विविध (जीव विज्ञान) भाग-I

Total Questions: 40

31. अनंत की मां ने उसे रात में पेड़ों के नीचे नहीं सोने की सलाह दी क्योंकि पेड़ रात में ....... छोड़ते हैं। [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) कार्बन डाइऑक्साइड
Solution:
  • प्रकाश संश्लेषण क्रिया में पौधों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग और उपभोग होता है।
  • दिन के समय, पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं एवं ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं
  • लेकिन रात में प्रकाश-संश्लेषण क्रिया रुक जाती है। अतः ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं होता है
  • लेकिन पौधों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी जाती है।
  • अतः रात को पेड़ के नीचे नहीं सोना चाहिए, क्योंकि रात में वे कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं
  • जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ और दम घुटने जैसी आदि समस्याएं होती हैं
  • प्रकाश संश्लेषण और श्वसन
    • दिन के समय पेड़ क्लोरोफिल की मदद से सूर्य प्रकाश, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करके ग्लूकोज बनाते हैं
    • ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिसे प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
    • रात में सूर्य प्रकाश न होने से यह प्रक्रिया बंद हो जाती है
    • लेकिन पेड़ों का श्वसन जारी रहता है, जिसमें वे ऑक्सीजन लेते हैं
    • कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालते हैं। पेड़ के घने पत्तों के नीचे यह गैस जमा हो सकती है
    • जिससे ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।​
  • स्वास्थ्य जोखिम
    • कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता से सिरदर्द, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ या दम घुटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं
    • खासकर यदि हवा स्थिर हो। बड़े-बुजुर्ग इसी वैज्ञानिक कारण से यह सलाह देते हैं
    • रात में श्वास संबंधी खतरा न हो। हालांकि, खुले क्षेत्रों में यह प्रभाव कम होता है
    • लेकिन घने पेड़ों के नीचे सावधानी बरतनी चाहिए।​​
  • अपवाद और मिथक
    • नीम जैसे कुछ पेड़ रात में भी थोड़ी ऑक्सीजन छोड़ सकते हैं
    • कीटों से बचाव करते हैं, इसलिए गांवों में इनके नीचे सोना सुरक्षित माना जाता है।
    • लोक मान्यताओं में भूत-प्रेत का जिक्र भी मिलता है, लेकिन इसका आधार श्वसन प्रक्रिया ही है।
    • कुल मिलाकर, यह सलाह पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए दी जाती है।

32. खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण में विद्यमान जैव पदार्थ की मात्रा के औसत मान के रूप में ....... प्रतिशत को लिया जा सकता है, और यह उपभोक्ताओं के अगले स्तर तक पहुंचता है। [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 10
Solution:
  • 10 प्रतिशत नियम (10% Law): पारिस्थितिकी में, 10 प्रतिशत नियम बताता है
  • एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर तक केवल लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है।
  • शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा उपापचय प्रक्रियाओं (जैसे श्वसन), ताप के रूप में हानि, और अखाद्य पदार्थों या अपशिष्ट के रूप में खो जाती है।
  • यह नियम बताता है कि खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक उच्च स्तर पर बायोमास और ऊर्जा की मात्रा कम क्यों होती जाती है।
  • खाद्य श्रृंखला का अवलोकन
    • खाद्य श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा और जैव पदार्थ के प्रवाह को दर्शाती है
    • जहां उत्पादक (जैसे पौधे) से शुरू होकर प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी), द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी), तृतीयक उपभोक्ता और अंत में अपघटक तक पहुंचती है।
    • प्रत्येक पोषी स्तर पर ऊर्जा हस्तांतरण सीमित होता है
    • क्योंकि अधिकांश ऊर्जा श्वसन, गर्मी उत्सर्जन या अपचायित पदार्थ के रूप में नष्ट हो जाती है।
    • इसलिए, जैव भार (लिविंग ऑर्गेनिक मैटर) प्रत्येक स्तर पर घटता जाता है।​
  • 10% नियम की व्याख्या
    • लिंडेमैन के 10% नियम के अनुसार, एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक केवल लगभग 10% जैव पदार्थ या ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि उत्पादक स्तर पर 1000 ग्राम जैव भार है
    • तो प्राथमिक उपभोक्ता को केवल 100 ग्राम, द्वितीयक को 10 ग्राम और तृतीयक को मात्र 1 ग्राम मिलता है।
    • यह औसत मान स्थलीय और जलीय दोनों पारिस्थितिक तंत्रों में लागू होता है
    • हालांकि वास्तविकता में यह 5-20% के बीच भिन्न हो सकता है।​
  • जैव भार पिरामिड
    • खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक स्तर पर जैव पदार्थ की कुल मात्रा को जैव भार पिरामिड द्वारा प्रदर्शित किया जाता है
    • जो आधार पर चौड़ा और ऊपर की ओर संकीर्ण होता है।
    • उत्पादक स्तर पर सबसे अधिक जैव भार होता है
    • क्योंकि सूर्य प्रकाश का मात्र 1% ही प्रकाश संश्लेषण द्वारा कैद होता है।
    • उच्च स्तरों पर जैव भार कम होने से शीर्ष मांसाहारी दुर्लभ होते हैं।​
  • ऊर्जा हानि के कारण
    • प्रत्येक चरण में 90% ऊर्जा हानि मुख्यतः श्वसन क्रिया, गतिविधियों, अपशिष्ट उत्सर्जन और मृत्यु के बाद अपघटन से होती है।
    • केवल शेष 10% ही नए जैव भार के रूप में अगले उपभोक्ता के लिए उपलब्ध होता है।
    • यह नियम पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखता है और प्रदूषण संचय (जैसे बायोमैग्निफिकेशन) को भी प्रभावित करता है।​
  • महत्वपूर्ण अनुप्रयोग
    • यह 10% नियम पारिस्थितिकी अध्ययन, संरक्षण और कृषि में उपयोगी है क्योंकि यह बताता है
    • ऊर्जा की अधिकतम प्राप्ति के लिए कम पोषी स्तरों पर निर्भर रहना चाहिए।
    • जलीय तंत्रों में कभी व्युत्क्रम पिरामिड देखा जाता है, लेकिन ऊर्जा प्रवाह हमेशा एकदिश होता है।
    • इस प्रकार, खाद्य श्रृंखला की दक्षता समझना पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है।​

33. निम्नलिखित में से कौन-सा सभी जीवित जीवों के लिए ऊर्जा का अंतिम स्रोत है? [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) सूर्य
Solution:
  • सूर्य (Sun): पृथ्वी पर लगभग सभी जीवित जीवों के लिए ऊर्जा का अंतिम स्रोत सूर्य है।
  • प्रकाश संश्लेषण
    •  पौधे (उत्पादक) सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण करते हैं
    • रासायनिक ऊर्जा (भोजन) का उत्पादन करते हैं।
  • खाद्य श्रृंखला
    •  यह ऊर्जा तब खाद्य श्रृंखला के माध्यम से उपभोक्ताओं (शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी) में स्थानांतरित होती है।
    • यहां तक कि जो जीव रसायनसंश्लेषण (chemosynthesis) पर निर्भर करते हैं
    • (जैसे गहरे समुद्र के वेंट के पास), वे भी अप्रत्यक्ष रूप से भूगर्भीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर करते हैं
    • जो अंततः सौर ऊर्जा के पृथ्वी की आंतरिक प्रक्रियाओं पर पड़ने वाले प्रभावों से जुड़े हो सकते हैं।
  • प्रकाश संश्लेषण की भूमिका
    • यह प्रक्रिया क्लोरोफिल की उपस्थिति में होती है
    • जहां कार्बन डाइऑक्साइड और जल से भोजन बनता है तथा ऑक्सीजन निकलती है।
    • सभी अन्य जीव इस भोजन श्रृंखला के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से सूर्य पर निर्भर हैं।​
  • खाद्य श्रृंखला में प्रवाह
    • प्राथमिक उत्पादक (पौधे) सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण करते हैं, फिर शाकाहारी जानवर इन्हें खाते हैं
    • मांसाहारी उच्च स्तर पर ऊर्जा प्राप्त करते हैं। प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा ह्रास होता है
    • (लगभग 10% ही अगले स्तर पर पहुंचती है), लेकिन मूल स्रोत सूर्य ही रहता है।
    • सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन असंभव होता।​
  • अपवाद और विशेष मामले
    • रसायन संश्लेषी जीव (जैसे गहरे समुद्र की कुछ बैक्टीरिया) रासायनिक ऊर्जा (हाइड्रोथर्मल वेंट्स से) का उपयोग करते हैं
    • लेकिन ये भी अप्रत्यक्ष रूप से सूर्य-उत्पन्न जैविक पदार्थों या पृथ्वी की आंतरिक ऊर्जा पर निर्भर हैं।
    • कुल मिलाकर, सूर्य ही सभी जीवित जीवों के लिए प्राथमिक और अंतिम ऊर्जा स्रोत है।

34. टमाटर में मुख्यतः से कौन-सा अम्ल पाया जाता है? [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) ऑक्जेलिक अम्ल
Solution:
  • टमाटर (Tomato): टमाटर में मुख्य रूप से ऑक्जेलिक अम्ल (Oxalic Acid) और साइट्रिक अम्ल (Citric Acid) दोनों पाए जाते हैं।
  • हालांकि, ऑक्जेलिक अम्ल टमाटर में मौजूद एक महत्वपूर्ण अम्ल है, खासकर जब प्रश्न "मुख्यतः" पर जोर देता है।
  • टमाटर के प्रमुख अम्ल
    • जिनमें साइट्रिक अम्ल, मैलिक अम्ल, एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन C) और ऑक्सालिक अम्ल प्रमुख हैं।
    • हालांकि, ऑक्सालिक अम्ल को मुख्य अम्ल माना जाता है
    • क्योंकि यह टमाटर की अम्लता का प्रमुख स्रोत है। साइट्रिक और मैलिक अम्ल भी महत्वपूर्ण हैं
    • लेकिन कुल अम्ल सामग्री में ऑक्सालिक अम्ल की भूमिका प्रमुख रहती है।​
  • ऑक्सालिक अम्ल की मात्रा
    • परिपक्व टमाटर में ऑक्सालिक अम्ल की मात्रा लगभग 50 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होती है।
    • यह अम्ल पौधों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है और टमाटर सहित कई फल-सब्जियों में विद्यमान रहता है।
    • पकने की प्रक्रिया में अम्लों का संतुलन बदलता है, लेकिन ऑक्सालिक अम्ल स्थिर रहता है।​
  • अन्य अम्लों की भूमिका
    • साइट्रिक अम्ल: टमाटर को ताजगी और खट्टापन देता है
    • लेकिन कुछ स्रोतों में इसे सहायक अम्ल बताया गया है।
    • मैलिक अम्ल: कच्चे टमाटर में अधिक पाया जाता है और पकने पर कम हो जाता है।
    • एस्कॉर्बिक अम्ल: विटामिन C के रूप में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी।

35. 'प्राकृतिक स्रोत-अम्ल' का निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है? [MTS (T-I) 07 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) इमली - ऑक्सैलिक अम्ल
Solution:
  • इमली - ऑक्सैलिक अम्ल
    •  इमली (Tamarind) में मुख्य रूप से टार्टरिक अम्ल (Tartaric Acid) पाया जाता है।
    • ऑक्जेलिक अम्ल (Oxalic Acid) पालक, टमाटर और कुछ अन्य हरी सब्जियों में पाया जाता है।
    • इसलिए, यह युग्म सही सुमेलित नहीं है।
    • निम्नलिखित में से 'प्राकृतिक स्रोत-अम्ल' का गलत सुमेलित युग्म इमली-ऑक्सेलिक अम्ल है।​
  • सही विकल्प की व्याख्या
    • प्रश्न सामान्यतः बहुविकल्पीय होता है, जिसमें विकल्प होते हैं जैसे:
    • सिरका-एसिटिक अम्ल (सही)
    • दूध/दही-लैक्टिक अम्ल (सही)
    • नींबू/संतरा-साइट्रिक अम्ल (सही)
    • इमली-ऑक्सेलिक अम्ल (गलत)​
    • इमली (टैमरिंड) मुख्य रूप से टार्टरिक अम्ल का प्राकृतिक स्रोत है, न कि ऑक्सेलिक अम्ल का।
    • ऑक्सेलिक अम्ल टमाटर, पालक जैसी सब्जियों में प्रमुखता से पाया जाता है।​
  • अतिरिक्त जानकारी
    • ये अम्ल जैविक होते हैं और कमजोर अम्ल के रूप में कार्य करते हैं
    • जो दैनिक जीवन में स्वाद, संरक्षण और चिकित्सा में उपयोगी हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, साइट्रिक अम्ल नींबू में विटामिन सी के साथ मौजूद रहता है
    • जबकि लैक्टिक अम्ल दही बनने की प्रक्रिया में बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न होता है।
    • गलत सुमेलन अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रम पैदा करने के लिए रखे जाते हैं, जैसे इमली को ऑक्सेलिक से जोड़ना।​

36. निम्नलिखित में से कौन-सा एक कृत्रिम मधुरक (artificial sweetener) है? [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) सैकरीन
Solution:
  • सैकरीन (Saccharin) एक कार्बनिक यौगिक है, जो कृत्रिम मिठास का आभास कराता है।
  • जबकि इसमें कुछ भी भोज्य ऊर्जा नहीं होती है।
  • सैकरीन, चीनी की अपेक्षा लगभग 300- 400 गुना अधिक मीठा होता है।
  • इसका उपयोग चाय, कैंडी, कुकी, दवाओं, बर्फ तथा दंतमंजन आदि को मीठा करने के लिए किया जाता है।
  • प्रमुख कृत्रिम मधुरक
    •  एस्पार्टेम 100-200 गुना मीठा है, ठंडे पेय और खाद्य पदार्थों में उपयोग होता है
    • लेकिन गर्मी पर अस्थिर रहता है। सुक्रालोज़ सुक्रोज का क्लोरीनयुक्त व्युत्पन्न है
    • जो 600 गुना मीठा होता है और खाना पकाने में भी स्थिर रहता है।​
  • अन्य उदाहरण
    • एलिटेम सबसे शक्तिशाली है, सुक्रोज से 2000 गुना मीठा, लेकिन नियंत्रण कठिन होने से सीमित उपयोग।
    • नियोटेम और एडवांटेम जैसे नवीन मधुरक भी विकसित हो रहे हैं
    • जो उच्च मिठास प्रदान करते हैं। ये सभी प्राकृतिक चीनी के स्थान पर कम कैलोरी वाले विकल्प हैं।​
  • उपयोग और लाभ
    • इनका उपयोग डायबिटीज रोगियों, आहार सोडा, बेकरी उत्पादों में होता है
    • क्योंकि ये इंसुलिन प्रभावित नहीं करते। विश्व स्वास्थ्य संगठन लंबे उपयोग पर सतर्कता बरतने की सलाह देता है।
    • भारत में FSSAI इनकी सुरक्षित मात्रा निर्धारित करता है।​

37. निम्नलिखित में से कौन-से अपुष्पी हैं? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) टेरिडोफाइटा
Solution:
  • वे पादप जिनमें पुष्प एवं बीज अनुपस्थित होते हैं, उन्हें क्रिप्टोगैम्स कहते हैं।
  • क्रिप्टोगैम्स को तीन भागों में विभाजित किया जाता है-थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा।
  • पुष्प और बीज युक्त पौधों को फेनेरोगेम्स कहते हैं, जिन्हें दो भागों में विभाजित किया जाता है
  • जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म। एंजियोस्पर्म को एकबीजपत्री एवं द्विबीजपत्री में भी विभाजित किया जाता है।
  • अपुष्पी पौधों के प्रकार
    • अपुष्पी पौधों को तीन प्रमुख समूहों में बांटा जाता है। थैलोफाइटा में शैवाल और कवक आते हैं
    • जो सरल संरचना वाले होते हैं और जड़, तना या पत्ती स्पष्ट रूप से अलग नहीं दिखते।
    • ब्रायोफाइटा या काईयाँ नम स्थानों पर उगती हैं और इनमें जड़ सदृश राइजॉइड्स होते हैं।
    • टेरिडोफाइटा में फर्न जैसे पौधे शामिल हैं, जो बीजाणुधारी होते हैं लेकिन वाहिकाएँ विकसित होती हैं।​
  • उदाहरण
    • शैवाल: स्पाइरोगायरा, क्लैडोफोरा।
    • कवक: यीस्ट, मशरूम, राइजोपस।
    • काई: फनैरिया, मार्केनशिया।
    • फर्न: ड्राईोप्टेरिस, सेलागिनेला।
    • ये सभी फूल या बीज पैदा नहीं करते, बल्कि बीजाणुओं से प्रजनन करते हैं।​
  • पुष्पी से अंतर
    • पुष्पी पौधों में फूल, फल और बीज होते हैं, जैसे आम, नीम, गुलाब।
    • अपुष्पी सरल होते हैं और ज्यादातर नम वातावरण पसंद करते हैं। पुष्पी पूर्ण विकसित जड़-तना-पत्ती वाले होते हैं।

38. निम्नलिखित में से कौन-सी बीमारी विश्वव्यापी उन्मूलन के लिए एक संभावित दावेदार है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) पोलियो
Solution:
  • पोलियो एक संक्रामक रोग है, जो कि पोलियोमेलाइटिस विषाणु द्वारा होता है।
  • यह विश्वव्यापी उन्मूलन के लिए एक संभावित दावेदार है; क्योंकि यह टीका-निवारक रोग है
  • इसके प्रभावी टीके उपलब्ध हैं। WHO पोलियो उन्मूलन के वैश्विक प्रयास का नेतृत्व कर रहा है
  • जिसके कारण विश्वभर में पोलियो के मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है।
  • उन्मूलन के मानदंड
    • बीमारी का विश्वव्यापी उन्मूलन तभी संभव होता है जब वह पूरी तरह से समाप्त हो जाए
    • जैसे चेचक का 1980 में हुआ था। इसके लिए आवश्यक हैं
    • प्रभावी टीका या उपचार, आसान निदान, कोई गैर-मानव जलाशय न होना, और स्थिर वायरस जो उत्परिवर्तन न करे।
    • पोलियो इन सभी मानदंडों को पूरा करता है क्योंकि यह केवल मनुष्यों में फैलता है
    • इसका टीका (OPV और IPV) अत्यधिक प्रभावी है
    • WHO के ग्लोबल पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम (GPEI) ने 1988 से 99.9% मामलों को समाप्त कर दिया है ।​
  • पोलियो क्यों संभावित दावेदार?
    • पोलियो एक एंटरोवायरस है जो फैकल-ओरल रूट से फैलता है
    • मुख्यतः खराब स्वच्छता वाले क्षेत्रों में। 1988 में 3.5 लाख मामले थे
    • जो 2025 तक अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक सीमित हो गए।
    • GPEI ने 2.5 अरब बच्चों को टीका दिया, जिससे 20 मिलियन अपंगत्व टला।
    • यदि टीकाकरण 95% से ऊपर रहे, तो 2026-2027 तक उन्मूलन संभव है ।​
  • वर्तमान प्रगति
    • जनवरी 2026 तक, पोलियो के जंगली प्रकार (WPV1) के मामले केवल दो देशों में हैं।
    • WHO ने अफ्रीका को 2020 में पोलियो-मुक्त घोषित किया।
    • चुनौतियाँ: टीकाकरण अस्वीकृति, संघर्ष क्षेत्र। फिर भी, वैज्ञानिक सहमति पोलियो को अगला चेचक मानती है ।​

39. स्थल पर उगने वाले सर्वप्रथम पौधे, जिनमें संवहन ऊतक होते हैं, ....... हैं। [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) टेरिडोफाइटा
Solution:
  • 'टेरिडोफाइटा' स्थल पर उगने वाले सर्वप्रथम पौधे हैं, जिनमें संवहन ऊतक (Vascular Tissue) पाए जाते हैं।
  • संवहन ऊतक में जाइलम और फ्लोएम होते हैं, जिनमें जल, खनिज लवण और खाद्य पदार्थों का संवहन होता है।
  • टेरिडोफाइट्स में पुष्प और बीज अनुपस्थित होते हैं। उदाहरण-फर्न।
  • टेरिडोफाइटा की विशेषताएँ
    • क्योंकि इनमें जाइलम और फ्लोएम जैसे संवहन ऊतक मौजूद होते हैं
    • जो पानी, खनिज लवणों और तैयार भोजन का परिवहन करते हैं।
    • इनकी जड़ें, तना और पत्तियाँ अच्छी तरह विकसित होती हैं
    • जो इन्हें स्थलीय जीवन के लिए अनुकूल बनाती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, फर्न (fern), हॉर्सटेल (Equisetum) और क्लब मॉस (Lycopodium) इनकी प्रमुख प्रजातियाँ हैं।​
  • संवहन ऊतकों की संरचना
    • संवहन ऊतक दो मुख्य भागों में विभाजित होते हैं:
    • जाइलम (Xylem): यह मृत कोशिकाओं से बना होता है
    • जड़ों से पानी व खनिजों को ऊपर की ओर ले जाता है। ट्रेकिड्स और वेसल्स इसके घटक हैं।​
    • फ्लोएम (Phloem): जीवित कोशिकाओं (सिव ट्यूब्स और साथी कोशिकाएँ) से युक्त, जो पत्तियों में बने भोजन को अन्य भागों तक पहुँचाता है।​
    • ये ऊतक संवहनी बंडलों के रूप में तने और पत्तियों में व्यवस्थित रहते हैं।​
  • विकासवादी महत्व
    • ब्रायोफाइट्स (जैसे मॉस) स्थलीय जीवन के प्रारंभिक पौधे हैं
    • किंतु उनमें संवहन ऊतक का अभाव होता है, इसलिए वे छोटे आकार के और नम स्थानों पर निर्भर रहते हैं।
    • टेरिडोफाइटा ने संवहन ऊतकों के विकास से बड़े आकार, शुष्क वातावरण में अनुकूलन और जड़ प्रणाली का विकास संभव किया।
    • ये बीजाणुओं द्वारा प्रजनन करते हैं, बीज नहीं बनाते।​

40. निम्नलिखित में से कौन-सा तृतीयक उपभोक्ता है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सांप
Solution:
  • खाद्य श्रृंखला (Food Chain) विभिन्न प्रकार के जीवधारियों का क्रम है
  • जिसके द्वारा एक पारिस्थितिक तंत्र में खाद्य ऊर्जा (Food energy) का प्रवाह होता है।
  • उदाहरण-पौधा (उत्पादक) तितली द्वारा खाया जाता है
  • तितली को चूहा खाता है और चूहा को सांप खाता है, अतः सांप तृतीयक उपभोक्ता है।
  • खाद्य श्रृंखला का अवलोकन
    • खाद्य श्रृंखला उत्पादकों (पौधे) से शुरू होती है, जो सूर्य की ऊर्जा से भोजन बनाते हैं।
    • प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी जैसे खरगोश) इन्हें खाते हैं
    • द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी जैसे मेंढक) प्राथमिक को खाते हैं
    • तृतीयक उपभोक्ता (शीर्ष मांसाहारी जैसे शेर या सांप) द्वितीयक को खाते हैं।
    • ऊर्जा प्रत्येक स्तर पर 90% कम हो जाती है, इसलिए तृतीयक उपभोक्ताओं की संख्या सीमित रहती है।​
  • तृतीयक उपभोक्ता की परिभाषा
    • ये वे जीव हैं जो द्वितीयक उपभोक्ताओं (जैसे मेंढक या छोटे मांसाहारी) का भक्षण करते हैं
    • अक्सर शीर्ष शिकारी कहलाते हैं। उदाहरणों में शेर शामिल है
    • जो हिरण खाने वाले गीदड़ या अन्य मांसाहारियों को शिकार बनाता है
    • सांप जो कीट खाने वाले मेंढकों को खाता है। मनुष्य भी कभी-कभी इस श्रेणी में आते हैं
    • क्योंकि वे अन्य मांसाहारियों का सेवन करते हैं।​
  • प्रमुख उदाहरण
    • शेर: द्वितीयक उपभोक्ताओं जैसे गीदड़ या हाइना को खाता है, पारिस्थितिकी तंत्र का शीर्ष शिकारी।​
    • सांप: मेंढक (द्वितीयक) को खाता है, जो टिड्डी (प्राथमिक) खाते हैं।​
    • बाज या गिद्ध: सांप जैसे मांसाहारियों को भक्षण करते हैं।​
  • महत्वपूर्ण भूमिका
    • तृतीयक उपभोक्ता जनसंख्या नियंत्रण करते हैं
    • जिससे निचले स्तरों पर अधिकता न हो और पारिस्थितिकी संतुलन बना रहे।
    • उनकी मृत्यु पर अपघटक (बैक्टीरिया) उन्हें विघटित कर पोषक तत्वों को लौटाते हैं।
    • इन्हें कम संख्या में रखना ऊर्जा संतुलन के लिए आवश्यक है।​