विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-IV

Total Questions: 58

31. निम्नलिखित में से कौन-सी योजना गैर-कृषि क्षेत्र में छोटे/सूक्ष्म व्यापार उद्यमों और व्यक्तियों को संपार्श्विक मुक्त ऋण देने के लिए है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) PMMY
Solution:
  • 'प्रधानमंत्री मुद्रा योजना' के तहत गैर-कृषि क्षेत्र में छोटे/सूक्ष्म व्यापार उद्यमों और व्यक्तियों को संपार्श्विक मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
  • यह सरकार द्वारा वर्ष 2015 में लांच किया गया था।
  • योजना का परिचय
    • यह योजना 8 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी।
    • इसका पूरा नाम Pradhan Mantri Mudra Yojana है
    • जो Micro Units Development and Refinance Agency (MUDRA) के माध्यम से संचालित होती है।
    • गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि छोटे/सूक्ष्म उद्यमों को 10 लाख रुपये तक का ऋण बिना किसी संपार्श्विक (कोलैटरल) के उपलब्ध कराया जाता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • संपार्श्विक मुक्त: कोई गारंटी या संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं
    • ऋण क्रेडिट स्कोर, व्यवसाय योजना और डिजिटल सत्यापन पर आधारित होता है।
  • ऋण श्रेणियाँ:
    • शिशु: 50,000 रुपये तक (स्टार्टअप के लिए)।
    • किशोर: 50,001 से 5 लाख रुपये तक (विकास चरण)।
    • तरुण: 5,00,001 से 10 लाख रुपये तक (स्थापित व्यवसाय)।​
    • उद्देश्य: खुदरा व्यापार, सेवा क्षेत्र, विनिर्माण (कृषि 제외), छोटे उद्यमियों को वित्तीय समावेशन प्रदान करना और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना।
  • पात्रता मानदंड
    • गैर-कृषि क्षेत्र के सूक्ष्म/छोटे उद्यम जैसे दुकानदार, ट्रांसपोर्टर, फूड प्रोसेसर, शिल्पकार आदि।
    • व्यक्तिगत उद्यमी, स्वरोजगार इकाइयाँ; स्टार्टअप और मौजूदा व्यवसाय दोनों योग्य।
    • न्यूनतम दस्तावेज: आधार, पैन, बैंक खाता, व्यवसाय प्रमाण (GST/लाइसेंस यदि लागू)।
    • महिला उद्यमियों को 3% रियायती ब्याज दर का लाभ।
  • ऋण राशि और शर्तें
    • अधिकतम सीमा: 10 लाख रुपये (टर्म लोन या वर्किंग कैपिटल)।
    • ब्याज दर: बैंक के अनुसार प्रतिस्पर्धात्मक (लगभग 7-12%), कोई प्रसंस्करण शुल्क नहीं।
    • चुकौती अवधि: 12 महीने से 5 वर्ष।
    • ऋणदाता: वाणिज्यिक बैंक, RRBs, छोटे वित्त बैंक, MFIs, NBFCs।
  • आवेदन प्रक्रिया
    • ऑनलाइन: mudra.org.in या Udyamimitra पोर्टल पर रजिस्टर करें।
    • बैंक शाखा में जमा करें; 59 मिनट ऋण योजना से तेज प्रोसेसिंग संभव।
    • दस्तावेज अपलोड: KYC, व्यवसाय योजना, आय प्रमाण।
    • स्वीकृति के बाद MUDRA कार्ड जारी, ATM/पॉइंट ऑफ सेल से निकासी।​
  • लाभ और प्रभाव
    • 2025-26 तक करोड़ों ऋण वितरित, विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक बनाने में सहायक।
    • MSME वृद्धि, रोजगार सृजन (बजट 2025-26 में विस्तार)।
    • हरियाणा जैसे राज्यों में स्थानीय व्यापारियों के लिए आसान पहुँच।

32. निम्नलिखित में से कौन-सा अवयव व्यापार एवं निवेश नीति सुधारों से संबंधित नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) निर्यात शुल्क में वृद्धि
Solution:
  • व्यापार एवं निवेश नीति सुधारों का उद्देश्य था-आयात एवं निर्यात पर मात्रात्मक प्रतिबंधों को खत्म करना
  • टैरिफ दरों में कमी, आयात के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को हटाना, जबकि निर्यात शुल्क में वृद्धि इससे संबंधित नहीं था।
  • उदारीकरण ने देश में निवेश के स्तर को बढ़ाकर आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया।
  • सुधारों के प्रमुख अवयव
    • आयात-निर्यात पर मात्रात्मक प्रतिबंधों (Quantitative Restrictions) का उन्मूलन, जो मुक्त व्यापार को बढ़ावा देता है।
    • शुल्क दरों (Tariff Rates) में कटौती, जिससे आयात सस्ता होता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
    • विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के लिए स्वचालित मार्गों का विस्तार और निवेशक-अनुकूल नीतियां, जैसे कर छूट और GAAR की समीक्षा।​
    • लाइसेंस राज का अंत और औद्योगिक क्षेत्रों का उदारीकरण, जो निजी क्षेत्र को अधिक स्वतंत्रता देता है।​
  • असंबंधित अवयव
  • निर्यात शुल्क (Export Duties) में वृद्धि इन सुधारों से संबंधित नहीं है।
    • व्यापार सुधारों का लक्ष्य बाधाओं को कम करना होता है, न कि निर्यात को महंगा बनाकर प्रतिबंध लगाना।​
    • निर्यात शुल्क बढ़ाना संरक्षणवाद को दर्शाता है, जो उदारीकरण के विपरीत है
    • इसके बजाय सुधार निर्यात प्रोत्साहन (जैसे सब्सिडी या ड्यूटी ड्रॉबैक) पर जोर देते हैं।​
    • हालिया बजट 2026 में भी टैरिफ अनुकूलन और आयात शुल्क कम करने पर फोकस है, न कि निर्यात शुल्क वृद्धि पर।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • समष्टिगत स्थिरीकरण (मुद्रास्फीति नियंत्रण, अवमूल्यन) और संरचनात्मक सुधार (व्यापार-निवेश उदारीकरण) दोनों शामिल थे।
    • 2026 तक ये जारी हैं, जैसे FTA समझौते (वियतनाम, CPTPP) और नियामकीय सरलता के साथ।​
  • प्रभाव और उदाहरण
    • निवेश में वृद्धि: जीडीपी का 30% GFCF पहुंचा।​
    • अपवाद: हानिकारक उद्योगों पर प्रतिबंध बने रहते हैं, लेकिन सामान्य व्यापार सुधार उदार हैं।​

33. निम्नलिखित में से कौन-सी नीति व्यापक रूप से भारत सरकार के वार्षिक वित्तीय विवरण द्वारा प्रकाशित की जाती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) राजकोषीय नीति
Solution:
  • 'राजकोषीय नीति' व्यापक रूप से भारत सरकार के वार्षिक वित्तीय विवरण द्वारा प्रकाशित की जाती है।
  • राजकोषीय नीति का तात्पर्य सार्वजनिक व्यय, कराधान एवं सार्वजनिक ऋण के संबंध में सरकारी नीति से है।
  • संवैधानिक आधार
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 स्पष्ट रूप से कहता है
    • राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के लिए भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करवाएंगे।
    • यह विवरण "वार्षिक वित्तीय विवरण" (Annual Financial Statement - AFS) के नाम से जाना जाता है
    • यह सरकार की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। इसमें भारत की समेकित निधि
    • आकस्मिक निधि और सार्वजनिक खाते पर होने वाले प्राप्ति एवं व्यय का विस्तृत ब्यौरा होता है।
  • सामग्री और संरचना
    • यह दस्तावेज तीन मुख्य भागों में विभाजित होता है:
    • समेकित निधि (Consolidated Fund): कर राजस्व, उधार आदि से प्राप्तियां और व्यय।
    • आकस्मिक निधि (Contingency Fund): आपातकालीन खर्च के लिए।
    • सार्वजनिक खाता (Public Account): भविष्य निधि, प्रोविडेंट फंड आदि।
    • राजस्व खाता (प्राप्तियां और व्यय) तथा पूंजी खाता (पूंजीगत निवेश, ऋण चुकता) अलग-अलग दिए जाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, 2021-22 बजट में पीडीएफ और एक्सेल फाइलें उपलब्ध थीं, जो विवरण-I (समेकित निधि) को कवर करती हैं।
  • प्रस्तुति प्रक्रिया
    • वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में वित्त विधेयक के साथ पेश किया जाता है। यह अनिवार्य है
    • संसदीय समीक्षा के अधीन होता है, जिसमें अनुदान मांगें (Demands for Grants) चर्चा होती हैं। रेलवे बजट पहले अलग था, लेकिन अब एकीकृत है।

34. निम्नलिखित में से किस प्रकार की बिक्री में पीएसई (PSE) की न्यूनतम 51% हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची जाती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अल्पांश
Solution:
  • 'अल्पांश' प्रकार की बिक्री में पीएसई (PSE) की न्यूनतम 51% हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची जाती है।
  • किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम की इक्विटी का एक हिस्सा जनता को बेचना विनिवेश कहलाता है।
  • रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment)
    • निम्नलिखित में से किस प्रकार की बिक्री में पीएसई (PSE) की न्यूनतम 51% हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची जाती है
    • इसका उत्तर रणनीतिक विनिवेश है। यह वह प्रक्रिया है
    • जिसमें भारत सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (PSE या CPSE) में अपनी न्यूनतम 51% इक्विटी हिस्सेदारी (या प्रबंधन नियंत्रण) निजी क्षेत्र की किसी इकाई को हस्तांतरित करती है
    • जिससे निजी खरीदार को कंपनी का पूर्ण नियंत्रण मिल जाता है।
  • विनिवेश के प्रकार
    • भारत में PSE की बिक्री या विनिवेश को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:
    • निम्नीकरण (Dilution): सरकार PSE में अपनी हिस्सेदारी को 51% से कम नहीं होने देती
    • बल्कि छोटे-छोटे हिस्से (जैसे 5-10%) स्टॉक मार्केट के माध्यम से बेचती है। इससे सरकार का बहुमत नियंत्रण बना रहता है।​
    • साधारण विनिवेश: मामूली हिस्सेदारी बेचना, लेकिन 51% से ऊपर रखना।
    • रणनीतिक विनिवेश: न्यूनतम 51% हिस्सेदारी बेचना
    • जिसमें प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण शामिल होता है। यह निजीकरण का सबसे गहन रूप है।​
  • रणनीतिक विनिवेश की परिभाषा और विशेषताएं
    • विनिवेश आयोग (Disinvestment Commission) द्वारा परिभाषित, रणनीतिक विनिवेश में PSE की 50% या उससे अधिक हिस्सेदारी बेची जाती है
    • जो प्रबंधन नियंत्रण के हस्तांतरण के साथ होती है। मुख्य विशेषताएं:
    • सरकार PSE में बहुमत हिस्सेदारी (51%+) खो देती है।
    • खरीदार निजी क्षेत्र की कंपनी होती है, जो बोली प्रक्रिया से चुनी जाती है।
    • इसका उद्देश्य PSE को पूर्ण रूप से निजीकरण करना, दक्षता बढ़ाना और सरकारी बोझ कम करना है।
    • कानूनी रूप से, कंपनी कानून की धारा 241 में संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • ऐतिहासिक उदाहरण
    • भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL): सरकार ने 2021 में BPCL में 53.3% हिस्सेदारी रणनीतिक विनिवेश के माध्यम से निजी क्षेत्र को बेचने की योजना बनाई।
    • एयर इंडिया: 2022 में टाटा समूह को 100% हिस्सेदारी (प्रबंधन नियंत्रण सहित) बेचा गया, जो रणनीतिक विनिवेश का क्लासिक उदाहरण है।
    • अन्य: पवन हंस, बीपीसीएल, शिपिंग कॉर्पोरेशन आदि पर विचार।​
  • नई PSE नीति (2021) का प्रभाव
    • फरवरी 2021 में घोषित नई सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति के तहत, केवल रणनीतिक क्षेत्रों (जैसे ऊर्जा, रक्षा) में PSE रखे जाएंगे।
    • गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में रणनीतिक विनिवेश या बंद किया जाएगा। DIPAM ने न्यूनतम होल्डिंग को समाप्त कर दिया
    • जिससे 51% से नीचे बिक्री संभव हुई। CII ने 2026 में सुझाव दिया कि 78 PSEs में हिस्सेदारी 51% तक कम की जाए
    • फिर 33-26%। इससे ₹10 लाख करोड़ जुट सकते हैं।
  • प्रक्रिया और चुनौतियां
  • चरण:
    • DIPAM (विभाग निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन) पहचान करता है।
    • बोली प्रक्रिया (Expression of Interest, Financial Bid)।
    • कैबिनेट समिति (CCEA) अनुमोदन।
    • नियामक स्वीकृतियां (CVC, CAG से छूट की जरूरत)।​
  • चुनौतियां:
    • श्रमिक विरोध।
    • मूल्यांकन विवाद।
    • रणनीतिक क्षेत्रों में सुरक्षा चिंताएं।
    • फिर भी, 2026 तक निजीकरण शीर्ष प्राथमिकता है।​
  • वर्तमान संदर्भ (जनवरी 2026)
    • CII ने बजट 2026-27 में PSE निजीकरण के लिए तीव्र रोडमैप सुझाया: चरण 1 (55 PSEs, ₹4.6 लाख करोड़), चरण 2 (23 PSEs, ₹5.4 लाख करोड़)।
    • सरकार 51% पर रुक सकती है ताकि नियंत्रण बरकरार रहे।

35. भारत में लोगों के उस समूह के लिए किस शब्द उपयोग किया जाता है, जो हमेशा या सामान्य तौर पर निर्धन होते हैं, लेकिन जिनके पास कभी-कभी थोड़ा-बहुत धन आ जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अल्पकालिक निर्धन
Solution:
  • 'अल्पकालिक निर्धन' भारत के लोगों का ऐसा समूह है, जो हमेशा या सामान्य तौर पर निर्धन होते हैं
  • लेकिन कभी-कभी इनके पास थोड़ा-बहुत धन आ जाता है। चिरकालिक निर्धन ऐसे व्यक्ति हैं
  • जिनका परिवार पीढ़ियों से निर्धनता में जीवन व्यतीत कर रहा है एवं अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम नहीं है।
  • मंथन निर्धन की परिभाषा
    • यह शब्द उन लोगों या परिवारों को दर्शाता है जिनकी आय गरीबी रेखा के आसपास उतार-चढ़ाव करती रहती है
    • कभी नीचे चली जाती है तो कभी ऊपर आ जाती है।​
    • ये लोग स्थायी गरीबी से जूझते हैं, लेकिन उनकी गरीबी हमेशा chronic नहीं होती
    • मौसमी कामगारों, छोटे किसानों या अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों में यह आम है।
    • उदाहरणस्वरूप, ग्रामीण भारत में फसल के अच्छे मौसम में थोड़ी बचत हो जाती है, लेकिन सूखे या बीमारी में फिर गरीबी लौट आती है।​
  • सामाजिक-आर्थिक संदर्भ
    • भारत में यह समूह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़ा है, खासकर OBC और सामान्य श्रमिक वर्गों में।​
    • अनुसूचित जाति/जनजातियों में 43-50% लोग गरीबी से प्रभावित हैं
    • लेकिन मंथन निर्धन अक्सर इनके अलावा छोटे किसान या असंगठित क्षेत्र के होते हैं।​
    • सरकारी योजनाएं जैसे DAY-NRLM स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से इन्हें स्थायी आय प्रदान करने पर जोर देती हैं।​
  • कारण और चुनौतियाँ
    • आय के स्रोत: मौसमी कृषि, दैनिक मजदूरी या छोटे कारोबार से आय अस्थिर रहती है।​
    • बाहरी कारक: सूखा, महंगाई या स्वास्थ्य व्यय स्थिति बिगाड़ देते हैं।​
    • नीति प्रभाव: मनरेगा जैसी योजनाएं थोड़ी राहत देती हैं, लेकिन स्थायी समाधान कम हैं।​
    • ये लोग गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के लिए चुनौती हैं क्योंकि उनकी स्थिति volatile होती है।

36. निम्नलिखित में से कौन-सी भारत में 'नवरत्न' या 'महारत्न' कंपनी नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
Solution:
  • इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को भारत में नवरत्न या महारत्न कंपनी का दर्जा प्राप्त नहीं है
  • जबकि नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को महारत्न का दर्जा प्राप्त है।
  • उपयोगकर्ता ने पूछा है कि निम्नलिखित में से कौन-सी 'नवरत्न' या 'महारत्न' नहीं है
  • लेकिन विकल्प स्पष्ट रूप से दिए नहीं हैं; हालाँकि, सामान्य प्रश्नों के संदर्भ से यह इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (IFCI) है, जो न तो नवरत्न है और न ही महारत्न।​
  • नवरत्न और महारत्न का अर्थ
    • नवरत्न दर्जा 1997 में शुरू हुआ, जिसमें 14-16 PSUs को अधिक स्वायत्तता मिलती है
    • जैसे विदेशी निवेश के लिए सीमा तक ₹5,000 करोड़ तक खर्च। महारत्न दर्जा 2009 से है
    • जो सबसे बड़े PSUs को अनलिमिटेड स्वायत्तता देता है।
    • ये दर्जे समय-समय पर बदल सकते हैं, जैसे 2024-26 तक नई कंपनियाँ जोड़ी गईं।
  • वर्तमान नवरत्न कंपनियों की सूची (2026 तक)
    • भारत में नवरत्न कंपनियों की संख्या 16 है, जिनमें शामिल हैं:
    • भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
    • कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR)
    • इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL)
    • महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)
    • नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO)
    • एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड
    • नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (NLC इंडिया)
    • एनएमडीसी लिमिटेड
    • राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL)
    • शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI)
    • रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL)
    • राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF)
    • हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (HUDCO)
    • इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA)
    • अन्य जैसे NFL, CWC।​
  • IFCI क्यों नहीं है नवरत्न/महारत्न?
    • इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (IFCI) 1948 में स्थापित एक विकास वित्त संस्थान है
    • जो औद्योगिक क्षेत्र को लोन देता है। यह मिनिरत्न भी नहीं है, बल्कि एक सामान्य PSU है।
    • इसके विपरीत, अन्य विकल्प जैसे NTPC, IOCL, ONGC महारत्न हैं।
    • हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) भी मिनिरत्न श्रेणी-I है, न कि नवरत्न/महारत्न।
    • IFCI का प्रदर्शन मानदंड (जैसे टर्नओवर ₹25,000 करोड़+) पूरा नहीं होता।​
  • अन्य सामान्य गलतफहमियाँ
    • कई बार BSNL, IRCTC या HAL को भ्रमित किया जाता है—HAL नवरत्न है
    • लेकिन BSNL/IRCTC नहीं। ये दर्जे DIPAM (विभाग निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन) द्वारा तय होते हैं।
    • निवेशकों के लिए नवरत्न/महारत्न शेयर स्थिर रिटर्न देते हैं।

37. नीचे दिए गए कथनों को पढ़ें और स्वयं सहायता समूहों के संबंध में सही विकल्प का चयन करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

(i) स्वयं सहायता समूह, सूक्ष्म उद्यमियों का एक पंजीकृत समूह होता है।

(ii) स्वयं सहायता समूहों के सूक्ष्म उद्यमियों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि समान होती है

Correct Answer: (a) दोनों (i) और (ii) सत्य है
Solution:
  • स्वयं सहायता समूह आपस में अपनापन रखने वाले एक जैसे सूक्ष्म उद्यमियों का एक पंजीकृत समूह है
  • जो अपनी आय से सुविधाजनक तरीके से बचत करने और उसको समूह के सम्मिलित फंड में शामिल करते हैं।
  • इन समूहों के सूक्ष्म उद्यमियों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि समान होती है।
  • कथनों का विश्लेषण
    • आमतौर पर ऐसे प्रश्नों में दो मुख्य कथन होते हैं:
    • कथन (i): स्वयं सहायता समूह सूक्ष्म उद्यमियों का एक पंजीकृत समूह होता है।
    • यह कथन गलत है क्योंकि SHG मुख्य रूप से स्वैच्छिक और अनौपचारिक समूह होते हैं।
    • पंजीकरण वैकल्पिक होता है और सभी SHG पंजीकृत नहीं होते; वे विश्वास और पारस्परिक सहायता पर आधारित कार्य करते हैं।​
    • कथन (ii): स्वयं सहायता समूहों के सूक्ष्म उद्यमियों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि समान होती है।
    • यह कथन सही है क्योंकि SHG समान पृष्ठभूमि वाले सदस्यों (जैसे गरीब महिलाएं या ग्रामीण परिवार) से बनते हैं, जिससे आपसी समझ और सहयोग बढ़ता है।
    • सही विकल्प: कथन (i) गलत और कथन (ii) सही। इसलिए, सही उत्तर "(ii) केवल" या "केवल कथन (ii) सही है" होता है।​
  • स्वयं सहायता समूह क्या हैं?
    • स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups - SHG) 10-20 सदस्यों (मुख्यतः महिलाओं) के छोटे समूह होते हैं
    • जो नियमित बचत करते हैं और आपसी ऋण प्रदान करते हैं।
    • भारत में NABARD द्वारा 1980-90 के दशक में प्रारंभ किया गया यह मॉडल ग्रामीण गरीबी उन्मूलन का प्रमुख साधन है।
    • उदाहरणस्वरूप, NRLM (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत लाखों SHG सक्रिय हैं।
  • ये समूह:
    • बचत कोष बनाते हैं और बैंकों से सामूहिक ऋण लेते हैं।
    • सूक्ष्म उद्यमिता (जैसे सिलाई, पशुपालन, हस्तशिल्प) को बढ़ावा देते हैं।
    • सामाजिक मुद्दों (जैसे बाल विवाह रोकना) पर जागरूकता फैलाते हैं।
  • लाभ
  • आर्थिक लाभ
    • बचत और ऋण सुविधा: सदस्य मासिक ₹50-100 बचत करते हैं, जिससे आंतरिक ऋण मिलता है।
    • बैंक सामूहिक गारंटी पर कम ब्याज पर ऋण देते हैं, साहूकारों पर निर्भरता कम होती है।
    • रोजगार सृजन: स्वरोजगार अवसर जैसे दूध उत्पादन या किराना दुकान शुरू करने में मदद। केरल का कुदुम्बश्री मिशन इसका सफल उदाहरण है।​
    • आय वृद्धि: सदस्यों की औसत आय 20-50% बढ़ती है, गरीबी रेखा से ऊपर उठने में सहायक।​
  • सामाजिक लाभ
    • महिला सशक्तिकरण: निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है; घरेलू हिंसा कम होती है। भारत में 2/3 SHG महिलाओं के हैं।​
    • समरसता और एकता: सदस्य एक-दूसरे की मदद करते हैं, सामाजिक सद्भाव बढ़ता है।​
    • कौशल विकास: प्रशिक्षण से नेतृत्व, लेखांकन सीखते हैं।​
  • कार्यप्रणाली
    • गठन: समान पृष्ठभूमि वाले 10-20 लोग समूह बनाते हैं, नियम तय करते हैं।
    • बचत चक्र: साप्ताहिक/मासिक बैठकें, बचत संग्रह।
    • ऋण वितरण: आवश्यकता अनुसार आंतरिक ऋण, चुकौती सुनिश्चित।
    • बैंक लिंकेज: 6 महीने बाद बैंक ऋण, जिसमें समूह संयुक्त रूप से उत्तरदायी।​
    • संघन: SHG को FPO (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) में बदला जा सकता है।​
  • चुनौतियाँ
    • डिफॉल्ट जोखिम: एक सदस्य का डिफॉल्ट पूरे समूह प्रभावित करता है।
    • प्रबंधन: लेखांकन, रिकॉर्ड रखना कठिन।
    • बाहरी हस्तक्षेप: एनजीओ/सरकार की अधिक निर्भरता। फिर भी, सफलता दर ऊँची है।​
  • भारत में स्थिति (जनवरी 2026 तक)
    • NRLM के तहत 1 करोड़+ SHG हैं, 12 करोड़ महिलाएं जुड़ीं।
    • DAY-NRLM ने ₹2 लाख करोड़+ ऋण वितरित किए।
    • हरियाणा (जैसे कैथल) में भी स्थानीय SHG कृषि और डेयरी में सक्रिय हैं।

38. उदारीकरण नीति के तहत बहुत सारे उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित कर दिया गया। निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग अभी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत आरक्षित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) परमाणु और रेलवे संचालन
Solution:
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम सरकार को संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।
  • अब केवल 2 क्षेत्र राष्ट्रीय महत्व के सार्वजनिक उद्यमों के लिए आरक्षित हैं। ये क्षेत्र हैं-परमाणु ऊर्जा एवं रेलवे संचालन।
  • उदारीकरण नीति का ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1991 की नई औद्योगिक नीति के तहत, मूल रूप से 1956 की नीति में 17 उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थे
    • जिन्हें घटाकर 8 कर दिया गया। बाद में धीरे-धीरे यह संख्या और कम हुई
    • वर्तमान में केवल रक्षा उद्योग (जिसमें हथियार और गोला-बारूद शामिल हैं), परमाणु ऊर्जा तथा रेलवे संचालन ही आरक्षित हैं।
    • हालांकि, रक्षा क्षेत्र में कुछ सीमित निजी भागीदारी की अनुमति है
    • लेकिन परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और रेल मंत्रालय के अधीन रेलवे पूर्णतः सरकारी नियंत्रण में हैं।
    • उदारीकरण का मुख्य उद्देश्य निजी निवेश को बढ़ावा देना था
    • लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के कारण ये क्षेत्र अपरिवर्तित रहे।
  • वर्तमान आरक्षित उद्योग
    • परमाणु ऊर्जा: परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) के नियंत्रण में है
    • जिसमें खनन से लेकर बिजली उत्पादन तक सभी गतिविधियाँ शामिल हैं। निजी क्षेत्र को प्रवेश नहीं।​
    • रेलवे संचालन: भारतीय रेलवे एकमात्र राष्ट्रीय रेल नेटवर्क का संचालन करती है। निजी ट्रेनें चलाने की कुछ कोशिशें हुईं, लेकिन कोर संचालन सरकारी है।​
    • रक्षा उद्योग: हथियार, गोला-बारूद और संवेदनशील उपकरण अभी भी मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र (DRDO, HAL आदि) के लिए आरक्षित।​
    • ये क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक हित और एकाधिकार से बचाव के लिए आरक्षित हैं।​
  • अन्य उद्योगों का निजीकरण
    • कोयला, खनिज तेल, तांबा, जस्ता आदि उद्योग उदारीकरण के बाद निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए गए।
    • उदाहरणस्वरूप, कोयला खदानें 2020 से पूर्णतः निजीकरण के लिए उपलब्ध हैं।
    • इसी प्रकार, दूरसंचार, विमानन और बिजली जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियाँ प्रमुख हैं।
    • 1991 से अब तक (2026 तक) सार्वजनिक क्षेत्र का संकुचन जारी है, लेकिन ऊपर बताए तीन क्षेत्र अपवाद हैं।
  • महत्वपूर्ण कारण
    • ये आरक्षण राष्ट्रीय सुरक्षा (परमाणु और रक्षा), बुनियादी ढांचा (रेलवे) और सार्वजनिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए हैं।
    • सरकार ने PPP (Public-Private Partnership) मॉडल अपनाया है
    • लेकिन कोर क्षेत्रों में नियंत्रण बनाए रखा। वर्तमान नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

39. किस वर्ष भारत और मालदीव ने एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो आवश्यक वस्तुओं के निर्यात का प्रावधान करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 1981 में
Solution:
  • भारत और मालदीव ने वर्ष 1981 में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें भारत से मालदीव को आवश्यक वस्तुओं के निर्यात का प्रावधान है।
  • समझौते का पृष्ठभूमि
    • यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए हस्ताक्षरित हुआ
    • क्योंकि मालदीव एक छोटा द्वीप राष्ट्र है जो अपनी भोजन और निर्माण सामग्री की जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर रहता है।
    • समझौते के तहत भारत मालदीव को चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दाल, प्याज, आलू, अंडे जैसी खाद्य वस्तुएं और स्टोन एग्रीगेट, नदी की रेत जैसी निर्माण सामग्री अनुकूल शर्तों पर उपलब्ध कराता है।
    • यह द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और मालदीव की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का माध्यम बना।
  • हालिया कार्यान्वयन (2025-26)
    • 2025-26 वित्त वर्ष के लिए भारत सरकार ने इस समझौते के तहत मालदीव को विशिष्ट कोटे अधिसूचित किए।
    • उदाहरणस्वरूप, आलू (22,589 टन), प्याज (37,537 टन), चावल (1,30,429 टन), गेहूं का आटा (1,11,462 टन या 1,14,621 टन के रूप में उल्लिखित), चीनी (67,719 टन),
    • दाल (350 टन), स्टोन एग्रीगेट (13 लाख टन) और नदी की रेत (13 लाख टन) का निर्यात अनुमत हुआ।
    • पिछले वर्षों की तुलना में अंडे, आलू, प्याज, चीनी, चावल, गेहूं का आटा और दाल के कोटे में वृद्धि की गई।
  • महत्वपूर्ण प्रभाव
    • यह समझौता मालदीव की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, जो समुद्र से घिरा होने के कारण आयात पर निर्भर है।
    • भारत के निर्यात से मालदीव में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित होती है, जिससे कीमतें स्थिर रहती हैं।
    • द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हुए, यह भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का हिस्सा है।
    • कुल मिलाकर, 1981 का यह समझौता आज भी सक्रिय है और नियमित रूप से अपडेट होता रहता है।

40. भारत का बहुआयामी गरीबी सूचकांक की गणना के लिए निम्नलिखित में से किस पर विचार नहीं करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) पर्यावरणीय गुणवत्ता
Solution:
  • राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान रूप से भारित आयामों में एक साथ अभाव का आकलन करती है।
  • बहुआयामी गरीबी सूचकांक की गणना में 'पर्यावरणीय गुणवत्ता' पर विचार नहीं किया जाता है।
  • MPI के आयाम
    • भारत के राष्ट्रीय MPI में कुल 12 संकेतक हैं, जो तीन मुख्य आयामों में विभाजित हैं।
    • स्वास्थ्य आयाम में पोषण की कमी और बाल मृत्यु दर शामिल हैं, जो लंबी और स्वस्थ जीवन की क्षमता को मापते हैं।
    • शिक्षा आयाम स्कूली शिक्षा के वर्षों और बच्चे की स्कूल उपस्थिति पर केंद्रित है
    • जबकि जीवन स्तर आयाम में बिजली, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, खाना पकाने का ईंधन, फर्श की गुणवत्ता और संपत्तियों (जैसे रेडियो, टीवी, फैन आदि) तक पहुंच जैसे संकेतक आते हैं।
  • क्या शामिल नहीं है
    • MPI की गणना में पर्यावरण की गुणवत्ता, जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण या पर्यावरणीय गिरावट, पर सीधा विचार नहीं किया जाता।
    • इसके अलावा, सामाजिक अपवर्जन, हिंसा, असुरक्षा या घरेलू स्तर पर लिंग-आयु असमानताओं जैसे आयाम भी मुख्य रूप से बाहर हैं
    • जो गरीबी की व्यापक तस्वीर को सीमित बनाते हैं। आय असमानता या उपभोग व्यय जैसे आर्थिक माप भी इसमें शामिल नहीं होते
    • क्योंकि यह गैर-आय आधारित बहुआयामी गरीबी पर फोकस करता है।
  • गणना की विधि
    • MPI की गणना दो चरणों में होती है: पहले प्रत्येक घरेलू के लिए वंचन स्कोर (deprivation score) निकाला जाता है
    • जहां प्रत्येक संकेतक का वजन समान रूप से निर्धारित होता है (स्वास्थ्य और शिक्षा को 1/3, जीवन स्तर को 1/3)। फिर, यदि कोई घरेलू 33% से अधिक वंचन में है
    • तो उसे बहुआयामी गरीब माना जाता है; अंत में हेडकाउंट रेशियो और तीव्रता को जोड़कर MPI मूल्य प्राप्त होता है।
    • यह विधि NFHS (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण) डेटा पर आधारित है, जो हर 5 वर्ष में उपलब्ध होता है।
  • भारत में प्रगति और आलोचना
    • 2015-16 से 2019-21 के बीच भारत का MPI 24.85% से घटकर 14.96% हो गया
    • जो 13.5 करोड़ लोगों के बहुआयामी गरीबी से बाहर निकलने का संकेत देता है। हालांकि, आलोचनाएं हैं
    • यह एकसमान भार और कट-ऑफ का उपयोग विविध क्षेत्रीय जरूरतों को नजरअंदाज करता है
    • NSS जैसे उपभोग डेटा को शामिल न करना व्यापकता कम करता है।
    • पर्यावरणीय कारकों की अनदेखी गरीबी के पर्यावरण-संबंधी प्रभावों को मापने में कमी दर्शाती है।