विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-IV

Total Questions: 58

51. निम्नलिखित में से किस घटक का उपयोग करके शुद्ध निवेश को सबसे अच्छे से व्यक्त किया जा सकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सकल निवेश-मूल्यह्रास
Solution:
  • शुद्ध निवेश प्राप्त करने के लिए सकल निवेश को मौजूदा पूंजी पर मूल्यह्रास से घटा दिया जाता है।
  • वस्तुओं और सेवाओं को उत्पन्न करने के लिए उत्पादों पर खर्च की गई कुल राशि एक सकल निवेश है।
  • शुद्ध निवेश की परिभाषा
    • कुल निवेश से मूल्यह्रास (Depreciation) को घटाने के बाद बची शुद्ध राशि को कहते हैं। यह बताता है
    • उत्पादक क्षमता में कितनी वास्तविक बढ़ोतरी हुई है। सकल निवेश पूर्ण व्यय को शामिल करता है
    • जबकि मूल्यह्रास पुरानी संपत्तियों के घिसावट या अप्रचलन को समायोजित करता है।
  • सूत्र और गणना
    • शुद्ध निवेश = सकल निवेश (Gross Investment) - मूल्यह्रास (Depreciation)।
    • सकल निवेश: एक निश्चित अवधि (जैसे एक वर्ष) में नई पूंजीगत वस्तुओं पर कुल खर्च
    • जिसमें प्रतिस्थापन और विस्तार दोनों शामिल। उदाहरण: यदि कोई कंपनी 100 करोड़ रुपये की नई मशीनें खरीदती है, तो सकल निवेश 100 करोड़।
    • मूल्यह्रास: संपत्तियों के मूल्य में समयानुसार कमी, जो घिसावट, तकनीकी अप्रचलन या अन्य कारणों से होती है। यदि मूल्यह्रास 20 करोड़ है, तो शुद्ध निवेश = 100 - 20 = 80 करोड़।
    • यह गणना पूंजी स्टॉक की वास्तविक वृद्धि को मापती है, जो आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।​
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण
    • प्रश्न में "निम्नलिखित में से" का उल्लेख है, जो सामान्यतः बहुविकल्पीय प्रश्नों में आता है। अन्य संभावित घटक गलत हैं:
    • शुद्ध निवेश - मूल्यह्रास: यह नकारात्मक मूल्य देगा, जो अर्थहीन है।​
    • क्षय मूल्य (Scrap Value): यह संपत्ति के अंतिम बिक्री मूल्य को दर्शाता है, निवेश से असंबंधित।
    • प्रतिस्थापन लागत (Replacement Cost): यह पुरानी संपत्ति बदलने की लागत है, लेकिन शुद्ध निवेश सकल से मूल्यह्रास घटाकर ही व्यक्त होता है।​
      सही विकल्प स्पष्ट रूप से सकल निवेश - मूल्यह्रास है।
  • आर्थिक महत्व
    • शुद्ध निवेश सकारात्मक होने पर पूंजी स्टॉक बढ़ता है, जो GDP वृद्धि को बढ़ावा देता है।
    • नकारात्मक होने पर पूंजीघाटा होता है। भारत जैसे विकासशील देशों में उच्च शुद्ध निवेश बुनियादी ढांचे और उद्योगों के लिए जरूरी है।
    • उदाहरण: यदि सकल निवेश 500 अरब रुपये और मूल्यह्रास 150 अरब है, तो शुद्ध निवेश 350 अरब रुपये—यह उत्पादकता में शुद्ध योगदान दर्शाता है।

52. निम्नलिखित में से किस योजना का मुख्य उद्देश्य अप्रत्याशित घटनाओं से उत्पन्न फसल हानि/क्षति से पीड़ित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान कर के कृषि क्षेत्र में स्थायी उत्पादन में सहयोग करना है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
Solution:
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 18 फरवरी, 2016 को शुरू की गई
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य अप्रत्याशित घटनाओं से उत्पन्न फसल हानि / क्षति से पीड़ित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करके कृषि क्षेत्र में स्थायी उत्पादन में सहयोग करना है।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
    • निम्नलिखित में से वह योजना जिसका मुख्य उद्देश्य अप्रत्याशित घटनाओं (जैसे प्राकृतिक आपदाएँ, कीट-रोग, सूखा, बाढ़ आदि
    • उत्पन्न फसल हानि/क्षति से पीड़ित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करके कृषि क्षेत्र में स्थायी उत्पादन को बढ़ावा देना है, वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) है।
  • योजना का परिचय
    • यह योजना 18 फरवरी 2016 को भारत सरकार द्वारा शुरू की गई थी
    • जो किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में त्वरित वित्तीय सहायता सुनिश्चित करती है।
    • इसका प्राथमिक लक्ष्य किसानों की आय को स्थिर रखना और कृषि में निरंतरता बनाए रखना है
    • वे जोखिमों के बावजूद खेती जारी रख सकें। योजना खरीफ और रबी दोनों मौसमों में लागू होती है
    • राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) तथा संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS) को प्रतिस्थापित करती है।
  • मुख्य उद्देश्य
    • अप्रत्याशित घटनाओं से फसल क्षति पर किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना, जिससे कृषि क्षेत्र में सतत उत्पादन सुनिश्चित हो।
    • खाद्य सुरक्षा, फसल विविधीकरण, कृषि प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास को बढ़ावा देना।
    • किसानों को कम प्रीमियम पर व्यापक बीमा कवरेज उपलब्ध कराना, जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें प्रीमियम का अधिकांश हिस्सा वहन करती हैं।​
  • कवरेज और दायरा
    • फसलें: सभी खाद्य फसलें, तिलहन, वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलें शामिल। कुछ क्षेत्रों में कुल फसल नुकसान (पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस) भी कवर।
    • जोखिम: रोकने योग्य कारणों (बुआई विफलता), प्राकृतिक आपदाएँ (सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि), कीट-रोग, तूफान आदि।
    • क्षेत्र: पूरे देश में लागू, लेकिन कुछ राज्यों में स्वैच्छिक। अधिसूचित क्षेत्रों में अनिवार्य।​
  • प्रीमियम संरचना
    • किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है:
    • खरीफ फसलें: 2% अधिसूचित राशि का।
    • रबी फसलें: 1.5%।
    • वाणिज्यिक/बागवानी: 5%।
    • शेष प्रीमियम (लगभग 75-90%) केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं।
    • उदाहरण: यदि बीमित राशि ₹50,000/हेक्टेयर है, तो खरीफ के लिए किसान केवल ₹1,000 देगा।​
  • दावा निपटान प्रक्रिया
    • तकनीकी आधार: रिमोट सेंसिंग (सैटेलाइट इमेजरी), ड्रोन सर्वे, स्मार्टफोन ऐप्स और फसल कटाई प्रयोग (CCE) से नुकसान का आकलन।
    • समयबद्ध भुगतान: 2 महीने के भीतर 90% दावे निपटान का लक्ष्य। 2023 तक लाखों किसानों को अरबों रुपये के दावे वितरित।
    • पोर्टल: PMFBY पोर्टल पर ट्रैकिंग।​
  • लाभ और प्रभाव
    • वित्तीय स्थिरता: किसान कर्ज के जाल से बचते हैं, आत्महत्या दर कम।
    • उत्पादन वृद्धि: जोखिम कम होने से नई फसलें अपनाने का साहस।
    • आंकड़े: 2016-2024 तक 50 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित, ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक दावे। 2025-26 बजट में मजबूती के लिए विस्तार।
    • स्थानीय प्रभाव (हरियाणा, कैथल): गन्ना, धान जैसी फसलों पर बाढ़/सूखे से सुरक्षा।

53. कार की बिक्री के परिणामस्वरूप ....... [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) जीडीपी में वृद्धि
Solution:
  • कारों की बिक्री का परिणाम 'जीडीपी में वृद्धि' को दर्शाता है। भारत में जीडीपी में सेवा क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान है।
  • जीडीपी एक वर्ष में एक राष्ट्र की सीमा के भीतर सभी अंतिम माल और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
  • GDP पर प्रभाव
    • उपभोक्ता द्वारा कार खरीदने पर यह C (खपत व्यय) घटक के तहत गिना जाता है, जिससे समग्र GDP बढ़ता है।​
    • भारत जैसे देशों में ऑटो सेक्टर GDP का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह रोजगार, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को प्रोत्साहित करता है।​
  • हालिया बाजार रुझान
    • 2025 में भारत में कार बिक्री ने रिकॉर्ड तोड़ा, लगभग 46 लाख यूनिट्स रिटेल बिक्री के साथ, जो पिछले साल से 10.5% अधिक थी।​
    • दिसंबर 2025 में 3.99 लाख यूनिट्स की थोक बिक्री हुई
    • जो साल-दर-साल 26.8% की छलांग थी, मुख्यतः टैक्स कटौती (SUV पर 50% से 40%, छोटी कारों पर 28% से 18%) के कारण।
    • SUV और EV सेगमेंट ने ग्रोथ ड्राइव की, जैसे मारुति ब्रेज़ा ने दिसंबर में 17,704 यूनिट्स बेचीं।
  • आर्थिक संकेतक
    • कार बिक्री उपभोक्ता विश्वास, आय स्तर और ब्याज दरों को दर्शाती है।
    • उच्च बिक्री आर्थिक विकास का संकेत है, जबकि गिरावट मंदी की चेतावनी देती है।​
    • 2025 में 5% कुल वृद्धि हुई, जो 2024 के 4.2% से बेहतर रही, टैक्स राहत और त्योहारी मांग से।​
  • अन्य परिणाम
    • रोजगार सृजन: ऑटो उद्योग लाखों नौकरियां देता है, डीलरशिप से फैक्ट्रियों तक।
    • आपूर्ति श्रृंखला बूस्ट: स्टील, टायर, बैटरी आदि क्षेत्रों में मांग बढ़ती है।​
    • सरकारी राजस्व: GST, रोड टैक्स से आय बढ़ती है।
    • पर्यावरण प्रभाव: EV बिक्री से उत्सर्जन कम होता है, लेकिन पेट्रोल/डीजल कारें प्रदूषण बढ़ा सकती हैं।

54. व्यापार मुद्दों में टैरिफ (प्रशुल्क) और कोटा का इस्तेमाल ....... के लिए किया जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) घरेलू कंपनियों को संरक्षित करने
Solution:
  • व्यापार मुद्दों में टैरिफ (प्रशुल्क) और कोटा का इस्तेमाल 'घरेलू कंपनियों को संरक्षित करने' के लिए किया जाता है।
  • टैरिफ एक कर या शुल्क है, जो आयतित या निर्यातित वस्तुओं पर लगाया जाता है, जबकि कोटा माल की मात्रा या मूल्य पर एक प्रतिबंध है।
  • टैरिफ क्या है?
    • इससे घरेलू उत्पाद सस्ते लगते हैं और उपभोक्ता उन्हें अधिक पसंद करते हैं।
    • उदाहरण के लिए, यदि कोई देश विदेशी स्टील पर उच्च टैरिफ लगाता है
    • तो स्थानीय स्टील उद्योग को प्रतिस्पर्धा में लाभ मिलता है।
  • कोटा क्या है?
    • कोटा आयात या निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की अधिकतम मात्रा या मूल्य पर सरकारी प्रतिबंध है।
    • यह एक निश्चित समय में आयात की सीमा तय करता है, जिससे घरेलू बाजार में विदेशी सामान की बाढ़ न आए।
    • जैसे, यदि भारत चीनी पर 10,000 टन का कोटा लगाए, तो इससे अधिक आयात नहीं हो सकता।
  • इनका मुख्य उद्देश्य
    • ये उपकरण व्यापार संरक्षणवाद (Protectionism) का हिस्सा हैं
    • जो स्थानीय उद्योगों, नौकरियों और आर्थिक स्थिरता की रक्षा करते हैं।
    • नवोदित उद्योगों (Infant Industries) को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी। इसके अलावा, टैरिफ से सरकार को राजस्व भी मिलता है।
  • फायदे
    • घरेलू उद्योगों का समर्थन: सस्ते आयात से बचाव, रोजगार संरक्षण।
    • आर्थिक स्वावलंबन: स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा।​
    • राजनीतिक लाभ: व्यापार वार्ताओं में सौदेबाजी का हथियार।
  • नुकसान
    • उपभोक्ताओं पर बोझ: कीमतें बढ़ती हैं।​
    • अक्षमता: घरेलू उद्योग सुधार न करें तो लंबे समय में हानि।​
    • व्यापार युद्ध: अन्य देश जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।​
  • टैरिफ कोटा (TRQ) की अवधारणा
    • टैरिफ-रेट कोटा (Tariff-Rate Quota) में कोटा सीमा के अंदर कम या शून्य टैरिफ, उसके बाद उच्च टैरिफ लगता है।
    • यह WTO नियमों के अनुरूप है और जीएटीटी में प्राथमिकता दी जाती है।

55. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन दो सेक्टर मॉडल के बारे में सत्य नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) सरकारी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Solution:
  • दो-सेक्टर मॉडल या परिपत्र प्रवाह मॉडल अर्थव्यवसथा में एक बुनियादी मॉडल है। इसमें दो क्षेत्र शामिल होते हैं।
  • दिए गए विकल्पों में सरकारी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कथन गलत है।
  • मॉडल का परिचय
    • वहीं, लुईस मॉडल (1954) विकासशील देशों के लिए है
    • जहां पारंपरिक कृषि क्षेत्र (Traditional/Subsistence Sector) और आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (Modern/Capitalist Sector) होते हैं।
    • यहां अतिरिक्त श्रम कृषि से उद्योग की ओर स्थानांतरित होता है बिना कृषि उत्पादकता प्रभावित किए, जिससे औद्योगिक विकास संभव होता है।
  • प्रमुख सत्य कथन
    • निम्नलिखित कथन दो सेक्टर मॉडल (विशेषकर मैक्रो वाले) के बारे में सत्य हैं:
    • यह एक बंद अर्थव्यवस्था मानता है, क्योंकि विदेशी क्षेत्र शामिल नहीं होता।​
    • अर्थव्यवस्था को केवल घरेलू (Households) और फर्म (Firms) क्षेत्रों तक सीमित करता है; सरकार या बैंकिंग क्षेत्र नजरअंदाज होते हैं।​
    • पूर्ण रोजगार (Full Employment) का मान्यता देता है, अर्थात सभी संसाधन पूर्ण उपयोग में होते हैं।
    • यह Keynesian क्रॉस मॉडल का आधार बनाता है, जहां संतुलन Y = C + I (उपभोग + निवेश) से निर्धारित होता है।
    • लुईस मॉडल में कृषि क्षेत्र में शून्य सीमांत उत्पादकता (Zero Marginal Productivity of Labor) होती है।​
    • ये कथन मॉडल की सरलता और धारणाओं पर आधारित हैं।​
  • सत्य नहीं होने वाले सामान्य कथन
    • "दो-क्षेत्रीय मॉडल एक खुली अर्थव्यवस्था (Open Economy) मानता है।"
    • यह असत्य है। मॉडल स्पष्ट रूप से बंद अर्थव्यवस्था पर आधारित है
    • क्योंकि विदेशी व्यापार (Exports/Imports) या विदेशी क्षेत्र को शामिल नहीं किया जाता।
    • विदेशी क्षेत्र तीन-सेक्टर मॉडल में आता है।
  • अन्य संभावित असत्य कथन:
    • "इसमें सरकारी क्षेत्र शामिल है।" असत्य, क्योंकि सरल मॉडल में केवल दो निजी क्षेत्र होते हैं।​
    • "यह आंशिक रोजगार मानता है।" असत्य; पूर्ण रोजगार धारणा है।
    • लुईस मॉडल के संदर्भ में: "श्रम स्थानांतरण से कृषि उत्पादकता अवश्य घटती है।" असत्य, क्योंकि अतिरिक्त श्रम की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है।​
  • मॉडल के लाभ और सीमाएं
  • लाभ:
    • सरलता: जटिल अर्थव्यवस्था को समझने में आसान।
    • नीति विश्लेषण: निवेश या उपभोग परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन।
    • आधारभूत: तीन/चार सेक्टर मॉडल इसी पर बनते हैं।
  • सीमाएं:
    • अवास्तविक: वास्तविक अर्थव्यवस्थाओं में सरकार, विदेशी व्यापार महत्वपूर्ण हैं।
    • पूर्ण रोजगार धारणा: मंदी की स्थिति में गलत।
    • लुईस मॉडल में: विकासशील देशों में श्रम अतिरिक्त हमेशा उपलब्ध नहीं।​
  • गणितीय प्रतिनिधित्व (सरल मैक्रो मॉडल)
  • संतुलन: 
    • जहां  (उपभोग फलन),  (स्वतंत्र निवेश)।
    • संतुल्यक आय: , जहां c सीमांत उपभोग प्रवृत्ति है।
    • यह मॉडल गुणक (Multiplier) प्रभाव दिखाता है: 。​
  • भारतीय संदर्भ
    • भारत जैसे विकासशील देश में लुईस मॉडल प्रासंगिक है
    • जहां ग्रामीण कृषि से शहरी उद्योगへ श्रम移行 हुआ।
    • महालनोबिस टू-सेक्टर मॉडल (1953) भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना का आधार बना, जिसमें भारी उद्योग और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र थे।​

56. बहुराष्ट्रीय निगमों (MNCs) द्वारा विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश के माध्यम से देशों के बीच एकीकरण क्या है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) भूमंडलीकरण
Solution:
  • बहुराष्ट्रीय निगमों (MNCs) द्वारा विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश के माध्यम से देशों के बीच एकीकरण को भूमंडलीकरण कहते हैं।
  • भारत में वर्ष 1991 में अपनाई गई नई आर्थिक नीति के साथ वैश्वीकरण की शुरुआत हुई।
  • वैश्वीकरण की परिभाषा
    • यह प्रक्रिया देशों की अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों और समाजों को आपस में जोड़ती है
    • जहां MNCs प्रमुख भूमिका निभाते हैं। विदेशी व्यापार (निर्यात-आयात) बाजारों को एकीकृत करता है
    • जबकि विदेशी निवेश (जैसे FDI) पूंजी, तकनीक और उत्पादन को विभिन्न देशों में फैलाता है।
    • यह सूचना प्रौद्योगिकी और परिवहन के विकास से तेज हुआ, जिससे अर्थव्यवस्थाएं परस्पर निर्भर हो गईं।​
  • MNCs की भूमिका
    • बहुराष्ट्रीय निगम वे कंपनियां हैं जिनकी शाखाएं कई देशों में होती हैं, जैसे Apple, Nike या McDonald's।
    • वे सस्ते श्रम और कच्चे माल वाले देशों (जैसे चीन, भारत, वियतनाम) में उत्पादन इकाइयां स्थापित करती हैं
    • जो स्थानीय कंपनियों को खरीदकर या साझेदारी से बढ़ती हैं।
    • उदाहरण: Nike जूते इंडोनेशिया में बनवाती है ताकि लागत कम हो, फिर वैश्विक बाजार में बेचती है।​
  • विदेशी व्यापार का योगदान
    • विदेशी व्यापार देशों के बाजारों को जोड़ता है—एक देश दूसरे से सामान बेचता या खरीदता है।​
    • यह तुलनात्मक लाभ पर आधारित है: हर देश अपनी मजबूती (जैसे भारत का सॉफ्टवेयर) का उपयोग करता है।
    • MNCs निर्यात बढ़ाते हैं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में देशों को शामिल करते हैं।
    • परिणाम: अधिक व्यापार से रोजगार बढ़ता है, लेकिन आयात बढ़ने से स्थानीय उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।​
  • विदेशी निवेश के तरीके
    • MNCs मुख्यतः प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करती हैं—कारखाने लगाना, संयुक्त उद्यम या स्थानीय फर्म खरीदना।
    • फायदे: तकनीक हस्तांतरण, आधारभूत ढांचा विकास (सड़कें, बंदरगाह), और नए बाजार।
    • Coca-Cola 200+ देशों में सक्रिय है, जो आर्थिक मंदी से बचाव देता है।
    • चुनौतियां: लाभ हेराफेरी (ट्रांसफर प्राइसिंग) से कर चोरी, और पर्यावरण क्षति।​
  • भारत में प्रभाव
    • भारत में 1991 के उदारीकरण के बाद MNCs बढ़ीं—FDI से IT, ऑटो सेक्टर उभरे।
    • सकारात्मक: रोजगार (जैसे Infosys के साथ Google), निर्यात वृद्धि। नकारात्मक: छोटे उद्योगों का विस्थापन, असमान विकास।​
    • वर्तमान में (2026 तक), MNCs आधारभूत संरचना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही हैं।

57. बाजार मूल्य पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है- [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) बाजार मूल्य पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद - मूल्यह्रास
Solution:
  • बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPmp) में से मूल्यह्रास को घटाने पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPmp) प्राप्त होता है। NNPmp = GNPmp - मूल्यह्रास
  • परिभाषा
    • बाजार मूल्य पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है: बाजार मूल्य पर शुद्ध घरेलू उत्पाद + विदेश से शुद्ध आय।
    • यह देश के निवासियों द्वारा उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य है
    • जिसमें उत्पादन प्रक्रिया के दौरान पूंजी संपत्तियों (जैसे मशीनरी) के मूल्यह्रास को घटा दिया जाता है
    • विदेशी आय को शामिल किया जाता है। बाजार मूल्य का अर्थ है वस्तुओं व सेवाओं का वह मूल्य जो बाजार में वास्तविक लेन-देन के दौरान प्राप्त होता है
    • जिसमें अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं लेकिन सब्सिडी को घटाया नहीं जाता।
    • यह सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) से भिन्न है, क्योंकि GNP में मूल्यह्रास घटाया नहीं जाता, जबकि NNP वास्तविक शुद्ध उत्पादन को प्रतिबिंबित करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि किसी देश का GNP 1000 अरब रुपये है और मूल्यह्रास 100 अरब रुपये है, तो NNP 900 अरब रुपये होगा।
  • गणना का सूत्र
    • बाजार मूल्य पर NNP की गणना निम्नलिखित सूत्रों से की जाती है:
    • NNP_{MP} = NDP_{MP} + विदेश से शुद्ध आय
    • जहाँ NDP_{MP} = GDP_{MP} - मूल्यह्रास।​
    • वैकल्पिक रूप से: NNP_{MP} = GNP_{MP} - मूल्यह्रास।​
  • यहाँ:
    • GDP_{MP}: सकल घरेलू उत्पाद बाजार मूल्य पर (देश की सीमा में उत्पादित कुल मूल्य)।
    • GNP_{MP}: सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GDP + विदेश से शुद्ध आय)।
    • मूल्यह्रास: पूंजी के घिसावट या क्षय का अनुमानित मूल्य।
    • विदेश से शुद्ध आय: देश के निवासियों द्वारा विदेश में अर्जित आय माइनस विदेशियों द्वारा देश में अर्जित आय।
  • महत्वपूर्ण घटक
    • मूल्यह्रास (Depreciation): उत्पादन में प्रयुक्त निश्चित पूंजी (मशीनें, भवन) का उपयोग से होने वाला मूल्यह्रास।
    • यह NNP को GNP से अलग करता है, क्योंकि यह वास्तविक शुद्ध योगदान को मापता है।​
    • बाजार मूल्य बनाम लागत मूल्य: बाजार मूल्य में अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं, जबकि लागत मूल्य (Factor Cost) में इन्हें घटाया जाता है।
    • NNP को कभी-कभी Factor Cost पर भी व्यक्त किया जाता है: NNP_{FC} = NNP_{MP} - अप्रत्यक्ष कर + सब्सिडी।​
    • राष्ट्रीय बनाम घरेलू: NNP राष्ट्रीय है क्योंकि इसमें विदेशी कारक आय शामिल होती है, जबकि NDP केवल घरेलू सीमा तक सीमित है।​
  • उदाहरण
    • मान लीजिए भारत का GDP_{MP} 200 लाख करोड़ रुपये है
    • मूल्यह्रास 10 लाख करोड़ रुपये, विदेश से शुद्ध आय 5 लाख करोड़ रुपये।
    • NDP_{MP} = 200 - 10 = 190 लाख करोड़।
    • NNP_{MP} = 190 + 5 = 195 लाख करोड़ रुपये।
    • यह आंकड़ा देश की वास्तविक आय को दर्शाता है
    • जो नीति-निर्माण, जैसे बजट आवंटन या विकास योजनाओं में उपयोगी होता है।
  • आर्थिक महत्व
    • NNP बाजार मूल्य पर राष्ट्रीय आय का एक विश्वसनीय माप है क्योंकि यह पूंजी के रखरखाव को ध्यान में रखता है।
    • यह सकल संकेतकों (GNP/GDP) से बेहतर है, क्योंकि मूल्यह्रास घटाने से अतिरिक्त उत्पादन का भ्रम नहीं होता।
    • विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में यह निवेश निर्णयों के लिए उपयोगी है।
    • हालांकि, यह मुद्रास्फीति या आय असमानता को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता।

58. निम्नलिखित में से कौन-सा, व्यवसाय के वैश्वीकरण का प्रेरक कारक है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) घरेलू बाजार की संतृप्ति
Solution:
  • 'घरेलू बाजार की संतृप्ति' व्यवसाय के वैश्वीकरण का प्रेरक कारक है। बाजार संतृप्ति तब होती है
  • जब उत्पाद किसी विशिष्ट बाजार या उद्योग में अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुंच जाता है।
  • प्रेरक कारक की व्याख्या
    •  इससे मूल्य युद्ध शुरू हो जाते हैं, लाभ मार्जिन घटते हैं, और उत्पादों को अलग दिखाने में कठिनाई होती है।
    • व्यवसाय वैश्विक विस्तार के माध्यम से नए बाजारों में प्रवेश कर लाभ बढ़ाने और टिकाऊ वृद्धि सुनिश्चित करते हैं।​
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण
    • सवाल अक्सर बहुविकल्पीय होता है, जैसे:
    • मेजबान देश में सस्ते कच्चे माल की उपलब्धता: यह आकर्षण का कारक (pull factor) है, प्रेरक (push factor) नहीं।
    • मेजबान अर्थव्यवस्थाओं में उच्च रिटर्न दर: यह भी विदेशी बाजारों का आकर्षण दर्शाता है।​
    • मेजबान देश में सस्ते श्रम की उपलब्धता: उत्पादन लागत कम करने के लिए pull factor।​
  • वैश्वीकरण के व्यापक प्रेरक कारक
    • व्यवसाय वैश्वीकरण को कई कारक प्रेरित करते हैं:
    • तकनीकी प्रगति: इंटरनेट, लॉजिस्टिक्स और संचार ने सीमाओं को मिटा दिया।
    • व्यापार उदारीकरण: टैरिफ कम होना और WTO जैसे समझौते।
    • बाजार अवसर: उभरते बाजारों में उपभोक्ता मांग बढ़ना।​
    • आर्थिक चक्र: मंदी या जीवनचक्र के अंतिम चरण में घरेलू बाजार संकुचन।​
    • संसाधन और प्रतिस्पर्धा: सस्ते संसाधन, कुशल श्रम या उच्च मांग की तलाश।
    • ये कारक व्यवसायों को अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए मजबूर करते हैं, जैसे भारत में टाटा समूह का यूके में विस्तार।​
  • प्रभाव और उदाहरण
    • घरेलू संतृप्ति से प्रेरित होकर कंपनियां जैसे कोका-कोला या ऐप्पल ने वैश्विक बाजारों में विस्तार किया, जिससे राजस्व बढ़ा।
    • भारत में 1991 के उदारीकरण के बाद कई फर्में विदेश गईं।
    • हालांकि, चुनौतियां जैसे सांस्कृतिक अंतर और जोखिम भी आते हैं। वैश्वीकरण ने नौकरियां बढ़ाईं लेकिन असमानता भी।