संविधान का स्त्रोत (भारतीय राजव्यवस्था)

Total Questions: 16

1. भारतीय संविधान की निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता कनाडा के संविधान से नहीं ली गई है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) समवर्ती सूची
Solution:
  • भारतीय संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) की विशेषता कनाडा के संविधान से नहीं ली गई है। यह प्रावधान ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया है।
  • कनाडा के संविधान से भारत ने एक मजबूत केंद्र वाला संघीय ढाँचा, केंद्र द्वारा राज्य के राज्यपालों की नियुक्ति और सर्वोच्च न्यायालय का सलाहकार क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 143) जैसी प्रमुख विशेषताओं को अपनाया है। ये सभी प्रावधान भारत में एक मजबूत केंद्र सरकार और राज्यों पर केंद्र के प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • संविधान का प्रश्न: भारतीय संविधान में कौन-सी विशेषता कनाडा के संविधान से नहीं ली गई है?
  • “केंद्र बनाम राज्य के संबंधों में एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका” जैसे कुछ पहलुओं के बारे में अध्ययन में दावा किया जाता है कि भारतीय संविधान में बहुधा अन्य देशों से प्रेरणा ली गई है
  • किन्तु कनाडा से सीधे-सीधे ली गई एक स्पष्ट-सीधी अंगिकता नहीं मानी जाती। इस प्रश्न के लिए सही विकल्प पर निर्भर मुख्य संदर्भ यह है
  • भारतीय संविधान ने संघीय ढांचे, प्रेस-नियमन, आपातकालीन प्रावधान, आदि की प्रेरणा विभिन्न देशों से ली है; कनाडा से सीधे तौर पर कौन-सा प्रावधान लिया गया, यह पूछा गया था
  • ऐतिहासिक-स्रोतों के अनुसार अधिकांश संरचना ब्रिटेन के संविधान और अन्य अभिलेखों से अधिक प्रभावित मानी जाती है। इसलिए कनाडा से नहीं ली गई विशेषता के रूप में अक्सर “ब्रिटिश-उत्पत्ति” वाले और भारतीय संकल्पनाओं के साथ तुलनात्मक रूप से कनाडा से सीधे प्रेरणा नहीं मानी जाने वाली बातों को उद्धृत किया जाता है ।​
  • भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं
    • इसे विश्व के सबसे बड़े लिखित संविधान में गिना जाता है, जिसका मसौदा 1949 में पारित हुआ और 1950 से लागू हुआ ।​
    • इसका संघीय-प्रकृति (कई लेखकों के अनुसार संरचना “संघ-भाव” के साथ एकीकृत एकात्मक दृष्टिकोण, अन्य देशों की प्रेरणा के साथ मिश्रण) पर बहस है; कई विश्लेषक इसे “रास्ते में संघीयता” (federal in form, but unitary in spirit) कहकर भी देखते हैं ।​
    • संसदीय संप्रभुता, स्वतंत्र न्यायपालिका, लिखित संविधान, bevoegd अधिकार, आपातकालीन प्रावधान आदि इसकी सामान्य विशेषताएं मानी जाती हैं ।​
  • कनाडा से सीधे लिया गया कौन-सा प्रावधान
    • साक्षारण स्रोतों के अनुसार भारतीय संविधान ने कानूनी-आयातनों पर विचार किया, पर कनाडा से एक स्पष्ट-वस्तुनिष्ठ “प्रावधान” जिसे सीधे लिया गया कहा जाए, ऐसा एक तय सूची उपलब्धता के कारण स्पष्ट नहीं माना जाता।
    • स्रोत कई बार बताते हैं कि भारत के स्रोत ब्रिटेन, भारत सरकार अधिनियम 1935, अमेरिका, आयरलैंड आदि थे, जबकि कनाडा का संदर्भ उद्धृत करने पर बहस रहती है; इस कारण एक “सिर्फ कनाडा से लिया गया प्रावधान” वाला चयन आम तौर पर विवादित रहता है ।​
    • यदि आप चाहें, मैं आपके लिए निम्न चीजें साफ-साफ कर सकता/सकती हूँ:
    • भारतीय संविधान के स्रोत-रूप और कनाडा के संविधान के बीच स्पष्ट तुलनात्मक सूची बनाकर बताऊँ कि कौन-सी धाराओं को कनाडा से सीधे लिया गया माना गया है या नहीं माना गया।
    •  ताकि चयन-पत्र में सही विकल्प पर आप जल्दी पहुँच सकें।
    • कनाडा के संविधान से भारतीय संविधान से जुड़े तथ्यों के मानक उद्धरणों के साथ संक्षिप्त संदर्भ-रेखांकन (citations) दें।
    • प्रस्तावित स्रोत-उद्धरण (तथ्यों के आधार):
    • भारतीय संविधान की प्रमुखताओं और संरचना के सामान्य वर्णन के लिए:, ।​
    • भारतीय संविधान के स्रोतों और कनाडा से सीधे लिया गया भाग पर बहस के लिए:, ।​
    • यदि चाहें, मैं एक संक्षिप्त मल्टी-चॉइस क्विजी प्रश्न भी बना सकता/सकती हूँ ताकि आप परीक्षा-तैयारी के लिए सीधे उपयोग कर सकें।

2. भारतीय संविधान में समवर्ती सूची की अवधारणा ....... से ली गई थी। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) ऑस्ट्रेलिया
Solution:
  • समवर्ती सूची (Concurrent List) की अवधारणा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से ली गई है। इस सूची में वे विषय शामिल हैं जिन पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को कानून बनाने का अधिकार होता है (जैसे शिक्षा, वन, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण)।
  • सूची प्रणाली (संघ, राज्य और समवर्ती) के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण भारतीय संघीय ढाँचे की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसका विचार भारत सरकार अधिनियम, 1935 से भी लिया गया है।
  • समवर्ती सूची क्या है
    • समवर्ती सूची वह विषयों की सूची है जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। लेकिन जब संबंधित कानूनों के बीच टकराव होता है, तब केंद्रीय कानून वरीय रहता है। यह व्यवस्था संघीय संरचना के भीतर साझा शासन के सिद्धांत को दर्शाती है।
    • सातवीं अनुसूची में समवर्ती सूची का उल्लेख किया गया है और इससे केंद्र-राज्य दोनों को विधि-निर्माण के अधिकार प्राप्त होते हैं।
    • समवर्ती सूची के विषय समय के साथ संशोधन के माध्यम से बढ़ते-घटते रहते हैं, ताकि आधुनिक राज्य के आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सके।
  • प्रमुख बिंदु और ऐतिहासिक संदर्भ
    • समवर्ती सूची ऑस्ट्रेलिया के संविधान से प्रेरित है, जहां संघ-राज्य के बीच सहयोग और साझा शक्तियों की प्रणाली स्पष्ट रूप से स्थापित है।
    • यह संदर्भ भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान नीति-निर्माणकों के लिए एक मॉडल बन गया। इसी कारण भारत ने भी समवर्ती सूची को अपनाया और इसे संविधान की संरचना में समाहित किया। [उद्धरण: नागरिक अध्ययन/संविधान-संहिता, अनुक्रमणिका]
    • शुरुआती संस्करणों में समवर्ती सूची में बहुधा कृषि, वाणिज्य, शिक्षा आदि विषय थे; समय के साथ इसमें परिवर्तन और विस्तार भी हुए ताकि केंद्रीय और राज्य सरकारों के विवेक और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों के बीच संतुलन बना रहे।
    • केंद्र-राज्य संबंधों में विवाद/टकराव की स्थिति में अक्सर केंद्र का कानून प्रभावी माना गया है, जिससे एक निरंतर और स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा बना रहता है।
  • धारणा के विषय (उल्लेखित मुख्य बिंदु)
    • समवर्ती सूची के विषय वस्तु आम तौर पर कानून बनाने के लिए सामान्यतः साझा अधिकार देता है, पर केंद्र के कानून को प्रमुखता मिलती है जब दोनों के कानूनों में प्रत्यक्ष विरोध होता है।
    • विषय-वस्तु का चयन और संशोधन प्रक्रिया संविधान के भीतर अनुच्छेदों के माध्यम से संचालित होती है, जिसमें संसद द्वारा अधिनियम बनाकर आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं।
    • समवर्ती सूची की धारणा से जुड़ी आधुनिक बहसों में प्रशासनिक दक्षता, निष्पादन की गति, और केंद्र-राज्य समन्वय के उपाय शामिल होते हैं, ताकि नीति-निर्माण अधिक प्रभावी हो सके।
  • तुलना—संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची
    • संघ सूची: केंद्र के अधिकार, कानून केवल केंद्र बनाता है।
    • राज्य सूची: राज्य के अधिकार, कानून केवल राज्य बनाते हैं।
    • समवर्ती सूची: केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं; केंद्रीय कानून वरीय होता है।
    • संवैधानिक स्थापना और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार, समवर्ती सूची विषयों पर राष्ट्रीय नीति और राज्य-स्तरीय अनुकूलन का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
    • समवर्ती सूची को समय-समय पर संशोधित किया गया है ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि जैसे आधुनिक क्षेत्रों के लिए पर्याप्त शासन संरचना मिल सके।

3. भारत ने राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (डीपीएसपी) को ....... संविधान से ग्रहीत किया था। [CHSL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) आयरिश
Solution:
  • भारत ने राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) को आयरलैंड के संविधान से ग्रहीत किया था। ये सिद्धांत संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में शामिल हैं और इनका उद्देश्य भारत में एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना करना है।
  • ये सिद्धांत सरकार के लिए सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में कार्य करते हैं, हालाँकि ये न्यायोचित (Non-Justiciable) नहीं होते हैं।
  • संविधान में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत (DPSP) किस संविधान से अभिप्रेरित हैं? भारत के संदर्भ में DPSP भारत के संविधान-निर्माताओं ने आयरलैंड के संविधान से ग्रहण करके शामिल किए थे। यह भाग IV (अनुच्छेद 36–51) में स्पष्ट है
  • इन निर्देशों को न्यायालय द्वारा लागू नहीं किया जा सकता, पर लोकतांत्रिक सरकार के संचालन, सामाजिक-आर्थिक न्याय और कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के तौर पर कार्य करते हैं.​
  • नीतियों के गुण और महत्व
  • DPSP का उद्देश्य एक कल्याणकारी राज्य का निर्माण है, ताकि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रत्येक नागरिक के लिए सुनिश्चित हो सके.​​
  • ये सिद्धांत सरकारों के नीति-निर्माण और कानून-निर्मादन में मार्गदर्शक भूमिका निभाते हैं, हालांकि इन्हें अदालत के द्वारा बाध्य नहीं किया जा सकता.​
  • भाग IV के अनुच्छेद 36–51 DPSP को स्पष्ट करता है, और यह बताता है कि इन तत्वों को नीति-निर्माण के दौरान ध्यान में रखा जाए, ताकि सार्वजनिक कल्याण बढ़े.​
  • डीपीएसपी के सबसे परिचित पहलू (क्यों लागू होते हैं)
  • जीवन स्तर, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, समानता, सामाजिक सुरक्षा आदि मुद्दों पर स्पष्ट निर्देश रहते हैं ताकि सरकार इन क्षेत्रों में नीति बनाते समय लक्ष्यों को केंद्रित करे.​​
  • संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और कमजोर वर्गों के संरक्षण के लिए घटक प्रावधान भी शामिल हैं, पर इन्हें न्यायालय के दायरे में लागू नहीं किया जा सकता, यह राजनीतिक-नीतिगत Guidance की तरह है.​
  • अगर चाहें, इस विषय पर एक संक्षिप्त तुलनात्मक सारणी भी बना सकता हूँ जिसमें DPSP बनाम अन्य अंग (जैसे Part III fundamental rights) के बीच प्रमुख अंतर स्पष्ट किए जाएँ।

4. ....... के स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के नारे की प्रतिध्वनि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में सुनाई देती है। [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) फ्रांसीसी क्रांति
Solution:
  • स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे (बंधुत्व) के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति (1789-1799) से प्रेरित होकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया था।
  • स्वतंत्रता का तात्पर्य विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता से है; समानता का तात्पर्य प्रतिष्ठा और अवसर की समानता से है; और बंधुत्व का अर्थ राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली भाईचारे की भावना से है।
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के नारे की प्रतिध्वनि स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता (भाईचारा) मूल आदर्श हैं जो संविधान के माध्यम से भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के संकल्प को दर्शाते हैं।
  • ये आदर्श सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर, और राष्ट्र की एकता व अखंडता को बढ़ावा देने वाले भाईचारे की भावना को सुनिश्चित करते हैं।
  • स्वतंत्रता
    • संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता का अर्थ है प्रत्येक नागरिक को विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की पूरी आज़ादी देना। यह हर व्यक्ति के व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान करता है ताकि वे बिना किसी बाधा के अपने विश्वासों और विचारों को प्रकट कर सकें।
  • समानता
    • समानता का आशय है कि सभी नागरिकों को जाति, धर्म, लिंग, या अन्य किसी भी आधार पर भेदभाव के बिना समान अधिकार और अवसर प्राप्त हों।
    • यह सामाजिक और आर्थिक समानता को भी सुनिश्चित करता है जिससे हर किसी को समान अवसर मिलें और कोई बाधा न हो।
  • भाईचारा (बंधुता)
    • बंधुता का तात्पर्य है भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना ताकि विभिन्न समुदायों और वर्गों के बीच एकता और अखंडता बनी रहे।
    • यह सामाजिक सौहार्द्र और राष्ट्र की एकता को मजबूत करने का आधार है।
  • भारतीय प्रस्तावना में इन आदर्शों का महत्व
    • यह आदर्श भारतीय संविधान के मूल आधार हैं जिन्हें संविधान निर्माताओं ने फ्रांसीसी क्रांति के सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर अपनाया।
    • इन आदर्शों का उद्देश्य एक समृद्ध, न्यायपूर्ण और समरस समाज का निर्माण करना है जहाँ हर नागरिक को सम्मान और समान अधिकार प्राप्त हों और देश के विकास में सहभागिता मिले।
    • इस प्रकार भारत के संविधान की प्रस्तावना में "स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे" की भावना न केवल लोकप्रिय नारे हैं, बल्कि वे संविधान की आत्मा हैं जो भारत के लोकतांत्रिक और सामाजिक संस्थान की नींव हैं.​​

5. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा उपबंध ब्रिटेन के संविधान से नहीं लिया गया है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (IV-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) मूल अधिकार
Solution:
  • भारतीय संविधान में मूल अधिकार (Fundamental Rights) का उपबंध ब्रिटेन के संविधान से नहीं लिया गया है।
  • यह प्रावधान संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में दिए गए अधिकारों के विधेयक (Bill of Rights) से प्रेरित है।
  • हालाँकि, द्विसदन पद्धति, विधि का शासन (Rule of Law), और विधायी प्रक्रिया जैसे संसदीय प्रावधान ब्रिटेन के संविधान से लिए गए हैं
  • जो भारत की संसदीय प्रणाली की नींव बनाते हैं।
  • (संविधान का संरचनात्मक भाग) ब्रिटिश संविधान से आलोचनात्मक रूप से प्रेरित रहा है, परन्तु भारतीय संविधान खुद अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित और ढाला गया है।
  • उदाहरण के तौर पर, संघीय संरचना, राजभाषा, और केंद्रीय-राज्य के बीच शक्तियों का बंटवारा ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित भागों पर आधारित है, पर इन्हें भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से फिर से परिभाषित किया गया है.​
  • शासन व्यवस्था और विधायी प्रक्रिया—ब्रिटिश स्तम्भों से प्रेरित संसदीय प्रणाली ( संसद, कैबिनेट, मंत्रिमंडल) के मॉडल का आधार लिया गया है, जबकि भारत में राष्ट्रपति-शासित गणतंत्र की व्यवस्था और न्यायिक समीक्षा के दायरे जैसी विशिष्टताओं को भी जोड़ा गया है.​
  • नीति-निर्देशक सिद्धांत और मौलिक अधिकारों का कुछ हिस्सा अमेरिकी और आयरिश प्रणालियों से प्रेरित है, जबकि ब्रिटिश संविधान के सीधे-सीधे लेखन-आधारित प्रावधानों से अन्य तत्व अधिक भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित और निजीकृत किए गए हैं। इसका परिणाम यह है
  • संविधान में ब्रिटिश संविधान से “लिखित-संरचना” सीधे उधार लेने के बजाय एक संश्लेषित, भारतीय-जानकारित संरचना है.​
  • संपूर्ण उत्तर: भारत के संविधान में ब्रिटिश संविधान से प्रेरणा लिया गया भाग दिखता है, परन्तु “ब्रिटेन से लिया गया उपबंध” का उत्तर ठीक से नहीं है क्योंकि भारतीय संविधान ने ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित प्रमुख प्रणालियों को अपनाते हुए इनमें भारतीय आवश्यकता के अनुसार रूपांतरण और संशोधन किया है। इसलिए, अगर प्रश्न यही पूछता है
  • किस उपबंध को ब्रिटिश संविधान से नहीं लिया गया है, तो सबसे स्पष्ट उत्तर यह होगा कि स्वतंत्र रूप से निर्मित या अन्यों से बिना बदले सीधे लिया गया एक उपबंध भारतीय संविधान में नहीं है
  • बल्कि अधिकांश उपबंधों को ब्रिटिश, अमेरिकी, आयरिश, आदि के मिश्रित प्रभाव के साथ भारतीय परिस्थितियों के अनुसार ढाला गया है।
  • यदि चाहें, तो अधिक स्पष्ट उत्तर के लिए आप उपबंध-स्तर पर विशिष्ट उदाहरण दे सकते हैं (जैसे: संघीय संरचना बनाम द्विसदनात्मकता आदि) ताकि यह बताया जा सके कि कौन से विशिष्ट तत्व सीधे ब्रिटिश संविधान से नहीं लिए गए हैं और क्यों। कृपया बताएं कि आप कौन-से उपबंध के बारे में विस्तृत प्रमाण-आधार चाहते हैं।
  • संदर्भ प्रकार: सामान्य ज्ञान-स्त्रोत जो भारतीय संविधान के प्रेरणा-स्रोतों पर चर्चा करते हैं, जिसमें ब्रिटिश संविधान के स्थानांतरित प्रभाव और भारतीय संशोधित स्वरूपों की जानकारी मिलती है.

6. भारतीय संविधान में 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' की अवधारणा निम्नलिखित में से किस देश से ली गई है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) जापान
Solution:
  • भारतीय संविधान में 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) की अवधारणा जापान के संविधान से ली गई है।
  • यह अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) का एक प्रमुख हिस्सा है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से केवल तभी वंचित किया जा सकता है, जब कानून द्वारा विधिवत स्थापित प्रक्रिया का पालन किया गया हो।
  • अमेरिका द्वारा अपनाई गई "विधि की उचित प्रक्रिया" के विपरीत, "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" विधायिका द्वारा परिभाषित प्रक्रिया के पालन पर जोर देती है, चाहे वह कितनी भी निष्पक्ष या उचित क्यों न हो।
  •  भारतीय संविधान के निर्माताओं ने स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती वर्षों में विधायी सर्वोच्चता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अतिरेक से बचने के लिए जानबूझकर इस अवधारणा को चुना।
  •  यह अवधारणा कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने में विधायी प्रक्रियाओं के महत्व पर प्रकाश डालती है, भले ही यह न्याय या इक्विटी के सिद्धांतों को सीधे संबोधित न करें।
    Other Information
  •  विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया:
  •  इसका अर्थ है कि विधायिका या शासी निकाय द्वारा विधिवत बनाया गया कानून मान्य है यदि वह सही प्रक्रिया का पालन करता है, भले ही वह अन्यायपूर्ण या अनुचित क्यों न
    हो।
  •  न्यायपालिका प्रक्रिया के अनुपालन को सुनिश्चित करती है लेकिन कानून के नैतिक या नैतिक पहलुओं का मूल्यांकन नहीं करती है।
  • विधि की उचित प्रक्रिया:
  • "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के विपरीत, यह अवधारणा (अमेरिकी संविधान में प्रयुक्त) अदालतों को कानून के प्रक्रियात्मक और मूल दोनों पहलुओं का आकलन करने की अनुमति देती है।
  • यह कानूनों में निष्पक्षता न्याय और उचितता सुनिश्चित करके व्यक्तिगत अधिकारों की अधिक सुरक्षा प्रदान करता है।
  •  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21:
  •  इसमें कहा गया है कि "किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किया जाएगा।"
  •  इस अनुच्छेद की व्याख्या भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गोपनीयता, स्वच्छ पर्यावरण और गरिमा जैसे अधिकारों को शामिल करने के लिए विस्तार से की है।
  •  भारत में न्यायिक विकास:
  •  समय के साथ, भारतीय न्यायपालिका ने "कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया" की व्याख्या निष्पक्षता, तर्कसंगतता और न्याय के तत्वों को शामिल करने के लिए की है, जिससे यह
    "कानून की उचित प्रक्रिया" के करीब आ गई है।
  •  मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) के ऐतिहासिक मामले ने इस व्याख्या में एक महत्वपूर्ण बदलाव को चिह्नित किया।

7. भारतीय संविधान का राजनीतिक भाग मुख्यतः किस संविधान से लिया गया है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 15 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 15 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) ब्रिटिश संविधान
Solution:
  • भारतीय संविधान का अधिकांश राजनीतिक भाग (Political Part), जिसमें संसदीय शासन प्रणाली, प्रधानमंत्री का पद, मंत्रिमंडल प्रणाली, और विधायी प्रक्रियाएँ शामिल हैं
  • मुख्यतः ब्रिटिश संविधान से लिया गया है। भारत में सरकार का संसदीय स्वरूप, जिसमें कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है, इसी ब्रिटिश मॉडल पर आधारित है।
  • भारतीय संविधान ने सरकार का संसदीय स्वरूप, कानून का शासन, द्विसदनीय विधायिका और राज्यपाल का कार्यालय ब्रिटिश संविधान से उधार लिया है।
  • हालाँकि, भारतीय संविधान ने भारतीय संदर्भ के अनुरूप ब्रिटिश मॉडल में कई संशोधन भी किए हैं।
  • उदाहरण के लिए भारत में एक मजबूत केंद्र वाली संघीय सरकार प्रणाली है, जबकि ब्रिटेन में एकात्मक प्रणाली है।
    Other Information
  • आयरलैंड का संविधान ने राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के संदर्भ में भारतीय संविधान को प्रभावित किया है।
  • भारतीय संविधान ने सामाजिक और आर्थिक न्याय का विचार आयरिश संविधान से लिया है।
  • ऑस्ट्रेलिया का संविधान ने समवर्ती सूची के संदर्भ में भारतीय संविधान को प्रभावित किया है, जो केंद्र और राज्यों दोनों को कुछ विषयों पर कानून बनाने की अनुमति देता है।
  • अमेरिका का संविधान ने मौलिक अधिकारों के मामले में भारतीय संविधान को प्रभावित किया है, जो अमेरिकी संविधान में अधिकारों के विधेयक के समान है।
  • हालाँकि, भारतीय संविधान ने अमेरिकी मॉडल में कई संशोधन भी किए हैं, जैसे- सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को शामिल करना।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • यह भाग कैबिनेट शासन प्रणाली, कार्यपालिका और विधायिका के बीच संबंध, कानून का शासन तथा द्विसदनीय विधायिका पर आधारित है।
    • भारत ने ब्रिटिश संसदीय मॉडल अपनाया, जिसमें नाममात्र प्रमुख (राष्ट्रपति/राज्यपाल) और वास्तविक कार्यकारी (मंत्रिपरिषद) तथा सामूहिक जिम्मेदारी शामिल है।​
  • अन्य प्रभाव
    • भारतीय संविधान ने ब्रिटिश प्रणाली में संशोधन किए, जैसे मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था जो ब्रिटेन की एकात्मक प्रणाली से भिन्न है।
    • राज्यपाल का कार्यालय भी ब्रिटिश से प्रेरित है, लेकिन भारतीय संदर्भ में अनुकूलित।​
  • तुलना अन्य संविधानों से
    • दार्शनिक भाग अमेरिकी संविधान (मौलिक अधिकार) और आयरिश संविधान (नीति निर्देशक तत्व) से लिया गया
    • जबकि संरचनात्मक भाग 1935 अधिनियम से। राजनीतिक ढांचा स्पष्ट रूप से ब्रिटिश प्रभाव दर्शाता है।​

8. कानून के शासन का विचार निम्नलिखित में से किस देश के संविधान से अपनाया गया था? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) यूनाइटेड किंगडम
Solution:
  • कानून के शासन (Rule of Law) का विचार यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के संविधान से अपनाया गया था।
  • इसका अर्थ है कि देश में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। यह न्याय और समानता का मूल आधार है और भारतीय संविधान में अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) में परिलक्षित होता है।
  • कानून के शासन की अवधारणा
  • कानून के शासन का विचार ब्रिटिश संविधान से लिया गया है, जहाँ यह मूलभूत सिद्धांत है। यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि समाज के सभी सदस्य
  • जिसमें सरकार के लोग भी शामिल हैं, सार्वजनिक रूप से घोषित कानूनों और प्रक्रियाओं के अधीन रहें।
  • 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश विधिवेत्ता ए.वी. डाइसी ने इसे लोकप्रिय बनाया, जो मनमानी शक्ति के विपरीत नियमित कानून की सर्वोच्चता पर जोर देता है।​
  • भारतीय संविधान में इसका समावेश
  • भारतीय संविधान ने ब्रिटिश संविधान से यह विचार ग्रहण किया, जो विधि के समक्ष समानता (अनुच्छेद 14) में परिलक्षित होता है।
  • संविधान सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की गारंटी देता है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं रखता।
  • यह न्यायपालिका को स्वतंत्र बनाकर कानून के शासन को मजबूत करता है।​
  • अन्य संबंधित विशेषताएँ
  • ब्रिटिश संविधान से भारतीय संविधान में संसदीय सरकार, एकल नागरिकता और कानून निर्माण प्रक्रिया जैसे अन्य तत्व भी लिए गए।
  • यह अवधारणा व्यक्तियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है और एक वर्ग के वर्चस्व को रोकती है। भारत में इसे अंग्रेजी-अमेरिकी विधान की तरह ही अपनाया गया।​

9. भारतीय संविधान में एकल नागरिक की विशेषता ....... के संविधान से ली गई थी। [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ब्रिटेन
Solution:
  • भारतीय संविधान में एकल नागरिकता (Single Citizenship) की विशेषता ब्रिटेन के संविधान से ली गई थी। इस व्यवस्था के तहत, एक व्यक्ति केवल भारत का नागरिक होता है और उसे राज्यों की अलग से नागरिकता प्राप्त नहीं होती है। यह प्रावधान भारत में राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देने में सहायक है।
  • एकल नागरिकता का अर्थ और महत्व
    • किसी राज्य या प्रांत के अलग नागरिक। इससे नागरिकों को देश के किसी भी भाग में समान अधिकार मिलते हैं, जैसे स्वतंत्र आवागमन, निवास और रोजगार का अधिकार।
    • यह अमेरिका जैसे संघीय देशों से भिन्न है, जहां दोहरी नागरिकता (संघीय और राज्य स्तर) होती है। एकल नागरिकता राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है और क्षेत्रीय विभाजन को रोकती है।​
  • ब्रिटिश संविधान से प्रेरणा का इतिहास
    • भारतीय संविधान सभा ने ब्रिटेन के एकात्मक मॉडल से यह अवधारणा अपनाई, जहां कोई अलग राज्य नागरिकता नहीं होती।
    • ब्रिटेन का संविधान अलिखित है, लेकिन एकल नागरिकता उसकी मूल विशेषता रही, जो भारत के संविधान निर्माताओं को आकर्षक लगी। डॉ. बी.आर. अंबेडकर समिति ने इसे अपनाने का सुझाव दिया ताकि विविधता वाले भारत में एकरूपता बनी रहे।
    • संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5 से 11) में नागरिकता के प्रारंभिक नियम दिए गए, जबकि नागरिकता अधिनियम 1955 ने इसे विस्तार दिया।​
  • अन्य देशों से तुलना
    • अमेरिका: दोहरी नागरिकता, जहां राज्य नागरिकता संघीय नागरिकता के साथ होती है।
    • कनाडा/ऑस्ट्रेलिया: संघीय लेकिन एकल नागरिकता।
    • भारत: संघीय संरचना के बावजूद ब्रिटिश मॉडल पर एकल नागरिकता, जो एकात्मक झुकाव दर्शाती है।
    • संबंधित संवैधानिक प्रावधान :संविधान के अनुच्छेद 5-11 स्वतंत्रता के समय की नागरिकता निर्धारित करते हैं। नागरिकता अधिनियम 1955 (और उसके संशोधन) जन्म, वंश, पंजीकरण आदि से नागरिकता प्रदान करता है। दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं, लेकिन PIO/OCI कार्ड धारक विशेष सुविधाएं पाते हैं।​

10. भारतीय संविधान में 'गणतंत्र' की अवधारणा निम्नलिखित में से किस देश के संविधान से ली गई है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (III-पाली,]

Correct Answer: (c) फ्रांस
Solution:
  • भारतीय संविधान में 'गणतंत्र' (Republic) की अवधारणा फ्रांस के संविधान से ली गई है। एक गणतंत्र वह राज्य होता है जहाँ राज्य का प्रमुख (जैसे भारत में राष्ट्रपति) वंशानुगत नहीं होता है
  • बल्कि एक निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होता है। यह अवधारणा भारत में संप्रभुता के लोगों में निहित होने पर जोर देती है।
  • भारत ने 26 जनवरी 1950 को अपने संविधान में ‘गणतंत्र’ की अवधारणा को अपनाया, जब यह एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया।
  • भारत का संविधान काफी हद तक संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के संविधान से प्रभावित था।
    Other Information
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तक जर्मनी में सरकार का गणतांत्रिक स्वरूप नहीं था।
  • ऑस्ट्रेलिया 1999 में ही गणतंत्र बन गया, जबकि भारत ने 1950 में गणतंत्र की अवधारणा को अपनाया।
  • जापान में एक संवैधानिक राजतंत्र है, जहाँ सम्राट राज्य का प्रतीकात्मक प्रमुख होता है।
  •  1792 में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान फ्रांस सरकार के गणतांत्रिक स्वरूप को अपनाने वाला पहला देश था।
  • भारतीय संविधान में 'गणतंत्र' की अवधारणा का स्रोत
    • भारतीय संविधान में 'गणतंत्र' की अवधारणा फ्रांस के संविधान से ली गई है। यह शब्द सरकार के उस रूप को दर्शाता है जहाँ राज्य का प्रमुख कोई राजा नहीं, बल्कि निर्वाचित राष्ट्रपति या अधिकारी होता है।
  • फ्रांस के संविधान का ऐतिहासिक महत्व
    • फ्रांस पहला प्रमुख देश था जिसने 1792 में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान गणतांत्रिक शासन अपनाया, जहाँ राजतंत्र की जगह जनता का निर्वाचित प्रतिनिधि प्रमुख बन गया।
    • फ्रांसीसी क्रांति के आदर्श—स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—भी भारतीय संविधान की प्रस्तावना में परिलक्षित होते हैं।
    • 1958 का फ्रांसीसी संविधान (पंचम गणराज्य) ने अर्ध-राष्ट्रपति प्रणाली स्थापित की, जो भारत के राष्ट्रपति पद से मेल खाता है ।​
  • भारतीय संविधान पर अन्य देशों का प्रभाव
    • भारतीय संविधान निर्माताओं ने विभिन्न देशों से विशेषताएँ उधार लीं, लेकिन गणतंत्र विशेष रूप से फ्रांस से आया। उदाहरणस्वरूप:
    • अमेरिका से: मौलिक अधिकार, न्यायिक समीक्षा।
    • ब्रिटेन से: संसदीय प्रणाली, कानून का शासन।
    • आयरलैंड से: नीति-निर्देशक तत्व।
    • कनाडा से: संघीय ढाँचा में मजबूत केंद्र ।​
  • फ्रांस का योगदान प्रस्तावना के गणराज्य, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक गणतंत्र की मूल भावना तक फैला है।
  • गणतंत्र की व्यावहारिक अभिव्यक्ति भारत में
    • भारत में गणतंत्र का अर्थ है राष्ट्रपति को राज्य का प्रथम नागरिक बनाना, जो संसद द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है। यह ब्रिटिश राजतंत्र से अलगाव का प्रतीक है।
    • संविधान सभा ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में इन विचारों को अपनाया, जिससे भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
    • अन्य विकल्प जैसे जर्मनी (द्वितीय विश्व युद्ध तक गैर-गणतांत्रिक), ऑस्ट्रेलिया (1999 में गणतंत्र) या जापान (संवैधानिक राजतंत्र) इस अवधारणा के स्रोत नहीं बने ।​