संविधान सभा की प्रमुख समितियां (भारतीय राजव्यवस्था)

Total Questions: 5

1. निम्नलिखित शख्सियतों में से कौन संविधान के दस्तावेज का मसौदा तैयार करने वाली संविधान सभा का मुख्य प्रारूपकार था ? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) वसंत कृष्ण वैद्य
Solution:
  • संविधान के दस्तावेज का मसौदा तैयार करने वाली संविधान सभा का मुख्य प्रारूपकार वसंत कृष्ण वैद्य थे।
  • संविधान सभा के मसौदा-प्रारूपकार ( drafting committee ) के प्रमुख वही थे जिसने संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए मसौदा समिति का गठन किया था। इस वक्त स्पष्ट उत्तर के अनुसार प्रमुख प्रारूपकार थे:
  • महात्मा गांधी की प्रेरणा से संविधान सभा ने 29 अगस्त 1947 को मसौदा समिति की स्थापना की, जिसका नेतृत्व डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने किया।
  • वे संविधान सभा के मसौदा (Drafting) समिति के अध्यक्ष थे और उन्होंने संविधान के मसौदे को तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाई। [sources: इतिहास/संविधान सभा के गठन और मसौदा समिति के किरदार]
  • संविधान सभा के अन्य प्रमुख समितियाँ जिनमें मसौदा समिति शामिल थी, उनके सदस्यगण और भूमिका भी महत्त्वपूर्ण थीं:
  • मसौदा समिति (Drafting Committee): अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर; सदस्यता में सदस्य देश-प्रांतों के प्रतिनिधि शामिल थे।
  • [संविधान सभा की संरचना और कार्य-प्रणाली]
    • अन्य समितियाँ जैसे संघ शक्ति समिति, मौलिक अधिकार समिति आदि ने मार्गदर्शक सिद्धांतों की रूपरेखा दी और मसौदे के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
  • [संघ-शक्ति समिति आदि]
    • यदि आप चाहें, तो इन उत्तरों के साथ स्रोत-शीर्षक, विस्तृत सूची (जैसे मसौदा समिति के सदस्य-संख्या और प्रत्येक सदस्य का योगदान) और सबसे विश्वसनीय शिक्षण सामग्री के लिंक दे सकता हूँ ताकि आप विस्तृत अध्ययन कर सकें. आप हिन्दी या अंग्रेजी में कौन सा संग्रह प्राथमिकता देंगे?

2. निम्नलिखित में से कौन संविधान सभा की प्रारूप समिति का सदस्य था? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) डॉ. के.एम. मुंशी
Solution:
  • डॉ. के.एम. मुंशी (कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी) प्रारूप समिति के सात सदस्यों में से एक थे।
  • अन्य सदस्यों में डॉ. बी.आर. अंबेडकर (अध्यक्ष), एन. गोपालस्वामी अय्यंगार, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, एन. माधव राव (बी.एल. मित्तर की जगह) और टी.टी. कृष्णमाचारी (डी.पी. खेतान की जगह) शामिल थे।
  • मुंशी, जिन्हें उनके उपनाम घनश्याम व्यास के नाम से भी जाना जाता है, एक गुजराती लेखक राजनीतिज्ञ और भारतीय स्वतंत्रता के लिए कार्यकर्ता थे।
  • मूल रूप से एक वकील, वह अंततः एक राजनीतिज्ञ और उपन्यासकार बन गए। गुजराती साहित्य में उनका नाम सर्वमान्य है।
  • 1938 में उन्होंने शैक्षिक ट्रस्ट भारतीय विद्या भवन की स्थापना की।
  • 1952 से 1957 तक मुंशी उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे।
  •  मुंशी ने 1959 में नेहरू के नेतृत्व वाली समाजवादी कांग्रेस पार्टी से संबंध तोड़ने के बाद अखंड हिंदुस्तान आंदोलन की स्थापना की थी।
    Other Information
  •  बेनेगल नरसिंह राव एक भारतीय राजनेता, विधिवेत्ता, सिविल सेवक और राजनयिक थे, जिन्होंने देश के संविधान को लिखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • उन्होंने संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार के रूप में कार्य किया।
  • भारतीय राजनीतिज्ञ तिरुवेल्लोर थट्टाई कृष्णमाचारी ने 1956 से 1958 और 1964 से 1966 तक दो बार वित्त मंत्री का पद संभाला।
  •  1941 से 1945 तक मैसूर के 23वें दीवान के रूप में सेवा करने के अलावा, सर न्यापति माधव राव एक भारतीय सिविल सेवक, प्रशासक और राजनेता थे।
  • उन्होंने संविधान सभा की मसौदा समिति में भी भाग लिया, जिसे भारतीय संविधान बनाने का काम सौंपा गया था।
  • संविधान सभा की प्रारूप समिति के सदस्य थे:
    • अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
    • एन. गोपालस्वामी
    • बी.आर.अंबेडकर – अध्यक्ष के.एम. मुंशी
    • मोहम्मद सादुल्ला
    • बी.एल. मित्तर  — बाद में एन. माधव राव द्वारा प्रतिस्थापित
    • डी.पी. खेतान — बाद में टी.टी. कृष्णमाचारि द्वारा प्रतिस्थापित
  • संरचना और भूमिका:
    • प्रारूप समिति कुल सात सदस्य मिलकर संविधान के मसौदे की प्रारूप तैयार करती है, जिसे बाद में संविधान सभा ने विस्तृत बहस के बाद अपनाया ।​
    • अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे, जिन्हें “भारतीय संविधान के जनक” के रूप में भी जाना जाता है ।​

3. भारतीय संविधान में उल्लेखित निम्नलिखित में से कौन-सा कथन धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार के संबंध में सत्य नहीं है? [CHSL (T-I) 04 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) इसमें उल्लेख है कि राज्य का अपना धर्म होता है।
Solution:
  • भारतीय संविधान भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित करता है, जिसका अर्थ है कि राज्य का कोई अपना धर्म नहीं है
  • वह सभी धर्मों को समान सम्मान और सुरक्षा प्रदान करता है। धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25 से 28 में वर्णित है
  • जिसमें उपासना और धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता शामिल है।
  •  यह व्यक्तियों को अपने धर्म को मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है; साथ ही धर्म के मामलों के प्रबंधन और संस्थागत प्रावधान भी इन अनुच्छेदों के अंतर्गत आते हैं।
  • इनमें राज्य धर्म के संबंध में वहाँ से विविध प्रावधान भी शामिल हैं, पर भारतीय संविधान राज्य धर्म को मान्यता नहीं देता है
  • यह एक धर्मनिरपेक्ष संविधान है और किसी भी राज्य धर्म को विशेष रूप से मान्यता नहीं देता। अतः नीचे दिए गए कथनों में से सत्य/असत्य का मूल्यांकन किया गया है।
  • यह कथन: “राज्य का अपना धर्म है” असत्य है। भारतीय संविधान राज्य की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति को मान्यता देता है और किसी भी राज्य धर्म का उल्लेख नहीं करता है।
  • इस कथन के अनुसार राज्य अपने धर्म के अनुरूप निर्णय ले सकता है, यह धारणा संविधान की ध्वज-धारणा के विपरीत है।

  • इसलिए यह कथन असत्य है। संविधानेधारणा अनुसार राज्य धर्मनिरपेक्ष, अनुच्छेद 25-28]
  • धार्मिक स्वतंत्रता के प्रमुख पहलु (संक्षेप में)
    • अनुच्छेद 25: हर व्यक्ति अपने धर्म को मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता। [उद्धरण/तथ्य: अनुच्छेद 25]
    • अनुच्छेद 26: धार्मिक मामलों के प्रबंध की स्वतंत्रता (धार्मिक संस्थाओं और गतिविधियों के नियंत्रण के क्षेत्र में अधिकार)। [उद्धरण/तथ्य: अनुच्छेद 26]
    • अनुच्छेद 27: करों के भुगतान के बजाय किसी धर्म के प्रचार पर प्रत्यक्ष/प्रत्यक्ष प्रतिबंध के विरुद्ध सुरक्षा (कर-प्रावधानों से धर्म-प्रचार की सुरक्षा)؛ इत्यादि। [उद्धरण/तथ्य: अनुच्छेद 27]
    • अनुच्छेद 28: शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा/पूजा में उपस्थिति की स्वतंत्रता (कुछ स्थितियों में)। [उद्धरण/तथ्य: अनुच्छेद 28]

4. भारतीय संविधान का जनक किसे माना जाता है? [MTS (T-I) 21 अगस्त, 2019 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) भीम राव अंबेडकर
Solution:
  • डॉ. बी. आर. अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक माना जाता है। वह संविधान की सबसे महत्वपूर्ण समिति, प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, और उन्होंने संविधान के निर्माण में केंद्रीय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • वे संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष थे और उनके नेतृत्व में संविधान का प्रारूपण किया गया
  • जिससे भारत का मौलिक कानून बना। परंतु संविधान सभा के अन्य सदस्य भी संविधान के निर्माण में योगदानी रहे
  • जैसे राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू आदि, और इस प्रक्रिया में कई राष्ट्र-वर्षीय और सामाजिक विचारधाराओं का समन्वय हुआ।
  • पूरा संदर्भ:
    • भूमिका और भूमिका-भर: डॉ. भीमराव अंबेडकर को अक्सर “भारतीय संविधान के जनक” कहा जाता है
    • क्योंकि उन्होंने मसौदा समिति का नेतृत्व किया और संविधान के मूल अधिकारों, समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत किया।
    • प्रेरणा स्रोतों में उन्‍होंने मानव अधिकारों और समाज के वंचित समूहों के लिए न्याय के मूल्य को मुख्य बनाये रखा.​
    • मसौदा समिति: संविधान के प्रारूपण की जिम्मेदारी मसौदा समिति के ऊपर थी, जिसमें अंबेडकर अध्यक्ष थे; इस समिति ने 1947 में मसौदा प्रस्तुत किया (हालाँकि अंतिम संविधान 1949 में अपनाया गया).​
    • उद्घोषणा और वरिंतियाँ: 26 नवंबर 1949 को संविधान लिया गया, और 26 जनवरी 1950 को नागरिकता और कानून-व्यवस्था के मौलिक ढांचे के साथ संविधान लागू हुआ; यह भी इस प्रक्रिया के महत्व को दर्शाता है.​
  • संक्षेप में:
    • प्राथमिक उत्तर: भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक माना जाता है।
    • बहुस्तरीय योगदान: मसौदा समिति का नेतृत्व, सामाजिक-न्याय के अधिकार, और संविधान-निर्माण के समन्वय में उनका प्रमुख योगदान रहा।
    • अन्य योगदानकर्ता: संविधान सभा के अन्य सदस्य और कलाकार, जिन्होंने दस्तावेज़ को आकार दिया और इसे सुशोभित किया, वे भी महत्वपूर्ण थे (जिन्हें आप संदर्भ में देख सकते हैं).​

5. भारतीय संविधान के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) नीति (NITI) आयोग
Solution:
  • नीति (NITI) आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) एक गैर-संवैधानिक (कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा स्थापित) और सलाहकार निकाय है।
  • जबकि निर्वाचन आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, और राज्य लोक सेवा आयोग भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों के तहत स्थापित स्वतंत्र संवैधानिक निकाय हैं।
  • संकल्पना क्या है
    • स्वतंत्र संवैधानिक निकाय वे संस्थान होते हैं जो संविधान के तहत स्थापित हैं, जिन्हें चुनाव, विवाद समाधान या प्रशासनिक निरीक्षण जैसे कार्य निष्पादन के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।
    • इनमें चुनाव आयोग, CAG (महालेखा परीक्षक), लोक सेवा आयोग आदि प्रमुख उदाहरण हैं। इन्हें सरकार से गैर-तंटित रूप से संचालित किया जाना अपेक्षित होता है
    • ताकि वे निष्पक्षता बनाए रखें। यह परिभाषा कानूनी-राजनीतिक व्यवस्था की “स्वतंत्रता” है, न कि व्यक्तिगत अधिकारों की स्वतंत्रता।
  • नीचे से-ऊपर के स्पष्ट विभेद
    • स्वतंत्र संवैधानिक निकाय नहीं: सामान्य प्रशासनिक या मौलिक अधिकारों से जुड़े संस्थान जो संविधान के भीतर केवल एक विभाग/केंद्र सरकार के अधीन रहते हैं
    • जिनकी नियुक्तियाँ सरकार द्वारा नियंत्रित होती हैं (जिनमें कुछ नियंत्रणीय सीमाएं हैं) — वे संविधान के भीतर स्थापित स्वतंत्र निकाय नहीं माने जाते।
    • उदाहरण के तौर पर, बहुधा देखने में, कुछ निकाय जिनकी स्थापना संविधान के अंतर्गत हो, परन्तु वे पूरी तरह स्वतंत्र नहीं होते (जैसे कुछ वैधानिक निकायों के नियंत्रण/प्रबंध में सरकार की भूमिका रहती है) उन्हें “स्वतंत्र संवैधानिक निकाय” की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
  • भारतीय संविधान में स्पष्ट स्वतंत्र निकाय
    • निर्वाचन आयोग चुनाव की स्वतंत्रता/निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य स्वतंत्र निकाय माना जाता है।
    • महालेखा परीक्षक सार्वजनिक व्यय की लेखा-जोखा और पारदर्शिता के लिए स्वतंत्र अंकेक्षण देता है।
    • लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग साक्षात्कार/ भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने हेतु स्वतंत्र संस्था के रूप में स्थापित हैं।
    • मध्यस्थ/अन्य स्वतंत्र आयोग जैसे नीति-निर्णय परंपरागत रूप से संविधान में दिए गए हैं; कुछ मामलों में न्यायिक समीक्षा के अधीन रहते हैं।
  • क्यों एकनिकाय नहीं माना जाता
    • यदि कोई निकाय संविधान के अंतर्गत स्थापित है पर उसकी सरकार-नियोजन, नियुक्तियाँ, बजट, या नीति-निर्माण में सरकार की अत्यधिक नियंत्रण-स्थिति है, तो उसे पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं माना जाता है।
    • ऐसे निकाय जिन्हें संविधान ने “स्वतंत्र” कहा नहीं गया है या जिनकी स्वतंत्रता को संवैधानिक दायरे से बाहर रखा गया है, वे स्वतंत्र संवैधानिक निकाय नहीं माने जाते।
  • संक्षिप्त निष्कर्ष
    • स्वतंत्र संवैधानिक निकाय: निर्वाचन आयोग, CAG, लोक सेवा आयोग आदि जैसे संस्थान जिन्हें कानून/संविधान द्वारा स्वतंत्र आचरण के लिए स्थापित किया गया है और जिनकी नियुक्ति/कार्यों में असाधारण स्वतंत्रता संरक्षित है।
    • जो नहीं हैं: वे संस्थान जो संविधान के भीतर स्थापित तो हैं लेकिन सरकार के नियंत्रण/भूमिका के कारण पूर्ण स्वतंत्र नहीं माने जाते (जैसे कुछ प्रशासनिक या नियंत्रक संस्थान जिनमें सरकार का प्रभाव बना रहता है)।