विविध (परंपरागत सामान्य ज्ञान) भाग-I

Total Questions: 30

21. चारमीनार का निर्माण निम्नलिखित में से किस राजवंश द्वारा किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) कुतुबशाही
Solution:
  • कुतुबशाही वंश के पांचवें शासक मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने अपनी राजधानी गोलकुंडा से नवगठित शहर हैदराबाद में स्थानांतरित करने के बाद चारमीनार का निर्माण कराया था।
  • निर्माण का इतिहास
    • चारमीनार का निर्माण गोलकुंडा सल्तनत के कुतुबशाही राजवंश ने कराया, जो 1518 से 1687 तक दक्षिण भारत पर शासन करता रहा।
    • मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने अपनी राजधानी गोलकुंडा से स्थानांतरित कर नया शहर हैदराबाद बसाया और चारमीनार को शहर का केंद्र बनाया।
    • इसका वास्तुकार मीर मोमिन अस्त्राबादी थे। यह संरचना मुख्य रूप से एक प्लेग महामारी के अंत की स्मृति में बनाई गई, जो शहर में फैली थी।
  • स्थापत्य विशेषताएं
    • चारमीनार एक वर्गाकार संरचना है, जिसके प्रत्येक पक्ष की लंबाई 20 मीटर है और चारों ओर 24 मीटर ऊंची चार मीनारें हैं
    • इसलिए नाम "चारमीनार" पड़ा। कुल ऊंचाई 56 मीटर है, जिसमें जटिल प्लास्टर कार्य, मेहराबें और जालीदार डिजाइन हैं।
    • ऊपरी मंजिल पर एक सक्रिय मस्जिद है, जबकि पहली मंजिल मदरसे के रूप में इस्तेमाल होती थी।
    • मेहराबें हवा के प्रवाह के लिए डिजाइन की गई हैं, जो इसे प्राकृतिक रूप से शीतल बनाती हैं। केंद्र में एक छोटा जलकुंड भी है।
    • इसकी इंडो-इस्लामी शैली फारसी प्रभाव (मीनारें, गुंबद) और भारतीय तत्वों (जटिल नक्काशी) का मेल है।
    • चारों मीनारें 149 सीढ़ियों से जुड़ी हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण हैं।
  • महत्व और वर्तमान स्थिति
    • चारमीनार हैदराबाद का प्रतीक है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के लिए नामांकित है।
    • ईद-उल-फित्र जैसे त्योहारों पर यहां विशेष आयोजन होते हैं। वर्तमान में प्रदूषण, कंपन और दरारों के कारण संरक्षण कार्य चल रहे हैं
    • जिसमें पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग सक्रिय है। यह "हैदराबाद का ताजमहल" भी कहलाता है।
    • कुतुबशाही राजवंश ने गोलकुंडा किले सहित कई स्मारक बनवाए, लेकिन चारमीनार सबसे प्रसिद्ध है।
    • यह न केवल स्थापत्य चमत्कार है, बल्कि दक्षिण भारत के इस्लामी इतिहास का जीवंत प्रमाण है।

22. संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार के किस मंत्रालय के अधीन एक संस्था है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) संस्कृति मंत्रालय
Solution:
  • संगीत नाटक अकादमी, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है।
  • इसकी स्थापना 31 मई, 1952 को तत्कालीन शिक्षा मंत्रालय के एक संकल्प के तहत हुई थी।
  • भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा जनवरी, 1953 में इसका उद्घाटन किया गया। इसके पहले अध्यक्ष डॉ. पी. वी. राजमन्नार थे।
  • स्थापना और इतिहास
    • डॉ. पी.वी. राजमन्नार इसके पहले अध्यक्ष थे, और जून 1952 में इसे भारतीय राजपत्र में अधिसूचित किया गया।​
    • समय के साथ, इसका प्रशासनिक नियंत्रण संस्कृति मंत्रालय (जिसे पहले संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय कहा जाता था) के अंतर्गत आ गया, जहां यह कला संरक्षण के लिए प्रमुख भूमिका निभाती है।
  • उद्देश्य और कार्य
    • यह अकादमी संगीत, नृत्य और नाटक जैसी प्रदर्शन कलाओं की भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने का कार्य करती है।
    • यह कलाकारों को पुरस्कार, फेलोशिप और वित्तीय सहायता प्रदान करती है, साथ ही उत्सव, सेमिनार, कार्यशालाएं और प्रदर्शन आयोजित करती है।​
    • अकादमी राज्य सरकारों, कला अकादमियों और अन्य सांस्कृतिक संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर देशव्यापी कार्यक्रम चलाती है।​
  • संगठन संरचना
    • अकादमी का मुख्यालय नई दिल्ली के रविंद्र भवन, फिरोजशाह रोड में स्थित है।​
    • इसके कार्यकारी सदस्यों में शिक्षा मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रतिनिधि, वित्त सलाहकार और राज्य सरकारों के नामित सदस्य शामिल होते हैं।​
    • यह पूरी तरह से संस्कृति मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित है और स्वायत्त निकाय के रूप में स्वतंत्र रूप से संचालित होती है।
  • अन्य मंत्रालयों से अंतर
    • गृह मंत्रालय आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा है, पर्यटन मंत्रालय पर्यटन विकास पर केंद्रित है
    • जबकि युवा मामले एवं खेल मंत्रालय युवा एवं खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है।​
    • संगीत नाटक अकादमी विशेष रूप से कला एवं संस्कृति संरक्षण के लिए संस्कृति मंत्रालय के अधीन ही कार्य करती है।​
  • महत्वपूर्ण उपलब्धियां
    • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भारत के कार्यरत कलाकारों के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान में से एक हैं।​
    • यह दक्षिण भारत सांस्कृतिक केंद्र जैसे क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से भी कार्य विस्तार कर रही है।​
    • अकादमी ने 70+ वर्षों में प्रदर्शन कलाओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।​

23. श्रीनगर का पांद्रेथन मंदिर निम्नलिखित में से किस धर्म से संबंधित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) हिंदू धर्म
Solution:
  • श्रीनगर का पांद्रेथन मंदिर हिंदू धर्म से संबंधित है। पांद्रेथन मंदिर लगभग 10वीं शताब्दी का मंदिर है
  • जिसे कश्मीर के शासक राजा पार्थ के मंत्री मेरु ने बनवाया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और झेलम नदी के पास स्थित है।
  • धार्मिक महत्व
    • मंदिर मूल रूप से शिव को समर्पित है, जैसा कि विकिपीडिया और अन्य ऐतिहासिक स्रोतों में स्पष्ट है
    • हालांकि कुछ विवरणों में इसे विष्णु को भी जोड़ा जाता है। राजतरंगिणी ग्रंथ में उल्लिखित एक 12वीं शताब्दी के शिव मंदिर से इसका संबंध प्रस्तावित था
    • लेकिन विद्वानों ने इसे अस्वीकार कर दिया। खुदाई से प्राप्त मूर्तियां, जैसे शिव लिंग, गांधार शैली की मूर्तियां और अन्य हिंदू देवताओं की प्रतिमाएं, इसकी हिंदू पहचान को पुष्ट करती हैं।
  • वास्तुकला की विशेषताएं
    • यह मंदिर कश्मीरी शैली का उत्कृष्ट नमूना है, जिसमें बहु-स्तरीय छत, ज्यामितीय समरूपता और पत्थर की नक्काशी प्रमुख है।
    • मंदिर तालाब के बीच स्थित होने से 'पानी मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है।
    • छत पर कमल का डिजाइन और स्वर्गीय प्राणियों की आकृतियां इसकी सजावट को विशिष्ट बनाती हैं।​
    • यह 1868 की पुरानी तस्वीर पांद्रेथन शिव मंदिर के खंडहरों को दर्शाती है, जो इसके प्राचीन वैभव को दिखाती है।​
  • इतिहास और संरक्षण
    • मंदिर का निर्माण राजा पर्थ के मंत्री मेरुवर्धन द्वारा किया गया माना जाता है
    • जो कश्मीर के शासक थे। 960 ईस्वी में आग से पांद्रेथन शहर नष्ट हो गया
    • लेकिन यह मंदिर एकमात्र बचा हुआ स्थल है। वर्तमान में भारतीय सेना के चिनार कोर द्वारा संरक्षित, 2021 में इसकी मरम्मत हुई
    • आसपास पार्क बनाया गया जहां खुदाई की वस्तुएं प्रदर्शित हैं। यह पुरातत्व सर्वेक्षण ऑफ इंडिया (ASI) के संरक्षण में है।
  • अन्य धर्मों से भिन्नता
    • यह सिख, जैन या बौद्ध धर्म से संबंधित नहीं है। सिख धर्म 15वीं शताब्दी का है
    • जबकि जैन और बौद्ध मंदिरों की वास्तुकला अलग है। मंदिर की हिंदू मूर्तियां और परंपराएं इसे स्पष्ट रूप से हिंदू बनाती हैं।​
  • वर्तमान स्थिति
    • आज यह सेना छावनी क्षेत्र में है, लेकिन पर्यटकों और भक्तों के लिए सुलभ है। यह कश्मीर की हिंदू विरासत का प्रतीक है।​

24. मुंबई में वृंदावन गुरुकुल और भुवनेश्वर में वृंदावन गुरुकुल के संस्थापक निम्नलिखित में से कौन हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) हरिप्रसाद चौरसिया
Solution:
  • वृंदावन गुरुकुल, भारतीय संगीत की एक अमूल्य जीवंत विरासत है
  • जो भारत की प्राचीन संगीत परंपरा गुरु-शिष्य परंपरा की नींव पर अद्वितीय रूप से निर्मित है।
  • पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने मुंबई में वृंदावन गुरुकुल की स्थापना वर्ष 2002 में और भुवनेश्वर में वृंदावन गुरुकुल की स्थापना वर्ष 2010 में की थी।
  • संस्थापक का परिचय
    • हरिप्रसाद चौरसिया एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय बांसुरी वादक हैं, जिन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान के लिए जाना जाता है।
    • उन्होंने मुंबई और भुवनेश्वर में वृंदावन गुरुकुल की स्थापना की, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत, खासकर बांसुरी वादन की शिक्षा देने के लिए समर्पित हैं।
    • ये गुरुकुल गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित हैं, जहां छात्र गुरु के सीधे मार्गदर्शन में रहकर संगीत सीखते हैं।​
  • गुरुकुल का उद्देश्य
    • वृंदावन गुरुकुल शहरी भागदौड़ से दूर शांत वातावरण में संगीत की शिक्षा प्रदान करते हैं।
    • इनकी स्थापना का मुख्य लक्ष्य प्रतिभाशाली संगीतकारों को प्रशिक्षित करना और भारत की समृद्ध संगीत विरासत को संरक्षित रखना है।
    • मुंबई और भुवनेश्वर दोनों केंद्रों में छात्र राग, ताल और बांसुरी की जटिल तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।​
  • हरिप्रसाद चौरसिया की उपलब्धियां
    • हरिप्रसाद चौरसिया को पद्म भूषण (1992) और पद्म विभूषण (2000) जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं।
    • उनकी अनूठी बांसुरी शैली हिंदुस्तानी परंपरा पर आधारित है
    • उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ सहयोग कर भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहुंचाया। गुरुकुल के माध्यम से वे नई पीढ़ी को अपनी कला सौंप रहे हैं।​
  • गुरु-शिष्य परंपरा
    • ये गुरुकुल प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति का पालन करते हैं, जहां शिष्य गुरु के सान्निध्य में अनुशासन, भक्ति और निरंतर अभ्यास से सीखते हैं।
    • यह परंपरा न केवल तकनीकी कौशल सिखाती है, बल्कि संगीत के आध्यात्मिक आयाम को भी उजागर करती है।
    • भारत में शास्त्रीय संगीत, नृत्य और अन्य कलाओं में यह व्यापक रूप से प्रचलित है।​

25. दक्षिण भारत में स्थित मंदिरों के परिसर में प्रवेश करने से पहले सुशोभित पर्वत जैसे प्रवेश द्वार को क्या कहा जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) गोपुरम
Solution:
  • दक्षिण भारत में सबसे प्रसिद्ध मंदिर द्रविड़ शैली में बने हैं।
  • न मंदिरों के परिसर में प्रवेश करने से पहले सुशोभित पर्वत जैसे प्रवेश द्वार को गोपुरम कहा जाता है। गर्भगृह में मुख्य देवता स्थित होते हैं।
  • गोपुरम की परिभाषा
    • गोपुरम संस्कृत शब्द "गो" (गाय, अर्थात् भक्तों की भीड़) और "पुरम" (नगर या प्रवेश) से बना है
    • जो भक्तों के लिए शहर के द्वार जैसा प्रतीक है।
    • दक्षिण भारतीय मंदिरों, विशेषकर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में, यह मंदिर परिसर (प्राकार) में प्रवेश करने वाले मुख्य द्वार पर बनाया जाता है।
    • यह अक्सर पिरामिडाकार टावर होता है, जो कई स्तरों (तल) वाले होता है और ऊँचाई में 50 से 70 मीटर तक पहुँच सकता है।
  • ऐतिहासिक विकास
    • गोपुरम का उदय 12वीं शताब्दी के पांड्य, विजयनगर और नायक काल में हुआ।
    • प्रारंभिक चोल मंदिरों (जैसे बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर) में गोपुरम छोटे थे
    • लेकिन बाद में वे मंदिर के विमान (गर्भगृह के ऊपर टावर) से भी ऊँचे हो गए। मीनाक्षी मंदिर (मदुरै) में 14 गोपुरम हैं
    • जिनमें से मुख्य 50 मीटर ऊँचा है। विजयनगर साम्राज्य के समय गोपुरमों पर जटिल नक्काशी बढ़ी, जो पौराणिक कथाओं को दर्शाती हैं।
  • वास्तुशिल्पीय विशेषताएँ
    • आकार और संरचना: बहु-स्तरीय पिरामिड, प्रत्येक तल पर छोटे-छोटे मंडप जैसे प्रोजेक्टिंग। शीर्ष पर कलश या स्तूपिका।
    • नक्काशी: लाखों मूर्तियाँ—देवता, देवी, असुर, पौराणिक दृश्य, नृत्य मुद्राएँ। रंगीन प्लास्टर से सज्जित।
    • द्वारपाल: विशाल द्वारपाल (द्वार पर रखवाली करने वाली मूर्तियाँ) प्रवेश की रक्षा करते हैं।
    • उपयोग: मंदिर परिसर को चार प्राकारों (दीवारों) में बाँटा जाता है, प्रत्येक का अपना गोपुरम।
  • प्रतीकात्मक महत्व
    • गोपुरम मेरु पर्वत (देवताओं का निवास) का प्रतीक है, जो भक्तों को आध्यात्मिक चढ़ाई का मार्ग दिखाता है।
    • यह संसार से परमात्मा तक की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर दूर से दिखाई देने वाला मील का पत्थर भी है।

26. सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (MPLAD) योजना किस केंद्रीय मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
Solution:
  • सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (MPLAD) योजना केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
  • यह नीति निर्माण, धनराशि जारी करने तथा इसके कार्यान्वयन के लिए निगरानी तंत्र निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • योजना का इतिहास
    • यह योजना 23 दिसंबर 1993 को तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा संसद में घोषित की गई थी।
    • प्रारंभ में इसका प्रशासन ग्रामीण विकास मंत्रालय के पास था
    • लेकिन अक्टूबर 1994 से इसे MoSPI को सौंप दिया गया। कोविड-19 महामारी के कारण 2020-21 और 2021-22 में योजना निलंबित रही
    • लेकिन नवंबर 2021 में इसे बहाल कर 2025-26 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया।
  • मुख्य उद्देश्य
    • योजना का लक्ष्य संसद सदस्यों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्य सुझाने की सुविधा देना है
    • विशेष रूप से टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों जैसे पेयजल, प्राथमिक शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और सड़कों पर।
    • जून 2016 से फंड स्वच्छ भारत अभियान, सुगम्य भारत अभियान, वर्षा जल संचयन आदि के लिए भी उपयोग होता है।
  • कार्यान्वयन प्रक्रिया
    • संसद सदस्य कार्यों की सिफारिश नोडल जिला प्राधिकरण को करते हैं।
    • जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर कार्यों को मंजूरी देते हैं, फंड जारी करते हैं और कार्यान्वयन सुनिश्चित करते हैं।
    • राज्य स्तर पर नोडल विभाग निगरानी करता है, जबकि MoSPI दिशानिर्देश जारी करता है।
    • लोकसभा सदस्य अपने निर्वाचन क्षेत्र में, राज्यसभा सदस्य राज्य के एक या अधिक जिलों में, और नामित सदस्य किसी भी राज्य के जिलों में कार्य चुन सकते हैं।​
  • वित्तीय प्रावधान
    • प्रति सांसद प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपये (दो 2.5 करोड़ की किस्तों में) आवंटित होते हैं, जो नॉन-लैप्सेबल हैं।
    • 2021-22 के शेष भाग के लिए 2 करोड़ एकमुश्त दिए गए।
    • योजना शुरू से अब तक 19.86 लाख से अधिक कार्य पूर्ण हुए, जिन पर 54,171 करोड़ खर्च हुए।
  • हालिया अपडेट
    • 2023 में संशोधित दिशानिर्देश जारी किए गए
    • जिसमें ब्याज को संचित निधि में जमा करने का प्रावधान है। 2025 में भी MoSPI के तहत सक्रिय है।
  • आलोचनाएँ और महत्व
    • समर्थक इसे स्थानीय सशक्तीकरण मानते हैं
    • जबकि आलोचक जवाबदेही और संवैधानिक मुद्दों पर सवाल उठाते हैं।
    • फिर भी, यह ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है।​

27. निम्नलिखित में से किस वर्ष में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 1993
Solution:
  • भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक स्वायत्त विधिक संस्था है।
  • इसकी स्थापना 12 अक्टूबर, 1993 को हुई थी। इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत की गई
  • जिसे मानवाधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2006 के द्वारा संशोधित किया गया।
  • संरचना और नियुक्ति प्रक्रिया
    • आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिश पर होती है।
    • इस समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं
    • जिसमें गृह मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता, लोकसभा अध्यक्ष तथा राज्यसभा उपसभापति शामिल होते हैं।
    • अध्यक्ष पद सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के लिए आरक्षित है
    • जबकि अन्य सदस्यों में मानवाधिकार विशेषज्ञ, पूर्व न्यायाधीश या सरकारी पदाधिकारी होते हैं।
    • पदेन सदस्यों में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग तथा महिला आयोग के अध्यक्ष शामिल हैं।
  • उद्देश्य और कार्य
    • NHRC का मुख्य उद्देश्य मानवाधिकारों का संरक्षण और संवर्धन करना है।
    • यह मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की जांच करता है, सरकार को सलाह देता है
    • जागरूकता फैलाता है तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य करता है।
    • आयोग को नागरिक अदालतों जैसी शक्तियां प्राप्त हैं
    • जैसे दस्तावेज जब्त करना या गवाहों को बुलाना। हालांकि, यह सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों में सीमित है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • मानवाधिकारों पर वैश्विक ध्यान 1948 के सार्वभौमिक घोषणापत्र से बढ़ा।
    • भारत में 1990 के दशक में उभरे मुद्दों (जैसे पुलिस कस्टडी मौतें, आतंकवाद) के कारण NHRC की आवश्यकता महसूस हुई।
    • संयुक्त राष्ट्र के पेरिस सिद्धांतों (1991) के अनुरूप भारत ने इसे स्थापित किया।
    • 2025 तक आयोग ने अपने 32वें स्थापना दिवस पर उल्लेखनीय कार्य किए, जिसमें लाखों शिकायतों का निपटारा शामिल है।
  • महत्वपूर्ण उपलब्धियां
    • 1993 से अब तक NHRC ने मानवाधिकार जागरूकता अभियान चलाए, विशेष रूप से महामारी, आपदाओं और संघर्ष क्षेत्रों में।
    • यह राज्य मानवाधिकार आयोगों के साथ समन्वय करता है।
    • हालिया उदाहरण: पूर्व न्यायाधीश वी. रामसुब्रमण्यम को 2025 में 9वें अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया।

28. इटली यात्री मार्को पोलो ने केरल की यात्रा कब की थी? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 13वीं शताब्दी
Solution:
  • इटली यात्री मार्को पोलो ने केरल की 13वीं शताब्दी में यात्रा की थी।
  • मार्को पोलो ने भारत में कई स्थानों की यात्रा की थी। उसने केरल के 'कायल' नामक प्राचीन नगर और बंदरगाह का भी उल्लेख किया था।
  • यात्रा का समय और पृष्ठभूमि
    • मार्को पोलो ने अपनी महाकाव्य यात्रा 1271 में शुरू की, जब वह मात्र 17 वर्ष के थे।
    • उनके पिता निकोलो और चाचा माफ़ेओ के साथ वे मंगोल सम्राट कुबलई खान के दरबार में पहुँचे और वहाँ 17 वर्ष बिताए।
    • 1292 में लौटते समय वे समुद्री मार्ग से भारत आए। उन्होंने कोरोमंडल तट पर उतरकर तमिल पांड्य साम्राज्य के क्षेत्रों की यात्रा की
    • जिसमें केरल का प्राचीन बंदरगाह 'कायल' (आधुनिक कायलक्कल या क्विलॉन) शामिल था। यह यात्रा लगभग 1292-1294 के बीच हुई।
  • केरल में उनके अवलोकन
    • मार्को पोलो ने केरल के कायल बंदरगाह की समृद्धि पर विस्तार से लिखा। उन्होंने नोट किया
    • यहाँ के राजा के पास विशाल कोषागार था और वे कीमती जवाहरात पहनते थे।
    • स्थानीय निवासी व्यापार में इतने समृद्ध थे कि पोलो चकित रह गए। उन्होंने मसाला व्यापार, विशेषकर काली मिर्च, का उल्लेख किया
    • जो यूरोप में बहुत मूल्यवान था। साथ ही, यहाँ के लोगों के न्यूनतम वस्त्राभूषण (केवल कमर पर रेशमी कपड़ा) ने उन्हें आश्चर्यचकित किया।
  • दक्षिण भारत का व्यापक भ्रमण
    • केरल के अलावा, पोलो ने तंजौर के पास तमिल पांड्य क्षेत्र, काकतीय वंश की रानी रुद्रम्मा देवी के शासनकाल में तेलुगु देश और मायलापुर (चेन्नई के पास) में सेंट थॉमस के मकबरे का दौरा किया।
    • उन्होंने यहूदी उपनिवेशों, व्यापारिक समृद्धि और न्यायपूर्ण शासन की प्रशंसा की। पांड्य राजाओं को उन्होंने न्यायप्रिय बताया।
  • यात्रा विवरण का महत्व
    • मार्को पोलो की किताब 'द ट्रेवल्स ऑफ मार्को पोलो' (या 'इल मिलियोने') में इन विवरणों ने यूरोप को पूर्वी दुनिया से परिचित कराया।
    • केरल को उन्होंने एक समृद्ध व्यापारिक केंद्र के रूप में चित्रित किया, जो मध्यकालीन भारत की आर्थिक शक्ति को दर्शाता है।
    • उनकी यात्रा ने बाद में कोलंबस जैसे खोजकर्ताओं को प्रेरित किया।

29. ....... एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) धारावी
Solution:
  • मुंबई (महाराष्ट्र) में स्थित धारावी को एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक माना जाता है।
  • यह ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान बसाई गई थी। धारावी जनसंख्या घनत्व 277136 प्रति वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है।
  • स्थान और आकार
    • धारावी मुंबई के मध्य भाग में फैली हुई है, जो लगभग 2.1 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बसी है।
    • यह महिम और बांद्रा नदियों के बीच स्थित है।
    • अनुमान के अनुसार, यहां 7 लाख से 10 लाख तक लोग रहते हैं, जो इसे अत्यधिक घनी बस्ती बनाता है।
  • इतिहास
    • धारावी की शुरुआत 19वीं सदी के अंत में एक मछली पकड़ने वाले गांव के रूप में हुई थी।
    • ब्रिटिश काल में मुंबई के विस्तार के साथ ग्रामीण इलाकों से प्रवासी मजदूर यहां आए और दलदली भूमि पर झुग्गियां बनानी शुरू कीं।
    • आज यह 'मिनी इंडिया' कहलाती है, क्योंकि यहां देश के विभिन्न राज्यों से लोग बस गए हैं।​​
  • आर्थिक गतिविधियां
    • धारावी गरीबी के बावजूद एक बड़ा आर्थिक केंद्र है।
    • यहां चमड़े की वस्तुएं, कपड़े, मिट्टी के बर्तन, रीसाइक्लिंग और खाद्य उत्पादन जैसे लघु उद्योग चलते हैं।
    • वार्षिक कारोबार लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुमान है
    • जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। कचरा रीसाइक्लिंग यहां की प्रमुख गतिविधि है।
  • चुनौतियां
    • यहां स्वच्छ पानी, सीवरेज, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है।
    • संकरी गलियां, बाढ़ का खतरा और प्रदूषण जीवन को कठिन बनाते हैं।
    • कोविड-19 के दौरान यहां मामले तेजी से बढ़े थे। जलवायु परिवर्तन से बाढ़ और गर्मी की समस्याएं बढ़ रही हैं।
  • पुनर्विकास योजनाएं
    • अदाणी ग्रुप द्वारा धारावी के पुनर्विकास की योजना पर काम चल रहा है
    • जिसमें आधुनिक आवास, पार्क, स्कूल, अस्पताल और सांस्कृतिक केंद्र बनेंगे।
    • लगभग 600 एकड़ में मास्टर प्लान तैयार है, लेकिन स्थानीय निवासियों की चिंताओं के कारण विवाद भी हैं।
    • यह परियोजना झुग्गीवासियों को बेहतर जीवन देने का वादा करती है।​​
  • अन्य दावेदार
    • कुछ स्रोतों में फिलीपींस की हैप्पीलैंड को भी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी कहा गया है
    • जहां 1 लाख से ज्यादा लोग कचरे पर निर्भर हैं। हालांकि, अधिकांश विश्वसनीय स्रोत धारावी को ही मानते हैं।​​

30. निम्नलिखित में से किस वर्ष में भारत में बाल विवाह निरोधक अधिनियम पारित किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 1929
Solution:
  • बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 28 दिसंबर, 1929 को पारित किया गया था।
  • यह 1 अप्रैल, 1930 को लागू हुआ। इसे शारदा एक्ट के नाम से जाना जाता है।
  • यह अधिनियम ब्रिटिश भारत के सभी लोगों पर लागू होता है।
  • भारत में बाल विवाह निरोधक अधिनियम (Sharda Act) 1929 के पारित होने का वर्ष है
  • यह अधिनियम 28 सितंबर 1929 को संसद के Imperial Legislative Council ने पारित किया था और 1 अप्रैल 1930 से लागू हुआ था
  • इसके अनुसार लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 14 वर्ष और लड़कों की 18 वर्ष निर्धारित थी
  • भारत के स्वतंत्र होने के बाद—1949 में—इस अधिनियम में संशोधन कर लड़कियों के लिए आयु 15 वर्ष, और 1978 में लड़कियों के लिए 18 तथा लड़कों के लिए 21 निर्धारण किया गया
  • इस कानून को सामाजिक सुधार आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसे हरबिलास शारदा के नाम से भी जाना गया था.