विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-IV

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21. निम्नलिखित में से किस निकाय ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
Solution:
  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय है, जो प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 के प्रवर्तन के लिए उत्तरदायी है।
  • मार्च, 2009 में इसे विधिवत रूप से गठित किया गया था।
  • राघवन समिति की अनुशंसा पर एकाधिकार और अवरोधक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 को निरस्त कर इसके स्थान पर प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 लाया गया।
  • CCI की स्थापना और उद्देश्य
    • यह सांविधिक निकाय प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (2007 में संशोधित) के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करता है।
    • मुख्य उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना, संसाधनों का कुशल उपयोग बढ़ावा देना और उपभोक्ता हितों की रक्षा करना है।
  • अधिनियम के प्रमुख पहलू जिन पर CCI ध्यान देता है
    • प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते: कार्टेल, बोली दमन या मूल्य निर्धारण जैसे समझौतों पर रोक लगाता है, जो बाजार प्रतिस्पर्धा को कमजोर करते हैं।
    • प्रभुत्व के दुरुपयोग पर नियंत्रण: प्रमुख उद्यमों द्वारा बाजार हेरफेर, जैसे आपूर्ति नियंत्रण या मूल्य बढ़ाना, रोकता है।
    • संयोजन विनियमन: विलय, अधिग्रहण या समामेलन (M&A) की जांच करता है
    • यदि वे भारत में प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। CCI को नोटिस जारी करने का अधिकार है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • यह अधिनियम MRTP अधिनियम, 1969 को प्रतिस्थापित करता है, जो एकाधिकार रोकने पर केंद्रित था
    • लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ावा नहीं देता था। 2002 अधिनियम आधुनिक वैश्विक मानकों के अनुरूप है और CCI के माध्यम से दंडात्मक कार्रवाई करता है।
  • CCI की भूमिका और शक्तियां
    • CCI जांच शुरू कर सकता है, जुर्माना लगा सकता है (उदाहरण: Google पर हालिया मामले) और क्षेत्रीय नियामकों से समन्वय करता है।
    • यह बाजार में स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है और प्रतिस्पर्धा नीतियों को लागू करता है।​​

22. निजीकरण के अर्थ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

(i) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के स्वामित्व का हस्तांतरण निजी क्षेत्र के उद्यमियों को न करना।

(ii) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के प्रबंधन का हस्तांतरण निजी क्षेत्र के उद्यमियों को करना।

सही उत्तर का चयन करें।

Correct Answer: (b) केवल (ii) सत्य है
Solution:
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के प्रबंधन का हस्तांतरण निजी क्षेत्र के उद्यमियों को करना निजीकरण कहलाता है।
  • निजीकरण के तहत सरकार इकाई या व्यवसाय की स्वामी नहीं रह जाती है। अतः विकल्प (b) सही उत्तर है।
  • निजीकरण का अर्थ
    • निजीकरण का अर्थ है सरकार के स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण वाली किसी संस्था
    • उद्योग या सेवा को निजी व्यक्तियों, कंपनियों या गैर-सरकारी इकाइयों को हस्तांतरित करना।
    • सरल शब्दों में, यह सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र में स्वामित्व या संचालन का स्थानांतरण है
    • जैसे सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू) के शेयर बेचना या आउटसोर्सिंग।
    • उदाहरणस्वरूप, पहले सरकारी एकाधिकार वाले क्षेत्र जैसे दूरसंचार या ऊर्जा में निजी कंपनियों को प्रवेश की अनुमति देना निजीकरण का हिस्सा है।
    • यह प्रक्रिया लाभ कमाने वाली निजी कंपनियों को सौंपकर दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित होती है।
  • निजीकरण के प्रकार
  • निजीकरण विभिन्न रूपों में होता है।
    • पूर्ण निजीकरण: सरकारी उद्यम का पूरा स्वामित्व निजी हाथों में बेच दिया जाता है, जैसे शेयर बाजार के माध्यम से।
    • आंशिक निजीकरण: सरकार कुछ शेयर बेचती है लेकिन नियंत्रण बनाए रखती है, जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में।
    • फ्रैंचाइजिंग या आउटसोर्सिंग: निजी कंपनियों को संचालन का अधिकार दिया जाता है, लेकिन स्वामित्व सरकारी रहता है।
    • विनियमन ढील: सरकारी नियंत्रण कम करके निजी क्षेत्र को प्रतिस्पर्धा की स्वतंत्रता दी जाती है।
  • निजीकरण के उद्देश्य
  • निजीकरण के प्रमुख उद्देश्य आर्थिक सुधार से जुड़े हैं।
    • सरकारी वित्तीय बोझ कम करना, क्योंकि पीएसयू अक्सर घाटे में चलते हैं और करदाताओं का पैसा खपत करते हैं।
    • दक्षता, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, क्योंकि निजी क्षेत्र लाभ के लिए नवाचार करता है।
    • राजकोषीय घाटा घटाना और विनिवेश से धन जुटाना।
    • बाजार में प्रतिस्पर्धा लाकर उपभोक्ताओं को सस्ते और बेहतर उत्पाद उपलब्ध कराना।
  • निजीकरण के लाभ
  • निजीकरण से कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
    • संसाधनों का कुशल उपयोग होता है, क्योंकि निजी मालिक लाभ पर फोकस करते हैं।
    • प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतें कम होती हैं और सेवा गुणवत्ता सुधरती है।
    • विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित होता है, जो तकनीकी प्रगति लाता है।
    • सरकारी संसाधन अन्य विकास कार्यों जैसे शिक्षा या स्वास्थ्य पर केंद्रित हो जाते हैं।
  • निजीकरण की हानियां
  • हालांकि लाभकारी, निजीकरण की कुछ कमियां भी हैं।
    • निजी कंपनियां लाभ के लिए ग्रामीण या गरीब क्षेत्रों की उपेक्षा कर सकती हैं।
    • रोजगार में कमी आ सकती है, क्योंकि निजी क्षेत्र लागत बचाने के लिए कर्मचारियों को कम करता है।
    • रणनीतिक क्षेत्रों (जैसे रक्षा) में विदेशी नियंत्रण का खतरा।
    • असमानता बढ़ सकती है, क्योंकि सेवाएं केवल लाभदायक क्षेत्रों तक सीमित रह जाती हैं।​
  • भारत में निजीकरण का संदर्भ
    • भारत में 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद निजीकरण तेजी से बढ़ा।
    • मनमोहन सिंह सरकार के समय कई पीएसयू जैसे बाल्को, वीएसएनएल बेचे गए।
    • हाल के वर्षों में एयर इंडिया का टाटा को हस्तांतरण प्रमुख उदाहरण है।
    • सरकार ने रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य में निजीकरण को बढ़ावा दिया है।

23. निम्नलिखित में से कौन-सी नीति निजीकरण को बढ़ावा देती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

A. विनिवेश

B. आउटसोर्सिंग

C. शहरीकरण

Correct Answer: (a) केवल A और B
Solution:
  • निजीकरण से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है, जिसके द्वारा सरकार के स्वामित्व वाली किसी इकाई या कार्य को निजी क्षेत्र को हस्तांतरित या आउटसोर्स किया जाता है।
  • विनिवेश, विनियमन- विमुक्ति, आउटसोर्सिंग, प्रबंधन अनुबंध नीतियां आदि निजीकरण को बढ़ावा देते हैं।
  • विनिवेश (Disinvestment)
    • विनिवेश सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की नीति है, जो सीधे निजीकरण को प्रोत्साहित करती है।
    • सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSUs) में अपनी इक्विटी शेयर बेचकर निजी निवेशकों को हिस्सेदारी देती है।
    • उदाहरण: एयर इंडिया का निजीकरण या बीपीसीएल में हिस्सेदारी बिक्री।
    • लाभ: राजस्व प्राप्ति, दक्षता सुधार और राजकोषीय घाटा कम होना।
  • आउटसोर्सिंग (Outsourcing)
    • आउटसोर्सिंग में सरकार गैर-मुख्य सेवाओं को निजी कंपनियों को अनुबंधित करती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से निजीकरण बढ़ावा देती है।
    • यह सरकारी कार्यों जैसे आईटी, सफाई, सुरक्षा या टिकटिंग को निजी फर्मों को सौंपना है।
    • उदाहरण: भारतीय रेलवे द्वारा टिकटिंग सेवाओं का निजीकरण।
    • लाभ: लागत बचत, बेहतर सेवा और निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का उपयोग।​
  • अन्य विकल्प क्यों नहीं?
    • शहरीकरण (Urbanization) एक जनसांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिसमें ग्रामीण से शहरी प्रवास होता है।
    • यह अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है लेकिन निजीकरण से सीधा संबंध नहीं रखता।​
  • भारत में निजीकरण को बढ़ावा देने वाली अन्य नीतियाँ
    • 1991 की औद्योगिक नीति: सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या 17 से घटाकर 8 फिर 3 कर दी गई, निजी क्षेत्र को खुला द्वार।​
    • नई जल नीति (2002): जल संसाधनों में निजी भागीदारी को प्रोत्साहन।​
    • उदारीकरण (Liberalisation): सरकारी नियंत्रण कम कर निजी निवेश को आमंत्रित करना, जो निजीकरण का पूरक है।​
  • निजीकरण के लाभ और चुनौतियाँ
  • लाभ:
    • दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि।
    • प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ता लाभ।
    • सरकारी व्यय में कमी।
  • चुनौतियाँ:
    • नौकरियों में कटौती का खतरा।
    • एकाधिकार का जोखिम।
    • आवश्यक सेवाओं (जैसे स्वास्थ्य) में मूल्य वृद्धि।

24. भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2013-14 के अनुसार, 2011-12 में भारत में कितने प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे थे? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 21.9%
Solution:
  • भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2013-14 के अनुसार, वर्ष 2011-12 के दौरान देश की 21.92 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे थी।
  • वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा 11.28 प्रतिशत दर्ज है, यानी 17.89 प्रतिशत अंकों की कमी।
  • पृष्ठभूमि
    • यह आंकड़ा तेंदुलकर समिति की पद्धति पर आधारित है, जो योजना आयोग द्वारा अपनाई गई थी।
    • सर्वेक्षण ने ग्रामीण (25.7%) और शहरी (13.7%) क्षेत्रों को मिलाकर राष्ट्रीय औसत 21.9% निकाला।
  • तेंदुलकर पद्धति
    • तेंदुलकर समिति ने 2009 में गरीबी रेखा को केवल भोजन पर आधारित न रखकर शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी जरूरतों को शामिल किया।
    • 2011-12 के लिए ग्रामीण क्षेत्र में मासिक प्रति व्यक्ति व्यय ₹816 और शहरी में ₹1,000 निर्धारित किया गया।
  • क्षेत्रीय विवरण
    • ग्रामीण क्षेत्र: 25.7% लोग गरीबी रेखा से नीचे।
    • शहरी क्षेत्र: 13.7% लोग गरीबी रेखा से नीचे।
    • यह पद्धति संयुक्त प्रति परिवार व्यय पर आधारित NSSO के 68वें दौर (2011-12) के आंकड़ों से ली गई।
  • तुलनात्मक संदर्भ
    • 2004-05 में यह अनुपात 37.2% था, जो 2011-12 तक घटकर 21.9% हो गया
    • जो आर्थिक विकास और सरकारी योजनाओं का परिणाम था।
    • रंगराजन समिति (2014) ने बाद में इसे 29.5% अनुमानित किया
    • लेकिन सरकार ने तेंदुलकर को ही आधिकारिक माना।
  • महत्व
    • यह आंकड़ा आर्थिक सर्वेक्षण 2013-14 (जुलाई 2013 में जारी) के अध्याय 7 में दर्ज है
    • जो नीति निर्माण के लिए आधार बना। बाद के वर्षों में गरीबी और घटी, जैसे 2022-23 में 4.7% तक।

25. व्यापार-बाधाओं का निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह को प्रतिबंधित करना
Solution:
  • व्यापार बाधाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हैं।
  • तुलनात्मक लाभ के सिद्धांत के अनुसार, व्यापार बाधाएं विश्व अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारिक हैं और समग्न आर्थिक दक्षता को कम करती है।
  • व्यापार बाधाओं की परिभाषा
    • घरेलू उद्योगों की रक्षा हो सके। ये बाधाएँ विदेशी उत्पादों को महंगा बनाती हैं
    • उनकी मात्रा सीमित करती हैं। मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: टैरिफ (शुल्क) और गैर-टैरिफ बाधाएँ।
  • प्रकार
    • टैरिफ बाधाएँ: आयातित वस्तुओं पर लगने वाले कर, जैसे सीमा शुल्क, जो विदेशी सामान को घरेलू उत्पादों से महंगा बनाते हैं।
    • कोटा: आयात की जाने वाली वस्तुओं की अधिकतम मात्रा पर सीमा। उदाहरण: यूरोपीय संघ के कृषि उत्पादों पर कोटा।
    • गैर-टैरिफ बाधाएँ: लाइसेंसिंग, उत्पाद मानक, सब्सिडी, स्वैच्छिक निर्यात प्रतिबंध (VER), नियामकीय आवश्यकताएँ और डंपिंग-विरोधी शुल्क।
    • अन्य: सब्सिडी (घरेलू फर्मों को सस्ता बनाना), तकनीकी मानक (जैसे भारत के खिलौना सुरक्षा नियम)।
  • कार्य और उद्देश्य
    • व्यापार बाधाओं का मूल कार्य अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह को प्रतिबंधित करना है
    • जैसा कि प्रश्न में संकेतित है। ये घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाती हैं
    • नौकरियाँ सुरक्षित रखती हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। साथ ही, राजस्व उत्पन्न करती हैं।​
  • प्रभाव
  • सकारात्मक प्रभाव:
    • स्थानीय उद्योगों और रोजगार की रक्षा।​
    • घरेलू उत्पादन को बढ़ावा।​
  • नकारात्मक प्रभाव:
    • उपभोक्ताओं के लिए ऊँची कीमतें और कम विकल्प।​
    • व्यापार युद्ध या प्रतिशोधी उपाय, जैसे 1930 का स्मूट-हॉली टैरिफ जो वैश्विक मंदी बढ़ा।

26. मान लीजिए कि किसी व्यक्ति के पास भारत में चार एकड़ जमीन है और उसे वास्तव में एक वर्ष में अपने खेत पर विभिन्न कार्यों को करने के लिए केवल दो श्रमिकों और स्वयं की आवश्यकता होती है, लेकिन यदि वह पांच श्रमिकों और अपने परिवार के सदस्यों जैसे कि अपनी पत्नी और बच्चों को नियुक्त करता है, तो ऐसी स्थिति को कहा जाता है- [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) प्रच्छन्न बेरोजगारी
Solution:
  • प्रच्छन्न बेरोजगारी तब होती है, जब कार्य करने वाले लोगों की संख्या उस कार्य के लिए आवश्यक लोगों से अधिक हो।
  • उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति के पास भारत में चार एकड़ जमीन है
  • उसे वास्तव में एक वर्ष में अपने खेत पर विभिन्न कार्यों को करने के लिए केवल दो श्रमिकों और स्वयं की आवश्यकता होती है।
  • लेकिन यदि वह पांच श्रमिकों अपने परिवार के सदस्यों जैसे कि अपनी पत्नी और बच्चों को नियुक्त करता है, तो ऐसी स्थिति में 'प्रच्छन्न बेरोजगारी' होती है।
  • कारण
    • गैर-कृषि रोजगार की कमी (जैसे उद्योग, सेवा क्षेत्र) मजबूर करती है।
    • सामाजिक दबाव: परिवार के सदस्यों को बेरोजगार न छोड़ने के लिए काम पर लगाया जाता है।
    • कृषि की मौसमी प्रकृति: वर्ष भर काम न मिलने पर सभी एक साथ लगे रहते हैं।
  • विशेषताएँ
    • कम उत्पादकता: प्रति श्रमिक उत्पादन न्यूनतम; भारत में कृषि क्षेत्र की उत्पादकता विनिर्माण से 3 गुना कम है।
    • ग्रामीण प्रभावित: 46.5% आबादी कृषि पर निर्भर, जिसमें 106.8 मिलियन कृषि मजदूर शामिल हैं।
    • परिवार आधारित: स्व-रोजगार परिवारों में पत्नी-बच्चे बिना वेतन के काम करते हैं।
  • आर्थिक प्रभाव
    • यह संसाधनों की अक्षमता को जन्म देती है, आय स्तर गिराती है
    • गरीबी चक्र बनाए रखती है। GDP वृद्धि के बावजूद कृषि रोजगार बढ़ना (2017-24 में 68 मिलियन श्रमिक) उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्रों में स्थानांतरण की कमी दर्शाता है।​
  • भारत में स्थिति
    • भारत में कृषि श्रमिक 230 मिलियन से अधिक; उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सर्वाधिक।
    • 2023-24 में कृषि रोजगार उलटाव (economic reversal) देखा गया
    • जहाँ औद्योगिक मंदी ने श्रमिकों को वापस धकेल दिया। PLFS सर्वे के अनुसार, यह अनौपचारिक रोजगार का प्रमुख रूप है।
  • अन्य बेरोजगारी से तुलना
    • गैर-कृषि रोजगार सृजन: MGNREGA जैसे कार्यक्रम 100 दिन गारंटी देते हैं।
    • कौशल विकास: STEM शिक्षा सुधार, 10 मिलियन वार्षिक रोजगार लक्ष्य।
    • भूमि सुधार: एकीकरण व तकनीक (यंत्रीकरण) से श्रम आवश्यकता घटाना।
    • न्यूनतम मजदूरी: राज्य सरकारें निर्धारित करती हैं, लेकिन कार्यान्वयन कमजोर।

27. निम्नलिखित में से कौन-से जुलाई, 1991 में शुरू किए गए व्यापक उदारीकरण सुधारों का हिस्सा नहीं थे? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) जनसांख्यिकीय सुधार
Solution:
  • जुलाई, 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने व्यापक सुधार की अपनी रूपरेखा के साथ बजट प्रस्तुत किया।
  • इसमें वित्तीय क्षेत्र में सुधार, व्यापार और पूंजी प्रवाह में सुधार, विनिवेश और सार्वजनिक उद्यम सुधारों आदि की रूपरेखा तैयार की गई
  • लेकिन जनसांख्यिकी सुधारों की बात नहीं की गई।
  • जनसांख्यिकीय सुधार (Demographic Reforms) इन सुधारों का हिस्सा नहीं थे।​
    •  ये सुधार वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा 24 जुलाई 1991 को पेश नई आर्थिक नीति (New Economic Policy) के रूप में घोषित किए गए।
  • सुधारों का पृष्ठभूमि
    • भारत 1990 के अंत तक गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया था, जहां विदेशी मुद्रा भंडार मात्र दो सप्ताह के आयात के लिए पर्याप्त रह गया था।
    • राजकोषीय घाटा, उच्च मुद्रास्फीति और घटते निर्यात ने IMF से सहायता लेने को मजबूर किया
    • जिसके बदले संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम (Structural Adjustment Programme) लागू हुआ।
    • 1 जुलाई 1991 को रुपये का 9% और तीन दिन बाद 11% अवमूल्यन इसका प्रारंभिक कदम था।
  • प्रमुख घटक
    • विनिवेश और सार्वजनिक क्षेत्र सुधार: सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSUs) में सरकारी हिस्सेदारी घटाई गई
    • दक्षता बढ़ाने और राजस्व जुटाने के लिए। सार्वजनिक एकाधिकार को राष्ट्रीय सुरक्षा वाले क्षेत्रों तक सीमित किया गया।
    • वित्तीय क्षेत्र सुधार: बैंकिंग आधुनिकीकरण, सरकारी हस्तक्षेप कम, प्रतिस्पर्धा बढ़ाना। 1992 में SEBI की स्थापना से पूंजी बाजार मजबूत हुए।​
    • व्यापार और पूंजी प्रवाह उदारीकरण: आयात लाइसेंसिंग समाप्त, शुल्क दरें घटीं, FDI के लिए 51% स्वचालित अनुमोदन, रुपये को चालू खाते में परिवर्तनीय बनाया।
    • एक्सिम स्क्रिप से निर्यात बढ़ावा।
    • औद्योगिक उदारीकरण: लाइसेंस राज समाप्त, नई औद्योगिक नीति से विलय-संघन आसान, MRTP अधिनियम में ढील।
  • क्या हिस्सा नहीं था?
    • जनसांख्यिकीय सुधार इनका हिस्सा नहीं थे। ये सुधार आर्थिक थे
    • जबकि जनसांख्यिकीय नीतियां जनसंख्या नियंत्रण, जन्म दर और आयु संरचना पर केंद्रित होती हैं
    • जो अलग संदर्भ (जैसे परिवार कल्याण कार्यक्रम) में आती हैं।
    • 1991 के सुधारों में कृषि, स्वास्थ्य या शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
  • दीर्घकालिक प्रभाव
    • इन सुधारों ने GDP वृद्धि को गति दी (1990s में 6% औसत), विदेशी निवेश आकर्षित किया
    • मध्यम वर्ग का उदय हुआ, लेकिन असमानता भी बढ़ी। आज भी LPG मॉडल भारत की अर्थनीति का आधार है।

28. वे वस्तुएं और सेवाएं, जो सरकार द्वारा सभी लोगों को प्रदान की जाती हैं और जिनके उपभोग की कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है, क्या कहलाती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) सार्वजनिक माल
Solution:
  • 'सार्वजनिक माल/वस्तुएं' अपने उपयोग उपलब्धता को दूसरों तक सीमित नहीं रखती हैं।
  • सार्वजनिक वस्तुएं केवल सरकार या निजी क्षेत्र तक ही सीमित नहीं हैं
  • ये वस्तुएं स्वाभाविक रूप से भी उपलब्ध हो सकती हैं। यह गैर-अनन्य और गैर-प्रतिद्वंद्वी होती हैं। जैसे-रक्षा, सड़क आदि
  • सार्वजनिक वस्तुओं की परिभाषा
    •  इन्हें दो मुख्य गुणों से पहचाना जाता है: गैर-प्रतिद्वंद्विता (non-rivalrous) और गैर-अपवर्जनीय (non-excludable)। गैर-प्रतिद्वंद्विता का मतलब है
    • एक व्यक्ति का इनका उपयोग दूसरे के उपयोग को प्रभावित नहीं करता, जैसे कि रात में सड़क का प्रकाश सभी को समान रूप से मिलता है।
    • गैर-अपवर्जनीय का अर्थ है कि किसी को भी इनसे वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही वे भुगतान न करें।
  • मुख्य विशेषताएं
    • गैर-प्रतिद्वंद्विता: इनका उपभोग प्रतिस्पर्धी नहीं होता, अर्थात एक व्यक्ति के उपयोग से कुल मात्रा कम नहीं होती।
    • उदाहरणस्वरूप, राष्ट्रीय रक्षा का लाभ सभी नागरिकों को मिलता है, चाहे वे कितने भी हों।​
    • गैर-अपवर्जनीय: इन सेवाओं से किसी को बाहर नहीं किया जा सकता। जैसे, सार्वजनिक पार्क या स्वच्छ हवा सभी के लिए खुली रहती है।​
    • सरकारी प्रावधान: ये निजी बाजार द्वारा प्रदान नहीं की जातीं क्योंकि मुक्त-सवारी समस्या (free-rider problem) होती है
    • जहां लोग भुगतान किए बिना लाभ ले लेते हैं। इसलिए सरकार करों से इन्हें वित्तपोषित करती है।
  • उदाहरण
  • सार्वजनिक वस्तुओं के प्रमुख उदाहरणों में शामिल हैं:
    • राष्ट्रीय रक्षा: पूरी आबादी की सुरक्षा, एक सैनिक की सेवा सभी को लाभ पहुंचाती है।
    • सड़क प्रकाश: रात में सभी राहगीरों को प्रकाश मिलता है, उपभोग प्रतिस्पर्धी नहीं।​
    • सार्वजनिक पार्क: सभी लोग इसका आनंद ले सकते हैं बिना किसी को बाहर किए।​
    • स्वच्छ हवा और आपातकालीन सेवाएं: जैसे पुलिस या अग्निशमन सेवाएं, जो समुदाय को मजबूत बनाती हैं।​
  • आर्थिक महत्व
    • सार्वजनिक वस्तुएं सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करती हैं और समानता को बढ़ावा देती हैं।
    • निजी क्षेत्र इन्हें लाभप्रदता के अभाव में नहीं प्रदान करता, इसलिए सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक है।
    • भारत जैसे देशों में ये स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन, बिजली और जल आपूर्ति के रूप में दिखाई देती हैं।
    • ये बाजार विफलताओं को सुधारती हैं और आर्थिक विकास में योगदान देती हैं।

29. प्रतिस्पर्धी परिसंपत्ति बाजार की स्थिति के तहत, बॉण्ड की कीमत हमेशा संतुलन में उसके वर्तमान मूल्य का/की/के ........ होनी चाहिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) बराबर
Solution:
  • प्रतिस्पर्धी परिसंपत्ति बाजार की स्थिति के तहत, बॉण्ड की कीमत हमेशा संतुलन में उसके वर्तमान मूल्य के 'बराबर' होनी चाहिए।
  • ऐसा इसलिए क्योंकि प्रतिस्पर्धी बाजार में खरीददारों और विक्रेताओं के पास समान जानकारी तक पहुंच होती है।
  • वे बाजार मूल्य पर लेनदेन करने में सक्षम होते हैं, जो बॉण्ड के वर्तमान मूल्य को दर्शाता है।
  • बॉन्ड मूल्यांकन का आधार
    • जैसे कूपन भुगतान और परिपक्वता पर मूलधन—को बाजार ब्याज दर (डिस्काउंट रेट) से छूटकर निकाला जाता है।
    • प्रतिस्पर्धी बाजार में, जहाँ无数 खरीदार-विक्रेता सूचना के साथ सक्रिय रहते है
    • कोई भी बॉन्ड कीमत उसके आंतरिक मूल्य से ऊपर या नीचे नहीं रह सकती
    • क्योंकि इससे arbitrage अवसर पैदा हो जाते।
    • बाजार बल तुरंत कीमत को समायोजित कर संतुलन बहाल कर देते हैं।​
  • संतुलन की स्थिति क्यों महत्वपूर्ण?
    • संतुलन में बॉन्ड की कीमत उसके मौजूदा मूल्य के बराबर होती है, जिससे विवादास्पद अवसर (arbitrage opportunities) समाप्त हो जाते हैं।
    • यदि कीमत मूल्य से अधिक हो, तो निवेशक बेचेंगे; यदि कम हो, तो खरीदेंगे—परिणामस्वरूप कीमत संतुलित हो जाती है।
    • यह कुशल बाजार की अवधारणा को मजबूत करता है, जहाँ सभी उपलब्ध सूचनाएँ कीमतों में तुरंत परिलक्षित होती हैं।
  • बॉन्ड मूल्यांकन सूत्र
    • बॉन्ड का मूल्य इस सूत्र से गणना होता है:
    • यहाँ  बॉन्ड कीमत,  कूपन,  मूलधन,  बाजार छूट दर, और  परिपक्वता वर्ष हैं।
    • बाजार दर  बढ़ने पर  घटती है (विपरीत संबंध), जो संतुलन को प्रभावित करता है।​
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • मान लीजिए एक बॉन्ड का परिपक्वता मूल्य ₹1000, वार्षिक कूपन 5% (₹50), और बाजार दर 5% है।
    • तब संतुलन कीमत ठीक ₹1000 होगी। यदि बाजार दर घटकर 4% हो जाए, तो मूल्य बढ़कर लगभग ₹1024 हो जाएगा
    • प्रतिस्पर्धी बाजार में कीमत तुरंत इससे बराबर हो जाएगी। यह दर्शाता है कि संतुलन हमेशा वर्तमान मूल्य के साथ संरेखित रहता है।​
  • बाजार विचलन के प्रभाव
    • यदि बॉन्ड overvalued हो (कीमत > मूल्य), तो विक्रेता बढ़ेंगे, कीमत गिरेगी।
    • Undervalued होने पर मांग बढ़ेगी, कीमत चढ़ेगी।
    • लंबी अवधि में, प्रतिस्पर्धा ऐसी किसी असंतुलन को असंभव बना देती है।
    • यह सिद्धांत स्टॉक, बॉन्ड सभी परिसंपत्तियों पर लागू होता है।

30. एमएनसी (MNC) निवेश के लिए सबसे आम मार्ग ....... खरीदना है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) स्थानीय कंपनियां
Solution:
  • दुनियाभर के देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निवेश का सबसे आम रास्ता मौजूदा 'स्थानीय कंपनियों को खरीदना' या उनमें हिस्सेदारी बनाए रखना होता है।
  • उत्पादन बढ़ाने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियां कुछ स्थानीय कंपनियों के साथ सहयोगात्मक रूप से भी जुड़ी होती हैं, ताकि उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
  • क्यों स्थानीय कंपनियों का अधिग्रहण?
    • स्थानीय कंपनियों को खरीदने से एमएनसी को मौजूदा बुनियादी ढांचा, वितरण नेटवर्क, ब्रांड पहचान और ग्राहक आधार मिल जाता है
    • जो नए बाजार में तुरंत सफलता सुनिश्चित करता है। इससे नियामक बाधाओं को आसानी से पार किया जा सकता है
    •  स्थानीय विशेषज्ञता प्राप्त होती है। उदाहरणस्वरूप, भारत में वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट को खरीदा, जबकि फेसबुक ने मीशो का अधिग्रहण किया।​
  • अधिग्रहण के प्रमुख लाभ
    • बाजार प्रवेश: स्थापित ग्राहक आधार और ब्रांड वफादारी से बिना शून्य से शुरू किए बाजार पर कब्जा।
    • लागत बचत: नए कारखाने या नेटवर्क बनाने की बजाय मौजूदा संसाधनों का उपयोग।​
    • स्थानीय अनुकूलन: स्थानीय संस्कृति, उपभोक्ता वरीयताओं और कुशल मानव संसाधनों तक पहुंच।​
  • चुनौतियां और जोखिम
    • नियामक मंजूरी प्राप्त करना कठिन हो सकता है
    • जैसे विदेशी स्वामित्व पर सरकारी प्रतिबंध।
    • कॉर्पोरेट संस्कृति का अंतर एकीकरण में बाधा डालता है। स्थानीय समुदायों से प्रतिक्रिया भी आ सकती है।​
  • एमएनसी निवेश का व्यापक संदर्भ
    • एमएनसी वे कंपनियां हैं जिनका मुख्यालय एक देश में होता है लेकिन कई देशों में संचालन होता है
    • जैसे ऐपल, अमेज़न, गूगल। उनका निवेश विदेशी निवेश कहलाता है, जो मेजबान देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
    • भारत जैसे उभरते बाजारों में अधिग्रहण सबसे लोकप्रिय है क्योंकि यह जोखिम कम करता है।
    • हालांकि, म्यूचुअल फंड के माध्यम से एमएनसी शेयरों में निवेश भी एक अप्रत्यक्ष तरीका है।
    • कुल मिलाकर, स्थानीय अधिग्रहण वैश्विक विस्तार की कुंजी बना हुआ है।