विविध (भारत का भूगोल)Total Questions: 4321. औसत समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की पीर पंजाल श्रेणी में अति आधुनिक विशिष्टताओं वाली कौन-सी सुरंग बनाई गई है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) अटल सुरंग(b) भाटन सुरंग(c) श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग(d) जवाहर सुरंगCorrect Answer: (a) अटल सुरंगSolution:अटल सुरंग 3000 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की पीर पंजाल श्रेणी में अति आधुनिक विशिष्टताओं वाली सुरंग का निर्माण किया गया है।इस सुरंग को रोहतांग सुरंग के नाम से भी जाना जाता था।इस सुरंग का निर्माण मनाली-लेह राजमार्ग पर रोहतांग दर्रे के निकट किया गया है।यह मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ती है।उत्पत्ति और स्थानPir Panjal Railway Tunnel, जिसे Banihal railway tunnel भी कहा जाता है, जम्मू-कश्मीर के बनिहाल से शुरू होकर काजीगुंड तक जाती हैपर्वत श्रृंखला के भीतर स्थित है। सुरंग की निर्माण अवधि 2005–2013 के बीच मानी जाती हैइसे NATM (New Austrian Tunneling Method) तकनीक से बनाया गया था.यह सुरंग भारतीय रेल नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में कश्मीर घाटी के साथ कनेक्टivity को मजबूत करती हैजो भू-आकृतिक चुनौतियों के बीच वर्षा-हवा और बर्फबारी के मौसम में तेज़ और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करती है.तकनीकी विशेषताएंलंबाई: लगभग 11.2 किमी (11.21 किमी) के आसपास; कुछ स्रोत इसे 11.214–11.25 किमी के भीतर दर्शाते हैं.चौड़ाई/ऊँचाई: प्रसार संरचना 8.40 मीटर चौड़ी और लगभग 7.39 मीटर ऊँची हैऔसत ऊँचाई 1,700–1,760 मीटर के आसपास बताई जाती है (ऊपर-तयारी में भिन्नता होती है).निर्माण तकनीक: न्यू ऑस्ट्रियाई टनलिंग मेथड (NATM) का प्रयोग किया गयाभारत में इस तकनीक के सबसे बड़े/प्रथम उपयोगों में से एक मानी जाती है.उपयोग: रेल ट्रैक के साथ एक सड़क मार्ग/विकल्प मार्ग की भी व्यवस्थाआपात स्थिति के लिए कंडक्शन-रास्ते के रूप में भी प्रावधान थे/हैं.महत्व और प्रभावघाटी 지역 में आवाजाही के समय सुरक्षा और आवागमन का बेहतर नियंत्रण, भारी बर्फबारी/मौसम में भी रेल सेवाओं का निरंतर संचालन संभव बनना.आर्थिक और सामरिक महत्व: कश्मीर क्षेत्र के आर्थिक-पर्यटन और आपातकालीन पहुँच के लिए यह परियोजना एक बड़ा कदम माना गयानिर्माण लागत और इंजीनियरिंग चैलेंजेस पर चर्चा उपलब्ध है.क्या 3000 मीटर ऊँचाई पर सुरंग है?आपकी बताई ऊँचाई (3000 मीटर) के आसपास Pir Panjal सुरंग की औसत ऊँचाई 1,700–1,760 मीटर के दायरे में हैइसलिए यह 3000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित सुरंग नहीं मानी जाती।3000 मीटर से ऊपर स्थित क्षेत्रों में भी ऊँचाई के कारण सुरंग निर्माण में खास प्रकार की तकनीकी चुनौतियाँ आती हैंलेकिन Pir Panjal सुरंग स्वयं इस ऊँचाई के नीचे है और Himalayan terrain में स्थित है.22. राष्ट्रीय वन नीति के संदर्भ में संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) नामक एक दृष्टिकोण और कार्यक्रम किस वर्ष में शुरू किया गया था? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) 1988(b) 1965(c) 1947(d) 1996Correct Answer: (a) 1988Solution:भारत में संयुक्त वन प्रबंधन की सुविधा के लिए संस्थागत तंत्र वर्ष 1988 में राष्ट्रीय वन नीति के साथ शुरू हुआ।मूलतः संयुक्त वन प्रबंधन, वन संरक्षण और विकास के लिए आपसी विश्वास और संयुक्त रूप से परिभाषित भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के आधार पर सीमांत वन समूहों और वन विभाग के बीच संबंधों को विकसित करने की अवधारणा है।JFM की शुरुआतJFM की अवधारणा 1980 के दशक में भारत सरकार द्वारा पेश की गईलेकिन इसका प्राथमिक आधार 1988 की राष्ट्रीय वन नीति हैजिसमें वनों के संरक्षण और प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया गया।उड़ीसा राज्य ने 1988 में पहला प्रस्ताव पारित कर इसे औपचारिक रूप दिया, जबकि कुछ स्रोत 1980 को प्रारंभिक वर्ष मानते हैं।यह कार्यक्रम 1970 के दशक से विकसित विचारों पर आधारित था, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर 1988 से प्रभावी हुआ।उद्देश्यJFM का मुख्य उद्देश्य वनों की रक्षा, प्रबंधन और पुनर्वास करना हैजिसमें स्थानीय वनवासी और सीमांत समुदायों को शामिल किया जाता है।यह दखल, चराई, चोरी कटाई और आग से वनों को बचाने पर केंद्रित है।समुदायों को वन उत्पादों जैसे फल, गोंद, राल, औषधियां आदि का लाभ मिलता है, जिससे वन स्थायी रूप से संरक्षित होते हैं।कार्यप्रणालीस्थानीय समुदाय जॉइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट कमेटी (JFMC) गठित करते हैंजो ग्राम सभा का हिस्सा होती है।ये समितियां स्थानीय नियमों और माइक्रो प्लान के आधार पर वनों का प्रबंधन करती हैंजिसमें सदस्यों के उपयोग का नियंत्रण और गैर-सदस्यों को बाहर करना शामिल है।वन विभाग समर्थन प्रदान करता है, जबकि लाभ साझा होते हैंNTFP (गैर-लकड़ी वन उत्पाद) पर पूर्ण नियंत्रण और लकड़ी बिक्री से हिस्सा।लाभजैव विविधता संरक्षण: स्थानीय लोगों की भागीदारी से प्रजातियों की पहचान, चोरी शिकार रोकना और पारिस्थितिकी सुधार होता है।आर्थिक विकास: रोजगार सृजन, जीविका सुधार और प्रदूषण में कमी।पारिस्थितिक सेवाएं: जल संग्रहण, परागण और वन्यजीव आवास में वृद्धि।महत्व राष्ट्रीय वन नीति में1988 की नीति ने JFM को वनों के 33% क्षेत्र संरक्षण के लक्ष्य से जोड़ाजो समुदाय-आधारित प्रबंधन को प्राथमिकता देती है।आज देशभर में लाखों हेक्टेयर वन इससे प्रबंधित हैं, जो सतत विकास का मॉडल है।23. पारंपरिक भारतीय ऋतुओं के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सी ऋतु नवंबर-दिसंबर के महीनों में आती है? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) शरद(b) हेमंत(c) वसंत(d) शिशिरCorrect Answer: (b) हेमंतSolution:हेमंत ऋतु नवंबर-दिसंबर महीनों में आती है।बारह मासों में से दो मास मार्गशीर्ष (अगहन) और पौष मास हेमंत ऋतु में आते हैं।हेमंत (pre-winter) की विशेषताएंसमय: लगभग नवंबर से दिसम्बर तकशरद और सर्दियों के बीच की ऋतु; दिन-रात के तापमान में ठंडक बढ़ती हैप्रकृति में परिवर्तन: रातें लंबी और ठंडी हो जाती हैं; सुबह कोहरे और पच्चीस से कम तापमान सामान्य होता हैमहत्त्व: शिशिर (कड़ाके की ठंड) से पहले की शांत, सुस्त-सर्दी की अवधि मानी जाती हैपारंपरिक छह ऋतुओं के संदर्भशरद: अक्टूबर-नवंबर में, मानसून के बादहेमंत: नवंबर-दिसंबरशिशिर: जनवरी-फरवरीवसंत: मार्च- अप्रैलग्रीष्म: मई-जूनवर्षा: जुलाई-अगस्त-सितंबरसंभाव्य नोट्स (संदेश के लिए आवश्यक संदर्भ)पश्चिमी संदर्भों में भी सातत्य से अलग-थलग उपयोग Occurs, पर भारतीय पंचांग में नवंबर-दिसंबर के बीच हेमंत को मान्यता दी जाती है.अन्य स्रोतों में भी हेमंत को नवंबर-दिसम्बर के बीच बताने के कई उदाहरण मिलते हैं.आप चाहें तो मैं इन दस स्रोतों से एक स्पष्ट, संपूर्ण सार-संरचना बनाकर एक हिंदी टेबल के रूप में दे सकता हूँआप जल्द ही स्पष्ट रूप से देख सकें कि कौन-सी ऋतु कब आती है और उससे जुड़ी प्रमुख विशेषताएं क्या हैं।24. भारत का निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान सबसे कम तापमान का अनुभव करता है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) लेह(b) बुंदेलखंड(c) जैसलमेर(d) मुन्नारCorrect Answer: (a) लेहSolution:लेह भारत का ऐसा स्थान है जो सबसे कम तापमान का अनुभव करता है।अपनी अधिक ऊंचाई और हिमालय से निकटता के कारण लेह में भारत में सबसे कम तापमान होता है।सर्दियों के दौरान लेह में तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।विस्तृत विश्लेषणपृष्ठभूमि: भारतीय हिमालयी क्षेत्र व ऊँचाई पर स्थित स्थान ठंड के लिए प्रसिद्ध हैंखासकर लद्दाख, स्पiti, सिक्किम के कुछ ऊँचे घाटी क्षेत्र—इनमें तापमान शून्य से नीचे गिरना आम बात है.द्रास का विशेष स्थान: द्रास जैैसा शहर पूर्वी ब्लॉक में गहरी ठंड के लिए आप-सीमा में जाना जाता हैइसकी ऊँचाई व उत्तरी पaksesंग के कारण जनवरी-फरवरी में तापमान -30°C से नीचे जा सकता हैकभी-कभी -40°C के आसपास भी रिकॉर्ड किया गया है.अन्य प्रतिस्पर्धी ठंडे स्थान:सियाचिन ग्लेशियर और सेला पास जैसी ऊँची चोटियाँ भी ठंडी रहती हैंऔपचारिक “सबसे ठंडा स्थान” के रूप में द्रास अक्सर उल्लेखित होता है.तवांग, लाचेन-थांगु घाटी आदि कई जगहें भी ठंडी हैंखासकर ऊँचाई के कारण, लेकिन ये आम तौर पर द्रास जितनी निम्न तापमान तक नहीं गिरतीं.मौसम और जलवायु कारक: ऊँचाई, बर्फबारी, वायुमंडलीय दबाव, और समुद्रतल से दूरी मिलकर तापमान को निम्न स्तर तक खींचते हैंद्रास जैसे स्थानों में ठंड का प्रभाव शीतकालीन महीनों में सबसे कठिन होता है.तथ्यात्मक caveats: सबसे ठंडे स्थान का चयन अक्सर मौसम के एकल-महीने के तापमान पर निर्भर होता हैवार्षिक औसत vs. चरम तापमान में भिन्नता हो सकती है, और हालिया वर्षों में तापमान रिकॉर्ड बदलते रहते हैंइसलिए नवीनतम स्थानीय जलवायु रिकॉर्ड्स देखकर पुष्टि करना अच्छा रहता है.अपने लिए स्पष्ट चित्रणयदि उद्देश्य केवल “सबसे ठंडा स्थान” की पहचान है तो द्रास को भारत का ठंडा स्थान माना जाता हैक्योंकि यह सामान्यतः देश के भीतर सबसे कम दर्ज तापमान के लिए सूचीबद्ध रहता है.यदि यात्रा/अनुभव के संदर्भ में निर्णय चाहिए, तो ध्रुवीय सर्दी के दौरान द्रास में रहने की कठिनाई के बारे में पूर्व तैयारी जरूरी होती हैजैसे उचित ऊंचाई-अनुकूलją प्रबंधन, पर्याप्त ऊनी कपड़े, और स्वास्थ्य सावधानियाँ.उद्धरणद्रास को भारत का सबसे ठंडा स्थान माना जाने वाला सामान्य ज्ञान और लेह/लद्दाख क्षेत्र के संदिग्ध रिकॉर्ड्स.द्रास व अन्य ऊँचे स्थानों के पास तापमान के चरम और सर्दियों की स्थितियों पर विवरण.विस्तृत सूची और ठंडी जगहों के उदाहरणों के लिए अन्य स्रोतों में भी द्रास को भूगोलिक-ठंड के प्रमुख स्थानों में गिना गया है.25. खेती के लिए दी गई भूमि में श्रम और पूंजी के अधिक उपयोग वाली खेती को ....... कहा जाता है। [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) गहन खेती(b) पूंजीवादी खेती(c) संकर खेती(d) विस्तृत खेतीCorrect Answer: (a) गहन खेतीSolution:खेती के लिए दी गई भूमि में श्रम और पूंजी के अधिक उपयोग वाली खेती को गहन खेती कहा जाता है।गहन कृषि एक प्रकार की कृषि है, जिसमें फसलों की उच्च पैदावार उत्पन्न करने के लिए श्रम, पूंजी और प्रौद्योगिकी के उच्च इनपुट शामिल होते हैं।इस प्रकार की कृषि का उपयोग अक्सर उच्च जनसंख्या घनत्व और सीमित भूमि संसाधनों वाले क्षेत्रों में किया जाता है।यह कृषि पद्धति छोटे भूखंडों पर अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए श्रम, पूंजी और आधुनिक तकनीकों का गहन उपयोग करती है।गहन कृषि की परिभाषागहन कृषि वह प्रक्रिया है जिसमें सीमित भूमि पर उच्च उपज सुनिश्चित करने के लिए प्रति इकाई क्षेत्र में श्रमिकों की संख्या, उर्वरकों, कीटनाशकों, सिंचाई और मशीनरी जैसे पूंजीगत निवेशों का अधिकतम उपयोग किया जाता है।यह मुख्य रूप से जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों जैसे एशिया के उपजाऊ मैदानों में प्रचलित हैजहां भूमि की कमी होती है। उदाहरणस्वरूप, भारत, चीन और जापान में चावल की खेती इसी पद्धति से की जाती है।मुख्य विशेषताएंउच्च निवेश: रासायनिक उर्वरक, हाइब्रिड बीज, मशीनें और बहु-फसली चक्र का उपयोग बढ़ाकर उत्पादकता को कई गुना किया जाता है।श्रम प्रधान: छोटे किसान परिवार के सदस्यों या मजदूरों द्वारा निरंतर देखभाल, जैसे जुताई, बुआई, कटाई और रखरखाव।बहु-फसली: एक वर्ष में 2-3 फसलें उगाई जाती हैं, जैसे गेहूं के बाद धान या सब्जियां।लाभ और चुनौतियांगहन कृषि से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ता हैजो बढ़ती जनसंख्या की मांग पूरी करता हैलेकिन मिट्टी की उर्वरता ह्रास, जल प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम जैसे कीटनाशकों से समस्याएं उत्पन्न होती हैं।सतत प्रबंधन के लिए जैविक खेती या एकीकृत पद्धतियों की ओर संक्रमण आवश्यक है।वैश्विक उदाहरणभारत के पंजाब-हरियाणा में हरित क्रांति इसी गहन कृषि पर आधारित थीजबकि अमेरिका के प्रेयरी इलाकों में विस्तृत कृषि प्रचलित है।26. मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ने वाली सुरंग कौन-सी है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (I-पाली)](a) कारबुडे रेलवे सुरंग(b) पीर पंजाल रेलवे सुरंग(c) डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड सुरंग(d) अटल रोड सुरंगCorrect Answer: (d) अटल रोड सुरंगSolution:'अटल रोड सुरंग' मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ने वाली सुरंग है। यह सुरंग हिमाचल प्रदेश में स्थित है।नाम: अटल सुरंग (Atal Tunnel), पहले इसे Rohtang Tunnel या Manali–Rohtang Tunnel कहा जाता था।स्थान और मार्ग: यह मनाली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के भीतर से गुजरती हैजिससे मनाली और लाहौल-स्पीति घाटी को जोड़ती है। दक्षिण प्रवेश मनाली से और उत्तर प्रवेश स्पीति घाटी के पास स्थित हैं ।दूरी और लक्ष्य: सुरंग की लंबाई लगभग 9.02 किलोमीटर हैइसका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में कठोर मौसम के दौरान परिवहन को सक्षम बनाना हैताकि लाहौल-स्पीति तक सालभर सड़क मार्ग बना रहे ।उद्घाटन और_cost: अटल सुरंग का उद्घाटन अक्टूबर 2020 को किया गया थाइसमें लागत क्रोड रुपये के आसपास बताई जाती है (BRO द्वारा निर्माण) ।प्रभाव: इस सुरंग के पीछे का लक्ष्य लाहौल-स्पीति घाटी तक पहुंच को सरल बनाकर सालभर सुरक्षित यात्रा,आपातकालीन सेवाओं और सप्लाई चेन को मजबूत करना हैसाथ ही रोहतांग दर्रे जैसे मौसम-निर्भर मार्गों की निर्भरता कम होती है ।उपयुक्त संदर्भ (तथ्यों के लिए)रोहतांग दर्रा और अटल सुरंग की कनेक्टिविटी ने मनाली–लेह मार्ग और मनाली–लाहौल-स्पीति मार्ग दोनों की उपलब्धता को बेहतर बनाया हैखासकर सर्दियों में जब दर्रा सामान्यतः बंद रहता था ।लाहौल-स्पीति जिला और क्षेत्रीय प्रशासन की वेबसाइटें और विकिपीडिया पन्ने इसे स्पष्ट रूप से प्राथमिक सुरंग के रूप में दर्शाते हैंजो मनाली को लाहौल-स्पीति से सीधे जोड़ती है ।27. अंबाला से सुंदरबन तक का मैदान लगभग 1800 किमी. तक फैला है, लेकिन इसकी ढाल में गिरावट मुश्किल से ....... मीटर है। [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)](a) 550(b) 600(c) 300(d) 450Correct Answer: (c) 300Solution:अंबाला से सुंदरबन तक का मैदान लगभग 1800 किमी. तक फैला हैलेकिन इसकी ढाल में गिरावट मुश्किल से 300 मीटर है।ढलान में गिरावट एक निश्चित दूरी पर ऊंचाई में बदलाव को दर्शाता है।मैदान का विस्तारयह मैदान अंबाला (हरियाणा) से शुरू होकर सुंदरबन (पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमा पर मैंग्रोव वन क्षेत्र) तक विस्तृत हैजो कुल 1800 किमी की दूरी तय करता है।पश्चिम से पूर्व की ओर यह उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के राज्यों को कवर करता है।कुल क्षेत्रफल लगभग 7 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक हैजो इसे घनी आबादी वाला उपजाऊ मैदान बनाता है।ढाल की विशेषतामैदान की औसत ऊंचाई समुद्र तल से 240 मीटर से अधिक नहीं हैअंबाला (लगभग 300 मीटर ऊंचाई) से सुंदरबन (समुद्र तल के निकट) तक कुल गिरावट केवल 300 मीटर है।यह ढलान उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में है, जो नदियों को धीमी गति से बहने और जलोढ़ मिट्टी जमा करने में सहायक है।इतनी लंबी दूरी पर केवल 300 मीटर की गिरावट होने से मैदान लगभग समतल प्रतीत होता है।भौगोलिक महत्वयह क्षेत्र गंगा, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन जैसी नदियों द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदान हैजो कृषि के लिए अत्यंत उपजाऊ है। मध्य गंगा मैदान का हिस्सा होने से यह 1400-2400 किमी लंबा और 150-500 किमी चौड़ा है।जनसंख्या घनत्व उच्च होने से यह भारत का आर्थिक केंद्र है, लेकिन बाढ़ की समस्या भी आम है।28. नर्मदा नदी के ऊपर बना इंदिरा सागर डैम निम्नलिखित में से किस भारत के राज्य में है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (III-पाली)](a) गुजरात(b) केरल(c) कर्नाटक(d) मध्य प्रदेशCorrect Answer: (d) मध्य प्रदेशSolution:नर्मदा नदी के ऊपर बना इंदिरा सागर डैम भारत के मध्य प्रदेश राज्य में है। यह एक बहुउद्देशीय बांध परियोजना है।परियोजना के उद्देश्यबहुउद्देश्यीय योजना के रूप में यह बांध irrigation, hydroelectric power generation, और flood control जैसी गतिविधियों को समाहित करता है.निर्माण और इतिहासनींव प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 23 अक्टूबर 1984 रखी; निर्माण 1992 में शुरू हुआ और बाद में 2005 तक चालू अवस्था के करीब पहुँचा माना जाता है(प्रमुख तिथियाँ और विकास مراحل सामान्य ज्ञान स्रोतों में मिलती हैं).जलाशय और आकारबांध से इंदिरा सागर जलाशय बनता है, जिसका क्षेत्रफल विशाल हैयह स्थानीय कृषि-आर्थिक व बाढ़ नियंत्रण के लिए महत्त्वपूर्ण है.अन्य संदर्भइस क्षेत्र में नर्मदा नदी पर अन्य प्रमुख बांध भी हैं, जैसे ओंकारेश्वर और सरदार सरोवर परियोजनाएँजो क्षेत्र की जल-राजस्व व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं.यदि आप चाहें तो इस बांध से जुड़े विशिष्ट तथ्य जैसे जल विद्युत उत्पादन क्षमता (MW), जलाशय के क्षेत्रफल, बांध ऊँचाई/लंबाई आदि के संख्यात्मक विवरण भी मैं संकलित कर सकता हूँ और स्रोत सहित साझा कर दूंगा।नीचे कुछ विश्वसनीय स्रोतों के संकेत दिए जा रहे हैं जिन्हें आप आगे पढ़ सकते हैं:उद्धरणइंदिरा सागर बांध मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी पर बना बहुउद्देशीय बांध है.आधारशिला 1984 में और निर्माण 1992-2005 के बीच रहा माना जाता हैसाथ में यह प्रमुख जल-उत्पादन एवं सिंचाई के कारण क्षेत्रीय महत्त्व रखता है.29. निम्नलिखित में से किस स्थान पर दिन और रात के तापमान में अंतर सबसे अधिक होने की संभावना है? [CGL (T-I) 13 अप्रैल, 2022 (I-पाली)](a) माउंट एवरेस्ट(b) चिल्का झील(c) थार रेगिस्तान(d) अंडमान व निकोबार द्वीपसमूहCorrect Answer: (c) थार रेगिस्तानSolution:उपर्युक्त स्थानों में से थार रेगिस्तान पर दिन और रात के तापमान में अंतर सबसे अधिक होने की संभावना है।थार मरुस्थल में तापमान अंतर क्यों अधिक होता हैनमी की कमी: थार में पानी का स्तर बहुत कम होता हैजिससे वातावरण में हवा के तापमान को स्थिर रखने में नमी भूमिका नहीं निभातीइसका परिणाम दिन-रात के तापमान में बड़ा अंतर होता है.रेत की गर्मी/ठंड: रेतीली सतह गर्म दिन में तेजी से गर्म होकर रात में तेजी से ठंडी हो जाती हैजिससे सतह के तापमान और हवा के तापमान के बीच बड़ा अंतर बनता है.उच्च ऊँचाई/उच्च तापमान सीमाएं: यह क्षेत्र सूरज की तीव्र रश्मियाँ प्राप्त करता हैरात में तेज ठंड पड़ती है, जिससे दैनिक अंतर सामान्य से अधिक बना रहता है.कौन सा स्थान अधिक संभावित हैथार मरुस्थल में दिन-रात तापमान का अंतर 15–20°C या इससे अधिक रिकॉर्ड किया गया हैउदाहरण के रूप में दिन में तापमान अक्सर 50°C के आसपास पहुँच सकता है, जबकि रात में लगभग 15°C तक गिर सकता है.अन्य भारत के स्थानों में कभी-कभी बड़े अंतर सुने जाते हैं(जैसे कुछ जगहों पर 10–20°C के बीच), पर थार की परिस्थितियों के कारण वहां सबसे अधिक संभावना यही स्थान है.दृष्टांत और संकल्पतथ्यात्मक रूप से पाठ्य materiais में थार मरुस्थल के तापमान अंतर को सबसे ऊँचा माना गया हैयह “दिन-रात के तापमान में सबसे अधिक अंतर” की सर्वाधिक संभावना वाला स्थान है.यह अंतर मौसम, मॉनसून और वर्ष के समय के अनुसार थोड़ा बदल सकता है सामान्यतः शुष्क रेगिस्तान में यह अवरोधक बड़ा रहता है.संभावित प्रश्नों पर स्पष्ट उत्तरक्या जैसलमेर भी उतना ही बड़ा अंतर देता है? हाँ, जैसलमेर थारमरुस्थल के भीतर एक प्रमुख स्थान हैजहाँ दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखने को मिलता है, पर थार के पूर्ण क्षेत्र में ही यह सर्वाधिक संभव है. गर्मी के दिन और भारी आर्द्रता की कमी, रेतीली सतह की ऊष्मा धारण क्षमता, और वातावरण में क्लाउड कवर का कम होना मुख्य कारण हैंये सभी मिलकर दिन-रात तापमान अंतर को बढ़ाते हैं.30. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (II-पाली)]I. मक्के के लिए मध्यम तापमान, वर्षा और अधिक धूप की आवश्यकता होती है।II. पटसन जलोढ़ मृदा में अच्छे ढंग से विकसित होता है और इसके लिए उच्च तापमान, भारी वर्षा और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है।(a) केवल I(b) केवल II(c) I और II दोनों(d) न तो I और न ही IICorrect Answer: (c) I और II दोनोंSolution:मक्का को मध्यम तापमान, वर्षा और बहुत धूप की आवश्यकता होती है। इसकी कृषि के लिए पुरानी जलोढ़ मिट्टी ज्यादा उपयुक्त हैं।पटसन को 'सुनहरा रेशा' के रूप में भी जाना जाता है। यह जलोढ़ मृदा में अच्छे ढंग से विकसित होता हैइसे उच्च तापमान, भारी वर्षा, और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है।नीचे की परिधि में यह समझना जरूरी है कि किस स्थान पर दिन-रात के तापमान में सबसे अधिक अंतर होता हैथार मरुस्थल: भारत के राजस्थान में स्थित यह क्षेत्र शुष्क जलवायु, बहुत कम आर्द्रता और रेतीली सतह से मिलकर बना है।गर्मी के दिन यहाँ का तापमान अत्यधिक ऊँचा हो सकता है (50°C तक पहुँच सकता है)जबकि रात में तापमान बहुत तेजी से गिरकर कुछ दशमलव तक या 0°C के नीचे भी पहुँच सकता हैजिससे दैनिक अंतर 15–20°C या उससे भी अधिक हो सकता है। यह तथ्य कई शिक्षण स्रोतों में समान रूप से प्रस्तुत किया गया है[उदा., थार मरुस्थल की विशिष्ट तापमान परिवर्तन की प्रवृत्ति]। यह कारण बताये जाते हैंरेतीली सतह ऊष्मा जल्दी ग्रहण और रिलीज करती है, नमी की कमी हवा के तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव लाती हैबादलों की कमी रात के तापमान को और अधिक ठंडा कर देती है।ऐसे कारणों से थार में दिन-रात तापमान अंतर सबसे अधिक माने जाते हैं [उच्च-स्तरीय संदर्भ]।अन्य प्रमुख बिंदुअन्य शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भी दिन-रात तापमान में बड़ा अंतर देखा जा सकता हैसामान्यतः सबसे अधिक माना जाता है क्योंकि:सतह-स्तर पर रेत ऊष्मा को बड़े अंतर से संचित और छोड़ती हैजो हवा के तापमान पर तुरंत प्रभाव डालती है;वर्षा कम होने से आर्द्रता घटती है, जिससे तापमान स्थिर नहीं रहता;दिन के समय सूर्य की तीव्रता उच्च रहती है और रात में वातावरण में ऊष्मा विक्षेपण तेज होता है।उच्च-स्तरीय निष्कर्षयदि प्रश्न “निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान दिन और रात के तापमान के बड़े अंतर के लिए सबसे अधिक उपयुक्त/संभावित है?” के बारे में हैतो उत्तर अधिकतर थार मरुस्थल को ही दिया जाता है; यह वही स्थान हैजहाँ यह अंतर सामान्यतः सबसे अधिक रहता है [उद्धरण-त्रुटि होने पर भी यह समेकित निष्कर्ष पर है]।यदि चाहें, तापमान अन्तर की तुलना के लिए आप नीचे दिए गए विकल्पों के लिए एक संक्षिप्त मानक-रेन्जेज भी बना सकता हूँ:थार मरुस्थल: दिन ~45–50°C या अधिक, रात ~0–15°C (कभी-कभी शून्य से नीचे भी)अन्य शुष्क क्षेत्रों (जैसे कुछ निचले रेगिस्तानी क्षेत्र): दिन ~40–45°C, रात ~5–15°Cआर्द्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों: दिन-रात अंतर अधिकतम में नहीं बल्कि मौसमीय रूप से कम, सामान्यतः 5–15°C के भीतरअगर चाहें, मैं आपके लिए इन स्थानों के वास्तविक-तापमान-रेंजेज का एक साफ तुलना-टेबल बना सकता हूँस्रोत-सहित उद्धरण दे सकता हूँ। बताएं आप किस प्रकार का विस्तार पसंद करेंगे (टेबल, बिंदुवार तुलना, या विस्तृत चर्चा), और यदि किसी विशिष्ट स्थान के बारे में नज़दीकी डेटा चाहिए तो बताएं।Submit Quiz« Previous12345Next »