विविध (जीव विज्ञान) भाग-II

Total Questions: 39

21. डिब्बाबंदी के लिए टमाटर, आलू और अन्य फलों और सब्जियों से छिलके निकालने और खाद्य परिरक्षकों में एक घटक के रूप में किस यौगिक का उपयोग किया जाता है, जो भोजन में फफूंदी और जीवाणुओं की वृद्धि रोकने में मदद करता है? [Phase-XI 27 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) सोडियम हाइड्रॉक्साइड
Solution:
  • सोडियम हाइड्रॉक्साइड
    • इसे कास्टिक सोडा या लाई (lye) के नाम से भी जाना जाता है।
    • इसका उपयोग भोजन प्रसंस्करण में कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
  • छिलके उतारने
    •  टमाटर, आलू और अन्य फलों व सब्जियों से छिलके उतारने के लिए
    • इसे अक्सर 'लाई पीलिंग' विधि में प्रयोग किया जाता है।
    • इसमें सब्जियों को गर्म सोडियम हाइड्रॉक्साइड घोल में डुबोया जाता है
    • जिससे छिलका ढीला पड़ जाता है और आसानी से हटाया जा सकता है।
  • खाद्य परिरक्षक
    •  हालांकि यह सीधे तौर पर एक जीवाणुनाशक परिरक्षक नहीं है
    • इसका उपयोग कुछ खाद्य पदार्थों में pH संतुलन को समायोजित करने और एक ऐसा वातावरण बनाने के लिए किया जा सकता है
    • जो माइक्रोबियल वृद्धि को रोकता है।
    • यह कुछ संसाधित खाद्य पदार्थों में एक एडिटिव के रूप में भी कार्य करता है।
  • छिलके निकालने की प्रक्रिया
    • सोडियम हाइड्रॉक्साइड को गर्म पानी में घोलकर (लाये घोल) फलों-सब्जियों पर छिड़काव या डुबोया जाता है
    •  क्योंकि यह त्वचा को बिना क्षति पहुँचाए हटा देता है।
    • उसके बाद पानी से अच्छी तरह धोया जाता है ताकि कोई अवशेष न रहे।​
  • परिरक्षक के रूप में भूमिका
    • खाद्य परिरक्षकों में सोडियम हाइड्रॉक्साइड क्षारीय गुणों से भोजन का pH बढ़ाकर सूक्ष्मजीवों (फफूंदी, बैक्टीरिया) की वृद्धि रोकता है, विशेषकर डिब्बाबंदी से पहले।
    • यह जैतून जैसे उत्पादों के प्रसंस्करण में भी pH नियंत्रण करता है, जिससे खराबी रुकती है।
    • हालांकि, नियंत्रित मात्रा में ही प्रयुक्त होता है।​
  • रासायनिक गुण और सावधानियाँ
    • यह मजबूत क्षार है जो जलन पैदा कर सकता है, इसलिए खाद्य प्रसंस्करण में सख्त सुरक्षा मानक अपनाए जाते हैं।
    • लंबे संपर्क से त्वचा या श्वसन तंत्र को हानि हो सकती है
    • अतः PPE और अच्छी धुलाई अनिवार्य है।
    • अन्य विकल्प जैसे मैग्नीशियम बाइसल्फाइट ऑक्सीजन स्कैवेंजर हैं, लेकिन छिलके हटाने में NaOH प्रमुख है।

22. एक पारिस्थितिकी तंत्र में निम्नलिखित में से कौन-सा/से स्वपोषी है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) पौधे
Solution:
  • स्वपोषी
    • वे जीव होते हैं जो सूर्य के प्रकाश (प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से) या रासायनिक ऊर्जा (रसायन संश्लेषण के माध्यम से) का उपयोग करके अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
    • वे खाद्य श्रृंखला के आधार पर प्राथमिक उत्पादक होते हैं।
  • पौधे
    • अधिकांश पौधे प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके अपना भोजन स्वयं बनाते हैं
    • इसलिए वे स्वपोषी होते हैं।
  • स्वपोषी की परिभाषा
    • जैसा कि क्लोरोफिल युक्त पौधों में होता है।
    • कुछ जीवाणु रासायनिक संश्लेषण द्वारा गहराई के समुद्रों में गंधक या मीथेन जैसे रसायनों से भोजन बनाते हैं।
    • ये सभी परपोषी जीवों (heterotrophs) को ऊर्जा प्रदान करते हैं।​
  • पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका
    • हर पारिस्थितिकी तंत्र में स्वपोषी मूल घटक होते हैं, क्योंकि वे अकार्बनिक से कार्बनिक पदार्थों का निर्माण करते हैं
    • जो खाद्य श्रृंखला (food chain) के प्रथम पोषी स्तर (trophic level) पर रहते हैं।
    • बिना स्वपोषियों के तंत्र ढह सकता है
    • क्योंकि परपोषी और अपघटक (decomposers) इनके बने भोजन पर निर्भर रहते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, जंगल में पेड़-पौधे, घास के मैदान में घास, और जलाशयों में शैवाल स्वपोषी हैं।​
  • उदाहरण
    • प्रकाश संश्लेशी स्वपोषी: हरे पौधे, शैवाल, और सायनोबैक्टीरिया, जो CO₂ और H₂O से ग्लूकोज बनाते हैं।
    • रासायनिक संश्लेशी स्वपोषी: गंधक बैक्टीरिया (जैसे Thiobacillus)
    • जो हाइड्रोथर्मल वेंट्स में रहते हैं।
    • ये खाद्य जाल (food web) को स्थिर रखते हैं और जैव-भूमि (biomass) का आधार बनाते हैं।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • स्वपोषी ऊर्जा पिरामिड के निचले भाग पर अधिकतम ऊर्जा संचय करते हैं
    • लेकिन ऊर्जा हस्तांतरण में 10% नियम लागू होता है।
    • पारिस्थितिकी तंत्र के बिना ये आत्मनिर्भर नहीं हो सकते, क्योंकि अपघटक पोषक चक्रण में सहायक होते हैं।

23. निम्नलिखित में से किस यौगिक का व्यवस्थित नाम नाइट्रोजन ट्राइहाइड्राइड है, जिसका कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में उर्वरक और प्रशीतक के रूप में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है? [CHSL (T-I) 03 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अमोनिया
Solution:
  • अमोनिया
    •  इसका व्यवस्थित नाम नाइट्रोजन ट्राइहाइड्राइड है।
    • यह एक रंगहीन गैस है जिसकी तीखी गंध होती है।
  • उर्वरक
    • यह नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है
  • प्रशीतक
    • अमोनिया का उपयोग औद्योगिक प्रशीतन प्रणालियों में प्रशीतक के रूप में भी किया जाता है
    • क्योंकि इसमें उच्च वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा होती है।
  • रासायनिक संरचना
    • जिसमें नाइट्रोजन की p-ऑर्बिटल और हाइड्रोजन के s-ऑर्बिटल मिलकर sp³ हाइब्रिडाइजेशन बनाते हैं
    • जिससे पिरामिडल आकार प्राप्त होता है। इसकी बंध कोण लगभग 107° होती है
    • यह एक ध्रुवीय अणु है। यह गैस रूप में कमरे के तापमान पर मौजूद रहता है
    • लेकिन द्रवीकरण आसान होने से औद्योगिक उपयोग में महत्वपूर्ण है।​
  • उर्वरक के रूप में उपयोग
    • अमोनिया का 80% से अधिक उत्पादन उर्वरकों के लिए होता है
    • विशेष रूप से हेबर-बॉश प्रक्रिया से।
    • इससे यूरिया (CH₄N₂O), अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃) और अमोनियम सल्फेट जैसे नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक बनते हैं
    • जो फसलों की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं। वैश्विक स्तर पर यह कृषि उत्पादकता का आधार है।​
  • प्रशीतक (रेफ्रिजरेंट) के रूप में उपयोग
    • द्रवीकृत अमोनिया का उपयोग औद्योगिक रेफ्रिजरेशन सिस्टम में R717 के कोड से किया जाता है
    • क्योंकि इसकी उच्च गर्मी अवशोषण क्षमता (लेटेंट हीट) और पर्यावरण-अनुकूल गुण होते हैं।
    • यह बड़े कोल्ड स्टोरेज, मांस पैकिंग और पेय उद्योगों में लोकप्रिय है
    • हालांकि विषाक्तता के कारण सावधानी बरतनी पड़ती है।​
  • अन्य औद्योगिक प्रक्रियाएँ
    • अमोनिया नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) के ऑस्टवाल्ड प्रक्रिया में कच्चा माल है
    • जो विस्फोटकों, रंगों और प्लास्टिक में उपयोग होता है।
    • यह नायलॉन, रेजिन और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में भी मध्यवर्ती है।
    • कुल मिलाकर, इसकी वार्षिक वैश्विक मांग करोड़ों टन में है।​

24. पुमणु (एंथेरोजोइड्स) के स्थानांतरण के लिए कौन-सा भौतिक घटक आवश्यक है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जल
Solution:
  • पुमणु / शुक्राणु
    • ये कई निचले पौधों (जैसे ब्रायोफाइट्स - मॉस और लिवरवर्ट्स, और टेरिडोफाइट्स - फर्न) में नर युग्मक होते हैं।
    • ये गतिमान होते हैं (यानी, उनमें तैरने के लिए फ्लैगेला होता है)।
    • इन पुमणु को नर प्रजनन संरचना (एंथेरिडियम) से मादा प्रजनन संरचना (आर्चिगोनियम) तक पहुंचने और अंडे को निषेचित करने के लिए जल (Water) की आवश्यकता होती है।
    • पानी की एक पतली परत भी उनके स्थानांतरण के लिए पर्याप्त होती है।
    • यही कारण है कि ये पौधे अक्सर नम या आर्द्र वातावरण में पाए जाते हैं।
  • एंथेरोजोइड्स क्या हैं?
    • एंथेरोजोइड्स, जिन्हें पुमणु या अंड्रोजोइड्स भी कहा जाता है
    • ब्रायोफाइट्स (जैसे मॉस) और टेरिडोफाइट्स (जैसे फर्न) में पाए जाने वाले द्विगुणित (haploid) नर युग्मक हैं।
    • ये बीजाणुजनक (gametophyte) चरण के एन्थरिडिया में बनते हैं
    • सर्पिलाकार आकार के होते हैं, जिसमें दो या कई कशाभिकाएँ होती हैं।
    • इनकी गति के लिए तरल माध्यम अनिवार्य होता है, क्योंकि ये स्वयं ऊर्जा उत्पादन नहीं कर पाते।​
  • स्थानांतरण प्रक्रिया
    • एंथेरोजोइड्स का स्थानांतरण जल-मध्यस्थ निषेचन द्वारा होता है।
    • न्थरिडिया से मुक्त होने पर ये वर्षा जल, ओस या नदी के पानी में तैरते हुए मादा युग्मक (egg) वाले आर्केगोनिया तक पहुँचते हैं।
    • कशाभिकाएँ आगे-पीछे हिलकर गति उत्पन्न करती हैं
    • जल की सतह पर तनाव (surface tension) तथा धारा भी सहायता करती है।
    • बिना जल के ये सूख जाते हैं और गतिहीन हो जाते हैं।​
  • अन्य घटकों की भूमिका क्यों नहीं?
    • वायु: वायु परागकणों (pollen) के स्थानांतरण (anemophily) में सहायक होती है
    • लेकिन एंथेरोजोइड्स सूक्ष्म और नाजुक होते हैं, जिन्हें हवा उड़ा नहीं सकती।
    • ये पुष्पी पादपों (angiosperms) में नहीं पाए जाते।​
    • मिट्टी: मिट्टी स्थिरीकरण देती है, लेकिन तरल माध्यम नहीं।
    • एंथेरोजोइड्स मिट्टी की सतह पर जल की पतली परत में ही चलते हैं।​
    • प्रकाश: प्रकाश प्रकाशसंश्लेषण या विकास के लिए जरूरी है
    • लेकिन स्थानांतरण सीधे भौतिक प्रक्रिया है जो जल पर निर्भर करती है।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • यह प्रक्रिया गैर-संवहनी संवहनी क्रिप्टोगैम्स (non-vascular cryptogams) की जल निर्भरता दर्शाती है
    • जिसके कारण ये स्थलीय वातावरण में सीमित रहते हैं।
    • उच्च पादपों (जैसे जिम्नोस्पर्म्स, एंजियोस्पर्म्स) में परागकण नलिकाएँ बनाकर जल-स्वतंत्र निषेचन करते हैं।
    • उदाहरण: मॉस (Funaria) में वर्षा ऋतु में ही निषेचन होता है।​

25. ....... लकड़ी में छिद्र करने वाला शिपवर्म है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) टेरिडो
Solution:
  • टेरिडो
    •  यह एक प्रकार का समुद्री द्विकपाटी (bivalve mollusc) है
    • जिसे आमतौर पर "शिपवर्म" (shipworm) कहा जाता है।
    • यह वास्तव में एक कीड़ा नहीं है, बल्कि एक पतला, कीड़ा जैसा मोलस्क है
    • जो लकड़ी में सुरंगें खोदकर रहता है। यह लकड़ी को खाता है
    • यह लकड़ी के सेल्यूलोज को पचाने के लिए जीवाणुओं पर निर्भर करता है
    •  इसने ऐतिहासिक रूप से और वर्तमान में भी जहाजों
    • घाटों और अन्य समुद्री लकड़ी की संरचनाओं को काफी नुकसान पहुंचाया है।
    • इसका वैज्ञानिक नाम Teredo navalis है।
  • टेरेडो की पहचान और वर्गीकरण
    • सामने के सिरे पर दो छोटे शंखीय वाल्व (shell valves) होते हैं
    • जो चाकू की तरह तेज़ होते हैं और लकड़ी काटने के लिए उपयोग होते हैं।
    • पीछे साइफन (siphon) होता है जो ऑक्सीजन और भोजन ग्रहण करता है।​
  • लकड़ी छेदने की प्रक्रिया
    • वाल्व का उपयोग: टेरेडो लार्वा चरण में समुद्री लकड़ी की सतह पर पहुँचता है।
    • वयस्क होने पर वाल्वों से रासायनिक पदार्थ (enzyme) स्रावित कर लकड़ी को नरम करता है
    • फिर वाल्व घुमाकर छेद बनाता है।
    • गहराई तक प्रवेश: छेद ट्यूबनल (burrows) के रूप में 1 मीटर तक गहरे हो सकते हैं।
    • ये छेद लकड़ी को अंदर से खोखला कर देते हैं।
    • पोषण: लकड़ी का सेल्यूलोज सहजीवी बैक्टीरिया द्वारा पचाया जाता है
    • जो टेरेडो के गलफड़े (gills) में रहते हैं।​
  • पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व
    • शिपवर्म प्राचीन काल से जहाजों, घाटों, पुलों और लकड़ी के गोदामों को नुकसान पहुँचाते रहे हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, स्पेनिश गैलियन जहाजों को बचाने के लिए तांबे की परत चढ़ाई जाती थी।
    • आधुनिक समय में जहरीले कोटिंग्स या प्लास्टिक का उपयोग रोकथाम के लिए होता है।
    • कुछ प्रजातियाँ मीठे पानी में भी पाई जाती हैं और चूना पत्थर तक खा सकती हैं।

26. निम्नलिखित में से किसे एंजाइम के रूप में जाना जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) जैविक उत्प्रेरक
Solution:
  • जैविक उत्प्रेरक
    • एंजाइम प्रोटीन होते हैं (कुछ अपवादों के साथ, जैसे राइबोजाइम आरएनए से बने होते हैं
    • जो जीवित जीवों में होने वाली जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करते हैं।
    • वे प्रतिक्रियाओं की सक्रियण ऊर्जा को कम करके ऐसा करते हैं
    • जिससे वे बहुत तेजी से आगे बढ़ती हैं। वे स्वयं प्रतिक्रिया में उपभोग नहीं होते हैं।
    • इसलिए, उन्हें जैविक उत्प्रेरक कहा जाता है।
  • एंजाइम की परिभाषा
    • एंजाइम प्रोटीन अणु हैं जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं की गति को लाखों गुना बढ़ा देते हैं
    • बिना स्वयं खर्च हुए। ये सब्सट्रेट से बंधकर सक्रिय स्थल पर प्रतिक्रिया उत्प्रेरित करते हैं
    • जैसे कुंजी-ताला मॉडल में। अधिकांश एंजाइम प्रोटीन होते हैं, किंतु कुछ आरएनए-आधारित (राइबोजाइम) भी होते हैं।​
  • एंजाइम के कार्य
    • एंजाइम पाचन तंत्र में जटिल अणुओं को सरल रूपों में तोड़ते हैं
    • जैसे स्टार्च को ग्लूकोज में। ये चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को नियंत्रित करते हैं
    • डीएनए मरम्मत करते हैं तथा ऊर्जा उत्पादन में सहायक होते हैं।​
    • पाचन एंजाइम: एमाइलेज स्टार्च तोड़ता है, लाइपेज वसा पचाता है।​
    • डीएनए संबंधी: हेलिकेज डीएनए को खोलता है, पोलीमरेज प्रतिकृति बनाता है।​
    • ऑक्सीडोरेडक्टेज: ऑक्सीकरण-कमीकरण प्रतिक्रियाओं में ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।​
  • एंजाइम के प्रकार
    • एंजाइमों को छह मुख्य वर्गों में विभाजित किया जाता है
    • ऑक्सीडोरेडक्टेज, ट्रांसफरेज, हाइड्रोलेज, लाइएज, लाइसेस और आइसोमेरेज।
    • प्रत्येक वर्ग विशिष्ट प्रतिक्रिया उत्प्रेरित करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, ट्राईप्सिन (प्रोटीज) प्रोटीन को अमीनो एसिड में विघटित करता है।​
  • एंजाइम का महत्व
    • एंजाइम के बिना जीवन संभव नहीं, क्योंकि ये शरीर के सभी जैव रासायनिक कार्यों को संचालित करते हैं।
    • इनकी कमी से पाचन विकार, मधुमेह या लिवर रोग हो सकते हैं।
    • तापमान, pH और सब्सट्रेट सांद्रता इनकी क्रिया प्रभावित करते हैं।​​

27. शरीर में जब ग्लूकोज उपलब्ध नहीं होता है, तब निम्नलिखित में से किसका उपयोग ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा सकता है?' [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) वसीय अम्ल
Solution:
  • शरीर का प्राथमिक ऊर्जा स्रोत ग्लूकोज (कार्बोहाइड्रेट से) है। जब ग्लूकोज उपलब्ध नहीं होता है
  • (उदाहरण के लिए, उपवास या कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार के दौरान), शरीर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर मुड़ता है:
  • वसीय अम्ल
    • वसा (ट्राइग्लिसराइड्स) को वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में तोड़ा जा सकता है।
    • वसीय अम्लों को बीटा-ऑक्सीकरण के माध्यम से एसिटाइल-कोए में तोड़ा जा सकता है
    • जो तब क्रेब्स चक्र में प्रवेश करता है और ऊर्जा (एटीपी) उत्पन्न करता है।
    • मस्तिष्क को ऊर्जा के लिए वसीय अम्लों का सीधे उपयोग करने में कठिनाई होती है
    • लेकिन लिवर वसीय अम्लों से कीटोन बॉडीज़ (ketone bodies) उत्पन्न कर सकता है
    • जिनका उपयोग मस्तिष्क और अन्य ऊतक ऊर्जा के लिए कर सकते हैं।
  • ऊर्जा चयापचय की प्रक्रिया
    • जब रक्त ग्लूकोज स्तर कम हो जाता है
    • जैसे उपवास या लंबे व्यायाम के दौरान, हार्मोन जैसे ग्लूकागन वसा को तोड़ने का संकेत देते हैं।
    • वसीय अम्ल प्राथमिक वैकल्पिक स्रोत होते हैं क्योंकि ये उच्च ऊर्जा घनत्व वाले होते हैं
    • लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं। ऐमिनो अम्ल भी ग्लूकोनियोजेनेसिस के जरिए ग्लूकोज बनाते हैं
    • सीधे ऊर्जा के लिए उपयोग होते हैं, लेकिन यह अंतिम विकल्प है जब वसा भंडार समाप्त हो जाते हैं।​
  • अन्य वैकल्पिक स्रोत
    • कीटोन निकाय: लंबे उपवास में यकृत वसीय अम्ल से कीटोन बनाता है
    • जो मस्तिष्क सहित ऊतकों द्वारा ऊर्जा के लिए उपयोग होते हैं।​
    • लैक्टिक अम्ल: अवायवीय स्थितियों में बनता है, लेकिन ऊर्जा स्रोत कम प्रभावी है
    • कोरी चक्र से ग्लूकोज में पुनः परिवर्तित होता है।​
    • ग्लाइकोजन: पहले यकृत से टूटता है, लेकिन ग्लूकोज अनुपलब्ध होने पर वसीय अम्ल प्रमुख हो जाते हैं।

28. दंत स्वास्थ्य से संबंधित, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) टूथपेस्ट, जो आमतौर पर अम्लीय होता है, दांतों की सड़न को रोकता है।
Solution:
  • टूथपेस्ट, जो आमतौर पर अम्लीय होता है, दांतों की सड़न को रोकता है।
  • यह कथन गलत है। अधिकांश टूथपेस्ट, विशेषकर वे जो दांतों की सड़न को रोकने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं
  • क्षारीय (alkaline) होते हैं या तटस्थ pH के करीब होते हैं। ऐसा इसलिए है
  • क्योंकि वे मुंह में बैक्टीरिया द्वारा उत्पादित अम्लों को बेअसर करने में मदद करते हैं
  • जिससे दांतों के इनेमल का अखनिजीकरण (demineralization) रोका जा सके।
  • यदि टूथपेस्ट अम्लीय होता, तो यह वास्तव में दांतों की सड़न को बढ़ा सकता था।
  • अन्य सामान्य गलत धारणाएं
    • ज्यादा जोर से ब्रश करने से दांत बेहतर साफ होते हैं
    • यह मिथक खतरनाक है, क्योंकि अधिक दबाव से मसूड़े जख्मी हो जाते हैं
    • इनेमल घिसता है और संवेदनशीलता बढ़ती है।
    • सॉफ्ट ब्रिसल ब्रश से हल्के हाथों ब्रश करना सही तरीका है।​
    • ओरल समस्याएं केवल मुंह तक सीमित रहती हैं
    • गलत। मुंह के बैक्टीरिया हृदय रोग, डायबिटीज और श्वसन संक्रमण जैसी全身 समस्याओं का कारण बन सकते हैं।​
    • केवल मिठाइयां कैविटी का कारण बनती हैं
    • चिपचिपा या स्टार्चयुक्त भोजन भी अम्ल पैदा कर गुहाएं बनाता है; भोजन के बाद कुल्ला जरूरी है।​
  • सही दंत स्वास्थ्य आदतें
    • दिन में दो बार फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करें, फ्लॉसिंग अपनाएं और हर 6 महीने चेकअप करवाएं।
    • रात को माउथवॉश ब्रश का विकल्प नहीं है, क्योंकि यह फूड पार्टिकल्स नहीं हटाता।
    • धूम्रपान और अत्यधिक चीनी से बचें, क्योंकि ये मसूड़ों की बीमारी और क्षय बढ़ाते हैं।​
  • क्यों फैलती हैं ये भ्रांतियां
    • ये मिथक पुरानी मान्यताओं या विज्ञापनों से आते हैं, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं
    • संतुलित pH और नियमित स्वच्छता ही दांत मजबूत रखती है।
    • गलत कथनों पर विश्वास करने से इनेमल क्षय या मसूड़े रोग हो सकते हैं। सही जानकारी से दंत स्वास्थ्य सुधारें।​

29. दही बनाने के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से सही है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

कथन 1: दूध में उपस्थित जीवाणु लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में तोड़ देते हैं।

कथन 2 : लैक्टिक अम्ल का उत्पादन दूध के pH को कम कर देता है, जिससे यह जम कर दही बन जाता है।

कथन 3: दही और योगर्ट समानार्थी हैं और उनकी बनावट एवं स्वाद बिल्कुल एक जैसा है।

Correct Answer: (a) केवल कथन 1 और 2 सही हैं
Solution:
  • कथन 1
    • दूध में उपस्थित जीवाणु लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में तोड़ देते हैं।
    • यह कथन सही है। दही बनाने की प्रक्रिया में, लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) और स्ट्रेप्टोकॉकस
    • जैसे जीवाणु दूध में मौजूद शर्करा, लैक्टोज, को किण्वित करके लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते हैं।
  • कथन 2 
    • लैक्टिक अम्ल का उत्पादन दूध के pH को कम कर देता है, जिससे यह जम कर दही बन जाता है।
    • यह कथन सही है। लैक्टिक एसिड का उत्पादन दूध के pH (अम्लता) को कम करता है।
    • जैसे ही pH कम होता है, दूध में मौजूद प्रोटीन (केसिन) जमने लगते हैं और दही का गाढ़ा, जेल जैसा रूप बनाते हैं।
  • कथन 3
    • दही और योगर्ट समानार्थी हैं और उनकी बनावट एवं स्वाद बिल्कुल एक जैसा है।
    • यह कथन गलत है। जबकि दही और योगर्ट दोनों किण्वित दूध उत्पाद हैं
    • कई बार समानार्थी रूप से उपयोग किए जाते हैं
    • उनके उत्पादन की प्रक्रिया, उपयोग किए जाने वाले विशिष्ट जीवाणु संस्कृतियाँ, और परिणामी बनावट तथा स्वाद में सूक्ष्म अंतर हो सकते हैं।
    • भारत में दूध के किण्वन से बने एक पारंपरिक उत्पाद को संदर्भित करता है
    • जबकि "योगर्ट" एक व्यापक शब्द है
    • जो अक्सर विशिष्ट स्टार्टर कल्चर (जैसे स्ट्रेप्टोकॉकस थर्मोफिलस और लैक्टोबैसिलस बुलगारीकस) और नियंत्रित तापमान पर किण्वित दूध उत्पादों के लिए उपयोग किया जाता है
    • जिसमें विभिन्न शैलियाँ और स्वाद (जैसे फ्रोजन योगर्ट, ग्रीक योगर्ट) शामिल हो सकते हैं।
    • उनकी बनावट और स्वाद बिल्कुल एक जैसा नहीं होता है।
  • घरेलू विधि
    • घर पर दही बनाने के लिए फुल-फैट दूध (भैंस या गाय का) को उबालें, फिर 40-45°C तक ठंडा करें।
    • इसमें 1-2 चम्मच पुराना दही (स्टार्टर कल्चर) मिलाएं और गर्म स्थान पर 5-6 घंटे रखें।
    • गाढ़ा दही के लिए दूध पाउडर या कॉर्नफ्लोर मिला सकते हैं
    • सर्दियों में ओवन या अलमारी में रखना बेहतर होता है।​​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • दूध को बहुत गर्म या ठंडा न रखें, अन्यथा बैक्टीरिया सक्रिय नहीं होंगे।
    • दही में कई सूक्ष्मजीव होते हैं, लेकिन लैक्टोबैसिलस मुख्य रूप से जिम्मेदार है।​
    • योगर्ट और दही भिन्न हैं; योगर्ट में अतिरिक्त स्वाद या स्टेबलाइजर हो सकते हैं।​

30. दिए गए कथनों का अध्ययन कीजिए और सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

(i) मानव रक्त में श्वेत रक्त कोशिका (WBC) अपना आकार बदल सकती है।

(ii) अमीबा का आकार अनियमित होता है।

Correct Answer: (d) दोनों कथन सही हैं।
Solution:
  •  मानव रक्त में श्वेत रक्त कोशिका (WBC) अपना आकार बदल सकती है।
  • यह कथन सही है। श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBCs), विशेष रूप से मैक्रोफेज और न्यूट्रोफिल जैसे फागोसाइटिक WBCs, अपनी आकार बदलने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं।
  • वे स्यूडोपोड्स 'झूठे पैर' का उपयोग करके अमीबॉइड गति प्रदर्शित करते हैं
  • जिससे वे रक्त वाहिकाओं से ऊतकों में घुसपैठ कर सकते हैं
  • शरीर में संक्रमण या चोट के स्थलों तक पहुंच सकते हैं।
  • अमीबा का आकार अनियमित होता है। - यह कथन सही है
  • अमीबा एक एककोशिकीय जीव है जिसकी कोई निश्चित आकृति नहीं होती है।
  • यह लगातार अपने स्यूडोपोड्स (झूठे पैर) का विस्तार और पीछे खींचकर अपना आकार बदलता रहता है
  • जिसका उपयोग वह गति और भोजन ग्रहण करने के लिए करता है।
  • चूंकि दोनों कथन सही हैं, विकल्प (d) सबसे उपयुक्त है।
  • संभावित कथन और उनकी सत्यता
    • कथन 1: दही बनने में लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया मुख्य भूमिका निभाते हैं।
    • यह सही है, क्योंकि लैक्टोबैसिलस एसिडोफिलस या बल्गारिकस जैसे बैक्टीरिया लैक्टोज को अम्ल में किण्वित करते हैं
    • जिससे pH घटकर प्रोटीन जमाव होता है।​​
    • कथन 2: दही बनाना एक रासायनिक परिवर्तन है। सही।
    • लैक्टिक अम्ल निर्माण अपरिवर्तनीय रासायनिक प्रतिक्रिया है
    • जो दूध को स्थायी रूप से दही में बदल देती है; पीछे लौटना असंभव है।​​
    • कथन 3: दही जमाने के लिए दूध का तापमान 35-45°C होना चाहिए।
    •  सही। इस रेंज में बैक्टीरिया सक्रिय रहते हैं
    • अधिक गर्मी मृत्यु का कारण बनती है, ठंडक प्रक्रिया धीमी कर देती है।​​
    • गलत कथन उदाहरण: दही बनाना भौतिक परिवर्तन है।
    • असत्य, क्योंकि रासायनिक संरचना परिवर्तित होती है।​
  • सही विकल्प
    • यदि प्रश्न में विकल्प हैं जैसे (a) केवल 1 सही, (b) 1 और 2 सही, (c) 1, 2 और 3 सही, तो उत्तर (c) 1, 2 और 3 सही है।
    • यह जैव रसायन और किण्वन की मानक अवधारणा पर आधारित है।
    • प्रक्रिया 5-12 घंटे लेती है, जिसमें अम्लता 0.7-0.9% पहुंचती है।​​
  • विस्तृत प्रक्रिया
    • दूध उबालकर 40°C ठंडा करें, जामन (पुराना दही) मिलाएं।
    • बैक्टीरिया बढ़ते हैं, pH 4.5 तक गिरता है
    • कैसीन प्रोटीन जम जाता है। सर्दियों में गर्म स्थान उपयोगी।​​