विविध (परंपरागत सामान्य ज्ञान) भाग-II

Total Questions: 30

11. 14 अप्रैल को तमिल कैलेंडर का पहला दिन ....... के रूप में मनाया जाता है। [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पुठांडु
Solution:
  • 14 अप्रैल को तमिल कैलेंडर का पहला दिन पुठांडु के रूप में मनाया जाता है।
  • पुठांडु को तमिल नववर्ष दिवस के रूप में भी जाना जाता है। यह तमिल महीने चिथिराई के पहले दिन मनाया जाता है।
  • पुथांडु का महत्व
    • पुथांडु तमिल संस्कृति में नई शुरुआत, समृद्धि और सद्भाव का प्रतीक है।
    • ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान इंद्र पृथ्वी पर आए थे सद्भाव लाने के लिए
    • भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी। यह त्योहार तमिलनाडु सहित विश्व भर के तमिल समुदाय द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है
    • जहां पारिवारिक एकता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया जाता है।
  • तिथि और कैलेंडर संबंध
    • तमिल सौर कैलेंडर (इलंगा) के अनुसार, चिथिराई मास का पहला दिन ग्रेगोरियन कैलेंडर में 14 अप्रैल को पड़ता है
    • हालांकि कभी-कभी यह 13 या 15 अप्रैल को भी हो सकता है।
    • यह तमिल पंचांग का सूर्य-सिद्धांत आधारित वर्ष का प्रारंभ होता है
    • जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश पर आधारित है।
    • भारत सरकार ने 1998 से इसे तमिल नव वर्ष के रूप में आधिकारिक मान्यता दी है।
  • उत्सव की परंपराएं
    • घर की साफ-सफाई और सजावट: लोग अपने घरों को साफ करते हैं और कोलम (रंगोली) बनाते हैं, जो समृद्धि का प्रतीक है।
    • विशेष व्यंजन: मंगलोरी बन्नी, थायिर सादम, मंगलोरी बन्नी, पचड़ी और कोजुक्कई जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। मार्गजल (विशेष मिश्रण) प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
    • मंदिर दर्शन और पूजा: सुबह स्नान के बाद मंदिर जाते हैं, पंचांगम (कैलेंडर) पढ़ा जाता है और नया वर्ष शुभाशुभ बताने वाली भविष्यवाणियां सुनी जाती हैं।
    • सांस्कृतिक कार्यक्रम: नृत्य, संगीत, नाटक और पारंपरिक खेल आयोजित होते हैं। परिवारों में उपहार विनिमय और दावतें होती हैं।
  • धार्मिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • पुथांडु का संबंध रामायण से भी है, क्योंकि इस दिन भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त की थी।
    • तमिलनाडु के कुंभकोणम जैसे स्थानों पर विशेष मेले लगते हैं।
    • यह त्योहार अन्य भारतीय राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश (उगादी के समानांतर) और कर्नाटक में भी प्रभावित रूपों में मनाया जाता है।
    • वैश्विक तमिल डायस्पोरा (मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका) में भी इसे उत्साह से मनाया जाता है।

12. भारतीय रेलवे की कुल मार्गीय लंबाई (मार्च 2020 तक) कितनी है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) 67,956 किमी.
Solution:
  • मार्च, 2020 तक भारतीय रेलवे की कुल रूट लंबाई 67,956 किमी. है
  • जिसमें ब्रॉड गेज, मीटर गेज तथा नैरो गेज नामक तीनों ट्रैक शामिल हैं।
  • भारतीय रेलवे में 17 जोन और 7000 से अधिक स्टेशन हैं। मार्च, 2023 तक भारतीय रेलवे नेटवर्क 132,310 किमी. (Total Track Km.) तक फैला है।
  • यह नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क्स में से एक है
  • जो भारत के लगभग सभी हिस्सों को जोड़ता है। इसमें 18 जोन और 7,000 से अधिक स्टेशन शामिल हैं।
  • गेज-वार ब्रेकडाउन
    • भारतीय रेलवे में मुख्य रूप से तीन प्रकार के गेज हैं:
    • ब्रॉड गेज (1,676 मिमी): अधिकांश नेटवर्क का हिस्सा।
    • मीटर गेज (1,000 मिमी): कुछ क्षेत्रों में।
    • नैरो गेज (762 मिमी या 610 मिमी): पहाड़ी इलाकों में।​
    • मार्च 2020 के आसपास ब्रॉड गेज का विस्तार तेजी से हो रहा था
    • जो कुल रूट का बड़ा हिस्सा था। बाद के वर्षों (जैसे 2023-24) में यह बढ़कर 69,181 किमी रूट हो गया।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • भारतीय रेलवे की शुरुआत 1853 में हुई थी, जब पहली ट्रेन मुंबई से थाणे चली।
    • 1909 तक नेटवर्क काफी फैल चुका था
    • लेकिन 2020 तक यह 67,956 किमी रूट तक पहुंचा। वर्तमान में (2026 तक) कुल ट्रैकेज 1,35,207 किमी के करीब है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है (अमेरिका, रूस, चीन के बाद)।
    • यह प्रतिदिन 2.3 करोड़ यात्रियों और 1,060 मिलियन टन माल का परिवहन करता है।
    • लक्जरी ट्रेनें जैसे पैलेस ऑन व्हील्स (1982 से) और महाराजा एक्सप्रेस पर्यटन को बढ़ावा देती हैं।

13. वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) भारत सरकार के निम्नलिखित में से किस मंत्रालय के तहत आता है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
Solution:
  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
  • CSIR की स्थापना वर्ष 1942 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के पास देश में फैले 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और 39 आउटरीच केंद्रों, एक नवाचार परिसर सहित तीन अखिल भारतीय उपस्थिति वाली इकाइयों का एक नेटवर्क है।
  • CSIR का इतिहास और स्थापना
    •  इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। शुरू में यह औद्योगिक विकास के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया था
    • लेकिन आज यह भारत का सबसे बड़ा अनुसंधान एवं विकास (R&D) संगठन बन चुका है।
    • 1942 से अब तक CSIR ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हजारों नवाचार किए हैं
    • जो स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित हुए हैं।
  • संगठनात्मक संरचना
    • CSIR के पास पूरे भारत में 37 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, 39 आउटरीच केंद्र, 3 नवाचार परिसर और 5 इकाइयां हैं।
    • इनमें से प्रमुख लैबोरेटरीज में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (NIO) और इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबायल टेक्नोलॉजी (IMTECH) शामिल हैं।
    • संगठन में लगभग 14,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें 4,600 वैज्ञानिक और शोधकर्ता हैं।
    • इसका वित्तपोषण मुख्य रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है
    • लेकिन यह स्वायत्त रूप से संचालित होता है। CSIR वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के तहत आता है, जो मंत्रालय का हिस्सा है।
  • कार्यक्षेत्र और उपलब्धियां
    • CSIR विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान करता है, जैसे रेडियो एवं अंतरिक्ष भौतिकी, समुद्र विज्ञान, रसायन विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, नैनोटेक्नोलॉजी, एयरोनॉटिक्स, पर्यावरण इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी।
    • यह सामाजिक प्रयासों में तकनीकी हस्तक्षेप प्रदान करता है
    • जिसमें पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुधार, पेयजल, भोजन सुरक्षा, आवास, ऊर्जा, कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र शामिल हैं।
    • CSIR ने कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सिन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
    • साथ ही कई पेटेंट, स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं।
    • संगठन छात्रवृत्तियां, फैलोशिप और शोध परियोजनाओं को भी प्रोत्साहित करता है।
  • मंत्रालय से संबंध
    • CSIR सीधे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology) के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के अधीन है।
    • मंत्रालय CSIR को वित्तीय सहायता प्रदान करता है और नीतिगत दिशा-निर्देश देता है
    • लेकिन CSIR अपनी प्रयोगशालाओं और परियोजनाओं में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेता है।
    • यह अन्य मंत्रालयों जैसे रक्षा, स्वास्थ्य या कृषि से स्वतंत्र है।
    • वर्तमान में (फरवरी 2026 तक) इसका नेतृत्व महानिदेशक द्वारा किया जाता है, जो मंत्रालय के साथ समन्वय बनाए रखते हैं।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • उद्देश्य: वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान को बढ़ावा देना, उद्योगों के विकास के लिए परिणामों का उपयोग सुनिश्चित करना।
    • वैश्विक रैंकिंग: CSIR दुनिया के प्रमुख सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित R&D संगठनों में शुमार है।
    • हालिया योगदान: सड़क निर्माण, जल शुद्धिकरण और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नवीनतम प्रौद्योगिकियां विकसित की गई हैं।

14. कितने देश SAARC का हिस्सा हैं? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 8
Solution:
  • सार्क की स्थापना 8 दिसंबर, 1985 को ढाका में हुई थी।
  • इसके सदस्य देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका हैं।
  • सदस्य देशों की सूची
    • अफगानिस्तान (2007 में शामिल हुआ)
    • बांग्लादेश
    • भूटान
    • भारत
    • मालदीव
    • नेपाल
    • पाकिस्तान
    • श्रीलंका
    • ये आठों देश दक्षिण एशिया क्षेत्र में स्थित हैं और संगठन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
    • मूल रूप से 1985 में सात देशों (अफगानिस्तान को छोड़कर) के साथ शुरू हुआ SAARC 2007 में अफगानिस्तान के शामिल होने से आठ सदस्यों वाला हो गया।
  • SAARC का उद्देश्य
    • SAARC का मुख्य लक्ष्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है।
    • संगठन ने गरीबी उन्मूलन, कृषि विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में विभिन्न समझौते किए हैं
    • जैसे SAFTA (South Asian Free Trade Area) जो व्यापार को बढ़ावा देता है।
    • हालांकि, भारत-पाकिस्तान संबंधों के कारण हाल के वर्षों में शिखर सम्मेलन स्थगित होते रहे हैं।
  • पर्यवेक्षक देश
    • SAARC में 9 पर्यवेक्षक देश भी हैं, जो पूर्ण सदस्य नहीं हैं लेकिन बैठकों में भाग ले सकते हैं:
    • ऑस्ट्रेलिया
    • चीन
    • यूरोपीय संघ
    • ईरान
    • जापान
    • मॉरीशस
    • म्यांमार
    • दक्षिण कोरिया
    • संयुक्त राज्य अमेरिका
    • ये पर्यवेक्षक सहयोग के लिए अवसर प्रदान करते हैं लेकिन मतदान अधिकार नहीं रखते।
    • SAARC का मुख्यालय काठमांडू (नेपाल) में स्थित है, जो संगठन की गतिविधियों का केंद्र है।
  • इतिहास और उपलब्धियाँ
    • SAARC के पहले शिखर सम्मेलन की मेजबानी ढाका ने की थी। अब तक 19 शिखर सम्मेलन हो चुके हैं
    • अंतिम प्रमुख 2014 में नेपाल में। संगठन ने क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूत करने के लिए कई पहल कीं
    • जैसे दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (SAU) की स्थापना भारत में।
    • कुल मिलाकर, SAARC की आबादी लगभग 1.9 अरब है, जो वैश्विक आबादी का बड़ा हिस्सा है।

15. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), जो भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन है, का गठन वर्ष ....... में किया गया था। [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 1958
Solution:
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का गठन वर्ष 1958 में भारतीय सेना के तत्कालीन तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (TDE) और रक्षा विज्ञान संगठन (DSO) के साथ DTDP के समामेलन से हुआ था।
  • DRDO के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत हैं। (26 अगस्त, 2022 से)
  • DRDO का गठन
    • DRDO की स्थापना 1958 में रक्षा विज्ञान संगठन (DSO), भारतीय सेना के तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (TDE) तथा तकनीकी विकास और उत्पादन निदेशालय (DTDP) के संयोजन से हुई थी।
    • यह संगठन शुरू में मात्र 10 प्रयोगशालाओं वाला छोटा संगठन था, जो समय के साथ विस्तारित होकर रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाने लगा।
    • भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत यह संगठन सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर केंद्रित है।
  • उद्देश्य और कार्यक्षेत्र
    • DRDO का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां, उपकरण और प्रौद्योगिकियां विकसित करना है।
    • यह आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देता है
    • जिसमें मिसाइलें, रडार, ड्रोन और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
    • संगठन के पास वर्तमान में 53 प्रयोगशालाएं और 7 प्रौद्योगिकी समूह हैं, जो विविध विषयों पर शोध करते हैं।
  • प्रमुख उपलब्धियां
    • DRDO ने अग्नि, पृथ्वी, ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों का सफल विकास किया है, जो भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाती हैं।
    • इसके अलावा, तेजस लड़ाकू विमान, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर जैसी प्रणालियां विकसित की गई हैं।
    • हाल ही में 2025 में अपना 67वां स्थापना दिवस मनाते हुए संगठन ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि दी और रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र को तकनीक हस्तांतरण पर जोर दिया।
  • संगठन संरचना
    • DRDO का मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव के नेतृत्व में संचालित होता है।
    • इसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास सेवा (DRDS) के वैज्ञानिक कार्यरत हैं
    • जिनकी नियुक्ति 1979 में अलग सेवा के रूप में हुई।
    • संगठन सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और निजी कंपनियों के साथ सहयोग कर 9 से अधिक भूमि प्रणालियों की तकनीक हस्तांतरित कर चुका है।
  • वर्तमान स्थिति
    • फरवरी 2026 तक DRDO लगातार नवीनतम रक्षा प्रौद्योगिकियों पर कार्यरत है
    • जिसमें क्वांटम तकनीक और एआई आधारित सिस्टम शामिल हैं
    • यह भारत को रक्षा आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

16. ...... एक प्राचीन मार्शल आर्ट है, जिसकी उत्पत्ति प्रायद्वीपीय भारत में योद्धाओं के सैन्य प्रशिक्षण के एक भाग के रूप में हुई थी [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) कलरिपयड्ड
Solution:
  • कलरिपयड एक प्राचीन मार्शल आर्ट है, जिसकी उत्पत्ति प्रायद्वीपीय भारत में योद्धाओं के सैन्य प्रशिक्षण के एक-भाग के रूप में हुई थी।
  • कलरिपयदु का उपयोग दक्षिण भारत में राजवंशों द्वारा युद्ध की एक संहिता के रूप में किया गया था। कलरिपयट्ट का अर्थ "युद्ध के मैदान की कला" है।
  • अर्थ और दर्शन
    • कलारीपयट्टू" शब्द "कलारी" (प्रशिक्षण स्थल) और "पयट्टू" (सिलनट) से बना है, जिसका अर्थ है
    • युद्धक्षेत्र की कला"। यह न केवल शारीरिक युद्ध कौशल सिखाता है
    • बल्कि मानसिक अनुशासन, आध्यात्मिक संतुलन और आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़ा है।
    • भगवान विष्णु को इसके संस्थापक माने जाने की किंवदंती प्रचलित है
    • इसे एशियाई मार्शल आर्ट्स जैसे कung fu का अग्रदूत कहा जाता है।
  • प्रशिक्षण प्रक्रिया
    • प्रशिक्षण कलारी (गड्ढा जैसी पवित्र भूमि) में होता है, जो तीन चरणों में विभाजित है:
    • मैदन कलारी: आधारभूत व्यायाम, खड़े होकर मुक्केबाजी, किक और स्ट्राइक।
    • कोलथारी: लकड़ी के हथियारों (कट्टारम, मुचु, ओट्टा आदि) का अभ्यास।
    • अंगथारी: धातु के हथियार (तलवार, ढाल, भाला, धनुष) और निहत्थे ग्रैपलिंग।
    • शुरुआत उष्ण तेल से मालिश से होती है, जो लचीलापन बढ़ाती है। उम्र 7 वर्ष से शुरू होती है, और गुरु-शिष्य परंपरा सख्त होती है।​
  • तकनीकें और विशेषताएं
    • यह निहत्थे और हथियारों दोनों पर केंद्रित है, जिसमें 18 प्रकार के हथियार शामिल हैं।
    • प्रमुख तकनीकें: उन्नत किक (जैसे नेलक्कमन किक, जो सिर तक मार सकती है
    • जोड़ तोड़ने वाली ग्रैपलिंग, दबाव बिंदु हमले (मार्मा शस्त्र)।
    • इसे सबसे वैज्ञानिक मार्शल आर्ट कहा जाता है क्योंकि यह शरीर रचना विज्ञान पर आधारित है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • केरल और तमिलनाडु में प्रचलित, यह कथकली नृत्य को प्रभावित करता है।
    • आधुनिक समय में भारतीय सेना ने इसे AMAR (आर्मी मार्शल आर्ट्स रिजीम) में शामिल किया
    • खासकर गलवान संघर्ष के बाद। आज यह फिटनेस, आत्मरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सिखाया जाता है।
  • आधुनिक स्थिति
    • कलारीपयट्टू के प्रशिक्षण केंद्र केरल में प्रमुख हैं
    • UNESCO ने इसे अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। फिल्मों (जैसे बॉलीवुड) में भी लोकप्रिय हुआ है।​

17. कव्वाली का भारत में आगमन ....... से हुआ था। [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) फारस
Solution:
  • कव्वाली सूफी इस्लामी भक्ति गायन का एक रूप है, जिसका आगमन फारस से हुआ था।
  • कव्वाली संगीत मुख्यतः भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान सहित भारतीय उपमहाद्वीप की सभी दरगाहों पर गाई जाती है।
  • उत्पत्ति और प्रारंभिक इतिहास
    • कव्वाली सूफी भक्ति संगीत की एक विधा है, जिसकी जड़ें आठवीं शताब्दी के ईरान और अफगानिस्तान में हैं
    • जहाँ इसे 'समां' के रूप में धार्मिक महफिलों में गाया जाता था।
    • सूफी पीर और फकीरों ने इसे ईश्वर से जुड़ने का माध्यम बनाया, और तेरहवीं शताब्दी में यह भारत पहुँची।
    • भारत में इसका प्रसार चिश्ती सिलसिले के सूफी संतों जैसे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (अजमेर पहुँचे 561 हिजरी, लगभग 12वीं शताब्दी) ने किया, जिन्होंने फ़ारसी ग़ज़लों से शुरुआत की।​
  • भारत में स्थापना
    • अमीर खुसरो (1253-1325 ई.) को कव्वाली का वास्तविक जनक माना जाता है
    • जिन्होंने दिल्ली में शेख निज़ामुद्दीन औलिया के दरबार में भारतीय रागों, लोक भाषाओं (हिंदी-उर्दू) और फ़ारसी तत्वों का मिश्रण कर इसे विकसित रूप दिया।
    • अलाउद्दीन खिलजी के काल में चिश्ती खानकाहों में कव्वाली नियमित हो गई
    • जहाँ हम्द (ईश्वर की स्तुति), नात (पैगंबर की शान) और मनकबत (सूफी संतों की महिमा) गाए जाते थे।
    • यह संगीत प्रेम, इश्क़-ए-हक़ीकी (ईश्वर प्रेम) और आध्यात्मिक विलास व्यक्त करता था।​
  • विकास और लोकप्रियता
    • मध्यकाल में कव्वाली सूफी दरगाहों (अजमेर शरीफ, निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह) तक सीमित रही, लेकिन मुगल काल में यह दरबारों और उत्सवों में फैली।
    • आधुनिक युग में Ismail Azad, Sabri Brothers, Nusrat Fateh Ali Khan जैसे कलाकारों ने इसे फिल्मों (जैसे "हाजी मलंग दूल्हा") और वैश्विक मंचों तक पहुँचाया।
    • भारत में यह उत्तर भारत (दिल्ली, हैदराबाद), पाकिस्तान (पंजाब, सिंध) और बांग्लादेश में लोकप्रिय है।​
  • प्रदर्शन शैली
    • कव्वाली में 7-11 सदस्यीय दल होता है, जो तानपुरा, सारंगी, तबला और ढोलक पर गाता है।
    • मुख्य कव्वाल अलाप से शुरू करता है, फिर चढ़ते लहजे में श्रोताओं को 'वाह-वाह' से प्रेरित करता है। यह रात्रि जागरणों, उर्स और फातेहा में गाई जाती है।​​
    • कव्वाली ने सूफीवाद के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया, और आज भी यह आध्यात्मिक संगीत की जीवंत परंपरा बनी हुई है।

18. निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में साल के छह से दस महीनों के लिए तेज पवन के साथ लंबी, ठंडी सर्दियां होती हैं और औसत तापमान हिमांक (freezing) से नीचे रहता है? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) टुंड्रा क्षेत्र
Solution:
  • टुंड्रा क्षेत्र में साल के छह से दस महीनों के लिए तेज पवन के साथ लंबी, ठंडी सर्दियां होती हैं और औसत तापमान हिमांक से नीचे रहता है।
  • टुंड्रा क्षेत्र की जलवायु विशेषताएँ
    • टुंड्रा क्षेत्र ध्रुवीय क्षेत्रों में स्थित होता है, जहाँ सर्दियाँ छह से दस महीने लंबी होती हैं
    • तेज़ हवाएँ (अक्सर 50-100 किमी/घंटा की रफ्तार वाली) चलती रहती हैं।
    • इन सर्दियों में औसत तापमान -30°C से -50°C तक गिर जाता है, जो हिमांक से बहुत नीचे होता है
    • जिससे स्थायी जमी हुई मिट्टी (पर्माफ्रॉस्ट) बन जाती है। ग्रीष्मकाल बहुत छोटा (1-3 महीने) और ठंडा होता है
    • जहाँ तापमान कभी-कभी 10°C तक पहुँचता है, लेकिन मिट्टी ऊपर की सतह पर ही पिघलती है।​
  • स्थान और विस्तार
    • टुंड्रा मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध में आर्कटिक महासागर के किनारे पाया जाता है
    • उत्तरी अमेरिका (अलास्का, कनाडा के उत्तरी भाग), यूरेशिया (रूस का साइबेरिया, स्कैंडिनेविया के उत्तरी हिस्से) और ग्रीनलैंड के तटवर्ती क्षेत्रों में।
    • दक्षिणी गोलार्ध में यह अन्टार्कटिका के कुछ हिस्सों में अल्पाइन टुंड्रा के रूप में सीमित है।
    • यह क्षेत्र आर्कटिक वृत्त (66.5° उ. अ.) के निकट बर्फीले मैदान हैं, जो टैगा (शीतोष्ण वन) और ध्रुवीय बर्फ क्षेत्र के बीच स्थित होते हैं।​
  • वनस्पति और स्थलाकृति
    • पर्माफ्रॉस्ट के कारण यहाँ पेड़ नहीं उगते; केवल काई, लाइकेन, झाड़ीनुमा झाड़ियाँ और कुछ फूलदार पौधे पाए जाते हैं
    • जो ग्रीष्म में हरे हो जाते हैं। मिट्टी ऊपरी परत में ही उपजाऊ होती है, जिसे एक्टिव लेयर कहते हैं।
    • तेज़ हवाएँ बर्फ को उड़ाकर ले जाती हैं, जिससे पोलर डेजर्ट जैसी शुष्कता बनी रहती है—वर्षा मात्र 150-250 मिमी सालाना।​
  • अन्य क्षेत्रों से तुलना
    • आभ्यंतरिक या भूमध्यसागरीय क्षेत्र: यहाँ गर्म शुष्क ग्रीष्म और हल्की वर्षा वाली सर्दियाँ होती हैं, तापमान कभी हिमांक से नीचे नहीं गिरता।​
    • भारत के उत्तरी मैदान: सर्दियाँ ठंडी (5-15°C) लेकिन छोटी (नवंबर-फरवरी), तेज़ हवाएँ शीतलहर लाती हैं पर हिमांक से नीचे नहीं।
    • स्थानीय पवनें (जैसे हरमट्टन, पुना): ये ठंडी या गर्म हो सकती हैं, लेकिन लंबी सर्दियों की विशेषता नहीं रखतीं।​

19. 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की साक्षरता दर निम्नलिखित में से किस परास (रेंज) के अंतर्गत है? [MTS (T-I) 12 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 70%-75%
Solution:
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की साक्षरता दर 70%-75% परास (रेंज) के अंतर्गत है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की साक्षरता दर 73% है।
  • साक्षरता दर का विवरण
    • यह दर कुल जनसंख्या में से 74.04% लोगों के साक्षर होने को दर्शाती है
    • जिसमें पुरुष साक्षरता 82.14% और महिला साक्षरता 65.46% थी।
    • 2001 की जनगणना की तुलना में यह 9% की वृद्धि थी, जब यह 64.84% थी।​
    • केरल सबसे अधिक 93.91% के साथ शीर्ष पर था, जबकि बिहार सबसे कम 63.82% के साथ नीचे।​
  • लिंग-आधारित अंतर
    • पुरुषों में साक्षरता दर काफी ऊंची रही, लक्षद्वीप (96.11%) और केरल (96.02%) शीर्ष पर।​
    • महिलाओं में केरल (91.98%) और मिजोरम (89.40%) आगे थे, लेकिन राजस्थान (52.66%) सबसे पीछे।​
    • यह अंतर ग्रामीण-शहरी और क्षेत्रीय असमानताओं को उजागर करता है।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1951 में साक्षरता मात्र 18.33% थी, जो 2011 तक लगातार बढ़ी।​
    • शिक्षा योजनाओं जैसे सर्व शिक्षा अभियान ने इसमें योगदान दिया।​
    • यह आंकड़ा नीति-निर्माण के लिए आधार बना, विशेषकर महिला शिक्षा पर जोर।​

20. समुद्री जल के ऊपर लगभग ऊर्ध्वाधर उठे हुए ऊंचे शैलीय तटों को ....... कहते हैं। [MTS (T-I) 06 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) समुद्र भृगु (सी क्लिफ)
Solution:
  • समुद्री जल के ऊपर लगभग ऊर्ध्वाधर उठे हुए ऊंचे शैलीय तटों को समुद्र भृगु (सी क्लिफ) कहते हैं। भारत के पश्चिमी तट पर कई समुद्री भृगु पाए जाते हैं।
  • समुद्र भृगु क्या है?
    • इनकी ऊँचाई समुद्र स्तर से अधिक हो सकती है और ये कठोर चट्टानों से बने होते हैं।
    • इनका निर्माण मुख्य रूप से समुद्री तरंगों के अपरदन (erosion) और अपक्षय (weathering) से होता है।
  • निर्माण प्रक्रिया
    • जो उच्च ऊर्जा वाली लहरें होती हैं और तट पर जोरदार तरीके से टकराती हैं।
    • तरंगें चट्टान के आधार पर लगातार प्रहार करती हैं, जिससे नीचे का भाग कट जाता है और ऊपरी भाग ऊर्ध्वाधर रूप से खड़ा हो जाता है।
    • जब तक एक पायदान (wave-cut notch) नहीं बन जाता, तब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है।
    • समय के साथ, ये चट्टानें और भी ऊँची व खड़ी हो जाती हैं।
  • विशेषताएँ
    • ढलान: लगभग लंबवत या ऊर्ध्वाधर।
    • ऊँचाई: समुद्र स्तर से ऊपर, कभी-कभी सैकड़ों मीटर तक।
    • स्थान: मुख्य रूप से कठोर चट्टानी तटों पर, जैसे ग्रेनाइट या बेसाल्ट क्षेत्रों में।
    • दुनिया की सबसे ऊँची समुद्र भृगु हवाई द्वीप मोलोकाई में हैं, जो समुद्र तल से 3000 फीट (लगभग 914 मीटर) ऊपर उठी हैं।
  • अन्य संबंधित संरचनाएँ
    • समुद्र भृगु से जुड़ी अन्य तटीय भू-आकृतियाँ:
    • समुद्री गुफाएँ (Sea Caves): चट्टान के आधार में दरारों से बनती हैं, जब लहरें इन्हें विस्तारित करती हैं। उदाहरण: स्कॉटलैंड का फिंगल गुफा।​
    • समुद्री मेहराब (Sea Arches): गुफाओं का आगे अपरदन होने पर प्राकृतिक पुल बनते हैं।​
    • समुद्री स्टैक (Sea Stacks): मेहराब ढहने पर अलग खड़े स्तंभ बनते हैं।​
  • महत्व और उदाहरण
    • ये तट पर्यटन, पारिस्थितिकी और भू-विज्ञान अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
    • भारत में गोवा, केरल और अंडमान के कुछ तटों पर ऐसे भृगु देखे जा सकते हैं।
    • वैश्विक रूप से, आयरलैंड के मूर क्लिफ्स और कैलिफोर्निया के बिग सूर तट प्रसिद्ध हैं।
    • ये जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि समुद्र स्तर वृद्धि इन्हें और अपरदित कर सकती है।