शासन प्रणाली (भाग-2) (भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन)

Total Questions: 30

21. निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन किसी देश के 'संविधान' के मुख्य प्रयोजन को सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करता है? [I.A.S. (Pre) 2023]

Correct Answer: (c) यह सरकार की शक्तियों को परिभाषित और सीमाबद्ध करता है।
Solution:किसी देश के संविधान का मुख्य उद्देश्य सरकार की प्रकृति और स्वरूप की एक रूपरेखा तैयार करना है। संविधान देश में सरकार के आधारभूत सिद्धांतों, संरचना एवं प्रकार्यों की स्थापना के साथ व्यक्तियों के अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं को परिभाषित करता है। चूंकि संविधान में किसी देश के बुनियादी मौलिक कानून निहित होते हैं। अतः यह सरकार के विभिन्न अंगों यथा- विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के उत्तरदायित्व भी निर्धारित करता है। विधायिका संविधान में दिए गए निर्देशों एवं सीमाओं को ध्यान में रखते हुए कानून का निर्माण करती है। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता है कि किसी देश के संविधान का मुख्य प्रयोजन सरकार की शक्तियों को परिभाषित एवं सीमाबद्ध करना है।

22. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : [I.A.S. (Pre) 2014]

सवैधानिक सरकार वह है-

1. जो राज्य की सत्ता के हित में व्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभावकारी प्रतिबंध लगाती है।

2. जो व्यक्ति की स्वतंत्रता के हित में राज्य की सत्ता पर प्रभावकारी प्रतिबंध लगाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct Answer: (b) केवल 2
Solution:संवैधानिक सरकार में सरकार की शक्ति का स्रोत संविधान होता है। संवैधानिक सरकार व्यक्ति की स्वतंत्रता के हित में राज्य की सत्ता पर प्रभावकारी प्रतिबंध लगाती है। वस्तुतः राज्य की निरंकुश सत्ता से व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हितों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ही ब्रिटेन और अमेरिका में संविधानवाद का उदय हुआ। एक संवैधानिक सरकार में नागरिकों की स्वतंत्रताओं के संरक्षण हेतु संस्थागत क्रियाविधियां भी विद्यमान रहती हैं।

23. परिभाषा से, संवैधानिक सरकार का अर्थ है- [I.A.S. (Pre) 2020]

Correct Answer: (d) सीमित सरकार
Solution:परिभाषा से संवैधानिक सरकार का अर्थ है- सीमित सरकार। इसका तात्पर्य है कि सरकार एवं इसके तीनों अंग विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका का स्रोत संविधान है तथा ये संविधान में निहित उपबंधों के अधीन कार्य करते हैं। संविधान, सरकार द्वारा अपने नागरिकों पर लागू किए जाने वाले कानूनों और नीतियों पर कुछ सीमाएं लगाता है। ये सीमाएं इस रूप में मौलिक होती हैं कि सरकार कभी उसका उल्लंघन नहीं कर सकती।

24. सांविधानिक सरकार का आशय क्या है? [I.A.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (d) कोई सरकार, जो संविधान की सीमाओं से परिबद्ध हो
Solution:सांविधानिक सरकार से आशय ऐसी सरकार से है, जो कि संविधान की सीमाओं से परिबद्ध हो। सांविधानिक सरकार की शक्तियां संविधान के तहत परिसीमित होती हैं तथा सरकार अपने प्राधिकार या शक्तियों के प्रयोग में संविधान की मौलिक संरचना का उल्लंघन नहीं कर सकती है। सांविधानिक सरकार की व्यवस्था में सरकार (यथा-भारत में केंद्र एवं राज्य सरकारों) के प्राधिकार का स्रोत संविधान होता है।

25. राज्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस एक को आप स्वतंत्रता की सर्वाधिक उपयुक्त व्याख्या के रूप में स्वीकार करेंगे? [I.A.S. (Pre) 2019]

Correct Answer: (d) स्वयं को पूर्णतः विकसित करने का अवसर
Solution:राज्य व्यवस्था के संदर्भ में स्वतंत्रता का अर्थ व्यक्ति पर बाहरी प्रतिबंधों के अभाव के साथ व्यक्ति की आत्म-अभिव्यक्ति की योग्यता का विस्तार करना और उसके अंदर की संभावनाओं को विकसित करना है। राजनीतिक शासकों की तानाशाही के विरुद्ध संरक्षण, नियंत्रण का अभाव एवं इच्छानुसार कुछ भी करने का अवसर स्वतंत्रता के पहलू हैं, परंतु ये पूर्णतः एवं उपयुक्त अर्थ में स्वतंत्रता की व्याख्या नहीं करते हैं। वस्तुतः किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा पर उस समय प्रतिबंध लगाना अनिवार्य हो जाता है, जब वह दूसरों की स्वतंत्रता को बाधित करने लगते हैं। नियंत्रण का अभाव एवं इच्छानुसार कुछ भी करने का अवसर के अंतर्गत किए गए कार्य यदि दूसरों पर असर डालते हैं या इनसे बाकी लोग प्रभावित होते हैं, तो उनकी स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

वहीं स्वयं को पूर्णतः विकसित करने का अवसर स्वतंत्रता की वह स्थिति है, जिसमें लोग अपनी रचनात्मकता और क्षमताओं का विकास करते हैं। इस अर्थ में स्वतंत्रता व्यक्ति की रचनाशीलता, संवेदनशीलता और क्षमताओं के भरपूर विकास को बढ़ावा देती है। यह विकास खेल, विज्ञान, कला, संगीत या अन्वेषण जैसे किसी भी क्षेत्र में हो सकता है।

26. समाज में समानता के होने का एक निहितार्थ यह है कि उसमें- [I.A.S. (Pre) 2017]

Correct Answer: (a) विशेषाधिकारों का अभाव है।
Solution:समानता का एक सामान्य अर्थ यह हुआ कि रंग, नस्ल, धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता और किसी व्यक्ति को विशेषाधिकार नहीं दिया जा सकता। अतः समाज में समानता के होने का एक निहितार्थ यह है कि उसमें विशेषाधिकारों का अभाव है।

27. भारत एवं अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्थाओं के बीच निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषताएं समान हैं? [U.P. P.C.S. (Pre) 2017]

1. अवशिष्ट शक्तियां केंद्र के पास हैं।

2. अवशिष्ट शक्तियां राज्यों के पास हैं।

3. राष्ट्रपति के पास पॉकेट वीटो की शक्ति है।

4. उच्च सदन में कुछ मनोनीत सदस्य होते हैं।

Correct Answer: (a) केवल 3
Solution:9 किसी विधेयक पर कोई भी कार्यवाही (सकारात्मक या नकारात्मक) न करने की राष्ट्रपति की शक्ति 'पॉकेट वीटो' के रूप में जानी जाती - है। भारतीय राष्ट्रपति तथा अमेरिकी राष्ट्रपति दोनों ही पॉकेट वीटो की शक्ति रखते हैं। यद्यपि अमेरिकी राष्ट्रपति की यह शक्ति भारतीय राष्ट्रपति की इस शक्ति के सापेक्ष छोटी है, क्योंकि उसे विधेयक पर कोई कार्यवाही न किए जाने की स्थिति में 10 दिन में विधेयक को वापस करना होता है, जबकि भारतीय संविधान में राष्ट्रपति हेतु ऐसी किसी समयावधि का उल्लेख नहीं है। भारत तथा अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्थाओं के बीच 'पॉकेट वीटो की शक्ति' विशेषता ही समान है। भारत में अवशिष्ट शक्तियां केंद्र के पास तथा अमेरिका में राज्यों के पास हैं। अमेरिका के उच्च सदन में सभी सदस्य प्रत्यक्षतः निर्वाचित होते हैं, जबकि भारत में उच्च सदन (राज्य सभा) में राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्य मनोनीत किए जाते हैं। अतः विकल्प (a) अभीष्ट उत्तर है।

28. दूसरे प्रशासनिक आयोग के कौन-से प्रतिवेदन ने भारत में सुशासन की बाधाओं की पहचान की है? [Jharkhand P.C.S. (Pre) 2017]

Correct Answer: (b) नागरिक-केंद्रित प्रशासन शासन का केंद्र बिंदु
Solution:द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग के प्रतिवेदन संख्या 12 'नागरिक-केंद्रित प्रशासन : शासन का केंद्र बिंदु' (Citizen Centric Administration : The Heart of Governance) में भारत में सुशासन की बाधाओं की पहचान की गई है तथा सुशासन के लिए आवश्यक पूर्व-शर्तों का उल्लेख है।

29. भारतीय संघवाद में 'विविधताओं में एकता' को प्रोन्नत करने हेतु निम्नलिखित में से किन संस्थानों को आवश्यक माना गया है? [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2016]

Correct Answer: (d) उपरोक्त सभी
Solution:भारतीय संघवाद में विविधताओं में एकता को प्रोन्नत करने हेतु उपरोक्त सभी संस्थानों को आवश्यक माना गया है। अंतरराज्य परिषद तथा राष्ट्रीय विकास परिषद, वित्त आयोग एवं क्षेत्रीय परिषद, एकल न्यायिक व्यवस्था एवं अखिल भारतीय सेवाएं भारतीय संघवाद में विविधताओं में एकता प्रोत्साहित करते हैं, जिससे संघ और राज्य आपस में जुड़े रहते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 में अंतरराज्य परिषद का उल्लेख है, राज्यों के आपस में अथवा संघ से विवाद की स्थिति में राष्ट्रपति द्वारा अंतरराज्य परिषद का गठन किया जाता है। योजनाओं के निर्माण में राज्यों की भागीदारी के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद की स्थापना की जाती है, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री तथा सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री होते हैं। संघ और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों, के वितरण तथा भारत की संचित निधि में से राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान को शासित करने आदि के लिए अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति द्वारा वित्त आयोग की स्थापना की जाती है। केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के आपसी मतभेदों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विचार-विमर्श के माध्यम से सुलझाने के लिए क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की जाती है। भारत में एकल न्यायिक व्यवस्था को अपनाया गया है, जिसमें उच्चतम न्यायालय सर्वोच्च है और इसके द्वारा दिया गया निर्णय सर्वमान्य एवं अंतिम होता है। अनुच्छेद 312 में अखिल भारतीय सेवाओं का उल्लेख किया गया है, जो संघ और राज्यों दोनों के लिए है।

30. निम्नलिखित में से किस दशक में भारत की संसदात्मक व्यवस्था केंद्रीयता से संघवाद की ओर खिसकी ? [U.P. P.C.S. (Spl.) (Mains) 2008]

Correct Answer: (b) 1970 के दशक में
Solution:यद्यपि 1960 के दशक से ही देश में विभिन्न राज्यों में विपक्ष का उभार होने लगा था और कुछ राज्य कांग्रेस के हाथ से निकल भी गए थे, परंतु वास्तव में भारत में संसदात्मक व्यवस्था केंद्रीयता से संघवाद की ओर 1970 के दशक (1970-79) में खिसकी, जबकि बहुत से राज्यों में कांग्रेस पार्टी का बहुमत नहीं रहा।