Solution:अध्यात्म ज्ञान के विषय में नचिकेता और यमराज का प्रसिद्ध संवाद कठोपनिषद (जिसे कठ उपनिषद भी कहा जाता है) में मिलता है। इस उपनिषद में बालक नचिकेता अपने पिता के एक यज्ञ से उत्पन्न जिज्ञासा के कारण मृत्यु के देवता यमराज के पास पहुँचते हैं। यमराज नचिकेता की कठिन प्रतीक्षा और दृढ़ता से प्रसन्न होकर उन्हें तीन वरदान देते हैं, जिनमें से तीसरे वरदान के रूप में नचिकेता 'मृत्यु के बाद के रहस्य' और 'आत्मा के स्वरूप' का ज्ञान माँगते हैं। यमराज द्वारा दिया गया यह उपदेश ही कठोपनिषद का मुख्य आधार है, जिसमें आत्मा को अजन्मा और शाश्वत बताया गया है तथा शरीर की तुलना एक रथ से की गई है।
• बृहदारण्यक उपनिषद: यह सबसे विशाल और प्राचीन उपनिषद है, जिसमें प्रसिद्ध मंत्र "तमसो मा ज्योतिर्गमय" और 'अहं ब्रह्मास्मि' (मैं ही ब्रह्म हूँ) का उल्लेख मिलता है।
• छांदोग्य उपनिषद: यह सामवेद से संबंधित है और इसमें 'तत्त्वमसि' (वह तुम ही हो) के महावाक्य के साथ-साथ उद्दालक आरुणि और उनके पुत्र श्वेतकेतु का प्रसिद्ध संवाद मिलता है।
• केन उपनिषद: 'केन' (किसके द्वारा) शब्द से शुरू होने वाला यह उपनिषद इस प्रश्न पर केंद्रित है कि मन और प्राण को शक्ति देने वाली वह परम सत्ता (ब्रह्म) कौन है।