शासन प्रणाली (भाग-2) (भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन)

Total Questions: 30

1. कथन (A) : भारत की संघात्मक संरचना का मुख्य उद्देश्य इसकी बहुआयामी विविधताओं में से एक राष्ट्र का निर्माण करना और राष्ट्रीय एकता को संरक्षित करना था। [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2013]

कारण (R) : विविधताओं के समंजन से एक सशक्त, न कि कमजोर, भारतीय राष्ट्रीयता का निर्माण हुआ है।

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों अपने आप में सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 के तहत भारत राज्यों का संघ है, जिसमें वर्तमान में 28 राज्य तथा 8 संघ राज्य क्षेत्र हैं। संघात्मक संरचना में शक्तियों का बंटवारा संघ तथा राज्यों के मध्य किया गया है। संघ को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तियां प्रदान की गई हैं। भारत की संघात्मक संरचना का मुख्य उद्देश्य उसकी बहुआयामी विविधताओं में से एक राष्ट्र का निर्माण करना और राष्ट्रीय एकता को संरक्षित करना है, जिसके कारण विविधताओं के समंजन से एक सशक्त भारतीय राष्ट्र का निर्माण हुआ है। इस प्रकार प्रश्नगत कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या है।

2. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है [U.P.P.C.S. (Pre) 2020]

कथन (A) : भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की प्रकृति में 'निरंतरता एवं परिवर्तन' के तत्व मूर्त रूप में पाए जाते हैं।

कारण (R) : भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में निम्न राजनीतिक कार्यशैलियों जैसे - आधुनिक शैली, परंपरागत शैली तथा संत शैली के तत्व समाहित हैं।

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर चुनिए।

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
Solution:भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की प्रकृति में मौर्यकाल से लेकर आधुनिक युग तक अपने विशिष्ट तत्व मूर्त रूप में आज भी विद्यमान हैं। यद्यपि विभिन्न युगों एवं काल से निरंतर एवं परिवर्तनशील भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में आधुनिक शैली, परंपरागत शैली एवं संत शैली के तत्व समाहित हैं। स्पष्ट है कि कथन एवं कारण दोनों सत्य हैं तथा कारण कथन की पुष्टि करता है।

3. कथन (A): महिलाएं, दलित, निर्धन एवं अल्पसंख्यक समूह भारत में लोकतंत्र के सबसे बड़े दावेदार हैं। [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2013]

कारण (R) : भारत में लोकतंत्र अधिक आत्म-सम्मान की कामना का वाहक बनकर उभरा है।

Correct Answer: (a) दोनों (A) और (R) सत्य हैं तथा (R), (A) का एक मान्य स्पष्टीकरण है।
Solution:महिलाएं, दलित, निर्धन तथा अल्पसंख्यक समूह भारत में लोकतंत्र के सबसे बड़े दावेदार हैं, क्योंकि लोकतंत्र उनके व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा कर उनके आत्म-सम्मान तथा गरिमा को बढ़ाता है। इस प्रकार कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) इसकी सही व्याख्या भी करता है।

4. भारतीय संविधान के बृहद होने के कारण हैं- [U.P.P.C.S. (Pre) 1997]

Correct Answer: (e) उपर्युक्त सभी
Solution:भारत का संविधान विश्व का सबसे विस्तृत संविधान है। इसके बृहद रख्या होने का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि उपर्युक्त सभी कारणों से संविधान का स्वरूप बृहदाकार हो गया है। अतः सभी विकल्पों में कोई एक सत्य नहीं है, बल्कि सभी सत्य हैं।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? [38th B.P.S.C. (Pre) 1992]

Correct Answer: (a) संयुक्त राज्य अमेरिका में सरकार की संघीय प्रणाली है।
Solution:अमेरिका के संविधान में संघीय प्रणाली का स्पष्ट उल्लेख है। भारत के संविधान में भारत को राज्यों का संघ बताया गया है, किंतु संविधान के कतिपय प्रावधान राज्यों की अपेक्षा केंद्र को ज्यादा शक्तिशाली बनाने पर जोर देते हैं। इससे कुछ विद्वान भारत के संविधान को संघात्मक एवं एकात्मक प्रणालियों का मिश्रण मानते हैं, किंतु भारतीय संविधान एकात्मक प्रणाली का लक्षण लिए हुए मूल रूप से संघीय संविधान है, ऐसा मानना ज्यादा उचित है।

6. निम्नलिखित में से कौन-सी एक भारतीय संघ राज्य पद्धति की विशेषता नहीं है? [I.A.S. (Pre) 2017]

Correct Answer: (d) यह संघबद्ध होने वाली इकाइयों के बीच एक सहमति का परिणाम है।
Solution:भारतीय संघ राज्य पद्धति की विशेषताओं में लिखित संविधान का होना, संविधान की सर्वोच्चता, शक्तियों का विभाजन, स्वतंत्र न्यायपालिका, द्विसदनीय विधायिका, राज्यों का राज्य सभा में असमान प्रतिनिधित्व, द्विस्तरीय सरकार आदि शामिल हैं। जबकि भारतीय संघ की स्थापना संघबद्ध होने वाली इकाइयों के बीच किसी सहमति या समझौते द्वारा नहीं हुई है तथा भारतीय संघ से राज्यों (इकाइयों) को अलग होने का अधिकार नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में उल्लिखित है कि इंडिया अर्थात भारत, राज्यों का संघ होगा (India that is Bharat, shall be a Union of States)। अतः विकल्प (d) भारतीय - संघ राज्य पद्धति की विशेषता नहीं है। यह अमेरिकी संघवाद की विशेषता है।

7. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है - [U.P.P.C.S. (Pre) 2020]

कथन (A) : भारतीय संघात्मक व्यवस्था को 'अर्द्ध-संघात्मक' कहा जाता है।

कारण (R) : भारत में एक स्वतंत्र न्यायपालिका है, जिसे न्यायिक पुनर्निरीक्षण का अधिकार है।

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर चुनिए ।

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
Solution:भारत के संविधान का वर्णन विभिन्न प्रकार से किया गया है। इसे अर्द्ध-परिसंघीय कहा गया है। इसे परिसंघीय, किंतु प्रबल एकात्मक अथवा केंद्र समर्थक भी कहा गया है। संरचना में परिसंघीय, किंतु भावना में एकात्मक, सामान्य स्थिति में परिसंघीय, किंतु आपात स्थिति आदि के दौरान पूर्णतया एकात्मक रूप में परिवर्तित हो जाने के इसके गुण के कारण ही इसे अर्द्ध-संघात्मक कहा जाता है। भारतीय संविधान में स्वतंत्र न्यायपालिका का प्रावधान है तथा सर्वोच्च न्यायालय (एवं उच्च न्यायालयों) को न्यायिक पुनर्निरीक्षण की शक्ति प्राप्त है। संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों यथा अनुच्छेद 13, 32, 131, 136, 141, 143, 226, 227, 245, 246 तथा 372 आदि के उपबंध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्निरीक्षण की शक्ति प्रदान करते हैं। इस प्रकार, प्रश्नगत कथन एवं कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता।

8. कारण (A): भारतीय संविधान अर्द्ध-संघात्मक है। [U.P.P.C.S. (Pre) 2007]

कारण (R) : भारतीय संविधान न तो संघात्मक है और न ही एकात्मक। सही उत्तर का चयन नीचे दिए गए कूट की सहायता से कीजिए।

कूट :

Correct Answer: (a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:भारत के संविधान का वर्णन विभिन्न प्रकार से किया गया है। इसे अर्द्ध- परिसंघीय कहा गया है। इसे परिसंघीय किंतु प्रबल एकात्मक अथवा केंद्र समर्थक भी कहा गया है। इसे संरचना में परिसंघीय किंतु भावना में एकात्मक, सामान्य स्थिति में परिसंघीय किंतु आपात स्थिति आदि के दौरान पूर्णतया एकात्मक रूप में परिवर्तित किया जा सकने वाला कहा गया है। भारतीय संविधान मूलतः (Basically) संघात्मक है, परंतु उसमें केंद्रीयकरण की प्रवृत्ति प्रबल है। इस मत का समर्थन संविधानविद् दुर्गादास बसु भी करते हैं। वस्तुतः भारतीय संविधान न तो पूर्णतः संघात्मक है और न ही पूर्णतः एकात्मक और इसी कारण इसे अर्द्ध-संघात्मक कहा गया है।

9. भारतीय संविधान की प्रकृति क्या है? [63rd B.P.S.C. (Pre) 2017]

Correct Answer: (d) प्रकृति में संघीय किंतु भावना में एकात्मक
Solution:भारत के संविधान का वर्णन विभिन्न प्रकार से किया गया है। इसे अर्द्ध- परिसंघीय कहा गया है। इसे परिसंघीय किंतु प्रबल एकात्मक अथवा केंद्र समर्थक भी कहा गया है। इसे संरचना में परिसंघीय किंतु भावना में एकात्मक, सामान्य स्थिति में परिसंघीय किंतु आपात स्थिति आदि के दौरान पूर्णतया एकात्मक रूप में परिवर्तित किया जा सकने वाला कहा गया है। भारतीय संविधान मूलतः (Basically) संघात्मक है, परंतु उसमें केंद्रीयकरण की प्रवृत्ति प्रबल है। इस मत का समर्थन संविधानविद् दुर्गादास बसु भी करते हैं। वस्तुतः भारतीय संविधान न तो पूर्णतः संघात्मक है और न ही पूर्णतः एकात्मक और इसी कारण इसे अर्द्ध-संघात्मक कहा गया है।

10. भारतीय संघवाद को सहकारी संघवाद किसने कहा है? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2008]

Correct Answer: (a) जी. ऑस्टिन
Solution:भारतीय संविधान की प्रकृति संघात्मक है या एकात्मक, इसके संबंध में विद्वानों में मतभेद है। कुछ विद्वान इसे संघात्मक संविधान की संज्ञा देते हैं, जबकि कुछ विद्वान इसे एकात्मक संविधान मानते हैं। जी. ऑस्टिन के अनुसार, भारत का संविधान सहकारी परिसंघीय संविधान है, जबकि के.सी. व्हीयर के अनुसार, भारत का संविधान अर्द्ध-संघीय है