शासन प्रणाली (भाग-2) (भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन)

Total Questions: 30

11. किसने कहा था: "भारत अर्द्ध-संघात्मक राज्य है?" [U.P.P.S.C. (GIC) 2010 U.P. P.C.S. (Pre) 2019]

Correct Answer: (d) के.सी. व्हीयर
Solution:भारतीय संविधान की प्रकृति संघात्मक है या एकात्मक, इसके संबंध में विद्वानों में मतभेद है। कुछ विद्वान इसे संघात्मक संविधान की संज्ञा देते हैं, जबकि कुछ विद्वान इसे एकात्मक संविधान मानते हैं। जी. ऑस्टिन के अनुसार, भारत का संविधान सहकारी परिसंघीय संविधान है, जबकि के.सी. व्हीयर के अनुसार, भारत का संविधान अर्द्ध-संघीय है

12. भारतीय संविधान के विषय में निम्नलिखित कथन निम्न में से किसका है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2005]

"भारतीय संविधान अधिक कठोर तथा अधिक लचीले के मध्य एक अच्छा संतुलन स्थापित करता है।"

Correct Answer: (d) के.सी. व्हीयर
Solution:भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया के संदर्भ में भारतीय संविधान के लिए उपर्युक्त कथन के.सी. व्हीयर का है।

13. निम्नांकित में से किस एक का कथन है कि ' 'संविधान को संघात्मकता के तंग ढांचे में नहीं ढाला गया है?" [U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008]

Correct Answer: (c) बी. आर. अम्बेडकर
Solution:डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने यह स्वीकार किया था कि "संविधान को संघात्मकता के तंग ढांचे में नहीं ढाला गया है तथा यह एकीकृत और संघात्मक दोनों ही है।"

14. मिथकों और कहावतों के रूप में प्रशासन के सिद्धांतों को किसने अस्वीकार किया है? [Jharkhand P.C.S. (Pre) 2017]

Correct Answer: (a) हर्बर्ट साइमन
Solution:हर्बर्ट ए. साइमन ने मिथकों और कहावतों के रूप में प्रशासन के सिद्धांतों को असंगत और अस्पष्ट मानते हुए अस्वीकार किया है, जबकि ड्वाइट वाल्डो, फ्रैंक मेरिनी और एफ. डब्ल्यू. रिग्स ने मिथकों और कहावतों के रूप में प्रशासन के सिद्धांतों को स्वीकार किया है।

15. विधि और स्वाधीनता के बीच सबसे उपयुक्त संबंध को, निम्नलिखित में से कौन प्रतिबिम्बित करता है? [I.A.S. (Pre) 2018]

Correct Answer: (b) यदि विधि नहीं हैं, तो स्वाधीनता भी नहीं है।
Solution:"यदि विधि नहीं है, तो स्वाधीनता भी नहीं है।" यह कथन विधि तथा स्वाधीनता के मध्य सबसे उपयुक्त संबंध को दर्शाता है। स्वाधीनता का तात्पर्य विधि की पूर्ण अनुपस्थिति कदापि नहीं है। विधिशास्त्री जॉन लॉक के अनुसार, स्वाधीनता के अस्तित्व के लिए विधि का अस्तित्व जरूरी है। कानून ही स्वतंत्रता की रक्षा करता है। वे कहते हैं "जहां कोई कानून नहीं है, वहां कोई स्वतंत्रता नहीं है।"

16. निम्नांकित में से कौन विकास प्रशासन की अवधारणा से संबंधित है? [Jharkhand P.C.S. (Mains) 2016]

Correct Answer: (a) फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स
Solution:विकास प्रशासन की अवधारणाओं से फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स संबंधित हैं। अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "एडमिनिस्ट्रेशन डेवलपमेंट : इनक्लूसिव कॉन्सेप्ट" में उन्होंने लिखा है कि विकास प्रशासन उन कार्यक्रमों और परियोजनाओं को पूरा करने के संगठित प्रयासों से संबंधित है, जो विकास में संलग्न व्यक्तियों द्वारा प्रवर्तित किए जाते हैं।

17. निम्नांकित में से कौन-सा एक चिंतक लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन में समानताओं का समर्थक है? [Jharkhand P.C.S. (Mains) 2016]

Correct Answer: (d) हेनरी फेयोल
Solution:प्रसिद्ध प्रशासनिक चिंतक हेनरी फेयोल ने लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन में समानता का समर्थन किया है। इनके अनुसार, अब हमारे सामने अनेक प्रकार के प्रशासन विज्ञान नहीं हैं, अपितु केवल एक ही प्रशासन है, जिसे सार्वजनिक और निजी मामलों में समान रूप से उपयोग में लाया जा सकता है।

18. "यदि हमारी सभ्यता विफल होती है, तो यह मुख्यतः प्रशासन के ध्वस्त होने के कारण होगा।" यह कथन दिया गया है- [Jharkhand P.C.S. (Mains) 2016]

Correct Answer: (c) डब्ल्यू. बी. डॉनहम द्वारा
Solution:डब्ल्यू. बी. डॉनहम ने कहा था कि "यदि हमारी सभ्यता असफल होती है, तो ऐसा मुख्यतया प्रशासन के पतन के कारण होगा।"

19. गणतंत्रीय अवधारणा से संबंधित निम्नांकित में से कौन एक नहीं है? [U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010]

Correct Answer: (c) सर्वोच्च शक्ति एक राजा के समान (एक ही) व्यक्ति में निहित हो
Solution:विकल्प (c) गणतंत्रीय अवधारणा से संबंधित नहीं है, जबकि अन्य विकल्पों में प्रस्तुत तथ्य गणतंत्रीय अवधारणा (निर्वाचित लोकतंत्रीय प्रणाली) के ही प्रारूप हैं।

20. निम्नलिखित में से किनको "विधि के शासन" के प्रमुख लक्षणों के रूप में माना जाएगा? [I.A.S. (Pre) 2018]

1. शक्तियों का परिसीमन

2. विधि के समक्ष समता

3. सरकार के प्रति जन-उत्तरदायित्व

4. स्वतंत्रता और नागरिक अधिकार

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

Correct Answer: (c) केवल 1, 2 और 4
Solution:प्रो. डायसी ने 1885 ई. में अपनी पुस्तक "द लॉ ऑफ कांस्टीट्यूशन' में विधि के शासन के निम्न तीन लक्षण दिए -

(1) विधि की सर्वोपरिता इसका तात्पर्य है कि विधि सर्वोच्च है तथा राज्य की या व्यक्ति की स्वेच्छाचारिता का अभाव होना अर्थात किसी भी व्यक्ति को केवल विधि के उल्लंघन हेतु दंडित किया जा सकता है, अन्य किसी हेतु नहीं। स्वेच्छाचारिता का अभाव शक्तियों के परिसीमन के रूप में प्रतिबिंबित होता है।

(2) विधि के समक्ष समता अर्थात विधि के लिए सभी समान हैं और कोई भी विधि से ऊपर नहीं है।

(3) विधिक भावना की प्रबलता (Predominance of Legal Spirit)- इसका तात्पर्य है कि संविधान के सामान्य सिद्धांत व्यक्तियों के अधिकार, स्वतंत्रताओं का निर्धारण करने वाले न्यायिक विनिश्चयों का परिणाम है। सरकार के प्रति जन-उत्तरदायित्व विधि के शासन का लक्षण नहीं है। अतः स्पष्ट है कि विकल्प (c) सही उत्तर है।