विविध (जीव विज्ञान) भाग-II

Total Questions: 39

11. शिशु पीलिया (infantile jaundice) का सबसे स्पष्ट लक्षण कौन-सा है जो आमतौर पर जन्म के बाद दूसरे और चौथे दिन के बीच दिखाई देता है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ जाना
Solution:
  • आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ जाना
    • यह शिशु पीलिया का सबसे प्रमुख और क्लासिक लक्षण है।
    • यह बिलीरुबिन नामक पीले रंग के वर्णक के रक्त में उच्च स्तर के कारण होता है।
    • नवजात शिशुओं में लिवर अक्सर बिलीरुबिन को पर्याप्त तेजी से संसाधित करने में सक्षम नहीं होता है
    • जिससे यह त्वचा और आंखों में जमा हो जाता है, जिससे वे पीले दिखाई देते हैं।
    • यह आमतौर पर जन्म के 2-4 दिनों के भीतर दिखाई देता है।
  • मुख्य लक्षण
    • पीलिया का प्राथमिक और सबसे स्पष्ट संकेत शिशु के चेहरे पर पीलेपन का दिखना है
    • जो धीरे-धीरे छाती, पेट, बाहों और पैरों तक फैल जाता है।
    • आंखों का सफेद भाग (स्क्लेरा) भी पीला हो जाता है, और प्राकृतिक प्रकाश में यह आसानी से दिखाई देता है।
    • हल्के से त्वचा दबाने पर पीले रंग का पता चलना भी इसकी पुष्टि करता है।​
  • समयावधि और प्रगति
    • यह लक्षण जन्म के 2-4 दिनों में शुरू होता है
    • क्योंकि शिशु के लीवर में बिलीरुबिन को संसाधित करने की क्षमता अभी विकसित नहीं होती।
    • 50% पूर्णकालिक और 80% समयपूर्व शिशुओं में यह सामान्य है
    • 3-7 दिनों में बिलीरुबिन का स्तर चरम पर पहुंचता है।
    • अधिकतर मामलों में 1-2 सप्ताह में स्वतः ठीक हो जाता है।​
  • अन्य सहायक लक्षण
    • सुस्ती या अत्यधिक नींद आना, दूध पीने में कमी।​
    • गहरे रंग का मूत्र या हल्के रंग का मल।​
    • ये लक्षण गंभीर नहीं होते, लेकिन अगर पीलिया 24 घंटे के अंदर दिखे या 2 सप्ताह से अधिक चले
    • तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।​
  • कारण और महत्व
    • शिशु पीलिया मुख्यतः फिजियोलॉजिकल होता है
    • जहां लीवर बिलीरुबिन को प्रोसेस नहीं कर पाता।
    • अस्पष्ट मामलों में संक्रमण, असंगत रक्त समूह या थायरॉइड समस्या हो सकती है।
    • समय पर फोटोथेरेपी से ब्रेन डैमेज (कर्निक्टेरस) रोका जा सकता है।
    • नियमित निगरानी और स्तनपान से बिलीरुबिन बाहर निकलता है।

12. दूध, समुद्री भोजन, मेवे और साबुत अनाज में कौन-सा खनिज उच्च मात्रा में होता है जो हड्डियों के स्वास्थ्य और हमारे शरीर की मरम्मत प्रक्रिया में सहायता करता है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) फॉस्फोरस
Solution:
  • फॉस्फोरस (Phosphorus)
    • यह कैल्शियम के बाद शरीर में दूसरा सबसे प्रचुर खनिज है।
    • यह हड्डियों और दांतों के निर्माण और रखरखाव के लिए आवश्यक है।
    • यह डीएनए और आरएनए का एक महत्वपूर्ण घटक भी है
    • ऊर्जा उत्पादन (एटीपी के रूप में) में शामिल है, और कोशिका झिल्ली का एक हिस्सा है।
    • दूध, समुद्री भोजन (विशेषकर मछली), मेवे और साबुत अनाज फॉस्फोरस के उत्कृष्ट स्रोत हैं।
    • यह हड्डियों के स्वास्थ्य और ऊतक मरम्मत दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • फॉस्फोरस की भूमिका
    • जो हड्डियों की कठोरता प्रदान करता है।
    • यह शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत, डीएनए/आरएनए निर्माण और ऊर्जा उत्पादन (एटीपी) में सहायता करता है
    • जिससे ऊतकों की मरम्मत तेज होती है। वयस्कों के लिए दैनिक आवश्यकता लगभग 700 मिलीग्राम है
    • जो इन खाद्य पदार्थों से आसानी से पूरी हो जाती है।​
  • इन खाद्य पदार्थों में मात्रा
    • दूध: एक गिलास (250 मिलीलीटर) में लगभग 200-250 मिलीग्राम फॉस्फोरस होता है
    • जो डेयरी उत्पादों का प्रमुख स्रोत है।​
    • समुद्री भोजन: मछली, झींगा और सीप में 200-400 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम तक, खासकर हड्डियों वाली मछलियों में।​
    • मेवे: बादाम, काजू जैसे मेवों में 400-500 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम, जो स्नैकिंग के लिए आदर्श हैं।​
    • साबुत अनाज: ओट्स, ब्राउन राइस और क्विनोआ में 300-500 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम, जो फाइबर के साथ पोषण देते हैं।​
  • स्वास्थ्य लाभ और कमी के प्रभाव
    • फॉस्फोरस हड्डियों के घनत्व को बनाए रखता है और ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करता है
    • साथ ही वसा-कार्बोहाइड्रेट चयापचय को नियंत्रित करता है।
    • इसकी कमी से हड्डियों में दर्द, कमजोरी और संक्रमण का खतरा बढ़ता है
    • जबकि अधिकता से कैल्शियम असंतुलन हो सकता है।
    • संतुलित आहार में कैल्शियम-फॉस्फोरस अनुपात 1:1 या 2:1 रखना सर्वोत्तम है।​

13. निम्न से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

I. जब शरीर के केंद्रीय अक्ष से गुजरने वाला कोई तल जीव को दो समान हिस्सों में विभाजित करता है, तो इसे रेडियल समरूपता कहा जाता है।

II. यदि शरीर केवल एक ही तल में समान बाएं और दाएं हिस्सों में विभाजित किया जाता है, तो इसे द्विपक्षीय समरूपता कहा जाता है।

Correct Answer: (d) I और II दोनों
Solution:
  • कथन I
    •  जब शरीर के केंद्रीय अक्ष से गुजरने वाला कोई तल जीव को दो समान हिस्सों में विभाजित करता है
    • तो इसे रेडियल समरूपता कहा जाता है। यह कथन बिल्कुल सही है।
    • रेडियल समरूपता (Radial Symmetry) का अर्थ है
    • शरीर को केंद्रीय अक्ष से गुजरने वाले किसी भी तल द्वारा दो समान दर्पण-छवि हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है।
    • उदाहरणों में जेलीफिश, सी एनीमोन और स्टारफिश शामिल हैं।
  • कथन II
    • यदि शरीर केवल एक ही तल में समान बाएं और दाएं हिस्सों में विभाजित किया जाता है
    • तो इसे द्विपक्षीय समरूपता कहा जाता है। यह कथन भी सही है।
    • द्विपक्षीय समरूपता (Bilateral Symmetry) का अर्थ है
    • शरीर को केवल एक ही तल (जिसे सैजिटल प्लेन कहा जाता है
    • द्वारा दो समान दर्पण-छवि (बाएं और दाएं) हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है।
    • अधिकांश जानवर, जिनमें मनुष्य भी शामिल हैं, द्विपक्षीय रूप से सममित होते हैं।
  • प्रश्न का सामान्य पैटर्न
    • ऐसे प्रश्नों में 2-4 कथन दिए जाते हैं, जिन्हें 1, 2, 3, 4 से चिह्नित किया जाता है। विकल्प होते हैं:
    • (a) केवल 1 सही
    • (b) केवल 2 सही
    • (c) 1 और 3 सही
    • (d) सभी सही
  • उदाहरण:
    • भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। (सही)
    • संसद का ऊपरी सदन राज्यसभा है। (सही)
    • राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे करता है। (गलत)
  • हल करने की विधि (Step-by-Step)
    • प्रत्येक कथन को अलग-अलग जांचें।
    • तथ्यों की पुष्टि करें (इतिहास, विज्ञान, भूगोल आदि से)।
    • कारण-प्रमाण (Assertion-Reason) प्रकार में देखें कि क्या कारण सही व्याख्या देता है।
    • विकल्पों से मिलाएं।
  • लोकप्रिय विषयों के उदाहरण
    • रसायन विज्ञान
    • कथन: सभी अयस्क खनिज हैं। (सही); सभी खनिज अयस्क हैं। (गलत)। उत्तर: केवल पहला।​
    • गणित
    • दो अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल अपरिमेय होता है। (सही, जैसे √2 × √2 = 2)।​
  • अर्थव्यवस्था
    • बैंक का मुख्य दायित्व जमाराशि है। (सही); बैंक दर RBI द्वारा निर्धारित। (सही)। सभी सही।​
    • पूर्ण प्रश्न (कथनों सहित) प्रदान करें तो विस्तृत हिंदी में विश्लेषण दूंगा।​

14. ....... नामक घास की एक प्रजाति पर्यावरण के प्रति अपनी असंवेदनशीलता के कारण विलुप्त होने के कगार पर है। [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) हबर्डिया हेप्टान्यूरॉन (Hubbardia heptaneuron)
Solution:
  • हबर्डिया हेप्टान्यूरॉन (Hubbardia heptaneuron): यह घास की एक दुर्लभ और स्थानिक प्रजाति है
    • जिसे 'पत्तल फर्न' या 'पत्तल घास' भी कहा जाता है।
    • यह मुख्य रूप से भारत के पश्चिमी घाट (विशेषकर महाराष्ट्र के अंबोली क्षेत्र) में पाई जाती है।
    • यह पर्यावरण परिवर्तनों, विशेष रूप से आर्द्रता और आवास के नुकसान के प्रति अपनी उच्च संवेदनशीलता के कारण गंभीर रूप से लुप्तप्राय है।
  • प्रजाति का परिचय
    • यह पर्यावरणीय परिवर्तनों जैसे तापमान उतार-चढ़ाव, वर्षा की अनियमितता और मिट्टी की गुणवत्ता में बदलाव के प्रति अत्यधिक असंवेदनशील है, जिससे इसकी वृद्धि और प्रजनन प्रभावित होता है।​
  • विलुप्ति का खतरा
    • यह प्रजाति मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रही है
    • जो इसके आवास को नष्ट कर रही हैं।
    • भारत में दर्ज वनस्पतियों का कम से कम 10% और स्तनधारियों का 20% खतरे की श्रेणी में आता है
    • जिसमें यह घास भी शामिल है। असंवेदनशीलता के कारण यह प्रजाति छोटे पर्यावरणीय तनावों को सहन नहीं कर पाती
    • जिससे इसकी आबादी तेजी से घट रही है।​
  • संरक्षण की स्थिति
    • भारत सरकार और पर्यावरण संगठन इसे संकटग्रस्त मानते हैं
    • लेकिन विशिष्ट संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी सीमित है।
    • अन्य खतरे वाली प्रजातियों जैसे मधुका इंसिग्निस के साथ इसे संरक्षित करने के प्रयास चल रहे हैं।
    • जागरूकता अभियान और आवास पुनर्स्थापना आवश्यक हैं ताकि इसे बचाया जा सके।​

15. स्वच्छ पेयजल प्राप्त करने के लिए विसंक्रामक का उपयोग निस्यंदन के बाद किया जाता है। हालांकि, निस्संक्रामक का उपयोग ....... हटाने के लिए नहीं किया जाता है। [CGL (T-I) 21 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) खनिज पदार्थ
Solution:
  • विसंक्रामक
    • जैसे क्लोरीन या ओजोन, का उपयोग पानी को शुद्ध करने के लिए किया जाता है
    • उसमें मौजूद सूक्ष्मजीवों जैसे विषाणु (viruses), परजीवी जीवाणु (bacteria) को मारा या निष्क्रिय किया जा सके।
    • ये रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को खत्म करने में बहुत प्रभावी होते हैं।
    • हालांकि, विसंक्रामक खनिज पदार्थ (minerals) जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, या लोहे को पानी से नहीं हटाते हैं।
    • खनिज पदार्थों को हटाने के लिए अन्य उपचार प्रक्रियाओं जैसे आयन विनिमय, रिवर्स ऑस्मोसिस (RO), या आसवन (distillation) की आवश्यकता होती है।
  • जल शुद्धिकरण प्रक्रिया
    • जल शुद्धिकरण एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है
    • जिसमें स्क्रीनिंग से शुरू होकर निस्यंदन और निस्संक्रामन तक शामिल होता है।
    • निस्यंदन चरण में रेत, मिट्टी, कण और कुछ बड़े अशुद्धियाँ हटाई जाती हैं
    • लेकिन सूक्ष्म जीवाणु, विषाणु और परजीवी बाकी रह सकते हैं।
    • इसके बाद निस्संक्रामक जैसे क्लोरीन या ब्लीचिंग पाउडर डाला जाता है
    • जो पानी को बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों से मुक्त करता है।​
  • निस्संक्रामक की भूमिका
    • निस्संक्रामक मुख्य रूप से जैविक संदूषकों को नष्ट करने के लिए कार्य करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, ब्लीचिंग पाउडर पानी में क्लोरीन मुक्त करता है
    • जो रोगजनकों को मारता है और जलजनित रोगों जैसे हैजा, टाइफाइड को रोकता है।
    • यह प्रक्रिया निस्यंदन के बाद इसलिए की जाती है ताकि फिल्टर से गुजरे पानी में बचे सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकें।
    • हालांकि, यह रासायनिक या भौतिक अशुद्धियों जैसे घुले हुए लवणों पर प्रभावी नहीं होता।​
  • निस्संक्रामक सीमाएँ
    • निस्संक्रामक खनिज पदार्थों (जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, फ्लोराइड या नाइट्रेट) को हटाने में असमर्थ होता है
    • क्योंकि ये घुले हुए रूप में मौजूद होते हैं।
    • इन्हें हटाने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) या आयन एक्सचेंज जैसी अलग विधियाँ आवश्यक हैं।
    • निस्यंदन भी मुख्यतः ठोस कणों पर केंद्रित रहता है, न कि खनिजों पर।​
  • अन्य विधियाँ पूरक
    • पूर्ण शुद्धिकरण के लिए RO भारी धातुओं और उच्च TDS वाले खनिजों को हटाता है
    • जबकि UV किरणें अतिरिक्त निस्संक्रामन प्रदान करती हैं।
    • सक्रिय कार्बन फिल्टर स्वाद सुधारने और क्लोरीन हटाने में सहायक होते हैं।
    • घरेलू स्तर पर बहु-स्तरीय प्यूरीफायर इन सभी चरणों को जोड़ते हैं।​

16. निम्नलिखित में से किसका इस्तेमाल अनाज के लिए कीटनाशक या धूमक (फ्यूमिगेंट) के रूप में और फ्लेयर्स में प्रज्ज्वलित करने वाले कारक के रूप में किया जाता है? [CHSL (T-I) 03 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) एल्युमीनियम फॉस्फाइड
Solution:
  • एल्युमीनियम फॉस्फाइड
    • यह एक ठोस रासायनिक यौगिक है
    • जिसका उपयोग व्यापक रूप से अनाज और अन्य संग्रहीत कृषि उत्पादों के लिए धूमक (फ्यूमिगेंट) के रूप में किया जाता है।
    • यह हवा में नमी के संपर्क में आने पर अत्यधिक जहरीली फॉस्फीन गैस (PH₃) छोड़ता है
    • जो कीटों, कृन्तकों और अन्य कीटों को मारती है।
    • फॉस्फीन गैस का उपयोग सिग्नल फ्लेयर्स और आतिशबाजी में प्रज्ज्वलन कारक के रूप में भी किया जाता है
    • क्योंकि यह आसानी से जलती है।
  • उपयोग के रूप
    • यह रसायन मुख्य रूप से अनाज जैसे गेहूं, चावल और अन्य भंडारित अनाजों को कीटों (जैसे खटमल, चूहों और अन्य कीड़ों) से बचाने के लिए टैबलेट या छर्रों के रूप में फैलाया जाता है।
    • नमी के संपर्क में आने पर यह फॉस्फीन (PH₃) गैस उत्पन्न करता है
    • जो एक जहरीली धूमक गैस है और सील बंद गोदामों या साइलो में कीटों को मार देती है।
    • इसके अलावा, इसका उपयोग सिग्नल फ्लेयर्स, स्मोक बम और आपातकालीन प्रज्ज्वलन उपकरणों में ईंधन के रूप में होता है
    • क्योंकि यह ऑक्सीजन के साथ तेजी से अभिक्रिया कर ज्वाला उत्पन्न करता है।​
  • कार्यप्रणाली
    • एल्युमीनियम फॉस्फाइड (AlP) पानी या नमी से रिएक्ट होकर फॉस्फीन गैस छोड़ता है:
    • यह गैस घातक होती है और अनाज के दानों के अंदर तक पहुंचकर कीटों को नष्ट कर देती है।
    • फ्यूमिगेशन प्रक्रिया में इसे विशेष कंटेनरों से डाला जाता है
    • 24-72 घंटे बाद हवा का परीक्षण कर सुरक्षित घोषित किया जाता है।​
  • सावधानियां और प्रभाव
    • यह अत्यधिक विषैला है, इसलिए प्रशिक्षित व्यक्ति ही इसका उपयोग करें
    • असुरक्षित उपयोग से मानव मृत्यु हो सकती है।
    • भारत में इसे CELPHOS या QUICKPHOS ब्रांड के नाम से बेचा जाता है
    • कृषि मंत्रालय द्वारा विनियमित है। पर्यावरणीय रूप से यह अपघटित हो जाता है
    • लेकिन उपयोग के बाद उचित वेंटिलेशन आवश्यक है।​

17. सामान्यतः जलीय अकशेरुकी जीवों में पाए जाने वाले संतुलन के युग्मित अंग कौन से हैं, जो आमतौर पर संवेदी रोमों वाले द्रव से भरी पुटिका होते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) स्टेटोसिस्ट
Solution:
  • स्टेटोसिस्ट
    •  ये छोटे, द्रव से भरे अंग हैं जो कुछ अकशेरुकी जीवों (जैसे मोलस्क, क्रस्टेशियन, और कुछ जेलीफिश) में गुरुत्वाकर्षण और अभिविन्यास का पता लगाने के लिए संवेदी संतुलन अंग के रूप में कार्य करते हैं।
    • इनमें संवेदी रोम (hairs) और स्टेटोलिथ (statoliths) नामक छोटे, भारी कण होते हैं।
    • जब जीव अपनी स्थिति बदलता है, तो स्टेटोलिथ रोमों को दबाते है
    • जिससे जीव को अपनी स्थिति का पता चलता है।
  • संरचना
    • इसकी आंतरिक सतह पर संवेदी बाल (सिलिया) या बालों वाली कोशिकाएँ लगी रहती हैं
    • जो मैकुला (macula) नामक क्षेत्र बनाती हैं।
    • एक घना खनिज कण, जिसे स्थैटोलिथ (statolith) कहते हैं, इस द्रव में तैरता रहता है।
    • ये अंग सामान्यतः युग्मित होते हैं, अर्थात् शरीर के दोनों ओर एक-एक स्थैतिकोष्ठ पाया जाता है।​
  • कार्यप्रणाली
    • जब जीव की स्थिति बदलती है या गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से स्थैटोलिथ द्रव में नीचे की ओर खिसकता है
    • तो वह संवेदी रोमों पर दबाव डालता है। इससे रोमों वाली कोशिकाएँ उत्तेजित होकर तंत्रिका संकेत उत्पन्न करती हैं
    • जो मस्तिष्क या तंत्रिका जाल तक पहुँचते हैं। इससे जीव को अपनी स्थिति, संतुलन और दिशा का ज्ञान होता है।
    • यह प्रक्रिया जलीय माध्यम में तैरते या चलते अकशेरुकी जीवों के लिए आवश्यक होती है
    • क्योंकि वे निरंतर गति और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में रहते हैं।​
  • पाए जाने वाले जीव
    • मोलस्का (Mollusca): जैसे सीफूड, ऑक्टोपस और स्क्विड में प्रमुख रूप से पाए जाते हैं।
    • क्रस्टेशिया (Crustacea): केकड़े, झींगे और लॉब्स्टर जैसी क्रस्टेशियन्स में।
    • एनिडेरिया (Cnidaria): जेलीफिश और समुद्री ऐनीमोनी में सरल रूप।
    • अन्य: कुछ एनोप्लुरा (जैसे रोटिफर्स) और एक्टिनोजोआ में भी।
    • कशेरुकी प्राणियों में इसका समकक्ष आंतरिक कान का उत्रीकॉन (utricle) होता है।​
  • अन्य संबंधित तथ्य
    • स्थैतिकोष्ठ केवल संतुलन ही नहीं, बल्कि कोणीय गति (angular acceleration) का भी पता लगाते हैं।
    • कुछ जटिल रूपों में बालों वाली कोशिकाएँ कंकालिकाओं (otoliths) से जुड़ी होती हैं।
    • ये अंग विकासवादी रूप से प्राचीन हैं और जलीय जीवन के लिए अनुकूलित।
    • नेफ्रीडिया जैसे उत्सर्जी अंगों से इन्हें भ्रमित न करें, क्योंकि वे अपशिष्ट निष्कासन के लिए होते हैं।​

18. निम्नलिखित में से कौन कीमोथेरेपी को सही ढंग से व्याख्यायित करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए रसायनों का उपयोग
Solution:
  • कीमोथेरेपी
    • यह एक चिकित्सीय दृष्टिकोण है
    • जिसमें बीमारियों, विशेष रूप से कैंसर, का इलाज करने के लिए दवाओं या रसायनों का उपयोग किया जाता है।
    • कीमोथेरेपी दवाएं तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं को मारने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं
    • जैसे कैंसर कोशिकाएं। हालांकि, यह शब्द मूल रूप से किसी भी बीमारी के इलाज के लिए रसायनों के उपयोग को संदर्भित करता है
    • (जैसे एंटीबायोटिक्स संक्रमण के लिए कीमोथेरेपी का एक रूप हैं)।
  • कीमोथेरेपी कैसे काम करती है
    • उनके विभाजन को रोकती हैं या उन्हें मरने के लिए मजबूर करती हैं।
    • ये दवाएं रक्तप्रवाह के माध्यम से पूरे शरीर में फैलती हैं
    • जिससे यह उपचार उन कैंसरों के लिए प्रभावी होता है जो शरीर के कई हिस्सों में फैल चुके हों।
    • इलाज आमतौर पर चक्रों (cycles) में दिया जाता है
    • जहां दवा लेने के बाद आराम का समय होता है ताकि शरीर रिकवर कर सके।​
  • उपयोग के प्रकार
    • मुख्य इलाज (Primary Therapy): रक्त कैंसर जैसे ल्यूकेमिया में कीमोथेरेपी अकेले मुख्य उपचार के रूप में काम करती है।​
    • सर्जरी से पहले (Neoadjuvant): ट्यूमर का आकार कम करने के लिए सर्जरी से पहले दी जाती है।​
    • सर्जरी के बाद (Adjuvant): बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने और पुनरावृत्ति रोकने के लिए।​
    • पैलियेटिव केयर: उन्नत कैंसर में लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए।​
  • प्रशासन के तरीके
    • कीमोथेरेपी गोली, इंजेक्शन, अंतःशिरा (IV) इन्फ्यूजन या स्थानीय रूप से प्रभावित अंग में दी जा सकती है।
    • नसों में दी जाने वाली सबसे आम विधि है, जो अस्पताल या क्लिनिक में 30 मिनट से कई घंटों तक चल सकती है।
    • चक्रों की संख्या कैंसर के प्रकार, स्टेज और मरीज की स्थिति पर निर्भर करती है
    • जो आमतौर पर 4-6 चक्रों तक हो सकती है।​
  • फायदे और सीमाएं
    • यह कैंसर की वृद्धि को नियंत्रित कर जीवन अवधि बढ़ाती है
    • अन्य उपचारों जैसे रेडियोथेरेपी के प्रभाव को मजबूत करती है।
    • हालांकि, तेजी से बढ़ने वाली स्वस्थ कोशिकाएं (जैसे बाल, नाखून, आंतों की कोशिकाएं) भी प्रभावित होती हैं
    • जिससे साइड इफेक्ट्स जैसे बाल झड़ना, उल्टी, थकान और संक्रमण का खतरा होता है।
    • आधुनिक दवाएं इन प्रभावों को कम करने में मदद करती हैं।​

19. कौन-सा सामान्य दीर्घकालिक संक्रमण तब विकसित होता है जब मुंह में जीवाणु शर्करा का चयापचय करके अम्ल का उत्पादन करता है, जो दांतों के कठोर ऊतकों को अखनिजीकृत करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22, 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) दंत क्षरण
Solution:
  • दंत क्षरण / दाँत का सड़ना
    • इसे आमतौर पर "कैविटीज़" या "दाँत का सड़ना" कहा जाता है।
    • यह एक दीर्घकालिक संक्रामक रोग है
    • जिसमें मुंह में बैक्टीरिया (विशेषकर स्ट्रेप्टोकॉकस म्यूटन्स) शर्करा और कार्बोहाइड्रेट का चयापचय करते हैं
    • लैक्टिक एसिड जैसे अम्ल उत्पन्न करते हैं।
    • ये अम्ल दांतों के इनेमल और डेंटिन (कठोर ऊतकों) से खनिजों को घोलते (अखनिजीकृत करते) हैं
    • जिससे दांतों में छोटे-छोटे छेद या क्षरण हो जाते हैं। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए
    • तो यह क्षरण गहरा हो सकता है, जिससे दर्द, संक्रमण और अंततः दांतों का नुकसान हो सकता है।
  • कारण और जीवाणु
    • जो मुंह के अम्लीय वातावरण में फलते-फूलते हैं।
    • ये जीवाणु भोजन से प्राप्त शर्करा (जैसे सुक्रोज, ग्लूकोज, फ्रुक्टोज) को किण्वन द्वारा चयापचय करते हैं
    • जिससे लैक्टिक अम्ल (lactic acid) का उत्पादन होता है।
    • जब मुंह का pH 5.5 से नीचे चला जाता है, तो हाइड्रॉक्सीएपेटाइट क्रिस्टल घुलने लगते हैं
    • जो विखनिजीकरण की शुरुआत है।​
  • प्रक्रिया का विवरण
    • प्रक्रिया चार चरणों में होती है: पेलिकल निर्माण, बैक्टीरिया का आसंजन, प्लाक परिपक्वता और अम्ल उत्पादन।
    • भोजन के बाद शर्करा प्लाक में फंसती है, जीवाणु इसे ऊर्जा के लिए तोड़ते हैं
    • 20-30 मिनट में pH न्यूनतम (4.5-5.5) पर पहुंच जाता है।
    • यदि लार द्वारा पुनःखनिजीकरण (remineralization) न हो पाए
    • तो इनैमल स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है, छिद्र बनते हैं।​
  • जोखिम कारक
    • आवृत्ति: बार-बार चीनी युक्त भोजन या स्नैक्स से अम्लीय हमले बढ़ते हैं।​
    • स्वच्छता: अपर्याप्त ब्रशिंग या फ्लॉसिंग से प्लाक जमा होता है।​
    • आनुवंशिकता और लार: कम लार प्रवाह या अम्लीय लार क्षय को बढ़ावा देती है।​
  • रोकथाम
    • फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट विखनिजीकरण को रोकता है
    • पुनःखनिजीकरण को बढ़ावा देता है। दिन में दो बार ब्रशिंग, कम चीनी आहार और नियमित डेंटल चेकअप आवश्यक हैं।
    • प्रोबायोटिक्स या शहद जैसे प्राकृतिक विकर्षक भी सहायक हो सकते हैं।​

20. किस एंटिबायोटिक को पहली चमत्कारिक दवा माना जाता है, जिसका उपयोग गले के संक्रमण, मस्तिष्क ज्वर (meningitis), सिफलिस (syphillis) और अन्य जीवाणु संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) पेनिसिलिन
Solution:
  • पेनिसिलिन
    • यह दुनिया की पहली खोजी गई एंटीबायोटिक थी
    • जिसे 1928 में अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने खोजा था और 1940 के दशक में बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपयोग किया गया।
    • इसे अक्सर "चमत्कारिक दवा" माना जाता है
    • क्योंकि इसने विभिन्न जीवाणु संक्रमणों जैसे गले के संक्रमण (स्ट्रेप थ्रोट), मेनिन्जाइटिस, सिफलिस, निमोनिया और गोनोरिया के इलाज में क्रांति ला दी और लाखों लोगों की जान बचाई।
  • खोज का इतिहास
    •  उन्होंने देखा कि यह फफूंद स्टेफिलोकोकस बैक्टीरिया के विकास को रोक देती है।
    • 1940 में हॉवर्ड फ्लोरी और अर्न्स्ट चेन ने इसे शुद्ध कर मानव उपयोग के लिए तैयार किया
    • जिसके लिए 1945 में नोबेल पुरस्कार मिला। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ
    • जिसने लाखों सैनिकों के जीवन बचाए ।​
  • चिकित्सीय उपयोग
    • पेनिसिलिन बीटा-लैक्टम एंटीबायोटिक है जो ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति को नष्ट कर देता है।
    • गले का संक्रमण: स्ट्रेप थ्रोट (स्ट्रेप्टोकोकस) के लिए पेनिसिलिन V मौखिक रूप से 10 दिनों तक दिया जाता है।
    • मेनिन्जाइटिस: स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया या नीसेरिया मेनिन्जाइटिडिस से होने वाले मस्तिष्क ज्वर में पेनिसिलिन G इंट्रावेनस उच्च खुराक में प्रयोग होता है, जो रक्त-मस्तिष्क अवरोध को पार कर प्रभावी होता है।
    • सिफलिस: ट्रेपोनेमा पैलिडम से होने वाली इस बीमारी के प्रारंभिक चरण में बेंजाथाइन पेनिसिलिन G की एकल इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन (2.4 मिलियन यूनिट) पर्याप्त है; उन्नत चरणों में 3 साप्ताहिक डोज ।​
    • यह निमोनिया, गैस गैंग्रीन, एंडोकार्डाइटिस आदि में भी उपयोगी है ।​
  • चमत्कारिक क्यों माना जाता है
    • पेनिसिलिन से पहले संक्रमणों का इलाज सीमित था
    • सल्फा ड्रग्स आंशिक रूप से काम करते थे, लेकिन पेनिसिलिन ने तुरंत असर दिखाया।
    • उदाहरणस्वरूप, सिफलिस के मरीजों में एक इंजेक्शन से लक्षण गायब हो जाते थे।
    • द्वितीय विश्व युद्ध में घावों के संक्रमण से होने वाली मौतें 90% से घटकर न्यूनतम हो गईं।
    • इसे "चमत्कारिक दवा" कहा गया क्योंकि यह मानव कोशिकाओं को नुकसान 없이 बैक्टीरिया मारती है ।​
  • रूप और प्रशासन
    • पेनिसिलिन G: गंभीर संक्रमणों (मेनिन्जाइटिस, सिफलिस) के लिए इंजेक्शन।
    • पेनिसिलिन V: हल्के संक्रमणों (गला दर्द) के लिए गोली।
    • खुराक रोगी की स्थिति पर निर्भर करती है
    • लेकिन एलर्जी वाले रोगियों में वैकल्पिक दवाएं जैसे सेफालोस्पोरिन्स दी जाती हैं।
    • प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) अब समस्या है, इसलिए इसका विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है