विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-IV

Total Questions: 58

1. जी.डी.पी. (GDP) का सबसे बड़ा घटक कौन-सा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) उपभोग
Solution:
  • जीडीपी के 4 मुख्य घटक हैं-उपभोग, निवेश, सरकारी खर्च, निर्यात। उपभोग नागरिकों द्वारा खरीदी गई
  • वस्तुओं और सेवाओं के योग का प्रतिनिधित्व करता है। वह जीडीपी का सबसे बड़ा घटक है।
  • जीडीपी क्या है?
    • इसे व्यय पद्धति से गणना की जाती है: जीडीपी = C + I + G + (X - M), जहां C उपभोग, I निवेश, G सरकारी व्यय, X निर्यात और M आयात है।
    • यह आर्थिक विकास का प्रमुख संकेतक है और नीति-निर्माण में उपयोग होता है।
  • मुख्य घटक
    • जीडीपी के चार प्रमुख व्यय-आधारित घटक हैं:
    • उपभोग (C): घरेलू और गैर-लाभकारी संस्थाओं द्वारा वस्तुओं-सेवाओं पर खर्च।
    • इसमें टिकाऊ वस्तुएं (कार, फ्रिज), गैर-टिकाऊ (भोजन, कपड़े) और सेवाएं (शिक्षा, स्वास्थ्य) शामिल।​
    • निवेश (I): व्यवसायों द्वारा पूंजीगत वस्तुओं (मशीनरी, भवन) पर व्यय, जिसमें इन्वेंटरी परिवर्तन भी। यह 15-20% होता है।​
    • सरकारी व्यय (G): सरकार का उपभोग और निवेश खर्च, जैसे बुनियादी ढांचा, रक्षा। लगभग 15-20%।​
    • शुद्ध निर्यात (X - M): निर्यात से आयात घटाकर। यह अक्सर ऋणात्मक होता है।​
  • उपभोग सबसे बड़ा क्यों?
    • विकसित अर्थव्यवस्थाओं (जैसे अमेरिका, यूरोपीय देश) में उपभोग जीडीपी का 60-70% है
    • क्योंकि उपभोक्ता मांग अर्थव्यवस्था चलाती है। विकासशील देशों (जैसे भारत) में भी यह प्रमुख है
    • हालांकि निवेश का हिस्सा ऊंचा हो सकता है। उपभोग में बदलाव आर्थिक चक्र को प्रभावित करता है
    • उदाहरणस्वरूप, मंदी में उपभोग घटने से जीडीपी गिरती है।
  • भारत के संदर्भ में
    • भारत में वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, उपभोग जीडीपी का लगभग 58-60% है
    • ग्रामीण और शहरी मांग से प्रेरित। हाल के वर्षों में सेवाओं पर उपभोग बढ़ा है। निवेश (25-30%) दूसरा बड़ा है, सरकारी व्यय 12-15%।
  • महत्व और प्रभाव
    • उपभोग स्थिरता आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करता है, लेकिन आय असमानता या महंगाई से प्रभावित होता है।
    • नीति-निर्माता उपभोग बढ़ाने के लिए सब्सिडी या कर-कटौती करते हैं।
    • दीर्घकालिक रूप से, निवेश विकास तेज करता है, लेकिन उपभोग बिना जीडीपी अधर में लटक जाती है।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण निजी क्षेत्र के उद्यमियों को किए जाने वाले हस्तांतरण को संदर्भित करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) निजीकरण
Solution:
  • निजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र को किसी निजी कंपनी के हाथों में सौंप दिया जाता है।
  • निजीकरण सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण निजी क्षेत्र के उद्यमियों को किए जाने वाले हस्तांतरण को संदर्भित करता है।
  • निजीकरण (Privatization)
    • निम्नलिखित में से वह प्रक्रिया जो सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण को निजी क्षेत्र के उद्यमियों को हस्तांतरण करने को संदर्भित करती है
    • वह निजीकरण है। यह आर्थिक सुधारों का एक प्रमुख हिस्सा है
    • जहां सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचकर या प्रबंधन सौंपकर PSUs को निजी हाथों में सौंप देती है।
  • निजीकरण की परिभाषा
    • निजीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों का स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण निजी क्षेत्र को स्थानांतरित किया जाता है।
    • इसमें पूर्ण विक्रय, आंशिक हिस्सेदारी बिक्री या केवल संचालन का ठेका देना शामिल हो सकता है।
    • उदाहरणस्वरूप, भारत में 1991 के उदारीकरण के बाद कई PSUs जैसे BALCO और VSNL का निजीकरण किया गया।
  • निजीकरण क्यों किया जाता है?
    • सरकार PSUs में लगे संसाधनों को स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी प्राथमिकताओं में लगाने के लिए निजीकरण अपनाती है।
    • यह वाणिज्यिक जोखिम को निजी उद्यमियों पर डालता है, जो अधिक कुशल संचालन सुनिश्चित करते हैं।
    • इसके अलावा, यह सरकारी हस्तक्षेप कम कर निगमित शासन को बढ़ावा देता है।
  • निजीकरण के रूप
    • पूर्ण निजीकरण: सरकार की पूरी हिस्सेदारी बिक्री, जैसे एयर इंडिया का तत्कालीन निजीकरण प्रयास।
    • आंशिक निजीकरण: हिस्सेदारी कम करना लेकिन नियंत्रण बनाए रखना।
    • प्रबंधन हस्तांतरण: स्वामित्व सरकारी लेकिन संचालन निजी को, जो दक्षता बढ़ाता है।
  • भारत में निजीकरण का इतिहास
    • भारत में 1956 के औद्योगिक नीति संकल्प से PSUs प्रमुख थे, लेकिन 1991 के आर्थिक संकट के बाद निजीकरण तेज हुआ।
    • राष्ट्रीयकृत बैंकों और बीमा कंपनियों का आंशिक निजीकरण हुआ।
    • हाल के वर्षों में राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP) के तहत संपत्तियों का निजीकरण लक्षित है।
    • इससे राजकोषीय घाटा कम होता है और FDI आकर्षित होता है।
  • लाभ
    • दक्षता और लाभप्रदता में वृद्धि, क्योंकि निजी क्षेत्र प्रतिस्पर्धा पर जोर देता है।
    • सरकारी सब्सिडी कम, संसाधन पुनर्निर्देशन।
    • छोटे निवेशकों को शेयर वितरण से शक्ति विकेंद्रीकरण।
  • हानियां
    • धन संकेंद्रण और एकाधिकार का खतरा।
    • निजी क्षेत्र केवल लाभकारी क्षेत्रों में रुचि लेता है, घाटे वाले PSUs उपेक्षित।
    • कर्मचारी नौकरियां खतरे में।​

3. निम्नलिखित में से कौन-सा, भारत के निजी क्षेत्र का उपक्रम है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड
Solution:
  • हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HDFC Ltd.) भारत के निजी क्षेत्र का उपक्रम है
  • जबकि बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल लिमिटेड, भद्रावती स्टील प्लांट और एलॉय स्टील्स प्लांट सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं।
  • निजी बनाम सार्वजनिक क्षेत्र: परिभाषा
    • भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) वे होते हैं जिनमें केंद्र या राज्य सरकार की 51% या अधिक हिस्सेदारी होती है
    • जैसे SAIL, OIL, BHEL या LIC। ये राष्ट्रीय हित, बुनियादी ढांचा और रोजगार सृजन के लिए स्थापित किए जाते हैं।
    • दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के उपक्रम पूर्णतः या मुख्यतः निजी निवेशकों के होते हैं
    • जो लाभ कमाने, नवाचार और बाजार प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित रहते हैं। टाटा स्टील इसका क्लासिक उदाहरण है, जो टाटा समूह द्वारा संचालित है।
  • टाटा स्टील: निजी क्षेत्र का प्रतीक
    • टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना 1907 में जमशेदजी टाटा ने की थी
    • जो भारत का पहला एकीकृत इस्पात संयंत्र था (जमशेदपुर, झारखंड में)। यह पूरी तरह निजी है
    • सरकार की कोई बहुमत हिस्सेदारी नहीं। कंपनी ने भारत के औद्योगिकरण में अग्रणी भूमिका निभाई, स्वतंत्रता से पहले ही इस्पात उत्पादन शुरू कर दिया।
    • आज टाटा स्टील वैश्विक स्तर पर सक्रिय है, कोरस (यूके) का अधिग्रहण किया, और पर्यावरण-अनुकूल इस्पात उत्पादन पर फोकस करता है।
    • 2025 तक इसकी बाजार पूंजीकरण ₹2 लाख करोड़ से अधिक है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व
    • स्वतंत्रता के बाद नेहरूवादी मॉडल में सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता मिली (भारी उद्योग PSU के पास), लेकिन 1991 के उदारीकरण के बाद निजी क्षेत्र फला-फूला।
    • टाटा स्टील ने 100+ वर्षों में 20 मिलियन टन+ क्षमता बनाई, रोजगार दिया (1 लाख+ कर्मचारी), और GDP में योगदान दिया।
    • निजीकरण नीति (2021 ATP) ने PSUs को कम किया, निजी को बढ़ावा दिया।
  • वर्तमान स्थिति (2026 तक)
    • जनवरी 2026 में टाटा स्टील नेट-जीरो इस्पात परियोजना (UK) और भारत में Kalinganagar विस्तार कर रही है।
    • निजी क्षेत्र अब GDP का 60%+ योगदान देता है, रोजगार का मुख्य स्रोत।
    • चुनौतियां: पर्यावरण नियम, चीन प्रतिस्पर्धा, लेकिन लाभ: कुशलता, नवाचार।

4. निम्नलिखित में से कौन-सी समस्या माइक्रोफाइनेंस की समस्याओं में से एक नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) माइक्रोफाइनेंस के लिए धन का अत्यधिक प्रवाह
Solution:
  • माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं समाज के कमजोर सदस्यों को उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए वित्तीय सेवाएं प्रदान करती हैं।
  • परिणामस्वरूप, अत्यधिक ऋणग्रस्तता एक बड़ी समस्या है।
  • दिए गए विकल्पों में 'माइक्रोफाइनेंस के लिए धन का अत्यधिक प्रवाह' भारत में माइक्रोफाइनेंस की समस्याओं में से एक नहीं है।
  • प्रमुख समस्याएं
    • माइक्रोफाइनेंस की मुख्य समस्याएं निम्न हैं, जो विभिन्न रिपोर्ट्स से सिद्ध हैं:
    • अति-ऋणग्रस्तता (Over-Indebtedness): उधारकर्ता अक्सर कई MFIs से ऋण ले लेते हैं, जिससे ऋण चुकाने की क्षमता खत्म हो जाती है।
    • 2025 तक सकल NPA 16% तक पहुंच गया। इससे डिफॉल्ट, साख हानि और कभी-कभी आत्महत्या जैसी घटनाएं होती हैं।
    • उच्च ब्याज दरें: छोटे ऋणों की उच्च प्रशासनिक लागत के कारण ब्याज दरें 20-30% तक होती हैं
    • जो गरीबों के लिए बोझ बन जाती हैं और गरीबी के चक्र को बनाए रखती हैं।
    • वित्तीय साक्षरता की कमी: ग्रामीण उधारकर्ता ऋण शर्तों को नहीं समझ पाते, जिससे चूक का जोखिम बढ़ता है। भारत में साक्षरता दर कम होने से यह समस्या गंभीर है।
    • विनियमन और शासन की कमी: MFIs में पारदर्शिता की कमी, जबरन वसूली और रेकलेस लेंडिंग आम हैं। RBI के दिशानिर्देशों के बावजूद NPA बढ़ रहा है।
    • परिचालन अक्षमताएं और बाह्य आघात: COVID जैसी घटनाएं, राजनीतिक हस्तक्षेप और अवसंरचनात्मक चुनौतियां (जैसे खराब सड़कें) प्रभावित करती हैं।
    • 2024-25 में क्लाइंट 13% और लोन 14% घटे।
  • कौन-सी समस्या माइक्रोफाइनेंस की समस्या नहीं है?
    • यदि विकल्पों में "घरेलू आय को कम करना" या "उच्च लाभप्रदता प्राप्त करना" जैसा कुछ है
    • तो यह माइक्रोफाइनेंस की समस्या नहीं है। MFIs का उद्देश्य घरेलू आय बढ़ाना और वित्तीय आत्मनिर्भरता लाना है, न कि कम करना।
    • उच्च लाभप्रदता भी समस्या नहीं, बल्कि लक्ष्य है (हालांकि अत्यधिक लाभ की आलोचना होती है)।
    • वास्तविक समस्याएं उधारकर्ता-केंद्रित हैं, न कि संस्था के लाभ से। उदाहरण: MFIs 91% लोन आय-सृजन के लिए देते हैं।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में माइक्रोफाइनेंस वितरण-तंत्र के कई दृष्टिकोणों में से एक नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) सस्ता सब्सिडी वाला क्रेडिट
Solution:
  • भारत में माइक्रोफाइनेंस दो मुख्य चैनलों के माध्यम से संचालित होते हैं
  • स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज प्रोग्राम और माइक्रोफाइनेंस संस्थान-क्रेडिट लेंडिंग मॉडल।
  • इसके साथ ही बैंकों द्वारा पारंपरिक कमजोर वर्गऋण को शामिल किया जाता है, जबकि सस्ता सब्सिडी वाला क्रेडिट शामिल नहीं किया जाता।
  • प्रमुख वितरण दृष्टिकोण
    • स्वयं सहायता समूह (SHG) मॉडल: NABARD द्वारा प्रोत्साहित, 10-20 महिलाएं समूह बनाती हैं
    • आंतरिक बचत करती हैं, और बैंक से ऋण लेती हैं। सहकर्मी निगरानी से डिफ़ॉल्ट कम होता है।​
    • संयुक्त दायित्व समूह (JLG) मॉडल: MFI द्वारा चलाया जाता है
    • 4-10 सदस्य सामूहिक रूप से ऋण के लिए उत्तरदायी होते हैं। ग्रामीण उद्यमियों के लिए उपयुक्त।
    • समूह ऋण मॉडल: समूह सदस्य एक-दूसरे की गारंटी लेते हैं
    • जो सामुदायिक बंधन मजबूत करता है। Bandhan, Spandana जैसी MFIs इसका उपयोग करती हैं।
  • गैर-मानक दृष्टिकोण
    • व्यक्तिगत ऋण वितरण (इंडिविजुअल लेंडिंग) बिना समूह गारंटी के भारत में माइक्रोफाइनेंस का मुख्य दृष्टिकोण नहीं है।
    • RBI के NBFC-MFI दिशानिर्देश SHG/JLG पर जोर देते हैं
    • क्योंकि व्यक्तिगत मॉडल में डिफ़ॉल्ट जोखिम अधिक होता है।
    • घरेलू आय कम करना" या "ग्रामीण पहुंच न होना
    • जैसे विकल्प उद्देश्यों से संबंधित हैं, न कि वितरण-तंत्र से।
  • चुनौतियाँ और नियमन
    • माइक्रोफाइनेंस में अनुपयुक्त मॉडल चयन से पुनर्भुगतान बोझ बढ़ता है।
    • RBI 2014 के NBFC-MFI ढांचे में 50% आय पर सीमा लगाई गई है।
    • क्रेडिट ब्यूरो एकीकरण और आवश्यकता-आधारित मॉडल की सिफारिश की जाती है।​
    • AP 2010 संकट के बाद JLG/SHG प्रमुख बने। MFIN ने ऋण सीमा तीन संस्थाओं तक सुझाई।​
  • भारत में स्थिति (2026 तक)
    • 2023 तक पोर्टफोलियो ₹3.93 लाख करोड़ पहुंचा, 21% वृद्धि के साथ।
    • ग्रामीण महिलाओं पर फोकस, लेकिन ओवर-इंडेब्टेडनेस चुनौती। प्रौद्योगिकी से पारदर्शिता बढ़ रही है।

6. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन 2019-25 के अनुसार, 111 लाख करोड़ रु. के कुल अनुमानित पूंजीगत व्यय में से ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं की हिस्सेदारी कितनी है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 24%
Solution:
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वर्ष 2019-2025 के लिए राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर गठित कार्यदल की रिपोर्ट जारी की गई।
  • इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2020-25 हेतु 111 लाख करोड़ रु. के कुल अनुमानित पूंजीगत व्यय में से ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं की हिस्सेदारी 24%, सड़कों की 19%, शहरी क्षेत्र की 16% और रेलवे की 13% हिस्सेदारी आदि हैं।
  • NIP का अवलोकन
    • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) भारत सरकार द्वारा 2019 में शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है
    • जो वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक (कुल पांच वर्ष) की अवधि के लिए तैयार की गई।
    • इसका उद्देश्य देश की आधारभूत संरचना को मजबूत करना, आर्थिक विकास को गति देना और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करना है।
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसकी घोषणा की थी
    • जिसमें शुरुआत में 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश लक्ष्य रखा गया था
    • लेकिन टास्क फोर्स की अंतिम रिपोर्ट (अप्रैल 2020) में इसे संशोधित कर 111 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया।
    • इस पाइपलाइन में 6,500 से अधिक परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें से 40% (लगभग 44 लाख करोड़ रुपये) पहले से क्रियान्वयन चरण में हैं
    • 30% (33 लाख करोड़) अवधारणा स्तर पर और 20% (22 लाख करोड़) विकास चरण में।
    • कुल निवेश में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की हिस्सेदारी क्रमशः 39% और 40% है, जबकि निजी क्षेत्र से 21% की अपेक्षा है।
  • ऊर्जा क्षेत्र की हिस्सेदारी
    • टास्क फोर्स रिपोर्ट के अनुसार, कुल 111 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय में ऊर्जा क्षेत्र को 24% आवंटित किया गया है।
    • यह हिस्सेदारी सड़क (18-19%), शहरी (16-17%) और रेलवे (12-13%) जैसे प्रमुख क्षेत्रों के साथ मिलकर कुल निवेश का 70% कवर करती है।
    • ऊर्जा क्षेत्र में 24.54 लाख करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश है, जिसमें विद्युत क्षेत्र पर 11.7 लाख करोड़ रुपये का विशेष जोर है।
    • अन्य ऊर्जा उप-क्षेत्रों में तेल, गैस, नवीकरणीय ऊर्जा और कोयला शामिल हैं।
    • यह आवंटन ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा परिवर्तन और ग्रिड आधुनिकीकरण पर केंद्रित है
    • जो भारत की 'सतत विकास' लक्ष्यों से जुड़ा है।
    • उदाहरणस्वरूप, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं (जैसे सौर और पवन) को प्राथमिकता दी गई है
    • 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य पूरा हो सके।​
  • कार्यान्वयन चुनौतियां और प्रगति
    • NIP की शुरुआत 2020 में हुई, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण वित्त वर्ष 2020-21 में विलंब हुआ।
    • 2026 तक (वर्तमान समय) कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या उन्नत चरण में हैं
    • जैसे रेलवे विद्युतीकरण और सड़क नेटवर्क विस्तार। वित्तपोषण के लिए बॉन्ड बाजार गहरा करने
    • विकास वित्त संस्थानों की स्थापना और भूमि मौद्रीकरण पर जोर दिया गया। हालांकि, निजी निवेश 21% लक्ष्य से कम रहा है।

7. प्रशासक के लिए उच्च शिक्षा नेतृत्व विकास कार्यक्रम (Higher Education Leadership Development Programme for Administrator)' किस केंद्रीय मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया कार्यक्रम है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) मानव संसाधन विकास मंत्रालय
Solution:
  • उच्च शिक्षा नेतृत्व विकास कार्यक्रम का शुभारंभ नई दिल्ली में किया गया। यह यूजीसी और ब्रिटिश काउंसिल की संयुक्त पहल है।
  • यह कार्यक्रम भारतीय विश्वविद्यालयों में मध्यम और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में नेतृत्व गुणों को बढ़ाने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (वर्तमान शिक्षा मंत्रालय) द्वारा शुरू किया गया।
  • कार्यक्रम का परिचय
    • यह कार्यक्रम भारतीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रशासकों के नेतृत्व कौशल को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और यूके-भारत शिक्षा एवं अनुसंधान पहल (UKIERI) की संयुक्त पहल के तहत 2020 में लॉन्च किया गया।
    • इसका उद्देश्य मध्यम और वरिष्ठ स्तर के प्रशासकों जैसे संयुक्त/उप/सहायक रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार को प्रशिक्षित करना है ताकि वे संस्थागत सुधार ला सकें।
  • प्रायोजक और कार्यान्वयन
    • कार्यक्रम को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय) के अधीन UGC द्वारा समर्थित किया गया।
    • यूके की Advance HE संस्था द्वारा इसे लागू किया जाता है, जो उच्च शिक्षा में नेतृत्व विकास में विशेषज्ञ है।
    • यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है, जिसमें शासन, निर्णय लेने और प्रणालीगत परिवर्तन पर फोकस रहता है।
  • मुख्य उद्देश्य
    • भारतीय विश्वविद्यालयों में नेतृत्व क्षमता बढ़ाना और वैश्विक मानकों तक पहुंचना।​
    • प्रशासकों को ज्ञान, कौशल और व्यवहार प्रदान करना जो संस्थानों में सुधार लाएं।​
    • उच्च शिक्षा में चुनौतियों जैसे प्रबंधन और प्रदर्शन सुधार पर ध्यान केंद्रित करना।​
  • लक्षित लाभार्थी और संरचना
    • कार्यक्रम संयुक्त रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जैसे पदाधिकारियों के लिए है।
    • यह कार्यशालाओं, कोचिंग और समूह चर्चाओं के माध्यम से आयोजित होता है।
    • कुल 2020 से अब तक कई बैच चलाए गए हैं, जो प्रशिक्षण के बाद नेतृत्व क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाते हैं।
  • महत्व और प्रभाव
    • HELDP उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में सहायक है, खासकर भारत के NEP 2020 लक्ष्यों के अनुरूप।
    • यह प्रशासकों को आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करता है
    • जैसे डिजिटल परिवर्तन और संस्थागत स्वायत्तता।
    • शिक्षा मंत्रालय के तहत यह पहल उच्च शिक्षा विभाग की व्यापक योजनाओं का हिस्सा है।

8. 2014 में शुरू हुआ 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम, भारत में 1970 और 1980 के दशक के ....... के समान है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) आयात प्रतिस्थापन नीति
Solution:
  • आयात प्रतिस्थापन, व्यापार नीति के तहत एक रणनीति है, जो विदेशी उत्पादों के आयात को समाप्त करती है
  • घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। इसी प्रकार वर्ष 2014 में शुरू हुआ 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम भी आयात प्रतिस्थापन के समान है
  • जिसका उद्देश्य भारत को सबसे पसंदीदा वैश्विक विनिर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना है।
  • 'मेक इन इंडिया' और 1970-80 के दशक की आयात प्रतिस्थापन नीति
    • 2014 में शुरू हुआ 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम भारत के 1970 और 1980 के दशक की आयात प्रतिस्थापन नीति (Import Substitution Policy) के समान है।
    • यह नीति घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करने पर केंद्रित थी
    • ठीक वैसे ही जैसे 'मेक इन इंडिया' भारत को विनिर्माण हब बनाने का प्रयास करता है।​
  • आयात प्रतिस्थापन नीति का ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1970 और 1980 के दशक में भारत ने स्वतंत्रता के बाद की औद्योगिक नीतियों के तहत आयात प्रतिस्थापन को अपनाया
    • जिसमें उच्च आयात शुल्क, लाइसेंस राज और विदेशी मुद्रा नियंत्रण के जरिए घरेलू उद्योगों को संरक्षण दिया गया।
    • इसका उद्देश्य विदेशी वस्तुओं के बजाय भारत में ही उत्पादन करना था, लेकिन इससे उत्पादकता घटी और निर्यात प्रभावित हुआ
    • विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा 1948 के 2.4% से घटकर 1979 में 0.4% रह गया।
    • 1980 के औद्योगिक नीति विवरण में कुछ उदारीकरण हुआ, जैसे लाइसेंस क्षमता में 25% स्वचालित वृद्धि, लेकिन कुल मिलाकर नीति प्रतिबंधात्मक रही
    • जिससे विनिर्माण वृद्धि दर 1975 तक 3.5% तक गिर गई।
  • 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम का परिचय
    • 'मेक इन इंडिया' को 25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया, जो 12वीं पंचवर्षीय योजना का हिस्सा था।
    • इसका मुख्य लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना, द्वितीयक-तृतीयक क्षेत्रों को मजबूत करना
    • 1 करोड़ से अधिक रोजगार सृजन और 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को विश्व बाजार में बेचना है।
    • यह आत्मनिर्भरता पर जोर देता है, लेकिन पुरानी नीति के विपरीत व्यापार में आसानी, FDI आकर्षण और वैश्विक सप्लाई चेन में एकीकरण को बढ़ावा देता है।
  • समानताएं: घरेलू उत्पादन पर फोकस
    • दोनों नीतियां आयात कम करके स्वदेशी विनिर्माण को प्राथमिकता देती हैं—1970-80 में 'इंडिजिनस नॉन-अवेलेबिलिटी' नियम से घरेलू बाजार संरक्षित था
    • वहीं 'मेक इन इंडिया' कंपनियों को भारत में फैक्टरी लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, 1970s में टीवी उत्पादन 14,000 से बढ़कर 3 लाख यits हो गया
    • जो प्रतिस्थापन का परिणाम था; इसी तरह 'मेक इन इंडिया' ने विनिर्माण क्षेत्र को बूस्ट दिया।
  • अंतर: पुरानी vs नई नीति
    • पुरानी नीति बंद अर्थव्यवस्था वाली थी, जिसमें राज्य हस्तक्षेप बढ़ा (1948-80 चरण), जबकि 'मेक इन इंडिया' खुली और निवेशक-अनुकूल है
    • यह 1980s के प्रो-बिजनेस शिफ्ट (जैसे क्षमता वृद्धि) को आगे बढ़ाता है। 1970s में ग्रामीण मांग और सार्वजनिक निवेश से कुछ सुधार हुआ
    • लेकिन 1991 के बाद उदारीकरण आया; 'मेक इन इंडिया' इसी निरंतरता में है, जिसमें 10 वर्षों (2024 तक) में विनिर्माण को सशक्त बनाया।
  • उपलब्धियां और चुनौतियां
    • 'मेक इन इंडिया' ने FDI बढ़ाया, PLI योजनाओं से मोबाइल/ऑटो सेक्टर में प्रगति की
    • लेकिन 1970-80 जैसी नौकरशाही बाकी है। 1980s में वृद्धि 3.9% per capita GDP रही
    • लेकिन उत्पादकता कमजोर; आज की नीति वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर दांव लगाती है।
    • कुल मिलाकर, यह पुरानी नीति का आधुनिक संस्करण है जो भारत को 21वीं सदी के लिए तैयार करता है।

9. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भारत सरकार द्वारा 1997 में ....... के रूप में फिर से शुरू किया गया था। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली
Solution:
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) सरकार प्रायोजित दुकानों की श्रृंखला है
  • जिसे समाज के वंचित वर्गों को सस्ती कीमतों पर बुनियादी खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं के वितरण का दायित्व सौंपा गया।
  • इसको सरकार द्वारा वर्ष 1997 में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रूप में फिर से शुरू किया गया था।
  • TPDS की शुरुआत
    • लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Targeted Public Distribution System - TPDS) को जून 1997 में भारत सरकार ने लॉन्च किया
    • खाद्य सब्सिडी को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। पहले की PDS में व्यापक वितरण होता था
    • लेकिन इसमें रिसाव और अमीरों को भी लाभ मिलने की समस्या थी।
    • TPDS ने इसे गरीबी रेखा से नीचे (BPL) रहने वाले परिवारों पर केंद्रित कर दिया।
  • मुख्य उद्देश्य
    • TPDS का मुख्य लक्ष्य कमजोर वर्गों तक रियायती दरों पर अनाज पहुंचाना था।
    • लाभार्थियों को BPL और APL (गरीबी रेखा से ऊपर) श्रेणियों में बांटा गया
    • जहां BPL को कम कीमत (जैसे गेहूं पर ₹2/किलो) मिलती है।
    • यह खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और भुखमरी रोकने के लिए डिजाइन किया गया।
  • कार्यप्रणाली
    • केंद्र सरकार खाद्यान्न की खरीद, भंडारण और परिवहन का जिम्मा लेती है (फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से)।
    • राज्य सरकारें उचित मूल्य दुकानों (राशन की दुकानें) के जरिए वितरण करती हैं।
    • BPL परिवारों को गेहूं, चावल, चीनी और केरोसिन सब्सिडी पर मिलता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • PDS की शुरुआत 1960s में युद्धकालीन राशनिंग से हुई
    • लेकिन 1992 में Revamped PDS आया। 1997 में TPDS ने इसे बदल दिया।
    • बाद में 2000 में Antyodaya Anna Yojana (AAY) जोड़ी गई
    • जो सबसे गरीबों के लिए 35 किलो अनाज ₹2-3/किलो पर देती है।
  • चुनौतियां और सुधार
    • TPDS में भ्रष्टाचार, कालाबाजारी और गलत लाभार्थी चयन की समस्याएं रहीं।
    • डिजिटलीकरण, आधार लिंकिंग और One Nation One Ration Card (2020 से) ने इसे मजबूत किया।
    • NFSA 2013 ने TPDS को कानूनी आधार दिया, 80 करोड़ लोगों को कवर करते हुए।

10. भारत सरकार की किस पहल की विशेषताएं निम्नलिखित हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

(A) इसे भारत को वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में बदलने के लिए तैयार किया गया है।

(B) इसमें निवेशक सुविधा प्रकोष्ठ है, जो विनियामक अनुमोदन प्राप्त करने, निवेश-पूर्वचरण में मार्गदर्शन सेवाएं, निष्पादन और पश्च-देखभाल सहयोग प्रदान करने में निवेशकों की मदद करता है।

(C) इस में निवेश को सुविधाजनक बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने, कौशल विकास के संवर्धन और सर्वोत्तम कोटि के विनिर्माण बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की इच्छा व्यक्त की गई है।

Correct Answer: (c) मेक इन इंडिया
Solution:
  • वर्ष 2014 में लांच किए गए मेक इन इंडिया की मुख्य विशेषताएं हैं-भारत को वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में बदलने के लिए तैयार किया गया है।
  • इसमें निवेश सुविधा प्रकोष्ठ है, जो विनियामक अनुमोदन प्राप्त करने
  • निवेश-पूर्वचरण में मार्गदर्शन सेवाएं, निष्पादन और पश्च देखभाल सहयोग प्रदान करने में निवेशकों की मदद करता है।
  • इसमें निवेश को सुविधाजनक बनाने, नवाचार को बढावा देने
  • कौशल विकास के संवर्धन और सर्वोत्तम कोटि के विनिर्माण बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की इच्छा व्यक्त की गई है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • इसे भारत को वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में बदलने के उद्देश्य से तैयार किया गया है
    • जिसमें 25 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाता है।​
    • इसमें निवेशकों के लिए एक निवेशक सुविधा प्रकोष्ठ (Invest Facilitation Cell) स्थापित किया गया है
    • जो विनियामक अनुमोदन, निवेश पूर्व चरण में सहायता, क्रियान्वयन और रखरखाव के बाद की सेवाएँ प्रदान करता है।​
    • योजना का लक्ष्य निवेश को सरल बनाना, नवाचार को प्रोत्साहित करना
    • कौशल विकास कार्यक्रम चलाना और विश्वस्तरीय विनिर्माण अवसंरचना का निर्माण करना है।​
  • उद्देश्य और प्रभाव
    • मेक इन इंडिया के प्रमुख उद्देश्यों में द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों का विकास
    • उत्पादन बढ़ाकर निर्यात को मजबूत करना, 10 मिलियन से अधिक रोजगार सृजन और जीडीपी में वृद्धि शामिल हैं।
    • योजना ने उत्पादन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी उप-योजनाओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरणों और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में निवेश को 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाया है।
    • इससे आयात निर्भरता घटी और निर्यात बढ़ा।
  • कार्यान्वयन और उपलब्धियाँ
    • कार्यक्रम की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान हुई थी।​
    • 2025-26 बजट में राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM) जैसे नए कदमों से इसे मजबूती मिली, जो विनिर्माण को और गति देगा।​
    • श्रम सुधारों जैसे चार श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन इसकी पूरक भूमिका निभा रहा है
    • जो पुरानी खंडित व्यवस्था को एकीकृत अनुपालन से बदल रहा है।​