विश्व जलवायु (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 13

11. पृथ्वी के मौसम में सभी परिवर्तन ....... के कारण होते हैं। [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सूर्य
Solution:
  • पृथ्वी के मौसम में सभी परिवर्तन सूर्य के कारण होते हैं। पृथ्वी की गति दो प्रकार की है-घूर्णन एवं परिक्रमण।
  • पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना घूर्णन कहलाता है
  • सूर्य के चारों ओर एक स्थिर कक्ष में पृथ्वी की गति को परिक्रमण कहते हैं
  • सूर्य की ऊर्जा का पृथ्वी तक पहुंचना
    • सूर्य से आने वाली ऊर्जा (सौर विकिरण) तापमान, आर्द्रता, दबाव और वायुमंडलीय प्रवाह सेट करती है। यह हर मौसम का मूल कारण है.​
    • सूर्य की रोशनी की मात्रा और उसका angle पृथ्वी के भिन्न-भिन्न भागों पर भिन्न-भिन्न तापमान और जलवाष्प संतुलन पैदा करती है.​
  • पृथ्वी का ध्रुवीय झुकाव और गति
    • पृथ्वी अपने अक्ष पर लगभग 23.5° झुकी है
    • जिससे उत्तरी और दक्षिणी गोलारुद्ध सूर्य के चारों ओर वर्ष भर विभिन्न प्रकार से प्रकाश प्राप्त करते हैं। इससे गर्मी-ठंड और मौसमी परिवर्तन होते हैं.​
    • पृथ्वी की वार्षिक परिक्रमा सूर्य के चारों ओर होने के कारण भी ऋतुओं के चक्र बनते हैं
    • मौसमी पैटर्न गर्मी के समय में अधिक प्रकाश के कारण, और ठंडे समय में कम प्रकाश के कारण बदलते हैं.​
  • वायुमंडलीय प्रक्रियाएं
    • तापमान के अंतर से दबाव क्षेत्रों (उच्च-निम्न दबाव) बनते हैं
    • जो हवा की गति और वर्षा के पैटर्न को संचालित करते हैं.​
    • सौर उर्जा से उत्पन्न जलवाष्प फैलाव और Condensation (वाष्पीकरण-घटाव) जलवायु चक्रों को चलाते हैं
    • जिससे आर्द्रता, वर्षा और बादलों की स्थिति निर्धारित होती है.​
  • पृथ्वी का जियोग्राफ़िक और समुद्री माहौल
    • महासागरों का तापीय क्षमता और प्रवाह प्रणाली (जैसे पश्चिमी समुद्री धारा) मौसम के क्षेत्रीय पैटर्न पर बड़ा प्रभाव डालती है
    • खासकर ऊष्मा-आर्द्रता के वितरण में [सारांश विचार]।
    • ऊँचाई, स्थलाकृति (पहाड़, मैदान) और भूमि-स्तर परिवर्तन वायुमंडलीय प्रवाह और वर्षा के क्षेत्रीय वितरण को प्रभावित करते हैं।
  • अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
    • चार ऋतु-चक्र (वसंत, गर्मी, शरद, सर्दी) प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक समान नहीं होते
    • भौगोलिक अक्षांश के हिसाब से ऋतु का अनुभव भिन्न होता है।
    • जलवायु परिवर्तन के कारण औसत तापमान और मौसमी पैटर्नों में दीर्घकालीन बदलाव आ सकते हैं
    • जिससे मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बदल सकती है।
  • संक्षेप में
    • मौसमी परिवर्तन का मूल चालक सूर्य की ऊर्जा है
    • लेकिन पृथ्वी के अक्ष का झुकाव, गतिशील वायुमंडलीय प्रक्रियाएं, और जलवायु-समुद्री प्रणाली के आंतरिक वितरण मिलकर मौसम के विविध रूप बनाते हैं.​
  • उल्लेखित स्रोत
    • सूर्य और मौसम के संबंध पर概要: मौसमी परिवर्तन के कारणों पर लेख और उत्तर मिलते हैं; प्रमुख बिंदु वही हैं
    • सूर्य की ऊर्जा, अक्ष-झुकाव, और वातावरणीय प्रक्रियाएं.​

12. हिमालय पर्वत, उपमहाद्वीप को निम्न में से किससे सुरक्षा प्रदान करके एक प्रभावी जलवायु विभाजक की भूमिका निभाता है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) ठंडी उत्तरी पवनों
Solution:
  • हिमालय पर्वत अपने सभी विस्तारों के साथ एक प्रभावी जलवायु विभाजक की भूमिका निभाता है।
  • यह ऊंची पर्वत श्रृंखला भारतीय उपमहाद्वीप को ठंडी उत्तरी पवनों से अभेद्य सुरक्षा प्रदान करती है। अहंक
  • जलवायु विभाजक के रूप में भूमिका
    • परिणामस्वरूप ठंडे सर्दी के समय दक्षिणी एशिया की जलवायु अपेक्षाकृत तुलनात्मक गर्म रहती है.​
    • ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीली चोटियों के कारण हिमालय प्रकाशीय ऊष्मा और वायुमंडलीय दाब में असामान्य परिवर्तन को भी प्रभावित करते हैं
    • जो शीतकाल में उत्तरी भारत की जलवायु को नरम रखने में मदद करते हैं.​
    • हिमालय का व्यापक भू-आकृति-निर्माण मानसून के प्रवाह को भी प्रभावित करता है
    • यह मानसून हवाओं के रास्ते और वर्षा के वितरण पर सीधे प्रभाव डालता है
    • जिससे बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और थार के क्षेत्र में वर्षा का असंतुलन बन सकता है.​
  • हिमालय की जलवायु संबंधी अन्य प्रभाव
    • मानसून संबंधी भूमिका: दक्षिण-पश्चिम मानसून को बाधित कर या उसे फँसाकर हिमालय दक्षिण एशिया में वर्षा के पैटर्न को निर्धारित करता है
    • जिससे फसलचक्र और जल संसाधन प्रभावित होते हैं.​
    • ठंडी हवाओं से सुरक्षा: हिमालय पिघलती ग्लेशियरों से भूगर्भीय उथल-पुथल भी तेज़ी से हो सकता है
    • ऊँचे क्षेत्र हिमालय को उत्तरी भारत को ठंडी चक्रीय हवाओं से बचाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं.​
    • जलवायु स्थिरता में योगदान: व्यापक रूप से यह क्षेत्र मध्य एशिया से आने वाली चरम मौसमी घटनाओं को रोकने और सुस्थिर जलवायु बनाने में योगदान देता है
    • जिससे कृषि और संसाधन प्रबंधन अधिक सक्षम रहते हैं.​
  • वैश्विक संदर्भ
    • हिमालय के संरक्षण और जलवायु संबंधी भूमिका पर शोध संकेत देते हैं
    • यह क्षेत्र जलवायु-निर्भर देशों के लिए अत्यंत निर्णायक है
    • मौसमी चरम घटनाओं के बढ़ते जोखिम के बावजूद जलवायु संतुलन बनाए रखने में अहम है.​
    • भू-वैज्ञानिक दृष्टि से भी हिमालय इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव से बना एक युवा पर्वत है
    • जिसका निर्माण और ध्रुवीय पारी में स्थित होने से जलवायु पर स्थायी प्रभाव पड़ता है.​
  • महत्वपूर्ण बिंदु (संक्षेप)
    • हिमालय जलवायु विभाजक के रूप में ठंडी हवाओं को रोकता है और मानसून के वितरण को नियंत्रित करता है.​
    • यह क्षेत्र भारतीय उपमहाद्वीप के लिए गर्मियों में ग्रीष्म उच्च दबाव और वर्षा वितरण के पैटर्न बनाने में सहायक है.​
    • जलवायु परिवर्तन और वन्यजीव/पारिस्थितिकी पर जोखिम के कारण हिमालय के संरक्षण और सतत प्रबंधन की महत्ता बढ़ती जा रही है.​

13. निम्नलिखित में से कौन-सी परिकल्पना वर्ष 1962 में हैरी हेमंड हेस (Harry Hammond Hess) द्वारा प्रतिपादित की गई थी? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) सागर नितल प्रसरण
Solution:
  • हेरी हेमंड हेस एक अमेरिकी भूविज्ञानी थे। इन्होंने वर्ष 1962 में सागर नितल प्रसरण परिकल्पना का प्रतिपादन किया था।
  • उत्तम विवरण
    • किस परिकल्पना के बारे में है: सागर तल प्रसरण का विचार यह था
    • महासागरीय क्रस्ट मध्य महाद्वीप-नदियों (mid-ocean ridges) से बनती है
    • बाहर की तरफ फैलती है और गहरे ट्रेंच में पुनः विलीन होकर समाप्त होती है
    • इससे महासागरीय क्रस्ट का निर्माण और विनाश दोनों क्रम से होता है।
    • यह विचार पृथ्वी की पटल-चालनाओं (tectonic plate motions) के तंत्र को समझने में प्रमुख भूमिका निभाता है.​​
    • ऐतिहासिक महत्त्व: 1960s में इस धारणा ने वेगनर की महाद्वीपीय बहाव की कहानी को एक निरीक्षण-समर्थित तंत्र दिया, और बाद में Vine–Matthews–Morley प्रमाणों के साथ Plate Tectonics के व्यापक सिद्धांत का आधार बना.​
  • अतिरिक्त पंक्ति-बद्ध संदर्भ (पुष्टि के लिए)
    • हैस की 1964-काल की प्रस्तुति और सागर तल प्रसरण का सिद्धांत प्रमुख भूविज्ञान स्रोतों में दर्ज है
    • जिसने प्लेट विवर्तनिकी के क्षेत्र में क्रांति ला दी.​​
    • उनके काम का संक्षेप में सार: महासागरीय कटकों पर गर्म मैग्मा ऊपर उठकर फैलता है
    • किनारों की ओर बढ़ते हुए महाद्वीपों के किनारों के पास ट्रेच में समाहित हो जाता है
    • इससे महासागरीय तल नया बनता है और महाद्वीपीय क्रस्ट पुरानी होती है.​​
  • संक्षेप में
    • वर्ष: 1964 में हैरी हेस ने सागर नितल प्रसरण की परिकल्पना दी
    • aइस विचार ने Plate Tectonics के आधार को मजबूत किया.​​