विविध (परंपरागत सामान्य ज्ञान) भाग-II

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21. भारतीय प्राणि सर्वेक्षण द्वारा प्रकाशित फील्ड गाइड 'बर्ड्स ऑफ इंडिया' के अनुसार, भारत में पक्षियों की कितनी प्रजातियां हैं? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 1331
Solution:
  • भारतीय प्राणि सर्वेक्षण द्वारा प्रकाशित फील्ड गाइड 'बर्ड्स ऑफ इंडिया' के अनुसार, भारत में पक्षियों की 1331 प्रजातियां हैं।
  • यह आंकड़ा ZSI के अध्ययन और रिपोर्टों पर आधारित है
  • जिसमें वैश्विक पक्षी विविधता (लगभग 10,906 प्रजातियाँ) के संदर्भ में भारत का योगदान करीब 12.4% बताया गया है।
  • पुस्तक का विवरण
    • 'बर्ड्स ऑफ इंडिया' एक प्रमुख फील्ड गाइड है जो ZSI और अन्य विशेषज्ञों द्वारा संकलित है
    • जिसमें भारत के भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
    • यह गाइड पक्षी प्रेक्षणकर्ताओं, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए तैयार किया गया है।
    • इसमें न केवल प्रजातियों की पहचान, वितरण, आवास और चित्रण शामिल हैं
    • बल्कि संरक्षण स्थिति भी उल्लिखित है। ZSI के वैज्ञानिक अमिताव मजूमदार ने इसकी पुष्टि करते हुए
    • भारत में कुल 1,353 पक्षी प्रजातियाँ हैं, जिनमें से 78 स्थानिक (केवल भारत में पाई जाने वाली) हैं।
  • स्थानिक प्रजातियाँ
    • इन 1,353 प्रजातियों में से 78 प्रजातियाँ केवल भारत तक सीमित हैं
    • जो देश की जैव विविधता की अनूठी विशेषता दर्शाती हैं। इनका वितरण इस प्रकार है:
    • पश्चिमी घाट: 28 प्रजातियाँ
    • अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह: 25 प्रजातियाँ
    • पूर्वी हिमालय: 4 प्रजातियाँ
    • दक्षिणी डेक्कन पठार और मध्य भारतीय वन क्षेत्र: 1-1 प्रजाति प्रत्येक
    • इनमें से 25 प्रजातियाँ IUCN के अनुसार लुप्तप्राय हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, '75 एन्डेमिक बर्ड्स ऑफ इंडिया' पुस्तक (ZSI द्वारा आजादी के 75वें वर्ष पर प्रकाशित) में ऐसी 75 प्रजातियों पर विशेष फोकस किया गया।
  • कुल प्रजातियों का संदर्भ
    • ZSI की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से 1,353 प्रजातियाँ ही भारत की आधिकारिक संख्या मानी गई हैं।
    • हालाँकि, कुछ सर्वेक्षण जैसे ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट (GBBC 2024) में 1,036 प्रजातियाँ एक ही घटना में दर्ज की गईं
    • जो कुल संख्या का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। विकिपीडिया जैसी सूचियों में भी लगभग इसी रेंज का उल्लेख है
    • लेकिन ZSI का फील्ड गाइड सबसे प्रामाणिक स्रोत है।
    • समय के साथ छोटे-मोटे अपडेट हो सकते हैं, लेकिन 2023-2025 की रिपोर्टों में यही संख्या प्रमुख है।
  • संरक्षण और महत्व
    • ये प्रजातियाँ भारत की 4 जैव विविधता हॉटस्पॉट्स (हिमालय, पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा, सुंदरलैंड) से जुड़ी हैं।
    • ZSI का यह गाइड पक्षी संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें दुर्लभ प्रजातियों जैसे हिमालयी बटेर, नीलगिरि लाफिंगथ्रश आदि का विवरण है।
    • कुल मिलाकर, यह संख्या भारत को विश्व के पक्षी-समृद्ध देशों में शीर्ष स्थानों पर रखती है।

22. निम्नलिखित में से कौन इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस के संस्थापक थे? [CGL (T-I) 18 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) महेंद्र लाल सरकार
Solution:
  • जुलाई, 1876 में महेंद्र लाल सरकार द्वारा इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' की स्थापना कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में की गई थी।
  • संस्थापना का इतिहास
    • इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस की स्थापना 29 जुलाई 1876 को कलकत्ता (अब कोलकाता) के बाउबाजार स्ट्रीट पर हुई थी।
    • डॉ. महेंद्रलाल सरकार, जो एक प्रसिद्ध चिकित्सक, विद्वान और परोपकारी थे
    • इसे भारतीयों द्वारा संचालित विज्ञान अनुसंधान संस्थान के रूप में स्थापित किया
    • क्योंकि उस समय यूरोपीय नियंत्रण वाले संस्थानों में भारतीयों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते थे।
    • संस्थान की शुरुआती गतिविधियां जनता के दान पर निर्भर थीं, और महेंद्रलाल स्वयं इसके संस्थापक सचिव बने।
  • संस्थापक का परिचय
    • डॉ. महेंद्रलाल सरकार (1833-1904) एक होम्योपैथिक चिकित्सक थे
    • जिन्होंने पश्चिमी चिकित्सा को अपनाया और भारतीय समाज में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
    • उन्होंने ब्रह्म समाज से प्रेरणा ली, लेकिन बाद में स्वतंत्र विचारधारा अपनाई।
    • IACS की स्थापना उनका स्वप्न था, जहां बुनियादी विज्ञान जैसे भौतिकी और रसायन विज्ञान में मौलिक अनुसंधान हो सके।
    • संस्थान के प्रारंभिक ट्रस्टी बोर्ड में पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर और केशबचंद्र सेन जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल थे।
  • संस्थान का विकास
    • 1905 में IACS को पुनर्गठित कर शुद्ध अनुसंधान केंद्र बनाया गया।
    • 1946 में डॉ. मेघनाद साहा के नेतृत्व में नई योजना बनी, जिसमें एक्स-रे, ऑप्टिक्स, चुंबकत्व और रमन प्रभाव जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया गया।
    • प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री सी.वी. रमन ने 1907 से 1933 तक यहां कार्य किया और 1930 में रमन प्रभाव की खोज कर नोबेल पुरस्कार जीता
    • जो IACS की उपलब्धि थी। आज यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है।
  • महत्वपूर्ण उपलब्धियां
    • भारत का सबसे पुराना बुनियादी विज्ञान अनुसंधान संस्थान।
    • रमन प्रभाव की खोज का केंद्र, जो नोबेल पुरस्कार से जुड़ा।
    • वर्तमान में भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान और सामग्री विज्ञान में अग्रणी शोध।

23. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) (IS-10500 2012) के अनुसार, पीने योग्य पानी में आविलता की अधिकतम अनुमेय सीमा क्या है? [CGL (T-I) 20 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 5 NTU
Solution:
  • भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) (IS-10500: 2012) के अनुसार, पीने योग्य पानी में आविलता (Turbidity) की अधिकतम अनुमेय सीमा 5 NTU है।
  • मानक का परिचय
    • जो भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों की स्वीकार्य (Acceptable) और वैकल्पिक स्रोत न होने पर अनुमेय (Permissible) सीमाएं निर्धारित करता है।
    • यह मानक पानी को स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित बनाने के साथ-साथ उसकी स्वीकार्यता (जैसे स्वाद, गंध, रंग) सुनिश्चित करता है।
    • आविलता पानी की स्पष्टता को मापती है, जो मिट्टी, जैविक पदार्थ या अन्य कणों के कारण होती है।
  • आविलता की सीमाएं
    • स्वीकार्य सीमा: 1 NTU (अधिकतम) – यह आदर्श स्तर है, जहां पानी पूरी तरह साफ और पारदर्शी दिखता है।​
    • अनुमेय सीमा (वैकल्पिक स्रोत के अभाव में): 5 NTU (अधिकतम) – यदि बेहतर स्रोत उपलब्ध न हो
    • तो इस स्तर तक सहन किया जा सकता है, लेकिन इससे अधिक होने पर स्रोत अस्वीकार्य माना जाता है।
    • यदि आविलता 5 NTU से अधिक हो, तो पानी को उपचारित करना अनिवार्य है, क्योंकि यह बैक्टीरिया या अन्य प्रदूषकों को छिपा सकती है।​
  • मापन विधि
    • आविलता को नेपेलोमीटर (Nephelometer) से NTU इकाई में मापा जाता है, जो प्रकाश के बिखराव पर आधारित है।
    • BIS मानक में Table 1 (Organoleptic and Physical Parameters) के अंतर्गत इसे शामिल किया गया है। परीक्षण के लिए IS 3025 (Part 10):1984 विधि का उपयोग होता है।
  • महत्व और प्रभाव
    • उच्च आविलता क्लोरीनीकरण की प्रभावशीलता कम कर सकती है, जिससे जलजनित रोगों का खतरा बढ़ता है।
    • शहरी क्षेत्रों जैसे दिल्ली में, नदी प्रदूषण के कारण अक्सर उपचार आवश्यक होता है।
    • नियमित निगरानी से जलजनित बीमारियां जैसे हैजा, डायरिया रोकी जा सकती हैं।
    • BIS इस मानक को लागू करने की सिफारिश करता है ताकि पानी उपभोक्ता के लिए आकर्षक और सुरक्षित रहे।

24. दो वर्ष से पहले आ रहे हथियारबंद आदिवासी संघर्ष को समाप्त करते हुए अल्लूरी सीताराम राजू को कब गिरफ्तार किया गया था? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) मई, 1924
Solution:
  • अल्लूरी सीताराम राजू ने रम्पा विद्रोह का नेतृत्व किया, जो आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक आदिवासी विद्रोह था।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई, 2022 को अल्लूरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आंध्र प्रदेश में उनकी एक कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया।
  • पृष्ठभूमि
    • ब्रिटिश वन कानूनों ने आदिवासियों की पारंपरिक 'पोदु' खेती (जंगलों में घूम-घूमकर खेती) पर प्रतिबंध लगा दिया था
    • जिससे उनका जीवन कठिन हो गया। इसके अलावा, ठेकेदारों और मुट्टादारों (गांव के मुखिया) का शोषण भी विद्रोह का कारण बना।
  • राम्पा विद्रोह की शुरुआत
    • विद्रोह अगस्त 1922 में शुरू हुआ, जब अल्लूरी ने आदिवासियों को संगठित कर ब्रिटिश पुलिस थानों पर हमले किए।
    • उन्होंने जयपुर महाराजा के भेजे गए हथियारों को लूट लिया और गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाई।
    • लगभग दो वर्ष तक (1922-1924) जंगलों में ब्रिटिश सेना को खदेड़ा, लेकिन ब्रिटिश ने असम राइफल्स और मालाबार पुलिस की विशेष टुकड़ियां भेजीं।
  • गिरफ्तारी और मृत्यु
    • अल्लूरी को मई 1924 में चिंतबल्ली के जंगल में ब्रिटिश सेना ने घेराबंदी कर पकड़ लिया।
    • इसके तुरंत बाद, 7 मई 1924 को कोय्युरू (या कृष्णादेवीपेटा के पास) में एक पेड़ से बांधकर सार्वजनिक रूप से गोली मार दी गई। उनकी गिरफ्तारी और मृत्यु ने विद्रोह को समाप्त कर दिया।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • अल्लूरी को "मायनम वीरुडु" (जंगल का शेर) कहा जाता है।
    • आंध्र प्रदेश सरकार उनकी जयंती (4 जुलाई) को राज्योत्सव के रूप में मनाती है।

25. पीएसएलवी ऑर्बिटल प्रायोगिक मॉड्यूल (POEM) किस संगठन से संबंधित है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) ISRO
Solution:
  • POEM (PSLV कक्षीय प्रायोगिक मॉड्यूल) ISRO का एक प्रायोगिक मिशन है
  • जिसका कक्षीय/आर्बिट प्रयोग ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के चौथे चरण के दौरान अंतरिक्ष प्लेटफार्म के रूप में किया जाता है।
  • POEM क्या है?
    • पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के चौथे चरण (PS4) के खर्च उपकरण को कक्षा में एक माइक्रो-ग्रैविटी प्रयोगशाला के रूप में उपयोग करने वाला सिस्टम है।
    • PSLV के पहले तीन चरण ईंधन समाप्त होने पर समुद्र में गिर जाते हैं, जबकि PS4 सामान्यतः अंतरिक्ष कचरा बन जाता है
    • लेकिन POEM इसे पावर जेनरेशन, कम्युनिकेशन, स्थिरीकरण और डेटा स्टोरेज जैसे मॉड्यूलर सबसिस्टम्स जोड़कर एक उपग्रह बस के रूप में बदल देता है।
    • यह भारतीय अकादमिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और छोटे प्रयोगकर्ताओं को कम लागत पर कक्षा में प्रयोग करने का अवसर प्रदान करता है
    • जिससे सैटेलाइट बस डिजाइन, क्वालिफिकेशन और ग्राउंड स्टेशन सेटअप का बोझ कम होता है।
  • उद्देश्य और लाभ
    • POEM का मुख्य उद्देश्य ISRO द्वारा भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को सस्ता और लंबे समय (3 महीने तक) तक माइक्रो-ग्रैविटी प्रयोग करने की सुविधा देना है।
    • यह उप-किलो उपग्रहों (नैनो/माइक्रो-सैटेलाइट्स) के लिए आदर्श है, जो महंगे लॉन्च व्हीकल की जरूरत के बिना कक्षा में टेस्ट हो सकते हैं।
    • इससे विकास समय और लागत घटती है, तथा अंतरिक्ष कचरे को कम करने में मदद मिलती है
    • क्योंकि PS4 को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी वायुमंडल में पुनः प्रवेश कराया जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, POEM-3 मिशन (PSLV-C58/XPoSat) ने सभी पेलोड उद्देश्यों को पूरा करने के बाद बिना किसी ऑर्बिटल डेब्रीस के पृथ्वी पर वापसी की।
  • तकनीकी विशेषताएं
    • 3D render of the PS4 Orbital Platform payload deck with flexible solar panels and sandwich ribs.
    • POEM में नेविगेशन, गाइडेंस एंड कंट्रोल (NGC) सिस्टम होता है जो सन सेंसर्स, मैग्नेटोमीटर, जायरोस्कोप्स और NavIC नक्षत्र से नेविगेशन करता है।
    • पावर सोलर पैनल्स और लिथियम-आयन बैटरी से आती है, जबकि हीलियम गैस थ्रस्टर्स से स्थिरीकरण होता है।
    • टेलीमेट्री, टेलीकमांड (TT&C) पैकेज और डेटा स्टोरेज की सुविधा भी उपलब्ध है। यह तीन-अक्ष स्थिरीकरण वाला प्लेटफॉर्म है जो 350-650 किमी कक्षा में कार्य करता है।
    • यह 3D रेंडर PS4 ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म के पेलोड डेक को दर्शाता है, जिसमें फ्लेक्सिबल सोलर पैनल्स और सैंडविच रिब्स प्रमुख हैं।
  • प्रमुख मिशन
    • POEM-1 (PSLV-C53, जून 2022): पहला उपयोग, सिंगापुर के तीन उपग्रहों के साथ वैज्ञानिक प्रयोग।
    • POEM-3 (PSLV-C58, जनवरी 2024): XPoSat लॉन्च के बाद सभी उद्देश्य पूर्ण।​
    • POEM-4 (PSLV-C60/SpaDeX, दिसंबर 2024): डocking प्रयोगों सहित 3 महीने तक ऑपरेशन।​
    • ISRO ने अब तक कई POEM मिशनों के माध्यम से इसे परिपक्व बनाया है, जो PSLV को 'वर्कहॉर्स' बनाए रखते हुए नवाचार को बढ़ावा देता है।
  • महत्व भारत के लिए
    • POEM ISRO की अंतरिक्ष कचरा न्यूनीकरण नीति का हिस्सा है
    • छोटे प्रयोगों को सक्षम बनाकर भारत को लो-कॉस्ट स्पेस टेक्नोलॉजी हब बनाता है।
    • VSSC/ISRO द्वारा डिजाइन किया गया यह प्लेटफॉर्म भविष्य के SSLV और GSLV मिशनों में भी उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

26. मार्केट बेस्ड इकोनॉमिक डिस्पैच (MBED) तंत्र निम्नलिखित में से किस मंत्रालय से संबंधित है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) विद्युत मंत्रालय
Solution:
  • मार्केट बेस्ड इकोनॉमिक डिस्पैच (MBED) तंत्र विद्युत मंत्रालय से संबंधित है।
  • इसके तहत विद्युत की संपूर्ण वार्षिक खपत को वितरित करने के लिए एक केंद्रीकृत समय-निर्धारण की परिकल्पना की गई है।
  • MBED क्या है?
    • MBED एक केंद्रीकृत तंत्र है जो राष्ट्रीय स्तर पर बिजली उत्पादन संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करता है।
    • वर्तमान में, राज्य स्तर पर डिस्पैच होता है, जिससे महंगे संसाधनों का उपयोग बढ़ जाता है
    • लेकिन MBED देशव्यापी सबसे सस्ते उत्पादन स्रोतों को प्राथमिकता देता है।
    • इससे डिस्कॉम्स (वितरण कंपनियों) की बिजली खरीद लागत 5% तक कम हो सकती है।
    • यह बाजार सिद्धांतों पर आधारित है, जहां उत्पादक अपनी लागत के आधार पर प्रतिस्पर्धा करते हैं।
  • विद्युत मंत्रालय की भूमिका
    • विद्युत मंत्रालय ने 2021 में MBED पर चर्चा पत्र जारी किया और चरण-1 के कार्यान्वयन के लिए फ्रेमवर्क तैयार किया।
    • मंत्रालय बिजली नीतियों, योजना, उत्पादन, संचरण और वितरण का समग्र प्रबंधन करता है
    • जिसमें CERC, CEA और PSUs जैसे NTPC शामिल हैं।
    • MBED Electricity Act, 2003 के तहत नियामक ढांचे का हिस्सा है और राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2021 के अनुरूप है।
  • कार्यान्वयन और लाभ
    • MBED चरण-1 में डे-अहेड मार्केट (DAM) और रीयल-टाइम मार्केट को मजबूत किया गया
    • जिससे 'एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक फ्रीक्वेंसी' का लक्ष्य साकार होता है। इससे RE (नवीकरणीय ऊर्जा) एकीकरण बेहतर होगा
    • कटौती कम होगी और पारदर्शी प्राइसिंग सुनिश्चित होगी।
    • हालांकि, कुछ राज्यों ने राज्य स्वायत्तता पर आपत्ति जताई, लेकिन मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय हित में पुष्ट किया।​
  • वर्तमान स्थिति
    • 2021 से MBED पर विचार-विमर्श चल रहा है, और विद्युत मंत्रालय लगातार इसे लागू करने के प्रयासरत है।
    • यह बिजली उपभोक्ताओं के लिए वार्षिक बचत लाएगा और क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता बढ़ाएगा।

27. निम्नलिखित में से कौन-सी भारत की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल (surface-to-surface missile) है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अग्नि-V (Agni V)
Solution:
  • अग्नि-V (Agni V) भारत की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।
  • अग्नि श्रृंखला में अग्नि-प्राइम, अग्नि-1, अग्नि-II, अग्नि-III, अग्नि-IV तथा अग्नि-V जैसी मिसाइलें शामिल हैं।
  • प्रमुख SSM श्रृंखलाएँ
    • भारत की SSM में सबसे प्रसिद्ध अग्नि श्रृंखला है, जो मध्यम से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।
    • अग्नि-I: 700-1,200 किमी रेंज, मोबाइल लॉन्चर से दागी जाती है, परमाणु/परंपरागत वारहेड ले जा सकती है।
    • अग्नि-II: 2,000-3,000 किमी रेंज, दो चरण वाली ठोस ईंधन मिसाइल।​
    • अग्नि-III: हाल ही में 2026 में सफल परीक्षण, 3,000-3,500 किमी रेंज, रिंग लेजर जायरो नेविगेशन से सटीक।​
    • अग्नि-IV और V: 4,000-5,000+ किमी, ICBM श्रेणी में, मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) क्षमता।​
    • पृथ्वी श्रृंखला भारत की पहली SSM है, IGMDP कार्यक्रम के तहत विकसित।
    • पृथ्वी-II: 150-350 किमी रेंज, तरल ईंधन, छोटे सामरिक लक्ष्यों के लिए।
  • अन्य महत्वपूर्ण SSM
    • ब्रह्मोस: सुपरसोनिक क्रूज SSM (रूस-भारत संयुक्त), 290-500+ किमी रेंज (विस्तारित संस्करण), जमीन/समुद्र/हवा से लॉन्च, Mach 3 स्पीड।
    • हालांकि मुख्यतः क्रूज, लेकिन SSM भूमिका में उपयोग।​
    • निर्भय: सबसोनिक क्रूज SSM, 1,000 किमी रेंज, लो-ऑब्जर्वेबल स्टेल्थ।​
    • शॉर्ट-रेंज SSM में धनुष (नौसेना संस्करण, 350 किमी) शामिल है।​
  • विशेषताएँ और तकनीकी विवरण
    • ये मिसाइलें ठोस/तरल ईंधन, INS/GPS/टेरेन नेविगेशन से लैस हैं, CEP (सटीकता) 10-50 मीटर तक।
    • लॉन्च प्लेटफॉर्म: रेल/रोड मोबाइल, कैनिस्टर लॉन्च (तेज तैनाती)।
    • वारहेड: 500 किग्रा से 1.5 टन, परमाणु (12-200 किलोटन) या HE।
    • विकास इतिहास: 1983 में IGMDP से शुरू, अग्नि-पृथ्वी मुख्य। 2026 तक अग्नि-VI (10,000 किमी) विकासाधीन।
    • परीक्षण: अग्नि-III का हालिया परीक्षण (फरवरी 2026) स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड के लिए।​
  • सामरिक महत्व
    • ये SSM भारत की न्यूक्लियर ट्रायड (भूमि/समुद्र/हवा) का आधार हैं
    • चीन/पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों पर निरोधक।
    • स्वदेशीकरण 90%+, निर्यात (ब्रह्मोस फिलीपींस को)। भविष्य: हाइपरसोनिक SSM जैसे शौर्य/पृथ्वी+।

28. "लिविंग रूट ब्रिज" किस राज्य में पाई जाने वाली एक प्रतिष्ठित संरचना है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) मेघालय
Solution:
  • 'लिविंग रूट ब्रिज' भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय के दक्षिणी भाग में पाई जाने वाली एक प्रतिष्ठित संरचना है।
  • 'लिविंग रूट ब्रिज' वृक्ष के आकार का एक रूप है, इसे जिंग कींग जरी के नाम से भी जाना जाता है।
  • विस्तृत जानकारी:
    • क्या है: लिविंग रूट ब्रिज पेड़ों की जड़ें—खासकर फिकस इलास्टिका प्रजाति की जड़ें
    • अपने वातावरण में क्रमशः एक-दूसरे से जुड़कर पुल जैसी संरचना बनाती हैं।
    • ये प्राकृतिक पुल आमतौर पर नदी-नालों के दोनों किनारों को जोड़ते हैं
    • समय के साथ मजबूत होकर उपयोग योग्य हो जाते हैं।​
    • स्थान: मुख्य रूप से मेघालय के दक्षिणी भाग में स्थित हैं, विशेषकर खासी और जयंतिया जनजातीय क्षेत्रों के बीच।
    • इस क्षेत्र में कई villages में ये पुल पाए जाते हैं और ग्रामीण अपने दैनिक आवागमन में इन्हीं पुलों का उपयोग करते हैं।
    • निर्माण की विधि: पहले किनारों पर बड़े पेड़ों की जड़ें लगाकर آنها को ऊपर से बाँधना शुरू किया जाता है
    • फिर इन जड़ों को एक-दूसरे के साथ उलझाकर साझा संरचना बनती है. यह प्रक्रिया दशकों तक चलती है
    • वर्षों में पुल के रूप में इस्तेमाल होने लायक मजबूत संरचना बन जाती है. स्थानीय लोगों ने यह परंपरा वर्षों से विकसित की है।
    • इतिहास और कदर: इन पुलों के इतिहास के लिखित रिकॉर्ड नहीं मिलते, पर वैज्ञानिक मानते हैं
    • वे सदियों पुराने हैं और मौसम की कठोरताओं में भी टिके रहते हैं।
    • यूनेस्को विश्व धरोहर के संदर्भ में मेघालय के कई गाँवों में लगभग सौ जीवित (living) रूट ब्रिज माने जाते हैं.
    • सामुदायिक महत्व: ये पुल सिर्फ यातायात का साधन ही नहीं, बल्कि स्थानीय पर्यावरणीय-आर्थिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं
    • कुछ जगहों पर इन्हें पर्यटन और ईको-टूरिज्म के रूप में भी प्रोत्साहित किया जाता है।
  • उदाहरण और दृश्य संकेत:
    • मेघालय के Nongriat, Cherrapunji और Mawlynnong जैसे स्थानों के पास कई जीवित पुल स्थित हैं
    • जिन्हें सड़क-जैसी चौड़ाई और दूरी के लिए उपयोग किया जाता है।
    • इन पुलों की जड़ें पेड़ों की हरित संरचना से मिलकर एक मजबूत मार्ग बनाती हैं।​​
  • गर organizers के रूप में एक संक्षिप्त सार:
  • राज्य: मेघालय
    • स्थान-समुदाय: खासी (Khasi) और जयंतीय (Jaintia) समुदाय
    • संरचना: जीवित जड़ पुल (Living Root Bridge)
    • वैज्ञानिक/सांस्कृतिक महत्व: प्राकृतिक-मानव सहयोग से बनी टिकाऊ इको-इंफ्रास्ट्रक्चर; पर्यटन की चेतना बढ़ाने का स्रोत

29. निम्नलिखित में से भारत का पहला पूरी तरह से महिलाओं द्वारा प्रबंधित किया जाने वाला रेलवे स्टेशन कौन-सा है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) गांधीनगर रेलवे स्टेशन, जयपुर
Solution:
  • भारत का पहला पूरी तरह से महिलाओं द्वारा प्रबंधित किया जाने वाला रेलवे स्टेशन गांधीनगर रेलवे स्टेशन है
  • जो कि जयपुर में स्थित है। गांधीनगर रेलवे स्टेशन का प्रबंधन 40 महिलाओं की एक टीम द्वारा किया जाता है
  • जिसमें स्टेशन मास्टर, टिकट कलेक्टर और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
  • विस्तृत विवरण:
    • ऐतिहासिक पन्ना: गांधी नगर रेलवे स्टेशन जयपुर दक्षिण-पश्चिम रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत मुख्य लाइन का स्टेशन है
    • जिसे पहली बार 2017 के आसपास महिला कर्मचारियों द्वारा पूरी तरह से संचालित किया गया माना जाता है .
    • प्रबंधन संरचना: इस स्टेशन पर स्टेशन मास्टर से लेकर टिकट कलेक्टर‑सह‑बुकिंग, सुरक्षा और नियंत्रण कक्ष आदि सभी प्रमुख भूमिकाओं में महिलाएं कार्य करती हैं
    • यह एक राष्ट्रीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण का प्रतीक माना गया है .
    • महत्त्व और मान्यता: रहा है कि संयुक्त राष्ट्र आदि संगठनों ने इसे महिलाओं की सशक्तिकरण के संदर्भ में एक मील का पत्थर बताया है
    • जबकि रेलवे प्रशासन इसे महिला‑प्रधान और समावेशी कार्यबल के संकेतक के रूप में प्रस्तुत करता है .
  • पूर्वक जानकारी के साथ कुछ अन्य स्टेशनों पर भी महिलाएं संचालित करने के मामले देखे जाते हैं:
    • मुंबई का माटुंगा उपनगरीय स्टेशन कई वर्षों से पूरी तरह महिला स्टाफ द्वारा संचालित है
    • जिसे अक्सर भारत में महिला‑प्रधान रेलवे स्टेशन के उदाहरणों में उद्धृत किया जाता है .
    • उत्तर भारत में लखनऊ सिटी रेलवे स्टेशन अक्टूबर 2025 के आसपास इस तरह की टीम के साथ संचालन के लिए चर्चा में रहा था
    • जिसे उत्तर भारत का पहला पूरी तरह महिला‑कर्मचारी स्टाफ द्वारा संचालित स्टेशन कहा गया है, हालांकि यह गांधी नगर के संदर्भ में मुख्य लाइन के पहलू से जुड़ा मामला है .
  • महत्वपूर्ण नोट:
    • रेलवे क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के क्रम में ऐसे स्टेशन मॉडल्स का उद्देश्य सुरक्षा, सेवाओं की गुणवत्ता और महिला कर्मचारियों के करियर‑पथ को मजबूत करना है।
    • Gandhi Nagar Jaipur को इस दिशा में एक ऐतिहासिक उदाहरण के तौर पर देखा जाता है।

30. भारत की राष्ट्रीय वायु खेल नीति (National Air Sports policy) वर्ष ....... में जारी की गई थी। [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 2022
Solution:
  • भारत की राष्ट्रीय वायु खेल नीति वर्ष 2022 में जारी की गई थी।
  • राष्ट्रीय वायु खेल नीति (NASP) भारत में एक सुरक्षित, किफायती, सुलभ, आनंददायक और टिकाऊ वायु खेल पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करके वर्ष 2030 तक भारत को शीर्ष खेल राष्ट्रों में से एक बनाने को संकल्पित है।
  • नीति का पृष्ठभूमि
    • यह नीति जनवरी 2022 में मसौदा रूप में जारी की गई थी, जिस पर जनता से सुझाव मांगे गए।
    • इसका निर्माण नीति निर्माताओं, एयर स्पोर्ट्स विशेषज्ञों और आम लोगों के इनपुट पर आधारित है।
    • मुख्य उद्देश्य भारत को 2030 तक विश्व के शीर्ष वायु खेल राष्ट्रों में शामिल करना है
    • जहां देश के विशाल भौगोलिक क्षेत्र, विविध स्थलाकृति और अनुकूल मौसम का लाभ उठाया जाए।
  • प्रमुख उद्देश्य
    • नीति सुरक्षित, किफायती, सुलभ, आनंददायक और टिकाऊ वायु खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर केंद्रित है।​
    • वैश्विक आयोजनों में भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाना।
    • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उपकरणों का घरेलू डिजाइन, विकास और निर्माण को प्रोत्साहन।
    • आयात शुल्क माफी और जीएसटी दर 5% या कम करने की सिफारिश।
  • शामिल खेल
    • नीति में एरोबेटिक्स, एरोमॉडलिंग, बैलूनिंग, ड्रोन, ग्लाइडिंग, हैंग ग्लाइडिंग, पैराग्लाइडिंग, माइक्रोलाइटिंग, पैरामोटरिंग, स्काइडाइविंग और विंटेज विमान जैसे खेल शामिल हैं।​
  • शासन संरचना
    • चार-स्तरीय व्यवस्था अपनाई गई है:
    • प्रत्येक फेडरेशन उपकरण, बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षण के लिए सुरक्षा मानक निर्धारित करेगा, गैर-अनुपालन पर दंड की व्यवस्था होगी।​
  • अन्य प्रावधान
    • स्कूलों, कॉलेजों में वायु खेलों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रोत्साहन।
    • बुनियादी ढांचे, उपकरणों और प्रशिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
    • अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा पर जोर।