विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-IVTotal Questions: 5811. वस्तु विनिमय प्रणाली की सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (III-पाली)](i) आस्थगित भुगतान के मानक का अभाव(ii) आवश्यकताओं का पर्याप्त दोहरा संयोग(iii) मूल्य के भंडार का अभावसही उत्तर चुनें।(a) केवल (i) सही है(b) केवल (ii) सही है(c) (i) और (iii) दोनों सही हैं(d) केवल (iii) सही हैCorrect Answer: (c) (i) और (iii) दोनों सही हैंSolution:जब किसी एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु का लेना या देना होता है, तो वह वस्तु विनिमय कहलाता है।वस्तु विनिमय प्रणाली की सीमाओं में आस्थगित भुगतान के मानक का अभाव व मूल्य के भंडारण का अभाव होता है। अतः विकल्प (c) सही उत्तर है।मुख्य सीमाएँइच्छाओं के दोहरे संयोग (Double Coincidence of Wants) का अभाववस्तु विनिमय में लेन-देन तभी संभव होता है जब दोनों पक्षों की इच्छाएँ एक-दूसरे से मेल खाती होंअर्थात्, विक्रेता के पास जो वस्तु हो, वह खरीदार को चाहिए और खरीदार के पास जो होवह विक्रेता को चाहिए। उदाहरणस्वरूप, यदि किसान के पास अनाज है और वह एक जूते चाहता हैतो उसे ऐसा बढ़ई या जूतों का विक्रेता ढूंढना पड़ेगा जो ठीक उसी समय अनाज चाहता हो।यदि ऐसा न हो, तो व्यापार असफल हो जाता है।यह सीमा व्यापार को अत्यंत जटिल और समय-ग्रस्त बनाती है, विशेषकर बड़ी आबादी वाले समाज में।मूल्य के भंडारण (Store of Value) की कमीवस्तुओं को भविष्य के लिए संग्रहीत करना कठिन होता है क्योंकि अधिकांश वस्तुएँ नाशवान होती हैंउनका मूल्य समय के साथ घट जाता है। जैसे, फल-सब्जियाँ जल्दी खराब हो जाती हैंजबकि घोड़े या मवेशी रखरखाव महंगे होते हैं। इससे धन संचय असंभव हो जाता हैव्यक्ति भविष्य की आवश्यकताओं के लिए असुरक्षित रह जाता है।मुद्रा इस समस्या का समाधान प्रदान करती है क्योंकि वह स्थायी और मूल्य-स्थिर होती है।वस्तुओं का विभाज्यता अभाव (Lack of Divisibility)कई वस्तुएँ छोटे-छोटे इकाइयों में विभाजित नहीं की जा सकतीं, जिससे मूल्य समानता का मिलान कठिन हो जाता है।उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति एक गाय के बदले कुछ अनाज देना चाहता हैलेकिन गाय का मूल्य अनाज से अधिक है, तो गाय को काटकर बाँटना व्यावहारिक नहीं।इससे व्यापार असमान या असंभव हो जाता है। यह सीमा छोटे लेन-देन को भी बाधित करती है।अन्य महत्वपूर्ण सीमाएँमूल्य मापन की कठिनाई (Difficulty in Measuring Value)वस्तु विनिमय में कोई मानक इकाई नहीं होती, इसलिए विभिन्न वस्तुओं के मूल्य की तुलना करना जटिल होता है।एक घंटे की मजदूरी का मूल्य कितने अनाज या कपड़ों के बराबर है? यह निर्धारित करना असंभव होता हैजिससे विवाद और असमानता बढ़ती है।मुद्रा एक सामान्य लेखा इकाई (Unit of Account) के रूप में कार्य करती है।आस्थगित भुगतान के मानक का अभाव (Lack of Standard of Deferred Payment)ऋण या भविष्य के भुगतान को मापना असंभव होता है क्योंकि कोई स्थिर मूल्य मानक नहीं।यदि कोई व्यक्ति आज सेवाएँ देता है और भविष्य में भुगतान लेना चाहता हैतो समय के साथ वस्तु का मूल्य बदल सकता है।इससे विश्वास की कमी होती है और क्रेडिट सिस्टम विकसित नहीं हो पाता।परिवहन और भंडारण की समस्याकई वस्तुएँ भारी, नाजुक या परिवहन-कठिन होती हैं।जैसे, पशुओं को बाजार ले जाना जोखिमपूर्ण होता है।इससे व्यापार क्षेत्रीय सीमाओं तक ही सिमट जाता है।ऐतिहासिक एवं आर्थिक प्रभावये सीमाएँ प्राचीन समाजों में व्यापार को सीमित रखती थीं, जिससे आर्थिक विकास रुका।मुद्रा का उदय (जैसे सोना-चाँदी) इन समस्याओं का समाधान था।आधुनिक समय में भी, संकटकाल (जैसे हाइपरइन्फ्लेशन) में वस्तु विनिमय का सीमित उपयोग होता हैलेकिन यह पूर्ण विकल्प नहीं। उदाहरणस्वरूप, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कुछ देशों में यह प्रथा देखी गई।निष्कर्षण योग्य तथ्यवस्तु विनिमय की ये सीमाएँ न केवल व्यावहारिक बाधाएँ हैं, बल्कि आर्थिक प्रगति के लिए घातक सिद्ध हुईं।मुद्रा के चार मुख्य कार्य—विनिमय माध्यम, मूल्य भंडार, लेखा इकाई और आस्थगित भुगतान मानकइन्हीं सीमाओं को दूर करते हैं। इस प्रकार, वस्तु विनिमय एक संक्रमणकालीन चरण मात्र था।12. निम्नलिखित में से कौन-सा संकेतक भारत में व्यावसायिक संरचना और बेरोजगारी की तस्वीर प्रस्तुत करता है? [Phase-XI 27 जून, 2023 (II-पाली)](a) लिंग अनुपात(b) श्रम शक्ति भागीदारी(c) साक्षरता दर(d) प्रति व्यक्ति आयCorrect Answer: (c) साक्षरता दरSolution:'साक्षरता दर' संकेतक भारत में व्यावसायिक संरचना और बेरोजगारी की तस्वीर प्रस्तुत करता है।बेरोजगारी दर की गणना बेरोजगारों और श्रम शक्ति के अनुपात में की जाती है।व्यावसायिक संरचना क्या है?व्यावसायिक संरचना से तात्पर्य अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों—प्राथमिक (कृषि), द्वितीयक (उद्योग) और तृतीयक (सेवा)—में कार्यरत श्रमिकों के प्रतिशत वितरण से है।भारत में यह संरचना अभी भी कृषि-प्रधान है, जहां लगभग 45% कार्यबल लगा हुआ हैलेकिन उद्योग और सेवा क्षेत्रों में धीरे-धीरे स्थानांतरण हो रहा है।क्लार्क-कुजनेट्स सिद्धांत के अनुसार, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में प्राथमिक से गैर-कृषि क्षेत्रों की ओर यह移行 आर्थिक प्रगति का संकेत है।हालांकि, द्वितीयक क्षेत्र में अपर्याप्त अवशोषण के कारण छद्म बेरोजगारी (disguised unemployment) बनी रहती है।बेरोजगारी के प्रकार और स्थितिभारत में बेरोजगारी मुख्यतः छद्म, मौसमी, संरचनात्मक और खुली बेरोजगारी के रूप में मौजूद है।PLFS (Periodic Labour Force Survey) के अनुसार, 2023-24 में बेरोजगारी दर 3.2% तक घटी, लेकिन युवाओं और महिलाओं में यह अधिक है।ग्रामीण क्षेत्रों में 4.5% और शहरी में 6.5% दर रही।स्वरोजगार 58.4% तक बढ़ा, जो उद्यमिता को दर्शाता है, लेकिन अनौपचारिक रोजगार अभी भी प्रमुख है।श्रम बल भागीदारी दर क्यों सर्वोत्तम संकेतक?परिभाषा: LFPR वह प्रतिशत है जो 15+ आयु वर्ग के लोगों में काम कर रहे या काम तलाशने वाले व्यक्तियों का है।2023-24 में यह 60.1% हो गई, जो 2017-18 के 49.8% से वृद्धि दर्शाती है।व्यावसायिक संरचना का चित्रण: यह बताता है कि कार्यबल कितना कृषि (45-50%) बनाम सेवा (30%) या उद्योग (20-25%) में वितरित है।NSSO/PLFS के EUS सर्वेक्षण इसी से डेटा निकालते हैं।बेरोजगारी से जुड़ाव: LFPR उच्च होने पर बेरोजगारी दर (UR = बेरोजगार / LFPR) सटीक मापी जाती है।उदाहरणस्वरूप, महिलाओं की LFPR 34.2% कम होने से उनकी बेरोजगारी कम दिखती है, लेकिन वास्तविक भागीदारी घटी हुई है।हालिया रुझान (2025 तक)2025 में LFPR 55% तक पहुंची, ग्रामीण-शहरी दोनों में वृद्धि के साथ। रोजगार 64.33 करोड़ हो गयालेकिन स्टार्टअप्स (1.9 लाख) से नई नौकरियां आईं।चुनौतियां: महिला भागीदारी कम (37%), युवा बेरोजगारी (15-29 आयु में 10%+), और जलवायु परिवर्तन से कृषि प्रभावित।नीतिगत निहितार्थसरकार की योजनाएं जैसे MNREGA, PMEGP, और स्किल इंडिया LFPR बढ़ाने पर केंद्रित हैं।मध्यम अवधि में श्रम सुधार (नए श्रम संहिताएं) और औपचारिकीकरण आवश्यक।तेज आर्थिक विकास (7-8%) ही बेरोजगारी हल कर सकता है।13. भारत में बेरोजगारी दर की गणना करने की विधि को निम्नलिखित में से कौन-सा सही ढंग से परिभाषित करता है? [Phase-XI 28 जून, 2023 (II-पाली)](a) जनसंख्या में नियोजित व्यक्तियों का प्रतिशत(b) श्रम बल में व्यक्तियों के बीच बेरोजगार व्यक्तियों का प्रतिशत(c) कुल जनसंख्या में बेरोजगार व्यक्तियों का प्रतिशत(d) श्रम बल में व्यक्तियों का प्रतिशतCorrect Answer: (b) श्रम बल में व्यक्तियों के बीच बेरोजगार व्यक्तियों का प्रतिशतSolution:श्रम बल में व्यक्तियों के बीच बेरोजगार व्यक्तियों का प्रतिशत भारत में बेरोजगारी दर की गणना करने की विधि को सही ढंग से परिभाषित करता है।इसकी गणना बेरोजगार व्यक्तियों की संख्या कुल श्रम बल 100 के रूप में की जाती है।बेरोजगार की परिभाषाबेरोजगार वे व्यक्ति हैं जो बिना काम के हैं, नौकरी की सक्रिय तलाश कर रहे हैं, और तुरंत काम पर उपलब्ध हैं।इसमें वे लोग शामिल नहीं होते जो काम की तलाश छोड़ चुके हैं (डिस्करेज्ड वर्कर्स) या गृहिणी/सेवानिवृत्त हैं।गणना के प्रमुख दृष्टिकोणभारत में बेरोजगारी को मापने के तीन मुख्य दृष्टिकोण अपनाए जाते हैं:सामान्य स्थिति दृष्टिकोण (Usual Status): पिछले एक वर्ष में अधिकांश समय बेरोजगार रहे लोगों को गिना जाता है। यह सबसे कम अनुमान देता है।वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (Current Weekly Status): पिछले सप्ताह में एक भी दिन काम न करने वाले को बेरोजगार माना जाता है।वर्तमान दैनिक स्थिति (Current Daily Status): पिछले सप्ताह में एक या अधिक दिनों तक बेरोजगार रहने वाले को शामिल किया जाता है। यह सबसे व्यापक माप है।PLFS सर्वेक्षण की भूमिकाPLFS 2017 से शुरू हुआ है और MoSPI (मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन) द्वारा चलाया जाता है।यह वार्षिक, त्रैमासिक और अब मासिक डेटा प्रदान करता है। उदाहरणस्वरूप, 2023-24 में शहरी बेरोजगारी दर 6.6% थी।सूत्र का उदाहरणमान लीजिए श्रम बल 100 मिलियन है, जिसमें 5 मिलियन बेरोजगार हैं।तब बेरोजगारी दर = (5 / 100) × 100 = 5%। यह प्रतिशत अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का संकेतक है।14. निम्नलिखित में से कौन-सी भारत के ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक वाटरशेड विकास योजना है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)](a) डिग्गिंग हैंड-पंप वेल्स(b) खुशहाली(c) डैम कंस्ट्रक्शन(d) हरियालीCorrect Answer: (d) हरियालीSolution:'हरियाली' भारत के ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक वाटरशेड विकास योजना है।इसका उद्देश्य, ग्रामीण आबादी को पीने, सिंचाई, मत्स्य पालन और वनीकरण के लिए जल के संरक्षण में सक्षम बनाना है।योजना का इतिहासयह योजना 2009-10 से भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources, DoLR) द्वारा लागू की जा रही है।2015-16 में इसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के वाटरशेड विकास घटक के रूप में एकीकृत किया गया।2021 में इसे WDC-PMKSY 2.0 के रूप में नया रूप दिया गया, जो 2021-2026 तक 49.50 लाख हेक्टेयर बंजर भूमि को कवर करने का लक्ष्य रखती है।केंद्रीय बजट आवंटन लगभग 8,134 करोड़ रुपये है, और परियोजना अवधि को 4-7 वर्ष से घटाकर 3-5 वर्ष कर दिया गया।मुख्य उद्देश्ययोजना का फोकस वर्षा आधारित और निम्न उत्पादकता वाली भूमि की क्षमता बढ़ाना है।जल और मिट्टी संरक्षण के माध्यम से आजीविका सुधारना।समुदाय-आधारित संस्थाओं को मजबूत करना और क्रॉस-लर्निंग से परियोजनाओं की दक्षता बढ़ाना।स्प्रिंगशेड के कायाकल्प को नई गतिविधि के रूप में जोड़ा गया है।क्रियान्वयन संरचनाएंचेक डैम, बोरी बंधान, मेढ़ बंधान, खेत तालाब जैसी संरचनाएं बनाई जाती हैं।ये पानी बचाती हैं, मिट्टी क्षरण रोकती हैं, भूजल स्तर बढ़ाती हैं।मैदानी क्षेत्रों में इकाई लागत 22,000 रुपये/हेक्टेयर और दुर्गम क्षेत्रों में 28,000 रुपये/हेक्टेयर है।हालिया अपडेट्सफरवरी 2025 में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने "जल लाए धन-धान्य" थीम पर वाटरशेड यात्रा शुरू कीजो 26 राज्यों के 13,587 गांवों तक पहुंचेगी।जनवरी 2025 में 56 नई परियोजनाओं को मंजूरी मिली। वर्तमान में सभी राज्यों को भौतिक लक्ष्य आवंटित हो चुके हैं।अन्य विकल्पों से अंतरप्रश्न अक्सर बहुविकल्पीय होता है (जैसे पानी संसद, हरियाली, जल क्रांति, नीरू-मीरू)। इनमें "हरियाली" एक राज्य-स्तरीय योजना (हरियाणा में) हैलेकिन केंद्र प्रायोजित WDC-PMKSY ही ग्रामीण विकास मंत्रालय की मुख्य योजना है। अरवारी पानी संसद या नीरू-मीरू स्थानीय पहल हैं।प्रभाव और उपलब्धियांयह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा वाटरशेड कार्यक्रम हैचीन के बाद)। यह ग्रामीण रोजगार, जल संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देता है।15. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है? [CHSL (T-I) 11 मार्च, 2023 (I-पाली)](a) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज(b) नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज(c) बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज(d) मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंजCorrect Answer: (c) बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंजSolution:बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारत का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है।बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना 1875 ई. में 'दु नेटिव शेयर एवं स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन' के रूप में की गई थी।बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 के तहत स्थायी मान्यता प्राप्त करने वाला भारत का पहला स्टॉक एक्सचेंज है।BSE की स्थापना और शुरुआती इतिहासBSE की शुरुआत असल में 1850 के दशक में मुंबई के चर्चगेट इलाके में एक बरगद के पेड़ के नीचे कॉटन ट्रेडर्स के अनौपचारिक व्यापार से हुई थी।समय के साथ ट्रेडर्स की संख्या बढ़ी और 1875 में प्रसिद्ध व्यवसायी प्रेमचंद रॉयचंद (बॉम्बे के 'कॉटन किंग') के नेतृत्व में नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन कीऔपचारिक स्थापना हुई, जो बाद में BSE बना।शुरुआत में इसके 318 सदस्य थे और प्रवेश शुल्क मात्र 1 रुपया थायह जापान के टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज से भी 3 साल पहले स्थापित हुआ।BSE बनाम अन्य प्रमुख एक्सचेंजभारत के अन्य स्टॉक एक्सचेंज जैसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE, स्थापना 1992) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX, 2003) BSE से बहुत बाद में आए।BSE को 1957 के सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट के तहत पहली आधिकारिक मान्यता मिली।BSE का विकास और वर्तमान स्थिति1930 में फोर्ट क्षेत्र, दलाल स्ट्रीट पर BSE की भव्य इमारत बनी, जिसकी भूमि 1928 में खरीदी गई।आज BSE दुनिया की छठी सबसे बड़ी एक्सचेंज हैजो इक्विटी, डेरिवेटिव्स और ETFs में ट्रेडिंग सुविधा देती है; 2025 में इसने 150 वर्ष पूरे किए।यह भारतीय पूंजी बाजार का आधार बना, जहां सेंसेक्स सूचकांक ट्रेडर्स की दिशा बताता है।16. वैश्वीकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा से कथन सही है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]I. यह विश्व अर्थव्यवस्थाओं के साथ एकीकरण के बारे में हैII. यह उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता हैIII. घरेलू मुद्रा की मूल्यवृद्धि से निर्यात में सुधार होता है(a) केवल II और III(b) केवल I और III(c) केवल I(d) केवल I और IICorrect Answer: (d) केवल I और IISolution:वैश्वीकरण एक प्रक्रिया है। यह विश्व अर्थव्यवस्थाओं के साथ एकीकरण के बारे में है। यह उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता हैइसमें दुनिया भर में विभिन्न देशों और संस्थाओं के बीच, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और तकनीकी संबंधों में समन्वय बढ़ाने का प्रयास किए जाते हैं।घरेलू मुद्रा के मूल्य में वृद्धि से निर्यात में सुधार नहीं बल्कि कमी होती है।वैश्वीकरण की परिभाषायह वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, ज्ञान और लोगों के सीमाओं के पार मुक्त प्रवाह को बढ़ावा देता है।उदाहरणस्वरूप, बहुराष्ट्रीय कंपनियां जैसे ऐप्पल या अमेज़न वैश्विक उत्पादन नेटवर्क का उपयोग करके विश्व भर में उत्पाद बेचती हैं।प्रमुख विशेषताएंवैश्वीकरण की चार मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि, जहां देश बाधाओं को हटाकर वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं।सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का तेज विकास, जैसे इंटरनेट जो विश्व को एक गांव जैसा बनाता है।पूंजी और निवेश का मुक्त प्रवाह, जिसमें विकासशील देशों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ता है।सांस्कृतिक आदान-प्रदान, जैसे हॉलीवुड फिल्में या मैकडॉनल्ड्स का वैश्विक प्रसार।ये विशेषताएं वैश्वीकरण को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि बहुआयामी बनाती हैं।प्रकारवैश्वीकरण मुख्यतः पांच प्रकार का होता है:आर्थिक: व्यापार और निवेश पर केंद्रित।सामाजिक: लोगों और विचारों का आदान-प्रदान।राजनीतिक: संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों के माध्यम से सहयोग।सांस्कृतिक: परंपराओं का मिश्रण।पर्यावरणीय: जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर सामूहिक प्रयास।कारणइसके प्रमुख कारणों में तकनीकी प्रगति (जैसे इंटरनेट और कंटेनर शिपिंग), आर्थिक उदारीकरण (1991 में भारत का LPG सुधार), बहुराष्ट्रीय कंपनियों का उदय और WTO जैसे वैश्विक व्यापार समझौते शामिल हैं।ये कारक ने दुनिया को 'ग्लोबल विलेज' में बदल दिया।लाभआर्थिक विकास: व्यापार से GDP बढ़ता है और रोजगार सृजन होता है।तकनीकी हस्तांतरण: विकासशील देश उन्नत तकनीक प्राप्त करते हैं।उपभोक्ता विकल्प: सस्ते और विविध उत्पाद उपलब्ध होते हैं।भारत में 1991 के बाद वैश्वीकरण से IT सेक्टर का उछाल आया।नुकसानअसमानता: अमीर-गरीब की खाई बढ़ती है।सांस्कृतिक क्षरण: स्थानीय परंपराएं पश्चिमी प्रभाव से कमजोर होती हैं।पर्यावरण हानि: अधिक उत्पादन से प्रदूषण बढ़ता है।कई बार स्थानीय उद्योग बहुराष्ट्रीयों से प्रतिस्पर्धा में हार जाते हैं।भारत पर प्रभावभारत में वैश्वीकरण ने 1991 के उदारीकरण से अर्थव्यवस्था को गति दी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में असमानता बढ़ी।वर्तमान में (2026 तक), डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी योजनाएं इसे संतुलित करने का प्रयास हैं। यह अवसर और चुनौतियां दोनों प्रदान करता है।17. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वापस लौटे प्रवासियों और ग्रामीण आबादी को तत्काल रोजगार और आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए 2020 में 'गरीब कल्याण रोजगार अभियान' शुरू किया था। योजना किस राज्य से शुरू की गई थी? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) गुजरात(b) बिहार(c) राजस्थान(d) उत्तर प्रदेशCorrect Answer: (b) बिहारSolution:ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वापस लौटे प्रवासियों और ग्रामीण आबादी को तत्काल रोजगार और आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए वर्ष 2020 में 'गरीब कल्याण रोजगार अभियान' शुरू किया। इस योजना की शुरुआत बिहार राज्य से की गई थी।अभियान का उद्देश्यकोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण बड़े पैमाने पर प्रवासी श्रमिक अपने मूल गांवों में लौट आए थे।ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस अभियान को शुरू किया ताकि वापस लौटे प्रवासियों और ग्रामीण आबादी को तत्काल रोजगार व आजीविका के अवसर मिल सकें।यह 125 दिनों का मिशन मोड अभियान था, जिसमें ग्रामीण बुनियादी ढांचे के 25 प्रकार के कार्य शामिल थेजैसे सड़क निर्माण, जल संरक्षण, कृषि कार्य और स्वच्छता परियोजनाएं।कवरेज वाले राज्य और जिलेअभियान छह राज्यों—बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा—के 116 जिलों में चला।इन जिलों का चयन ऐसे क्षेत्रों के आधार पर किया गया जहां 25,000 से अधिक प्रवासी श्रमिक लौटे थे।बिहार में सबसे अधिक 32 जिले शामिल थेउसके बाद उत्तर प्रदेश (31), मध्य प्रदेश (24), राजस्थान (22), झारखंड (3) और ओडिशा (4)। कुल लागत 50,000 करोड़ रुपये थी।प्रमुख विशेषताएंकार्य प्रकार: मनरेगा, ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), जल जीवन मिशन, किसान समृद्धि केंद्र आदि 12 मंत्रालयों की 25 योजनाओं का एकीकरण।लाभ: लाखों श्रमिकों को गांवों में ही रोजगार मिला, जिससे स्थानीय विकास को गति मिली और पलायन कम हुआ।निगरानी: केंद्र और राज्य स्तर पर डैशबोर्ड से ट्रैकिंग, जिसमें एसएमएस अलर्ट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शामिल।प्रभाव और उपलब्धियांअभियान ने प्रवासी श्रमिकों को सशक्त बनाया, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।उदाहरणस्वरूप, बिहार के तेलिहार गांव से शुरू होने के बाद पूरे 116 जिलों में कार्य तेजी से चले।यह योजना ग्रामीण भारत के लिए दीर्घकालिक आजीविका मॉडल साबित हुई।18. निम्नलिखित में से वह स्थिति कौन-सी है, जिसमें वास्तव में आवश्यकता से अधिक लोग कार्य में लगे हुए होते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) प्रच्छन्न बेरोजगारी(b) संघर्षात्मक बेरोजगारी(c) प्रकट बेरोजगारी(d) मौसमी बेरोजगारीCorrect Answer: (a) प्रच्छन्न बेरोजगारीSolution:'प्रच्छन्न बेरोजगारी' तब होती है, जब कार्य करने वाले लोगों की संख्या इस विशेष कार्य को करने के लिए आवश्यक लोगों की संख्या से अधिक होती है।ऐसी बेरोजगारी विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में देखने को मिलती है।परिभाषा और विशेषताएँयदि अतिरिक्त श्रमिकों को हटा भी दिया जाए, तो कुल उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि उनका सीमांत उत्पादन (marginal product) शून्य होता है।यह मुख्य रूप से कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्थाओं जैसे भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाती हैजहाँ परिवार के सभी सदस्य खेतों में काम करते हैं लेकिन वास्तविक आवश्यकता 5 लोगों की होती है जबकि 8 लोग लगे रहते हैं।उदाहरणमान लीजिए एक खेत में गेहूँ की फसल काटने के लिए 5 श्रमिक पर्याप्त हैंलेकिन 8 लोग काम कर रहे हैं। इन 3 अतिरिक्त लोगों का योगदान उत्पादकता में जुड़ता ही नहीं है।इन्हें निकालने पर भी फसल का उत्पादन वही रहेगा। यह स्थिति असंगठित क्षेत्रों, छोटे उद्योगों या पारिवारिक व्यवसायों में आम है।कारणअधिशेष श्रम आपूर्ति: ग्रामीण भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि भूमि पर दबाव बढ़ता है, जिससे अधिक लोग एक ही काम में लग जाते हैं।मौसमी प्रकृति: कृषि में काम मौसमी होता है, ऑफ-सीजन में भी लोग बेकार न बैठें इसलिए लगे रहते हैं।कम उत्पादकता: प्राचीन तकनीकें और छोटी जोतें श्रम की अक्षमता पैदा करती हैं।भारत में स्थितिभारत जैसे विकासशील देशों में प्रच्छन्न बेरोजगारी कृषि क्षेत्र (लगभग 45% कार्यबल) और असंगठित क्षेत्रों में व्यापक है।ग्रामीण क्षेत्रों में यह मौसमी बेरोजगारी से जुड़ी होती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगारी प्रमुख है।यह अर्थव्यवस्था की वास्तविक क्षमता को छिपा देती है और विकास में बाधा बनती है।प्रभाव और समाधानयह गरीबी, कम आय और संसाधनों की बर्बादी को बढ़ावा देती है।समाधान में कृषि उत्पादकता बढ़ाना, वैकल्पिक रोजगार (जैसे उद्योग, सेवा क्षेत्र), कौशल प्रशिक्षण और शहरीकरण शामिल हैं।भारत सरकार की योजनाएँ जैसे MNREGA इससे निपटने का प्रयास करती हैं।19. उदारीकरण उपाय के तहत, एकाधिकार और अवरोधक व्यापार व्यवहार (MRTP) अधिनियम, 1969 को निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा निरस्त किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951(b) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973(c) विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999(d) प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002Correct Answer: (d) प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002Solution:उदारीकरण उपाय के तहत, एकाधिकार और अवरोधक व्यापार व्यवहार (MRTP) अधिनियम, 1969 को निरस्त कर इसके स्थान पर 'प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002' को लाया गया।इसके अंतर्गत भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की स्थापना हुई।MRTP अधिनियम, 1969 का परिचययह 27 दिसंबर 1969 को पारित हुआमुख्य रूप से बड़ी कंपनियों की आर्थिक शक्ति के एकाधिकरण को नियंत्रित करनेप्रतिबंधात्मक प्रथाओं (जैसे अनुचित व्यापार समझौते) पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखता था।MRTP आयोग इसकी निगरानी करता था, लेकिन उदारीकरण नीतियों के दौर में यह अप्रभावी साबित हुआक्योंकि यह विकास के बजाय केवल आकार पर जोर देता था।उदारीकरण और निरस्तीकरण का संदर्भ1991 के आर्थिक उदारीकरण उपायों के तहत भारत ने नियंत्रण-आधारित अर्थव्यवस्था से बाजार-उन्मुख प्रणाली की ओर रुख किया।MRTP अधिनियम इस बदलाव के अनुरूप नहीं थाइसलिए इसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।यह निरस्तीकरण 1 सितंबर 2009 से प्रभावी हुआजब प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने MRTP आयोग की जगह ले ली।प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की मुख्य विशेषताएंप्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 आधुनिक प्रतिस्पर्धा कानून हैजो बाजार में निष्पक्षता सुनिश्चित करता है। इसके प्रमुख प्रावधान हैं:प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों (जैसे कार्टेल) पर रोक।प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग को प्रतिबंधित करना।विलय-अधिग्रहण (कॉम्बिनेशन) की जांच।CCI इसकी कार्यान्वयन इकाई हैजो उपभोक्ता हितों की रक्षा करती है। अधिसूचना 28 अगस्त 2009 को जारी हुई।प्रभाव और महत्वउदारीकरण के बाद MRTP की जगह प्रतिस्पर्धा अधिनियम ने FDI, विलय और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा दिया।यह भारत को वैश्विक व्यापार के लिए तैयार करता है।20. ....... किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए परिसंपत्तियों की बिक्री से संबंधित उपाय को संदर्भित करता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (I-पाली)](a) प्रबंधन खरीद(b) सम्पूर्ण विराष्ट्रीयकरण(c) परिसमापन(d) संयुक्त उद्यमCorrect Answer: (c) परिसमापनSolution:परिसमापन की प्रक्रिया में किसी भी बकाया दायित्वों का भुगतान करने के लिए कंपनी की संपत्ति को इकट्ठा करना और बेचना शामिल हैं।परिसमापन किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए परिसंपत्तियों की बिक्री से संबंधित उपाय को संदर्भित करता है।परिसमापन की परिभाषा फिर शेष राशि शेयरधारकों को दी जाती है। यह तब अपनाया जाता है जब कंपनी दिवालिया हो जाती हैअपना उद्देश्य पूरा कर लेती है। स्वैच्छिक परिसमापन शेयरधारकों का निर्णय होता हैजबकि अनैच्छिक अदालत के माध्यम से लेनदारों द्वारा थोपा जाता है।परिसमापन के प्रकारस्वैच्छिक परिसमापन: कंपनी के सदस्य या लेनदार स्वयं निर्णय लेते हैं।उदाहरणस्वरूप, यदि कंपनी ने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया हो या घाटा होने पर बंद करना फायदेमंद हो।इसमें परिसंपत्तियां बेची जाती हैं, ऋण चुकाए जाते हैं और बचा धन शेयरधारकों में बांटा जाता है।अनैच्छिक परिसमापन: लेनदार अदालत में याचिका दायर कर कंपनी को जबरन बंद करवाते हैंजब वे भुगतान की उम्मीद खो देते हैं। अदालत परिसमापक नियुक्त करती हैजो परिसंपत्तियां बेचकर लेनदारों को प्राथमिकता से भुगतान करता है।प्रक्रिया का विस्तृत विवरणपरिसमापन की प्रक्रिया निम्न चरणों में होती है:मूल्यांकन: स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता द्वारा परिसंपत्तियों का आकलन, जिसमें स्थान, स्थिति और बाजार मूल्य शामिल होता है।परिसमापक की नियुक्ति: अदालत या सदस्यों द्वारा एक विशेषज्ञ नियुक्त किया जाता है जो प्रक्रिया संभालता है।परिसंपत्तियों की बिक्री: नीलामी, सीधी बिक्री या ई-नीलामी के माध्यम से बेची जाती हैं। बयाना राशि (Earnest Money) जमा अनिवार्य होती है।भुगतान वितरण: प्राथमिक लेनदार (सुरक्षित), असुरक्षित लेनदार, फिर शेयरधारक। चालू परिसंपत्तियां (स्टॉक) अक्सर बैंकों के प्रभार में होती हैं।कंपनी का विघटन: सभी कार्य पूर्ण होने पर कंपनी को कानूनी रूप से समाप्त घोषित किया जाता है।उद्देश्य और लाभयह उपाय मुख्य रूप से वित्तीय संकट से निपटने, ऋण वसूली या व्यवसाय बंद करने के उद्देश्य से अपनाया जाता है।लाभ में पारदर्शिता, नकदी प्रवाह सुधार और लेनदारों की सुरक्षा शामिल है।हालांकि, यह कंपनी के संचालन को स्थायी रूप से समाप्त कर देता है।कानूनी और कर निहितार्थ (भारत संदर्भ)भारत में इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) 2016 के तहत परिसमापन NCLT द्वारा नियंत्रित होता है।बिक्री से पूंजीगत लाभ पर कर लागू होता है। परिसंपत्ति बिक्री में विक्रेता देनदारियां नहीं हस्तांतरित करता।व्यावहारिक उदाहरणयदि कोई कंपनी कर्ज में डूबी हो, तो लेनदार अदालत जाते हैं। परिसमापक फैक्टरी, स्टॉक बेचता हैऋण चुकाने के बाद शेयरधारकों को शेष मिलता है।PICUP जैसी संस्थाएं मूल्यांकन और नीलामी दिशानिर्देश जारी करती हैं।Submit Quiz« Previous123456Next »