सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-II

Total Questions: 50

21. चविट्टकली (Chvittukali) का लोक नृत्य निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य से संबंधित है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) केरल
Solution:
  • चविष्टुकली (Chvittukali) एक पारंपरिक लोक नृत्य शैली है, जिसका संबंध भारत के केरल राज्य से है।
  • उत्पत्ति और विशेषताएँ
    • चविट्टकली केरल का पारंपरिक लोक नृत्य है, जो मुख्य रूप से मध्य केरल और मलप्पुरम जिले में प्रचलित है।
    • यह कोलकाली नृत्य से मिलता-जुलता है, लेकिन इसमें लाठियाँ नहीं इस्तेमाल होतीं।
    • नर्तक हथेलियों से ताली बजाते हुए वृत्ताकार में नृत्य करते हैं
    • साथ ही लोक गीत गाते हैं जो पौराणिक कथाओं या महान व्यक्तियों की कहानियों पर आधारित होते हैं।
  • प्रदर्शन और समुदाय
    • यह नृत्य किसान और मजदूरों द्वारा किया जाता है
    • इसलिए कोई विशेष वेशभूषा या मेकअप नहीं होता
    • सामान्य कपड़े ही पहने जाते हैं। उल्लाड़ा, ऊराली, चेरुमार और कनक्कार समुदायों में यह विशेष रूप से लोकप्रिय है। ओनम, विषु तथा मंदिर मेलों जैसे त्योहारों पर मंचित होता है।
  • क्षेत्रीय विविधताएँ
    • कुछ स्थानों पर नर्तक लाठियाँ थामकर नृत्य करते हैं
    • जबकि अन्य जगहों पर केवल तालियाँ और लयबद्ध कदम ही होते हैं।
    • पल्लक्कड़ जिले के वल्लुवनाड क्षेत्र में इसे चुवाडु वैपू कली या वट्टकली भी कहा जाता है। कोई वाद्ययंत्र नहीं होते, नर्तक ही गीत गाते हैं।​​

22. नीना प्रसाद को ....... में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया। [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मोहिनीअट्टम
Solution:
  • नीना प्रसाद को 'मोहिनीअट्टम' शास्त्रीय नृत्य रूप में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2021 से सम्मानित किया गया।
  • नीना प्रसाद एक प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना हैं, जो कई वर्षों से इस कला को सक्रिय रूप से प्रचारित और संरक्षित कर रही है।
  • नीना प्रसाद का परिचय
    • उन्होंने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कथकली और मोहिनीअट्टम जैसे शास्त्रीय नृत्यों में व्यापक प्रशिक्षण लिया
    • जिसमें कलामंडलम सुगंधी (8 वर्ष), कलामंडलम क्षेमावती (3 वर्ष), पद्मश्री अडयार के लक्ष्मण (भरतनाट्यम में 11 वर्ष) और पद्मभूषण वेम्पत्ति चीन सत्यम (कुचिपुड़ी में 12 वर्ष) जैसे गुरुओं का मार्गदर्शन शामिल है।
    • अंग्रेजी साहित्य में एमए करने के बाद, उन्होंने दक्षिण भारत के शास्त्रीय नृत्यों को समर्पित जीवन जिया।
  • पुरस्कार का विवरण
    • संगीत नाटक अकादमी ने 2021 के लिए मोहिनीअट्टम में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया।
    • यह पुरस्कार वर्ष 2019, 2020 और 2021 के लिए एक साथ घोषित किए गए थे।
    • आधिकारिक दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि श्रीमती नीना प्रसाद को मोहिनीअट्टम के क्षेत्र में उनके कार्य के लिए सम्मानित किया गया।
  • मोहिनीअट्टम में योगदान
    • नीना प्रसाद ने मोहिनीअट्टम को सक्रिय रूप से प्रचारित और संरक्षित किया है।
    • यह नृत्य रूप अपनी सुंदर गतिविधियों, सूक्ष्म अभिव्यक्तियों, जटिल हाथ के इशारों और नाट्यशास्त्र की लास्य शैली पर आधारित है।
    • उन्होंने प्रमुख गुरुओं से प्रशिक्षण प्राप्त कर इस कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया तथा कोरियोग्राफी के माध्यम से इसे वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।
    • इससे पहले उन्हें कलामंडलम पुरस्कार (2017) भी मिल चुका है।
  • अन्य प्रासंगिक तथ्य
    • मोहिनीअट्टम केरल का शास्त्रीय नृत्य है, जो मोहिनी (मोहक नारी) से प्रेरित है।
    • नीना प्रसाद के अलावा, इस पुरस्कार श्रृंखला में अन्य कलाकारों जैसे भुवन कुमार छौ को भी मान्यता मिली।​
    • यह पुरस्कार भारत में प्रदर्शन कला के क्षेत्र की सर्वोच्च मान्यताओं में से एक है।​

23. निम्नलिखित में से किस लोकनृत्य का संबंध मुख्य रूप से राजस्थान से है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) गैर
Solution:
  • गैर (Gair) नृत्य राजस्थान से जुड़ा एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है।
  • यह मुख्य रूप से भील समुदाय द्वारा किया जाता है।
  • यह नृत्य शैली पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जाता है।
  • घूमर नृत्य का इतिहास
    • घूमर की उत्पत्ति भील जनजाति से मानी जाती है
    • जो देवी सरस्वती की पूजा के लिए शुरू हुआ था।
    • बाद में इसे अन्य राजस्थानी समुदायों ने अपनाया, खासकर मारवाड़ क्षेत्र में।
    • यह मध्यकालीन राजधानी मारवाड़ से जुड़ा है
    • त्योहारों जैसे तीज, गणगौर, शादियों व मांगलिक अवसरों पर किया जाता है।
  • प्रदर्शन शैली
    • महिलाएं रंग-बिरंगे घाघरे पहनकर एकसमान गोलाकार घुमावदार चालों से नृत्य करती हैं।
    • वे घूंघट ओढ़ती हैं, जो शालीनता का प्रतीक है
    • पारंपरिक गीत जैसे "मैं घूमर नचूंगी" गाते हुए ढोल, सारंगी, मंडल आदि वाद्यों पर थिरकती हैं।
    • नृत्य तेज लय में होता है, जहां घूंघड़ियों की खनक वातावरण को जीवंत बनाती है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • ये नृत्य राजस्थान की रेगिस्तानी संस्कृति, जनजातीय जीवन व उत्सवों का प्रतिबिंब हैं।
    • घूमर सहित कई नृत्य यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में हैं, जो राज्य की जीवंत परंपराओं को दर्शाते हैं।

24. गैर नृत्य राजस्थान के ....... समुदाय द्वारा किया जाता है। [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) भील
Solution:
  • गैर (Gair) नृत्य राजस्थान से जुड़ा एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है।
  • यह मुख्य रूप से भील समुदाय द्वारा किया जाता है। यह नृत्य शैली पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जाता है।
  • गैर नृत्य का परिचय
    • गैर नृत्य राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है
    • जो होली और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर फाल्गुन मास (फरवरी-मार्च) में आयोजित होता है।
    • यह नृत्य पुरुषों द्वारा गोलाकार घेरे में लकड़ी के डंडों (दंडिया) के साथ किया जाता है
    • जिसमें तालबद्ध तरीके से डंडे बजाते हुए लोक गीत गाए जाते हैं।
    • भील समुदाय के अलावा मारवाड़ में गुर्जर, राजपूत और अन्य समुदाय भी इसमें भाग लेते हैं, लेकिन मूल रूप से यह भील जनजाति का नृत्य है।
  • प्रदर्शन करने वाला समुदाय
    • भील जनजाति: मुख्य रूप से दक्षिण राजस्थान (मेवाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर) के भील पुरुष इसे करते हैं।
    • वे सफेद धोती जैसी 'ओंगी', पगड़ी और रंगीन वस्त्र पहनते हैं।
    • क्षेत्रीय भिन्नता: मेवाड़ में शुद्ध रूप से भील-प्रधान, जबकि मारवाड़ (बाड़मेर के कनाना गांव सहित) में सभी जातियों का समावेश। महिलाएं कभी-कभी डंडे लेकर शामिल होती हैं।
    • अन्य जनजातियां जैसे मीणा भी संबंधित नृत्यों (जैसे नेजा) में भाग लेती हैं, लेकिन गैर का केंद्र भील ही हैं।​​
  • प्रदर्शन का तरीका
    • नृत्य रात में खुले मैदानों या चौपालों में होता है, जो 15 दिनों या पूरे फाल्गुन तक चल सकता है।
    • वाद्य यंत्र: ढोल, चांग, मांदल, थाली और मंदर। पुरुष डंडे बजाते हुए घड़ी की दिशा में घूमते हैं।
    • वेशभूषा: पुरुष- सफेद ओंगी, पगड़ी; महिलाएं- घाघरा, ओढ़नी।
    • गीत: फाग (होली गीत) और ताने-मजाक वाले लोक भजन। कोई निश्चित कोरियोग्राफी नहीं, बल्कि सामूहिक ऊर्जा प्रधान।​
  • अवसर और अवधि
    • प्रमुख त्योहार: होली का दूसरा दिन या डंका पंचमी से शुरू, फसल कटाई की खुशी में।
    • धार्मिक महत्व: भगवान शिव या कृष्ण की भक्ति से जुड़ा, गवरी जैसे भील अनुष्ठानों से विकसित।
    • समय: रात्रि में, पूर्णिमा तक।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह नृत्य सामुदायिक एकता, कृषि उत्सव और जनजातीय परंपराओं का प्रतीक है।
    • आधुनिक समय में पर्यटकों को आकर्षित करता है, राजस्थान की विरासत को संरक्षित रखता है।
    • भील संस्कृति में गैर के अलावा गवरी, हाथीमना, नेजा जैसे अन्य नृत्य भी हैं।​

25. 2019 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित और शास्त्रीय नृत्यांगना, नार्थकी नटराज का संबंध निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली से है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) भरतनाट्यम
Solution:
  • नृत्यांगना, नार्थकी नटराज का संबंध 'भरतनाट्यम' नृत्य शैली से है।
  • वर्ष 2019 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था।
  • वह भारत में पद्मश्री से सम्मानित होने वाली पहली महिला ट्रांसजेंडर हैं।
  • उन्हें वर्ष 2011 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • नटराज का संबंध भरतनाट्यम से है।
    • नार्थकी नटराज 2019 में पद्मश्री से सम्मानित एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्यांगना हैं, जिनकी विशेषज्ञता भरतनाट्यम नृत्य शैली में है।
  • नटराज का परिचय
    • नार्थकी नटराज (जन्म: 1964, मदुरै, तमिलनाडु) भारत की प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं।
    • वह शास्त्रीय नृत्य क्षेत्र में अपनी कठोर साधना और जटिल मुद्राओं-भावों में महारत के लिए जानी जाती हैं।
    • वह पद्मश्री प्राप्त करने वाली पहली ट्रांसजेंडर महिला हैं
    • जो सामाजिक बहिष्कार को पार कर नृत्य के माध्यम से प्रेरणा बनीं।​​
  • भरतनाट्यम शैली
    • भरतनाट्यम तमिलनाडु की उत्पत्ति वाली प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली है, जो नटराज से जुड़ी हुई है।
    • इसमें जटिल पैरों की थिरकन, हस्तमुद्राएं, नेत्र-मुख भाव और शरीर की लयबद्ध गतियां प्रमुख हैं।
    • यह नृत्य आध्यात्मिक और धार्मिक विषयों पर आधारित है
    • जो तंजावुर की नायकी भव जैसी दुर्लभ शाखाओं को भी समेटे हुए है। नटराज ने 15 वर्षों तक गुरुकुल प्रशिक्षण लिया।​
  • पुरस्कार और उपलब्धियां
    • 2019 में उन्हें भारतीय शास्त्रीय नृत्य में योगदान के लिए पद्मश्री प्रदान किया गया।
    • खजुराहो नृत्य महोत्सव जैसे मंचों पर उन्होंने भरतनाट्यम प्रस्तुत कर सराहना प्राप्त की।​​
    • वह ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए प्रतीक हैं तथा तमिलनाडु सरकार की नीति परिषद में भी योगदान दे चुकी हैं।​
  • अन्य तथ्य
    • नटराज का जन्म अनूपनाडी गांव में हुआ
    • जहां बचपन से ही भरतनाट्यम में रुचि जगी।
    • पद्म पुरस्कारों में उनका नाम कला क्षेत्र से जुड़ा।

26. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राचीन ग्रंथ भरतनाट्यम के अध्ययन का स्रोत है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) अभिनय दर्पण
Solution:
  • अभिनय दर्पण एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसे भरतनाट्यम के अध्ययन का प्राथमिक स्रोत माना जाता है।
  • भरतनाट्यम का परिचय
    • भरतनाट्यम भारत के सबसे प्राचीन शास्त्रीय नृत्यों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति तमिलनाडु के मंदिरों से जुड़ी है।
    • यह नृत्य रूप धार्मिक कथाओं, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं को व्यक्त करता है।
    • लगभग 2000 वर्ष पुरानी इस शैली में नृत्य (नृत्य), अभिनय (नाट्य) और संगीत का समन्वय होता है।
  • अभिनय दर्पण का महत्व
    • अभिनय दर्पण (लगभग पहली-दूसरी शताब्दी ईस्वी) भरतनाट्यम के लिए प्राथमिक स्रोत है
    • जो शरीर की गतिविधियों (अंगिकाभिनय), हावभावों और मुद्राओं का विस्तृत वर्णन करता है।
    • यह ग्रंथ नृत्य की बुनियादी तकनीकों जैसे 108 करहस्त, सर्क्कय (आँखों की गति) और दृष्टि नियमों को परिभाषित करता है।
    • आधुनिक भरतनाट्यम गुरु इसे दैनिक अभ्यास और प्रदर्शन की आधारशिला मानते हैं।
  • अन्य संबंधित ग्रंथ
    • नाट्यशास्त्र (भरतमुनि, 200 ई.पू.-200 ई.): नृत्य-नाटक का मूल स्रोतग्रंथ है
    • जो तांडव-लास्य और रस सिद्धांत बताता है, लेकिन भरतनाट्यम की विशिष्ट शैली पर कम केंद्रित।
    • शिलप्पadikारम (प्राचीन तमिल महाकाव्य): भरतनाट्यम के प्रारंभिक रूपों का उल्लेख, लेकिन तकनीकी अध्ययन का स्रोत नहीं।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • भरतनाट्यम का प्रारंभिक रूप 'सदिर अट्टम' था, जो देवदासियों द्वारा मंदिरों में किया जाता था।
    • 20वीं शैली में रुक्मिणी देवी अरुंडेल जैसे सुधारकों ने इसे पुनर्जीवित किया
    • अभिनय दर्पण को आधार बनाकर। पुरातात्विक प्रमाण जैसे मंदिर मूर्तियाँ (बृहदेश्वर मंदिर) इसकी प्राचीनता दर्शाती हैं।​

27. निम्नलिखित में से कौन-सा लोक नृत्य हरियाणा में पुरुषों द्वारा किया जाता है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) गुग्गा
Solution:
  • 'गुग्गा' मुख्यतः हरियाणा का एक पारंपरिक लोक नृत्य है
  • जिसे गुगा नृत्य भी कहा जाता है। यह नृत्य विशेष रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता है।
  • हरियाणा का गुग्गा नृत्य वह लोक नृत्य है जो मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता है।
  • यह नृत्य संत गुग्गा की स्मृति में निकाले जाने वाले जुलूसों के दौरान होता है।
  • गुग्गा नृत्य का विवरण
    • गुग्गा नृत्य हरियाणा की लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है
    • जो विशेषकर पुरुष भक्तों द्वारा संत गुग्गा (गुग्गा पीर) की पूजा और सम्मान में किया जाता है।
    • नर्तक गुग्गा पीर की कब्र के चारों ओर जुलूस में गीत गाते हुए नाचते हैं
    • जो भक्ति और उत्साह से भरा होता है। यह नृत्य वर्षा ऋतु या गुग्गा नवमी के अवसर पर लोकप्रिय होता है।
  • धमाल नृत्य
    • धमाल हरियाणा के अहिरवाल क्षेत्र (गुड़गांव, रेवाड़ी, झज्जर) में प्रसिद्ध पुरुष नृत्य है
    • जिसकी जड़ें महाभारत काल से मानी जाती हैं। किसान फसल कटाई के समय ढोल की थाप पर अर्धचक्र बनाकर नाचते हैं
    • गणेश, भवानी व त्रिदेव की प्रार्थना करते हैं। फाल्गुन की चांदनी रातों में यह खूब होता है।
  • अन्य लोक नृत्य
    • फाग (फाल्गुन) नृत्य फसल उत्सव पर होता है
    • लेकिन पुरुषों के साथ महिलाएं भी भाग लेती हैं।
    • लूर और खोडिया मुख्यतः महिलाओं के नृत्य हैं।

28. गुग्गा (Gugga) नृत्य निम्नलिखित में से किस राज्य का पारंपरिक लोक नृत्य है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) हरियाणा
Solution:
  • 'गुग्गा' मुख्यतः हरियाणा का एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसे गुगा नृत्य भी कहा जाता है। यह नृत्य विशेष रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता है।
  •  मुख्य रूप से पुरुष भक्तों द्वारा किया जाता है। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में यह गहरी सांस्कृतिक जड़ें रखता है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • गुग्गा नृत्य सांप के काटने और अन्य विपत्तियों से रक्षा के लिए किया जाता है
    • क्योंकि गुग्गा पीर को सर्पदंश से बचाने वाले संत के रूप में पूजा जाता है।
    • यह भादों मास (अगस्त-सितंबर) में गुग्गा नवमी के अवसर पर निकाले जाने वाले जुलूसों का अभिन्न हिस्सा है।
    • हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय इसकी पूजा करते हैं, जो सामुदायिक एकता को दर्शाता है।
  • प्रदर्शन शैली
    • नृत्य में पांच मुख्य भगत (पंच विर) होते हैं, जो रंग-बिरंगी वेशभूषा पहनते हैं
    • ढोलक, मंजीरा, चिमटा, डेरू जैसे वाद्ययंत्र बजाते हुए गीत गाते हैं।
    • वे गुग्गा कीचढ़री (सज्जित बांस की लाठी) लेकर चक्राकार घूमते हैं, ताल के साथ नृत्य करते हुए समाधि अवस्था में पहुँच जाते हैं।
    • नृत्य सरल लेकिन ऊर्जावान होता है, जिसमें छाती पीटना और आंसू बहाना शामिल है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • गुग्गा पीर को राजस्थान के बीकानेर से जोड़ा जाता है, लेकिन नृत्य हरियाणा का प्रमुख रूप है
    • जो महाभारत काल तक की लोककथाओं से जुड़ा माना जाता है।
    • यह उत्तर भारत के पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तक फैला है
    • हरियाणा में सबसे प्रचलित है। गुग्गा नवमी पर गाँवों में जुलूस निकलते हैं, जो लोक संगीत और भक्ति का संगम है।

29. 'करमा (Karma)' आदिवासी नृत्य शैली का संबंध निम्नलिखित में से किस राज्य से है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) छत्तीसगढ़
Solution:
  • करमा (Karma) आदिवासी नृत्य शैली का संबंध मुख्यतः 'छत्तीसगढ़' तथा ओडिशा राज्य से है। यह नृत्य विभिन्न जनजातियों द्वारा किया जाता है।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • करमा नृत्य कर्मा वृक्ष (कर्मा पेड़) के सम्मान में किया जाता है, जो उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
    • यह भादो मास (अगस्त-सितंबर) की शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाए जाने वाले कर्मा त्योहार का अभिन्न हिस्सा है
    • जब आदिवासी कलम विधि से फसल उत्पादन बढ़ाने की परंपरा की शुरुआत को याद करते हैं।
    • गोंड, बैगा, उरांव, कमार, खरिया, कोल और बिंझवार जैसी जनजातियां इसे नई फसल की खुशी में करती हैं
    • हालांकि यह मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और बिहार के कुछ हिस्सों में भी देखा जाता है।
  • प्रदर्शन शैली
    • युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में पंक्तिबद्ध होकर थिरकते हैं—महिलाएं चटकीले लुगड़े, चूड़ियां और आभूषण पहनती हैं
    • जबकि पुरुष धोती-कुर्ता या पारंपरिक परिधान में होते हैं। मंदार, नगाड़ा और अन्य वाद्ययंत्रों की थाप पर लयबद्ध कदमताल होती है
    • जो सहयोग और एकता का संदेश देती है। नृत्य रात्रि भर चल सकता है
    • विजयादशमी से वर्षा ऋतु तक, और इसमें कर्म देवता को प्रसन्न करने की आस्था झलकती है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रकृति पूजा, अच्छी फसल की कामना और सामुदायिक बंधन का प्रतीक है।
    • आदिवासी समाज अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखने के लिए इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित करता है
    • जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
    • आधुनिक समय में भी कोरबा और जांजगीर जैसे क्षेत्रों में इसे उत्साह से मनाया जाता है।

30. 2021 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित, कनक राजू का संबंध निम्नलिखित में से किस आदिवासी लोक नृत्य शैली से है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) गुसादी
Solution:
  • वर्ष 2021 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित, कनक राजू का संबंध 'गुसादी' लोक नृत्य शैली से है।
  • यह मुख्यतः तेलंगाना की गोंड जनजाति का प्रसिद्ध लोक नृत्य है।
  • कनक राजू का परिचय
    • कनक राजू तेलंगाना के कोमाराम भीम आसिफाबाद जिले के जैनूर मंडल के मारलवाई गांव के निवासी हैं।
    • 80 वर्षीय (2021 के समय) राजू राज गोंड जनजाति से ताल्लुक रखते हैं, जो गोंड आदिवासियों की एक उपजाति है।
    • उन्होंने अपने जीवन के 60 वर्षों से अधिक समय गुसाडी नृत्य को समर्पित किया है
    • से उन्होंने अपने पिता से सीखा। गरीबी में पले-बढ़े राजू ने जंगलों में रहते हुए
    • इस कला को संरक्षित किया और पिछले 40 वर्षों से युवाओं को इसका प्रशिक्षण दे रहे हैं।
  • गुसाडी नृत्य शैली की विशेषताएं
    • गुसाडी राज गोंड जनजाति का पारंपरिक पुरुष-प्रधान लोक नृत्य है, जो स्थानीय देवता से जुड़ा हुआ है।
    • यह मुख्य रूप से डंडारी उत्सव के दौरान दीपावली के बाद 10 दिनों तक आयोजित होता है। नर्तक विशेष वेशभूषा धारण करते हैं:
    • सिर पर लगभग 1,500 मोर पंखों से बनी मल बूरा टोपी।
    • कमर पर जानवरों की खाल लपेटना।
    • ऊर्जावान चालें और समूह में तालबद्ध नृत्य।​
    • यह नृत्य आदिवासी संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है
    • लेकिन आधुनिकीकरण के कारण विलुप्ति के कगार पर था, जिसे कनक राजू ने बचाया।
  • पद्मश्री सम्मान और योगदान
    • 2021 में कला क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा गया।
    • यह पुरस्कार गुसाडी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और युवा पीढ़ी में इसे जीवित रखने के प्रयासों के लिए था।
    • राजू को स्थानीय रूप से "मास्टर" कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षित किया।
    • वे सरकारी समर्थन की मांग करते हैं ताकि वित्तीय सहायता से यह परंपरा मजबूत हो।
  • चुनौतियां और विरासत
    • गुसाडी ने उन्हें कभी आर्थिक लाभ नहीं दिया; राजू का बचपन गरीबी में बीता जहां कपड़े भी दुर्लभ थे।
    • फिर भी, उन्होंने इसे परिवार की पहचान बना दिया—"गुस्सादी राजू"। पद्मश्री ने उनकी कला को देशव्यापी प्रसिद्धि दी, लेकिन वे चाहते हैं
    • सरकार आर्थिक सहायता दे ताकि यह कला मरे नहीं।
    • आज भी वे तेलंगाना के आदिवासी क्षेत्रों में इसे प्रचारित कर रहे हैं।