Correct Answer: (b) तुर्की में इस्लामी खिलाफत की रक्षा के लिए
Solution:- भारत में खिलाफत आंदोलन तुर्की के सुल्तान (जो इस्लामी दुनिया का खलीफा भी था) को प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश शक्तियों द्वारा हटाए जाने के विरोध में शुरू हुआ था।
- इसका उद्देश्य तुर्की में इस्लामी खिलाफत की रक्षा और बहाली के लिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालना था।
- भारत में इस आंदोलन का नेतृत्व अली बंधुओं (मौलाना मुहम्मद अली और शौकत अली) ने किया और महात्मा गांधी ने इसे असहयोग आंदोलन से जोड़कर हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया।
- खिलाफत आंदोलन भारत में 1919 में शुरू हुआ था। यह आंदोलन मुख्य रूप से भारतीय मुसलमानों द्वारा ब्रिटिश सरकार की तुर्की के खिलाफ नीतियों और प्रथम विश्व युद्ध के बाद ओटोमन साम्राज्य के विघटन के विरोध में किया गया था।
- ओली बंदुओं (अली भाइयों), मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, अजमल खान, और हसरत मोहानी के नेतृत्व में अखिल भारतीय खिलाफत समिति का गठन किया गया
- जिसका उद्देश्य तुर्की के खलीफा के धार्मिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना था, जिन्हें मुसलमानों का धार्मिक नेता माना जाता था।
- यह आंदोलन 1919 से लेकर 1924 तक चला और इसका उद्देश्य था कि ब्रिटिश सरकार तुर्की के खलीफा के अधिकारों को बनाए रखे, विशेषकर मुस्लिम पवित्र स्थलों पर।
- इसके अलावा यह आंदोलन हिंदू-मुस्लिम एकता को भी बढ़ावा देने वाला था।
- महात्मा गांधी ने इस आंदोलन का समर्थन किया और इसे असहयोग आंदोलन के साथ जोड़कर भारत में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध के रूप में इसे विकसित किया।
- आंदोलन के दौरान ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार, सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और अदालतों का बहिष्कार किया गया, तथा सरकारी पदों तथा उपाधियों का त्याग किया गया।
- खिलाफत आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक नई ऊर्जा और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया
- लेकिन 1924 में तुर्की में खलीफा की संस्था के समाप्त हो जाने के बाद यह आंदोलन समाप्त हो गया।
- आंदोलन की समाप्ति के बावजूद, यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है
- क्योंकि इसने असहयोग आंदोलन को मजबूती दी और भारतीय जनता को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एकजुट किया.