें आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक सीमाओं से परे नेटवर्क और गतिविधियों का निर्माण शामिल है।II. आउटसोर्सिंग वैश्वीकरण प्रक्रिया के महत्वपूर्ण परिणामों में से एक है।(a) केवल I(b) केवल II(c) न तो I और न II(d) I और II दोनोंCorrect Answer: (d) I और II दोनोंSolution:वैश्वीकरण अंग्रेजी शब्द Globalization का हिंदी रूपांतरण है, जिसे भूमंडलीकरण भी कहा जाता है।वैश्वीकरण में आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक सीमाओं से परे नेटवर्क और गतिविधियों का निर्माण शामिल है।आउटसोर्सिंग वैश्वीकरण प्रक्रिया के महत्वपूर्ण परिणामों में से एक है। अतः कथन । और II दोनों सही हैं।प्रमुख कथन और उनका मूल्यांकनपरीक्षा संदर्भ में वैश्वीकरण से संबंधित सामान्य कथन निम्न हैं:कथन I: यह विश्व अर्थव्यवस्थाओं के साथ एकीकरण के बारे में है।यह सही है। वैश्वीकरण विश्व स्तर पर अर्थव्यवस्थाओं, व्यापार, निवेश और पूंजी के प्रवाह को एकीकृत करता हैजिससे देशों के बीच परस्पर निर्भरता बढ़ती है।विश्व बैंक के अनुसार, यह लोगों, कंपनियों और सरकारों के बीच एकीकरण की प्रक्रिया है।कथन II: यह उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।यह भी सही है। वैश्विक बाजार में विभिन्न देशों की कंपनियां प्रतिस्पर्धा करती हैंजिससे दक्षता, नवाचार और गुणवत्ता में सुधार होता है।OECD के अनुसार, वैश्वीकरण उत्पादकों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाता है।कथन III: घरेलू मुद्रा की वृद्धि निर्यात को बेहतर बनाती है।यह असत्य है। घरेलू मुद्रा के मजबूत होने (उदाहरण के लिए, रुपये की सराहना) से निर्यात महंगा हो जाता हैप्रतिस्पर्धात्मकता कम होती है। IMF के अनुसार, मुद्रा की वृद्धि निर्यात को नुकसान पहुंचाती है।वैश्वीकरण की परिभाषा और विशेषताएंवैश्वीकरण माल, सेवाओं, पूंजी, लोग, ज्ञान, विचार और संस्कृति के सीमाओं के पार मुक्त प्रवाह की बहुआयामी घटना है।इसमें आर्थिक उदारीकरण, मुक्त व्यापार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) और तकनीकी प्रगति शामिल हैं।यह नेटवर्क बनाता है जो आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक सीमाओं को पार करता है, तथा आउटसोर्सिंग जैसी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देता है।भारत में वैश्वीकरण के प्रभावभारत में 1991 के आर्थिक सुधारों से वैश्वीकरण तेज हुआ, जिसने LPG (Liberalization, Privatization, Globalization) नीति को अपनाया।सकारात्मक प्रभाव: GDP वृद्धि, FDI में वृद्धि, IT-ITES क्षेत्र का उदय।नकारात्मक प्रभाव: असमानता, स्थानीय उद्योगों पर दबाव, सांस्कृतिक प्रभाव।सही कथनउपरोक्त सामान्य प्रश्न के आधार पर, कथन I और II सही हैं।वैश्वीकरण एकीकरण और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है, लेकिन मुद्रा वृद्धि निर्यात को हानि पहुंचाती है।45. भारतीय उद्योगपतियों ने व्यावसायिक गतिविधियों को प्रतिबंधित करने वाली औपनिवेशिक नीतियों के खिलाफ प्रतिक्रिया व्यक्त की और 1927 में एक संगठन बनाया। इसे क्या कहा गया ? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) कॉनफिडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (CII)(b) इंडियन इंडस्ट्रिययल एंड कॉमर्शियल कांग्रेस (IICC)(c) ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडस्ट्रीज़ ऑफ इंडिया (OII)(d) फेडरेशन ऑफ द इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FICCI)Correct Answer: (d) फेडरेशन ऑफ द इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FICCI)Solution:फेडरेशन ऑफ द इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की), भारतीय व्यापार संगठनों का संघ, भारतीय व्यवसायों की वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।इसे वर्ष 1927 में स्थापित किया गया था। यह भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा व्यापारिक संघ है।इसने व्यावसायिक गतिविधियों को प्रतिबंधित करने वाली औपनिवेशिक गतिविधियों के खिलाफ प्रतिक्रिया व्यक्त की।औपनिवेशिक नीतियों का पृष्ठभूमिब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने भारत में व्यापारिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए थेजैसे आयात शुल्क, निर्यात नीतियां और ब्रिटिश वस्तुओं को प्राथमिकता।इससे भारतीय उद्योगपति प्रभावित हुए और उन्होंने एकजुट होकर इसका विरोध किया।FICCI का गठन इसी संदर्भ में हुआ, जो औपनिवेशिक आर्थिक शोषण के खिलाफ एक मजबूत मंच बना।यह संगठन स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए बनाया गया।स्थापना और संस्थापकFICCI की स्थापना 1927 में प्रमुख उद्योगपतियों घनश्याम दास बिड़ला (जी.डी. बिड़ला) और पुरुषोत्तम दास ठाकुरदास ने की।महात्मा गांधी की सलाह पर भी इसका गठन हुआ।इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और शुरुआत में 24 सदस्य संगठनों के साथ शुरू हुआ, जो 1947 तक 103 तक पहुंच गया।उद्देश्य व भूमिकाऔपनिवेशिक नीतियों का विरोध, जैसे ब्रिटिश व्यापार एकाधिकार तोड़ना।स्वदेशी उद्योगों का संवर्धन और आर्थिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा।स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग, विशेषकर सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान।FICCI ने स्वतंत्र भारत में भी आर्थिक नीतियों को प्रभावित किया।1920 में बनी भारतीय औद्योगिक एवं वाणिज्यिक कांग्रेस (IICC) को इसका पूर्ववर्ती माना जाता है, लेकिन 1927 का FICCI ही प्रश्नानुसार संगठन है।46. कौन-सी संस्था भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थानों को वित्तीय सहयोग और सहायता प्रदान करती है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) भारतीय बैंक संघ (IBA)(b) कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय(c) भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)(d) आर्थिक कार्य विभाग (DEA)Correct Answer: (c) भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)Solution:भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) सूक्ष्म, लघु और मध्यम वित्त फर्मों को लाइसेंस देने और विनियमित करने के लिए भारत का शीर्ष विनियामक संगठन है।इसका मिशन बैंकों और वित्तीय संगठनों को पुनर्वित्त सुविधाएं प्रदान करना है।अर्थात यह भारत के सूक्ष्म वित्त संस्थानों को वित्तीय सहयोग और सहायता प्रदान करती है।SIDBI की स्थापना और उद्देश्यSIDBI की स्थापना 1990 में भारतीय संसद के एक अधिनियम के तहत हुई थीजिसका मुख्य लक्ष्य MSME क्षेत्र को प्रोत्साहन देना है। यह बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों को पुनर्वित्त सुविधाएं उपलब्ध कराता हैजिसमें सूक्ष्म वित्त संस्थान शामिल हैं, ताकि वे गरीबों और वंचित वर्गों तक छोटे ऋण पहुंचा सकेंइसके अलावा, SIDBI प्रत्यक्ष ऋण भी प्रदान करता हैवित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।MFIs को प्रदान की जाने वाली सहायता के प्रकारSIDBI MFIs को न केवल वित्तीय सहायता देता हैबल्कि उनकी परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग भी प्रदान करता है।उदाहरणस्वरूप, यह विकासात्मक पहलों का समर्थन करता है जो सूक्ष्म ऋण, बचत और बीमा जैसी सेवाओं को मजबूत बनाती हैंMFIs, जो आमतौर पर कम आय वाले लोगों को 1 लाख रुपये से कम के ऋण देते हैंSIDBI के सहयोग से अपनी पहुंच का विस्तार कर पाते हैं और वित्तीय रूप से वंचित समुदायों की सेवा बेहतर ढंग से कर पाते हैं ।अन्य संबंधित संस्थाओं की भूमिकाहालांकि SIDBI प्रमुख संस्था है, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) भी सूक्ष्म वित्त को बढ़ावा देता हैखासकर स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से बैंक लिंकेज कार्यक्रम चलाकर।NABARD ग्रामीण क्षेत्रों में MFIs को अप्रत्यक्ष रूप से सहायता प्रदान करता हैलेकिन SIDBI MSME-केंद्रित MFIs के लिए मुख्य स्रोत हैRBI MFIs को नियामक ढांचे (जैसे NBFC-MFI निर्देश, 2011) के तहत विनियमित करता हैप्रभाव और महत्वSIDBI का सहयोग MFIs को समाज के निचले पायदान तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में सक्षम बनाता हैजिससे उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण बढ़ता है।यह विभिन्न हितधारकों जैसे सरकार, बैंकों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर सूक्ष्म वित्त क्षेत्र को मजबूत बनाता है2026 तक, इस क्षेत्र ने वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन चुनौतियां जैसे उच्च ब्याज दरें (12-30%) बनी हुई हैंकुल मिलाकर, SIDBI MFIs के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करता है।47. भारत में किस संस्था ने स्वयं सहायता समूहों के सभी सदस्यों के डिजिटलीकरण के लिए प्रोजेक्ट ई-शक्ति (E-Shakti) लॉन्च किया था ? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)](a) आईएफसीआई(b) सिडबी(c) नाबार्ड(d) सेबीCorrect Answer: (c) नाबार्डSolution:'ई-शक्ति' स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के डिजिटलीकरण हेतु 'राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक' (नाबार्ड) की एक पायलट परियोजना है।इसकी शुरुआत स्वयं सहायता समूहों के बही-खातों की गुणवत्ता में सुधार जैसी चिंताओं को दूर करनेबैंकों को प्रबंधन सूचना प्रणाली के माध्यम से समूह के बारे में ऋण हेतु निर्णय लेने संबंधी सूचनाओं में सक्षम बनाने के लिए की गई थी।प्रोजेक्ट का उद्देश्ययह परियोजना डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप देशभर में लगभग 3 करोड़ SHG सदस्यों का वित्तीय और गैर-वित्तीय डेटा डिजिटल बनाने के लिए शुरू की गई।इससे SHG के बहीखाते की गुणवत्ता सुधरी, वित्तीय लेनदेन पर नजर रखना आसान हुआ तथा सदस्यों को क्रेडिट सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिली।लॉन्च और प्रगतिNABARD ने मार्च 2018 में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में महाराष्ट्र के धुले जिले और झारखंड के रामगढ़ जिले से शुरू किया।वित्तीय वर्ष 2022 तक लाखों SHG डिजिटल हो चुके थेअब यह राष्ट्रीय स्तर पर फैल चुकी है जिसमें चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वयन हो रहा है।लाभई-शक्ति ने SHG की दक्षता बढ़ाई, प्रशिक्षण प्रदान किया तथा ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाया।यह वित्तीय समावेशन को मजबूत करता है, बैंकों के लिए क्रेडिट मूल्यांकन आसान बनाता है।48. निम्नलिखित में से क्या प्रयोज्य आय (disposable income) को दर्शाता है? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (II-पाली)](a) किसी अर्थव्यवस्था में व्यवसायों और निगमों द्वारा अर्जित कुल आय(b) करों और अन्य कटौतियों से पहले व्यक्तियों और परिवारों द्वारा अर्जित कुल आय(c) व्यक्तियों द्वारा अपने स्वयं के व्यवसाय या स्वरोजगार के माध्यम से अर्जित आय(d) करों और अन्य कटौतियों के बाद व्यक्तियों और परिवारों द्वारा अर्जित आयCorrect Answer: (d) करों और अन्य कटौतियों के बाद व्यक्तियों और परिवारों द्वारा अर्जित आयSolution:प्रयोज्य आय से तात्पर्य उस धनराशि से हैजो किसी व्यक्ति या परिवार ने अपनी कुल आय से कर और आवश्यक खर्च (जैसे-किराया, आवश्यक जरूरतें आदि) निकालने के बाद छोड़ी है।अर्थात प्रयोज्य आय करों और अन्य कटौतियों के बाद व्यक्तियों और परिवारों द्वारा अर्जित आय है।प्रयोज्य आय की परिभाषाउदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति की मासिक सकल आय 1 लाख रुपये है और कर व अन्य कटौतियां 20,000 रुपये हैंतो प्रयोज्य आय 80,000 रुपये होगी।यह शुद्ध "टेक-होम" पेमेंट है जो वित्तीय निर्णयों के लिए आधार बनती है।सही विकल्पनिम्नलिखित में से प्रयोज्य आय को "करों और अन्य कटौतियों के बाद व्यक्तियों और परिवारों द्वारा अर्जित आय" दर्शाता है।यह विकल्प सबसे सटीक है क्योंकि यह स्पष्ट रूप से करों के बाद की शुद्ध आय पर जोर देता हैजो उपभोक्ता खर्च और बचत को प्रभावित करती है।अन्य विकल्प जैसे सकल आय (कटौतियों से पहले) या केवल करों के बाद की आय (बिना अन्य कटौतियों का उल्लेख) अपूर्ण होते।गणना का सूत्रप्रयोज्य आय = सकल आय (Gross Income) - कर (Taxes) - अन्य अनिवार्य कटौतियां (Mandatory Deductions)।सकल आय: वेतन, बोनस, किराया, ब्याज आदि शामिल।कटौतियां: आयकर, पीएफ, ईएसआईसी, पेंशन योगदान आदि। यह सूत्र व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन का मूल है और अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग को मापने के लिए उपयोगी है।आर्थिक महत्वप्रयोज्य आय उपभोक्ता व्यवहार का प्रमुख संकेतक हैउच्च प्रयोज्य आय से खर्च बढ़ता है, जो जीडीपी को बढ़ावा देता है। यह वित्तीय स्थिरता मापती हैबजटिंग, ऋण चुकाने या छुट्टियों जैसे विवेकाधीन खर्चों के लिए उपयोगी है।भारत में, यह जीएसटी, इनकम टैक्स स्लैब्स से प्रभावित होती है।उपयोग के तरीकेबजटिंग: 50% जरूरी खर्च, 30% इच्छित खर्च, 20% बचत पर आवंटित करें।निवेश: उच्च प्रयोज्य आय से म्यूचुअल फंड या एसआईपी में लगाएं।ट्रैकिंग: ऐप्स जैसे Money Manager से मॉनिटर करें।उदाहरण: यदि प्रयोज्य आय 50,000 रुपये हैतो 25,000 खाने-रहने पर, 15,000 शॉपिंग पर, 10,000 बचत पर खर्च करें।49. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थानों का लाभ है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (II-पाली)](a) महिला उद्यमियों के लिए न्यूनतम समर्थन(b) गरीबी उन्मूलन पर सीमित प्रभाव(c) वित्तीय समावेशन में वृद्धि(d) अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता का बढ़नाCorrect Answer: (c) वित्तीय समावेशन में वृद्धिSolution:भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थानों का लाभ यह होता है कि बिना किसी जमानत के आसानी से ग्राहकों को अल्पावधिक ऋण प्रदान करती है।यह अर्थव्यवस्था के गरीब वर्गों को अधिक धन उपलब्ध कराती है, जिससे गरीब परिवारों की आय में वृद्धि होती हैरोजगार का भी सृजन होता है अर्थात वित्तीय समावेशन में वृद्धि होती है।मुख्य लाभसूक्ष्म वित्त संस्थानों के प्रमुख लाभों में वित्तीय समावेशन प्रमुख हैजो ग्रामीण और शहरी गरीबों को छोटे ऋण, बचत खाते, बीमा और भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराता है।ये बिना किसी जमानत के आसानी से अल्पकालिक ऋण देते हैं, जिससे छोटे व्यवसाय शुरू करने या आय बढ़ाने में मदद मिलती है।इससे गरीब परिवारों की आय में वृद्धि होती है और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।निगमीकरण के बाद MFIs को अधिक पूंजी जुटाने की क्षमता मिली है, जिससे वे ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच सकते हैंसेवाओं का विस्तार कर सकते हैं। यह वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करता है तथा जोखिम प्रबंधन में सुधार लाता है।सामाजिक प्रभावये संस्थान विशेष रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण में सहायक हैं, क्योंकि अधिकांश ऋण महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को दिए जाते हैंजो उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता और उद्यमिता के अवसर प्रदान करते हैं।सामुदायिक स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार होता है।गरीबी उन्मूलन में योगदान देते हुए ये आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बैंकिंग पहुंच सीमित है, MFIs समूह उधार प्रणाली अपनाते हैंजो पारस्परिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करती है और डिफॉल्ट दर को कम रखती है।आर्थिक योगदानMFIs स्व-रोजगार को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे निम्न आय वर्ग की उत्पादकता बढ़ती हैस्थायी आजीविका बनती है। ये छोटे पैमाने के उद्यमों को समर्थन देकर समग्र आर्थिक विकास में भागीदार बनते हैं।वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, भारत जैसे देशों में ये करोड़ों लोगों को सेवाएं पहुंचा रहे हैं।चुनौतियां और नियमनहालांकि लाभ स्पष्ट हैं, उच्च ब्याज दरें और अति-ऋणन जैसी चुनौतियां रहती हैंजिन्हें RBI के NBFC-MFI ढांचे से नियंत्रित किया जाता है। 2014 के नियमों ने पारदर्शिता बढ़ाई है।कुल मिलाकर, ये संस्थान भारत के सतत विकास लक्ष्यों में योगदान देते हैं।50. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अक्टूबर, 2022 में ....... में एशिया के सबसे बड़े संपीडित जैव गैस (Compressed Bio Gas - CBG) संयंत्र का उद्घाटन किया। [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (I-पाली)](a) चंडीगढ़(b) पंजाब(c) दिल्ली(d) राजस्थानCorrect Answer: (b) पंजाबSolution:अक्टूबर, 2022 में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लेहरगागा, संगरुर (पंजाब) में एशिया के सबसे बड़े संपीडित जैव गैस संयंत्र का उद्घाटन किया।इस संयंत्र को जर्मनी की अग्रणी बायो एनर्जी कंपनियों में से एक वर्बियो एजी द्वारा लगभग 220 करोड़ रुपये के एफडीआई निवेश के साथ कमीशन किया गया है।संयंत्र का स्थान और उद्घाटनयह संयंत्र पंजाब के संगरूर जिले के लेहरागागा में स्थित है, जो लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।17 अक्टूबर 2022 को उद्घाटन समारोह में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री भगवंत मान और वर्बियो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।जर्मनी की प्रमुख बायो-एनर्जी कंपनी वर्बियो एजी ने इस संयंत्र को लगभग 220 करोड़ रुपये (कुछ स्रोतों में 230 करोड़) के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के साथ स्थापित किया।उत्पादन क्षमता और तकनीकसंयंत्र की शुरुआती उत्पादन क्षमता 6 टन प्रति दिन (TPD) हैलेकिन पूर्ण क्षमता पर यह प्रतिदिन 300 टन धान का भूसा (paddy straw) प्रोसेस करके 33 TPD संपीड़ित जैव गैस (CBG) पैदा करेगा।इसमें 8 डाइजेस्टर हैं, जिनकी क्षमता कुल 10,000 क्यूबिक मीटर है।यह संयंत्र 10 किमी दायरे के 6-8 सैटेलाइट लोकेशन्स से 1,00,000 टन धान का भूसा प्रतिवर्ष खपत करेगा।इसके अलावा, प्रतिदिन 600-650 टन किण्वित जैविक खाद (FOM - Fermented Organic Manure) भी बनेगी, जो जैविक खेती के लिए उपयोगी होगी।आर्थिक और पर्यावरणीय लाभयह संयंत्र किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है।धान के भूसे को जलाने की समस्या को हल करते हुए यह नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत बनेगाजिससे भारत की जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी।रोजगार के मामले में यह 390 प्रत्यक्ष और 585 अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करेगा।हरदीप सिंह पुरी ने उद्घाटन के दौरान कहा कि CBG ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मास्टर प्लान का हिस्सा हैसरकार इसके इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए हर कदम उठा रही है।राष्ट्रीय संदर्भ में महत्वभारत सरकार की सतत जैवावशेष प्रबंधन (SATAT) योजना के तहत CBG संयंत्रों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।यह संयंत्र पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम है।अक्टूबर 2022 के समय यह एशिया का सबसे बड़ा CBG संयंत्र था, जो भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूत करता है।Submit Quiz« Previous12345