Correct Answer: (c) खान अब्दुल गफ्फार खान
Solution:- खान अब्दुल गफ्फार खान उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) के पठानों के बीच खुदाई खिदमतगार ('ईश्वर के सेवक') नामक एक शक्तिशाली अहिंसक आंदोलन के संस्थापक थे।
- इस आंदोलन की शुरुआत 1929 में हुई थी।
- खान अब्दुल गफ्फार खान को उनकी अहिंसक विचारधारा के कारण 'सीमांत गांधी' के नाम से जाना जाता था।
- इस आंदोलन के सदस्य लाल रंग की शर्ट पहनते थे, इसलिए इसे 'लाल कुर्ती' आंदोलन भी कहा जाता था।
- यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा पर आधारित एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय आंदोलन था।
- उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (अब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के आसपास) के पठानों के बीच एक शक्तिशाली अहिंसक आंदोलन, खुदाई खिदमतगार का संस्थापक खान अब्दुल गफ्फार खान थे।
- इन्हें "सरहदी गांधी" (सीमांत गांधी) और "बाचा खान" के नाम से भी जाना जाता है।
- "ईश्वर के सेवक"। यह आंदोलन महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलन से प्रेरित था और इसका उद्देश्य था
- ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसा के जरिए स्वतंत्रता संग्राम को आगे बढ़ाना तथा पठान समाज में शिक्षा का प्रचार करना, रक्त-प्रतिशोध की परंपरा को समाप्त करना और सामाजिक सुधार लाना।
- इस आंदोलन ने लाल क़मीज़ के नाम से भी प्रसिद्धि पाई क्योंकि आंदोलनकारी लाल कुर्तियां पहनते थे।
- खुदाई खिदमतगार आंदोलन ने ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ न तो हथियार उठाए और न ही हिंसा की नीति अपनाई।
- इसके चलते 23 अप्रैल 1930 को क़िस्सा ख्वानी बाजार नरसंहार हुआ जब ब्रिटिश सेना ने अहिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई।
- खान अब्दुल गफ्फार खान महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी थे और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अहिंसा और सेवा की नीति के लिए तहे दिल से काम करते थे।
- वे पश्तूनों के बीच गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांतों को फैलाने वाले प्रमुख नेता थे और उन्हें "फ्रंटियर गांधी" भी कहा जाता था।
- इस आंदोलन का राजनीतिक महत्व भी था, क्योंकि यह उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में ब्रिटिश वर्चस्व को चुनौती देने वाला बड़ा अहिंसक आंदोलन था
- यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में उभरा। खान अब्दुल गफ्फार खान ने आज़ादी के बाद भी भारत-पाकिस्तान के विभाजन का कड़ा विरोध किया और सम्प्रदायिक सौहार्द और एकता के पक्षधर रहे।
- इस प्रकार, उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत के पठानों के बीच खुदाई खिदमतगार आंदोलन के संस्थापक और नेता खान अब्दुल गफ्फार खान थे
- जिन्होंने अहिंसात्मक तरीके से अंग्रेजों के खिलाफ एक प्रभावी स्वतंत्रता संग्राम का मार्ग प्रशस्त किया.