संविधान के अनुच्छेद (भारतीय राजव्यवस्था)

Total Questions: 38

31. भारत के संविधान के अनुच्छेद 29-30 किससे संबंधित हैं? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार
Solution:

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकारों से संबंधित हैं।

  • अनुच्छेद 29 नागरिकों के किसी भी वर्ग को अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार देता है।
  •  अनुच्छेद 30 सभी अल्पसंख्यकों (धार्मिक या भाषाई) को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है।
  • अनुच्छेद 29:
    • नागरिक के कला/जाति/धर्म/भाषा आदि के आधार पर उनकी भाषा, लिपि या सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के अधिकार की गारंटी देता है।
    • यह अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किसी भी भेदभाव से मुक्त रहने की सुरक्षा भी प्रदान करता है।
    • इसके अंतर्गत नागरिकों के समूह को अपनी भाषा, लिपि या संस्कृति को बनाए रखने और विकसित करने का अधिकार सुनिश्चित किया गया है [web स्रोतों के आधार पर सामान्य तात्पर्य]।
  • अनुच्छेद 30:
    • अल्पसंख्यकों को अपने आराध्य, संस्कृति और भाषा के अनुरूप शिक्षा संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है।
    • उप-खंड (1) से (2) तक के प्रावधान इस अधिकार को विस्तृत करते हैं:
  • अनुच्छेद 30(1):
    • धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने और चलाने का अधिकार।
  • अनुच्छेद 30(1A):
    • ऐसी संस्थाओं के लिए आवश्यक परिसर/धन-संपत्ति के अधिग्रहण से जुड़ी स्थितियों में विशेषprotections देता है ताकि अल्पसंख्यकों के अधिकार प्रभावित न हों।
  • अनुच्छेद 30(2):
    • सरकार की सहायता देते समय अल्पसंख्यकों के धर्म/भाषा के बावजूद भेदभाव नहीं किया जाएगा; छात्रों के लिए शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित रहता है।
    • अनुच्छेद 29 और 30 मिलकर अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक, भाषाई पहचान और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार की सुरक्षा करते हैं।
    • अनुच्छेद 29 नागरिकों के किसी भी वर्ग को संरक्षित करता है, जबकि अनुच्छेद 30 खासकर अल्पसंख्यकों की शैक्षणिक संस्थाओं के अधिकारों पर केंद्रित है।
    • इन अनुच्छेदों के प्रयोग से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र/राज्य सरकार अल्पसंख्यकों की चिंताओं को मान्यता देते हुए शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में संवैधानिक ढांचे के भीतर नीति बनाते हैं।

32. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद "मौलिक कर्तव्यों" (Fundamental Duties) से संबंधित है? [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 51-A
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51-A मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) से संबंधित है।
  • यह भाग संविधान में 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर जोड़ा गया था।
  • मूल रूप से इसमें 10 कर्तव्य थे, और 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक और कर्तव्य (शिक्षा का अधिकार) जोड़कर इनकी संख्या 11 हो गई है।
  • इसे स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 1976 में 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़ा गया था।
  • अनुच्छेद 51A में निहित मौलिक कर्तव्य भारतीय नागरिकों को याद दिलाते हैं कि अधिकारों के अतिरिक्त उनके कुछ दायित्व भी हैं।
  • ये कर्तव्य देशभक्ति की भावना को बनाए रखने और भारत की एकता का समर्थन करने के महत्व पर जोर देते हैं।
    Other Information
  • भारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
  • यह मौलिक राजनीतिक सिद्धांतों को परिभाषित करने वाला ढांचा तैयार करता है
  • सरकारी संस्थाओं की संरचना, प्रक्रियाएं, शक्तियों और कर्तव्यों को स्थापित करता है
  • मौलिक अधिकारों, निर्देशक सिद्धांतों और नागरिकों के कर्तव्यों को निर्धारित करता है।
  • भारत का संविधान दुनिया के किसी भी देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
  • यह भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है
  • नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता का आश्वासन देता है,
  • भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
  • अनुच्छेद 51A में विशेष रूप से उन कर्तव्यों को सूचीबद्ध किया गया है जिनका पालन करना भारत के प्रत्येक नागरिक से अपेक्षित है।
  •  मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने का उद्देश्य व्यक्तिगत अधिकारों और सामूहिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

33. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 ....... का प्रावधान करते हैं। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 16 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार (Right to Freedom of Religion) का प्रावधान करते हैं।
  • अनुच्छेद 25: अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
  • अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता।
  • अनुच्छेद 27: किसी धर्म के प्रचार के लिए करों के भुगतान से स्वतंत्रता।
  • अनुच्छेद 28: कुछ शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या पूजा में उपस्थित होने से स्वतंत्रता।
  • इसका मतलब यह है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के किसी भी धर्म का पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार है।
  • इस अधिकार में धार्मिक मामलों और संस्थानों के प्रबंधन की स्वतंत्रता के साथ-साथ धार्मिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति रखने और अर्जित करने का अधिकार भी शामिल है।
  • संविधान धर्म के आधार पर भेदभाव पर भी रोक लगाता है और गारंटी देता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के धार्मिक संस्थानों तक पहुंचने और उनमें भाग लेने का अधिकार है।
    Other Information
  • संस्कृति और शैक्षिक अधिकार:
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों का प्रावधान करते हैं।
    • ये अनुच्छेद सुनिश्चित करते हैं कि अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को संरक्षित करने और अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार है।
  • समानता का अधिकार:
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 समानता का अधिकार प्रदान करते हैं। यह अधिकार सुनिश्चित करता है
    • भारत का प्रत्येक नागरिक कानून के समक्ष समान है और उसे कानून का समान संरक्षण प्राप्त है। यह धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर भी रोक लगाता है।
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार:
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार प्रदान करते हैं।
    • यह अधिकार मानव तस्करी, जबरन श्रम और बाल श्रम पर रोक लगाता है। यह खतरनाक नौकरियों में बच्चों के रोजगार पर भी रोक लगाता है।
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार:
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करते हैं। यह अधिकार सुनिश्चित करता है
    • भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने द्वारा चुने गए किसी भी धर्म का पालन और प्रचार करने की स्वतंत्रता है।
    • इसमें धार्मिक मामलों और संस्थानों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता और धार्मिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति रखने और अर्जित करने का अधिकार भी शामिल है।

34. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ....... "संवैधानिक उपचारों के अधिकार" (Right to Constitutional Remedies) से संबंधित है। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 32-35
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 "संवैधानिक उपचारों के अधिकार" से संबंधित है। यह मौलिक अधिकार स्वयं में एक मौलिक अधिकार है
  • क्योंकि यह नागरिकों को अन्य मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में जाने का अधिकार देता है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इसे संविधान की 'आत्मा और हृदय' कहा था।
  • स्थान और सुरक्षा:
    • अनुच्छेद 32, संविधान का वह प्रावधान है जो मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय को “कानूनी तुरंत राहत” की अनुमति देता है, ताकि न्याय मिलना संभव हो सके.​
  • चार प्रमुख उपबंध:
    • अनुच्छेद 32 में चार प्रमुख गारंटियाँ हैं—(a) मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर अदालत में याचिका दायर करने का अधिकार, (b) बिना देरी के राहत/ interim relief का प्रावधान, (c) सुप्रीम कोर्ट को विशेष अधिकार जैसे habeas corpus आदि के लिए सीधे मामलों की सुनवाई का अधिकार, (d) अनुच्छेद 32 के अधिकार के माध्यम से न्यायिक सुरक्षा का दायरा राष्ट्रीय नागरिकता, भाषण, धर्म आदि के विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है.​
  • न्यायिक प्रकृति:
    • यह अधिकार एक “मौलिक अधिकार” है, और इसे न्यायिक नियंत्रण के लिए सभी नागरिकों के लिए बाध्यकारी माना गया है; इससे संविधान के बाकी प्रावधानों की वास्तविकता बनती है ताकि liberty, equality और justice का सर्वोच्च मानक बना रहे.​
  • एक महत्त्वपूर्ण दार्शनिक संकेत:
    • बाबा भीमराव आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की “आत्मा” कहा है, जिसे संविधान के बिना अर्थहीन माना गया; इसी कारण इसे शैली-आयाम में अत्यंत महत्त्वपूर्ण समझा गया है.​
  • मसौदा और स्रोत:
    • अनुच्छेद 32 के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कई बार संवैधानिक उपचारों की व्यापक व्याख्या की है, जैसे कि कारावास विधेयकों, अभिरक्षा, अभिव्यक्ति आदि से जुड़ी मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए याचिका को सक्षम करना आदि.​
  • विस्तार से समझने के लिए प्रमुख अवधारणाएं
    • कानून के चार अधिकार-याचिकाएं: Article 32 के अंतर्गत अदालत से वांछित राहतें—(i) साथ में राहत/उद्धारों के लिए तुरंत आदेश (writs) जैसे habeas corpus, mandamus, prohibition, certiorari, prohibition आदि — सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों के पास उपलब्ध हैं; इन writs के जरिये मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर न्याय मिलता है.​
    • सुप्रीम कोर्ट की विशेषригин-प्राप्ति: Article 32 के माध्यम से सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं, जबकि Article 226 के अंतर्गत हाई कोर्ट भी समान अधिकार का प्रयोग कर सकता है; ये सिस्टम नागरिकों को दोनों उच्च न्यायालयों के द्वारों पर न्याय तक पहुँच प्रदान करते हैं.​
    • विस्तार और महत्त्व: संवैधानिक उपचारों के अधिकार का महत्त्व यह है कि यदि राज्य द्वारा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो नागरिक न्याय के लिए सर्वोच्च अदालत या उच्च न्यायालय की शरण ले सकता है; इस अधिकार के बिना मौलिक अधिकारों का वास्तविक क्रियान्वयन संभव नहीं होता.​
    • सीमा और दायरा: यह अधिकार सिर्फ मौलिक अधिकारों के उल्लंघन तक सीमित नहीं, बल्कि मौलिक अधिकारों के संरक्षण की दिशा में न्यायिक नियंत्रण और अधिकार-सुरक्षा के व्यापक उपायों को भी कवर करता है; इसके तहत राहत, सुरक्षा, और उचित प्रक्रिया के सिद्धांत भी शामिल रहते हैं.​
  • संक्षिप्त निष्कर्ष
    • अनुच्छेद 32 संविधान की भाषा में “संवैधानिक उपचारों का अधिकार” के रूप में एक मूल अधिकार है, जो नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर न्यायिक उपचार के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच देता है.​
    • यह अधिकार भारतीय न्यायिक प्रणाली की रीढ़ माना गया है क्योंकि यह मौलिक अधिकारों के वास्तविक प्रवर्तन को सुनिश्चित करता है और संविधान की आत्मा को संरक्षित करता है.​
    • संवैधानिक उपचारों का अधिकार समय के साथ न्यायिक परिपक्वता और अधिकार-सुरक्षा की दिशा में एक स्थायी तंत्र बन चुका है, जिसे अदालतें विभिन्न writs के माध्यम से लागू करती हैं.​

35. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद "नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता" से संबंधित है? [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 09 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 44
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) से संबंधित है। यह राज्य को निर्देश देता है
  • वह "भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा"।
  • इसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले कानूनों में एकरूपता लाना है।
  • अनुच्छेद 44:
    • यह एक नीति निदेशक सिद्धांत है जो संविधान के भाग IV (धारा 36–51) के अंतर्गत आता है और राज्य को देशभर में एक समान नागरिक संहिता स्थापित करने के उद्देश्य से प्रेरित करता है।
    • यह सीधे अधिकारों के स्तर पर नागरिकों को समान सुरक्षा देना नहीं कहता, पर राज्य के लिए एक ऐसी संरचना बनाने की एक स्पष्ट नीति निर्धारित करता है। संविधान के नीति निदेशक सिद्धांत, अनुच्छेद 44]
  • UCC का उद्देश्य:
    • भारत के विविध धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के बावजूद सभी नागरिकों के लिए एक सामान्य वैधानिक ढांचा विकसित करना ताकि विहित दायित्व, व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक एकीकृत कानून-सीन रखा जा सके।
    • यह महिलाओं के अधिकारों और समानता के विषयों में सुधार की दिशा भी सजग रहता है।
    • बेसिक विवाद:
    • अनुच्छेद 44 एक संकल्पात्मक निर्देश है—यह को सीधी “नियम” नहीं देता, बल्कि राज्य के लिए एक सार्वभौमिक कानून-प्रणाली के निर्माण की दिशा में नीति-स्तर पर मार्गदर्शन देता है।
    • इसी कारण, UCC पर विभिन्न राज्य-नीति और सामाजिक-धार्मिक दायित्वों के बीच राजनीतिक-व्यवहार और कानूनी-प्रकारों पर बहस जारी रहती है।
  • संविधान में संबंधित अनुच्छेदों का संदर्भ (तार्किक तुलना)
  • अनुच्छेद 14, 15, 16 आदि:
    • ये नागरिकों के सामने समानता के अधिकार से जुड़े हैं और व्यक्तिगत कानून के बजाय सामान्य कानून के साथ नागरिकों के अवसरों और समान  के सिद्धांत को स्थापित करते हैं।
    • UCC के साथ इन अनुच्छेदों का छेड़छाड़-या प्रत्यक्ष समन्वय बहस का विषय रहता है, क्योंकि वे समानता और समान अवसर की गारंटी देते हैं
    • जो अक्सर UCC के समर्थक-निर्देशों से जोड़कर देखा जाता है। [अनुच्छेद 14–16 के सामान्य समता/समझौता के सिद्धांत]
  • अनुच्छेद 44:
    • UCC से सबसे स्पष्ट संबंध यही है क्योंकि यही अनुच्छेद राज्य को एक समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए निर्देशित करता है। [अनुच्छेद 44]
  • अमेरिकन-तुलन से सीख
    • संहितागत दृष्टिकोण में; UCC जैसी एक राष्ट्रीय समरूपीकरण की कोशिश कई देशों में सामाजिक-धार्मिक विविधताओं के बीच लचीली अनुशासन बनाती है
    • भारत के संदर्भ में यह बहस उम्र, लिंग और धार्मिक-वर्ग के भीतर संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के साथ जुड़ी रहती है।
    • अनुच्छेद 44 इसे मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में रखता है, जिसके आधार पर विधायिका या न्यायपालिका आगे के कदम तय कर सकती है।

36. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 ....... से संबंधित है। [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अस्पृश्यता के उन्मूलन
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता (Untouchability) के उन्मूलन से संबंधित है। यह न केवल अस्पृश्यता को समाप्त करता है
  • बल्कि किसी भी रूप में इसके अभ्यास को निषिद्ध करता है। इस अधिकार को प्रवर्तनीय बनाने के लिए, संसद ने अस्पृश्यता अपराध अधिनियम, 1955 (जिसे अब नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 कहा जाता है) पारित किया है।
  •  अनुच्छेद 12-35 तक मौलिक अधिकारों को छह श्रेणियों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है:
  • स्वतंत्रता का अधिकार
  • समानता का अधिकार
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  • सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार
    Other Information
  • अनुच्छेद 14 - विधि के समक्ष समानता
  • अनुच्छेद 15 - धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
  • अनुच्छेद 16 - सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता
  • अनुच्छेद 17 - अस्पृश्यता का अन्त
  • अनुच्छेद 18 - उपाधियों का उन्मूलन
  • अनुच्छेद 19 - बोलने की स्वतंत्रता आदि से संबंधित कुछ अधिकारों का संरक्षण।
  • अनुच्छेद 20 और 21 भारतीय संविधान के दो अनुच्छेद (मौलिक अधिकार) हैं, जो अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं हैं।
  • अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में सुरक्षा देता है।
  • अनुच्छेद 21 जीवन का अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सम्मान के साथ मरने का अधिकार देता है।
  • अनुच्छेद 21A छह से चौदह (6-14) वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देता है।

37. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद यह प्रावधान करता है कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए एक विधानसभा होगी ? [Phase XI 27 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 239AA
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 239AA (जो 69वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1991 द्वारा जोड़ा गया) दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) के लिए विशेष प्रावधान करता है।
  • यह अनुच्छेद दिल्ली के लिए विधानसभा और मंत्रिपरिषद के गठन का प्रावधान करता है, जिससे दिल्ली को सीमित स्वायत्तता प्राप्त होती है।
  • अनुच्छेद 23
    •  शोषण के विरुद्ध अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में निहित है।
    • मानव तस्करी और भिखारियों और अन्य समान प्रकार के जबरन श्रम निषिद्ध हैं।
    • इस प्रावधान का कोई भी उल्लंघन कानून के अनुसार दंडनीय अपराध होगा।
    • अनुच्छेद 23 नागरिकों को न केवल राज्य से बल्कि निजी नागरिकों से भी बचाता है।
    • अनुच्छेद 23 के अनुसरण में संसद द्वारा पारित कानून:
    •  महिलाओं और लड़कियों के अनैतिक व्यापार का दमन अधिनियम, 1956
    •  बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976
      Other Information
  • अनुच्छेद 19
    •  बोलने की स्वतंत्रता आदि से संबंधित कुछ अधिकारों का संरक्षण
    • सभी नागरिकों को अधिकार होगा
    • भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
    • शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के इकट्ठा होना
  • संघ या यूनियन बनाना
    • भारत के पूरे क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने के लिए
    • भारत के किसी भी भाग में निवास करने और बसने के लिए
  • अनुच्छेद 21
    • भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।
    • किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा।
    • यह मौलिक अधिकार प्रत्येक व्यक्ति, नागरिकों और विदेशियों के लिए समान रूप से उपलब्ध है।
  • अनुच्छेद 21 दो अधिकार प्रदान करता है:
    • जीवन का अधिकार
    • व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 14
    • अनुच्छेद 14 कानून की नजर में सभी लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार करता है।
    • इस प्रावधान में कहा गया है कि कानून के समक्ष सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा।
    • देश का कानून सभी की समान रूप से रक्षा करता है।
    • समान परिस्थितियों में कानून लोगों के साथ समान ही व्यवहार करेगा।

38. भारत के संविधान के निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद के तहत अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के पास कानून और व्यवस्था के संबंध में और अपने कार्यों के प्रभार से हटने से संबंधित विशेष जिम्मेदारी है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 371 H
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371 H अरुणाचल प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान करता है।
  • इस अनुच्छेद के तहत, अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के पास कानून और व्यवस्था के संबंध में और अपने कार्यों के प्रभार से हटने से संबंधित विशेष जिम्मेदारी है।
  • हालांकि, राष्ट्रपति, राज्यपाल के इस विशेष दायित्व को समाप्त करने का निर्देश दे सकते हैं।
  • यह प्रावधान 1986 के संविधान संशोधन (55th Amendment Act) के जरिए जोड़ा गया था। इसके कारण राज्यपाल के पास स्थानीय सरकार के कार्यों के निर्वहन में कुछ विवेकाधीन निर्णय लेने की क्षमता रहती है ।​
  • लेख के अनुसार राज्यपाल अपने फैसलों में मंत्रिपरिषद की सलाह ले सकता है, परंतु निर्णायक विवेकाधीन शक्ति उसका ही रहता है
  • अर्थात निर्धारित परिस्थितियों में राज्यपाल के पास स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता होती है, विशेषकर कानून-व्यवस्था से संबंधित मामलों में। यह व्यवस्था अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ से अधि‍कृत है ।​
  • विस्तृत अनुच्छेद-पूर्वक विवरण
    • अनुच्छेद 371H का उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप संरचना बनाना है ताकि राज्य के भीतर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में त्वरित एवं स्थिर निर्णय संभव हो।
    • यह अनुच्छेद राज्यपाल को स्थानीय प्रशासन-निर्णय में अस्थायी या विवेकाधीन हस्तक्षेप की अनुमति देता है, जब कड़ी परिस्थितियाँ उत्पन्न हों।
    • इसलिए राज्यपाल के पास ऐसी परिस्थितियों में निर्वाह के लिए स्पष्ट अधिकार होते हैं, जो सामान्य राज्यों के राज्यपालों की शक्तियों से अलग हैं ।​
    • 371H की मौलिक भूमिका यह है कि राज्यपाल के पास कानून-व्यवस्था के संदर्भ में विशिष्ट नियंत्रण और संतुलन की भूमिका रहती है; साथ ही यह सुनिश्चित करता है
    • केंद्र-राज्य संबंधी निर्णय प्रक्रिया में उत्तरदायित्व और त्वरित कार्रवाई संभव हो। संबंधित संशोधन इस प्रकार से संविधान में समाहित हुआ कि अरुणाचल प्रदेश की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुरूप मंत्री परिषद की भूमिका और राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ संतुलित रहें ।​
  • अनुच्छेद 371H के लाभ-प्रभाव
    • केंद्र-राज्य संबंधों के दायरे में अरुणाचल प्रदेश के लिए सुरक्षा और विधि-व्यवस्था से जुड़ी प्राथमिकताओं पर राज्यपाल को विशेष अधिकार मिलते हैं ताकि चुनौतियों के समय तेज़ और न्यायसंगत निर्णय संभव हों ।​
    • सामान्य अनुच्छेदों के साथ-साथ 371H प्रत्यख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लिए विशिष्ट कानूनी ढांचा बनाता है जो राज्य के हित में तत्काल हस्तक्षेप की अनुमति देता है, जबकि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित रहता है (जैसे मंत्रिमंडल की सलाह) ।​
  • नोट्स और संदर्भ
    • अनुच्छेद 371H और इसका इतिहास/विवेकाधीन अधिकार अरुणाचल प्रदेश के लिए विशिष्ट संरचना बनाते हैं, जिसमें 1986 का संशोधन प्रमुख है। यह जानकारी जैसे स्रोतों पर स्पष्ट रूप से उद्धृत है, जो अनुच्छेद 371H के तहत राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारियों पर केंद्रित चर्चा करते हैं ।​
    • संविधान के अन्य अनुच्छेदों के गठन के बारे में सामान्य पृष्ठभूमि भी उपलब्ध है, पर अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ में 371H ही विशिष्ट कानून-व्यवस्था से जुड़ी तियों को स्थापित करता है ।​
  • यदि चाहें, नीचे दी गई बिंदुओं के आधार पर एक सरल तुलना तालिका भी जा सकती है:
    • अनुच्छेद 371H बनाम अन्य अनुच्छेदों की सामान्य शक्तियाँ
    • राज्यपाल के विवेकाधीन निर्णय बनाम मंत्रिपरिषद की सलाह के दायरे
    • कानून-व्यवस्था से जुड़ी विशेष जिम्मेदारियों का प्रदर्शन