Solution:ऋग्वैदिक काल में सरस्वती नदी को सबसे पवित्र और पूजनीय माना जाता था। जहाँ सिंधु नदी का वर्णन 'सर्वाधिक बार' आया है, वहीं सरस्वती को 'नदीतमा' (नदियों में उत्तम), 'देवीतमा' (सबसे श्रेष्ठ देवी) और 'मातेतमा' (सर्वश्रेष्ठ माँ) कहकर पुकारा गया है। ऋग्वेद के नदी सूक्त के अनुसार, यह नदी हिमालय से निकलकर समुद्र (राजपूताना के रेगिस्तान और कच्छ के रन के माध्यम से) तक बहती थी। कालांतर में भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण यह नदी विलुप्त हो गई, लेकिन वैदिक साहित्य में इसे ज्ञान, बुद्धि और पवित्रता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
ऋग्वैदिक और पौराणिक नदियाँ
• सिंधु: सिन्धु (अब सिन्ध)
• झेलम: वितस्ता
• चेनाब: असिकनी
• रावी: परुष्णी
• ब्यास: विपाशा
• सतलुज: शुतुद्री
• गंडक: सदानीरा
• गोमल: गोमती
• स्वात: सुवास्तु
• घग्गर: सरस्वती/दृषद्वती
अन्य प्रमुख नदियाँ
• गंगा: भागीरथी/जाह्नवी (पौराणिक)
• यमुना: कालिंदी
• नर्मदा: रेवा
• ताप्ती: सूर्यपुत्री
• ब्रह्मपुत्र: लौहित्य