विविध (परंपरागत सामान्य ज्ञान) भाग-I

Total Questions: 30

1. संस्कृत भाषा ....... भाषा-परिवार का हिस्सा है। [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भारत-यूरोपीय
Solution:
  • संस्कृत भाषा भारत-यूरोपीय भाषा परिवार का हिस्सा है।
  • वैदिक संस्कृत में (लगभग 1500-600 ईसा पूर्व) संस्कृत भाषा का सबसे प्रारंभिक रूप है।
  • संस्कृत भाषा का सबसे पुराना ज्ञात वेद, ऋग्वेद है, जिसमें संस्कृत भाषा में रचित लगभग 1028 सूक्त हैं।
  • भाषा-परिवार का परिचय
    • इंडो-यूरोपीय भाषा-परिवार विश्व का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक भाषा-समूह है
    • जिसमें यूरोप, एशिया और उनके आसपास के क्षेत्रों की सैकड़ों भाषाएँ शामिल हैं।
    • इस परिवार की भाषाएँ ध्वन्यात्मक, व्याकरणिक और शब्दावली की समानताओं से जुड़ी हैं
    • जैसे अंग्रेजी का "mother" संस्कृत के "मातृ" से मिलता-जुलता है।
    • संस्कृत इस परिवार की इंडो-ईरानी शाखा के अंतर्गत हिंद-आर्य उपशाखा की प्रमुख भाषा है।
  • संस्कृत का स्थान और विकास
    • संस्कृत का प्राचीनतम रूप वैदिक संस्कृत है, जो ऋग्वेद (लगभग 1500 ईसा पूर्व) में मिलता है
    • जो इसे हिंद-यूरोपीय भाषाओं की सबसे पुरानी लिखित भाषाओं में से एक बनाता है।
    • शास्त्रीय संस्कृत का मानकीकरण पाणिनि ने अष्टाध्यायी (लगभग 500 ईसा पूर्व) में किया
    • जिसकी व्याकरण व्यवस्था आज भी भाषाविज्ञान का आधार है।
    • यह भाषा ग्रीक, लैटिन, फारसी, रूसी, जर्मन जैसी भाषाओं से निकटता रखती है।
  • अन्य भाषाओं से संबंध
    • हिंद-आर्य शाखा: हिंदी, बांग्ला, मराठी, पंजाबी, गुजराती, नेपाली जैसी आधुनिक भारतीय भाषाएँ संस्कृत से ही विकसित हुई हैं।
    • ईरानी शाखा: अवेस्ता (प्राचीन ईरानी) और आधुनिक फारसी से समानताएँ।
    • यूरोपीय शाखाएँ: अंग्रेजी (brother-भ्रातृ), फ्रेंच, स्पेनिश, इतालवी आदि में हजारों शब्द संस्कृत मूल के हैं।
  • महत्वपूर्ण विशेषताएँ
    • संस्कृत की ध्वनिविज्ञान (फोनोलॉजी) अत्यंत वैज्ञानिक है
    • जिसमें स्वर और व्यंजन सटीक रूप से परिभाषित हैं।
    • इसकी संरचना में आठ विभक्तियाँ (केस), तीन वचन और जटिल संयोजन हैं
    • जो इसे परफेक्ट भाषा बनाते हैं। पाणिनि की व्याकरण ने भाषा-विज्ञान को नया आयाम दिया।
  • वैश्विक प्रभाव
    • संस्कृत ने दक्षिण-पूर्व एशिया (जावा, बाली, थाईलैंड) की भाषाओं और संस्कृतियों को प्रभावित किया।
    • आज यह धार्मिक ग्रंथों (वेद, उपनिषद, महाभारत), दर्शन (योग, वेदांत) और विज्ञान (आयुर्वेद, गणित) की भाषा बनी हुई है।
    • भारत में इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है।

2. संथाल समुदाय ....... भारत का एक नृजातीय समूह है। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) पूर्वी
Solution:
  • संथाल समुदाय पूर्वी भारत का एक नृजातीय समूह है। संथाल, झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति है।
  • संथाल समुदाय की जनसंख्या झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा आदि राज्यों में केंद्रित हैं।
  • भाषा और लिपि
    • संथाल लोग संथाली भाषा बोलते हैं, जो ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार से संबंधित है और भारत की आधिकारिक भाषाओं में शामिल है।
    • उनकी अपनी अद्वितीय लिपि 'ओल चिकी' है, जिसे 1925 में रघुनाथ मुर्मू ने विकसित किया था। यह लिपि खेरवार समुदाय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
  • संस्कृति और कला
    • संथाल समुदाय संगीत, नृत्य और लोककला के लिए प्रसिद्ध है।
    • वे ढोल, बांसुरी, तुरही, तमाक, डब्डी, बनम जैसे वाद्ययंत्र बजाते हैं
    • त्योहारों में सामूहिक नृत्य करते हैं, जहां महिलाएं साड़ी पहनकर एक पंक्ति में नाचती हैं।
    • जादोपटिया उनकी पारंपरिक चित्रकला शैली है, जो इतिहास और दर्शन को दर्शाती है।
  • त्योहार और धार्मिक मान्यताएं
    • वे बहुदेववादी हैं और सरना धर्म का पालन करते हैं, जिसमें पेड़ों, पूर्वजों और प्रकृति की पूजा शामिल है।
    • प्रमुख त्योहारों में बाहा, सोहराई (फसल कटाई), सकरात (बीज बोने), माघ, ऐरोक, माक मोंड़, हरियाड़ सीम, पाता, सेंदरा और राजा साला शामिल हैं।
    • लुगुबुरु पहाड़ी पर स्थित 'लुगुबुरु घंटाबाड़ी' उनका प्रमुख तीर्थस्थल है। गृह देवता को ओड़ाक बोंगा कहा जाता है।​
  • सामाजिक संरचना
    • संथाल समाज पितृसत्तात्मक है, जहां गांव की पंचायत में परानिक, मांझी (प्रधान), जोभ मांझी, जोभ परानिक और गोड़ाइत जैसे पदाधिकारी होते हैं।
    • वे वहिगोत्रीय विवाह प्रथा का पालन करते हैं।
    • शवदाह और दाह दोनों प्रथाएं प्रचलित हैं। जादू-टोना में महिलाओं को निपुण माना जाता है।
  • अर्थव्यवस्था और जीवनशैली
    • उनका मुख्य व्यवसाय कृषि है, जिसमें चावल प्रमुख फसल है, साथ ही शिकार, संग्रहण और आखेट भी पारंपरिक आजीविका हैं।
    • वे परिश्रमी किसान और कुशल शिकारी हैं, जो धनुष-बाण, कुल्हाड़ी, जाल आदि का उपयोग करते हैं।
    • कम वस्त्र धारण करने वाले ये प्रकृति-पूजक और कभी-कभी अंधविश्वासी होते हैं।
  • इतिहास और महत्व
    • संथाल भारत की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति है
    • जिसने 19वीं शताब्दी में संथाल हूल (विद्रोह) के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया।
    • झारखंड की जनसंख्या में ये 35% हिस्सा रखते हैं।
    • उनका योगदान कला, संगीत और साहित्य में उल्लेखनीय है।

3. रामपुरवा बैल (Rampurva bull) जो कि बिहार के रामपुरवा में पाए गए एक मौर्य स्तंभ का हिस्सा था, को अब ....... में रखा गया है। [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) राष्ट्रपति भवन
Solution:
  • रामपुरवा बैल, जो कि बिहार के रामपुरवा में पाए गए एक मौर्य स्तंभ का हिस्सा था, को अब राष्ट्रपति भवन में रखा गया है।
  • रामपुरवा बैल भारतीय और फारसी तत्वों का मिश्रण है, जो कि तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से संबंधित है।
  • खोज और इतिहास
    • जो पॉलिश्ड बलुआ पत्थर से निर्मित है और मौर्य कला की उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है।
    • बैल की मूर्ति में नरम मांसपेशियों, सतर्क कानों, नथुनों और मजबूत टांगों का बारीक चित्रण है, जो मौर्य शिल्पकला की परिपक्वता दर्शाता है।
    • यह स्तंभ मूल रूप से रामपुरवा में ही स्थापित था, लेकिन पुरातात्विक महत्व के कारण इसे स्थानांतरित कर दिया गया।
    • राष्ट्रपति भवन में इसे 1948 में स्थापित किया गया
    • जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद (भारत के प्रथम राष्ट्रपति) और जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय कला के प्रति अपनी रुचि के कारण इसे वहां रखने का निर्णय लिया।​
  • वर्तमान स्थान
    • रामपुरवा बैल वर्तमान में राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट (आंगन) में केंद्रीय स्तंभ के बीच एक ऊंचे तख्त पर प्रदर्शित है।
    • यह भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास का हिस्सा है और पर्यटकों के लिए दर्शनीय है।
    • राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट भी इसे मौर्य कला के प्रमुख उदाहरण के रूप में उल्लेखित करती है।
  • कलात्मक विशेषताएं
    • सामग्री: चमकदार पॉलिश वाला बलुआ पत्थर (सैंडस्टोन), जो मौर्य काल की विशेषता है।
    • वजन: लगभग 5 टन।
    • डिजाइन: बैल एक उल्टे कमल पर आधारित फूलों की सजावटी पट्टी पर खड़ा है।
    • इसमें कोई शिलालेख नहीं है, लेकिन यह शक्ति, धैर्य और सहनशक्ति का प्रतीक है।
    • प्रभाव: इसमें भारतीय और फारसी तत्वों का मिश्रण दिखता है, जो मौर्य साम्राज्य के सांस्कृतिक आदान-प्रदान को दर्शाता है।
  • महत्व
    • यह मौर्य कला के सात बचे हुए प्राणी कैपिटलों में से एक है।
    • अशोक स्तंभों की तरह, यह धम्म के प्रचार और साम्राज्य की भव्यता को प्रतिबिंबित करता है।
    • यह भारतीय इतिहास और पुरातत्व में महत्वपूर्ण है, तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC MTS) में प्रश्नों का विषय रहता है।

4. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड किस क्षेत्र के अंतर्गत आता है? [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) सार्वजनिक क्षेत्र
Solution:
  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र की एयरोस्पेस और रक्षा कंपनी है
  • जिसका मुख्यालय बंगलुरू में है। इसका प्रबंधन रक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
  • कंपनी का स्वामित्व और संचालन
    • यह कंपनी भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और इसका मुख्यालय बेंगलुरु (कर्नाटक) में स्थित है।
    • HAL एक राज्य-स्वामित्व वाली एयरोस्पेस तथा रक्षा कंपनी है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की श्रेणी में आती है
    • जहाँ सरकार का बहुमत हिस्सेदारी होती है। कंपनी के पास पूरे भारत में फैले 11 अनुसंधान एवं विकास केंद्र और 21 विनिर्माण इकाइयाँ हैं
    • जो चार प्रमुख उत्पादन इकाइयों के अंतर्गत संचालित होती हैं।
  • मुख्य कार्यक्षेत्र
    • HAL का प्राथमिक फोकस एयरोस्पेस उद्योग पर है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियाँ शामिल हैं:
    • विमान निर्माण: लड़ाकू विमान (जैसे LCA तेजस, सुखोई Su-30 MKI, हॉक), प्रशिक्षण विमान (IJT, HTT-40), परिवहन विमान (डोर्नियर) आदि का डिज़ाइन, विकास, निर्माण और ओवरहॉल।
    • हेलीकॉप्टर: हल्के उपयोगिता हेलीकॉप्टर (ALH ध्रुव), रुद्र, चेतक, चेतना आदि का उत्पादन और रखरखाव।
    • इंजन और सहायक उपकरण: जेट इंजन, टर्बोफैन/टर्बोशाफ्ट इंजन, एवियोनिक्स, नेविगेशन सिस्टम, हाइड्रोलिक्स, रडार, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर आदि।
    • रक्षा और अंतरिक्ष उत्पाद: एयरोस्ट्रक्चर, प्रोपेलेंट टैंक, क्रायोजेनिक इंजन, मिसाइल नेविगेशन सिस्टम, ग्राउंड रडार और अन्य हार्डवेयर।
    • कंपनी मुख्यतः भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना, वायुसेना) की आवश्यकताओं को पूरा करती है
    • साथ ही रखरखाव, मरम्मत, उन्नयन (MRO) सेवाएँ प्रदान करती है। यह 13 से अधिक देशों में निर्यात भी करती है।
  • इतिहास और महत्व
    • HAL की स्थापना 1940 में हुई थी, जब यह हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट फैक्ट्री के रूप में शुरू हुई।
    • स्वतंत्रता के बाद 1964 में इसे लिमिटेड कंपनी का दर्जा मिला।
    • आज यह दुनिया की शीर्ष एयरोस्पेस कंपनियों में गिनी जाती है (2016 में राजस्व के आधार पर 39वें स्थान पर)।
    • भारतीय रक्षा आत्मनिर्भरता में HAL की भूमिका अहम है
    • जैसे ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल फाइटर प्लेन का निर्माण और रखरखाव। हाल ही में इसे 2024 के लिए उत्कृष्ट PSU पुरस्कार भी मिला।

5. विश्व का वह एकमात्र देश कौन-सा है जहां बाघ और शेर दोनों पाए जाते हैं? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भारत
Solution:
  • भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है, जहां बाघ और शेर दोनों पाए जाते हैं। एशियाई शेर, जो भारत में केवल गुजरात के गिर वन में पाया जाता है।
  • बाघों का वास
    • भारत बंगाल टाइगर (Panthera tigris tigris) का प्रमुख निवास स्थान है
    • जो देश के विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों जैसे सुंदरबन, रणथंभौर, कान्हा और बांदीपुर में पाए जाते हैं।
    • प्रोजेक्ट टाइगर (1973 से शुरू) ने इनकी संख्या को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
    • भारत वैश्विक बाघ आबादी का 70% से अधिक हिस्सा रखता है। ये शीर्ष शिकारी जंगलों के संतुलन को बनाए रखते हैं।​
  • शेरों का वास
    • एशियाई शेर (Panthera leo leo) केवल गुजरात के गिर वन राष्ट्रीय उद्यान में ही प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं
    • जो उनका अंतिम शरणस्थली है। अफ्रीकी शेरों से छोटे होने के बावजूद, इनकी पेट पर त्वचा की अलग तह होती है।
    • एशियाई शेर संरक्षण परियोजना (2018 से) ने इनकी आबादी को स्थिर करने में मदद की है।
  • अन्य देशों में स्थिति
    • अन्य देशों जैसे केनिया, दक्षिण अफ्रीका या चीन में शेर या बाघ कैद में हो सकते हैं
    • लेकिन जंगलों में दोनों एक साथ नहीं पाए जाते। उदाहरणस्वरूप, अफ्रीका में शेर हैं
    • लेकिन बाघ प्राकृतिक रूप से नहीं; एशिया के अन्य भागों में बाघ हैं पर शेर विलुप्त हो चुके हैं।
    • भारत की भौगोलिक विविधता ही इसे अनोखा बनाती है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • लगभग 21,000 साल पहले शेर अफ्रीका से भारत पहुँचे, जहाँ बाघ पहले से थे
    • जिससे दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा हुई। गिर वन में कभी-कभी बाघों के प्रमाण भी मिले हैं
    • जैसे गुजरात के पंचमहल जिले में 2019 में सीसीटीवी फुटेज। यह सह-अस्तित्व संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।​​
  • संरक्षण प्रयास
    • भारत सरकार ने प्रोजेक्ट टाइगर और शेर गणना जैसे कार्यक्रम चलाए हैं
    • जिनसे बाघों की संख्या 1,400 से अधिक और शेरों की 600 से ऊपर हो गई है।
    • सामुदायिक भागीदारी और आवास बहाली से ये प्रजातियाँ सुरक्षित हैं, जो वैश्विक जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।​

6. इस्लामी चंद्र कैलेंडर (Islamic lunar calendar) में पहला महीना कौन-सा है? [MTS (T-I) 14 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मुहर्रम
Solution:
  • इस्लामी चंद्र कैलेंडर में पहला महीना मुहर्रम है। मुहर्रम का महीना हजरत इमाम हुसैन की शहादत का याद‌गार है।
  • इस महीने में ताजिए बनते हैं तो वहीं अखाड़े के खिलाड़ी करतब दिखाते हैं।
  • इस्लाम के 4 पवित्र महीनों में धूअल कादा, जुल- हिज्जा, मुहर्रम और रजब शामिल हैं।
  • हिजरी कैलेंडर का आधार
    • हिजरी कैलेंडर 622 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की मक्का से मदीना हिजरत (प्रवास) से शुरू होता है।
    • इसमें 12 महीने होते हैं, जो कुल 354 या 355 दिनों के होते हैं।
    • हर महीने की शुरुआत चांद के नए हिलाल (रूयत-ए-हिलाल) के दिखने पर होती है
    • 29 या 30 दिनों के बाद अगला महीना शुरू।
    • यह ग्रेगोरियन सौर कैलेंडर से 10-11 दिन छोटा होता है, इसलिए इसके महीने हर साल सूर्य वर्ष में पीछे खिसकते रहते हैं।
  • सभी 12 महीनों की सूची
    • मुहर्रम: पहला और पवित्र महीना।
    • सफर: दूसरा महीना, कुछ परंपराओं में अशुभ माना जाता है।
    • रबी-उल-अव्वल: पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) का जन्म महीना।
    • रबी-उस-सानी: चौथा महीना।
    • जमादी-उल-अव्वल: पांचवां महीना।
    • जमादी-उस-सानी: छठा महीना।
    • रजब: सातवां पवित्र महीना।
    • शाबान: आठवां महीना।
    • रमजान: नौवां, उपवास का पवित्र महीना।
    • शव्वाल: दसवां, ईद-उल-फित्र का महीना।
    • जिक़अद: ग्यारहवां पवित्र महीना।
    • जिलहिज्जा: बारहवां पवित्र महीना, हज और ईद-उल-अज्हा का समय।
  • मुहर्रम का महत्व
    • मुहर्रम इस्लाम के चार पवित्र महीनों (मुहर्रम, रजब, जिक़अद, जिलहिज्जा) में से पहला है
    • जिसमें जंग निषिद्ध है। शिया मुसलमान इसे शोक का महीना मानते हैं
    • क्योंकि 10 मुहर्रम (आशूरा) को इमाम हुसैन (रज़ि.) की करबला में शहादत हुई थी।
    • सुन्नी मुसलमान इसे मूसा (अ.स.) की फिरऔन से मुक्ति के रूप में भी याद करते हैं।
    • इस महीने में ताजिए, मजलिस और शोक सभाएं आयोजित होती हैं।
  • अन्य विशेषताएं
    • कैलेंडर चंद्र आधारित होने से मौसमों से स्वतंत्र रहता है, जो धार्मिक एकरूपता बनाए रखता है।
    • कुरान (सूरह अत-तौबा:36) में 12 महीनों का उल्लेख है।
    • वर्तमान हिजरी वर्ष 1447-1448 चल रहा है (फरवरी 2026 तक)।

7. भारत के किस राज्य में स्थानांतरी खेती को बरींगा (Bringa) के नाम से जाना जाता है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) ओडिशा
Solution:
  • ओडिशा राज्य में स्थानांतरी खेती को बरींगा (Bringa) के नाम से जाना जाता है।
  • स्थानांतरी खेती कृषि का एक प्रकार है, जिसमें कोई भूमि का टुकड़ा कुछ समय तक फसल लेने के लिए चुना जाता है
  • उर्वरता समाप्ति के बाद उसका परित्याग कर दूसरे टुकड़े को ऐसे ही कृषि के लिए चुन लिया जाता है।
  • स्थानांतरी खेती क्या है?
    • स्थानांतरी खेती, जिसे स्लैश-एंड-बर्न कृषि या कर्तन-दहन कृषि भी कहा जाता है
    • एक प्राचीन कृषि पद्धति है। इसमें किसान जंगल के एक छोटे भूखंड को काटकर जलाते हैं
    • राख को मिट्टी में मिलाकर 2-3 वर्ष तक खेती करते हैं, फिर मिट्टी की उर्वरता घटने पर नए स्थान पर चले जाते हैं।
    • यह मुख्यतः पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में प्रचलित है, जहां स्थायी खेती कठिन होती है।
  • ओडिशा में ब्रिंगा की विशेषताएं
    • ओडिशा के आदिवासी क्षेत्रों, जैसे कंधमाल, रायगढ़ा और मयूरभंज में ब्रिंगा प्रथा आम है।
    • यहां जंगलों को साफ कर धान, बाजरा, मक्का जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
    • खेती के बाद भूमि को 10-15 वर्ष तक परती छोड़ दिया जाता है
    • जिससे प्राकृतिक पुनरुत्पादन होता है।
    • हालांकि, यह पर्यावरण के लिए हानिकारक है क्योंकि जंगल नष्ट होते हैं और मिट्टी का कटाव बढ़ता है।
  • महत्व और चुनौतियां
    • यह खेती आदिवासी समुदायों की आजीविका का आधार रही है
    • लेकिन आधुनिक समय में सरकारी प्रयासों से इसे वैकल्पिक स्थायी खेती में बदला जा रहा है।
    • ओडिशा सरकार ने ब्रिंगा किसानों को सब्सिडी और प्रशिक्षण देकर टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया है।
    • फिर भी, उत्तर-पूर्व में झूम की तुलना में ओडिशा में यह कम विस्तृत है।

8. गरीब कल्याण रोज़गार अभियान (GKRA) 2020 में कितने राज्यों का चयन किया गया? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 6 राज्य
Solution:
  • गरीब कल्याण रोजगार अभियान (GKRA) 2020 में 6 राज्यों (बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा) का चयन किया गया।
  • इस अभियान को 125 दिनों के लिए प्रारंभ किया गया था।
  • अभियान का परिचय
    • यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 20 जून 2020 को लॉन्च किया गया था, जो 125 दिनों तक चला।
    • इसका उद्देश्य लॉकडाउन के कारण अपने गृह राज्यों में लौटे प्रवासी मज़दूरों को तत्काल रोज़गार उपलब्ध कराना था
    • खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के माध्यम से। लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश के साथ इसे मिशन मोड में चलाया गया।
  • चयनित राज्य और जिले
    • GKRA के तहत 6 राज्य चुने गए: बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा।
    • इन राज्यों में कुल 116 जिले शामिल थे, जिनमें 27 आकांक्षी जिले (aspirational districts) भी थे।
    • चयन का आधार 25,000 या इससे अधिक प्रवासी श्रमिकों वाले जिले थे।
  • कार्यान्वयन और मंत्रालय
    • अभियान 12 केंद्रीय मंत्रालयों के समन्वय से चलाया गया, जैसे ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन, रेलवे, पेयजल एवं स्वच्छता आदि।
    • गाँव स्तर पर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के माध्यम से इसे लागू किया गया
    • जिसमें शारीरिक दूरी के नियमों का पालन सुनिश्चित हुआ।
    • बिहार के खगड़िया जिले के तेलिहार गाँव से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा उद्घाटन किया गया।
  • उपलब्धियाँ
    • अभियान 22 अक्टूबर 2020 को समाप्त हुआ। इस दौरान कुल 50.78 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोज़गार सृजित किया गया
    • जिस पर लगभग 39,293 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिली और लाखों प्रवासी श्रमिकों को लाभ पहुँचा।​
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • यह योजना विशेष रूप से उन राज्यों पर केंद्रित थी जहाँ सबसे अधिक प्रवासी लौटे थे; असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल नहीं किए गए।​
    • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के साथ इसका सीधा संबंध था, लेकिन यह व्यापक था।​
    • यह अभियान कोविड संकट के समय ग्रामीण रोज़गार की एक मिसाल बना।​

9. टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड (TISCO) की शुरुआत वर्ष ....... में झारखंड राज्य के साकची में हुई थी। [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 1907
Solution:
  • टाटा आयरन एवं स्टील कंपनी लिमिटेड (TISCO) की शुरुआत 26 अगस्त, 1907 को झारखंड राज्य के साकची में हुई थी।
  • यह संयंत्र खरकई और सुवर्ण रेखा नदी के संगम पर स्थित है।
  • टाटा आयरन एवं स्टील कंपनी लिमिटेड (TISCO) की स्थापना दोराबजी टाटा ने की थी।
  • स्थापना का वर्ष और स्थान
    • TISCO, जिसे अब टाटा स्टील के नाम से जाना जाता है, की आधिकारिक पंजीकरण 26 अगस्त 1907 को मुंबई में हुआ था
    • जबकि इसका संयंत्र साकची में स्थापित किया गया। साकची उस समय बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था
    • जो बाद में बिहार और फिर 2000 में झारखंड राज्य का हिस्सा बना।
    • यह स्थान लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज जैसे संसाधनों की निकटता और सुवर्णरेखा तथा खरकई नदियों के कारण चुना गया था।
  • संस्थापक और प्रारंभिक इतिहास
    • जमशेदजी टाटा ने इसकी कल्पना की थी, लेकिन उनकी मृत्यु 1904 में हो गई
    • इसलिए उनके बेटे दोराबजी टाटा ने इसका निर्माण कार्य संभाला। पंजीकरण के तुरंत बाद निर्माण शुरू हुआ
    • 1911 में पहला पिग आयरन उत्पादित हुआ और 1912 में स्टील इंगोट का निर्माण आरंभ हुआ।
    • यह भारत का पहला निजी एकीकृत स्टील संयंत्र था और एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट माना जाता था।
  • विकास और महत्व
    • TISCO ने भारत की औद्योगिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
    • विशेष रूप से प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जहाज निर्माण और रेलवे के लिए स्टील सप्लाई करके।
    • साकची का नाम बाद में जमशेदजी टाटा के सम्मान में जमशेदपुर रखा गया
    • जो आज 'स्टील सिटी' के नाम से प्रसिद्ध है।
    • 2005 में कंपनी ने अपना नाम TISCO से बदलकर टाटा स्टील लिमिटेड कर लिया।

10. किस अभिनय का संबंध वेशभूषा, आभूषण, चेहरे के श्रृंगार आदि के उपयोग से है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) आहार्य अभिनय
Solution:
  • आहार्य अभिनय का संबंध वेशभूषा, आभूषण, चेहरे के श्रृंगार आदि में उपयोग से है।
  • अभिनय के चार अंग-आंगिक, वाचिक, सात्विक और आहार्य हैं।
  • आहार्य अभिनय की परिभाषा
    • आहार्य अभिनय पात्रों के बाह्य स्वरूप को आकर्षक और कथानक के अनुरूप बनाने पर केंद्रित होता है।
    • इसमें वेशभूषा (costumes), आभूषण (jewellery), चेहरे का श्रृंगार (facial makeup), शरीर पर रंग-रूप (body paint) और अन्य सजावटी तत्व शामिल होते हैं।
    • यह अभिनय दर्शकों को दृश्य रूप से प्रभावित कर पात्र की पहचान, भावना और परिवेश को तुरंत स्थापित करता है।
    • नाट्यशास्त्र के अनुसार, आहार्य के बिना अभिनय अधूरा रहता है क्योंकि यह कृत्रिमता को यथार्थता प्रदान करता है।
  • चार अभिनय भेद
    • भारतीय नाट्यशास्त्र में अभिनय को चार मुख्य भेदों में विभाजित किया गया है:
    • आंगिक अभिनय: शरीर के अंगों (हाथ, पैर, नेत्र आदि) की मुद्राओं से भाव व्यक्त करना।
    • वाचिक अभिनय: वाणी, स्वर और संगीत के माध्यम से अभिव्यक्ति।
    • आहार्य अभिनय: बाह्य सज्जा जैसे वेशभूषा और श्रृंगार से संबंधित।
    • सात्विक अभिनय: आंतरिक भावनाओं और मनोदशाओं का सत्त्विक प्रकटीकरण।
    • आहार्य इनमें से दृश्यात्मक सौंदर्य पर जोर देता है, जबकि अन्य आंतरिक या शारीरिक होते हैं।
  • आहार्य अभिनय के घटक
  • वेशभूषा (Costumes)
    • वेशभूषा पात्र की सामाजिक स्थिति, काल और लिंग को दर्शाती है।
    • उदाहरणस्वरूप, राजा के लिए भारी साटन के वस्त्र, योद्धा के लिए चमड़े की पट्टियां।
    • नाट्यशास्त्र में वेशभूषा को नेपथ्यकर्म कहा गया है, जहां कुशल वेशकार पात्र की पृष्ठभूमि संकेत देते हैं।
    • मंच पर भारी वस्त्रों का उपयोग सीमित रखा जाता है ताकि अभिनेता स्वतंत्र रहे।
  • आभूषण और सज्जा (Jewellery and Ornaments)
    • आभूषण पात्र के वैभव को प्रदर्शित करते हैं, जैसे मुकुट, हार, कंगन। नाट्यशास्त्र में सलाह दी गई है
    • भारी सोने-चांदी के बजाय पतले ताम्रपत्र या मोम से चमकदार नकली आभूषण बनाएं।
    • कथकली में विशाल मुकुट और चूड़ियां आहार्य का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
  • चेहरे का श्रृंगार (Facial Makeup)
    • चेहरे पर रंग, रूज, पाउडर, लाइनर से भूमिका अनुरूप स्वरूप बनाया जाता है।
    • उदाहरण: राक्षस के लिए लाल-काला मेकअप, देवता के लिए सुनहरा। रंगों को त्वचा के रंग से मिलाकर भद्दापन टाला जाता है
    • प्रकाश प्रभाव (जैसे नीला प्रकाश लाल पर काला दिखाता है) का ध्यान रखा जाता है।
  • महत्व और उपयोग
    • आहार्य अभिनय प्रदर्शन के सौंदर्य को बढ़ाता है और कथा को दृश्य रूप से जीवंत बनाता है।
    • कथकली, भरतनाट्यम जैसी शैलियों में यह केंद्रीय है, जहां विस्तृत सज्जा बिना संवाद के कहानी कहती है।
    • आधुनिक रंगमंच में भी नेपथ्य (backstage) तैयारियां आहार्य का हिस्सा हैं। यह अभिनेता को भाव व्यक्त करने में सहायक होता है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • नाट्यशास्त्र (भरतमुनि) में आहार्य का विस्तृत वर्णन है, जहां मंच सज्जा, प्रकाश और वेशभूषा पर परंपरागत नियम हैं।
    • प्राचीन भारत में यह वैज्ञानिक था, जैसे रंगों का प्रकाश के साथ संयोग। आज भी शास्त्रीय नृत्य में इसका पालन होता है।