विविध (आधुनिक भारतीय इतिहास)

Total Questions: 51

31. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान, निम्नलिखित में से कौन-सी घटना सबसे पहले हुई थी? [CGL (T-I) 13 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) बंगाल का विभाजन
Solution:
  • इन घटनाओं का क्रम इस प्रकार है:
  • बंगाल का विभाजन: 1905
  • खेड़ा सत्याग्रह: 1918
  • साइमन कमीशन का आगमन: 1928
  • दांडी यात्रा: 1930
  • अतः बंगाल का विभाजन सबसे पहले हुआ था।
  •  यह भारत सरकार अधिनियम, 1919 की समीक्षा करने के लिए भारत आया था।
  •  इसे श्वेत आयोग कहा गया क्योंकि इसमें कोई भारतीय प्रतिनिधि शामिल नहीं था।
  • इसका कांग्रेस और अन्य दलों ने बहिष्कार किया था।
  •  गांधीजी ने 1918 में गुजरात के खेड़ा में उन किसानों के समर्थन में सत्याग्रह शुरू किया जो फसलों की विफलता के कारण भूमि कर का भुगतान करने में सक्षम नहीं थे।
  • उन्होंने 12 मार्च 1930 से 6 अप्रैल 1930 तक गुजरात तट पर साबरमती आश्रम से दांडी तक दांडी मार्च को नमक सत्याग्रह के रूप में भी जाना।
  • दांडी में भारतीयों द्वारा समुद्र के जल को उबालकर नमक बनाया जाता था।
  •  240 मील (340 किमी) चलने वाले 78 लोग थे, जिसमें 24 दिन लगे। 6 अप्रैल 1930 को सुबह 6:30 बजे गांधीजी ने बिना कर चुकाए समुद्र से नमक उठाया और सविनय आज्ञाकारिता आंदोलन शुरू किया।
  •  लार्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल विभाजन की शुरुआत की थी।
  • उन्होंने जुलाई 1905 में बंगाल के विभाजन का आदेश जारी किया और विभाजन अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ।
  • अतः, बंगाल का विभाजन वह घटना थी जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान सबसे पहले हुई थी।
  • भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान सबसे पहली महत्वपूर्ण घटना 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम या सिपाही विद्रोह था।
  • यह विद्रोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहला संगठित और व्यापक स्तर पर हुआ था, जिसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत माना जाता है।
  • यह 10 मई 1857 को मेरठ में शुरू हुआ और फिर दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, झांसी आदि जगहों तक फैल गया। इस विद्रोह का मुख्य कारण ब्रिटिश सरकार की अन्यायपूर्ण नीतियां और भारतीय सैनिकों के साथ दुर्व्यवहार थे
  • जिससे जनता में ब्रिटिश शासकों के खिलाफ गहरा विरोध उत्पन्न हुआ। हालांकि यह विद्रोह सफल नहीं हुआ, लेकिन इसने भारतीय समाज में स्वतंत्रता संग्राम की सशक्त नींव रखी और आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय आंदोलन को गति प्रदान की.​
  • भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत 19वीं सदी के उत्तरार्ध में हुई, जब विभिन्न हिस्सों में ब्रिटिश अत्याचार और शोषण के विरुद्ध आवाजें उठने लगीं।
  • 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) की स्थापना हुई, जो भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों और हितों की रक्षा का एक बड़ा मंच बना।
  • इसके बाद विभिन्न आंदोलनों का दौर चला जैसे- स्वदेशी आंदोलन, होम रूल आंदोलन (1916), चंपारण सत्याग्रह (1917), खेड़ा सत्याग्रह (1917), असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930), भारत छोड़ो आंदोलन (1942) आदि।
  • इन आंदोलनों ने भारतीयों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्वराज की दिशा में मजबूत किया.​
  • संक्षेप में, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की पहली घटना 1857 का विद्रोह था, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहला व्यापक संगठित विद्रोह था।
  • इसके बाद कांग्रेस की स्थापना और धीरे-धीरे विभिन्न अहिंसात्मक और सशक्त आंदोलनों के माध्यम से भारत ने स्वतंत्रता की ओर कदम बढ़ाए.​

32. निम्नलिखित में से किस नेता ने बारदोली सत्याग्रह का नेतृत्व किया था? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 01 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) वल्लभभाई पटेल
Solution:
  • बारदोली सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ था। यह एक प्रमुख किसान आंदोलन था
  • जिसका नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया था। इस आंदोलन की सफलता के बाद बारदोली की महिलाओं ने पटेल को 'सरदार' की उपाधि प्रदान की।
  • बारदोली सत्याग्रह का पृष्ठभूमि
    • जब ब्रिटिश प्रांतीय सरकार ने अकाल और बाढ़ प्रभावित किसानों पर लगान (भूमि राजस्व) में 22% से 30% तक की वृद्धि कर दी।
    • किसानों ने इस अन्याय के खिलाफ अहिंसक सत्याग्रह का सहारा लिया और लगान न चुकाने का संकल्प लिया। महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में शुरू हुआ
    • यह आंदोलन पटेल के नेतृत्व में संगठित रूप ले लिया।​
  • सरदार पटेल की भूमिका
    • वल्लभभाई पटेल ने 4 फरवरी 1928 को सत्याग्रह का नेतृत्व संभाला, किसानों को एकजुट किया, सरकार को पत्र लिखा और अहिंसक प्रतिरोध की रणनीति अपनाई।
    • उन्होंने किसानों का मनोबल ऊंचा रखा, संगठन बनाया तथा महिलाओं को भी आंदोलन में शामिल किया।
    • पटेल के कुशल नेतृत्व से आंदोलन सफल रहा, सरकार को लगान वृद्धि वापस लेनी पड़ी और इसे घटाकर 6.03% कर दिया गया।​
  • परिणाम और महत्व
    • सत्याग्रह की जीत के बाद बारदोली की महिलाओं ने पटेल को "सरदार" की उपाधि दी, जो उनके मजबूत नेतृत्व का प्रतीक बनी।
    • इसने पटेल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में किसान आंदोलनों को मजबूती प्रदान की।
    • पटेल बाद में भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बने, जिन्हें "आयरन मैन ऑफ इंडिया" कहा गया।​
    • बारदोली सत्याग्रह का नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया था।​
  • बारदोली सत्याग्रह का पृष्ठभूमि
    • यह आंदोलन 1928 में गुजरात के बारदोली क्षेत्र में शुरू हुआ, जब ब्रिटिश प्रांतीय सरकार ने अकाल और बाढ़ प्रभावित किसानों पर लगान (भूमि राजस्व) में 22% से 30% तक की वृद्धि कर दी।
    • किसानों ने इस अन्याय के खिलाफ अहिंसक सत्याग्रह का सहारा लिया और लगान न चुकाने का संकल्प लिया।
    • महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह आंदोलन पटेल के नेतृत्व में संगठित रूप ले लिया।​
  • सरदार पटेल की भूमिका
    • वल्लभभाई पटेल ने 4 फरवरी 1928 को सत्याग्रह का नेतृत्व संभाला, किसानों को एकजुट किया, सरकार को पत्र लिखा और अहिंसक प्रतिरोध की रणनीति अपनाई।
    • उन्होंने किसानों का मनोबल ऊंचा रखा, संगठन बनाया तथा महिलाओं को भी आंदोलन में शामिल किया।
    • पटेल के कुशल नेतृत्व से आंदोलन सफल रहा, सरकार को लगान वृद्धि वापस लेनी पड़ी और इसे घटाकर 6.03% कर दिया गया।​
  • परिणाम और महत्व
    • सत्याग्रह की जीत के बाद बारदोली की महिलाओं ने पटेल को "सरदार" की उपाधि दी, जो उनके मजबूत नेतृत्व का प्रतीक बनी।
    • इसने पटेल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में किसान आंदोलनों को मजबूती प्रदान की।
    • पटेल बाद में भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बने, जिन्हें "आयरन मैन ऑफ इंडिया" कहा गया।​

33. बारदोली आंदोलन कब शुरू हुआ था? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 1928
Solution:
  • बारदोली सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ था।
  • यह एक प्रमुख किसान आंदोलन था, जिसका नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया था।
  • इस आंदोलन की सफलता के बाद बारदोली की महिलाओं ने पटेल को 'सरदार' की उपाधि प्रदान की।
  • विशेष रूप से 18 जून 1928 को गुजरात के बारदोली तालुका में सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में।
  • यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार द्वारा लगान में 22% से 30% तक की वृद्धि के खिलाफ किसानों का अहिंसात्मक विरोध था।​​
  • पृष्ठभूमि
    • 1922 में मेड़ता बंधुओं (कल्याणजी और कुंवरजी) तथा दयालजी के नेतृत्व में प्रारंभिक विरोध शुरू हुआ
    • लेकिन 1928 में आर्थिक संकट के कारण किसानों ने पटेल से नेतृत्व की अपील की।
    • पटेल ने 4 फरवरी 1928 को औपचारिक रूप से नेतृत्व संभाला और सरकार को लगान वृद्धि रद्द करने का पत्र लिखा, जो अनुत्तरित रहा।
    • किसानों ने गांधीजी से अहिंसा का वादा किया और पटेल ने उन्हें संपत्ति जब्ती व कारावास जैसे जोखिमों से अवगत कराया।​
  • आंदोलन की विशेषताएं
    • आंदोलन अहिंसात्मक सत्याग्रह पर आधारित था, जिसमें किसानों ने लगान न चुकाने का फैसला किया।
    • बारदोली किसान सभा का गठन हुआ और महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
    • पूरे देश से समर्थन मिला, जिससे ब्रिटिश दमनकारी नीतियां अपनानी पड़ीं।​
  • परिणाम और प्रभाव
    • आंदोलन की सफलता पर सरकार ने लगान वृद्धि रद्द कर दी, और पटेल को 'सर्वोदय पुरुष' या 'सारदार' की उपाधि मिली।
    • इसने सविनय अवज्ञा आंदोलन की नींव रखी और राष्ट्रीय स्तर पर किसान आंदोलनों को प्रेरित किया।
    • यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक संगठित व सफल अध्याय साबित हुआ।

34. निम्नलिखित में से किसने महात्मा गांधी के साथ पूना समझौते पर हस्ताक्षर किए थे? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भीमराव अंबेडकर
Solution:
  • पूना समझौते पर महात्मा गांधी और भीमराव अंबेडकर ने सितंबर 1932 में हस्ताक्षर किए थे।
  • यह समझौता दलितों (अवसादग्रस्त वर्ग) के लिए पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) के बजाय आरक्षित सीटों (Reserved Seats) की व्यवस्था पर केंद्रित था
  • जिसे गांधीजी के अनिश्चितकालीन उपवास के कारण स्वीकार किया गया था।
  •  भीमराव अंबेडकर :-
    •  पूना समझौता दलित समुदाय के नेताओं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच एक समझौता था।
    •  इसका उद्देश्य प्रांतीय विधान परिषदों में दलितों के लिए आरक्षित सीटें सुरक्षित करना था।
  •  पूना समझौता :-
    • यह सितंबर 1932 में ब्रिटिश भारत के संदर्भ में दलित समुदाय (जिसे पहले "'अछूत' कहा जाता था) के नेताओं और उच्च जाति के हिंदू समुदाय के नेताओं के बीच
      हुए एक समझौते को संदर्भित करता है।
    • दलित अधिकारों और राजनीतिक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व के लिए आंदोलन के दौरान यह समझौता एक महत्वपूर्ण विकास था।
      Other Information
  •  चितरंजन दास :-
    •  वह एक बंगाली वकील और राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    •  वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रमुख सदस्य थे और उन्होंने स्वराज पार्टी की स्थापना की।
  • ज्योतिबा फुले :-
    •  वह एक समाज सुधारक और कार्यकर्ता थे, जिन्होंने महाराष्ट्र में दलित और महिला समुदायों के उत्थान के लिए काम किया।
    •  उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की और उन्हें भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन के अग्रदूतों में से एक माना जाता है।
  • अली ब्रदर्स :-
    •  इसमें मुहम्मद अली जिन्ना और शौकत अली शामिल हैं, ये प्रमुख मुस्लिम नेता थे जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
    •  उन्होंने 1906 में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना की और एक अलग मुस्लिम राज्य के निर्माण की वकालत की, जिसके परिणामस्वरूप अंततः पाकिस्तान   का निर्माण हुआ।

35. भारत के स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, बॉम्बे प्लान (1944) एक मसौदा योजना थी- [SSC JE सिविल परीक्षा 30 अक्टूबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) आर्थिक नीतियां
Solution:
  • बॉम्बे प्लान (1944) स्वतंत्रता के बाद के भारत के लिए एक आर्थिक नीतियां से संबंधित मसौदा योजना थी।
  • इसे भारत के आठ प्रमुख उद्योगपतियों (जैसे जे.आर.डी. टाटा, जी.डी. बिड़ला) ने तैयार किया था।
  • इस योजना में 15 वर्षों की अवधि में औद्योगिक विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए एक राज्य-निर्देशित अर्थव्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
  • हां, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में बॉम्बे प्लान (1944) एक मसौदा योजना थी, जिसे प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों द्वारा तैयार किया गया था।
  • यह योजना स्वतंत्र भारत के आर्थिक विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करती थी, जिसमें राज्य-नेतृत्व वाले औद्योगीकरण और मिश्रित अर्थव्यवस्था पर जोर दिया गया।​
  • योजना का उद्देश्य
    • बॉम्बे प्लान का मुख्य लक्ष्य स्वतंत्रता के बाद भारत में नियोजित अर्थव्यवस्था स्थापित करना था
    • जिसमें निजी क्षेत्र को बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए राज्य का सहयोग प्राप्त हो।
    • यह 15 वर्षीय योजना आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण पर आधारित थी और कृषि, उद्योग तथा सामाजिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित करती थी।​
  • प्रमुख योगदानकर्ता
    • जे.आर.डी. टाटा, जी.डी. बिड़ला, पुरुषोत्तम दास ठाकुरदास और अर्देशिर श्रॉफ जैसे आठ उद्योगपतियों ने इसे बॉम्बे (मुंबई) में तैयार किया।
    • यह योजना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बनी, जो स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि में आर्थिक नीतियों का प्रारंभिक खाका बनी।​
  • प्रभाव
    • इसने भारत की पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56) को प्रेरित किया और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों की स्थापना में योगदान दिया।
    • योजना ने ग्रामीण विकास तथा बुनियादी ढांचे पर बल दिया, जो स्वतंत्र भारत की आर्थिक नीतियों का आधार बनी।

36. 1945 में, ब्रिटेन में ....... की सरकार सत्ता में आई और भारत को स्वतंत्रता देने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया। [SSC JE सिविल परीक्षा 23 मार्च, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) लेबर पार्टी
Solution:
  • वर्ष 1945 में, ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार सत्ता में आई और भारत की स्वतंत्रता देने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया।
  • लेबर पार्टी ब्रिटेन की एक उदार वामपंथी विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टी है। क्लीमेंट रिचर्ड एटली वर्ष 1947 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने
  • जिनके द्वारा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 पारित किया गया था।
  •  क्लीमेंट एटली भारत की आजादी के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे।
  • क्लिमेंट अॅटली यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री थे।
  • उन्होंने 1945 से 1951 तक यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया।
  •  वह 1935 से 1955 तक यूनाइटेड किंगडम में लेबर पार्टी के नेता थे।
  • क्लिमेंट अॅटली ने घोषणा की थी कि भारत को जून 1948 से पहले आजादी मिल जाएगी।
  • उन्होंने 20 फरवरी, 1947 को घोषणा की कि जून 1948 में अंग्रेज भारत छोड़ देंगे।
  • क्लेमेंट एटली के निर्देशानुसार माउंटबेटन 22 मार्च 1947 को भारत पहुंचे।
  •  4 जुलाई 1947 को संसद में भारतीय स्वतंत्रता बिल पेश किया गया था।
  •  भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 18 जुलाई 1947 को लागू किया गया था।
  • भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 15 अगस्त 1947 को लागू हुआ।
  • उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता को अपनी सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि माना।
  • 1945 चुनाव का पृष्ठभूमि
    • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जुलाई 1945 में ब्रिटेन में आम चुनाव हुए, जिसमें विंस्टन चर्चिल की कंजर्वेटिव पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
    • लेबर पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और क्लेमेंट एटली 26 जुलाई 1945 को प्रधानमंत्री बने।
    • लेबर पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में एशिया और अफ्रीका की उपनिवेशों को मुक्त करने का वादा शामिल था, जिससे भारतीय नेता उत्साहित हुए।​
  • भारत स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता
    • एटली सरकार ने भारत की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी। 15 मार्च 1946 को एटली ने भारत को स्वतंत्र करने का आश्वासन दिया
    • 20 फरवरी 1947 को हाउस ऑफ कॉमन्स में घोषणा की कि 30 जून 1948 तक ब्रिटिश भारत को सत्ता हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
    • इसके लिए लॉर्ड माउंटबेटन को अंतिम वायसराय नियुक्त किया गया।​
  • स्वतंत्रता की प्रक्रिया
    • माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को विभाजन योजना प्रस्तुत की, जिसके आधार पर 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतंत्रता विधेयक पेश हुआ।
    • यह विधेयक 18 जुलाई 1947 को पारित हो गया और 15 अगस्त 1947 को भारत तथा पाकिस्तान के रूप में दो स्वतंत्र राष्ट्र अस्तित्व में आए।
    • एटली ने इसे अपनी सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि माना।​

37. 15 अगस्त, 1947 की आधी रात को जवाहरलाल नेहरू ने संसद को संबोधित किया था, उनके बाद संबोधित करने वाले वक्ता निम्न में से कौन थे? [C.P.O.S.I. (T-1) 23 नवंबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सर्वपल्ली राधाकृष्णन
Solution:
  • 15 अगस्त, 1947 की आधी रात को, जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' भाषण के बाद, संबोधित करने वाले अगले वक्ता सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जो बाद में भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने) थे।
  •   इस अवसर पर कुल तीन वक्ता थे: पहले नेहरू, उसके बाद राधाकृष्णन, और फिर चौधरी खालिक़ज़मान (जो पाकिस्तान के प्रतिनिधि थे)।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
  • यह संबोधन भारत की स्वतंत्रता की रात को वायसराय हाउस (वर्तमान राष्ट्रपति भवन) के निकट संविधान सभा में हुआ
  • जहाँ नेहरू ने स्वतंत्रता की जिम्मेदारियों और भविष्य की आशाओं पर जोर दिया। राधाकृष्णन, जो उस समय प्रमुख दार्शनिक और स्वतंत्रता सेनानी थे
  • नेहरू के बाद बोलते हुए राष्ट्र निर्माण और एकता पर बल दिया, जो बाद में वे भारत के दूसरे राष्ट्रपति (1952-1962) बने।​
  • अन्य वक्ताओं की भूमिका
  • चौधरी खालिक़ज़मान तीसरे वक्ता थे, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान गए और वहाँ महत्वपूर्ण पद संभाले।​
  • इस सभा में वंदे मातरम गाया गया और नेहरू ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।​
  • यह घटना भारत के स्वतंत्रता संग्राम का चरमोत्कर्ष थी, जहाँ नेहरू के भाषण को 20वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ भाषणों में गिना जाता है
  • जबकि राधाकृष्णन का संबोधन एकता का प्रतीक बना।​

38. अगस्त, 1907 में मैडम भीकाजी कामा विदेशी धरती पर भारतीय ध्वज फहराने वाली पहली व्यक्ति बनीं। उन्होंने ....... में भारतीय ध्वज फहराया। [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) जर्मनी
Solution:
  • मैडम भीकाजी कामा ने राष्ट्रीय आंदोलन के महान अग्रणी भारतीय नेता दादाभाई नौरोजी के निजी सचिव के रूप में सेवा की।
  • बाद में वे कुछ देशभक्त विद्यार्थियों एवं यूरोपियन बौद्धिक लोगों के संपर्क में आकर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गईं।
  • वह 'भारतीय क्रांति की मां' के रूप में विख्यात हैं। 22 अगस्त, 1907 में जर्मनी के स्टुटगार्ट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में उन्होंने भारतीय स्वाधीनता का झंडा फहराया।
  • मैडम भीकाजी कामा ने अगस्त 1907 में जर्मनी के स्टुटगार्ट शहर में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन के दौरान विदेशी धरती पर पहली बार भारतीय ध्वज फहराया।
  • घटना का विवरण
    • स्टुटगार्ट में आयोजित इस सम्मेलन में 25 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे, जहां भारत का प्रतिनिधित्व ब्रिटिश झंडे से हो रहा था।
    • मैडम कामा ने इसका विरोध जताते हुए अपना झंडा फहराया और घोषणा की कि यह भारत की स्वतंत्रता का प्रतीक है
    • साथ ही ब्रिटिश शासन से मुक्ति की अपील की। इस साहसिक कदम ने उन्हें "भारतीय क्रांति की जननी" का खिताब दिलाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वतंत्रता आंदोलन को पहचान मिली।​
  • झंडे का डिजाइन
    • उन्होंने श्याम जी कृष्ण वर्मा के साथ मिलकर डिजाइन किया यह झंडा, जिसमें दो रंगीन पट्टियां और आठ प्रांतों का प्रतिनिधित्व करने वाले तत्व थे
    • जो वर्तमान तिरंगे की प्रेरणा स्रोत माना जाता है। सम्मेलन में उन्होंने कहा, "यह भारत का झंडा है, इसे सलाम करो," जो स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण क्षण था।​
  • मैडम भीकाजी का योगदान
    • पारसी परिवार भीकाजी कामा ने पेरिस में इंडियन सोसाइटी की स्थापना की और 35 वर्ष तक निर्वासित जीवन बिताकर स्वतंत्रता आंदोलन को समर्थन दिया।
    • ब्रिटिश सरकार ने उन्हें खतरनाक क्रांतिकारी घोषित कर भारत प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था
    • लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 1935 में वे स्वदेश लौटीं। 1936 में 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।

39. संविधान को अपनाने के अलावा गणतंत्र दिवस मनाने के लिए 26 जनवरी को एक दिन के रूप में चुने जाने का क्या महत्व है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) पूर्ण स्वराज की घोषणा
Solution:
  • संविधान को अपनाने के अलावा, गणतंत्र दिवस मनाने के लिए 26 जनवरी को चुनने का महत्व यह है
  • इसी दिन पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई थी। 1929 के लाहौर अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को अपना लक्ष्य घोषित किया और तय किया कि 26 जनवरी, 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।
  • यह दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन कांग्रेस के पूर्ण स्वराज संकल्प को अपनाया गया था।
  • 26 जनवरी 1950 को देश भर में गणतंत्र दिवस मनाया जाता है, जिस दिन संविधान लागू हुआ था।
  • इस दिन भारत की प्राचीन सभ्यता की शुरुआत हुई, जो कई संस्कृतियों और साम्राज्यों का मिश्रण थी।
    Other Information
  •  चंपारण सत्याग्रह (अप्रैल 1917) :
    • यह बिहार के चंपारण जिले में गांधी जी के नेतृत्व में किया गया पहला सत्याग्रह आंदोलन था।
    • मुद्दा तिनकठिया प्रणाली (कुल भूमि का (3/20)वां भाग) के तहत नील की खेती का था।
    • गाँधीजी ने अधिकारियों को इस व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए मना लिया।
    •  मांग मान ली गईं और 25 फीसदी मुआवजा दे दिया गया।
  •  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
    •  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन 1885 में ए.ओ. ह्यूम, एक अंग्रेज और एक सेवानिवृत्त सिविल सेवक के द्वारा किया गया था।
    • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई।
    • NC का पहला सत्र बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृति कॉलेज में आयोजित किया गया था।
    •  इसकी अध्यक्षता बंगाल के वोमेश चंद्र बनर्जी ने की और इसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
    •  डब्ल्यू.सी. बनर्जी पहले भारतीय बैरिस्टरों में से एक थे और उस समय के अग्रणी कानूनी दिग्गजों में से एक थे, उनके चुनाव ने एक स्वस्थ मिसाल स्थापित की कि अध्यक्ष को
    • उस प्रांत के अलावा किसी अन्य प्रांत से चुना जाना चाहिए जहां कांग्रेस आयोजित की जा रही थी।

40. निम्नलिखित में से किस स्वतंत्रता सेनानी की साइमन कमीशन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मृत्यु हुई थी, जहां कमीशन को काले झंडे दिखाए गए थे? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) लाला लाजपत राय
Solution:
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दिसंबर, 1927 में मद्रास में हुए अपने अधिवेशन में साइमन कमीशन का विरोध करने का निर्णय किया।
  • 3 फरवरी, 1928 को साइमन कमीशन बंबई पहुंचा और उस दिन देशव्यापी हड़ताल का आयोजन हुआ।
  • कमीशन जहां गया, वहां पूर्ण हड़ताल रखी गई तथा 'साइमन कमीशन, वापस जाओ' के नारे के साथ जुलूस निकाले गए।
  • लाहौर में साइमन कमीशन विरोधी जुलूस का नेतृत्व करते समय पुलिस के लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • पुलिस द्वारा की गई इस बर्बरतापूर्वक पिटाई के कारण ही लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई।
  • मरने से पूर्व उन्होंने कहा था-"मेरे ऊपर किए गए लाठियों का एक-एक प्रहार ब्रिटिश सरकार के ताबूत की आखिरी कील साबित होगा।"
  • 17 नवंबर, 1928 को पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के पश्चात लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई।
  • 30 अक्टूबर, 1928 को जब साइमन कमीशन ने लाहौर का दौरा किया, तो लाला लाजपत राय ने मौन अहिंसक मार्च के साथ आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया
  • लेकिन पुलिस ने उसका जवाब हिंसक रूप में दिया।
  • इसमें एक भी भारतीय को इसके सदस्य के रूप में शामिल नहीं होने के वजह से उन्होंने आयोग का विरोध किया।
  •  साइमन आयोग :
  • जॉन साइमन के अधीन, भारत में राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करने और संसदीय लोकतंत्र के और सुधारों और विस्तार को शुरू करने के लिए बनाया गया।
  • भारतीय नेताओं ने आयोग का विरोध किया, क्योंकि इसमें कोई भारतीय नहीं थे।
  • लाला लाजपत राय को लाहौर में विरोध के दौरान एक लाठीचार्ज में गंभीर रूप से पीटा गया था। 1928 में उनका निधन हो गया।
  •  इसमें 7 सदस्य थे और जिसमें कोई भी भारतीय नहीं था।
    Other Information
  • लाला हर दयाल सिंह माथुर एक भारतीय राष्ट्रवादी क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे एक ऐसे भारतीय थे, जिन्होंने भारतीय सिविल सेवा में अपना करियर बनाया।
  •  मदन लाल ढींगरा एक भारतीय क्रांतिकारी, स्वतंत्रता-समर्थक कार्यकर्ता थे। इंग्लैंड में अध्ययन करते समय, उन्होंने एक ब्रिटिश अधिकारी विलियम हुत कर्जन वायली की हत्या कर दी थी।
  • लाला लाजपत राय एक भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे पंजाब केसरी के नाम से लोकप्रिय थे। वे त्रिमूतियों लाल बाल पाल में से एक थे।
  • शिवराम हरि राजगुरु महाराष्ट्र के एक भारतीय क्रांतिकारी थे, जो मुख्य रूप से ब्रिटिश राज पुलिस अधिकारी की हत्या में शामिल होने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए भी संघर्ष किया और 23 मार्च, 1931 को, उन्हें भगत सिंह और सुखदेव थापर के साथ ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी।