विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-IVTotal Questions: 5841. एच.पी.सी.एल. राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एच.आर.आर.एल.) का निर्माण किस जिले में किया जा रहा है (दिसंबर, 2022 तक)? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)](a) जैसलमेर(b) बाड़मेर(c) जालौन(d) बीकानेरCorrect Answer: (b) बाड़मेरSolution:एच.पी.सी.एल. राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) का निर्माण राजस्थान के बाड़मेर जिले में किया जा रहा है।HRRL को 18 सितंबर, 2013 को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और राजस्थान सरकार के बीच संयुक्त उद्यम के रूप में क्रमशः 74% और 26% की इक्विटी भागीदारी के साथ शामिल किया गया था।एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) का स्थानएचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) का निर्माण दिसंबर 2022 तक राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा (पचपदरा तहसील) में किया जा रहा था।यह परियोजना बाड़मेर जिले के पचपदरा क्षेत्र में स्थित है, जो बालोतरा के निकट है।परियोजना का विवरणएचआरआरएल हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उद्यम हैजिसमें एचपीसीएल की 74% और राज्य सरकार की 26% हिस्सेदारी है।यह एक ग्रीनफील्ड रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है, जिसकी प्रारंभिक क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) है।भविष्य में इसे 18 एमएमटीपीए तक बढ़ाने की योजना है। यह आयातित और स्थानीय कच्चे तेल दोनों को संसाधित करेगीजिसमें राजस्थान के मंगलौर तेल क्षेत्र से 485 किमी लंबी पाइपलाइन शामिल है।दिसंबर 2022 तक की स्थितिदिसंबर 2022 तक निर्माण कार्य प्रगति पर था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण मूल समयसीमा में देरी हुई।परियोजना मूल रूप से 2022 तक पूरी होने वाली थीपरंतु इसमें विलंब हुआ और इसे जनवरी 2025 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया। लागत लगभग ₹1 लाख करोड़ से अधिक आंकी गई हैजो राजस्थान का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें कैप्टिव पावर प्लांट, पानी की पाइपलाइन, भंडारण सुविधाएं और टाउनशिप भी शामिल हैं।उत्पाद और पर्यावरणीय पहलूरिफाइनरी बीएस-VI ग्रेड पेट्रोल (एमएस), हाई स्पीड डीजल (एचएसडी), तथा पेट्रोकेमिकल उत्पाद जैसे पॉलीप्रोपाइलिन, ब्यूटाडाइन, एलएलडीपीई, एचडीपीई, बेंजिन और टोल्यूइन का उत्पादन करेगी।पर्यावरण के लिए प्रवासी पक्षियों हेतु आर्द्रभूमि, जल निकायों का कायाकल्प और वृक्षारोपण जैसी सुविधाएं हैं, जो इसे ऊर्जा-कुशल बनाती हैं।हालिया अपडेट (2022 के बाद)2025 तक निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया, जनवरी 2026 में उद्घाटन की तैयारी चल रही हैसंभवतः प्रधानमंत्री द्वारा। यह पश्चिमी राजस्थान के विकास को बढ़ावा देगा।42. निम्नलिखित में से कौन भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)](a) टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड(b) एशियन पेंट्स लिमिटेड(c) जनरल मोटर्स कंपनी(d) अरविंद मिल्स लिमिटेडCorrect Answer: (c) जनरल मोटर्स कंपनीSolution:जनरल मोटर्स एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय ऑटोमोटिव विनिर्माण कंपनी है, जिसका मुख्यालय डेट्रायट, मिशिगन, संयुक्त राज्य अमेरिका में है।भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी की परिभाषा बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) वह होती है जो भारत में मुख्यालय रखती है लेकिन दो या अधिक देशों में व्यापार संचालित करती है।भारतीय MNC'जैसे टाटा, रिलायंस, इंफोसिस वैश्विक स्तर पर फैली हैं। प्रश्न अधूरा लगता हैक्योंकि विकल्प नहीं दिए गए, लेकिन सामान्य MCQ के आधार पर विस्तार से समझाते हैं।सामान्य उदाहरण जहां विदेशी कंपनी भारतीय नहींप्रश्न अक्सर जनरल मोटर्स, यूनिलीवर या ITC जैसे विकल्प देते हैं। जनरल मोटर्स अमेरिकी MNC हैमुख्यालय डेट्रॉइट), भारत में संयुक्त उद्यम था लेकिन मूल रूप से भारतीय नहीं।यूनिलीवर ब्रिटिश-डutch MNC है, हिंदुस्तान यूनिलीवर इसका भारतीय सब्सिडियरी।गलत उदाहरण: ITC क्यों बहुराष्ट्रीय नहीं मानी जाती ITC कोलकाता मुख्यालय वाली भारतीय FMCG कंपनी हैलेकिन मुख्य रूप से घरेलू संचालित, सख्त MNC मानदंड (विदेशी उत्पादन/निर्यात) पूरा नहीं करती। जोमैटो, माइक्रोमैक्स भारतीय MNC हैं।अन्य नोट्सरिलायंस वैश्विक है लेकिन प्राथमिक रूप से भारतीय। विदेशी MNC जैसे सोनी, सैमसंग भारत में सब्सिडियरी चलाते हैं।सटीक विकल्प न होने पर जनरल मोटर्स जैसी विदेशी कंपनी ही उत्तर होती।43. किस अधिनियम ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को रोकने के बजाय प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने पर बल दिया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)](a) एमआरटीपी (MRTP) अधिनियम, 1969(b) कोपरा अधिनियम(c) प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002(d) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949Correct Answer: (c) प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002Solution:प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 भारत का एक अधिनियम है, जो भारत में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पारित की गई थी।इस अधिनियम ने एकाधिकार और अवरोधक व्यवहार अधिनियम, 1969 का स्थान लिया। इसके अंतर्गत भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की स्थापना हुई।पृष्ठभूमिMRTP अधिनियम 1969 समाजवादी अर्थव्यवस्था के अनुरूप था, जो आर्थिक शक्ति के एकाधिकरण को रोकने पर जोर देता थालेकिन प्रतिस्पर्धा को सक्रिय रूप से बढ़ावा नहीं देता था।1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत ने बाजार-उन्मुख अर्थव्यवस्था अपनाई, जिसके लिए आधुनिक प्रतिस्पर्धा कानून की जरूरत पड़ी।राघवन समिति की सिफारिशों पर 2002 में यह अधिनियम पारित हुआजो अंतरराष्ट्रीय मानकों (जैसे EU और US के antitrust कानूनों) के अनुरूप था।मुख्य उद्देश्यअधिनियम का प्राथमिक लक्ष्य प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली प्रथाओं को रोकना और बाजारों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।यह उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाता है—कम कीमतें, बेहतर गुणवत्ता, नवाचार और विकल्प सुनिश्चित करके। व्यापार की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुएयह निष्पक्ष खेल का मैदान प्रदान करता है जहां कोई उद्यम अनुचित लाभ न ले सके।प्रमुख प्रावधानप्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते (धारा 3)उत्पादक, सप्लायर या व्यापारियों के बीच मूल्य निर्धारण, बोली दमन, उत्पाद सीमांकन या बाजार बंटवारे जैसे समझौते निषिद्ध।संयुक्त उद्यम जैसी कुछ अपवादों को छोड़कर, ये शून्य घोषित होते हैं।प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग (धारा 4)प्रमुख उद्यम (relevant market में 50%+ हिस्सेदारी या अन्य कारकों से) द्वारा अनुचित शर्तें थोपना, मूल्य भेदभाव या बाजार से बहिष्कार प्रतिबंधित।संयोजन नियंत्रण (धारा 5-6)विलय, अधिग्रहण या शेयर खरीद यदि प्रतिस्पर्धा पर "उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव" डालें, तो CCI की पूर्व मंजूरी जरूरी।संस्थागत ढांचाभारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) अधिनियम लागू करने वाला वैधानिक निकाय हैजिसमें अध्यक्ष और 2-6 सदस्य होते हैं।यह जांच, जुर्माना (व्यवसाय के 10% तक टर्नओवर पर), cease-and-desist आदेश और अपीलीय ट्रिब्यूनल (COMPAT, अब NCLAT) के माध्यम से कार्य करता है।अपराध ब्यूरो (DG) जांच करता है।महत्वपूर्ण संशोधन2007 संशोधन ने CCI को मजबूत किया और 2009 से पूर्ण लागू।2023 में प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम ने डील वैल्यू थ्रेशोल्ड, hub-and-spoke कार्टेल और कम्पलसरी नोटिफिकेशन जोड़े।यह डिजिटल बाजारों (जैसे Google, Amazon केस) के लिए प्रासंगिक है।प्रभाव और उदाहरणCCI ने 100+ मामलों में कार्रवाई की, जैसे Cement कार्टेल (2012, ₹6300 करोड़ जुर्माना), Google Android (2022, ₹1337 करोड़)।यह FDI बढ़ाने, MSMEs को संरक्षण और उपभोक्ता कल्याण में योगदान देता है।चुनौतियां: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, लेन-देन लागत और वैश्विक एकीकरण।44. बेरोजगारी का निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकार लोगों द्वारा बेहतर नौकरियों की तलाश में स्वेच्छा से नौकरियां छोड़ने का परिणाम है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)](a) चक्रीय बेरोजगारी(b) प्रच्छन्न बेरोजगारी(c) संरचनात्मक बेरोजगारी(d) घर्षणात्मक बेरोजगारीCorrect Answer: (d) घर्षणात्मक बेरोजगारीSolution:'घर्षणात्मक बेरोजगारी' अक्सर बेहतर वेतन, अवसर या कार्य जीवन संतुलन के साथ नौकरियों की तलाश में लोगों द्वारा स्वेच्छा से अपनी नौकरी छोड़ने के कारण होती है।इसे अक्सर स्वैच्छिक बेरोजगारी के रूप में भी जाना जाता है।परिभाषा और विशेषताएंयह प्रक्रिया नौकरी खोजने, साक्षात्कार देने और नए रोजगार में प्रवेश करने के बीच के संक्रमण काल को दर्शाती है।यह आमतौर पर अल्पकालिक (कुछ सप्ताह से महीनों तक) होती हैअर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक नहीं, बल्कि सकारात्मक मानी जाती हैक्योंकि यह श्रमिकों को अधिक उत्पादक भूमिकाओं में ले जाती है।उदाहरणस्वरूप, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर जो दिल्ली में काम कर रहा हैलेकिन बैंगलोर में उच्च वेतन वाली नौकरी की तलाश में नौकरी छोड़ देता है, वह घर्षणात्मक बेरोजगार है।यह बेरोजगारी नवीनतम स्नातकों या नए श्रम बाजार में प्रवेश करने वालों में भी आम है।कारणइसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं:नौकरी बाजार की जानकारी की कमी: श्रमिकों को उपलब्ध रिक्तियों की पूरी जानकारी न होना, जिससे खोज में समय लगता है।श्रम की गतिशीलता: लोग भौगोलिक स्थान (जैसे शहर बदलना), कौशल उन्नयन या पारिवारिक कारणों से नौकरी बदलते हैं।स्वैच्छिक निर्णय: बेहतर अवसरों की आशा में नौकरी छोड़ना, जैसे प्रमोशन या कार्य-जीवन संतुलन।भर्ती प्रक्रिया का समय: नियोक्ताओं को उपयुक्त उम्मीदवार ढूंढने में लगने वाला समय।यह अन्य प्रकारों से भिन्न है क्योंकि इसमें कोई बाहरी आर्थिक दबाव (जैसे मंदी) नहीं होता।घर्षणात्मक बेरोजगारी स्वस्थ अर्थव्यवस्था का संकेत है, जबकि अन्य प्रकार समस्याग्रस्त होते हैं।आर्थिक महत्वयह बेरोजगारी अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक है क्योंकि:श्रमिकों को बेहतर匹配 वाली नौकरियां मिलती हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ती है।नवाचार को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि लोग नए क्षेत्रों में जाते हैं।कुल बेरोजगारी दर का 2-3% हिस्सा सामान्यतः इसी से आता है।हालांकि, यदि यह लंबी खिंच जाए तो व्यक्तिगत स्तर पर तनाव पैदा कर सकती है।भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां श्रम बाजार लचीला है, यह युवा बेरोजगारी का एक बड़ा हिस्सा है।न्यूनीकरण के उपायऑनलाइन जॉब पोर्टल्स (जैसे Naukri.com, LinkedIn) से जानकारी तेजी से उपलब्ध कराना।कौशल प्रशिक्षण और करियर काउंसलिंग।श्रम गतिशीलता बढ़ाने के लिए आवास और परिवहन सुविधाएं।सरकारें बेरोजगारी बीमा देकर संक्रमण आसान बनाती हैं।45. भारत में राष्ट्रीय निवेश कोष एक कॉर्पस फंड है, जो ....... के माध्यम से अपनी वित्तीय प्राप्तियों को जुटाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लाभ से होने वाली आय(b) केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश से होने वाली आय(c) अंशदायी पेंशन योजना(d) सामान्य भविष्य निधि की बचतCorrect Answer: (b) केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश से होने वाली आयSolution:राष्ट्रीय निवेश कोष एक आरक्षित निधि है, जो भारत के सार्वजनिक खाते में रखी जाती है।इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के विनिवेश से मिलने वाली आय को डाला जाता है।राष्ट्रीय निवेश कोष का गठन भारत सरकार द्वारा नवंबर, 2005 में किया गया थास्थापना और उद्देश्ययह कोष भारत सरकार द्वारा नवंबर 2005 में गठित किया गया था।इसका मुख्य उद्देश्य CPSUs के विनिवेश से प्राप्त होने वाली आय को एकत्रित कर उसे चयनित सार्वजनिक क्षेत्र के म्यूचुअल फंडों में निवेश करना है।इस तरह जुटाए गए धन से प्राप्त रिटर्न का उपयोग सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार) के वित्तपोषण और लाभदायक या पुनर्जीवित सार्वजनिकक्षेत्र के उद्यमों (PSEs) की पूंजीगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है।वित्तीय स्रोत और संरचनाNIF की वित्तीय प्राप्तियां मुख्यतः केंद्रीय PSUs के शेयरों के विनिवेश (disinvestment) से आती हैं, न कि इन उपक्रमों के मुनाफे या अन्य स्रोतों से।कोष का धन स्थायी प्रकृति का होता है और इसका प्रबंधन वित्त मंत्रालय के अधीन किया जाता हैजिसमें कुछ एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को फंड मैनेजर के रूप में नियुक्त किया जाता है।प्रारंभ में, कोष का 75% हिस्सा सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए और 25% पुनरोद्धार योग्य PSUs के लिए आवंटित किया गया थाहालांकि वैश्विक आर्थिक संकट (2008-09) के बाद इसमें बदलाव हुए।विनिवेश की भूमिकाविनिवेश वह प्रक्रिया है जिसमें सरकार अपने PSUs में हिस्सेदारी बेचती या परिसमाप्त करती हैराजकोषीय बोझ कम हो और दक्षता बढ़े। भारत में यह मुख्य रूप से CPSUs पर केंद्रित हैNIF के माध्यम से प्राप्त आय का उपयोग बुनियादी ढांचे तथा सामाजिक विकास के लिए होता है।उदाहरणस्वरूप, लाभ कमाने वाले व्यावसायिक उद्यमों (CPSEs) में सरकार की अल्पसंख्यक हिस्सेदारी बिक्री से कोष को मजबूती मिलती है।प्रबंधन और उपयोगकोष को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) में रखा जाता हैलेकिन इसका निवेश पेशेवर फंड मैनेजर्स द्वारा किया जाता है ताकि मूल्यह्रास न हो।वार्षिक आय का एक निश्चित हिस्सा सामाजिक क्षेत्रों के लिए उपयोग होता हैजबकि शेष PSEs की पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करता है।NIF ने समय के साथ स्थिर रिटर्न प्रदान किया है, जो सरकार को दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता देता है।अन्य संबंधित बिंदुNIF को राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (NIIF) से भ्रमित न करें, जो भारत का पहला संप्रभु धन कोष हैअलग उद्देश्यों (जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए कार्य करता है।NIF का कॉर्पस विनिवेश-आधारित होने से यह PSUs के पुनरुद्धार और सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।वर्तमान में (2026 तक), यह कोष सरकारी विनिवेश नीतियों का अभिन्न अंग बना हुआ है।46. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन निजीकरण के बारे में सही है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (III-पाली)]कथन :I. यह आर्थिक दक्षता को बढ़ावा देता है।II. यह नौकरशाही के हस्तक्षेप को सीमित करता है।III. यह बाजार की विफलता की ओर जाता है।(a) केवल कथन III(b) केवल कथन I(c) केवल कथन I और II(d) केवल कथन IICorrect Answer: (c) केवल कथन I और IISolution:निजीकरण का तात्पर्य किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के स्वामित्व या प्रबंधन में निजी क्षेत्र को भागीदारी प्रदान करना है।निजीकरण आर्थिक दक्षता को बढ़ावा देता है, साथ ही यह नौकरशाही के हस्तक्षेप को सीमित करता है।सही कथनों की पहचानप्रश्न में विकल्पों का उल्लेख नहीं है, लेकिन सामान्यतः निम्न कथन निजीकरण के बारे में सही माने जाते हैं:कथन I: यह आर्थिक दक्षता को बढ़ावा देता है। निजीकरण सही है क्योंकि निजी कंपनियां लाभ-प्रधान होती हैंजिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग, नवाचार और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। सार्वजनिक उपक्रमों में अक्सर अक्षमता और घाटा होता है।कथन II: यह नौकरशाही के हस्तक्षेप को सीमित करता है। यह भी सही हैक्योंकि निजीकरण से सरकारी नियंत्रण कम होता है, निर्णय तेज होते हैं और राजनीतिक हस्तक्षेप घटता है।ये कथन विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, UPSC) में सही पाए जाते हैं।निजीकरण के लाभनिजीकरण कई फायदे प्रदान करता है।दक्षता वृद्धि: निजी फर्में लागत कम कर सेवाओं को बेहतर बनाती हैं, जैसे दूरसंचार क्षेत्र में जियो का प्रवेश।सरकारी बोझ कम: सरकार को घाटे वाले उपक्रमों से मुक्ति मिलती है और राजस्व प्राप्त होता है। 2021-22 में भारत ने 2.1 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा।निवेश व रोजगार: निजी क्षेत्र अधिक पूंजी लगाता है और प्रतिस्पर्धा से रोजगार सृजन होता है।उदाहरण: भारत में 1991 के बाद विनिवेश से 5 लाख करोड़ से अधिक राजस्व अर्जित।निजीकरण के नुकसानहर सिक्के के दो पहलू होते हैं।एकाधिकार का खतरा: निजी कंपनियां लाभ के लिए कीमतें बढ़ा सकती हैं, जैसे बिजली वितरण में।रोजगार हानि: सरकारी उपक्रमों में अतिरिक्त कर्मचारियों की छंटनी होती है।सार्वजनिक सेवाओं पर असर: स्वास्थ्य-शिक्षा जैसे क्षेत्रों में गरीबों की पहुंच कम हो सकती है।सांस्कृतिक हानि: रणनीतिक क्षेत्रों (रक्षा, रेल) में विदेशी प्रभाव बढ़ सकता है।भारत में निजीकरण का इतिहास1956 नीति: औद्योगिक नीति संकल्प में सार्वजनिक क्षेत्र प्रमुख।1991 सुधार: LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) से बदलाव। विनिवेश विभाग (DIPAM) की स्थापना।हालिया: 2021 राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP) से 6 लाख करोड़ का लक्ष्य। एयर इंडिया टाटा को, IDBI बैंक निजीकरण।वर्तमान में (जनवरी 2026 तक) राष्ट्रपति ट्रंप के अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से भारत में निजीकरण को बढ़ावा मिला है।47. भारत में चावल, गेहूं और ....... का उत्पादन बढ़ाने के लिए वर्ष 2007-08 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन शुरू किया गया था। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) दालों(b) केसर(c) मोटे अनाजों(d) फलोंCorrect Answer: (a) दालोंSolution:खाद्यान्न उत्पादन में स्थिरता तथा बढ़ती जनसंख्या की बढ़ती खपत की आवश्यकता को देखते हुएभारत सरकार ने अक्टूबर, 2007 में केंद्र प्रयोजित योजना 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन' की शुरुआत की।इसे मुख्य रूप से चावल, गेहूं और दालों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था।वर्तमान में इसके अंतर्गत मोटे अनाजों को भी शामिल कर लिया गया है।मिशन का परिचयमुख्य लक्ष्य चावल में 10 मिलियन टन, गेहूं में 8 मिलियन टन तथा दालों में 2 मिलियन टन अतिरिक्त उत्पादन हासिल करना था।इसके तहत क्षेत्र विस्तार, उत्पादकता सुधार और मिट्टी स्वास्थ्य बहाली पर जोर दिया गया।उद्देश्यखाद्यान्न फसलों (चावल, गेहूं, दालें) का रकबा बढ़ाना और प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में वृद्धि करना।मिट्टी की उर्वरता बहाल करना तथा स्थायी कृषि प्रथाओं को प्रोत्साहन देना।ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और किसानों की आय में इजाफा सुनिश्चित करना।घटक और कार्यान्वयनमिशन के प्रमुख घटक NFSM-चावल, NFSM-गेहूं, NFSM-दालें तथा बाद में NFSM-मोटे अनाज शामिल किए गए।यह 482 जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ, जहां कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई।केंद्रीय प्रायोजित योजना होने से केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से बीज, उर्वरक, सिंचाई और तकनीकी सहायता प्रदान करती हैं।उपलब्धियां2007-12 तक चावल उत्पादन में 10.5 मिलियन टन से अधिक, गेहूं में 8.2 मिलियन टन तथा दालों में 2.3 मिलियन टन की वृद्धि दर्ज की गई।बाद के चरणों (2014-15 से मोटे अनाज जोड़े गए) में कुल खाद्यान्न उत्पादन 25 मिलियन टन से ऊपर पहुंचा।हरियाणा जैसे राज्यों में गन्ना उत्पादन को भी बढ़ावा मिला।विस्तार और वर्तमान स्थिति2014-15 से NFSM को विस्तृत कर मोटे अनाज तथा 2018 से गन्ना शामिल किया गया।बारहवीं योजना तक लक्ष्य बढ़ाकर चावल 10 MT, गेहूं 8 MT, दालें 4 MT और मोटे अनाज 3 MT रखा गया।वर्तमान में (2026 तक) यह "कृषोन्नति योजना" के छत्राधीन चल रहा हैजो किसानों को बीज मिनिकिट, मिट्टी परीक्षण और प्रशिक्षण प्रदान करता है।48. 1993-94 तक, गरीबी रेखा, ....... के आंकड़ों पर आधारित होती थी। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) समान संसाधन अवधि(b) समान शोध अवधि(c) मिश्रित शोध अवधि(d) मिश्रित संदर्भ अवधिCorrect Answer: (a) समान संसाधन अवधिSolution:वर्ष 1993-94 तक गरीबी रेखा 'समान संसाधन अवधि (Uniform Resource Period) के आंकड़ों पर आधारित होती थी।वर्ष 1994-2000 के बाद मिश्रित संदर्भ अवधि (Mixed Reference Period) की पद्धति अपनाई गईयह पद्धति राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा उपभोग व्यय सर्वेक्षणों से एकत्रित आंकड़ों पर निर्भर करती थीजिसमें लोगों से पिछले 30 दिनों की स्मरण अवधि (recall period) के दौरान उनके उपभोग पर डेटा लिया जाता था।URP ने मुख्य रूप से दैनिक या मासिक उपभोग वाली वस्तुओं (जैसे भोजन) पर फोकस कियालेकिन कम आवृत्ति वाली वस्तुओं (जैसे कपड़े या टिकाऊ सामान) के सटीक आकलन में कमियां थींक्योंकि लंबी स्मरण अवधि से डेटा में त्रुटियां आ जाती थीं।URP पद्धति की मुख्य विशेषताएं30-दिन स्मरण अवधि: सभी वस्तुओं के लिए एक समान 30 दिनों का समय लिया जाता थाजो उपभोग पैटर्न को मासिक आधार पर मापने में मदद करता था।गरीबी अनुमान: योजना आयोग (अब नीति आयोग) इस डेटा से न्यूनतम कैलोरी आवश्यकता (ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 और शहरी में 2100 किलो कैलोरी प्रतिदिन) पर आधारित गरीबी रेखा निर्धारित करता थाजिसमें भोजन, कपड़े और आवास शामिल थे।उपयोग का काल: 1973-74 से 1993-94 तक प्रमुखता से इस्तेमाल, जैसे 1973-74 में राष्ट्रीय गरीबी दर 54.9% थी जो 1993-94 में घटकर 45.3% हो गई।URP से बदलाव और कारण1993-94 के बाद NSSO ने 1999-2000 से मिश्रित संदर्भ अवधि (MRP) अपनाईजिसमें उच्च आवृत्ति वस्तुओं के लिए 7-दिन, सामान्य के लिए 30-दिन और दुर्लभ वस्तुओं (कपड़े, शिक्षा, स्वास्थ्य) के लिए 365-दिन की अवधि ली गई।यह बदलाव URP की कमियों को दूर करने के लिए था, क्योंकि लंबी स्मरण से उपभोग कम आंका जाता था, जिससे गरीबी दरें अधिक दिखती थीं।ऐतिहासिक संदर्भ और महत्वभारत में गरीबी मापन मुख्य रूप से उपभोग व्यय पर आधारित रहा, न कि आय पर, क्योंकि उपभोग अधिक स्थिर होता है।1993-94 के URP आंकड़ों से ग्रामीण गरीबी 37.3% और शहरी 32.4% अनुमानित हुई।अब नीति आयोग MOSPI के NSSO डेटा से गरीबी रेखा गणना करता हैजो सामाजिक योजनाओं (जैसे MNREGA, PDS) की निगरानी के लिए जरूरी है।यह पद्धति शैक्षणिक और नीतिगत दोनों स्तरों पर गरीबी उन्मूलन की प्रगति मापती है।49. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का एक अवयव नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) संयोजन का नियमन(b) प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों का निषेध(c) व्यापार का निषेध(d) प्रमुख स्थिति का दुरुपयोगCorrect Answer: (c) व्यापार का निषेधSolution:'व्यापार का निषेध' प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का अवयव नहीं हैजबकि संयोजन का नियम, प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों का निषेध, प्रमुख स्थिति दुरुपयोग आदि को प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के प्रावधान में शामिल किया गयाअधिनियम के मुख्य अवयवप्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तीन प्रमुख अवयव धारा 3, 4 और 5-6 से संबंधित हैं।धारा 3: प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते प्रतिबंधित करती है, जैसे कार्टेल, बोली दमन, मूल्य निर्धारण आदि, जो बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।धारा 4: प्रमुख स्थिति (डॉमिनेंट पोजीशन) के दुरुपयोग को रोकती है, जैसे अनुचित मूल्य लगाना या बाजार को बाधित करना।धारा 5-6: संयोजनों (मर्जर, अधिग्रहण) को विनियमित करती है यदि वे प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाते हैं।ये अवयव भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लागू किए जाते हैं।कौन-सा अवयव नहीं है?प्रश्न "निम्नलिखित में से कौन-सा प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का एक अवयव नहीं हैसंभवतः विकल्पों (जैसे व्यापार का निषेध, बौद्धिक संपदा एकाधिकार रोकना आदि) पर आधारित है।व्यापार का निषेध या बौद्धिक संपदा अधिकारों से उत्पन्न एकाधिकार को रोकना अधिनियम का अवयव नहीं है।अधिनियम प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं पर फोकस करता है, न कि सामान्य व्यापार निषेध या IPR पर।MRTP अधिनियम में "व्यापार व्यवहार प्रतिबंध" था, लेकिन 2002 अधिनियम ने इसे प्रतिस्पर्धा-केंद्रित बना दिया।विस्तृत पृष्ठभूमियह अधिनियम 13 जनवरी 2003 को लागू हुआ, राघवन समिति की सिफारिशों पर।उद्देश्य: बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता हित संरक्षण। CCI की स्थापना इसका संस्थागत ढांचा है।कार्टेल: उत्पादन/मूल्य नियंत्रण समझौते (धारा 3)।प्रमुख स्थिति: 30%+ बाजार हिस्सेदारी पर दुरुपयोग निषिद्ध।संयोजन: पूर्व-अनुमति जरूरी यदि संपत्ति/कारोबार ₹2000 करोड़+।अपवाद और सीमाएंIPR (पेटेंट, ट्रेडमार्क) से उत्पन्न एकाधिकार को अधिनियम प्रभावित नहीं करताक्योंकि यह नवाचार को प्रोत्साहित करता है। अधिनियम केवल बाजार दुरुपयोग रोकता है।50. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 1950 और 1990 के बीच की अवधि के लिए भारत के बारे में सही है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) कृषि द्वारा योगदान किए गए सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, लेकिन इस क्षेत्र में लगी जनसंख्या में वृद्धि नहीं हुई।(b) कृषि द्वारा योगदान किए गए सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में और इस क्षेत्र में लगी जनसंख्या में उल्लेखनीय कमी हुई।(c) कृषि द्वारा योगदान किए गए सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में उल्लेखनीय कमी हुई, लेकिन इस क्षेत्र में लगी जनसंख्या में कमी नहीं हुई।(d) कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के नाते, कृषि क्षेत्र का योगदान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उल्लेखनीय नहीं है।Correct Answer: (c) कृषि द्वारा योगदान किए गए सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में उल्लेखनीय कमी हुई, लेकिन इस क्षेत्र में लगी जनसंख्या में कमी नहीं हुई।Solution:भारत में वर्ष 1950 और वर्ष 1990 के बीच की अवधि के लिए कृषि द्वारा योगदान किए गए सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में उल्लेखनीय कमी हुईलेकिन इस क्षेत्र में लगी जनसंख्या में कमी नहीं हुई। कृषि पर निर्भर जनसंख्या वर्ष 1950 में 67.5 प्रतिशत से घटकर वर्ष 1990 तक 64.9 प्रतिशत तक ही रही।पंचवर्षीय योजनाओं का आरंभ1 इन योजनाओं ने कृषि, उद्योग और व्यापार पर फोकस किया, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र को भारी उद्योगों का नेतृत्व सौंपा गया।औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 ने उद्योगों को तीन श्रेणियों में बांटा—राज्य आरक्षित, मिश्रित और निजी क्षेत्र के लिए।कृषि क्षेत्र की प्रगतिइस अवधि में भूमि सुधारों से जमींदारी प्रथा समाप्त हुई, जिससे करीब 2 करोड़ काश्तकारों को सीधा लाभ मिला।1960 के दशक में हरित क्रांति ने गेहूं और चावल उत्पादन को बढ़ाकर भारत को खाद्यान्न आत्मनिर्भर बनाया।हालांकि, जीडीपी में कृषि का योगदान घटकर कम हो गया, लेकिन 65% जनसंख्या कृषि पर निर्भर बनी रही।औद्योगिक विकासद्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) ने भारी उद्योगों जैसे इस्पात, कोयला और मशीनरी पर जोर दियाजिससे सार्वजनिक क्षेत्र मजबूत हुआ। लाइसेंस राज ने निजी क्षेत्र को नियंत्रित कियालेकिन इससे अकुशलता और नवाचार की कमी आई।आयात प्रतिस्थापन नीति से घरेलू उत्पादन बढ़ा, पर प्रतिस्पर्धा न होने से गुणवत्ता प्रभावित हुई।चुनौतियां और आलोचनायोजनाओं ने विकास दर को औसत 3.5% (हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ) तक सीमित रखा।संरक्षित बाजार ने अकुशलता को बढ़ावा दिया, जबकि गरीबी और बेरोजगारी बनी रही।1991 के सुधारों से पहले यह अवधि नियोजित अर्थव्यवस्था का प्रतीक रही।Submit Quiz« Previous123456Next »