Correct Answer: (c) महार (Mahar)
Solution:- महार समुदाय को तत्कालीन भारत में अछूत माना जाता था। डॉ. अम्बेडकर ने जीवन भर इस और अन्य दलित समुदायों के अधिकारों और समानता के लिए संघर्ष किया।
- उनका संघर्ष शिक्षा और सामाजिक सुधारों के माध्यम से इन समुदायों को सशक्त बनाने पर केंद्रित था।
- प्रारंभिक जीवन और जातिगत पृष्ठभूमि
- डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू (वर्तमान महाराष्ट्र) में एक मराठी मूल के परिवार में हुआ था।
- उनका परिवार कबीर पंथ को मानने वाला था और मूल रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के आंबडवे गांव से संबंधित था।
- महार जाति को हिंदू समाज में सबसे निचले पायदान पर रखा जाता था
- जिसके कारण उन्हें बचपन से ही सामाजिक भेदभाव, शिक्षा और रोजगार में बाधाओं का सामना करना पड़ा।
- सामाजिक संघर्ष और सुधार कार्य
- अम्बेडकर ने महार समुदाय की दशा सुधारने के लिए जीवन समर्पित कर दिया। 1923 में उन्होंने 'बहिष्कृत हितकारिणी सभा' की स्थापना की
- जो दलितों की शिक्षा, संस्कृति और आर्थिक उन्नति के लिए कार्य करती थी। 1930 के कालाराम मंदिर आंदोलन में उन्होंने दलितों को मंदिर प्रवेश के अधिकार के लिए संघर्ष किया
- जो दलित आंदोलन की शुरुआत साबित हुआ। उन्होंने अस्पृश्यता को हिंदू समाज की सबसे बड़ी बुराई माना और जाति व्यवस्था के उन्मूलन पर जोर दिया।
- राजनीतिक और धार्मिक परिवर्तन
- अम्बेडकर ने अछूतों के लिए स्वतंत्र राजनीतिक पहचान की वकालत की, जो कांग्रेस या ब्रिटिश शासन से अलग हो।
- 1935 में येवला सम्मेलन में उन्होंने घोषणा की कि वे हिंदू के रूप में जन्मे लेकिन हिंदू के रूप में नहीं मरेंगे।
- 1956 में उन्होंने लाखों अनुयायियों समेत बौद्ध धर्म ग्रहण किया, ताकि दलित समुदाय जातिगत शोषण से मुक्त हो सके।
- यह कदम हिंदू समाज को 'सदमा उपचार' देने का प्रयास था।
- विरासत
- महार समुदाय से उठकर अम्बेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख रचयिता बने और सामाजिक न्याय के प्रणेता कहलाए।
- उनका योगदान दलित उत्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे राष्ट्र के समावेशी विकास में रहा।