- भारतीय संविधान भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित करता है, जिसका अर्थ है कि राज्य का कोई अपना धर्म नहीं है
- वह सभी धर्मों को समान सम्मान और सुरक्षा प्रदान करता है। धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25 से 28 में वर्णित है
- जिसमें उपासना और धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता शामिल है।
- यह व्यक्तियों को अपने धर्म को मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है; साथ ही धर्म के मामलों के प्रबंधन और संस्थागत प्रावधान भी इन अनुच्छेदों के अंतर्गत आते हैं।
- इनमें राज्य धर्म के संबंध में वहाँ से विविध प्रावधान भी शामिल हैं, पर भारतीय संविधान राज्य धर्म को मान्यता नहीं देता है
- यह एक धर्मनिरपेक्ष संविधान है और किसी भी राज्य धर्म को विशेष रूप से मान्यता नहीं देता। अतः नीचे दिए गए कथनों में से सत्य/असत्य का मूल्यांकन किया गया है।
- यह कथन: “राज्य का अपना धर्म है” असत्य है। भारतीय संविधान राज्य की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति को मान्यता देता है और किसी भी राज्य धर्म का उल्लेख नहीं करता है।
इस कथन के अनुसार राज्य अपने धर्म के अनुरूप निर्णय ले सकता है, यह धारणा संविधान की ध्वज-धारणा के विपरीत है।