वैदिक काल (UPPCS) Part-2

Total Questions: 55

1. गोत्र शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम हुआ था- [U.P.P.C.S (Mains) 2005]

Correct Answer: (b) ऋग्वेद में
Solution:

'गोत्र' शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद (सबसे प्राचीन वेद) में मिलता है। ऋग्वैदिक काल (लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व) में इसका मूल अर्थ "गोष्ठ" या गायों को बाड़े में रखने के स्थान से था। बाद में उत्तर वैदिक काल में यह कुल या वंश के अर्थ में स्थापित हुआ।

2. पूर्व-वैदिक आर्यों का धर्म प्रमुखतः था- [I.A.S. (Pre) 2012]

Correct Answer: (c) प्रकृति पूजा और यज्ञ
Solution:

पूर्व-वैदिक या ऋग्वैदिक आर्यों का धर्म मुख्य रूप से प्रकृति की उपासना और यज्ञों के संपादन पर टिका था। वे मूर्तिपूजा या मंदिरों में विश्वास नहीं करते थे, बल्कि खुले आकाश के नीचे अग्नि के माध्यम से देवताओं को आहुति अर्पित करते थे। उनके धार्मिक विश्वासों में इंद्र (युद्ध और वर्षा के देवता) और अग्नि (मध्यस्थ देवता) का स्थान सर्वोपरि था। आर्यों का उद्देश्य आध्यात्मिक मोक्ष के बजाय पशुधन, लंबी आयु और युद्ध में विजय जैसे भौतिक लाभ प्राप्त करना था। इस काल में 'भक्ति' की अवधारणा विकसित नहीं हुई थी, बल्कि मंत्रों के शुद्ध उच्चारण और यज्ञ की विधि को ही धर्म का आधार माना जाता था।

3. ऋग्वेद काल में जनता निम्न में से मुख्यतया किसमें विश्वास करती थी? [U.P.P.C.S. (Pre) 1993]

Correct Answer: (d) बलि एवं कर्मकांड
Solution:

ऋग्वैदिक काल में जनता का मुख्य विश्वास बलि और कर्मकांडों में निहित था। यद्यपि वे प्रकृति के विभिन्न रूपों की उपासना करते थे, लेकिन उनकी पूजा का माध्यम मुख्य रूप से यज्ञ और स्तुति मंत्र थे। वे मंदिरों या मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं करते थे, बल्कि अग्नि को देवताओं का मुख मानकर उसमें आहुतियां (बलि) अर्पित करते थे। उनका यह विश्वास आध्यात्मिक शांति के बजाय सांसारिक लाभ जैसे— पशु, वीर पुत्र और युद्ध में विजय प्राप्त करने पर केंद्रित था। इस काल के धर्म में कर्मकांडों की प्रधानता थी, जहाँ मंत्रों के शुद्ध उच्चारण और यज्ञ की विधि को ही ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग माना जाता था।

4. प्रसिद्ध दस राजाओं का युद्ध किस नदी के तट पर लड़ा गया? [42nd B.P.S.C. (Pre) 1997]

Correct Answer: (d) परुष्णी
Solution:

प्रसिद्ध 'दस राजाओं का युद्ध', जिसे दाशराज्ञ युद्ध (Battle of the Ten Kings) भी कहा जाता है, परुष्णी (Parushni) नदी के तट पर लड़ा गया था। आधुनिक समय में इस नदी को रावी (Ravi) के नाम से जाना जाता है।
यह युद्ध ऋग्वैदिक काल की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना मानी जाती है, जिसका विस्तृत वर्णन ऋग्वेद के सातवें मंडल में मिलता है।

5. ऋग्वेद में उल्लिखित प्रसिद्ध 'दस-राजाओं' का युद्ध किस नदी के किनारे लड़ा गया था ? [U.P.P.C.S. (Mains) 2008]

Correct Answer: (a) परुष्णी
Solution:

ऋग्वेद में वर्णित ऐतिहासिक 'दाशराज्ञ युद्ध' प्राचीन परुष्णी (वर्तमान रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था। इस युद्ध में एक ओर भरत वंश के प्रतापी राजा सुदास थे, तो दूसरी ओर पाँच आर्य और पाँच अनार्य कबीलों का एक शक्तिशाली संघ था। इस संघर्ष का मुख्य धार्मिक कारण महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच की प्रतिद्वंद्विता थी। युद्ध के अंत में राजा सुदास को निर्णायक विजय प्राप्त हुई, जिससे उत्तर भारत में उनकी राजनीतिक सर्वोच्चता स्थापित हो गई। यह युद्ध न केवल सैन्य कौशल बल्कि कबीलाई राजनीति से आगे बढ़कर एक संगठित शासन की नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

6. निम्न में से किस नदी को ऋग्वेद में 'मातेतमा' 'देवीतमा' एवं 'नदीतमा' संबोधित किया गया है? [U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008]

Correct Answer: (b) सरस्वती
Solution:

ऋग्वैदिक काल में सरस्वती नदी को सबसे पवित्र और पूजनीय माना जाता था। जहाँ सिंधु नदी का वर्णन 'सर्वाधिक बार' आया है, वहीं सरस्वती को 'नदीतमा' (नदियों में उत्तम), 'देवीतमा' (सबसे श्रेष्ठ देवी) और 'मातेतमा' (सर्वश्रेष्ठ माँ) कहकर पुकारा गया है। ऋग्वेद के नदी सूक्त के अनुसार, यह नदी हिमालय से निकलकर समुद्र (राजपूताना के रेगिस्तान और कच्छ के रन के माध्यम से) तक बहती थी। कालांतर में भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण यह नदी विलुप्त हो गई, लेकिन वैदिक साहित्य में इसे ज्ञान, बुद्धि और पवित्रता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।

ऋग्वैदिक और पौराणिक नदियाँ
• सिंधु: सिन्धु (अब सिन्ध)
• झेलम: वितस्ता
• चेनाब: असिकनी
• रावी: परुष्णी
• ब्यास: विपाशा
• सतलुज: शुतुद्री
• गंडक: सदानीरा
• गोमल: गोमती
• स्वात: सुवास्तु
• घग्गर: सरस्वती/दृषद्वती

अन्य प्रमुख नदियाँ
• गंगा: भागीरथी/जाह्नवी (पौराणिक)
• यमुना: कालिंदी
• नर्मदा: रेवा
• ताप्ती: सूर्यपुत्री
• ब्रह्मपुत्र: लौहित्य

7. उस जनजाति का नाम बतलाइए, जो ऋग्वैदिक आर्यों के पंचजन से संबंधित नहीं है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2009]

Correct Answer: (d) किकट
Solution:

ऋग्वैदिक आर्यों के 'पंचजन' (पाँच प्रमुख जन/जनजातियाँ) में किकट (Kikat) या मत्स्य (Matsya) शामिल नहीं हैं। पंचजन में पुरु, यदु, तुर्वश, अनु और द्रुह्यु शामिल हैं। किकट को ऋग्वेद में अक्सर एक गैर-वैदिक या अनैतिक जनजाति के रूप में वर्णित किया गया है।

8. प्राचीन काल में आर्यों के जीविकोपार्जन का मुख्य साधन था- [U.P.P.C.S. (Pre) 1993]

Correct Answer: (a) कृषि
Solution:

आर्य संस्कृति मूलतः पशुपालक और कृषक संस्कृति रही है। ऋग्वेद में कई मंत्रों में कृषि तथा उसके कार्यकलापों का वर्णन है। अच्छी कृषि के लिए वर्षा की कामना की गई है तथा पशुओं को चराने और पालने का अनेक स्थलों पर वर्णन है। उत्तर वैदिक काल तो कृषि प्रधान संस्कृति ही था।

9. ऋग्वेद में उल्लिखित 'यव' शब्द किस कृषि उत्पाद हेतु प्रयुक्त किया गया है? [U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008]

Correct Answer: (a) जौ
Solution:

ऋग्वेद काल में 'यव' शब्द का प्रयोग जौ के लिए किया जाता था, जिसे उस युग की सबसे महत्वपूर्ण फसल माना जाता था। ऋग्वैदिक आर्यों की कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से इसी अनाज के इर्द-गिर्द घूमती थी। वे इसका उपयोग न केवल भोजन के रूप में करते थे, बल्कि देवताओं को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले यज्ञों में भी 'यव' की आहुति प्रमुखता से दी जाती थी। इस काल के साहित्य में चावल या गेहूँ जैसे अन्य अनाजों का स्पष्ट वर्णन नहीं मिलता, जिससे प्रमाणित होता है कि 'यव' ही उनकी प्रारंभिक कृषि संस्कृति का आधार था।

10. सूची-। एवं सूची-॥ को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए - [R.AS./R.T.S (Pre) 2021]

सूची-Iसूची-II
(A) व्रीहि(i) गन्ना
(B) मुदग(ii) चावल
(C) यव(iii) मूंग
(D) इक्षु(iv) जौ

कूट:

ABCD
(a)iiiiiiiv
(b)iviiiiii
(c)iiiiviii
(d)iiiiiivi

 

Correct Answer: (d)
Solution:

सही सुमेलन इस प्रकार है-

सूची-Iसूची-II
ब्रीहीचावल
मुद्गमूंग
यवजौ
इक्षुगन्ना