वैदिक काल (UPPCS) Part-1

Total Questions: 50

11. ऋग्वेद है- [U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016]

Correct Answer: (a) स्तोत्रों का संकलन
Solution:

ऋग्वेद का अर्थ है— 'ऐसा ज्ञान जो ऋचाओं (मंत्रों) में बद्ध हो'। इसमें देवताओं की स्तुति के लिए गाए जाने वाले मंत्रों का संकलन है। संरचनात्मक दृष्टि से, ऋग्वेद 10 मंडलों में विभाजित है, जिसमें कुल 1,028 सूक्त और लगभग 10,580 मंत्र (ऋचाएं) हैं। इसके दूसरे से सातवें मंडल सबसे पुराने माने जाते हैं, जिन्हें 'वंश मंडल' कहा जाता है। ऋग्वेद की विषय-वस्तु मुख्यतः धार्मिक और आध्यात्मिक है, जिसमें प्रकृति के विभिन्न रूपों जैसे अग्नि, इंद्र, वरुण और सूर्य की प्रार्थना की गई है। इसके अलावा, यह तत्कालीन आर्य समाज की राजनीतिक व्यवस्था, संस्कृति और भौगोलिक स्थिति (जैसे सप्त-सैंधव प्रदेश) को समझने का सबसे विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोत है।

12. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें एवं निम्न दिए हुए कूट में से सही उत्तर का चयन करें : [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2013]

सूची-Iसूची-II
(A) ऋग्वेद(i) गोपथ
(B) सामवेद(ii) शतपथ
(C) अथर्ववेद(iii) ऐतरेय
(D) यजुर्वेद(iv) पंचविश

कूट:

ABCD
(a)iviiiiii
(b)iiiviiii
(c)iiiiviii
(d)iiiiviii
Correct Answer: (c)
Solution:

सही सुमेलन इस प्रकार है-

Column AColumn B
ऋग्वेदऐतरेय
सामवेदपंचविश
अथर्ववेदगोपथ
यजुर्वेदशतपथ

13. निम्नलिखित में से कौन-सा ब्राह्मण ग्रंथ ऋग्वेद से संबंधित है? [M.P.P.C.S. (Pre) 2017]

Correct Answer: (a) ऐतरेय ब्राह्मण
Solution:

ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद की शाकल शाखा से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्राचीन वैदिक ग्रंथ है जिसके रचयिता महिदास ऐतरेय माने जाते हैं। यह 8 पंचिकाओं (खंडों) और 40 अध्यायों में विभाजित है जिसमें मुख्य रूप से होत्रकर्म (पुरोहितों के कार्य) सोम यज्ञ राज्याभिषेक के नियम और प्राचीन सामाजिक-भौगोलिक स्थितियां वर्णित हैं।

• गोपथ ब्राह्मण: यह अथर्ववेद का एकमात्र ब्राह्मण ग्रंथ है।
• शतपथ ब्राह्मण: यह शुक्ल यजुर्वेद का सबसे प्राचीन और सबसे विशाल ब्राह्मण ग्रंथ है।
• तैत्तिरीय ब्राह्मण: यह कृष्ण यजुर्वेद का प्रमुख ब्राह्मण ग्रंथ है।

14. 'गोपथ ब्राह्मण' संबंधित है- [U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014]

Correct Answer: (c) अथर्ववेद से
Solution:

गोपथ ब्राह्मण अथर्ववेद का एकमात्र उपलब्ध ब्राह्मण ग्रंथ है। वैदिक परंपरा में, 'ब्राह्मण' उन गद्य ग्रंथों को कहा जाता है जो वेदों के मंत्रों की व्याख्या और यज्ञीय कर्मकांडों का विधान करते हैं। इस ग्रंथ की रचना 'गोपथ' ऋषि द्वारा की गई मानी जाती है। यह दो भागों में विभाजित है— पूर्व गोपथ और उत्तर गोपथ। इसमें गायत्री मंत्र की महिमा, ओंकार का महत्व और विभिन्न प्रकार के यज्ञों (जैसे अश्वमेध और पुरुषमेध) के आध्यात्मिक और व्यावहारिक पहलुओं का वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ अथर्ववेद के दार्शनिक और लौकिक ज्ञान को समझने के लिए एक अनिवार्य कड़ी माना जाता है।

15. निम्नलिखित में से कौन शुक्ल यजुर्वेद की संहिता है? [U.P.P.C.S. (Pre) 2018]

Correct Answer: (a) वाजसनेयी
Solution:

यजुर्वेद को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है— शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद। शुक्ल यजुर्वेद को 'शुक्ल' (शुद्ध) इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें केवल मंत्रों का संकलन है, जबकि व्याख्यात्मक हिस्सा अलग है। इसकी मुख्य संहिता 'वाजसनेयि' कहलाती है, क्योंकि इसके प्रणेता महर्षि याज्ञवल्क्य के पिता का नाम 'वाजसनि' था। वाजसनेयि संहिता की भी दो मुख्य शाखाएँ प्रचलित हैं: काण्व और माध्यन्दिन। इस संहिता में कुल 40 अध्याय हैं और इसका अंतिम (40वाँ) अध्याय प्रसिद्ध ईशोपनिषद है। ऐतिहासिक और दार्शनिक दृष्टि से यह संहिता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यज्ञों के विधान के साथ-साथ उपनिषदों के गंभीर चिंतन की नींव भी रखती है।

• मैत्रायणी: यह कृष्ण यजुर्वेद की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जिसमें मंत्रों के साथ-साथ गद्य व्याख्याएं भी शामिल हैं।
तैत्तिरीय: यह कृष्ण यजुर्वेद की सबसे व्यापक और प्रसिद्ध शाखा है, जिससे 'तैत्तिरीय ब्राह्मण' और 'तैत्तिरीय उपनिषद' जुड़े हैं।
• काठक: इसे 'कठ' संहिता भी कहा जाता है, जिसका संबंध मुख्य रूप से पंजाब और कश्मीर क्षेत्र के वैदिक विद्वानों से रहा है।

16. ऋग्वेद का कौन-सा मंडल पूर्णतः 'सोम' को समर्पित है? [42nd B.P.S.C. (Pre) 1997]

Correct Answer: (c) नौवां मंडल
Solution:

ऋग्वेद का नौवां मंडल (IX Mandala) पूरी तरह से सोम देवता (सोम पावमान) को समर्पित है। इस मंडल के सभी 114 सूक्त, जो एक पवित्र पेय और देवता के रूप में सोम की स्तुति करते हैं, वैदिक अनुष्ठानों के दौरान गायन के लिए प्रयोग किए जाते हैं। इसे 'सोम मंडल' भी कहा जाता है।

• सातवां मंडल: इसकी रचना महर्षि वशिष्ठ ने की थी। यह मंडल मुख्य रूप से प्रसिद्ध 'दशराज्ञ युद्ध' (Battle of Ten Kings) के वर्णन के लिए जाना जाता है, जो परुष्णी (रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था।

• आठवां मंडल: यह मंडल कण्व ऋषि और अंगिरस ऋषि के वंशजों से संबंधित है। इसमें मिली ऋचाओं को 'खिल' कहा जाता है, जो पांडुलिपियों के अंत में जोड़े गए मंत्र माने जाते हैं।

• दसवां मंडल: यह ऋग्वेद का सबसे नवीन (बाद में जोड़ा गया) मंडल है। इसी में 'पुरुष सूक्त' शामिल है, जिसमें पहली बार चार वर्णों का उल्लेख मिलता है। इसमें 'नासदीय सूक्त' (ब्रह्मांड की उत्पत्ति) और 'विवाह सूक्त' भी मिलते हैं।

17. ऋग्वेद संहिता का नौवां मंडल पूर्णतः किसको समर्पित है? [40th B.P.S.C. (Pre) 1995]

Correct Answer: (d) सोम और इस पेय पर नामाकृत देवता
Solution:

ऋग्वेद के नौवें मंडल को 'पवमान मंडल' भी कहा जाता है। इसमें कुल 114 सूक्त हैं और पूर्णतः 'सोम' और इस पेय पर नामांकित देवताओं को समर्पित है। सोम एक प्रकार का पौधा था जिसका रस निकालकर धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों में उपयोग किया जाता था। ऋग्वेद के ऋषियों ने सोम को न केवल एक स्फूर्तिदायक पेय माना, बल्कि इसे एक दिव्य शक्ति (देवता) के रूप में भी पूजनीय बताया। इस मंडल की ऋचाओं में सोम रस के शोधन, उसे छाने जाने की प्रक्रिया और उसके दिव्य गुणों का अत्यंत काव्यमय वर्णन मिलता है। यह मंडल आर्यों के प्रकृति-प्रेम और उनके यज्ञीय विधानों की गहराई को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

18. 'यज्ञ' संबंधी विधि-विधानों का पता चलता है- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1999]

Correct Answer: (d) यजुर्वेद से
Solution:

'यज्ञ' संबंधी विधि-विधानों का पता यजुर्वेद से चलता है। यह वेद दो भागों में विभाजित है— शुक्ल यजुर्वेद (केवल मंत्र) और कृष्ण यजुर्वेद (मंत्रों के साथ व्याख्यात्मक गद्य)। यह एकमात्र ऐसा वेद है जो पद्य और गद्य (Prose and Poetry) दोनों में लिखा गया है। इसमें यज्ञीय वेदियों (Altars) के निर्माण के लिए गणितीय और ज्यामितीय माप का भी वर्णन मिलता है, जो प्राचीन भारतीय विज्ञान की उन्नति को दर्शाता है।

19. निम्नलिखित में से किसका संकलन ऋग्वेद पर आधारित है? [U.P.P.C.S. (Pre) 1997]

Correct Answer: (b) सामवेद
Solution:

सामवेद का संकलन पूर्णतः ऋग्वेद पर आधारित है। सामवेद को 'भारतीय संगीत का जनक' माना जाता है। इसमें कुल 1,875 ऋचाएं (मंत्र) हैं, लेकिन ऐतिहासिक तथ्य यह है कि इनमें से केवल 75 (कुछ विद्वानों के अनुसार 99) मंत्र ही मौलिक हैं; बाकी सभी ऋचाएं ऋग्वेद से ली गई हैं। सामवेद में ऋग्वेद के उन चुनिंदा मंत्रों को संकलित किया गया है जिन्हें यज्ञ के समय मधुर स्वर में गाया जा सकता था। इन मंत्रों के गायन करने वाले पुरोहित को 'उद्गातृ' कहा जाता था। अतः सामवेद का मुख्य उद्देश्य ऋग्वेद की ऋचाओं को गेय (संगीतबद्ध) रूप प्रदान करना था, ताकि वे अनुष्ठानों के दौरान प्रभावशाली ढंग से उच्चारित की जा सकें।

20. भारत के किस स्थल की खुदाई से लौह धातु के प्रचलन के प्राचीनतम प्रमाण मिले हैं? [U.P.P.C.S. (Pre) 1998]

Correct Answer: (b) अतरंजी खेड़ा
Solution:

अहिच्छत्र, अतरंजीखेड़ा, आलमगीरपुर, मथुरा, रोपड़, श्रावस्ती, काम्पिल्य आदि स्थलों की खुदाइयों से लौह युगीन संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए हैं। अतरंजीखेड़ा से लौह धातु मल तथा धातु शोधन में प्रयुक्त होने वाली भट्टियां मिली हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि यहां लौह धातु को गलाने का कार्य स्थानीय रूप से होता था।