Solution:ऋग्वैदिक काल में 'निष्क' मुख्य रूप से गले (कंठ) में पहने जाने वाला एक सोने का आभूषण या हार था। यह एक चपटागोल और कीमती आभूषण होता था जो प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। हालांकि बाद के उत्तर-वैदिक काल में इसे एक प्रकार के सोने के सिक्के या मुद्रा के रूप में भी प्रयोग किया जाने लगा।
ऋग्वैदिक काल के प्रमुख आभूषण:
• कुरीर (Kurira): सिर पर धारण करने वाला एक प्रकार का आभूषण।
• कर्णशोभन: कानों में पहने जाने वाले झुमके या आभूषण।
• रुक्म (Rukma): यह भी गले या छाती पर पहने जाने वाला सोने का आभूषण था।
• अन्य आभूषण: चूड़ियाँ (बाजूबंद के रूप में), अंगूठियां (ज्योति), और मणियों की मालाएं प्रचलित थीं।