विविध (भारत का भूगोल)

Total Questions: 43

41. अंडमान द्वीप समूह और निकोबार द्वीप समूह को एक-दूसरे से अलग करने वाले जल निकाय को ....... कहा जाता है। [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) दस डिग्री जलसंधि
Solution:
  • 'दस डिग्री चैनल' अंडमान द्वीपसमूह और निकोबार द्वीप समूह को एक-दूसरे से अलग करने वाले जल निकाय हैं।
  • 'पाक जलसंधि' श्रीलंका तथा भारत को एक-दूसरे से अलग करने वाले जल निकाय हैं।
  • भौगोलिक स्थिति
    •  जिसकी न्यूनतम गहराई 7.3 मीटर है।
    • यह अंडमान द्वीप समूह (उत्तर में) को निकोबार द्वीप समूह (दक्षिण में) से स्पष्ट रूप से विभाजित करता है।
    • इसका नामकरण 10° N अक्षांश के आधार पर किया गया है
    • जो दोनों समूहों की भौगोलिक और प्रशासनिक पृथक्करण को दर्शाता है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • यह चैनल नौवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है
    • जो बंगाल की खाड़ी से अंडमान सागर को जोड़ता है।
    • अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह कुल 572 द्वीपों से बने हैं
    • जिनमें अंडमान उत्तर में (6°-14° N) और निकोबार दक्षिण में हैं।
    • यह जल निकाय समुद्री जैव विविधता का भी केंद्र है
    • जहां मूंगा भित्तियां और समुद्री जीवन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।​
  • संबंधित जल निकाय
    • आठ डिग्री चैनल: मिनिकॉय (लक्षद्वीप) और मालदीव को अलग करता है।
    • नौ डिग्री चैनल: लक्षद्वीप के मुख्य द्वीपों से मिनिकॉय को अलग करता है।
    • ग्रेट चैनल: ग्रेट निकोबार और सुमात्रा के बीच स्थित है।​
  • ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व
    • अंडमान-निकोबार का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा है, जहां सेलुलर जेल (कालापानी) प्रसिद्ध है।
    • दस डिग्री चैनल पर्यटकों के लिए स्कूबा डाइविंग और समुद्री सफारी का आकर्षण रखता है।
    • पोर्ट ब्लेयर निकटतम हवाई अड्डा है, जो इस क्षेत्र की पहुंच को आसान बनाता है।​​

42. पश्चिम बंगाल में, स्थानीय तूफानों को ....... कहा जाता है। [MTS (T-I) 04 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) काल बैशाखी
Solution:
  • पश्चिम बंगाल में स्थानीय तूफानों को 'काल बैशाखी' कहा जाता है।
  • 'लू' उत्तर भारत तथा उत्तर-पश्चिमी भारत में गर्मियों के समय चलने वाली स्थानीय हवा को कहते हैं।
  • 'आम्र वर्षा' कर्नाटक तथा केरल राज्य से संबंधित है।
  • काल बैसाखी क्या है?
    • काल बैसाखी, जिसे नॉर'वेस्टर्स (Nor'Westers) भी कहा जाता है
    • पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वी भारत के अन्य हिस्सों में वैशाख मास (अप्रैल-मई) के दौरान शाम या रात में आती हैं।
    • ये तूफान बंगाल की खाड़ी से आने वाली गर्म, नम हवाओं और उत्तर भारत से आने वाली ठंडी, शुष्क हवाओं के टकराव से बनते हैं
    • जिससे वायुमंडल में अस्थिरता पैदा होती है और क्यूमुलोनिम्बस बादल बन जाते हैं।
    • इनकी रफ्तार 60-100 किमी/घंटा तक हो सकती है
    • साथ ही भारी वर्षा, बिजली चमकना और ओलावृष्टि होती है। नाम "काल बैसाखी" का अर्थ है
    • वैशाख की आपदा", जो इसके विनाशकारी स्वरूप को दर्शाता है।​
  • निर्माण प्रक्रिया
    • ये तूफान ग्रीष्म ऋतु में चट्टाग्राम पहाड़ियों और आसपास के क्षेत्रों से शुरू होते हैं।
    • गर्म हवाएँ दक्षिण-पूर्व से आती हैं, जबकि ठंडी हवाएँ उत्तर-पश्चिम से, जो आपस में टकराकर ऊर्ध्वाधर हलचल पैदा करती हैं।
    • इससे गरज-चमक के साथ तेज़ हवाएँ चलती हैं, जो फसलों को नष्ट कर देती हैं।
    • मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, ये पूर्व-मानसून काल की प्रमुख घटनाएँ हैं
    • कभी-कभी बिजली गिरने से जानमाल का नुकसान भी होता है।​
  • प्रभाव और क्षेत्र
    • पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में ये तूफान सबसे अधिक प्रभाव डालते हैं
    • लेकिन असम, बिहार और ओडिशा तक फैल सकते हैं।
    • ये आम, फल और फसलों को भारी नुकसान पहुँचाते हैं
    • जिसे स्थानीय रूप से "आम्र वर्षा" या "फूलों की बौछार" भी जोड़ा जाता है। ऐतिहासिक रूप से, ये तूफान कृषि अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं
    • लेकिन कभी-कभी ये वर्षा लाकर सूखे को राहत भी देते हैं।​

43. जब नदी मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है, तो वह मोड़दार मार्ग पर बहने लगती है। नदी के इन्हीं बड़े मोड़ों को ....... कहते हैं। [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) विसर्प
Solution:
  • जब नदी मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है, तो वह मोड़दार मार्ग पर बहने लगती है। नदी के इन्हीं बड़े मोड़ों को विसर्प कहते हैं।
  • विसर्प की परिभाषा
    • विसर्प नदी का वह टेढ़ा-मेढ़ा या सर्पिल मार्ग होता है जो समतल मैदानी भागों में बनता है।
    • मैदानी क्षेत्र में नदी का ढाल मंद हो जाता है, जिससे जलप्रवाह धीमा पड़ जाता है और क्षैतिज अपरदन प्रमुख हो जाता है।
    • इससे नदी दाएं-बाएं बलखाती चाल अपनाती है, जिसके परिणामस्वरूप 'S' आकार के बड़े मोड़ बनते हैं।​
  • विसर्प निर्माण की प्रक्रिया
    • नदी मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने पर अधिक अवसाद बोझ ढोने लगती है, जो उसके वेग को कम करता है।
    • बाहरी किनारे पर तेज अपरदन होता है, जबकि आंतरिक किनारे पर अवसाद जमा हो जाते हैं
    • जिससे मोड़ गहरा और चौड़ा होता जाता है। समय के साथ ये मोड़ इतने बड़े हो जाते हैं
    • नदी कभी-कभी सीधी चाल के लिए कटाव कर लेती है, जिससे 'ऑक्सबो झील' बनती है।​
  • विसर्प के प्रकार
    • सामान्य विसर्प: मैदानी क्षेत्रों में क्षैतिज अपरदन से बने बड़े मोड़।​
    • अधःकर्तित विसर्प: गहरे कटाव से बने, जहां नदी घाटी में गहराई तक उतर जाती है।
    • बेमेल विसर्प: कम जल वाली नदियों में बने संकुचित मोड़।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • विसर्प मुख्यतः वर्षा ऋतु के बाहर कम जल में स्पष्ट दिखते हैं, जबकि बाढ़ में नदी सीधे बहने लगती है।
    • ये भू-आकृतिक संरचनाएं नदी घाटियों को चौड़ा करने में सहायक होती हैं और उपजाऊ मैदान बनाती हैं।
    • भारतीय नदियां जैसे गंगा-यमुना बेसिन में विसर्प आम हैं।​