शैव तथा भागवत धर्म (प्राचीन भारतीय इतिहास)

Total Questions: 4

1. भक्ति संत, नयनार (Nayanars) निम्नलिखित में से किस देवता के भक्त थे ? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) शिव
Solution:नयनार संत दक्षिण भारत में 6वीं से 9वीं शताब्दी ईस्वी के बीच के शैव कवि-संत थे। वे भगवान शिव के अनन्य भक्त थे।
  • उनके भजनों और कविताओं ने भारत में भक्ति आंदोलन के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई नयनारों की संख्या 63 मानी जाती है।
  • उन्होंने तमिल भाषा में भक्ति गीत (जिन्हें बाद में तेवारम और तिरुवाचकम जैसे संग्रहों में संकलित किया गया) गाए, जो शैव भक्ति परंपरा का आधार बने।
  • नयनार राजा, रानी, व्यापारी और किसान सहित जीवन के सभी क्षेत्रों से आए थे।
  • वे शिव के प्रति अपने गहरे प्रेम और भक्ति से एकजुट थे।
  • नयनारों के भजन और कविताएँ तमिल साहित्य के बारह खंडों के एक सिद्धांत, तिरुमुरई में एकत्र किए गए हैं।
  • तिरुमुराई को हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण पवित्र ग्रंथों में से एक माना जाता है।
  • नयनारों के भजन शिव और उनके कई रूपों की प्रशंसा से भरे हुए हैं। वे नयनारों की शिव भक्ति के अपने व्यक्तिगत अनुभवों का भी वर्णन करते हैं।
  • जिन्होंने भक्ति आंदोलन को अपने भक्ति उपदेशों, काव्य अभिव्यक्तियों और ईश्वर के प्रति गहरे समर्पण के माध्यम से आगे बढ़ाया।
  •  इस काल में अनुष्ठानिक पूजा से अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक भक्ति की ओर परिवर्तन हुआ, जिसने तमिलनाडु की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समृद्ध किया।

2. अलवार किस दक्षिण भारतीय पंथ के अनुयायी थे ? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) वैष्णव
Solution:अलवार संत दक्षिण भारत में 6वीं से 9वीं शताब्दी ईस्वी के बीच के वैष्णव कवि-संत थे।
  • वे भगवान विष्णु और उनके विभिन्न अवतारों, विशेषकर कृष्ण और राम के प्रति समर्पित थे। उनकी कविता और भजनों ने दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उनके भक्ति गीतों को सामूहिक रूप से दिव्य प्रबंधन में संकलित किया गया है, जो वैष्णव भक्ति परंपरा का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
  • उनकी शिक्षाओं में स्वयं को ईश्वर के प्रति समर्पित करने के महत्व पर जोर दिया गया और उन्होंने जाति-आधारित भेदभाव के विचार को खारिज कर दिया।
  • आलवारों के दो प्रकार के नाम मिलते हैं-एक तमिल, दूसरे संस्कृत नाम। इनकी स्तुतियों का संग्रह नालायिरप्रबंधम्‌ (4,000 पद्य) के नाम से विख्यात है
  • जो भक्ति, ज्ञान, प्रेम सौंदर्य तथा आनंद से ओतप्रोत आध्यात्मिकता की दृष्टि से यह संग्रह '"तमिलवेद"' की संज्ञा से अभिहित किया जाता है।
  • अलवारों की संख्या 12 मानी जाती है।
  • आलवारों के दोनों प्रकार के नाम हैं-(1) सरोयोगी (पोयगैआलवार), (2) भूतयोगी (भूतत्तालवार), (3) महत्योगी (पेय आलवार), (4) भक्तसागर (तिरुमडिसै आलवार), (5) शठकोप या परांकुश मुनि (नम्म आलवार), (6) मधुर कवि, (7) कुलशेखर, (8) विष्णुचित्त (परि आलवार), (9) गोदा या रंगनायकी (आंडाल), (10) विप्रनारायण या भक्तपदरेणु (तोंडर डिप्पोलि), (11) योगवाह या मुनिवाहन (तिरुप्पन), (12) परकाल या नीलन्‌ (तिरुमंगैयालवार)।

Other Information


  • शक्तिवादः-
    • यह हिंदू धर्म का एक संप्रदाय है जो परमात्मा के स्त्री पहलू की पूजा करता है।
  • शैववादः-
    • यह एक संप्रदाय है जो भगवान शिव की पूजा करता है।
  • जैन धर्म:-
    • यह एक अलग धर्म है जिसकी उत्पत्ति भारत में हुई और यह अहिंसा और आध्यात्मिक शुद्धता के महत्व पर जोर देता है।

3. भक्ति संत अंडाल, निम्नलिखित धार्मिक संप्रदायों में से किससे संबंधित थीं ? [कांस्टेबल GD 18 फरवरी, 2019 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) वैष्णव
Solution:
  • भक्ति संत अंडाल दक्षिण भारत की अकेली महिला अलवार संत थीं।
  • चूँकि अलवार संत वैष्णव संप्रदाय से संबंधित थे, इसलिए अंडाल भी वैष्णव संप्रदाय से संबंधित थीं।
  • वह भगवान विष्णु (रंगनाथ) की परम भक्त थीं और उन्हें देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।
  • उनकी रचनाएँ, विशेषकर तिरुप्पावै, दक्षिण भारतीय भक्ति साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

4. विष्णु के पांचवें अवतार को ................रूप में जाना जाता है। [CHSL (T-1) 16 अक्टूबर, 2020 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) वामन
Solution:हिंदू धर्म में, भगवान विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) में से पांचवें अवतार को वामन के रूप में जाना जाता है। वामन एक बौने ब्राह्मण बालक का रूप थे, जिन्होंने राक्षस राजा बलि से तीन पग भूमि मांगकर, छल से, स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल पर नियंत्रण वापस स्थापित किया था।
क्रमअवतारयुग
पहलामत्स्यसतयुग
दूसराकूर्मसतयुग
तीसरावराहसतयुग
चौथानरसिंहसतयुग
पांचवावामनत्रेता
छठापरशुरामत्रेता
सातवाँरामत्रेता
आठवांकृष्णद्वापर
नौवांबुद्धकलियुग
दसवांकल्किकलियुग