विविध (भारत का भूगोल)

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11. किस मौसमी परिघटना को उच्च वायुमंडलीय दाब के मध्य क्षेत्र के आस-पास बड़े पैमाने पर हवाओं के संचलन के रूप में परिभाषित किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) प्रतिचक्रवात
Solution:
  • प्रतिचक्रवात को उच्च वायुमंडलीय दाब के मध्य क्षेत्र के आस- पास बड़े पैमाने पर हवाओं के संचलन के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • चक्रवात सामान्यतः निम्न दाब के केंद्र होते हैं, जिनके चारों ओर संकेंद्रीय सम वायुदाब रेखाएं विस्तृत होती हैं।
  • आवश्यक परिभाषा और विवरण
    • परिघटना: उच्च वायुमंडलीय दाब के केंद्रों के बीच ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज विमाओं द्वारा संचालित विशाल पैमाने पर हवाओं का प्रवाह/चाल
    • संरचना: ऊर्ध्व-स्तर पर स्थिर या धीमे परिवर्तनशील दाब बेल्ट जहां प्रवाह की दिशा और गति उसके तापीय/दाबीय संरचना से निर्धारित होती है
    • कारण: तापीय असमानताएं, पृथ्वी की घूर्णन (कोरिऑली प्रभाव), ऊपरी वायुमंडल में गर्मी-चाल से प्रेरित उठान/नैचरल प्रवाह
    • प्रभाव: क्षेत्रीय जलवायु में पवन-धारा, ताप वृद्धि या कमी, आंधी-तूफान की उत्पत्ति/दिशा, और मौसमीय |फ्लीक्चुएशन|
  • समय-क्रम में भूमिका
    • शीतकाल: ध्रुवीय उच्च दबाव क्षेत्र मजबूत होते हैं, जो उच्च दाब बेल्ट के आसपास हवाओं को निर्देशित करते हैं
    • ग्रीष्मकाल: सबट्रॉपिकल हाई दबाव संकेंद्रित रहते हैं और ऊर्ध्वाधर वायुमंडलीय परिसंचरण के कारण हवाओं की दिशा परिवर्तित होती है
    • मौसमी प्रवाह: यह प्रवाह जेट स्ट्रीम के कारण ऊपरी वायुमंडल में तीव्र और स्थिर हो सकता है या अस्थिर पेरियोड्स में हिल सकता है
  • संभाव्य क्रमवार बिंदु
    • ऊपरी दाब बेल्ट: असमान तापमान के कारण ऊपरी स्तर पर बेल्ट बनते हैं
    • प्रवाह का आकार: विशाल क्षेत्रीय हवाओं का संचलन, समुद्री-आल्प्सीय या महाद्वीपीय प्रभाव
    • सार (व्यावहारिक): मौसम की सटीक दशा और कृषि/पारिस्थितिकी पर प्रभाव
  • उल्लेखन/संदर्भ
    • उच्च वायुमंडलीय दाब के क्षेत्रीय परिसंचरण और उसकी भूमिका के बारे में सामान्य मौसम-विज्ञान पाठ्यपुस्तकों और समीकृत नोट्स में विस्तृत वर्णन मिलता है
    • [उच्च दाब कटिबंध, ध्रुवीय उच्च, और जेट पवनें]​
    • हिंदी/ऊर्ध्वधारा स्रोतों में भी यह विषय ध्रुवीय उच्च की भूमिका और वायुमंडलीय परिसंचरण के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है​

12. निम्नलिखित कारकों पर विचार कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

(A) हिमालय और भारतीय थार रेगिस्तान में चरम जलवायु स्थितियां।

(B) ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी।

(C) महानगरों में रोजगार की उपलब्धता ।

(D) ग्रामीण भारत में गरीबी।

(E) शहरी क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाएं।

भारत में प्रवासन के लिए दिए गए कारकों में से कौन-सा / से अपकर्ष कारक (pull factor) नहीं है/हैं?

Correct Answer: (c) केवल (A), (B) और (D)
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में हिमालय और भारतीय थार रेगिस्तान में चरम जलवायु स्थितियां, ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी तथा ग्रामीण भारत में गरीबी भारत में प्रवासन के लिए अपकर्ष कारक नहीं हैं
  • जबकि महानगरों में रोजगार की उपलब्धता तथा शहरी क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाएं भारत में प्रवासन के लिए अपकर्ष कारक हैं।
  • सामान्य संदर्भ
    • प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे प्रश्न बहुविकल्पीय या वर्णनात्मक होते हैं। उदाहरणस्वरूप:
    • मांग-खींच मुद्रास्फीति (Demand-Pull Inflation): वित्तीय घाटा (deficit financing), काला धन (black money), और जनसंख्या वृद्धि (population growth) जैसे कारक मांग को आपूर्ति से अधिक बढ़ाते हैं, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं।
    • ये कारक अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त धन सृजन करते हैं बिना उत्पादन वृद्धि के।​
    • समुद्री धाराओं के कारक: पृथ्वी का घूर्णन (rotation), हवा का दबाव (wind pressure), और जल घनत्व (water density) धाराओं को प्रभावित करते हैं
    • जबकि परिक्रमण (revolution) नहीं। कोरिओलिस बल घूर्णन से उत्पन्न होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में दक्षिणावर्त् मोड़ देता है।​
  • आर्थिक कारकों का विस्तृत विश्लेषण
    • वित्तीय घाटा से सरकार उधार लेती है, जो मुद्रा आपूर्ति बढ़ाता है और मांग पैदा करता है।
    • काला धन छिपी खरीदारी को प्रोत्साहित करता है
    • जबकि जनसंख्या वृद्धि उपभोग आवश्यकताएँ बढ़ाती है।
    • ये मिलकर पूर्ण रोजगार स्तर पर कीमत वृद्धि का कारण बनते हैं
    • जो मुद्रास्फीति की दर को 5-10% तक ले जा सकती है।
    • सरकारें मौद्रिक नीति (RBI द्वारा ब्याज दरें बढ़ाना) से नियंत्रित करती हैं।​
  • भौगोलिक कारकों का गहन विवरण
    • पृथ्वी का घूर्णन कोरिओलिस प्रभाव उत्पन्न करता है
    • जो हवाओं और धाराओं को विक्षेपित करता है।
    • हवा का दबाव व्यापारिक पवनें (trade winds) के माध्यम से सतही धाराएँ बनाता है
    • जैसे उत्तर अटलांटिक ड्रिफ्ट। जल घनत्व तापमान-लवणता अंतर से थर्मोहलाइन धाराएँ चलाता है
    • जो गहन जल परिसंचरण सुनिश्चित करता है।
    • ये कारक जलवायु को नियंत्रित करते हैं, जैसे गल्फ स्ट्रीम यूरोप को गर्म रखती है।​

13. निम्नलिखित में से असत्य कथन की पहचान करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

A. हरित क्रांति के संदर्भ में HYV का अर्थसंकर उपज वाली किस्म (हाइब्रिड यील्डिंग वेरायटी) है।

B. परती छोड़ना (फैलोइंग), भूमि को कुछ समय तक बिना जोते छोड़ने की एक प्रथा है ताकि यह अपना उपजाऊपन फिर से प्राप्त कर सके ।

Correct Answer: (b) A और B दोनों
Solution:
  • हरित क्रांति की शुरुआत भारत में 1960 के दशक में हुई।
  • हरित क्रांति के संदर्भ में HYV का अर्थ संकर उपज वाली किस्म से है।
  • परती छोड़ना, भूमि को कुछ समय तक बिना जोते छोड़ने की एक प्रथा है
  • ताकि यह अपना उपजाऊपन फिर से प्राप्त कर सके।
  • भारत में हरित क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन हैं। अतः कथन (A) तथा कथन (B) दोनों सही हैं।
  • निम्नलिखित में से असत्य कथन की पहचान करने का प्रश्न अधूरा लगता है
  • क्योंकि कोई विशिष्ट कथन सूचीबद्ध नहीं हैं।
  • फिर भी, इस प्रकार के प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं या NCERT पुस्तकों में सामान्य हैं
  • जहाँ गणित, विज्ञान या तर्क पर आधारित कथनों की जाँच की जाती है।
  • सामान्य उदाहरण
    • अपरिमेय संख्याओं की संख्या अनंत है। (सत्य)
    • दो अपरिमेय संख्याओं का योगफल हमेशा अपरिमेय होता है। (असत्य, क्योंकि √2 + (-√2) = 0 जो परिमेय है।)​
    • एक परिमेय और अपरिमेय का योग अपरिमेय होता है। (सत्य)
  • जाँच विधि
    • असत्य कथन पहचानने के चरण:
    • प्रत्येक कथन को परिभाषा से मिलाएँ (जैसे पूर्णांक सभी परिमेय हैं, सत्य)।
    • प्रतिलोम उदाहरण खोजें (जैसे प्रत्येक पूर्णांक पूर्ण संख्या नहीं, क्योंकि -1 पूर्णांक है पर पूर्ण संख्या नहीं)।​
    • गणना करें: यदि 2/3 × 4/5 = 8/15, लेकिन कोई असंगति हो तो असत्य।
  • अन्य विषयक उदाहरण
    • पराग नलिका का बीजांड की ओर बढ़ना भू-अनुवर्तन है। (असत्य; यह रसायन-अनुवर्तन है।)​
    • यदि A ⊂ B और B ∈ C, तो A ∈ C। (असत्य; A केवल ⊂ C हो सकता है।)​
    • विस्तृत विश्लेषण के लिए कथन प्रदान करें।
    • ऐसे प्रश्न कक्षा 9-10 गणित या जीवविज्ञान में आते हैं।​

14. बिहार और पश्चिम बंगाल का भूजल अधिकतर किस धातु से दूषित होता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) आर्सेनिक
Solution:
  • बिहार और पश्चिम बंगाल का भूजल अधिकतर आर्सेनिक धातु के कारण दूषित होता है।
  • लंबे समय तक पीने के पानी में आर्सेनिक के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • मुख्य बातs
    • आर्सेनिक दूषण: बंगाल डेल्टा क्षेत्र से जुड़ी भूजल संरचना में आर्सेनिक का स्तर लंबे समय से चिंता का विषय रहा है
    • गंगा-बघेला Basin के कारण बिहार के कुछ क्षेत्र भी प्रभावित होते हैं। आर्सेनिकPrenक निगरानी से यह स्पष्ट है
    • कई जिलों के भूजल में मानक मानक से अधिक आर्सेनिक पाया गया है ।​
    • आयरन दूषण: बिहार के कई जिलों में भूजल में आयरन की अत्यधिक मात्रा एक सामान्य समस्या है
    • जो पानी का रंग, स्वाद और क्लोरीन प्रतिकारकता को प्रभावित कर सकता है।
    • पश्चिम बंगाल में भी कुछ क्षेत्रों में आयरन संदूषण देखा गया है, हालांकि आर्सेनिक प्रमुख चिंता का विषय बना रहता है ।​
    • फ्लोराइड दूषण: बिहार-झारखंड-पूर्वी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में फ्लोराइड भी भूजल में सामान्य से अधिक पाया गया है
    • जो दाँतों और हड्डियों पर असर डाल सकता है (फ्लोराइडिंग) ।​
  • कारण
    • भौगोलिक और भूवैज्ञानिक तथ्य: गंगा डेल्टा और बंगाल बेसिन की जलोढ़ मिट्टी भूजल दूषण के लिए अनुकूल परिस्थिति बनाती है
    • यह आर्सेनिक, आयरन और फ्लोराइड के स्तर को बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं ।​
    • जलभृत (एक्विफर) प्रक्रियाएं: पाइराइट-आर्सेनाइट जैसे रसायनों के आंशिक प्रतिक्रियाओं से आर्सेनिक रिलीज़ बढ़ती है
    • खासकर अत्यधिक भूजल निकासी और भूमिगत जल स्रोतों के आहरण के कारण ।​
    • मानक से अधिक निकासी: कृषि-उद्योगिक गतिविधियाँ, अत्यधिक ग्रीनहाउस और उर्वरकों/कीटनाशकों के उपयोग से भी भूजल गुणवत्ता पर दबाव पड़ता है
    • कुछ जिलों में दूषण बढ़ता है ।​
  • प्रभाव
    • स्वास्थ्य प्रभाव: आर्सेनिक और आयरन के उच्च स्तर पानी के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है
    • जीर्ण जलन, किडनी-लिवर संबंधी समस्याएं, कैंसर/जटिलताएं और बच्चे में बढ़े हुए जोखिम जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है ।​
    • जनसंख्या-स्तर प्रभाव: बिहार के कई ग्रामीण वार्ड और जिलों में भूजल दूषण की व्यापकता बताई गई है
    • कई जगहों पर पानी पीने के लायक नहीं रहने जैसी स्थिति बताई जाती है ।​
  • क्या करें (उपयोगी सुझाव)
    • पानी की वैध जाँच: आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन के लिए स्थानीय स्वास्थ्य/जल संस्थान द्वारा नियमित परीक्षण कराएं; खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंपों के पानी का परीक्षण महत्वपूर्ण है ।​
    • उपचार विकल्प: घर के स्तर पर गुन्टिया-नियंत्रित प्रणालियाँ, बॉय-एयर रेमेडी, और उचित फिल्ट्रेशन/रिएक्टर-आधारित उपचार (जैसे आर्सेनिक रिमूवल तकनीकें) अपनाने पर विचार करें
    • बड़े स्तर पर जल-संसाधन विभागों के साथ मिलकर सुरक्षित पानी की प्रचालन योजना बनानी चाहिए ।​
    • नीति और निगरानी: केंद्रीय भूजल आयोग/स्वास्थ्य विभाग जैसी संस्थाओं की दीर्घकालीन निगरानी और भूजल-प्रबंधन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है
    • बिहार एवं बंगाल जैसे क्षेत्र में यह विशेष रूप से आवश्यक है ।​
  • संभावित सीमाएं
    • उपलब्ध डेटा: जिले-स्तर पर दूषण का स्तर क्षेत्रीय भिन्नता दिखाता है
    • सभी जिलों के लिए एक समान संयुक्त डेटा उपलब्ध नहीं हो सकता, इसलिए स्थान-specific जाँच जरूरी है ।​

15. निम्नलिखित कथनों की सत्यता के संबंध में सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

(A) उत्तरी मैदान घनी आबादी वाले भौगोलिक प्रभाग हैं।

(B) मैदानी इलाकों में पर्याप्त जल आपूर्ति और अनुकूल जलवायु युक्त समृद्ध मिट्टी का आवरण है, यह कृषि की दृष्टि से भारत का एक उत्पादक हिस्सा है।

Correct Answer: (a) (A) और (B) दोनों सही हैं
Solution:
  • समृद्ध मृदा के आवरण, भरपूर जल की आपूर्ति एवं अनुकूल जलवायु ने उत्तरी मैदान को कृषि की दृष्टि से भारत का अत्यधिक उपजाऊ भाग बना दिया है।
  • इस कारण उत्तरी मैदान घनी आबादी वाले भौगोलिक प्रभाग का हिस्सा हैं।
  • इसी कारण यहां का जनसंख्या घनत्व भारत के सभी भौगोलिक प्रभागों की अपेक्षा सर्वाधिक है।
  • बिहार और पश्चिम बंगाल के भूजल में मुख्य रूप से आर्सेनिक (arsenic) ही सबसे अधिक दूषित करने वाली धातु है
  • हालांकि आयरन (iron) और फ्लोराइड भी महत्वपूर्ण हैं। उपयोगकर्ता के प्रश्न में दिए गए "निम्नलिखित कथनों" स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं हैं
  • लेकिन पिछले संदर्भ से अनुमानित सामान्य कथनों (जैसे आर्सेनिक प्रमुख है या आयरन अधिक है) की सत्यता का विश्लेषण नीचे विस्तार से किया गया है।​
  • प्रमुख दूषित धातु
    • आर्सेनिक भूजल का सबसे गंभीर प्रदूषक है, विशेषकर गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र में।
    • पश्चिम बंगाल और बिहार के कई जिलों (जैसे कटिहार, मुरशिदाबाद) में आर्सेनिक का स्तर WHO मानक (10 ppb) से कई गुना अधिक पाया गया है
    • जो त्वचा रोग, कैंसर और हृदय समस्याएं पैदा करता है।​
  • अन्य दूषित तत्व
    • आयरन बिहार के 31 जिलों में व्यापक है, जो पानी को भूरा रंग देता है और स्वाद खराब करता है
    • लेकिन स्वास्थ्य जोखिम आर्सेनिक जितना घातक नहीं। फ्लोराइड बिहार के दक्षिणी भागों में फ्लोरोसिस का कारण बनता है।
    • 2025 की CGWB रिपोर्ट में आर्सेनिक को इन राज्यों के लिए "प्रमुख समस्या" बताया गया।​
  • कारण और विस्तार
    • भूगर्भीय संरचना (पाइराइट ऑक्सीडेशन) और अत्यधिक भूजल निकासी आर्सेनिक मुक्त करती है।
    • 2025 रिपोर्ट में भारत के 3.55% नमूनों में आर्सेनिक अधिक, जिसमें बिहार-प. बंगाल प्रमुख।​
  • स्वास्थ्य और समाधान प्रभाव
    • लाखों प्रभावित; समाधान में फिल्टर, गहरे कुएं और निगरानी शामिल।
    • CGWB की 2025 रिपोर्ट ट्रिपल प्रदूषण (नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक) चेतावनी देती है।​

16. भारत में 'कोमन' और 'कुरुवा' ....... के नाम हैं। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) कर्तन दहन कृषि
Solution:
  • 'कोमान' एवं 'कुरुवा', कर्तन दहन कृषि प्रणाली का एक रूप है।
  • कर्तन दहन प्रणाली के तहत किसान जमीन के टुकड़े साफ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाता है।
  • जब मृदा की उर्वरता कम या समाप्त हो जाती है
  • किसान उस भूमि के टुकड़े को छोड़कर दूसरे भूमि के टुकड़े को अपने उपयोग में लाता है।
  • कृषि के इस प्रकार के स्थानांतरण से प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है।
  • उत्तर-पूर्वी राज्यों-असम, मेघालय, मिजोरम तथा नगालैंड में इसे 'झूम'; मणिपुर में 'पामलू'; छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले और अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह में 'दीपा
  • मध्य प्रदेश में 'बेबर' या 'दहिया'; आंध्र प्रदेश में 'पोडु' अथवा 'पेंडा'; ओडिशा में 'पामाडाबी' या 'कोमान' या 'बरीगां'; पश्चिमी घाट में 'कुमारी'; दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में 'वालरे' या 'वाल्टरे' तथा झारखंड में 'कुरुवा' आदि नामों से जाना जाता है।
  • झूम खेती क्या है
    • झूम खेती एक प्राचीन निर्वाह कृषि विधि है जिसमें किसान जंगल साफ कर पेड़-पौधों को जलाते हैं, राख से मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं
    • फसल उगाते हैं, और कुछ वर्षों बाद भूमि को परित्यक्त कर नई जगह पर स्थानांतरित हो जाते हैं।
    • यह पूर्वोत्तर भारत, मध्य भारत और कुछ दक्षिणी क्षेत्रों में प्रचलित है
    • लेकिन मिट्टी क्षरण और वन विनाश का कारण बनती है।​
  • कोमन का विवरण
    • 'कोमन' ओडिशा राज्य में झूम खेती का स्थानीय नाम है
    • जिसे कभी-कभी 'पामा दाबी' या 'ब्रिंगा' भी कहा जाता है।
    • यहां आदिवासी समुदाय पहाड़ी ढलानों पर चावल, मक्का और सब्जियां उगाते हैं।
    • यह विधि कम उपज देती है लेकिन कम मेहनत वाली मानी जाती है।​
  • कुरुवा का विवरण
    • 'कुरुवा' झारखंड में झूम खेती को कहा जाता है, जो 'कर्तन-दहन' प्रणाली का हिस्सा है।
    • झारखंड के आदिवासी इस विधि से बाजरा, मोटे अनाज और दलहन उगाते हैं।
    • यह मध्य भारत के अन्य नामों जैसे मध्य प्रदेश का 'बेवर' या 'दहिया' से मिलता-जुलता है।​
  • अन्य संबंधित नाम
    • भारत के विभिन्न क्षेत्रों में झूम खेती के कई नाम प्रचलित हैं:
    • उत्तर-पूर्वी राज्य (असम, मेघालय): झूम।
    • आंध्र प्रदेश: पोडु या पेंडा।
    • केरल: कुमारी।
    • दक्षिण-पूर्वी राजस्थान: वालरा या वाल्ट्रे।
    • हिमालय क्षेत्र: खिल।​
  • महत्व और चुनौतियां
    • झूम खेती आदिवासी संस्कृति का अभिन्न अंग है
    • लेकिन आधुनिक समय में सरकारी प्रयासों से इसे स्थायी कृषि की ओर मोड़ा जा रहा है।
    • यह जैव विविधता को नुकसान पहुंचाती है और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रही है।
    • भारत सरकार ने पूर्वोत्तर में वैकल्पिक खेती को बढ़ावा दिया है।

17. उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत में दिन के समय चलने वाली तेज, झोंके दार, गर्म, शुष्क हवाओं को ....... कहा जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) लू
Solution:
  • उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत में दिन के समय चलने वाली तेज झोंकेदार गर्म शुष्क हवाओं को 'लू' कहा जाता है।
  • इस तरह की हवा मई और जून में चलती है। लू के समय तापमान 45° सेल्सियस से अधिक हो जाता है।
  • लू की विशेषताएँ
    • लू तेज गति वाली, झोंकेदार हवाएँ होती हैं जो 40-50 किमी/घंटा या इससे अधिक की रफ्तार से चलती हैं।
    • ये गर्म और शुष्क होती हैं, जिनमें नमी की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे तापमान और बढ़ जाता है।
    • दिन के समय ये उत्तर-पश्चिम दिशा से आती हैं और शाम ढलते ही शांत हो जाती हैं।​
  • भौगोलिक विस्तार
    • ये हवाएँ मुख्य रूप से राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भागों तथा दिल्ली जैसे क्षेत्रों में चलती हैं।
    • थार मरुस्थल से उत्पन्न होने वाली ये हवाएँ गर्म रेतीले इलाकों से गुजरकर और गर्म हो जाती हैं।
    • कभी-कभी धूल भरी भी होती हैं, जो दृश्यता को कम कर देती हैं।​
  • उत्पत्ति का कारण
    • लू का मुख्य कारण ग्रीष्मकालीन निम्न दाब प्रणाली है, जो मरुस्थलीय क्षेत्रों में विकसित होती है।
    • ऊपरी वायुमंडल में उच्च दाब के कारण हवाएँ उत्तर-पश्चिम से बहती हैं।
    • अप्रैल से जून तक, विशेषकर मई में, ये सबसे तीव्र रूप धारण करती हैं जब तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है।​
  • प्रभाव
    • लू से तापमान में अचानक वृद्धि होती है, जो गर्मीजनित स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और मौत का कारण बनती है।
    • फसलों को नुकसान पहुँचता है, विशेषकर गेहूँ और अन्य रबी फसलों को।
    • पशुओं पर भी बुरा असर पड़ता है।
    • हालांकि, कभी-कभी ये धूल भरी आँधियों के साथ ठंडी हवाएँ ला सकती हैं।​
  • सावधानियाँ
    • लू के दौरान घर के अंदर रहें, अधिक पानी पिएँ, हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें।
    • कृषि में सिंचाई बढ़ाएँ और पशुओं को छाया प्रदान करें।
    • मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें।​

18. निम्नलिखित में से, भारत के किस कार्गो बंदरगाह की क्षमता सबसे अधिक है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह की कार्गो हैंडलिंग क्षमता सर्वाधिक है।
  • वर्ष 2022-23 में इस बंदरगाह की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 141.37MTPA थी
  • जबकि दीनदयाल बंदरगाह की कार्गो हैंडलिंग क्षमता भारत में सर्वाधिक (वर्ष 2022-23 में 269.10 MTPA) है।
  • परिभाषा और महत्त्व
    • कार्गो पोर्ट तब सबसे बड़ा मापा जाता है जब उसकी कंटेनर ट्रैफिक (TEU/कंटेनर यूनिट) और वार्षिक हैंडलिंग क्षमता सबसे अधिक हो
    • भारत के प्रमुख पोर्टों में NHAVA SHEVA सबसे बड़ी कंटेनर-आधार क्षमता रखता है.​
  • स्थान और परिचालन वर्ष
    • जवाहरलाल नेहरू पोर्ट/NHAVA SHEVA मुंबई नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत नवी मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है और 1989 में संचालन में आया.​
  • क्षमता और उपयोग
    • यह पोर्ट प्रति वर्ष लगभग 10 मिलियन TEUs की हैंडलिंग क्षमता के साथ संचालित है
    • जिससे भारत के कुल कंटेनर यातायात का एक बड़ा हिस्सा संभाला जाता है
    • इसके साथ ही पश्चिमी तट पर एक प्रमुख गेटवे के रूप में कार्य करता है.​
  • तुलना और अन्य प्रमुख पोर्ट
    • भारत के अन्य प्रमुख पोर्ट जैसे चेन्नई, विशाखापट्टनम, मुंद्रा आदि विभिन्न प्रकार के थोक और कोयला, लौह अयस्क, पेट्रोलियम उत्पादों आदि में सक्रिय हैं
    • कंटेनर-वॉल्यूम के संदर्भ में NHAVA SHEVA सबसे ऊपर रहा है.​
  • हालिया संदर्भ
    • सरकार/पब्लिक डोमेन स्रोतों के अनुसार 2023-24 के दौरान प्रमुख पोर्टों ने भारी मात्रा में कार्गो हैंडलिंग दर्ज की
    • लेकिन कंटेनर टर्नओवर में NHAVA SHEVA की भूमिका अभी भी अग्रणी मानी जाती है.​
  • यदि आप चाहें तो:
    • एक तुलना-सारणी में NHAVA SHEVA और अन्य प्रमुख पोर्टों की वार्षिक कैपेसिटी/TEU-आउटपुट बनाकर दिखा दूँ।
    • भारत के राज्यों के अनुसार प्रमुख पोर्टों की सूची और उनके वास्तविक कॉन्टेनर-ट्रैफिक डेटा को एकत्र करके एक विस्तृत विश्लेषण दे दूँ?

19. निम्नलिखित में से किसका संबंध किसी हिमनदीय स्थलरूप से है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) हॉर्न
Solution:
  • हॉर्न का संबंध हिमनदीय स्थलरूप से, जलोढ़ पंख का संबंध नदीय स्थलरूप से, प्लाया तथा यारडंग का संबंध पवनों द्वारा निर्मित स्थलरूप से है।
  • हिमनदीय स्थलरूप क्या हैं
    • हिमनदीय स्थलरूप वे भौगोलिक संरचनाएँ हैं जो हिमनद (बर्फ़ की नदी) के गति से निर्मित होती हैं
    • इसके जमा-निकलने (accretion and ablation) के परिणामस्वरूप बनती हैं.
    • ये स्थलरूप हिमनद के दो प्रमुख चरणों के प्रभाव को दर्शाते हैं
    • अपरदन (erosion) द्वारा निर्मित संरचनाएं और निक्षेपण (deposition) द्वारा बनी संरचनाएं.
  • प्रमुख प्रकार (निक्षेपित स्थलरूप)
    • ड्रमलाइन (Drumlin): अंडाकार या ड्रम-आकार की जमा संरचना जो हिमनद के पीछे या किनारों पर संकर्मित रूप में बनती है
    • इसकी प्रवृत्ति हिमनद की गति के समान दिशा में होती है.
    • आउटवाश मैदान (Outwash plain): हिमनद के पिघलने से निकलने वाले जल से बनता विशाल क्षेत्र जिसमें रेत, बजरी, तलछट जमा होकर समतल मैदान बनाते हैं।
    • पार्श्विक हिमोढ़ (Lateral moraine): हिमनद घाटी की दीवारों के साथ संकुलित ऊँचे मलबे के ढेर जो घाटी की दीवार के समानांतर जमा होते हैं।
    • अंतस्थ हिमोढ़ (Terminal moraine): हिमनद के अग्रभाग के पीछे जमा मलबे का दीर्घकालिक ढेर जो अडिग रुकावट बनाते हैं।
    • तलस्थ/तलीय हिमोढ़ (Ground moraine): glaciers के तल पर सीधे जमा हो जाने वाला मलबा जो घाटी तल पर फैलता है।
  • प्रमुख प्रकार (परागर्तन/अपरोधन स्थलरूप)
    • सर्क (Cirque): पर्वतों के उच्च भागों में स्थित छोटी, गहरी गुफाएँ-घाटियाँ जो glaciers द्वारा खोदकर बनती हैं
    • अक्सर अल्प-गहन हिमनद के ऊपर पाई जाती हैं।
    • गर्त (Valley glacier) से निकलकर बनते उन्नत-चढ़ाव वाले पलायन भू-आकृतियाँ।
  • किन्हीं भू-आकृतियों के बीच संबंध
    • हिमनद के समाप्त होने पर जल-झीलें (जैसे टार्न/टर्न झीलें) बन सकती हैं
    • जो सर्क के तल में बनती गुफाओं-झीलों का परिणाम होती हैं।
    • पार्श्विक हिमोढ़ और अंतस्थ हिमोढ़ मिलकर हिमनद घाटी के किनारों पर मोटे-मोटे मलबे के कटक बनाते हैं।
  • अध्ययन और उपयोग
    • हिमनदीय स्थलरू्छाओं का अध्ययन भूगोल, जलविज्ञान और प्राकृतिक आपदा जोखिम से जुड़ा है।
    • यह जलवायु परिवर्तन के संकेतों की पहचान में भी सहायक होता है।

20. पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ ....... से उत्पन्न होता है। [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) भूमध्य सागर
Solution:
  • पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ भूमध्य सागर से उत्पन्न होता है।
  • पश्चिमी विक्षोभ एक अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात है
  • जो भूमध्य सागर में बनता है और पश्चिम की ओर उत्तरी बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्वी नेपाल की ओर बढ़ता है।
  • यह उत्तर-पश्चिमी भारत के हिस्सों में अचानक शीतकालीन वर्षा लाता है।
  • गठन प्रक्रिया
    • ये विक्षोभ तब बनते हैं जब यूरोप या आसपास उच्च दाब का क्षेत्र बन जाता है
    • जिससे ध्रुवीय ठंडी हवाएं नम गर्म हवाओं से टकराती हैं।
    • ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं
    • जो अतिरिक्त-उष्णकटिबंधीय अवसाद का रूप ले लेती हैं।
    • भारत के संदर्भ में पश्चिम से आने के कारण इन्हें "पश्चिमी विक्षोभ" कहा जाता है।​
  • प्रभाव भारत पर
    • उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बर्फबारी होती है
    • जबकि मैदानी इलाकों में वर्षा और कोहरा। यह गेहूं, फल-सब्जियों की फसल के लिए फायदेमंद होता है
    • लेकिन अत्यधिक होने पर बाढ़ या ठंड का कारण बनता है।
    • मानसून से अलग, ये गैर-मानसूनी वर्षा लाते हैं।​
  • विशेषताएं
    • ये सर्दी (दिसंबर-फरवरी) में अधिक सक्रिय रहते हैं।
    • ऊंचाई पर तेज पश्चिमी हवाओं से यात्रा करते हैं।
    • कभी-कभी गर्मी में भी असर डालते हैं, जैसे असामान्य वर्षा।​