Solution:कथन 1: दूध में उपस्थित जीवाणु लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में तोड़ देते हैं। - यह कथन सही है। दही बनाने की प्रक्रिया में, लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) और स्ट्रेप्टोकॉकस (Streptococcus) जैसे जीवाणु दूध में मौजूद शर्करा, लैक्टोज, को किण्वित करके लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते हैं।कथन 2 : लैक्टिक अम्ल का उत्पादन दूध के pH को कम कर देता है, जिससे यह जम कर दही बन जाता है। - यह कथन सही है। लैक्टिक एसिड का उत्पादन दूध के pH (अम्लता) को कम करता है। जैसे ही pH कम होता है, दूध में मौजूद प्रोटीन (केसिन) जमने लगते हैं और दही का गाढ़ा, जेल जैसा रूप बनाते हैं।
कथन 3: दही और योगर्ट समानार्थी हैं और उनकी बनावट एवं स्वाद बिल्कुल एक जैसा है। - यह कथन गलत है। जबकि दही और योगर्ट दोनों किण्वित दूध उत्पाद हैं और कई बार समानार्थी रूप से उपयोग किए जाते हैं, उनके उत्पादन की प्रक्रिया, उपयोग किए जाने वाले विशिष्ट जीवाणु संस्कृतियाँ, और परिणामी बनावट तथा स्वाद में सूक्ष्म अंतर हो सकते हैं। "दही" भारत में दूध के किण्वन से बने एक पारंपरिक उत्पाद को संदर्भित करता है, जबकि "योगर्ट" एक व्यापक शब्द है जो अक्सर विशिष्ट स्टार्टर कल्चर (जैसे स्ट्रेप्टोकॉकस थर्मोफिलस और लैक्टोबैसिलस बुलगारीकस) और नियंत्रित तापमान पर किण्वित दूध उत्पादों के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें विभिन्न शैलियाँ और स्वाद (जैसे फ्रोजन योगर्ट, ग्रीक योगर्ट) शामिल हो सकते हैं। उनकी बनावट और स्वाद बिल्कुल एक जैसा नहीं होता है।