Correct Answer: (d) फ्रांसीसी क्रांति
Solution:- स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे (बंधुत्व) के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति (1789-1799) से प्रेरित होकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया था।
- स्वतंत्रता का तात्पर्य विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता से है; समानता का तात्पर्य प्रतिष्ठा और अवसर की समानता से है; और बंधुत्व का अर्थ राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली भाईचारे की भावना से है।
- भारतीय संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के नारे की प्रतिध्वनि स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता (भाईचारा) मूल आदर्श हैं जो संविधान के माध्यम से भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के संकल्प को दर्शाते हैं।
- ये आदर्श सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर, और राष्ट्र की एकता व अखंडता को बढ़ावा देने वाले भाईचारे की भावना को सुनिश्चित करते हैं।
- स्वतंत्रता
- संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता का अर्थ है प्रत्येक नागरिक को विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की पूरी आज़ादी देना। यह हर व्यक्ति के व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान करता है ताकि वे बिना किसी बाधा के अपने विश्वासों और विचारों को प्रकट कर सकें।
- समानता
- समानता का आशय है कि सभी नागरिकों को जाति, धर्म, लिंग, या अन्य किसी भी आधार पर भेदभाव के बिना समान अधिकार और अवसर प्राप्त हों।
- यह सामाजिक और आर्थिक समानता को भी सुनिश्चित करता है जिससे हर किसी को समान अवसर मिलें और कोई बाधा न हो।
- भाईचारा (बंधुता)
- बंधुता का तात्पर्य है भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना ताकि विभिन्न समुदायों और वर्गों के बीच एकता और अखंडता बनी रहे।
- यह सामाजिक सौहार्द्र और राष्ट्र की एकता को मजबूत करने का आधार है।
- भारतीय प्रस्तावना में इन आदर्शों का महत्व
- यह आदर्श भारतीय संविधान के मूल आधार हैं जिन्हें संविधान निर्माताओं ने फ्रांसीसी क्रांति के सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर अपनाया।
- इन आदर्शों का उद्देश्य एक समृद्ध, न्यायपूर्ण और समरस समाज का निर्माण करना है जहाँ हर नागरिक को सम्मान और समान अधिकार प्राप्त हों और देश के विकास में सहभागिता मिले।
- इस प्रकार भारत के संविधान की प्रस्तावना में "स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे" की भावना न केवल लोकप्रिय नारे हैं, बल्कि वे संविधान की आत्मा हैं जो भारत के लोकतांत्रिक और सामाजिक संस्थान की नींव हैं.