संविधान के अनुच्छेद (भारतीय राजव्यवस्था)

Total Questions: 38

1. जहां तक भेदभाव के आधारों का प्रश्न है, निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द भारतीय संविधान के अनुच्छेद-15 का भाग नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) पेशा
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 राज्य को नागरिकों के बीच केवल पाँच आधारों—धर्म, मूलवंश (प्रजाति), जाति, लिंग, और जन्मस्थान—पर भेदभाव करने से रोकता है।
  • यह नागरिकों को दुकानों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों सहित सार्वजनिक स्थानों पर पहुँचने की समानता भी सुनिश्चित करता है।
  • 'पेशा' (Occupation) इन संवैधानिक रूप से निषिद्ध भेदभाव के आधारों में शामिल नहीं है
  • विकल्प: जन्म स्थान
  • निष्र्ष: जन्म स्थान अनुच्छेद 15 के भेदभाव के आधारों में शामिल नहीं है? या सवाल के विकल्पों के हिसाब से यह बताने के लिए पूछते हैं
  • शब्द अनुच्छेद-15 का भाग नहीं है, तो जन्म स्थान हां, अनुच्छेद 15 का भेदभाव के आधारों में शामिल है।
  • स्पष्टता के लिए अनुच्छेद 15 का भेदभाव के आधार
    • अनुच्छेद 15(1)  यह मूल अधिकारों के दायरे में समानता और भेदभाव विरोधी सिद्धांत को स्थापित करता है.​
    • साथ ही अनुच्छेद 15 में "केवल" शब्द का अर्थ यह है कि अन्य आधारों पर भी भेदभाव संभव माना जा सकता है
    • लेकिन यह अनुच्छेद 15 के मुख्य रोकथाम को धर्म, जाति, नस्ल, लिंग और जन्म स्थान तक सीमित नहीं कर देता और अन्य आधारों पर भी भेदभाव रोकने के लिए अनुच्छेद 14 आदि प्रावधान भी सहायक हैं.​
  • संक्षिप्त निष्कर्ष
    • अगर विकल्प में जन्म स्थान है, तो वह अनुच्छेद-15 के प्रमुख आधारों में धारा-15 (1) के अनुसार शामिल है। प्रश्न के अनुरूप, यदि पूछा गया है “कौन-सा शब्द अनुच्छेद-15 का भाग नहीं है
  •  संभवतः
    • अन्य विकल्पों में से वह आधार हो सकता है जो अनुच्छेद-15 के प्रमुख दायरे में आता नहीं है—पर सामान्य पाठ के अनुसार जन्म स्थान अभी भी अनुच्छेद-15 के आधारों में आता है। कृपया पूछे गए विकल्पों की सूची साझा करें ताकि बिल्कुल सही चयन किया जा सके।

2. संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 द्वारा निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारतीय संविधान में शामिल किया गया है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 21-A
Solution:
  • संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 द्वारा भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21-A को जोड़ा गया था।
  • यह अनुच्छेद शिक्षा के अधिकार को एक मौलिक अधिकार बनाता है।
  • इसके तहत, राज्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा।
  • यह अधिनियम भारत में शिक्षा के सार्वभौमिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने शिक्षा को एक कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार बना दिया।
  • संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 मौलिक अधिकारों में सबसे बड़ा परिवर्तन नहीं लाया; इसकी प्रमुखता 2002 के 86वां संशोधन से जुड़ी है।
  • 86वां संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21 (21A) में प्रमुख बदला हुआ तथ्य यह है कि प्रारम्भिक शिक्षा को मौलिक अधिकार माना गया, और अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु को संशोधित कर शिक्षा-नैतिक लक्ष्य को स्पष्ट किया गया।
  • इस संशोधन के अन्य तत्वों में शिक्षा से जुड़ी नीति-निर्देशों का क्रम भी अधिक स्पष्ट किया गया और कुछ अन्य प्रावधान भी समाहित हुए जो शिक्षा के मौलिक अधिकार के प्रभाव को मजबूत करते हैं।
  • इन बिंदुओं के प्रभाव से बच्चों के लिए समान अवसर और शिक्षा का अधिकार सुदृढ़ हुआ।
  • संविधान में शामिल प्रमुख बिंदु (86वाँ संशोधन, 2002)
    • अनुच्छेद 21A जोड़ा गया: प्रत्येक व्यक्ति को राज्य द्वारा छह वर्ष से सही शिक्षा का अधिकार प्राप्त है (प्राथमिक शिक्षा से संबंधित मौलिक अधिकार बनना)।
    • अनुच्छेद 45 का संशोधन: शिक्षा के मुद्दे की प्राथमिकता और नीति-निर्देशक तत्वों के माध्यम से बच्चों की शिक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में अधिक स्पष्ट निर्देश।
    • अन्य उप-उपबंध: शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की जिम्मेदारी और वितरण की स्पष्ट प्रस्तुति, ताकि बच्चों तक पहुँच आसान हो सके।
    • 86वाँ संशोधन का समग्र दायरा मुख्यतः शिक्षा के मौलिक अधिकार से जुड़ा है, जबकि संविधान की अन्य धाराओं में भी संशोधन हो सकते हैं। यदि चाहें तो मौलिक अधिकारों की सूची में 21A, 45 के संशोधन, और उनके प्रभावों की अवसर-प्रोफाइल को विस्तृत रूप से चार्ट के रूप में भी दे सकता हूँ।
    • अगर आप किसी विशिष्ट पाठक समूह (जैसे न्यायशास्त्रिक विश्लेषण, शिक्षा-नीति की धारा-दर-धारा व्याख्या, या उसके प्रभावी अनुप्रयोग) के लिए विवरण चाहते हैं, तो बताएं ताकि उसे लक्षित करके गहराई से उत्तर दे सकूं।

3. भारत के निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में यह उल्लेख किया गया है कि "भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करें"? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 51A (b)
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A में वर्णित मौलिक कर्तव्यों के खंड (b) में यह उल्लेख किया गया है
  • भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करें"।
  • यह कर्तव्य नागरिकों को स्वतंत्रता संग्राम के पीछे के महान मूल्यों, जैसे त्याग, अहिंसा, और एकता का सम्मान करने और उन्हें अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करता है।
  •  यह अनुच्छेद संविधान के मूल कर्तव्यों का हिस्सा है।
  •  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51A भारतीय नागरिकों के मूल कर्तव्यों को निर्धारित करता है।
  •  इसे 1976 में 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था, और यह विभिन्न कर्तव्यों को निर्दिष्ट करता है जिनका पालन प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए करने की अपेक्षा की जाती है।
    Other Information
  • इस अनुच्छेद में उल्लिखित कुछ प्रमुख कर्तव्य इस प्रकार हैं:
    • अनुच्छेद 51A (a): संविधान का पालन करना और इसके आदर्शों और संस्थानों राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना।
    • अनुच्छेद 51A (c): भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना।
    • अनुच्छेद 51A (d): देश की रक्षा करना और जब भी कहा जाए राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना।
    • अनुच्छेद 51A (e): भारत के सभी लोगों के बीच सद्भाव और साझा भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना, धार्मिक, भाषाई और क्षेत्रीय या वर्गगत विविधताओं से परे।
    • अनुच्छेद 51A (f): हमारी समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत का मूल्य और संरक्षण करना।
    • अनुच्छेद 51A (g): प्राकृतिक पर्यावरण, जिसमें वन, झीलें, नदियों और वन्यजीव शामिल हैं, की रक्षा और सुधार करना और जीवित प्राणियों के प्रति करुणा रखना।
    • अनुच्छेद 51A (h): वैज्ञानिक स्वभाव, मानवतावाद और जांच और सुधार की भावना का विकास करना।
    • अनुच्छेद 51A (i): सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा का त्याग करना।
    • अनुच्छेद 51A (i): व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करना ताकि राष्ट्र निरंतर उच्च स्तर के प्रयास और उपलब्धि तक पहुँचे।

4. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद यह बताता है कि देश की रक्षा करना और ऐसा करने के लिए आह्वान किए जाने पर राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना हमारा कर्तव्य है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 51 A (d)
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 A के तहत मौलिक कर्तव्यों का खंड (d) यह बताता है कि देश की रक्षा करना और "ऐसा करने के लिए आह्वान किए जाने पर राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना" प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
  • यह प्रावधान देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की सुरक्षा के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है
  • उन्हें राष्ट्र के लिए किसी भी समय सेवा के लिए तैयार रहने का आह्वान करता है।
  • अनुच्छेद 51A (d) कहता है: “देश की रक्षा करना तथा आह्वान किये जाने पर राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना” एक भारतीय नागरिक का मौलिक कर्तव्य है. [तथ्य संदर्भ: अनुच्छेद 51A (d) का स्पष्ट उल्लेख]
  • यह संशोधन 1976 में 42वाँ संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और मौलिक कर्तव्यों को भाग IVA में व्यवस्थित किया गया। [तथ्य संदर्भ: 42वाँ संशोधन, भाग IVA]
  • मौलिक कर्तव्यों की यह सूची 11 कर्तव्यों तक फैली है, जिनमें से 51A (d) देशभक्ति और राष्ट्रीय सेवा के दायित्व से जुड़ा है। [तथ्य संदर्भ: भाग IVA के अधीन 11 कर्तव्य] अपेक्षित अनुच्छेद और भाग
  • अनुच्छेद 51A (d): देश की रक्षा करना और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना। [तथ्य संदर्भ: अनुच्छेद 51A (d)]
  • भाग IVA: मौलिक कर्तव्य; 42वाँ संशोधन द्वारा जोड़े गए कर्तव्य और 11 मौलिक कर्तव्यों की संरचना। [तथ्य संदर्भ: भाग IVA]
  • यदि चाहें, इस विषय पर मैं आपको अनुच्छेद 51A (d) की विस्तृत भाषा (हिंदी/अंग्रेजी मूल) के साथ-साथ संबंधित судебिक संदर्भ और आधुनिक व्यावहारिक प्रभावों पर संक्षिप्त विश्लेषण भी दे सकता हूँ, ताकि आप पाठ्य सामग्री या परीक्षा-तैयारी में सीधे उपयोग कर सकें।
  • पाठ: देश की रक्षा करना और आह्वान किए जाने पर राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना यह एक भारतीय नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। इस प्रावधान को 42वें संविधान संशोधन (1976) के अंतर्गत जोड़ा गया और भाग IV-A में रखा गया। [संविधान संदर्भ: अनुच्छेद 51A (d), भाग IV-A]
  • ऐतिहासिक संदर्भ: 42वाँ संशोधन द्वारा मौलिक कर्तव्यों की सूची बनकर संविधान में स्थापित की गई; आगे 86वें संशोधन (2002) के साथ थपथपाकर इस सूची में एक अतिरिक्त विवरण जोड़ा गया। [संशोधन संदर्भ: 42वाँ संशोधन; 86वाँ संशोधन]
  • मौलिक कर्तव्यों का दायरा: अनुच्छेद 51A के अंतर्गत कुल 11 मौलिक कर्तव्य शामिल हैं; इनमें देश की रक्षा और राष्ट्रीय सेवा शामिल है, जो नागरिकता के नैतिक दायित्वों को प्रेरित करने के लिए रखा गया। [सूची और संरचना: भाग IV-A]
  • गहराई से समझना
    • उद्देश्य: नागरिकों के नैतिक और नागरिक दायित्वों को प्रेरित करना ताकि समाज में जिम्मेदार नागरिक बनें और देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह कानूनी रूप से बाध्य नहीं है
    • बल्कि नैतिक/सामाजिक दायित्व के रूप में माना गया है। अनुच्छेद 51A (d) इस नैतिक धागे को संस्थागत करता है। [संविधान का उद्देश्य/प्रस्तावना संदर्भ]
    • स्रोत और उपयोग: यह कर्तव्य उत्तरदायित्वों के शास्त्र में व्यक्तिगत नैतिकता के तौर पर पढ़ा जाता है
    • शिक्षा, सार्वजनिक आचार-विचार और नागरिक शिक्षा के पाठ्यक्रमों में प्रमुख स्थान रखता है। अदालतों के निर्णयों में इसे नैतिक दायित्व के तौर पर व्याख्यायित किया गया है। [कानूनी पाठ्यgear/शिक्षा संदर्भ]
  • अगर चाहें, चाही गई बातें और अधिक विशिष्ट करें:
    • अनुच्छेद 51A (d) के अंग्रेजी मूल शब्द और हिंदी अनुवाद के साथ उसका संपूर्ण पाठ
    • 42वाँ और 86वाँ संशोधन का संक्षिप्त इतिहास
    • मौलिक कर्तव्यों के अन्य सदस्य (11 कर्तव्य) और उनके सामाजिक/नैतिक प्रभावों का तुलनात्मक विवेचन
    • कोर्ट के प्रमुख निर्णयों के उदाहरण जो अनुच्छेद 51A (d) को विभिन्न संदर्भों में व्याख्यायित करते हैं

5. भारत के संविधान के अनुच्छेद 123 और अनुच्छेद 213 निम्नलिखित में से किस विषय से संबंधित हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अध्यादेश बनाने की शक्ति
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 और अनुच्छेद 213 क्रमशः राष्ट्रपति और राज्यपालों को अध्यादेश (Ordinance) बनाने की शक्ति प्रदान करते हैं।
  • जब संसद या राज्य विधानमंडल (यथास्थिति) सत्र में नहीं होते हैं और तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता होती है
  • तो राष्ट्रपति या राज्यपाल इन अनुच्छेदों का उपयोग करके अस्थायी कानून (अध्यादेश) जारी कर सकते हैं।
  • इन अध्यादेशों का वही कानूनी बल होता है जो विधायी अधिनियमों का होता है।
  • यदि किसी भी समय, जब संसद के दोनों सदनों का सत्र चल रहा हो, को छोड़कर, राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि ऐसी परिस्थितियाँ मौजूद हैं
  • जिसके कारण उनके लिए तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है, तो वह ऐसे अध्यादेशों को प्रख्यापित कर सकते हैं, जैसी परिस्थितियाँ उन्हें आवश्यक लगती हैं।
  • इस अनुच्छेद के अंतर्गत जारी किया गया कोई अध्यादेश संसद के अधिनियम के समान बल और प्रभाव रखेगा, लेकिन प्रत्येक ऐसा अध्यादेश -(क) संसद के दोनों
  • सदनों के समक्ष रखा जाएगा और संसद के पुनः एकत्र होने के छह सप्ताह की अवधि की समाप्ति पर, या यदि उस अवधि की समाप्ति से पहले इसे अस्वीकृत करने वाले
    प्रस्ताव दोनों सदनों द्वारा पारित किए जाते हैं
  • तो उनमें से दूसरे प्रस्ताव के पारित होने पर, कार्य करना बंद कर देगा; और (ख) राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय वापस लिया
    जा सकता है।
  • यदि और जहाँ तक इस अनुच्छेद के अधीन कोई अध्यादेश ऐसा कोई प्रावधान करता है जिसे संसद इस संविधान के अधीन अधिनियमित करने के लिए सक्षम नहीं होगी, तो
    वह शून्य होगा।
    Other Information
  •  अनुच्छेद 213
    •  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 213 राज्य के राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्रावकाश के दौरान अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान करता है।
    • अध्यादेश एक अस्थायी कानून है जिसे राज्यपाल द्वारा तब जारी किया जा सकता है जब विधानसभा या विधानमंडल के दोनों सदन सत्र में नहीं होते हैं।
  • अनुच्छेद 213 के बारे में मुख्य बिंदु:
    • प्रख्यापन की शक्ति: राज्यपाल को उन मामलों पर अध्यादेश जारी करने का अधिकार है जो राज्य विधानमंडल की विधायी क्षमता के अंतर्गत आते हैं।
    • प्रख्यापन के लिए परिस्थितियाँ: राज्यपाल अध्यादेश तब जारी कर सकता है जब राज्य विधानमंडल सत्र में नहीं हो, और राज्यपाल का मानना है कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
    • विधायी अनुमोदन के अधीन: राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश अस्थायी प्रकृति के होते हैं और जब राज्य विधानमंडल पुनः एकत्रित होता है
    • तो उसे अनुमोदित करने की आवश्यकता होती है। यदि निर्दिष्ट समय के भीतर अनुमोदित नहीं किया जाता है, तो अध्यादेश कार्य करना बंद कर देता है।
    • अध्यादेश बनाने पर सीमाएँ: अध्यादेश जारी करने की शक्ति पूर्ण नहीं है और कुछ संवैधानिक सीमाएं हैं।
    • राज्यपाल कुछ मामलों पर अध्यादेश जारी नहीं कर सकते, जिनमें राष्ट्रपति के लिए आरक्षित अध्यादेश भी शामिल हैं, तथा पुनः अध्यादेश जारी करने पर भी प्रतिबंध हैं।

6. भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम, 'सर्वशिक्षा अभियान' राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के निम्नलिखित में से किस प्रावधान को पूरा करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 45
Solution:
  • भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम, 'सर्वशिक्षा अभियान' (SSA), राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 45 में निहित उद्देश्यों को पूरा करता है।
  • यह अनुच्छेद राज्य को सभी बच्चों को छह वर्ष की आयु पूरी करने तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा प्रदान करने का निर्देश देता है।
  • भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 45 में राज्य को यह निर्देश दिया गया है
  • वह सभी बच्चों को चौदह वर्ष की आयु पूरी होने तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करे।
  • सर्व शिक्षा अभियान (SSA) 2001 में इस आदेश को पूरा करने के लिए शुरू किया गया था ताकि शिक्षा की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित की जा सके।
  • SSA का उद्देश्य युद्ध स्तर पर समुदाय के स्वामित्व वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रावधान के माध्यम से मानव क्षमताओं में सुधार करना है।
  • यह कार्यक्रम स्कूलों के प्रबंधन में समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ सामाजिक, क्षेत्रीय और लिंग अंतर को पाटने का भी प्रयास करता है।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाकर अनुच्छेद 45 को और मजबूत करता है।
    Other Information
  • राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)
    •  DPSP सरकार द्वारा कानून बनाने के लिए दिशानिर्देश हैं, जो प्रकृति में गैर-न्यायिक हैं।
    •  इन सिद्धांतों का उद्देश्य ऐसी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियाँ बनाना है जिनके तहत नागरिक एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकें।
    •  ये भारतीय संविधान के भाग IV में, अनुच्छेद 36 से 51 तक हैं।
  • शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009
    • यह भारत में 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करता है।
    • यह अनिवार्य करता है कि प्राथमिक शिक्षा पूरी होने तक किसी भी बच्चे को पीछे नहीं रोका जाएगा, निष्कासित नहीं किया जाएगा, या किसी बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण होने की आवश्यकता नहीं होगी।
    • यह अधिनियम यह भी निर्धारित करता है कि बच्चे या उसके माता-पिता को विद्यालय में प्रवेश के लिए किसी भी जाँच प्रक्रिया के अधीन नहीं किया जाएगा।
  • प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण
    •  इसका अर्थ है प्राथमिक विद्यालय की आयु के सभी बच्चों के लिए शिक्षा सुलभ बनाना।
    •  SSA और RTE भारत में इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
  • शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी
    •  विद्यालयों के प्रबंधन और प्रशासन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी।
    •  उत्तरदेयता को प्रोत्साहित करता है और सुनिश्चित करता है कि समुदाय की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा किया जाए।

7. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में यह उल्लेख किया गया है कि मौलिक अधिकारों से असंगत या उनका अनादर करने वाले कानून अमान्य हो जाएंगे? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 13
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 13 यह सुनिश्चित करता है कि मौलिक अधिकारों की सुरक्षा बनी रहे। यह स्पष्ट करता है
  • मौलिक अधिकारों से असंगत या उनका अनादर करने वाले कानून शून्य (अमान्य) हो जाएंगे
  • यह अनुच्छेद न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के सिद्धांत का आधार है, जो न्यायपालिका को यह शक्ति देता है
  • वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कानून को अवैध घोषित कर सके। इस प्रकार, यह मौलिक अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण ढाल है।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 13 :-
    • इसमें उल्लेख किया गया है कि जो कानून किसी भी मौलिक अधिकार के साथ असंगत हैं या उनका अपमान करते हैं, वे अमान्य होंगे।
    • इसका मतलब यह है कि कोई भी कानून जो संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के खिलाफ जाता है, उसे अमान्य और अप्रवर्तनीय माना जाएगा।
    • मौलिक अधिकार भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं और संविधान के भाग II में निहित हैं।
    • इन अधिकारों में समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार और
      संवैधानिक उपचारों का अधिकार शामिल हैं।
    • संविधान न्यायपालिका के माध्यम से इन मौलिक अधिकारों की सुरक्षा का भी प्रावधान करता है, जो इन अधिकारों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कानून को रद्द कर सकता है।
      Other Information
  •  संविधान का अनुच्छेद 14 :-
    •  यह कानून के समक्ष समानता के अधिकार और सभी नागरिकों को कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है।
  •  अनुच्छेद 15 :-
    •  यह धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर प्रतिबंध लगाता है।
  •  अनुच्छेद 16 :-
    •  यह सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता की गारंटी देता है और धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, वंश, जन्म स्थान, निवास या इनमें से किसी के आधार पर भेदभाव
      को रोकता है।

8. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद भारत में मतदाता सूची और चुनाव कराने के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए स्वतंत्र चुनाव आयोग का प्रावधान करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 324
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 भारत में एक स्वतंत्र चुनाव आयोग के गठन का प्रावधान करता है।
  • यह अनुच्छेद चुनाव आयोग को संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के लिए अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है, जिससे लोकतंत्र की नींव मजबूत हो सके।
  • अनुच्छेद 324 की मुख्य विशेषताएं
    • यह अनुच्छेद चुनाव आयोग को लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन करने का अधिकार प्रदान करता है।
    • आयोग एक स्थायी और स्वायत्त संवैधानिक निकाय है, जो स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है।​
  • चुनाव आयोग की संरचना
    • अनुच्छेद 324(1) के अनुसार, आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित अन्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं।
    • अनुच्छेद 324(2) राष्ट्रपति को अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 324(5) उनकी सेवा शर्तें निर्धारित करता है।​
  • आयोग के कार्य
    • मतदाता सूची तैयार करने का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण।​
    • चुनाव कार्यक्रम जारी करना, नियम बनाना तथा चुनाव स्थगित या रद्द करने का अधिकार।​
    • निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी।​
    • यह प्रावधान संविधान के भाग XV (अनुच्छेद 324-329A) के अंतर्गत आता है, जो चुनावी स्वतंत्रता को मजबूत बनाता है।

9. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रदान की गई अंतः करण की स्वतंत्रता को निम्नलिखित में से किन दो अनुच्छेदों द्वारा मजबूती प्रदान की गई है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 27 और 28
Solution:
  • भारतीय संवधान के अनुच्छेद 25 में अंतः करण की स्वतंत्रता (Freedom of Conscience) और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • अनुच्छेद 27 (किसी धर्म के प्रचार के लिए करों के भुगतान से स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 28 (कुछ शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या पूजा में भाग लेने से स्वतंत्रता) इस धार्मिक स्वतंत्रता को मजबूत करते हैं।
  • ये अनुच्छेद यह सुनिश्चित करते हैं कि राज्य धार्मिक मामलों में तटस्थ रहे और किसी विशेष धर्म को बढ़ावा न दे।
  • संविधान के अनुच्छेद 25 द्वारा पूर्व-निर्धारित अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म की मान्यता/आचरण की स्वतंत्रता दी गई है, और इन्हें मजबूत करने वाले दो प्रमुख अनुच्छेद हैं:
  • अनुच्छेद 26:
    • धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता – यह स्पष्ट करता है कि धार्मिक संस्थाओं के मामलों का प्रशासन उनके भीतर के समूहों के नियंत्रण में रहेगा और राज्य द्वारा इनमें हस्तक्षेप सीमित होगा।
  • अनुच्छेद 27 और अनुच्छेद 28:
    • क्रमशः धर्म के प्रचार/प्रसार पर tax relief से जुड़े प्रावधान और धार्मिक शिक्षा में भागीदारी की स्वतंत्रता – इन दोनों का आशय आनंदी ढंग से धर्म स्वतंत्रता के व्यावहारिक पक्षों को संरक्षित करना है
    • अनुच्छेद 27 कराधान से संबंध रखता है जबकि अनुच्छेद 28 धार्मिक शिक्षा के क्षेत्र में स्वतंत्रता से जुड़ा है।
  • संविधान संदर्भ
    • अनुच्छेद 25 के अंतर्गत सभी नागरिकों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है.​
    • अनुच्छेद 26 धर्म से जुड़े प्रबंधों के स्वतंत्र शासन की अनुमति देता है, जो अनुच्छेद 25 की अभिव्यक्ति/आचरण संबंधी स्वतंत्रता को सांस्थानिक रूप से संरक्षित करता है.​
    • साथ ही, अनुच्छेद 27, 28 आदि धार्मिक शिक्षा और वित्तीय प्रावधानों से जुड़े कुछ विषयों पर राज्य के हेरफेर को सीमित करते हैं, ताकि धर्म-संप्रभुता अधिक सुरक्षित   रहे.​
    • अनुच्छेद 25 और 26 भारतीय नागरिकों की आन्तरिक/धर्म-संबंधी स्वतंत्रता के दायरों को स्पष्ट करते हैं; 27 और 28 जैसे अनुच्छेद इस स्वतंत्रता की व्यावहारिक सीमा-   रेखा और प्रदत्त अधिकारों के साथ जुड़े अन्य आयामों को स्पष्ट करते हैं.​
    •  यह विषय विभिन्न शिक्षण/केस-आधारित स्रोतों में हिंदी में भी उपलब्ध है, जो अनुच्छेद 25 की भूमिका और अनुच्छेद 26 की स्वतंत्रता को समझाने के लिए एक सामान्य   संदर्भ प्रदान करते हैं.​
    • यदि चाहें, तो इन अनुच्छेदों के दायरे में आए प्रमुख न्यायालयीन निर्णयों का संक्षिप्त संकलन भी दे सकता हूँ ताकि व्यावहारिक अनुप्रयोग स्पष्ट हो सके

10. निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में यह उल्लेख किया गया है कि राज्य, भारत के क्षेत्र के भीतर किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता या कानूनों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 14
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता के अधिकार का मूल स्तंभ है। यह उल्लेख करता है
  • राज्य भारत के क्षेत्र के भीतर किसी भी व्यक्ति को 'कानून के समक्ष समानता' (Equality before Law) या 'कानूनों के समान संरक्षण' (Equal Protection of Laws) से वंचित नहीं करेगा।
  • यह मौलिक अधिकार देश के सभी व्यक्तियों पर लागू होता है, चाहे वे नागरिक हों या विदेशी, और यह विधि के शासन (Rule of Law) के सिद्धांत को सुनिश्चित करता है।
  • अनुच्छेद 14 का पाठ:
    • “राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता या भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों के समान संरक्षण से इनकार नहीं करेगा।” यह मौलिक अधिकार भाग III में आता है और कानून के समक्ष समानता तथा कानूनों के समान संरक्षण को सुनिश्चित करता है.​
  • कानूनी संरचना:
    • अनुच्छेद 14 कानून के अनुप्रयोग में लैंगिक, सामाजिक या आर्थिक भेदभाव के बिना सभी व्यक्तियों के लिए समान ष्टिकता (rule of law) की मांग करता है
    • किसी भी तरह के भेदभाव के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है.​
  • अभ्यास और व्याख्या:
    • यह अनुच्छेद न्यायालयों को यह सक्षम बनाता है कि वे कानूनों के समकक्ष लागू होने की निगरानी करें और असमानताओं के विरुद्ध न्यायिक संरक्षण दें; साथ ही यह स्पष्ट करता है
    • कानून के समान संरक्षण का सिद्धांत भी लागू भागों के तहत है, जैसे कि अनुच्छेद 15 (धर्म, मूलवंश आदि के आधार पर भेदभाव निषेध) और अनुच्छेद 16 (अवसर की समानता) आदि से जुड़कर समग्र समानता तंत्र बनाते हैं.​
  • अगर चाहें, इस विषय पर निम्न हिस्सों को भी विस्तार से देखना संभव है:
    • अनुच्छेद 14 बनाम अन्य समानता प्रवर्तन धाराओं के बीच संबंध
    • न्यायिक निर्णयों के उदाहरण जो अनुच्छेद 14 की व्याख्या पर आधारित हैं
    • समानता के अधिकार बनाम नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के बीच संतुलन
    • अनुच्छेद 14 और कानून के समक्ष समानता के विषय पर व्याख्या और पाठ: विकिपीडिया हिंदी पृष्ठ और अन्य शिक्षा-स्रोत.​