विविध (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 40

31. निम्नलिखित में से कौन-सा 'पद-परिभाषा' युग्म सही है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

I. जलसंधि (Strait)- दो भू-भागों को मिलाने वाली भूमि की एक संकरी पट्टी

II. इस्थमस- दो बड़े जल निकायों को जोड़ने वाले पानी का एक संकीर्ण मार्ग

Correct Answer: (d) न तो I और न ही II
Solution:
  • दो भू-भागों को जोड़ने वाली भूमि की एक संकरी पट्टी को स्थलडमरूमध्य कहते हैं न कि जलसंधि।
  • वहीं समुद्र और महासागरों जैसे दो बड़े जल निकायों को जोड़ने वाले पानी के एक संकीर्ण मार्ग को जलडमरूमध्य कहा जाता है न कि इस्थमस।
  • संज्ञा पद: वह शब्द जो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव आदि के नाम का ज्ञान कराता है।
  • यह सामान्यतः व्यक्तिवाचक, जातिवाचक या भाववाचक संज्ञा के रूप में वर्गीकृत होता है। उदाहरण—राम, नदी, प्रेम।
  • सर्वनाम पद: संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाला शब्द। यह स्पष्ट या अनिश्चित के रूप में हो सकता है
  • यह, वह, मेरा, आपके आदि) और इसके विभाजन में पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, प्रश्नवाचक आदि आते हैं।
  • क्रिया-परिभाषा (क्रिया-पद): वाक्य में कर्म या कर्ता-कार्य की प्रकृति को बताने वाला पद।
  • यह क्रिया-परिभाषा से सम्बन्धित होता है जैसे खेलना, करना, जाना।
  • विशेषण पद: संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताने वाला पद।
  • यह लिंग, वचन और गुणात्मकता पर निर्भर होता है, जैसे छोटा, बड़ी, सुन्दर।
  • अव्यय पद: जिनके रूप से क्रिया या संज्ञा में परिवर्तन नहीं होता, बल्कि उनके अर्थ में भिन्नता होती है।
  • यह प्रकार आठ होते हैं—समुच्चयबोधक, विभक्तिउपयोग, विस्मयादिबोधक आदि (जैसे और, भी, क्यों, क्योंकि, पर, के लिए आदि)।
  • संबंधबोधक अव्यय: किसी शब्द के बीच संबंध दर्शाने वाला अव्यय, जैसे के पास, के ऊपर, से, तक आदि।
  • समुच्चयबोधक अव्यय: वाक्यों/पदों के बीच संबंध दर्शाने वाले अव्यय, जैसे और, तथा, साथ ही आदि।
  • विस्मयादिबोधक अव्यय: भाव प्रकट करने वाले अव्यय, जैसे आह, ओह, वाह आदि।
  • नीचे विस्तार के साथ नोट्स:
    • पद-परिचय बनाते समय प्रत्येक पद के प्रकार के अनुसार उसकी पहचान, लिंग, वचन, क्रिया-सम्बन्ध आदि देखा जाता है।
    • उदाहरण: राम एक व्यक्ति-संज्ञा है; वह उसे संदर्भित करता है तो वह सर्वनाम बन जाता है।
    • यह स्पष्ट करता है कि एक ही शब्द अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग पद बन सकता है।
    • संज्ञा के भेद में व्यक्तिवाचक और जातिवाचक संज्ञा के साथ भाववाचक भी आते हैं।
    • यह वर्गीकरण वाक्यों में उच्चारण, पहचान और कर्म-कारक के स्पस्ट निर्धारण हेतु उपयोगी है।
    • उदाहरण—"सीता" (व्यक्तिवाचक), "भारत" (जातिवाचक), "सुख" (भाववाचक)।
    • क्रिया-पद में क्रिया-काल, कर्ता-कारक, भाव आदि से सम्बद्ध गुण होते हैं।
    • यह समझना जरूरी है कि क्रिया-परिभाषा कैसे अन्य पदों से भिन्न है—क्रिया स्वयं वाक्य का कार्य सूचित करती है।
    • अव्यय के भीतर समुच्चयबोधक, संबंधबोधक, विस्मयादिबोधक, आदि अलग-अलग उपवर्ग बनाते हैं।
    • उनके प्रयोग से वाक्य का संरचना-गठन स्पष्ट होता है—जैसे "के लिए" एक उद्देश्य-सूचक अव्यय है
    • एक विरोधाभास/विपरीत संबंध सूचक अव्यय हो सकता है।
    • पद-परिचय के अभ्यास में विद्यार्थियों को अक्सर वाक्यों से हर रेखांकित पद का प्रकार पहचानने के लिए कहा जाता है।
    • इससे पद-परिभाषा और वाक्य-व्याकरण की समझ मजबूत होती है।
    • यदि चाहें तो इसी विषय पर मैं:
    • एक स्पष्ट विकल्प-चयन (MCQ) सेट बनाकर दे सकता/सकती हूँ,
    • या एक विस्तृत संरचित तालिका में हर पद का प्रकार, लिंग-वचन-कर्तृ-कार्य आदि विवरण दे सकता/सकती हूँ,
    • साथ ही कुछ अभ्यास चरण-वार दे सकता/सकती हूँ ताकि आप सुरक्षित रूप से परीक्षण कर सकें।
    • संज्ञा पद: वह शब्द जो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव आदि के नाम का ज्ञान कराता है।
    • यह सामान्यतः व्यक्तिवाचक, जातिवाचक या भाववाचक संज्ञा के रूप में वर्गीकृत होता है। उदाहरण—राम, नदी, प्रेम।
    • सर्वनाम पद: संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाला शब्द। यह स्पष्ट या अनिश्चित के रूप में हो सकता है
    • (यह, वह, मेरा, आपके आदि) और इसके विभाजन में पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, प्रश्नवाचक आदि आते हैं।
    • क्रिया-परिभाषा (क्रिया-पद): वाक्य में कर्म या कर्ता-कार्य की प्रकृति को बताने वाला पद।
    • यह क्रिया-परिभाषा से सम्बन्धित होता है जैसे खेलना, करना, जाना।
    • विशेषण पद: संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताने वाला पद। यह लिंग, वचन और गुणात्मकता पर निर्भर होता है, जैसे छोटा, बड़ी, सुन्दर।
    • अव्यय पद: जिनके रूप से क्रिया या संज्ञा में परिवर्तन नहीं होता, बल्कि उनके अर्थ में भिन्नता होती है।
    • यह प्रकार आठ होते हैं—समुच्चयबोधक, विभक्तिउपयोग, विस्मयादिबोधक आदि (जैसे और, भी, क्यों, क्योंकि, पर, के लिए आदि)।
    • संबंधबोधक अव्यय: किसी शब्द के बीच संबंध दर्शाने वाला अव्यय, जैसे के पास, के ऊपर, से, तक आदि।
    • समुच्चयबोधक अव्यय: वाक्यों/पदों के बीच संबंध दर्शाने वाले अव्यय, जैसे और, तथा, साथ ही आदि।
    • विस्मयादिबोधक अव्यय: भाव प्रकट करने वाले अव्यय, जैसे आह, ओह, वाह आदि।
  • नीचे विस्तार के साथ नोट्स:
    • पद-परिचय बनाते समय प्रत्येक पद के प्रकार के अनुसार उसकी पहचान, लिंग, वचन, क्रिया-सम्बन्ध आदि देखा जाता है।
    • उदाहरण: राम एक व्यक्ति-संज्ञा है; वह उसे संदर्भित करता है तो वह सर्वनाम बन जाता है।
    • यह स्पष्ट करता है कि एक ही शब्द अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग पद बन सकता है।
    • संज्ञा के भेद में व्यक्तिवाचक और जातिवाचक संज्ञा के साथ भाववाचक भी आते हैं।
    • यह वर्गीकरण वाक्यों में उच्चारण, पहचान और कर्म-कारक के स्पस्ट निर्धारण हेतु उपयोगी है।
    • उदाहरण—"सीता" (व्यक्तिवाचक), "भारत" (जातिवाचक), "सुख" (भाववाचक)।
    • क्रिया-पद में क्रिया-काल, कर्ता-कारक, भाव आदि से सम्बद्ध गुण होते हैं।
    • यह समझना जरूरी है कि क्रिया-परिभाषा कैसे अन्य पदों से भिन्न है—क्रिया स्वयं वाक्य का कार्य सूचित करती है।
    • अव्यय के भीतर समुच्चयबोधक, संबंधबोधक, विस्मयादिबोधक, आदि अलग-अलग उपवर्ग बनाते हैं।
    • उनके प्रयोग से वाक्य का संरचना-गठन स्पष्ट होता है—जैसे "के लिए" एक उद्देश्य-सूचक अव्यय है
    • एक विरोधाभास/विपरीत संबंध सूचक अव्यय हो सकता है।
    • पद-परिचय के अभ्यास में विद्यार्थियों को अक्सर वाक्यों से हर रेखांकित पद का प्रकार पहचानने के लिए कहा जाता है।
    • इससे पद-परिभाषा और वाक्य-व्याकरण की समझ मजबूत होती है।
  • यदि चाहें तो इसी विषय पर मैं:
    • एक स्पष्ट विकल्प-चयन (MCQ) सेट बनाकर दे सकता/सकती हूँ,
    • या एक विस्तृत संरचित तालिका में हर पद का प्रकार, लिंग-वचन-कर्तृ-कार्य आदि विवरण दे सकता/सकती हूँ,
    • साथ ही कुछ अभ्यास चरण-वार दे सकता/सकती हूँ ताकि आप सुरक्षित रूप से परीक्षण कर सकें।

32. निम्नलिखित में से कौन-सी एक स्थायी पवन नहीं है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) लू
Solution:
  • लू एक स्थानीय पवन है न कि स्थायी पवन है। लू उत्तरी भारत में गर्मियों में चलने वाली धूल भरी गर्म एवं शुष्क पवन है।
  • पूर्व भाषा में उत्तर का सार:
    • स्थायी पवन वह पवन है जो पूरे साल एक ही दिशा में निरंतर चलती है
    • वैश्विक जलवायु परिसंचरण से जुड़ी होती है। उदाहरण के तौर पर व्यापारिक पश्चिमी हवाएँ, पूर्वी हवाएँ (ईस्टरली) आदि स्थायी पवनों में गिने जाते हैं.​
    • लू एक स्थानीय मौसमी पवन है जो गर्मी के महीनों में विशेष क्षेत्रों में चलती है
    • सामान्यतः गर्मी के तापमान बढ़ने पर उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से निम्न दबाव वाले क्षेत्रों की ओर तेज और शुष्क हवा के रूप में पहचानी जाती है
    • यह पूरे वर्ष नहीं चलती, बल्कि गर्मियों में विशेष रूप से सक्रिय होती है—इसलिए इसे स्थायी पवन नहीं माना जाता.​
  • स्थायी पवन क्या होती है
    • परिभाषा: पृथ्वी के स्थाई उच्च वायुदाब कटिबन्ध से स्थाई निम्न वायुदाब कटिबन्ध की ओर निरंतर प्रवाह करने वाली पवनें होती हैं
    • जो पूरे वर्ष एक ही दिशा में चलती रहती हैं। इन्हीं कारणों से इन्हें प्रचलित/ग्रहीय पवन, व्यापारिक हवाएँ आदि नामों से भी जाना जाता है.​
  • प्रकार और उदाहरण:
    • व्यापारिक पवन (Trade winds): उत्तरी/दक्षिणी गोलार्धों में लगभग 30° अक्षांश के आसपास स्थिर दिशा में चलती हैं।
    • पछुआ/पश्चिमी पवनें: कुछ क्षेत्रों में स्थायी दिशाओं के साथ बहती हैं।
    • पूर्वी पवनें (Easterlies): इनका मार्ग भी स्थिर रहता है।
      इन सबको मिलाकर स्थायी पवनें वैश्विक पवन चक्र का हिस्सा होती हैं और वर्षभर एक जैसी दिशा में प्रवाहित होती हैं.​
  • मौसमी पवनें और स्थानीय पवनें
    • मौसमी पवनें: ऋतुओं के अनुसार दिशा बदलती हैं; उदाहरण के तौर पर मानसून पवनें जो गर्मियों में एक दिशा से दूसरी दिशा में बदलती हैं।
    • ये स्थायी नहीं मानी जातीं.​
    • स्थानीय पवनें: छोटे क्षेत्रों या दिन/महीने के अनुसार बदलती रहती हैं
    • उदाहरण के तौर पर लू (Heat wind) जो भारत के उत्तरी मैदानों में गर्मियों में चलती है, और समुद्री/स्थलीय समीर आदि। ये स्थायी नहीं हैं.​​
  • लू (Heat wind) क्यों स्थायी पवन नहीं है
    • लू एक स्थानीय, मौसमी पवन है जो विशेष गर्मी के मौसमानुसार तीव्र होती है
    • दिन/महीने के हिसाब से चरम पर आती है
    • यह पूरे वर्ष लगातार नहीं चलती, बल्कि गर्मी के कुछ महीनों में विशेष परिस्थितियों के कारण तेज होती है।
    • अतः यह स्थायी पवन की परिभाषा के अनुरूप नहीं बैठती.​
    • टेस्टबुक जैसी स्रोतें भी स्पष्ट करती हैं कि स्थायी पवन वे हवाएं होती हैं जो पूरे वर्ष बनी रहती हैं
    • जबकि लू और मानसूनी पवनें मौसमी होती हैं; इस आधार पर लू स्थायी पवन नहीं मानी जाती.​
  • नोट:
    • यदि आप चाहें तो मैं इसे एक संक्षिप्त सारणी के रूप में भी पेश कर सकता/सकती हूँ
    • जिसमें स्थायी पवन, मौसमी पवन और स्थानीय पवनों की विशेषताएं, दिशा-गति और उदाहरण स्पष्ट रूप से तुलनात्मक रूप में दिए जाएँ।
  • उद्धरण:
    • स्थायी पवनों की परिभाषा और प्रकार: स्थाई पवन क्या हैं और इनमें कौन-से तत्व आते हैं.​
    • स्थायी बनाम मौसमी/स्थानीय पवनों का अंतर: स्थायी पवनों के उदाहरण और लू की मौसमी/स्थानीय प्रकृति.​
    • लू की विशेषताएं और उसका स्थानिक, मौसमी характер: लू स्थायी पवन नहीं है.​

33. भू-दृश्य पर जल, पवन एवं हिम जैसे विभिन्न घटकों के द्वारा होने वाले क्षय को ....... कहते हैं। [CGL (T-I) 01 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अपरदन
Solution:
  • भू-दृश्य पर जल, पवन एवं हिम जैसे विभिन्न घटकों के द्वारा होने वाले क्षय को अपरदन कहते हैं।
  • अपरदन के प्रक्रमों में वायु, जल तथा हिमनद और सागरीय लहरें प्रमुख हैं।
  • मुख्य विवरण
    • अपरदन (Erosion) वह प्रक्रिया है जिसमें जल, पवन, हिम आदि प्राकृतिक बल भू-आकृतियों के सतह को काटते, ढहाते और तोड़ते हैं
    • जिससे चट्टानों के टुकड़े दूर- दूर स्थानों पर जमा होते हैं और जमीन की संरचना बदलती है।
    • इसके अंतर्गत तीन प्रमुख प्रकार होते हैं: जल अपरदन, पवन अपरदन, और हिम अपरदन।
    • लोक-भाषा में इसे अक्सर क्षय/अपक्षय से जोड़ा जाता है, पर क्षय (Weathering) और अपरदन एक-दूसरे से भिन्न प्रक्रियाएं हैं
    • अपरदन सतह पर ही गति पाकर अवशिष्ट वस्तुओं को स्थानांतरित करता है
    • जबकि क्षय चट्टानों को टूटने/फटने की आंतरिक प्रक्रिया है
    • जिसे बिना दूरी के संचरण होता है। [उदा. भूगोल पाठ-7, अवधारणात्मक संकलन से संदर्भ]​
  • अपरदन के प्रमुख घटक
    • जल अपरदन: नदियाँ, वर्षा, धाराएँ चट्टानों को काटती हैं, गढ़ती सतहों को गहरा बनाती हैं
    • सिलिका-युक्त कणों को नीचे की ओर लेकर जाते हैं।
    • यह नदी किनारों की कटाव और द्वीपों, चाप-झील आदि जैसी भू-आकृतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।​
    • पवन अपरदन: गर्म व शुष्क क्षेत्रों में तेज पवन रेतीले क्षेत्रों को घुमाती है
    • बालू का उड़ा-आना/जमना पर्वत-सी संरचनाओं को बनाता है, जैसे लोआस/बालू-टिब्बा आदि।​
    • हिम अपरदन: हिमनदों के गुरुत्वाकर्षण से चट्टानों में दरार पड़ती है
    • बर्फ के बढ़ते आयतन से टकराने पर चट्टानें विभाजित होती हैं
    • धूसर-रेतीले पटल बनते हैं। हिम-अपक्षय (Freeze-thaw) भी प्रमुख कारक है।​
  • पूरक अवधारणाएं
    • अपरदन बनाम स्थलाकृति: अपरदन के कारण नदी घाटियाँ, वीडियो-झीलें, लावा-स्तर जैसी भू-आकृतियाँ बनती हैं
    • साथ ही तटीय क्षेत्रों में समुद्री तरंगें भी संरचना में परिवर्तन करती हैं।​
    • संदर्भित प्रश्न-उत्तर: कई विद्यालयी स्रोतों में यह परिभाषा इसी प्रकार दी जाती है
    • जल, पवन, हिम द्वारा भू-आकृतियों के क्षय को अपरदन कहते हैं।​
  • यदि चाहें, इस विषय को और विस्तार से समझाने के लिए:
    • एक विस्तृत उदाहरण के साथ जल अपरदन से घाटी निर्माण की प्रक्रियाओं का चरण-दर-चरण वर्णन
    • पवन अपरदन के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर असर की विशेषताओं की तुलना
    • हिम अपरदन के ठंडे क्षेत्रों में Freeze-Thaw चक्र के साथ चट्टानों के विघटन की क्रिया

34. निम्नलिखित में से क्या बहिर्जनित बल के कारण घटित होता है? [CGL (T-I) 05 दिसंबर, 2022 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) अपरदन
Solution:
  • अपरदन बहिर्जनित बल के कारण घटित होता है।
  • अपरदन में हवा, जल जैसे कारकों के कारण भू-आकृतियों का क्षय होता है
  • नई भू-आकृतियों का निर्माण होता है।
  • बहिर्जनिक बनाम अंतर्जनित बल
    • बहिर्जनिक बल वे बल हैं जो पृथ्वी की सतह पर काम करते हैं या सतह के ऊपर ऊर्जा प्राप्त करते हैं
    • जैसे कि हवा, पानी, जलवायु, जल प्रवाह द्वारा उत्पन्न प्रक्रियाएं। इन बलों से भू-आकृतियों में परिवर्तन होता है
    • जैसे अवयवों का कटाव या जमा होना। (उदाहरण: पवन द्वारा 谷/डिज़ाइन किए गए रेखाचित्र, नदी के किनारे का कटाव).​
    • अंतर्जनित बल वे बल हैं जो पृथ्वी के आंतरिक स्रोतों से आते हैं और भू-आकृतियों के भीतर आंतरिक संरचनाओं को प्रभावित करते हैं
    • जैसे ताप, दूषित दबाव, प्लेट टेक्टोनिक्स के कारण उठान-घटाव आदि।
    • इनसे भी भू-आकृतियों में परिवर्तन हो सकता है
    • बहिर्जनिक प्रक्रियाएं सतही परिवर्तन के प्रमुख चालक होते हैं।
    • मौजूद स्रोतों के अनुसार बहिर्जनिक बल अक्सर सतह-प्रक्रियाओं को संचालित करते हैं.​
  • बहिर्जनित बल से होने वाले प्रमुख परिवर्तन
    • अपरदन (Erosion): पवन, जलप्रवाह, लहरें आदि सतह से पदार्थ हटाते है
    • जिससे घाटी, क्लिफ आदि बनते हैं। यह बहिर्जनिक बलों का सबसे सामान्य उदाहरण है.​
    • निक्षेपण (Deposition): प्रवाह थमने पर सामग्री जमा होती है, नदी डेल्टा, बालू के टीले आदि निर्मित होते हैं.​
    • पवन-गतिक परिवर्तन: पवन के कारण स्थल-आकृतियाँ जैसे बड़े-बड़े ड्यूरामिन (डैश-राख) आदि बनते हैं.​
    • जलचक्र/समुद्री क्रिया: समुद्र-तट पर रेत-बालू का संचय-निःसरण, चट्टानों के आकार में परिवर्तन आदि बहिर्जनिक प्रक्रियाओं से होते हैं.​
  • बहिर्जनिक बलों के उदाहरण (स्पष्ट शिक्षण)
    • पवन: ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज बलों से रेत-डालों, डेजर्ट-डप्लेसमेंट आदि बनाते हैं, जिनसे स्थलाकृति परिवर्तित होती है.​
    • जल-प्रवाह: नदी-तटों पर कटाव और तलछट-निर्माण के कारण भू-आकृतियाँ बदलती हैं.​
    • समुद्री लहरें: तटरेखा की घुमावदार रेखाओं को समायोजित करती हैं, तटरेखा में परिवर्तन लाती हैं.​
  • कैसे समझें एक बहिर्जनिक प्रक्रिया के प्रभाव को
    • घटना का प्रकार: किनारे-घटाव vs जमा-घटना?
    • कब और कहाँ होता है: कौन सा एजेंट (हवा, पानी, लहरें) प्रमुख है?
    • परिणाम: सतह की मौजूदा संरचना में कौन सा परिवर्तन आया (कटाव, जमा, उथल-पुथल आदि)।
  • निष्कर्ष
    • बहिर्जनिक बल वे परिवर्तन संचालित करने वाले कारक हैं जो सतह पर सीधे सक्रिय रहते हैं
    • अपरदन/निक्षेपण जैसे प्रक्रिया से भू-आकृतियों को क्रमबद्ध रूप से बदलते हैं.​
    • यदि السؤال “निम्नलिखित में से कौन सा बहिर्जनिक बल के कारण घटित होता है?” के बारे में है
    • तो आम उत्तर में अपरदन (erosion) या पवन-उत्पन्न परिवर्तन जैसे उदाहरण आते हैं
    • क्योंकि ये बाह्य बलों द्वारा सतह पर संचालित होते हैं.​

35. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सुमेलित है? [CGL (T-I) 02 दिसंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) लू - गर्म हवा
Solution:
  • 'लू' उत्तरी भारत में गर्मियों के मौसम में चलने वाली उष्ण एवं शुष्क स्थानीय पवन है।
  • इसे 'गर्म हवा' भी कहा जाता है।
  • असम और पश्चिम बंगाल में बैसाख के महीने में शाम को चलने वाली भयंकर एवं विनाशकारी वर्षायुक्त पवनों को 'काल बैसाखी' कहते हैं।
  • उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंधों में विषुवतीय निम्न वायुदाब कटिबंधों की ओर दोनों गोलार्दों में निरंतर बहने वाली पवनों को 'व्यापारिक पवनें' कहते हैं।
  • सुमेलित करने के सामान्य नियम
    • शब्द-जोड़ी (युग्म) में समान प्रकार के शब्दों को मिलाएं: जैसे संज्ञा-संज्ञा, क्रिया-क्रिया, चमकदार-चमकदार आदि।
    • अर्थ-संगत जोड़ी चुनें: जो एक दूसरे के समानार्थी/परस्पर-विरोधी या क्रिया-कर्ता-कर्म के संबंध को दर्शाती हो।
    • किसी दी गई परि‍स्थितियों में क्रम कैसे बदलेगा, यह देखें; अक्सर क्रम-निर्भरता भी सुमेलित करने के संकेत देती है
    • (जैसे “पहला-दूसरा” बनाम “दूसरा-पहला” में अंतर).
  • अगर आप विकल्प साझा करते हैं
    • मैं प्रत्येक विकल्प का संक्षिप्त विश्लेषण कर दूँगा: कौन-सी जोड़ी सही/suitable है, कौन-सी नहीं (लगभग 1-2 वाक्यों में).
    • फिर एक स्पष्ट, एक-लाइन उत्तर दूँगा कि कौन-सा विकल्प सुमेलित है, साथ में कारण भी संक्षेप में.
  • कैसे सुरक्षित करें भिन्न-भिन्न प्रकार के तत्वों को
    • यदि सूची में नाम, विज्ञानिक इकाइयाँ, या दिन-प्रतिदिन की सामान्य शब्दावली है
    • तो उनके प्रकार और उपयुक्तता के अनुसार मिलान करें।
    • यदि सूची में वाक्य-संरचना या परिभाषा-परिभाषा प्रकार के युग्म है
    • तो समान टोन/शैली के शब्दों का चयन करें।
  • कृपया:
    • अगर संभव हो तो प्रश्न के साथ विकल्पों की पूरी सूची साझा करें.
    • या कम से कम प्रत्येक विकल्प की फार्म (एक-लाइन में) और उससे जुड़ा अर्थ/सम्बन्ध दें ताकि सुमेलित सही विकल्प निकाल दूँ।

36. भारत के पड़ोसी देश भूटान की आधिकारिक भाषा क्या है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) जोंगखा
Solution:
  • भूटान की आधिकारिक भाषा जोंगखा है। जोंगखा या भूटानी एक चीनी-तिब्बती भाषा है।
  • आधिकारिक और राष्ट्रीय भाषा
    • जांगखा/जोंगखा (Dzongkha) भूटान की आधिकारिक तथा राष्ट्रीय भाषा है
    • जो ठोस सरकारी कार्यों, शिक्षा और प्रशासनिक संचार में प्रमुख रूप से उपयोग की जाती है। [citation: सामान्य ज्ञान/विश्वसनीय संदर्भ]
  • भाषायी संरचना और लेखन
    • जोंगखा एक चीनी-तिब्बती भाषा परिवार की सदस्य है
    • इसका लेखन तिब्बती लिपि (Tibetan script) में किया जाता है।
    • यह भाषा भूटीक समुदाय के भीतर विविध बोली क्षेत्रों में भी बोली जाती है। [citation: सामान्य जानकारी]
  • भाषाई विविधता
    • भूटान में कई अन्य भाषाएं भी बोली जाती हैं
    • जैसे लेपचा (Lepcha), नेपाली आदि, लेकिन वे आधिकारिक स्थिति में नहीं हैं
    • आधिकारिक भाषा के रूप में जोङखा की प्रमुख भूमिका है। [citation: सामान्य जानकारी]
  • प्रशासनिक संदर्भ
    • भूटान सरकार ने 1971 में जोङखा को राष्ट्रीय भाषा के रूप में घोषित किया था
    • इसे शिक्षा, सरकार, और सार्वजनिक संचार में प्राथमिकता दी जाती है। [citation: सामान्य संदर्भ]

37. जब नदी मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है, तो वह मोड़दार मार्ग पर बहने लगती है। नदी के इन्हीं बड़े मोड़ों को ....... कहते हैं। [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) विसर्प
Solution:
  • तीव्र ढालों में तीव्रता से बहती हुई नदियां सामान्यतः नदी तल पर अपरदन करती हैं।
  • तीव्र नदी ढालों में भी पार्श्व अपरदन अधिक नहीं होता, लेकिन मंद ढालों पर बहती हुई
  • नदियां अधिक पार्श्व अपरदन करती हैं। क्षैतिज अपरदन अधिक होने के कारण
  • मंद ढालों पर बहती हुई नदियां वक्रित होकर प्रवाहित होती हैं
  • नदी विसर्प बनाती हैं। अतः नदी के इन्हीं वक्रों या मोड़ों को विसर्प कहते हैं।
  • परिभाषा
    • मेन्डर वह बड़ा मोड़ होता है जो नदी मैदानों में प्रवाहित होती है
    • बहाव की दिशा के अनुसार धीरे-धीरे भिन्न-भिन्न कोणों पर घुमाव बनाता है।
    • यह शब्द जलविज्ञान में खासकर बिहार-उत्तर भारत और अन्य मैदानी क्षेत्रों में आम तौर पर प्रयुक्त होता है.​
  • कैसे बनते हैं मेन्डर
    • धारणा यह है कि नदी के किनारे के बाहरी हिस्से पर अधिक कटाव होता है
    • जबकि आंतरिक हिस्से पर तलछट जमा होती है।
    • इस असमान कटाव-अपक्षय के कारण मोड़ बढ़ते हैं और नदी एक-दो नहीं बल्कि सतत घुमाव बनाती है.​
    • मैदानों में ढलानें अपेक्षाकृत कम होती हैं
    • इसलिए प्रवाह की धारा धीरे-धीरे घूमती है और एक सन्निकट (S-आकार के) स्तर पर विसर्प बनता है.​​
  • क्या प्रभाव डालते हैं
    • मेन्डर के अंदरूनी किनारे पर तलछट जमा होती है जिसे नदी के तले में एक गड्ढा-सा बनता दिख सकता है
    • जबकि बाहर के किनारे पर घाटे का क्षेत्र ज्यादा कटावित होता है।
    • इसी कारण कभी-कभी नदी एक चौड़े घुमावदार क्षेत्र में केन्द्रित होती है
    • कुछ समय बाद यह दायरे में परिवर्तन दिखाती है.​
    • समय के साथ बड़े मेन्डर धीरे-धीरे एक दूसरे से अलग हो सकते हैं
    • नया विसर्प बना सकता है, जिससे नदी का मार्ग बदला-बदला सा दिखाई देने लगता है।
    • यह परिवर्तन जल-उपयोग, भू-आकृति और पर्यावरणीय स्थितियों पर निर्भर रहता है.​
  • संबंधित शब्द और तुलनाएँ
    • मेन्डर को कभी-कभी वक्र (curve) या मोड़ (bend) के समानार्थी के तौर पर भी देखा जाता है
    • मेन्डर विशेष रूप से मैदानों में बहती नदी के बड़े घुमावों को指 करता है.​
    • इन बड़े मोड़ों के कारण नदी कभी-कभी विभ्रम (braiding) की अवस्था तक पहुँच सकती है
    • जब बहाव के रास्ते एक से अधिक शाखाओं में बंट जाते हैं; पर मेन्डर स्वयं एक बड़े मोड़ की पहचान है.​
  • सामान्य संदर्भ और अध्ययन के लिए संकेत
    • शिक्षा-सम्बन्धी सवालों में, जब नदी मैदान में प्रवेश करती है और बड़े मोड़ बनाती है
    • तो इसे आम तौर पर “मेन्डर” कहा जाता है। यह अवधारणा भू-तटीय भू-वैज्ञानिक पाठ्यपुस्तकों और GK स्रोतों में बार-बार आती है.​
    • हिंदी और अंग्रेजी दोनों साहित्य में इसे “meander” के रूप में लिखा और समझा जाता है
    • जो नदी के पत्थर-तलछट और धार के कारण विकसित होता है.​
  • महत्वपूर्ण नोट्स
    • मेन्डर एक सामान्य और स्थायी प्रवृत्ति है जिसे नदी की ऊर्जा, तलछट की उपलब्धता और भू-आकृति प्रभावित करती है
    • यह बड़ा मोड़ है, जो मैदानों के तीखे मोड़ की जगह एक सपाट-सी मार्गदर्शक घुमाव देता है.​
    • अगर चाहें, इसमें मैं आपको मेन्डर/वक्रता के/map-आधारित उदाहरणों के साथ एक छोटी-सी नक्शा-शैली व्याख्या भी दे सकता हूँ
    • चाहे आप विशेष क्षेत्र के बारे में पूछें।

38. जलस्तर के नीचे कठोर चट्टान की परतों के बीच जमा भूजल को क्या कहा जाता है। [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) जलभृत
Solution:
  • जलस्तर के नीचे कठोर चट्टान की परतों के बीच जमा भूजल को जलभृत कहा जाता है।
  • जलभृत क्या है
    • जलभृत वह भूमिगत क्षेत्र है जो पारगम्य चट्टानें या तलछट की गांठों के कारण भाप्रेत (saturated) होता है
    • जहाँ पानी पूरी तरह से चट्टानों की रेखाओं और छिद्रों में भरा रहता है।
    • यह परत भूजल का भंडार बनती है और सतह से दूरी पर स्थित हो सकती है
    • जैसे जमीन के भीतर कुओं और ट्यूबवेलों के माध्यम से पानी निकाला जा सकता है ।​
  • कैसे बनता है
    • वर्षा से पानी मिट्टी, रेत और चट्टानों के बीच की दरारों में रिसकर जलभृत में प्रवेश करता है।
    • यह जल भारी मात्रा में चट्टानें/भरामण (porous) सामग्री से होकर संचालित होकर स्थिर या क्रमबद्ध गति से नीचे की ओर प्रवाह करता है।
    • भूमिगत जलभृत में पानी संतृप्त रहता है और सतह पर झरनों, नलों या कुओं के माध्यम से पुनः प्रकट हो सकता है ।​
  • प्रकार और गुण
    • जलभृत आम तौर पर रेत, बजरी, गाद जैसे पारगम्य पदार्थों से बना रहता है
    • जो पानी को अग्रसर और संग्रहीत करने की क्षमता रखते हैं।
    • कई बार जलभृत ठोस चट्टानों के बीच की पतली परतों में भी हो सकता है
    • बशर्ते वह क्षेत्र पर्याप्त पारगम्य हो ताकि पानी तब तक निर्बाध रह सके जब तक ही आवश्यक नहीं होता कि उसे सतह पर निकाला जाए ।​
    • जलभृत का आकार और गहराई स्थान के अनुसार बदलता है; कुछ जगहों पर यह सतह से काफी नीचे हो सकता है
    • जबकि कुछ स्थानों पर जलस्तर के नज़दीक ही होता है ।​
  • महत्व और उपयोग
    • जलभृत भूजल संसाधन का मुख्य स्रोत है; यह पीने के पानी, सिंचाई, औद्योगिक उपयोग आदि में काम आता है।
    • भूमिगत जलभृतों में जमा पानी आम तौर पर कुओं, पंपों या ट्यूबवेलों से निकाला जाता है।
    • जलभृत के बिना अधिकांश क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति संभव होती है, खासकर सूखा वर्षों में ।​
  • संरक्षण और दबाव
    • भूजल स्तर में अत्यधिक कमी, वर्षा में कमी, या अवैध दोहन से जलभृत की पुनःपूर्ति धीमी या रुक सकती है
    • जिससे सतह के आसपास भूमि ढلوان (subsidence) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
    • सुरक्षित भूजल प्रबंधन के लिए स्रोतों की संतुलित पुनःपूर्ति, जल संरक्षण और सतत् दोहन आवश्यक है ।​
  • अगर आपको चाहिये:
    • जलभृत बनावट और प्रकारों के बारे में तुलना
    • भारी जलभृत क्षेत्रों के उदाहरण और उनके वितरण
    • भूजल संरक्षण के लिए व्यवहारिक उपाय

39. निम्नलिखित में से किस दाब पेटी को हॉर्स अक्षांश के रूप में जाना जाता है? [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) उपोष्ण उच्च दाब
Solution:
  • उपोष्ण उच्च दाब पेटी को हॉर्स अक्षांश के रूप में जाना जाता है।
  • परिभाषा और स्थान
    • हॉर्स अक्षांश ऐसे दाब पेटी हैं जो पृथ्वी के उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में ऊपरी वायुमंडलीय दाब के क्षेत्र के साथ होती हैं
    • खासकर गर्म मौसम में। इन क्षेत्रों में हवा नीचे की ओर उतरती है, जिससे स्थानीय दाब ऊँचा रहता है
    • हवाओं की गति धीमी या शान्त हो जाती है.​
    • सामान्यतः यह क्षेत्र लगभग 30° से 35° अक्षांश उत्तर और दक्षिण के बीच फैला होता है
    • जिसे अश्व अक्षांश के रूप में भी जाना जाता है.​
  • कारण-कार्यप्रणाली
    • इन दाब पेटियों में ऊपरी स्तर पर शुष्क और स्थिर हवा का संचलन अधिक होता है
    • जबकि नीचे की ओर आकर हवा अवरोधित हो जाती है, जिससे पवनों की कमी और कम वर्षा बनती है.​
    • गर्म, उष्णकटिबंधीय गर्मी से उठती ऊष्मा और कारीय कोरिओलीस बल मिलकर उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब बनाते हैं
    • जो अश्व अक्षांश के रूप में पहचाने जाते हैं.​
  • ऐतिहासिक/नीतिगत संदर्भ
    • नाविकों के अनुसार, इन क्षेत्रों में अक्सर हवाओं की कमी और शांत जलवायु के कारण जहाज एक स्थान पर फंस जाते थे
    • जिसके कारण इन दाब पेटियों को “हॉर्स अक्षांश” कहा गया—यह नाम प्रचलित है और ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाता है.​
  • तुलना और संबंधित पेटी
    • उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पेटी (Horse Latitudes) और भूमध्यरेखीय निम्न दाब पेटी (Equatorial Low) आदि दाब पेटियों के बीच अंतर होता है
    • अश्व अक्षांश ठंडी/शांत हवाओं के क्षेत्र को दर्शाते हैं
    • जबकि भूमध्यरेखीय निम्न दाब पेटी गर्म, आर्द्र हवा के कारण चक्रवातीय गतिविधियों के साथ सक्रिय रहती है.​
  • उपयोगी निष्कर्ष
    • यदि आपको भूगोल/वायुमंडलीय दाब पेटियाँ के नामों और उनके अक्षांशों के बारे में एक साफ-साफ चार्ट चाहिए, तब अश्व अक्षांश का स्थान उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पेटी के भीतर आता है
    • इसका ठोस अक्षांश रेंज लगभग 30°–35° अक्षांश उत्तर-दक्षिण के बीच माना जाता है.​
    • शिक्षा/परीक्षाओं के संदर्भ में, कई स्रोतों में हॉर्स अक्षांश को उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पेटी के रूप में चिन्हित किया गया है
    • यह शांत हवाओं/कम वर्षा के लिए प्रसिद्ध है.​
  • उद्धृत स्रोत
    • उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पेटी को अश्व अक्षांश के रूप में जाना जाता है.​
    • अश्व अक्षांश के लगभग 30°–35° अक्षांश तक फैले क्षेत्र की विविधताओं और विशेषताओं के बारे में विवरण.​
    • उपरोक्त विषयों के समकक्ष अन्य स्रोत व व्याख्याएं भी अश्व अक्षांश को इसी दाब पेटी के नाम से संबद्ध करती हैं.​

40. जब रेत के कण बहुत महीन और हल्के होते हैं, तो हवा इसे बहुत लंबी दूरी तक ले जा सकती है। जब ऐसी रेत बड़े क्षेत्र में जम जाती है, तो इसे ....... कहा जाता है। [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) लोएस
Solution:
  • जब रेत के कण बहुत महीन और हल्के होते हैं, तो हवा इसे बहुत लंबी दूरी तक ले जा सकती है।
  • जब ऐसी रेत बड़े क्षेत्र में जम जाती है, तो इसे लोएस कहा जाता है। 'लोएस' पवन द्वारा निक्षेपित स्थलाकृति है।
  • सामान्य दृश्यभेद: जब सूखी, महीन रेत के कण हवा में उछलकर दूरी तय करते हैं
  • ठंडी-सूखे मौसम में रेत की सतह पर बैठकर जम जाते हैं
  • तो यही जमाव क्षेत्रीय भू-रचना में एक ठोस सतह बनाता है जो चल-फिर को कठिन बनाता है।
  • इसे आप नदी-किनारे जैसी सतह नहीं, बल्कि धूल-रात में जमा रेत का एक चिकना आवरण समझें।
  • यह प्रक्रिया अक्सर तब पीछे छोड़ती है जब बारिश आती है और रेत के कण चिपक कर कठोर बन जाते हैं।​​
  • धूल/रेत के जमाव के स्थानीय नाम: अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों में इसे स्थानीय शब्दों में बताया जाता है
  • जैसे हिंदी में कुछ जगह “रेत जमाव” या “रेत का ढेर/टीला” के रूप में बोला जा सकता है
  • जबकि वैज्ञानिक साहित्य में इसे खास तौर पर “डेजर्ट डस्ट स्टॉर्म के बाद का जमाव” या simply “सतही जमाव” कहा जा सकता है।​​
  • बनावट और प्रभाव: महीन और हल्के कणों का जमाव अधिक चिकना हो सकता है
  • जिससे पैदल चलना या हल्का संतुलन बनाना कठिन हो सकता है
  • यह घर्षण की कमी और पर्यावरणीय परिवर्तन पर निर्भर रहता है।
  • यह जानकारी शैक्षणिक स्रोतों के हवाले से समझी जा सकती है।​
  • संदर्भ और विस्तृत विवरण के स्रोत: रेतीला जमाव से जुड़ी अवधारणाओं पर शिक्षण/ज्ञान-स्तर पर चर्चा में ऐसे स्रोत मिलते हैं
  • जो रेत के कणों के आकार, halda, और हवा से दूरी तय करने की क्षमता के बारे में क्रमबद्ध समझ देते हैं; कुछ स्रोत हिंदी में भी उपलब्ध हैं।​
  • साथ ही एक सरलDiagram/flow बताकर यह समझाने में मदद कर सकता हूँ
  • कैसे महीन रेत आकाश से जमाव तक पहुँचती है और किस तरह सतह पर प्रभाव डालती है।
  • चाहें तो आप क्षेत्र/भाषा specify करें ताकि उसी के अनुरूप विवरण दूँ।