विविध (परंपरागत सामान्य ज्ञान) भाग-I

Total Questions: 30

11. निम्नलिखित में से कौन एक रोमन कैथोलिक मिशनरी था/थी, जिन्होंने अपने अधिकांश जीवन में बंगाल में काम किया था? [CHSL (T-I) 15 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) मदर टेरेसा
Solution:
  • मदर टेरेसा का जन्म उत्तरी मैसीडोनिआ (अल्बानिया मूल की) में वर्ष 1910 में हुआ था और 18 वर्ष की आयु में उन्होंने एक मिशनरी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।
  • वह वर्ष 1929 में भारत आई और यहीं पर रहकर उन्होंने कलकत्ता के एक स्कूल में अध्यापन कार्य किया।
  • मदर टेरेसा रोमन कैथोलिक मिशनरी थीं, जिन्होंने अपने अधिकांश जीवन में बंगाल में काम किया था।
  • प्रारंभिक जीवन
    • अल्बानियाई मूल की यह बालिका 18 वर्ष की आयु में आइरिश लॉरेत्तो सिस्टर्स के साथ भारत आईं और लोरेत्तो कॉन्वेंट, एंटाली (दार्जिलिंग) में नन बनीं।
    • 1931 में उन्होंने पहली बार कोलकाता में पढ़ाया, जहाँ उन्होंने गरीबों की दयनीय स्थिति देखी।​​
  • बंगाल में कार्य
    • 1948 में उन्होंने अपनी धार्मिक वेशभूषा त्यागकर साड़ी पहनकर कोलकाता की सड़कों पर गरीबों की सेवा शुरू की।
    • 1950 में रोमन कैथोलिक चर्च से मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की, जो गरीबों, बीमारों, अनाथों और मरते हुए लोगों की सेवा के लिए समर्पित था।
    • कोलकाता में निर्मल हृदय होम (मरते लोगों के लिए) और शिशु भवन (अनाथों के लिए) जैसी संस्थाएँ स्थापित कीं, जहाँ उन्होंने अपना अधिकांश जीवन बिताया।
    • बंगाल के अलावा उनके कार्य वैश्विक हुए, लेकिन कोलकाता उनका मुख्य केंद्र रहा।​​
  • उपलब्धियाँ और सम्मान
    • उनके निस्वार्थ सेवा के लिए 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने पद्म श्री (1962) और पद्म विभूषण (1980) प्रदान किए।
    • 4 सितंबर 2016 को पोप फ्रांसिस ने उन्हें संत घोषित किया, और वे कलकत्ता की संत टेरेसा कहलाईं। उनकी मृत्यु 5 सितंबर 1997 को कोलकाता में हुई।​​
  • अन्य संभावित व्यक्ति
    • बंगाल में अन्य कैथोलिक मिशनरी जैसे संत रॉबर्ट लेजर (1834 में विकैरिएट ऑफ बंगाल के संस्थापक) या पुर्तगाली जेसुइट्स (हुगली-बंडेल में 16वीं सदी से) कार्यरत थे
    • लेकिन मदर टेरेसा ही वह एकमात्र प्रमुख व्यक्ति हैं जिन्होंने अधिकांश जीवन (लगभग 50 वर्ष) बंगाल में बिताया।

12. राधेश्याम बारले को गुरु घासीदास की जयंती पर संतनामी समुदाय के आदिवासियों के पंथी नृत्य को बढ़ावा देने के लिए 2020-21 में पद्मश्री मिला था। यह नृत्य शैली किस राज्य से संबंधित है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) छत्तीसगढ़
Solution:
  • पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित है।
  • पंथी नृत्य का इतिहास और महत्व
    • जो 18वीं शताब्दी में गुरु घासीदास द्वारा स्थापित सतनाम पंथ से जुड़ा हुआ है।
    • गुरु घासीदास की जयंती पर यह विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाता है
    • जिसमें निर्गुण भक्ति, कबीर-रैदास जैसे संतों के वैराग्यपूर्ण संदेश और जीवन की आध्यात्मिक महत्ता पर आधारित गीत गाए जाते हैं।
    • यह नृत्य उच्च चेतना प्राप्ति का साधन माना जाता है और आदिवासी समुदायों द्वारा भगवान राम व देवी दुर्गा को समर्पित होता है।
  • प्रदर्शन शैली और वेशभूषा
    • नृत्य तेज़ गति का होता है, जिसमें मृदंग या ढोलक की थाप पर नर्तक लाठी, तलवार जैसे उपकरणों का उपयोग करते हैं
    • पैरों में घुंघरू बांधकर अभिव्यंजक चालें दिखाते हैं। नर्तक रंग-बिरंगे परिधान जैसे धोती, कमरबंद और घुंघरू पहनते हैं
    • जबकि मधुर लोकगीतों की संगत इसे और जीवंत बनाती है।
    • यह सामूहिक रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता है और धार्मिक त्योहारों या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकप्रिय है।
  • राधेश्याम बारले और पद्मश्री सम्मान
    • राधेश्याम बारले (डॉ. राधेश्याम बारले) छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पंथी नर्तक हैं
    • जिन्होंने इस नृत्य को देश-विदेश में फैलाया और कई विदेशी नर्तकों को प्रशिक्षित किया।
    • 2021 में (2020-21 सत्र के लिए घोषित) उन्हें गुरु घासीदास जयंती पर सतनामी समुदाय के आदिवासियों के पंथी नृत्य को बढ़ावा देने के लिए पद्मश्री पुरस्कार मिला
    • जो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्व में भी सम्मानित योगदान का विस्तार था। उनके प्रयासों से यह नृत्य राष्ट्रीय स्तर पर पहचान पा चुका है।
  • सांस्कृतिक प्रसार और अन्य राज्य
    • हालांकि पंथी मूल रूप से छत्तीसगढ़ का है, यह अब राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों पर प्रदर्शित होता है
    • लेकिन बिहार, मध्य प्रदेश या ओडिशा से इसका कोई सीधा संबंध नहीं है।
    • छत्तीसगढ़ सरकार और समुदाय इसे संरक्षित रखने के प्रयासरत हैं।

13. भारतीय संविधान के ....... में कहा गया है कि राज्य ग्राम पंचायतों को संगठित करने के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां और अधिकार प्रदान करेगा, जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों। [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 40
Solution:
  • भारतीय संविधान में अनुच्छेद 40 राज्य की नीति के निदेशक तत्व के अंतर्गत आता है। इस अनुच्छेद में वर्णित है
  • राज्य ग्राम पंचायतों को संगठित करने के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां और अधिकार प्रदान करेगा
  • जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों।
  • अनुच्छेद 40 का पूर्ण पाठ
    • अनुच्छेद 40 राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों (भाग IV) का हिस्सा है, जो कहता है
    • राज्य, ग्राम पंचायतों को संगठित करने के लिए कदम उठाएगा
    • उन्हें ऐसी शक्तियां और अधिकार प्रदान करेगा जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों।"
    • यह अनुच्छेद ग्रामीण स्तर पर विकेंद्रीकृत लोकतंत्र की नींव रखता है, लेकिन यह नीति-निर्देशक होने के कारण न्यायिक रूप से प्रवर्तनीय नहीं है।
    • इसका उद्देश्य गांवों को स्वायत्त इकाइयों के रूप में सशक्त बनाना है, जहां स्थानीय लोग अपनी जरूरतों के अनुसार निर्णय लें।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया, जिसमें अनुच्छेद 40 को गांधीजी के ग्राम स्वराज के विचार से प्रेरित होकर शामिल किया गया।
    • स्वतंत्र भारत में पंचायती राज को मजबूत करने के लिए बालवंत राय मेहता समिति (1957) और अशोक मेहता समिति (1977) जैसी रिपोर्टों ने अनुच्छेद 40 को आधार बनाया।​
    • 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 ने इस सिद्धांत को मौलिक दर्जा देकर भाग IX (अनुच्छेद 243-243O) जोड़ा, जिससे पंचायतें संवैधानिक संस्थाएं बनीं।
  • 73वें संशोधन से संबंध
    • अनुच्छेद 40 केवल दिशानिर्देश था, लेकिन 73वें संशोधन ने इसे बाध्यकारी बनाया।​
    • अनुच्छेद 243G राज्य विधानमंडलों को पंचायतों को शक्तियां सौंपने का अधिकार देता है
    • खासकर 11वीं अनुसूची के 29 विषयों पर (जैसे कृषि, पशुपालन, ग्रामीण आवास, पेयजल)।
    • इससे तीन-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद) अनिवार्य हुई
    • जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण भी सुनिश्चित किया गया।
  • शक्तियां और जिम्मेदारियां
    • ग्राम पंचायतों को अनुच्छेद 40 और 243G के तहत स्वशासन के लिए आवश्यक शक्तियां मिली हैं:
    • आर्थिक विकास: कर लगाना, ऋण देना, ग्रामीण विकास योजनाएं चलाना।
    • सामाजिक कल्याण: शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण जैसे विषय।​
    • प्रशासनिक: विवाद निपटान, प्रमाण-पत्र जारी करना।​
    • राज्य अपने पंचायती राज अधिनियमों से इन्हें लागू करते हैं, जैसे उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम।​
  • महत्व और चुनौतियां
    • अनुच्छेद 40 ने भारत के 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया, जो 70% आबादी को प्रभावित करती हैं।​
    • यह सत्ता का विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करता है, लेकिन वित्तीय कमी, भ्रष्टाचार और कम जागरूकता चुनौतियां बनी हुई हैं।
    • सफलता के लिए ग्रामीण शिक्षा और भागीदारी जरूरी है, जैसा अनुच्छेद 243 में उल्लेखित।​

14. 1927 में मंदिर प्रवेश आंदोलन किसने शुरू किया था? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) भीमराव अंबेडकर
Solution:
  • 1927 का मंदिर प्रवेश आंदोलन भीमराव अंबेडकर द्वारा शुरू किया गया था।
  • यह निचली जाति के लोगों को मंदिरों में प्रवेश की अनुमति देने का आंदोलन था।
  • पृष्ठभूमि
    • तत्कालीन हिंदू समाज में अछूतों को मंदिरों, कुओं और सार्वजनिक स्थानों से वंचित रखा जाता था
    • जिसे डॉ. अंबेडकर ने जातिगत भेदभाव के रूप में चुनौती दी। 1927 में महाड सत्याग्रह से प्रेरित होकर उन्होंने मंदिर प्रवेश को लक्ष्य बनाया
    • जहां निचली जातियों को समान अधिकार दिलाने का उद्देश्य था।
    • यह आंदोलन हिंदू समाज सुधार का हिस्सा था, जिसमें अंबेडकर ने अछूतों को पूजा स्थलों तक पहुँच सुनिश्चित करने की मांग की।
  • प्रमुख घटनाएँ
    • महाड सत्याग्रह (20 मार्च 1927): आंदोलन की नींव, जहाँ अंबेडकर ने चवदार तालाब से पानी पीने का अधिकार दिलाया, जो बाद में मंदिर प्रवेश की ओर बढ़ा।​
    • कालाराम मंदिर आंदोलन (नासिक, 1930): 1927 के आंदोलन का विस्तार, जहाँ अंबेडकर ने महार समुदाय के साथ मंदिर में घुसने की कोशिश की
    • लेकिन पुलिस ने रोका; यह 5 साल तक चला।
    • 1927 से 1935 तक अंबेडकर ने तीन प्रमुख मंदिर प्रवेश आंदोलन चलाए, मुख्यतः महाराष्ट्र में।
  • उद्देश्य और प्रभाव
    • आंदोलन का लक्ष्य निचली जातियों को मंदिरों में प्रवेश, कुओं से पानी और पूजा-अर्चना का अधिकार दिलाना था
    • जिससे सामाजिक समानता स्थापित हो। इससे दलित जागृति हुई
    • जाति व्यवस्था कमजोर हुई और स्वतंत्र भारत में संविधान के अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता उन्मूलन) की नींव पड़ी।
    • 1947 के बाद विभिन्न राज्यों में मंदिर प्रवेश कानून बने, जैसे बॉम्बे में।​​
  • अन्य संदर्भ
    • महात्मा गांधी ने आंदोलन का समर्थन किया लेकिन इसे शुरू नहीं किया
    • एनी बेसेंट या रानाडे इससे असंबंधित थे।
    • यह अंबेडकर के व्यापक संघर्ष का हिस्सा था, जो बाद में पूना पैक्ट (1932) तक पहुँचा।​

15. अपने संविधान में मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने वाला पहला देश कौन-सा है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) सोवियत संघ (USSR)
Solution:
  • यू.एस.एस.आर. (सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक यूनियन) वर्ष 1936 में अपने संविधान में मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने वाला पहला देश था।
  • भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों का विचार रूस के संविधान (तत्कालीन सोवियत संघ) से प्रेरित है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • सोवियत संघ ने 1936 में स्टालिन संविधान (जिसे कभी-कभी 1936 का सोवियत संविधान कहा जाता है
    • माध्यम से अपने संविधान में मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा को पहली बार शामिल किया।
    • यह संविधान नागरिकों को राज्य और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों पर जोर देता था
    • जैसे कि श्रम करना, राज्य की रक्षा करना और सामाजिक नैतिकता का पालन करना।
    • इसकी शुरुआत सोवियत कम्युनिस्ट विचारधारा से हुई, जहां अधिकारों के साथ कर्तव्यों को संतुलित करने पर बल दिया गया।
  • सोवियत संविधान का विवरण
    • 1936 के सोवियत संविधान के अध्याय 10 में "मौलिक अधिकार और कर्तव्य" नामक खंड था
    • जिसमें नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया गया।
    • उदाहरणस्वरूप, नागरिकों का कर्तव्य था कि वे समाजवादी संपत्ति की रक्षा करें, कानून का पालन करें और उत्पादक श्रम में भाग लें।
    • यह दृष्टिकोण पश्चिमी संविधानों से भिन्न था, जो मुख्यतः अधिकारों पर केंद्रित थे।
    • सोवियत मॉडल ने वैश्विक स्तर पर कर्तव्यों की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया।
  • भारत पर प्रभाव
    • भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 के जरिए अनुच्छेद 51A में जोड़े गए।
    • स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर आधारित यह प्रावधान स्पष्ट रूप से सोवियत संघ (तत्कालीन USSR, अब रूस) से प्रेरित था।
    • भारत में 11 मौलिक कर्तव्य हैं, जैसे संविधान का पालन, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना।
    • हालांकि भारत पहला देश नहीं था, लेकिन यह लोकतांत्रिक देशों में इसकी शुरुआत थी।
  • अन्य देशों में मौलिक कर्तव्य
    • जापान का संविधान (1947) भी नागरिक कर्तव्यों का उल्लेख करता है, लेकिन सोवियत संघ पहले था।
    • अन्य देश जैसे पुर्तगाल, रूस (सोवियत के बाद) ने भी अपनाया। भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश नहीं है
    • जैसा कुछ भ्रम में कहा जाता है। अमेरिका जैसे देशों में कर्तव्य 'सिटिजन्स अल्मनाक' जैसे दस्तावेजों में हैं, लेकिन संविधान में नहीं।

16. वर्ष ........ में, भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हरित क्रांति की शुरुआत करने के लिए 'गेहूं क्रांति' शीर्षक से विशेष डाक टिकट जारी किए थे। [CGL (T-I) 18 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 1968
Solution:
  • वर्ष 1968 में, भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हरित क्रांति की शुरुआत करने के लिए 'गेहूं क्रांति' शीर्षक से विशेष डाक टिकट जारी किए थे।
  • घटना का विवरण
    • यह डाक टिकट जुलाई 1968 में जारी किया गया था, जो हरित क्रांति की सफलता को चिह्नित करने के लिए था।
    • उस समय गेहूं उत्पादन पिछली अवधि के 12 मिलियन टन से बढ़कर 17 मिलियन टन हो गया था
    • जो उच्च उपज वाली गेहूं किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का परिणाम था।
    • इंदिरा गांधी ने इस उपलब्धि को आधिकारिक रूप से दर्ज करने के लिए यह विशेष मुहर जारी की।
  • हरित क्रांति का संदर्भ
    • हरित क्रांति की शुरुआत 1965-66 में हुई, जब एम.एस. स्वामीनाथन की अगुवाई में नॉर्मन बोरलॉग की मेक्सिको से लाई गई उच्च उपज वाली गेहूं की किस्में (जैसे Lerma Rojo-64 और Sonora-64) भारत में अपनाई गईं।
    • यह क्रांति मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में केंद्रित रही
    • जहां सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशक और नई बीज प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ा।
    • 1967-68 तक गेहूं उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिसे 'गेहूं क्रांति' कहा गया क्योंकि भारत गेहूं में आत्मनिर्भर हो गया।
  • डाक टिकट का महत्व
    • यह टिकट हरित क्रांति की प्रगति को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता था और कृषि में वैज्ञानिक प्रगति का उत्सव था।
    • बाद में चावल उत्पादन में भी इसी तरह की सफलता मिली, लेकिन गेहूं ही इसका प्रारंभिक आधार था।
    • इंदिरा गांधी का यह कदम कृषि नीति को प्रोत्साहन देने वाला था, जब देश खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था।
  • व्यापक प्रभाव
    • हरित क्रांति ने भारत को 1960 के दशक के अकालों से उबारने में मदद की
    • लेकिन इससे क्षेत्रीय असमानता, जल संसाधनों पर दबाव और पर्यावरणीय चिंताएं भी जुड़ीं।
    • फिर भी, यह भारत की कृषि क्रांति का आधार बना, जिसने खाद्यान्न आयात पर निर्भरता समाप्त की।

17. मई, 1982 में हुए आम चुनावों में निम्नलिखित में से किस राज्य में पहली बार EVMs का प्रयोग किया गया ? [Phase-XI 27 जून, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) केरल
Solution:
  • मई, 1982 में केरल में आम चुनाव में पहली बार EVM का इस्तेमाल किया गया था
  • लेकिन उनके उपयोग की आवश्यकता वाला कोई विशेष कानून नहीं था
  • इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने उस चुनाव को अमान्य कर दिया तथा जिन मतदान केंद्रों पर EVM का प्रयोग किया गया था, वहां पुनर्मतदान की आज्ञा दी
  • ईवीएम का प्रारंभिक इतिहास
    • ईवीएम की अवधारणा भारत में 1970 के दशक के अंत में विकसित हुई। 1977 में इसकी कल्पना की गई
    • 1979 में प्रोटोटाइप तैयार हुआ। निर्वाचन आयोग ने अगस्त 1980 में इसके उपयोग के निर्देश जारी किए
    • लेकिन कानूनी ढांचे की कमी के कारण इसे व्यापक रूप से अपनाया नहीं गया।
    • मई 1982 में केरल के 70-परूर विधानसभा क्षेत्र के 50 मतदान केंद्रों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत ईवीएम का परीक्षण किया गया।
  • कानूनी चुनौती और परिणाम
    • चुनाव के बाद ईवीएम के उपयोग को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई
    • क्योंकि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में ईवीएम के लिए कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं था।
    • कोर्ट ने चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया और पुनः मतपत्र प्रणाली से मतदान कराया गया।
    • इस घटना ने ईवीएम को वैध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • ईवीएम का आगे का विकास
    • 1989 में संसद ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन कर ईवीएम के उपयोग को कानूनी मान्यता दी।
    • 1998 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के 25 विधानसभा क्षेत्रों में पहली बार आधिकारिक रूप से इसका उपयोग हुआ।
    • 2001 में तमिलनाडु, केरल आदि राज्यों के विधानसभा चुनावों में इसे विस्तार दिया गया।
    • 2004 के लोकसभा चुनावों में देश के सभी 543 निर्वाचन क्षेत्रों में 10 लाख से अधिक ईवीएम का इस्तेमाल हुआ।
  • ईवीएम का डिजाइन और कार्यप्रणाली
    • ईवीएम को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बेंगलुरु) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (हैदराबाद) ने विकसित किया।
    • इसमें मतदान यूनिट (उम्मीदवारों के नाम और चिह्न) और कंट्रोल यूनिट होती है।
    • वोट डालने पर हरी लाइट और ध्वनि संकेत मिलता है। यह बैटरी से चलती है और धांधली-रोधी है।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • निर्वाचन आयोग: 25 जनवरी 1950 को स्थापित, अनुच्छेद 324 के तहत।​
    • आविष्कारक: एम. बी. हनीफा ने 1980 में पेटेंट कराया।​
    • केरल प्रयोग ने ईवीएम को राष्ट्रीय स्तर पर लाने का आधार तैयार किया, भले ही शुरुआत असफल रही।​

18. भारत की आकस्मिकता निधि का संचालन ....... द्वारा किया जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) राष्ट्रपति
Solution:
  • भारत की आकस्मिकता निधि राष्ट्रपति के नियंत्रणाधीन होती है
  • राष्ट्रपति द्वारा ही इस निधि का संचालन किया जाता है।
  • यह निधि सरकार के किसी तत्काल या अप्रत्याशित व्यय को पूरा करने के लिए अग्रिम खाते के रूप में बनाई जाती है।
  • इस निधि का गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 267 के तहत किया गया था।
  • संवैधानिक आधार
    • भायह संसद द्वारा स्थापित एक अग्रिम निधि है, जिसमें अप्रत्याशित व्ययों के लिए तत्काल धन उपलब्ध कराया जाता है।
    • संसद समय-समय पर इस निधि में राशि जमा करने का विधान बनाती है
    • वर्तमान में इसका कोष 500 करोड़ रुपये का है, जिसे संसद आवश्यकतानुसार बढ़ा सकती है।
  • संचालन का तंत्र
    • यह निधि राष्ट्रपति के नाम पर कार्यपालिका द्वारा संचालित होती है।
    • राष्ट्रपति अप्रत्याशित खर्चों (जैसे प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति) के लिए इसमें से अग्रिम राशि जारी करने की शक्ति रखते हैं
    • लेकिन वास्तविक नियंत्रण वित्त सचिव के पास होता है। निकासी से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से परामर्श अनिवार्य है।
    • संसदीय अनुमोदन के बाद ही निधि को प्रतिपूर्ति की जाती है
    • अन्यथा यह समेकित निधि (Consolidated Fund) से व्यय के नियमों के अधीन नहीं आती।
  • उद्देश्य और उपयोग
    • आकस्मिकता निधि का मुख्य उद्देश्य संसद के अनुमोदन की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल जरूरी खर्च पूरा करना है।
    • उदाहरणस्वरूप, बाढ़, महामारी या युद्ध जैसी स्थितियों में इसका प्रयोग होता है।
    • व्यय के बाद अनुच्छेद 115 या 116 के तहत संसद से अनुमोदन लिया जाता है, और राशि पुनः भर दी जाती है ताकि निधि हमेशा तैयार रहे।
  • राज्य स्तर पर समानता
    • राज्यों में भी "राज्य की आकस्मिकता निधि" होती है
    • जो अनुच्छेद 267(2) के तहत राज्यपाल के अधीन कार्यपालिका द्वारा संचालित होती है।
    • राज्य वित्त सचिव इसका प्रबंधन करते हैं, और प्रक्रिया केंद्र के समान है।
  • अन्य संबंधित निधियाँ
    • समेकित निधि: सभी राजस्व यहीं जमा होता है, संसदीय अनुमोदन आवश्यक।
    • लोक लेखा: नियमित व्ययों के लिए, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट।
    • ये निधियाँ देश के वित्तीय ढांचे का हिस्सा हैं, लेकिन आकस्मिकता निधि विशेष रूप से आपातकालीन होती है।

19. निम्नलिखित में से किसे 26 जनवरी, 1950 को 'राष्ट्रीय प्रतीक' के रूप में अपनाया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सारनाथ का सिंह शीर्ष
Solution:
  • भारत का राष्ट्रीय प्रतीक भारत गणराज्य की एक प्रतिनिधि मुहर है
  • जिसे अशोक स्तंभ (सारनाथ, उत्तर प्रदेश में स्थित) के सिंह शीर्ष से अनुकूलित किया गया है।
  • भारत ने इसे 26 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • इसी दिन ब्रिटिश राज के प्रतीकों को हटाकर भारतीय प्रतीकों को अपनाया गया, जिसमें अशोक स्तंभ को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में चुना गया।
    • यह चिन्ह सम्राट अशोक द्वारा सारनाथ (उत्तर प्रदेश) में बनवाए गए स्तंभ का ऊपरी हिस्सा है, जहां चार सिंह चार दिशाओं की ओर ताकते हुए खड़े हैं।
  • प्रतीक का विवरण
    • राष्ट्रीय प्रतीक में मूल रूप से चार सिंह हैं, लेकिन सामने से केवल तीन ही दिखाई देते हैं—चौथा पीछे छिपा होता है।
    • स्तंभ के आधार पर एक चक्र है, जिसमें बाईं ओर घोड़ा, दाईं ओर सांड, सामने बिच्छू और पीछे हाथी की आकृतियां उकेरी गई हैं।
    • नीचे देवनागरी लिपि में 'सत्यमेव जयते' अंकित है, जो मुंडकोपनिषद् से लिया गया है और सत्य की विजय का प्रतीक है।
  • महत्व और उपयोग
    • यह प्रतीक शक्ति, साहस और धम्म का प्रतीक है तथा सभी सरकारी दस्तावेजों, मुहरों और आधिकारिक कार्यों में प्रयुक्त होता है।
    • इसका अनधिकृत उपयोग 'राज्य प्रतीक (अनुचित उपयोग का निषेध) अधिनियम, 2005' के तहत दंडनीय है।
    • राष्ट्रपति भवन, संसद, उच्च न्यायालयों और भारतीय दूतावासों पर इसका प्रदर्शन होता है।
  • अपनाने का संदर्भ
    • गणतंत्र दिवस पर संविधान लागू होने के साथ ही यह प्रतीक अपनाया गया, जो स्वतंत्र भारत की पहचान बना।
    • इससे पहले 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली थी, लेकिन पूर्ण गणराज्य की स्थापना 26 जनवरी को हुई।
    • यह चिन्ह अशोक के अहिंसा और शांति के संदेश को भी प्रतिबिंबित करता है।

20. किस विदेशी शक्ति ने भारतीय काली मिर्च के व्यापार को शाही एकाधिकार बना दिया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) पुर्तगाली
Solution:
  • पुर्तगाली शक्ति ने भारतीय काली मिर्च के व्यापार को शाही एकाधिकार बना दिया।
  • लगभग 1511 ई. तक पुर्तगालियों ने मालाबार क्षेत्र से होने वाले अधिकांश मसाला व्यापार को नियंत्रित कर लिया था।
  • पुर्तगालियों का आगमन
    • वास्को डा गामा ने 1498 में कालीकट (आधुनिक कोझिकोड, केरल) पहुंचकर भारत का समुद्री मार्ग खोजा।
    • उनका मुख्य लक्ष्य काली मिर्च और अन्य मसालों का सीधा व्यापार था, जो पहले अरब और वेनिस व्यापारियों के एकाधिकार में था।
    • पुर्तगाल के राजा ने इसे शाही एकाधिकार घोषित कर दिया, जिससे पुर्तगाली राज्य ही काली मिर्च के निर्यात को नियंत्रित करने लगा।
  • काली मिर्च का महत्व
    • मध्ययुगीन यूरोप में काली मिर्च 'काला सोना' कही जाती थी, क्योंकि यह भोजन संरक्षण, स्वाद बढ़ाने और औषधीय गुणों के लिए मूल्यवान थी।
    • 1 पौंड काली मिर्च की कीमत कभी 8 पौंड चांदी तक पहुंच जाती थी।
    • भारत के मालाबार तट (केरल) से आने वाली यह फसल यूरोप की अर्थव्यवस्था का आधार बनी।
  • एकाधिकार की स्थापना
    • पुर्तगालियों ने कोचीन, कन्नानोर और गोवा जैसे बंदरगाहों पर किले बनाए और व्यापार मार्गों पर नौसेना नियंत्रण स्थापित किया।
    • उन्होंने स्थानीय राजाओं से विशेषाधिकार हासिल किए और प्रतिस्पर्धी व्यापारियों (अरब, यहूदी) को हाशिए पर धकेल दिया।
    • यह शाही एकाधिकार (Royal Monopoly) पुर्तगाल के राजा मैनुअल प्रथम के आदेश पर था, जो मसाला व्यापार से राजस्व कमाते थे।
  • चुनौतियां और प्रभाव
    • इस एकाधिकार ने हिंद महासागर में पुर्तगाली वर्चस्व स्थापित किया, लेकिन हिंसक संघर्ष भी बढ़ाए।
    • बाद में डच (1602), अंग्रेज (1600) और फ्रेंच ने चुनौती दी, जिससे व्यापार युद्ध हुए।
    • इससे भारतीय मसाला व्यापार वैश्विक हो गया, लेकिन स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।