सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-II

Total Questions: 50

11. सुतापा तालुकदार किस भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली से संबंधित हैं? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) ओडिसी
Solution:
  • 'सुतापा तालुकदार' भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली ओडिसी से संबंधित हैं, जिसकी उत्पत्ति पूर्वी राज्य ओडिशा में हुई थी।
  • ओडिसी नृत्य शैली
    • ओडिसी भारत की आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति ओडिशा राज्य से हुई।
    • यह अपनी तरल गतियों, अनुग्रहपूर्ण मुद्राओं और मूर्तिकला-प्रेरित भाव-भंगिमाओं के लिए प्रसिद्ध है
    • जो जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों से प्रेरित हैं। नृत्य में मुद्रा (हस्ताक्षर), अभिनय (भावपूर्ण अभिव्यक्ति) और नृत्य (जटिल कदम ताल) का संतुलित समावेश होता है
    • जो भक्ति रस प्रधान कहानियां प्रस्तुत करता है।​
  • सुतापा तालुकदार का सफर
    • सुतापा तालुकदार ने मात्र छह वर्ष की आयु में नृत्य प्रशिक्षण प्रारंभ किया, जिसमें उन्होंने मणिपुरी, कथकली और मोहिनीअट्टम जैसी अन्य शैलियां भी सीखीं।
    • हालांकि, उन्होंने ओडिसी में विशेषज्ञता हासिल की और गुरु केलुचरण मोहपात्रा जैसे महान कलाकारों से प्रशिक्षण लिया।
    • कोलकाता की रहने वाली सुतापा ने अपनी साउथ गुरुकुल सोसाइटी के माध्यम से ओडिसी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, जहां वे गुरु के रूप में भी सक्रिय हैं।
    • उन्होंने राष्ट्रीय प्रदर्शन कला केंद्र (एनसीपीए) के मुद्रा नृत्य महोत्सव जैसे आयोजनों में प्रस्तुतियां दीं, जहां उनकी ओडिसी शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
  • उपलब्धियां और योगदान
    • सुतापा तालुकदार ने "बहाना" जैसे आधुनिक बैले रचे, जो ओडिसी को समकालीन विषयों जैसे नारीत्व से जोड़ते हैं
    • यह नृत्य, संगीत, संस्कृत और अंग्रेजी का मिश्रण था। वे ओडिसी की बारीकियों में माहिर हैं
    • इसे भावपूर्ण अभिनय के साथ प्रस्तुत करती हैं, जो दर्शकों को भक्ति और सौंदर्य का अनुभव कराता है।
    • उनके प्रदर्शन अक्सर ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करते हैं
    • वे युवा नर्तकों को प्रशिक्षित कर इस शैली को संरक्षित करने में योगदान दे रही हैं।

12. चाली (Chali), झुमुरा (Jhumura) और नादु भंगी (Nadu Bhangi) किस भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली से संबंधित हैं? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) सत्रिया
Solution:
  • चाली (Chali), झुमुरा (Jhumura), नादु भंगी (Nadu Bhangi) आदि सत्रिया नृत्य शैली से संबंधित हैं। यह असम का एक शास्त्रीय नृत्य है।
  • सत्तriya नृत्य का परिचय
    • सत्तriya भारत की आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है, जो असम राज्य से उत्पन्न हुई।
    • इसे 15वीं शताब्दी में वैष्णव संत शंकरदेव ने विकसित किया था, जो नृत्य, संगीत और अभिनय का संयोजन करता है।
    • यह मुख्य रूप से वैष्णव भक्ति कथाओं को चित्रित करने के लिए सत्रों (वैष्णव मठों) में प्रदर्शित होता था।
  • इन नृत्यों की भूमिका
    • चाली, झुमुरा और नादु भंगी सत्तriya की विशिष्ट नृत्य शैलियाँ या घटक हैं। चाली एक स्वतंत्र नृत्य संख्या है
    • जबकि झुमुरा (या झुमुर) लयबद्ध हाव-भाव वाली शैली को दर्शाता है, जो कभी-कभी लोक झुमुर से प्रेरित लगती है
    • लेकिन शास्त्रीय रूप में विकसित। नादु भंगी विशेष मुद्राओं या हावभावों को संदर्भित करता है
    • जहाँ 'नादु' क्षेत्रीय शैली और 'भंगी' मुद्रा का अर्थ है। ये सभी शंकरदेव द्वारा रचित व्यापक सत्तriya प्रणाली का हिस्सा हैं।
  • उत्पत्ति और विकास
    • सत्तriya की जड़ें असम के सत्रों में हैं, जहाँ इसे भक्ति रस से भरपूर प्रदर्शन के रूप में विकसित किया गया।
    • शंकरदेव ने इसे नाट्य शास्त्र के सिद्धांतों पर आधारित बनाया, जिसमें नृत्य (नृत्य), हस्तमुद्राएँ (हस्त मुद्रा) और अभिनय शामिल हैं।
    • 2000 में इसे शास्त्रीय नृत्य का दर्जा मिला। चाली, झुमुरा जैसे अंग पुरुष और महिला दोनों कलाकारों द्वारा किए जाते हैं।
  • प्रदर्शन विशेषताएँ
    • सत्तriya में ये शैलियाँ गोलाकार संरचनाओं, लयबद्ध पदचाप और जीवंत संगीत के साथ प्रस्तुत होती हैं।
    • पोशाक में पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता और महिलाओं के लिए साड़ी-चोली का उपयोग होता है, रंगीन आभूषणों से सजा। संगीत पैजमा-खोल-नागरा पर आधारित होता है।
  • महत्व और आधुनिक संदर्भ
    • ये नृत्य असम की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखते हैं, जो भक्ति और कथा कहने पर केंद्रित हैं।
    • आज इन्हें राष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शित किया जाता है
    • जैसे एसएससी परीक्षाओं में प्रश्न के रूप में। सत्तriya ने असमिया लोक तत्वों को शास्त्रीय रूप प्रदान किया।

13. निम्नलिखित में से कौन-सी अरुणाचल प्रदेश की आदि जनजाति द्वारा की जाने वाली एक नृत्य शैली है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) तापू
Solution:
  • तापू (Tapu) अरुणाचल प्रदेश की 'आदि जनजाति' का एक पारंपरिक युद्ध नृत्य है, जो अरन के त्योहार के दौरान किया जाता है। यह नृत्य आमतौर पर पुरुषों द्वारा किया जाता है
  • आदि जनजाति का परिचय
    • आदि जनजाति अरुणाचल प्रदेश की सबसे बड़ी और प्रमुख स्वदेशी जनजातियों में से एक है
    • जो मुख्य रूप से सियांग, पूर्वी सियांग, ऊपरी सियांग और वेस्ट सियांग जिलों में निवास करती है।
    • यह जनजाति अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कृषि-आधारित जीवनशैली और उत्सवों के माध्यम से प्रकृति पूजा के लिए जानी जाती है।
    • उनके नृत्य सामाजिक एकता, फसल उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न हिस्सा हैं, जो जीवंत वेशभूषा, पारंपरिक वाद्यों और सामूहिक प्रदर्शन के साथ किए जाते हैं।
  • पासी कोंगकी नृत्य
    • पासी कोंगकी अरुणाचल प्रदेश की आदि जनजाति द्वारा प्रदर्शित एक लोकप्रिय नृत्य शैली है, जो पासी उप-जनजाति से जुड़ी हुई है।
    • यह नृत्य मुख्य रूप से सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सवों के दौरान किया जाता है
    • जिसमें नर्तक पारंपरिक पोशाक जैसे रंग-बिरंगे वस्त्र, मोतियों की मालाएं, सींग के आभूषण और बांस की पट्टियां पहनते हैं।
    • पासी कोंगकी को आदि जनजाति का अभिन्न अंग माना जाता है
    • यह अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जो सामूहिकता और उत्साह को दर्शाता है।
  • पोपिर नृत्य
    • पोपिर भी आदि जनजाति द्वारा मनाया जाने वाला एक अन्य प्रसिद्ध लोक नृत्य है
    • जो विशेषकर कटाई के त्योहारों (जैसे सोलुंग या मोपिन) के अवसर पर प्रस्तुत किया जाता है।
    • इसमें नर्तक सुंदर चालें, जीवंत वेशभूषा और लयबद्ध संगीत के साथ प्रकृति के प्रति सम्मान और समृद्धि की कामना व्यक्त करते हैं।
    • सियांग जिले में यह नृत्य स्थानीय जनजातियों द्वारा लोकप्रिय है और सांस्कृतिक आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • अन्य संबंधित नृत्य
    • आदि जनजाति के अन्य नृत्यों में शामिल हैं:
    • पोनुंग (Ponung): महिलाओं द्वारा किया जाने वाला उत्सव नृत्य, जो मोपिन उत्सव से जुड़ा है।​
    • देलोंग (Delong): पुरुषों का विशेष नृत्य, जो युद्ध या शिकार से प्रेरित होता है।​
    • तापू (Tapu): मोपिन उत्सव के दौरान युद्ध नृत्य के रूप में जाना जाता है।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • ये नृत्य अरुणाचल प्रदेश की 26 प्रमुख जनजातियों की विविधता को दर्शाते हैं, जहां आदि जनजाति की शैली कृषि, प्रकृति और सामुदायिक बंधन पर केंद्रित है।
    • राज्य सरकार और सांस्कृतिक संगठन इन्हें संरक्षित करने के लिए प्रयासरत हैं
    • जैसे कि हॉर्नबिल फेस्टिवल में प्रदर्शन।
    • ये नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि पीढ़ियों तक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम भी हैं।

14. मुंडारी नृत्य (Mundari dance) का संबंध किस भारतीय राज्य के आदिवासी समुदाय से है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) झारखंड
Solution:
  • मुंडारी नृत्य (Mundari dance) भारत के झारखंड राज्य के आदिवासी समुदाय द्वारा किया जाता है।
  • यह नृत्य एक समूह में किया जाता है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों भाग लेते हैं।
  • मुंडा जनजाति का परिचय
    • मुंडा जनजाति भारत की प्रमुख आदिवासी समुदायों में से एक है
    • जो झारखंड के साथ-साथ ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी पाई जाती है।
    • वे आस्ट्रो-एशियाई भाषा परिवार से संबंधित हैं और प्रकृति पूजा, आनिमिज्म तथा हिंदू परंपराओं का मिश्रण मानते हैं।
    • झारखंड में यह समुदाय अपनी भाषा, वेशभूषा और सामूहिक जीवनशैली के लिए जाना जाता है।
  • नृत्य की उत्पत्ति और महत्व

    • मुंडारी नृत्य झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है
    • जो सामाजिक एकता, उत्सवों और प्रकृति से गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
    • यह पारंपरिक रूप से शादियों, फसल कटाई, त्योहारों और सामूहिक श्रम के अवसरों पर किया जाता है।
    • नृत्य में पुरुष और महिलाएं समूह में भाग लेते हैं
    • जो आदिवासी समाज की सहजता और सामूहिकता को उजागर करता है।​
  • प्रदर्शन शैली

    • यह नृत्य मुख्य रूप से ढोल और मांदर जैसे पारंपरिक वाद्यों की सधी हुई ताल पर आधारित होता है।
    • नर्तक लयबद्ध पैरों की चाल, ताली बजाना और समकालिक गतियों के साथ पारंपरिक वेशभूषा (जैसे रंगीन पोशाकें, पंख और आभूषण) धारण करते हैं।
    • प्रस्तुति में ऊर्जावान कदम और लोक संगीत का समन्वय होता है
    • जो दर्शकों को जनजातीय जीवन की झलक देता है। जदुर (महिला प्रधान) और राचा जैसे इसके विभिन्न रूप खूंटी जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं।​
  • सांस्कृतिक भूमिका

    • मुंडारी नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक बंधन मजबूत करने और सांस्कृतिक निरंतरता बनाए रखने का माध्यम है।
    • यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपराओं को संरक्षित करता है, जो आधुनिक समय में भी जीवित है।
    • झारखंड सरकार और दूरदर्शन जैसे मंच इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करते हैं, जैसे "ढोल मांदर" कार्यक्रम में सोमरा लोहरा जैसे कलाकारों की प्रस्तुतियां।​​

15. मोहिनीअट्टम किस राज्य की एक नृत्य शैली है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (IV-पाली), MTS (T-I) 12 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (III-पाली), Phase-XI 30 जून, 2023 (II-पाली), CHSL (T-I) 10 जनवरी, 2017 (II-पाली) MTS (T-I) 3,30 अक्टूबर, 2017 (I-पाली), CHSL (T-I) 14 अक्टूबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) केरल
Solution:
  • मोहिनीअट्टम केरल राज्य की एक शास्त्रीय नृत्य शैली है।
  • यह हिंदू देवता विष्णु से संबंधित है। कथकली, कलियाट्टम एवं थप्पूकली भी केरल की नृत्य शैलियां हैं।
  • उत्पत्ति और राज्य
    • इसका नाम "मोहिनी" (विष्णु का मोहक स्त्री रूप) और "अट्टम" (नृत्य) से बना है
    • जो समुद्र मंथन या भस्मासुर वध की पौराणिक कथाओं से जुड़ा है।
    • यह नृत्य केरल के मंदिरों में विकसित हुआ, जहां देवदासी परंपरा ने इसमें योगदान दिया।
  • इतिहास
    • इसकी जड़ें नाट्य शास्त्र में हैं, जिसकी रचना भरत मुनि ने 200 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी के बीच की मानी जाती है
    • हालांकि केरल में इसका प्रमाण 11वीं शताब्दी के विष्णु मंदिरों की मूर्तियों से मिलता है।
    • 16वीं शताब्दी में व्यवहार माला ग्रंथ में इसका पहला लिखित उल्लेख है, और 19वीं शताब्दी में स्वाति तिरुनाल जैसे राजाओं ने इसे व्यवस्थित रूप दिया।
    • 20वीं शताब्दी में कलामंडलम जैसे संस्थानों ने इसे पुनर्जीवित किया।
  • विशेषताएं
    • यह लास्य शैली पर आधारित है, जिसमें कोमल, तरल गतियां, सरकने वाले कदम और सिर-आंखों की सुंदर हलचलें प्रमुख हैं।
    • मुद्राएं (हस्तgesture) भरतनाट्यम और कथकली से ली गई हैं, लेकिन अधिक स्त्रीलिंग और भावपूर्ण।
    • वेशभूषा सफेद-क्रीम साड़ी, कांच की चूड़ियां और घुंघरू वाली होती है, जो मोहिनी के आकर्षण को दर्शाती है।
  • संगीत और प्रदर्शन
    • संगीत कर्नाटक शैली का होता है, जिसमें पदम, पदवर्णम और अष्टपदी जैसे रूप शामिल हैं।
    • नर्तकी स्वर में गाती या अभिनय करती है
    • जो भक्ति, श्रृंगार और वात्सल्य रस पर केंद्रित होता है। प्रदर्शन में नृत्य (नृत्य), नृत (abhinaya) और गायन का समावेश होता है।
  • प्रसिद्ध कलाकार
    • डॉ. सुनंदा नायर भारत की पहली मोहिनीअट्टम में पीएचडी प्राप्त महिला हैं।
    • अन्य प्रमुख नामों में कनक रंजनी, स्मिता वाघ और यामिनी कृष्णमूर्ति शामिल हैं, जिन्होंने इसे वैश्विक मंच दिया।​
  • महत्व
    • मोहिनीअट्टम भारत की आठ शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है, जो केरल की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती है।
    • यह नारी शक्ति और भक्ति का प्रतीक है तथा आज भी मंदिरों, मंचों और उत्सवों में जीवंत है।

16. मोहिनीअट्टम नृत्य शैली को इसका नाम हिंदू भगवान ....... से मिला है। [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (I-पाली), C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) विष्णु
Solution:
  • मोहिनीअट्टम केरल राज्य की एक शास्त्रीय नृत्य शैली है। यह हिंदू देवता विष्णु से संबंधित है। कथकली, कलियाट्टम एवं थप्पूकली भी केरल की नृत्य शैलियां हैं।
  • उत्पत्ति और पौराणिक आधार
    • हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान अमृत वितरण में देवताओं की सहायता के लिए मोहिनी नामक सुंदर स्त्री अवतार धारण किया
    • जिसने असुरों को मोहित कर अमृत देवों को दिला दिया।
    • इसी प्रकार, भस्मासुर वध की कथा में भी विष्णु ने मोहिनी रूप लिया।
    • यह नृत्य उस दिव्य मोहिनी की कोमलता, लालसा और भक्ति को चित्रित करता है।
  • नृत्य शैली की विशेषताएँ
    • यह एकल नृत्य है, जो मुख्यतः महिलाओं द्वारा किया जाता है और लास्य शैली (स्त्रील, कोमल) पर आधारित है।
    • गतियाँ समुद्र की लहरों जैसी प्रवाहमयी हैं, जिसमें ऊपर-नीचे हिलते कंधे, पंजे और कमर की सुंदर सर्पिल गतियाँ प्रमुख हैं।
    • अभिनय में भक्ति रस, श्रृंगार और करुणा भाव प्रधान होते हैं, जो नायिका के प्रेम और समर्पण को दर्शाते हैं। ताल 8 बीट वाली अधाताल पर आधारित होती है।
  • संरचना और रचनाएँ
    • मोहिनीअट्टम की प्रस्तुति कई भागों में होती है:
    • चोलुककु: शुरुआती शुद्ध नृत्य।
    • पदम: भक्ति गीतों पर भावपूर्ण अभिनय, जैसे जयदेव के गीत गोविंद से।
    • कीर्तनम: पद्मनाभ स्वामी (विष्णु) की स्तुति।
    • तिल्लाना: तेज गति वाला समापन।
    • ये रचनाएँ संस्कृत और मलयालम में होती हैं।​
  • वेशभूषा और मेकअप
    • नर्तकी सफेद या ऑफ-व्हाइट साड़ी पहनती है, जो केरल की कसावु साड़ी से प्रेरित होती है
    • सोने की जरी से सजी। बाल दो चोटियों में बाँधे जाते हैं, जिनमें ताजे फूल सजाए जाते हैं।
    • मेकअप में भारी आँखें, लाल होंठ और सफेद चंदन का लेप प्रमुख होता है, जो मोहिनी की मोहकता को उभारता है। आभूषण स्वर्ण के होते हैं।
  • ऐतिहासिक विकास
    • इसकी जड़ें 9वीं-12वीं शदी की हैं, लेकिन 19वीं शदी में स्वाती तिरुनाल द्वारा पुनरुद्धार हुआ।
    • 1930 के दशक में कलामंडलम द्वारा आधुनिक स्वरूप मिला।
    • केरल के मंदिरों जैसे पद्मनाभस्वामी और गुरुवायुर से प्रभावित। प्रसिद्ध कलाकार: कानक रेले, यामिनी कृष्णमूर्ति।
  • संगीत और वाद्ययंत्र
    • संगीत मलयालम में होता है, जिसमें तबला, मृदंगम, इडक्का, ढोलक और वीणा प्रमुख हैं।
    • गायन में स्वर और राग प्रधान होते हैं। यह नृत्य भक्ति और सौंदर्य का संगम है, जो विष्णु की मोहिनी लीला को जीवंत करता है।​

17. घुरेही (Ghurehi) निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य का लोक नृत्य है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) हिमाचल प्रदेश
Solution:
  • 'घुरेही' हिमाचल प्रदेश राज्य का लोक नृत्य है। यह एक सुंदर नृत्य प्रदर्शन है, जो आमतौर पर चंबा क्षेत्र की महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • उत्पत्ति और क्षेत्र
    •  यह मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है और स्थानीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। नृत्य का नाम "घेरा" से आया है
    • जो चंबा की स्थानीय भाषा में वृत्ताकार गोलाई को दर्शाता है, जिसमें नर्तकियां नाचती हैं।
  • प्रदर्शन का अवसर
    • यह नृत्य वार्षिक मेलों, विवाह समारोहों, भगवती जातराओं और अन्य खुशी के अवसरों पर किया जाता है।
    • चंबा के पारंपरिक मेलों में यह विशेष रूप से लोकप्रिय है
    • जहां महिलाएं समूह में नृत्य करती हैं। गीतों में नारी-सौंदर्य, प्रेम और लोक जीवन का वर्णन होता है।
  • वेशभूषा और शैली
    • नर्तकियां लंबी बहती हुई स्कर्ट, चटक रंगों वाले ब्लाउज और पारंपरिक आभूषण जैसे हार, झुमके व चूड़ियां पहनती हैं।
    • नृत्य की विशेषता इसकी सुंदर चालें, लयबद्ध घुमाव और वृत्ताकार गति है।
    • यह जीवंत और आकर्षक होता है, जो हिमाचल की पहाड़ी संस्कृति को जीवंत बनाता है।
  • संगीत और वाद्ययंत्र
    • नृत्य लोक संगीत के साथ होता है, जिसमें बांसुरी, ढोल, झांझ और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों का उपयोग होता है।
    • यह संगीत नृत्य की लय को बनाए रखता है और उत्सवपूर्ण माहौल पैदा करता है।
    • हिमाचल के अन्य नृत्यों जैसे कूलू नट्टी या छम्म से अलग, घुरेही अधिक कोमल और स्त्री-प्रधान है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • घुरेही हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं का प्रतीक है, जो सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाता है।
    • यह राज्य के अन्य लोक नृत्यों जैसे दंदरास (गद्दी पुरुषों का), छम्म (लामाओं का) या चुराही नृत्य के साथ मिलकर हिमाचल की विविधता को उजागर करता है।
    • यह नृत्य पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण में भी योगदान देता है।

18. निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली की उत्पत्ति केरल में हुई है, जो मंच पर केवल एक महिला कलाकार द्वारा पेश किया जाता है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) मोहिनीअट्टम
Solution:
  • मोहिनीअट्टम नृत्य शैली की उत्पत्ति केरल राज्य में हुई है, जो मंच पर केवल एक महिला कलाकार द्वारा पेश किया जाता है।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    •  यह 16वीं-18वीं शताब्दी के बीच विकसित हुआ, जब केरल के नाट्य शास्त्र और लास्य शैली ने इसे आकार दिया।
    • परंपरागत रूप से इसे देवदासी परंपरा से जोड़ा जाता है, लेकिन आधुनिक समय में यह एकल महिला प्रदर्शन पर केंद्रित है।
  • विशेषताएँ
    • यह नृत्य धीमी, लयबद्ध और कोमल गतियों पर आधारित है, जिसमें शरीर की सुंदर स्विंगिंग मूवमेंट्स, नेत्र अभिनय और हस्त मुद्राएँ प्रमुख हैं।
    • कोई झटके या तेज़ कूद नहीं होती, बल्कि यह स्त्रीत्वपूर्ण लास्य शैली का प्रतीक है।
    • संगीत मलयालम में होता है, जिसमें सोपान शैली के रागों का उपयोग किया जाता है।
  • प्रदर्शन शैली
    • मोहिनीअट्टम हमेशा एक महिला कलाकार द्वारा अकेले मंचित किया जाता है, जो पद्य, अभिनय और नृत्य का मिश्रण प्रस्तुत करती है।
    • यह आमतौर पर कविताओं या भक्ति रचनाओं पर आधारित होती हैं, जैसे जयदेव के गीत गोविंद से।
    • वेशभूषा सफेद-ऑफ व्हाइट साड़ी, कसी हुई ब्लाउज और सोने के आभूषणों वाली होती है, जो मोहिनी के आकर्षक रूप को दर्शाती है।
  • अन्य केरल नृत्यों से अंतर
    • केरल के अन्य नृत्य जैसे कथकली (पुरुष-प्रधान, नाटकीय), मार्गमकली (समूह महिलाओं का ईसाई नृत्य) या थिरुवाथिराकली (महिलाओं का समूह वृत्ताकार नृत्य) से अलग, मोहिनीअट्टम एकल और शुद्ध रूप से महिला-केंद्रित है।
    • थुल्लल एकल है लेकिन पुरुष द्वारा व्यंग्यात्मक, जबकि यह शांत और भावपूर्ण है।
  • महत्व और संरक्षण
    • यह भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में से एक है, जो केरल की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
    • कलाकार जैसे सोनल मानसिंह या केनसीरा बाला ने इसे वैश्विक मंच दिया। आज कोचीन या त्रिवेंद्रम के संस्थानों में प्रशिक्षण मिलता है।

19. निम्नलिखित में से किस तत्कालीन रियासत का संबंध मुख्य रूप से कथक से था? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अवघ
Solution:
  • उन्नीसवीं सदी में 'अवध' के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण में कथक का स्वर्णयुग देखा गया।
  • उन्होंने लखनऊ घराने को अभिव्यक्ति तथा भाव पर उसके प्रभावशाली स्वरांकन सहित स्थापित किया।
  • जवाब: लखनऊ रियासत (अवध का नवाबी राज्य)
    • कथक नृत्य का मुख्य संबंध तत्कालीन लखनऊ रियासत (जिसे अवध रियासत भी कहा जाता है) से था
    • जो ब्रिटिश काल में एक प्रमुख नवाबी राज्य था।
    • यह उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में स्थित था और कथक को शाही संरक्षण प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध रहा।
  • कथक का ऐतिहासिक विकास
    • कथक मूल रूप से भक्ति आंदोलन के दौरान विकसित हुआ
    • जहां कथावाचक (कथाकार) भगवान कृष्ण की लीलाओं की कहानियां नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से सुनाते थे।
    • मंदिरों से निकलकर यह मुगल दरबारों में पहुंचा, लेकिन मुगल काल के बाद अवध के नवाबों ने इसे चरमोत्कर्ष प्रदान किया।
    • लखनऊ में नवाब वाजिद अली शाह जैसे शासकों ने कथक को दरबारी कला बना दिया
    • जहां तवायफें (नर्तकियां) और कथक मास्टर्स जैसे ठुमरी और गत प्रदर्शनों से इसे परिष्कृत किया।
    • यह नृत्य "कथा" शब्द से उत्पन्न हुआ, जो कहानी कहने की परंपरा को दर्शाता है।
    • अवध रियासत में फारसी प्रभाव के कारण कथक में मुगलिया चाश्मीर (घुमावदार चक्कर) और फुटवर्क जैसे तत्व जुड़े
    • जो इसे अन्य शास्त्रीय नृत्यों से अलग करते हैं। लखनऊ घराना इसी रियासत का योगदान है, जो नृत्य की कोमलता और भावाभिनय पर केंद्रित है।​
  • अवध रियासत का विशेष योगदान
    • अवध (लखनऊ) नवाबी रियासत 18वीं-19वीं शताब्दी में कथक का प्रमुख केंद्र बनी, जहां नवाब आसफ-उद-दौला से लेकर वाजिद अली शाह तक ने इसे प्रोत्साहित किया।
    • वाजिद अली शाह स्वयं नृत्य रसिक थे और उन्होंने कथक को "रासलीला" से जोड़कर कृष्ण लीला पर आधारित प्रदर्शन लोकप्रिय किए।
    • लखनऊ में कथक की तवायफ परंपरा ने इसे जीवंत रखा, भले ही 1856 में ब्रिटिशों ने अवध को हड़प लिया।​

20. मंजू भार्गवी (Manju Bhargavi) को किस भारतीय शास्त्रीय नृत्य में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी 2019 से सम्मानित किया गया? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) कुचिपुड़ी
Solution:
  • मंजू भार्गवी को 'कुचिपुड़ी' नृत्य शैली के लिए वर्ष 2019 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • अभिनेत्री और नृत्यांगना मंजू भार्गवी को तेलुगू ब्लॉकबस्टर फिल्म शंकरभरणम (वर्ष 1980) और नायकुडु विनयकुड्डु (वर्ष 1980) में उनकी भूमिकाओं के लिए जाना जाता है।
  • पुरस्कार का विवरण
    • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2019 मंजू भार्गवी को कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य के प्रति उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया।
    • यह पुरस्कार एक ताम्रपत्र, अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र और 1,00,000 रुपये नकद राशि के साथ आता है।
    • पुरस्कार की घोषणा 2022 में हुई, जिसमें 2019-2021 के पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को शामिल किया गया।
    • कर्नाटक से 2019 के अन्य पुरस्कार विजेता विनायक तोरवी (हिंदुस्तानी वोकल) थे।
  • कुचिपुड़ी नृत्य के बारे में
    • कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी गाँव से उत्पन्न एक प्रमुख भारतीय शास्त्रीय नृत्य रूप है।
    • यह नृत्य नृत्य, अभिनय, संगीत और मिमिक्री का एक शानदार संयोजन है
    • जिसमें तेज़ पैरों की थाप, अभिनयपूर्ण मुद्राएँ और भावपूर्ण अभिव्यक्तियाँ प्रमुख हैं।
    • मंजू भार्गवी ने इस नृत्य को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से गुरु वेम्पत्ति चिन्ना सत्यन के मार्गदर्शन में।
  • मंजू भार्गवी का करियर
    • मंजू भार्गवी तेलुगु सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री हैं
    • जिन्हें 1980 की ब्लॉकबस्टर फिल्मों संकराबहरणम और नायकुडु विनयकुडु में उनके नृत्य और अभिनय के लिए जाना जाता है।
    • उन्होंने शास्त्रीय नृत्य प्रशिक्षण लिया और देश-विदेश में अनेक प्रदर्शन किए।
    • वे कुचिपुड़ी को आधुनिक मंचों पर ले जाने और युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए जानी जाती हैं।
  • संगीत नाटक अकादमी का महत्व
    • संगीत नाटक अकादमी भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी है, जो 1952 में स्थापित हुई।
    • यह पुरस्कार प्रदर्शन कला के क्षेत्र में जीवन भर के योगदान को मान्यता देता है।
    • 2019 के पुरस्कारों में कुचिपुड़ी के अलावा अन्य नृत्य रूपों जैसे भरतनाट्यम, मोहिनीअट्टम आदि के कलाकार भी शामिल थे।
  • अन्य उपलब्धियाँ
    • मंजू भार्गवी को कलारत्न हंस पुरस्कार जैसे अन्य सम्मान भी मिले हैं।
    • उनका योगदान कुचिपुड़ी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में रहा, जिसमें कार्यशालाएँ और सूर्य नृत्य महोत्सव जैसे आयोजन शामिल हैं।