विविध (विश्व का भूगोल)

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21. देशों को जोड़ने से भूमंडलीकरण का परिणाम ....... होगा। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा
Solution:
  • देशों को जोड़ने से भूमंडलीकरण के परिणामस्वरूप उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा होगी।
  • भूमंडलीकरण की परिभाषा
    • भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें दुनिया के कई देश आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी तौर पर एक दूसरे के साथ इतने अधिक जुड़ते हैं
    • दूरी घटती प्रतीत होती है
    • एक देश की घटनाएं दूसरे देशों को सीधे प्रभावित करती हैं
    • यह केवल आर्थिक व्यापार नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, मीडिया, विज्ञान और रोजगार के क्षेत्रों में भी पारस्परिक निर्भरता बढ़ाने का निर्देश देता है.​
  • मुख्य प्रभाव के आयाम
    • आर्थिक (/व्यापार और पूंजी प्रवाह): मुक्त बाज़ार, बहु-राष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका बढ़ना, स्थानीय उद्योगों पर विदेशी प्रतिस्पर्धा का प्रभाव, निवेश-श्रेणियाँ और आपूर्ति-श्रृंखला वैश्विक होना.​​
    • रोजगार और उत्पादकता: अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर बढ़ते हैं
    • परन्तु स्थानीय कौशल आवश्यकताओं में बदलाव और कुछ क्षेत्रों में रोजगार का असमान वितरण भी संभव है.​
    • तकनीक और जानकारी: इंटरनेट, संचार और ट्रांसपोर्टेशन की उन्नतियों से दूरी घटती है
    • तकनीकी ट्रांसफर और ज्ञान-तत्वों का प्रवाह तेज होता है.​
    • सामाजिक-नागरिक आयाम: पूर्वी-औपचारिक संबंधों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ता है
    • सांस्कृतिक एकरूपता, स्थानीय रीति-रिवाजों पर प्रभाव और सामाजिक असमानताओं की नई ख़बरें भी उभरती हैं.​
  • फायदे
    • बाजार और उपभोक्ता के लिए अधिक विकल्प, प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य और गुणवत्ता में सुधार।
    • वैश्विक पूंजी और तकनीक तक पहुँच के कारण कुछ देशों के विकास दर में तेजी।
    • शिक्षा, संचार और यात्रा के माध्यम से ज्ञान-आधारित वृद्धि में योगदान।
    • आपूर्ति-श्रृंखला के विविधीकरण से जोखिम प्रबंधन बेहतर हो सकता है।
  • हानि और चुनौतियाँ
    • स्थानीय उद्योगों पर विदेशी प्रतिस्पर्धा का दबाव और असमान प्रतिस्पर्धा का खतरा।
    • स्रोत-नियंत्रण और नीति-स्वायत्तता में गिरावट (क्योंकि बड़े खिलाड़ियों की ताकतकारी भूमिका बढ़ती है)।
    • नौकरियों में संरचनात्मक परिवर्तन, कौशल-फ्लेक्सिबिलिटी की आवश्यकता और कुछ क्षेत्रों में बेरोजगारी का जोखिम।
    • सामाजिक-धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं के कारण टकराव या मानकीकरण की प्रवृत्ति।
  • भारत और भूमंडलीकरण (उदाहरण)
    • भारत ने भूमंडलीकरण के दौरान विदेशों से उत्पाद-आदि को आयात किया
    • अपने उत्पाद विदेशों में भी पहुँचाने शुरू किए; इससे घरेलू बाज़ार खुला और आयात-निर्यात दोनों ने गति पाई.​
    • रोजगार के क्षेत्र में विदेशी उद्योगों के साथ जुड़ाव से भारतीयों के लिए विदेशों में कार्य-अवसर बने, जिससे वैश्विक आर्थिक भागीदारी बढ़ी.​
  • संक्षिप्त तुलना (मुख्य बिंदु)
    • आर्थिक असर: व्यापार-निवेश का प्रवाह बनाम घरेलू उद्योग पर दबाव
    • सामाजिक-राष्ट्रवाद: वैश्विक एकीकरण के लाभ बनाम सांस्कृतिक विविधता/समानता पर प्रभाव
    • नीति-स्वायत्तता: मुक्त बाजार के चलते नियंत्रण की सीमा बढ़ना
    • रोजगार-निर्भरता: उच्च कौशल अवसर बनना बनाम कुछ क्षेत्रों में परिवर्तन-प्रधान अस्थिरता

22. उन्नीसवीं शताब्दी की शुरुआत में, किसने यह प्रमाणित किया कि चौदह आकाशीय जालक (लेटिस), या अंतरिक्ष में बिंदुओं की नियमित पुनरावर्तक व्यवस्थाएं हैं, जो समरूपता और ज्यामिति में भिन्न होते हैं? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अगस्टे ब्रावाइस
Solution:
  • अगस्टे ब्रावाइस ने यह प्रमाणित किया कि चौदह आकाशीय जालक (लेटिस) या अंतरिक्ष में बिंदुओं की नियमित पुनरावर्तक व्यवस्थाएं हैं
  • जो समरूपता और ज्यामिति में भिन्न होते हैं।
  • मुख्य बात
    • चौदह आकाशीय जालक (Lattice) एक ऐसी दो-आयामी या त्रि-आयामी संरचना है
    • जिसमें बिंदु एक नियत सिद्ध आरेख (periodic grid) के अनुसार क्रमबद्ध रहते हैं।
    • इसे1890-1900 के आसपास कई गणितज्ञों ने व्यवस्थित रूप से विश्लेषण किया, खासकर समरूपता (symmetry) और ज्यामिति (geometry) के सुदृढ़ संयोजन के संदर्भ में, लेकिन इसे किसी एक व्यक्ति के नाम से “प्रथम प्रमाणित” कहना विवादित है।
    • इस विषय पर 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में निर्णायक विकास आधुनिक क्रिप्टोग्राफी, क्रिस्टल संरचना (crystallography), और गणितीय प्रकाश व्यवस्था के संदर्भ में हुआ।
    • ऐसे प्रमाणों में क्लासिकल क्रिस्टल-तत्व (square, hexagonal, आदि) के नियमित निर्गमन और मोड़-फेर के गुणधर्म के अध्ययन शामिल थे।
  • भौतिक-संरचना और समरूपता
    • समरूपता (symmetry) और ज्यामिति (geometry) के क्षेत्रों में 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक बिंदुओं के नियमित पुनरावर्तन (periodicity) के गणितीय मॉडल बन चुके थे
    • चौदह आकाशीय जालक के लिए एकवचन “प्रथम प्रमाणित” नाम, स्रोत-आधारित संदर्भों में भिन्न-भिन्न दावों के कारण स्पष्ट नहीं है।
    • क्रिस्टलोग्राफी के उन्नत क्रिया पथ में, शिकंजे-जैसी संरचनाओं के लिए lattice के प्रकार (square, hexagonal, body-centered, face-centered आदि) का वर्गीकरण और उनकी अंतर-अनुपातित ज्यामिति स्पष्ट हुई, जिससे समरूपता-आधारित गुणधर्मों का गणितीय विश्लेषण संभव हुआ।
  • उचित संदर्भित शोध-प्रसंग
    • 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में समरूपता, टोपोलॉजी और ज्यामिति के उन्नत सिद्धांतों के साथ lattice-आधारित संरचनाओं पर काम किया गया।
    • इसके ठीक पहले Kepler के ग्रह-गति नियमों और उनके गणितीय-भौतिक फलक का विकास हुआ
    • वे lattice-सम्बन्धी निर्देश नहीं हैं; वे प्राकृतिक ब्रह्मांड की ज्यामिति के ऐतिहासिक पहलू से जुड़े हैं
    • चौदह आकाशीय जालक के गहन lattice-प्रमाण के साथ।
    • प्रमुख आधुनिक तारीखों में lattice के औचित्य, विविध प्रकार और उनका गुण-धर्म क्रिस्टल-लैटर-संरचना, फोटोनिक-क्रिस्टल और गणितीय क्रिस्टलोग्राफी जैसी शाखाओं में गहराई से विकसित हुए हैं।

23. 2010-2012 के दौरान समीक्षित विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, लीबिया के अल अजीजियाह में ....... का उच्चतम पंजीकृत छाया तापमान दर्ज किया गया था। [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 58°C
Solution:
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010- 2012 में लीबिया के अल अजीजियाह में 58°C का उच्चतम पंजीकृत छाया तापमान दर्ज किया गया था।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के संदर्भ में विवरण
    • रिकॉर्ड का स्थान: अल-अज़ीज़ियाह, लीबिया (Libya).​
    • रिकॉर्ड तापमान और तिथि: 58°C (136.4°F) को 13 सितम्बर 1922 को दर्ज किया गया माना गया था.​
    • रिकॉर्ड का अंतःस्थापन और विवाद: WMO ने 2012 में इस रिकॉर्ड की वैधता पर प्रश्न उठाकर उसकी पुष्टि/अमान्यता के संबद्ध निष्कर्ष जारी किए
    • कई कारण बताए गए जिनमें मापक उपकरण, निरीक्षक प्रशिक्षण और रिकॉर्डिंग प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे शामिल थे.​
    • ऐतिहासिक प्रभाव: अल-अज़ीज़ियाह विश्व के सबसे गर्म स्थानों में कभी-कभी संदर्भित रहा है
    • रिकॉर्ड की वैधता पर बहस के कारण इसे आधिकारिक “विश्व रिकॉर्ड” के तौर पर बार-बार नहीं मान्यता मिली या वापस स्थगित रही है.​
  • विश्लेषणात्मक बिंदु
    • 1922 का तापमान संदिग्ध था क्योंकि उस समय तापमान मापन तकनीकें और रिकॉर्डिंग मानक आज जैसी नहीं थीं
    • इस वजह से 2012 में WMO ने कुछ चिंताओं के कारण इसे अमान्य माना (या उसकी वैधता पर पुनर्विचार किया).​
    • traduction में कुछ स्रोत 58°C और 136.4°F दोनों इकाइयों में इसे उल्लेखित करते हैं, जो दोनों ही वही रिकॉर्ड तापमान दर्शाते हैं.​
    • आधुनिक जलवायु रिकॉर्ड बताते हैं कि लीबिया क्षेत्र की जलवायु आम तौर पर अत्यधिक गर्मियों वाले शुष्क वातावरण के लिए जानी जाती है
    • ऐसे extreme पर्मानेट रिकॉर्ड के लिए विश्वसनीयता और पुनर्मूल्यांकन जरूरी रहता है.​
  • महत्वपूर्ण नोट्स और caveats
    • 2012 के पुनः मूल्यांकन के बाद कई स्रोत इस रिकॉर्ड को “उच्चतम विश्व रिकॉर्ड” के रूप में स्वीकार नहीं करते या वैधता पर अटकते हैं
    • इसलिए किसी भी स्रोत के अनुसार “अधिकृत विश्व रिकॉर्ड” के रूप में मान्यता निर्भर करती है कि वह रिकॉर्ड कब और कैसे प्रमाणित हुआ था.​
    • अल-अज़ीज़ियाह के बारे में एकाधिक संदर्भ बताते हैं कि यह मामले इतिहास में एक प्रमुख चर्चा का विषय रहा है
    • एक निष्पन्न निष्कर्ष जो बिना किसी caveats के स्वीकार किया गया हो.​
  • यदि चाहें तो आगे:
    • मैं उपलब्ध स्रोतों से 1922 रिकॉर्ड के पूरे दस्तावेज, WMO की आधिकारिक प्रेस रिलीज़/रिपोर्ट का संपूर्ण सारांश और 2012 के पुनर्मूल्यांकन का विश्लेषण संकलित कर सकता हूँ।
    • साथ ही, अगर आप हिंदी या अंग्रेजी में विस्तृत पंक्तिबद्ध उद्धरण चाहते हैं
    • उन स्रोतों से सीधे उद्धरण दे सकता हूँ ताकि आप कृपया सत्यापित कर सकें।

24. निम्नलिखित में से कौन-सा पारिस्थितिकीविद 1896 में इंडियाना ड्यून्स में पादपों के जीवन का अध्ययन करने के लिए प्रसिद्ध है? [CHSL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) हेनरी चांडलर काउल्स
Solution:
  • हेनरी चांडलर काउल्स 1896 ई. में इंडियाना ड्यून्स में पादपों के जीवन का अध्ययन करने के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • उनके अध्ययन ने स्थलाकृति, नमी, हवा, कटाव, अवसादन और अन्य भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में स्थानीय पादप समुदायों के विकास और वितरण की व्याख्या की।
  •  लेकिन इंडियाना ड्यून्स के पादप-जीवन के विशिष्ट अध्ययन के लिए 1896 के संदर्भ में किसी प्रमुख अमेरिकी या अन्य वैज्ञानिक का नाम उद्धृत होता है
  • जो इस प्रश्न के स्पष्ट उत्तर के लिए अधिक विशिष्ट संदर्भ मांगता है।
  • फौरन उत्तर पाने के लिए विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित किया जाना चाहिए
  • क्योंकि इस तरह के ऐतिहासिक दावों में विवरण भिन्न हो सकते हैं।
  • पुष्टि योग्य उत्तर पाने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं पर विचार करें:
    • इंडियाना ड्यून्स (Indiana Dunes) क्षेत्र के पादप जीवन के ऐतिहासिक अध्ययन का प्रमुख नाम कौन है
    • विशेषकर 1896 की तारीख के आसपास?
    • क्या यह नाम किसी अमेरिकी जीवविज्ञान या पर्यावरण-वैज्ञानिक परिवार से जुड़ा है, या हो सकता है
    • स्थानीय विश्वविद्यालय/संस्था के पादपविज्ञान-ख़ास विशेषज्ञ रहे हों?
    • इसके लिए विश्वसनीय शिक्षण/ऐतिहासिक स्रोत (जैसे ऐतिहासिक Ecology/Grove of Indiana Dunes के अभिलेख, विश्वविद्यालय प्रकाशन, या पुरानी विज्ञान पत्रिकाएं) से क्रॉस-चेक आवश्यक है।
    • यदि आप चाहें, तो मैं विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोतों से ताज़ा/सटीक खोज कर उसी के आधार पर एक विस्तृत, उद्धृत उत्तर पेश कर सकता हूँ।
    • चाहें तो आप बताएँ कि आप हिंदी या अंग्रेजी स्रोत अधिक प्राथमिक मानते हैं
    • क्या आप विशिष्ट संस्थान/अन्वेषक के नाम पर प्राथमिकता देना चाहते हैं।

25. 'जानवर' और 'वह क्षेत्र जहां वे पाए जाते हैं' का निम्नलिखित में से कौन-सा संयोजन गलत है? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) वनमानुष - कैरेबियन द्वीप समूह
Solution:
  • 'वनमानुष' प्राइमेट गण का प्रसिद्ध स्तनपोषी जीव है
  • जो अफ्रीका के घने जंगलों में गिनी से लेकर कांगो तथा पश्चिमी युगांडा तक के जंगलों में पाया जाता है।
  • अतः वनमानुष कैरिबियन द्वीप समूह में नहीं पाया जाता है।
  • मुख्य उत्तर
    • सही संयोजन: जानवर – उनका क्षेत्र/आवास (habitat) सामान्यतः सही जोड़ा जाता है।
    • उदाहरण के रूप में हिरण – मैदान, पक्षी – आकाश/घोंसला, मछली – पानी आदि.
  • विस्तृत विश्लेषण
    • जानवर (Animal) वह बहुकोशिकीय जीव है जो विविध प्रकार के आवास में रहता है
    • परंतु हर जानवर के लिए एक विशिष्ट या प्रमुख आवास-प्रकार होता है।
    • यह आवास उनकी जीवनी-रुचि, भोजन, प्रजनन और सुरक्षा से जुड़ा रहता है। उदाहरण के लिए:
    • शेर: गुफा/जंगल में den-आधारित आवास।
    • हिरण: घास के मैदान।
    • तितली: उदाढ़ रूप से फूलों वाले वातावरण।
    • मछली: पानी के भीतर सभी प्रकार के जलोमय वातावरण।
    • इसलिए संयोजन में सुसंगत/उचित आवास का चयन जरूरी है। गलत संयोजन तब बनता है
    • जब आवास का उल्लेख अत्यंत सामान्य या असमान समझा जाए, या जानवर और उसके आवास के बीच तार्किक मेल न हो।
    • विकल्प A: हिरण – मैदान (उपयुक्त)
    • विकल्प B: खरगोश – मांद (उपयुक्त)
    • विकल्प C: कुत्ता – गौशाला/कुत्ता घर (उपयुक्त कुछ परिस्थितियों में; पालतू अवस्था में यह सामान्य आवास है)
    • विकल्प D: पक्षी – पानी (अस्वीकृत/गलत, क्योंकि पक्षी आम तौर पर पानी नहीं, बल्कि आकाश/घोंसला जैसे आवासों के साथ जुड़ते हैं)।
  • स्रोत संदर्भ और उद्धरण
    • उपरोक्त व्याख्या सामान्य जैविक ज्ञान पर आधारित है: जानवरों के आवास उनके जीवन चक्र और पर्यावरण से जुड़ते हैं।​
    • पेटेंट उदाहरणों के लिए घरेलू संसाधनों और शिक्षण सामग्री में जानवरों के आवास के नाम स्पष्ट मिलते हैं
    • जैसे हिरण – घास के मैदान, शेर – गुफा/जंगल, मछली – पानी आदि।​

26. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य उर्वरकों का एक प्रमुख उत्पादक नहीं है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) हिमाचल प्रदेश
Solution:
  • हिमाचल प्रदेश राज्य उर्वरकों का एक प्रमुख उत्पादक नहीं है
  • जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश उर्वरकों के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
  • उत्तर प्रदेश में उर्वरक निर्माण के बड़े-बड़े प्लांट हैं।
  • इनमें से कुछ गोरखपुर, फूलपुर (प्रयागराज), बरेली में स्थित हैं।
  • निष्कर्ष
    • गुजरात उर्वरकों का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र माना जाता है, खासकर यूरिया, अमोनिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों के उद्योगों के कारण.​
    • अन्य प्रमुख उत्पादक राज्य भी हैं
    • जैसे तमिलनाडु (फॉस्फेट उर्वरकों का मध्य-स्तर उत्पादन) और कुछ उत्तर-भारत के राज्य, लेकिन वे गुजरात के बराबर नहीं हैं.​
  • कारण क्या हैं
    • राज्य के पास प्राकृतिक गैस के समृद्ध भंडार है
    • जो उर्वरक निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल, खासकर यूरिया के उत्पादन को सपोर्ट करते हैं.​
    • गुजरात में इंडियन Farmers Fertiliser Cooperative Limited (IFFCO) और Gujarat State Fertilisers & Chemicals (GSFC) जैसी बड़ी कंपनियों के संयंत्र मौजूद हैं, जो उत्पादन क्षमता बढ़ाते हैं.​
    • बंदरगाहों की उपलब्धता (कांडला, मुंद्रा) आयात-निर्यात को आसान बनाती है
    • जिससे कच्चे माल और उत्पाद का प्रवाह सुधरता है.​
  • अन्य राज्यों की भूमिका
    • तमिलनाडु फॉसเฟेट उर्वरकों का एक बड़ा केंद्र है और उर्वरक उत्पादन के मामले में गुजरात के बाद आता है
    • लेकिन गुजरात से जुड़ा समर्थन और कच्चे माल उसकी तुलना में कम है.​
    • पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि में उर्वरक खपत अधिक तो है, पर उत्पादन के स्तर पर गुजरात का स्थान नहीं है
    • पंजाब कई बार उपभोक्ता-स्तर पर अग्रणी बताया गया है, पर उत्पादन में नहीं.​
    • झारखंड जैसे क्षेत्र खनिज संसाधनों से संपन्न हो सकते हैं पर उर्वरक उत्पादन योग्य केंद्र नहीं हैं.​
  • संक्षेप में
    • सही उत्तर: गुजरात। कारण: प्राकृतिक गैस का व्यापक भंडार, बड़े संयंत्र (IFFCO, GSFC) और पोर्ट-आधारित सुविधा के कारण उर्वरक उत्पादन में गुजरात अग्रणी है.​
    • यह भारत का एक प्रमुख उर्वरक उत्पादन केंद्र बनने के पीछे की प्रमुख वजहें हैं
    • अन्य राज्यों की भूमिका उत्पादन के मामले में गौण है, जबकि कुछ क्षेत्र खपत में उच्च रहते हैं.​

27. किस बल के कारण भारत में दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यापारिक पवनें विषुवत वृत्त को पार करने के बाद दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहने लगती हैं? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) कोरियोलिस बल
Solution:
  • दक्षिणी गोलार्द्ध में कोरियोलिस बल के कारण व्यापारिक हवाएं दक्षिण-पूर्व से भूमध्य रेखा की ओर चलने लगती हैं।
  • जैसे ही हवाएं भूमध्य रेखा को पार करती हैं, वे कोरियोलिस बल द्वारा दाईं ओर विक्षेपित हो जाती हैं
  • जिससे वे भारत में उत्तर-पूर्व की ओर बहने लगती हैं।
  • व्यापारिक पवन क्या हैं
    • स्थायी, निम्न दबाव से उच्च दबाव की ओर निरंतर चलने वाली हवाएं हैं
    • जिन्हें भूमध्यरेखीय क्षेत्रों के साथ उपोष्णकटिबंधीय belts से अनुभव किया जाता है।
    • उत्तरी अक्षांशों में इन्हें उत्तर-पूर्व व्यापारिक पवन कहा जाता है
    • जबकि दक्षिणी गोलार्ध में इन्हें दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवन कहा जाता है.​
  • दक्षिणी गोलार्ध में पूर्व से पश्चिम की ओर विक्षेपण
    • पृथ्वी के घूर्णन के कारण दक्षिणी गोलार्ध में पवनें दाईं तरफ नहीं, बल्कि बाईं तरफ विक्षेपित होती हैं
    • जब वे उच्च दबाव से निम्न दबाव की दिशा में बढ़ती हैं; यह विक्षेपण कोरिओलिस प्रभाव के कारण है.​
  • भूमध्यरेखांश को पार करने के बाद दिशा परिवर्तन
    • जैसे ही दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक हवाएं भूमध्यरेख को पार करती हैं
    • वे कोरिओलिस बल के कारण दाईं ओर विक्षेपित होकर उत्तर-पूर्वी दिशा में भारत की ओर प्रविष्ट होती हैं.​
  • भारत में पवन परिवर्तन की प्रक्रिया
    • भारतीय मानसून के दौरान, भूमध्यरेखापार से आने वाली दक्षिणी गोलार्ध की पवनें आवश्यक स्थान पर उच्च दबाव को भरने के लिए भारत की ओर बहती हैं
    • पृथ्वी की गति के कारण इनकी दिशा का परिवर्तन होता है
    • परिणामस्वरूप वे दक्षिण-पश्चिम से पूर्व की ओर प्रचलन बनाते हैं
    • जो जून-सीज़न में दक्षिण-पश्चिमी मानसून को जन्म देता है.​
  • संबंधी अवधारणाएं
    • कोरिओलिस बल क्या है: पृथ्वी के घूर्णन के कारण चलती वस्तुओं के मार्ग में घूर्णन के कारण विक्षेपण होता है
    • उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर, दक्षिणी गोलार्ध में बाईं दिशा में विक्षेपण होता है
    • जिससे व्यापारिक पवनें अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न दिशाओं में विकसित होती हैं.​
  • तालिका: तुलना (गोलार्द्ध के अनुसार)
    • उत्तरी गोलार्ध: पवनें प्रायः उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हैं
    • घूर्णन के कारण पवनें दाईं ओर विक्षेपित होती हैं.​
    • दक्षिणी गोलार्ध: पवनें दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर बहती हैं
    • भूमध्यरेख पार करते ही वे दाईं ओर विक्षेपित होकर उत्तर-पूर्व की ओर भारत की ओर बढ़ती हैं.​

28. निम्नलिखित में से किसे एशिया की विशालतम गंदी बस्ती के रूप में नामित किया गया है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) धारावी
Solution:
  • धारावी, मुंबई (महाराष्ट्र) में एक आवासीय क्षेत्र है।
  • इसे अक्सर दुनिया की सबसे बड़ी मलिन बस्तियों में से एक माना जाता है।
  • विस्तार:
    • जिसे अक्सर एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती के रूप में उद्धृत किया जाता है.​
    • यह क्षेत्र लगभग 2.1 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यहां अनुमानित 700,000 से 1,000,000 लोग रहते हैं
    • जिसे विश्व की सबसे बड़ी गंदी बस्तियों में से एक माना जाता है.​
    • धारावी की पहचान अक्सर गरीबी, खराब स्वच्छता, और जीवन यापन के कठोर हालात के साथ की जाती है
    • हालांकि यहाँ हस्तशिल्प, पुनर्चक्रण और छोटे उद्योगों जैसे आर्थिक गतिविधियाँ भी फलती-फूलती हैं.​
    • ऐतिहासिक दृष्टि से भी धारावी कई बड़े मानव-आधारभूत चुनौतियों का सामना करता रहा है
    • जिसमें प्लेग जैसी महामारियाँ और आपदाएं भी शामिल हैं, जिन्होंने शहर के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है.​
  • नोट:
    • भाषा-प्रश्न के हिसाब से यह नाम सबसे अधिक बार उद्धृत हुआ है
    • कई स्रोत इसे एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती के रूप में बताते हैं
    • जबकि विविध साइट्स और हैशटैग के जरिए धारावी को इसी श्रेणी में रखा गया है.​​
    • “गंदी बस्ती” शब्द का प्रयोग अक्सर जन-सामाजिक संदर्भ में नारों और लोककथाओं में आता है
    • लेकिन वास्तविकता में धारावी में जीवनयापन के कई आयाम हैं
    • जहाँ चुनौतियाँ हैं, वहीं समुदाय आधारित गतिविधियाँ और छोटे-स्तर के उद्योग भी मौजूद हैं.​

29. 1930 के दशक में आर्थर होम्स ने मेंटल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत प्रतिपादित किया था? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) संवहन-धाराओं का सिद्धांत
Solution:
  • आर्थर होम्स ने 1930 के दशक में मेंटल के बारे में संवहन- धाराओं का सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
  • इस सिद्धांत के तहत मेंटल भाग में संवहन धाराओं के संचालन की संभाव्यता की व्याख्या की गई है।
  • क्या पूछा गया है
    • प्रश्न: 1930 के दशक में आर्थर होम्स ने मेंटल के बारे में कौन सा सिद्धांत प्रतिपादित किया था
    • यह वाक्य “मेंटल” शब्द से भ्रमित लगता है
    • सामान्यतः भू-वैज्ञानिक शब्दावली में “मेन्टल” नहीं, बल्कि “convection currents” या “convection current theory” का उल्लेख होता है।
    • यदि वास्तव में अभिकल्प भूगर्भशास्त्र का संदर्भ है, तो convection current theory ही प्रसिद्ध है
    • इसे आर्थर होम्स के साथ सीधे जोड़ना संदेहास्पद है।
  • मुख्य निष्कर्ष
    • convection current theory (संवहन धारा सिद्धांत) भूगर्भशास्त्र में प्लेट टेक्टोनिक्स के गतिशीलता को समझाने के लिए प्रयुक्त होता है।
    • यह धारणा बताती है कि पृथ्वी के mantle (केंद्रीय तह) में गर्म सामग्री गर्म होकर ऊपर उठती है
    • ठंडी सामग्री नीचे धस जाती है, जिससे प्लेटों की गति संचालित होती है ।​
    • इस सिद्धांत को 1930 के दशक के भीतर कई भू-विज्ञानियों ने विकसित किया, पर इसे होम्स के नाम से सीधे जोڑना सामान्य संदर्भ नहीं है
    • होम्स के साथ convection currents का सीधा उल्लेख अक्सर मिल नहीं पाता है ।​
  • यदि आपका लक्ष्य सही नाम-आधारित उत्तर पाना है
    • convection current theory को 1930 के दशक में पायनियर करने वालों में कुछ प्रमुख नाम आते हैं
    • जिनमें William J. McKenzie, Xavier Le Pichon जैसे नाम ऐतिहासिक साहित्य में मिलते हैं
    • सिंहावलोकन में यह स्पष्ट है कि यह theory mantle convection और plate tectonics के कारणों को समझाने के लिए प्रयोग की गई।
    • होम्स नाम से जुड़ाव सामान्य रूप से मान्य स्रोतों में नहीं दिखता है (कुछ विद्यार्थीय प्रश्नों में टेम्पलेट जवाब में गलत आंकड़े दिख जाते हैं) ।​
  • महत्वपूर्ण मोटा-मोटा संदर्भ
    • convection current theory, mantle convection, plate tectonics के कारणों के बारे में परिचय
    • यह सिद्धांत पृथ्वी के mantle में गर्मी के प्रवाह से धाराओं के निर्माण का प्रस्ताव करता है, जो सतह पर tectonic plate movements से जुड़ते हैं ।​
    • संपूर्ण सत्य के लिए विश्वसनीय पन्नों/पुस्तकों के अध्ययन की सलाह दी जाती है
    • ताकि “आर्थर होम्स” के साथ ठोस लिंक मिले या न मिले, इसे स्पष्ट किया जा सके ।​
  • सुझाव
    • अगर उद्देश्य किसी प्रश्न-पत्र/उद्धरण के लिए सही विकल्प देना है
    • तो convection current theory ही सही उत्तर माना जाएगा
    • यह “आर्थर होम्स” के नाम से स्रोत-आधारित न होकर भू-वैज्ञानिक साहित्य से सत्यापित किया जाना चाहिए।
    • यदि चाहें, सही संदर्भ स्रोतों के साथ एक संक्षिप्त नोट बनाकर दे सकता हूँ
    • ताकि आप परीक्षा-उपयुक्त उत्तर एकदम सटीक-स्रोतों के साथ दे सकें।

30. भू-गर्भशास्त्र (Geology) के जनक के रूप में किसे जाना जाता है? [CGL (T-I) 03 दिसंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) जेम्स हटन
Solution:
  • स्कॉटलैंड के प्रकृतिवादी जेम्स हटन को भू-गर्भशास्त्र (Geol- ogy) के जनक के रूप में माना जाता है।
  • उन्होंने चट्टानों के अवलोकन के आधार पर भूवैज्ञानिक सिद्धांतों को तैयार करने का प्रयास किया था।
  • जीवन परिचय
    • जेम्स हुटन एक स्कॉटिश प्रकृतिवादी, चिकित्सक और भूविज्ञानी थे
    • जिनका जन्म 3 जून 1726 को एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड में हुआ था।
    • उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती और रासायनिक उद्योगों में काम किया
    • लेकिन उनकी रुचि पृथ्वी की संरचना और प्रक्रियाओं में थी। मृत्यु 26 मार्च 1797 को हुई।​
  • प्रमुख योगदान
    • हुटन ने चट्टानों की अपनी टिप्पणियों के आधार पर भूवैज्ञानिक सिद्धांत विकसित किए, जो आधुनिक भूगर्भशास्त्र की नींव बने।
    • उन्होंने "यूनिफॉर्मिटेरियनिज्म" (एकसमानवाद) का सिद्धांत दिया
    • जिसमें कहा कि पृथ्वी की वर्तमान भूगर्भीय प्रक्रियाएँ (जैसे अपरदन, अवसादन और उथल-पुथल) भूतकाल में भी वैसी ही थीं।
    • यह नेप्टूनिज्म या कैटास्ट्रॉफिज्म जैसे पुराने सिद्धांतों के विपरीत था।​
  • महत्वपूर्ण सिद्धांत
    • चक्रवाद (Cycle of Rock Formation): ग्रेनाइट जैसी आग्नेय चट्टानों का निर्माण मैग्मा के जमने से होता है
    • अवसादी चट्टानें समुद्र तल पर बनती हैं, और ये उथल-पुथल से पर्वत बनाती हैं।​
    • निरंतरता का सिद्धांत (Principle of Uniformity): "वर्तमान पृथ्वी का अतीत की कुंजी है।
    • यह विचार चार्ल्स डार्विन और चार्ल्स लाइेल को प्रभावित करने वाला साबित हुआ।
    • अनंत काल (Deep Time): हुटन ने पृथ्वी को अत्यंत प्राचीन बताया, लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी।
  • प्रमुख प्रकाशन
    • उनकी पुस्तक Theory of the Earth (1795) में इन सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन है।
    • यह कार्य जॉन प्लेफेयर द्वारा संपादित हुआ। हुटन के विचारों ने 19वीं सदी के भूवैज्ञानिकों को प्रेरित किया
    • जैसे विलियम स्मिथ ने स्ट्रैटिग्राफी विकसित की।​
  • विरासत
    • हुटन को भूगर्भशास्त्र का जनक इसलिए कहा जाता है
    • क्योंकि उन्होंने इसे वैज्ञानिक अनुशासन बनाया, न कि धार्मिक या मिथकीय व्याख्या।
    • उनके कार्य ने जीवाश्म रिकॉर्ड और प्लेट टेक्टॉनिक्स जैसे आधुनिक सिद्धांतों का मार्ग प्रशस्त किया।
    • स्कॉटलैंड के सिक्के पर उनका चित्र अंकित है।​