सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-II

Total Questions: 50

41. गरबा नृत्य किस राज्य का नृत्य है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) गुजरात
Solution:
  • गरबा एक लोक नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति गुजरात में हुई थी।
  • गरबा नृत्य में ताली, चुटकी, खंजरी, डंडा, मंजीरा आदि का ताल देने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • गरबा नृत्य गुजरात राज्य का प्रमुख लोक नृत्य है।
    • यह नृत्य नवरात्रि के नौ रातों के दौरान विशेष रूप से किया जाता है, जहां महिलाएं और पुरुष एक साथ भाग लेते हैं।
  • उत्पत्ति और महत्व
    • गरबा का मूल गुजरात से है, हालांकि यह राजस्थान और मालवा क्षेत्र में भी प्रचलित है।
    • नृत्य का नाम "गरबो" से आया है, जो मिट्टी का एक घड़ा है
    • जिसमें पानी भरकर दीप रखा जाता है और उसके चारों ओर नृत्य होता है।​
    • यह देवी अम्बा या दुर्गा की पूजा का प्रतीक है, जो सभी मनुष्यों में दिव्य ऊर्जा का सम्मान करता है।
  • कैसे किया जाता है
    • गरबा एक गोलाकार सामूहिक नृत्य है, जिसमें नर्तक केंद्रीय दीप या मूर्ति के इर्द-गिर्द घूमते हैं।
    • यह लयबद्ध तालियों, घुंघरुओं और ऊर्जावान चालों से भरपूर होता है
    • जो ढोल, तबला, हारमोनियम जैसे वाद्यों पर आधारित संगीत के साथ होता है।​
    • परंपरागत रूप से महिलाएं चनिया चोली (रंगीन घाघरा और चोली) पहनती हैं, जबकि पुरुष भी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं।​
  • वेशभूषा और संगीत
    • महिलाओं की पोशाक में चमकीले रंगों वाली घाघरा, चोली और दुपट्टा प्रमुख है, जिसमें आईने का काम और भारी आभूषण होते हैं।​
    • संगीत गरबा गीतों पर आधारित होता है, जो भक्ति और उत्सवपूर्ण होते हैं; आधुनिक रूप में पॉप और फ्यूजन संगीत भी जुड़ गया है।​
    • नृत्य में क्लैपिंग, स्पिनिंग और जटिल फुटवर्क शामिल हैं, जो ऊर्जा और सामुदायिक एकता दर्शाते हैं।​
  • उत्सव और प्रसार
    • यह मुख्यतः नवरात्रि (शरद और चैत्र), शरद पूर्णिमा, होली और बसंत पंचमी पर किया जाता है।​
    • आज गरबा पूरे भारत और विश्व के भारतीय समुदायों में लोकप्रिय है, विशेषकर नवरात्रि के विशाल आयोजनों में।
    • गुजरात में अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में लाखों लोग भाग लेते हैं, जो दुनिया का सबसे बड़ा नृत्य उत्सव बन जाता है।​
  • अन्य संबंधित नृत्य
    • गरबा से मिलता-जुलते नृत्य जैसे डांडिया-गरबा (छड़ियों के साथ) भी गुजरात का हिस्सा हैं।​
    • भारत के अन्य राज्यों में भिन्न लोक नृत्य हैं
    • जैसे पंजाब का भांगड़ा या असम का बिहू, लेकिन गरबा गुजरात की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

42. ....... नृत्य भारत के अधिकांश अन्य नृत्यों की तुलना में अंतर्मुखी और संयमित है कलाकार कभी भी दर्शकों से सीधे आंखें नहीं मिलाता है। [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) मणिपुरी
Solution:
  • 'मणिपुरी' नृत्य भारत के अधिकांश अन्य नृत्यों की तुलना में अंतर्मुखी और संयमित है। इसमें कलाकार कभी भी दर्शकों से सीधे आंखें नहीं मिलाता है।
  • इस नृत्य शैली की विषयवस्तु राधा और गोपियों की कृष्ण से अलग होने की व्यथा को दर्शाने के साथ-साथ शिव तथा पार्वती के नृत्यों तथा अन्य देवी-देवताओं
  • जिन्होंने सृष्टि की रचना की थी, की दंतकथाओं के भी संदर्भ मिलते हैं।
  • मणिपुरी नृत्य की उत्पत्ति
    • मणिपुरी नृत्य पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से जुड़ा है और वैष्णव भक्ति परंपरा से प्रेरित है।
    • यह 18वीं शताब्दी में राजा भग्य चंद्र की अवधि में विकसित हुआ, मुख्यतः रासलीला नृत्यों पर आधारित।
    • इसकी जड़ें कृष्ण भक्ति में हैं, जो इसे आध्यात्मिक गहराई प्रदान करती है।
    • नृत्य मंदिरों और धार्मिक उत्सवों से निकलकर शास्त्रीय रूप धारण कर चुका है।
  • अंतर्मुखी शैली की विशेषताएँ
    • मणिपुरी नृत्य अन्य भारतीय नृत्यों जैसे भरतनाट्यम या कथक से भिन्न है, जहाँ नर्तक सक्रिय नेत्र संपर्क और अभिनय प्रधान होते हैं।
    • यहाँ नर्तक नीची दृष्टि बनाए रखते हैं, जो संयम और भक्ति भाव को दर्शाता है। हाव-भाव सूक्ष्म, कोमल और तरल होते हैं
    • पद, हस्त, नेत्र और मुख की बारीकियां आंतरिक भाव व्यक्त करती हैं बिना बाहरी प्रदर्शन के।
    • कलाकार कभी दर्शकों की ओर मुंह नहीं घुमाते, बल्कि एक काल्पनिक बिंदु पर केंद्रित रहते हैं।
  • तकनीकी तत्व
    • नृत्य में पंचक (पाँच तत्व)—तांडव के बजाय लास्य प्रधान, जहाँ कोमल घुमाव, झुकाव और समूह नृत्य प्रमुख हैं।
    • वेशभूषा हल्की होती है: पुरुष पगड़ी-धोती, स्त्रियाँ घाघरा जैसी पोशाक में।
    • संगीत पखावज, मृदंग और कंग (मणिपुरी ढोल) पर आधारित, राग-ताल से जुड़ा।
    • मुद्राएँ नृत्यशास्त्र पर आधारित लेकिन कम अतिरंजित।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह नृत्य भक्ति रस प्रधान है, रासलीला के माध्यम से कृष्ण-राधा कथाएँ जीवंत करता है।
    • मणिपुर की वैष्णव संस्कृति को प्रतिबिंबित करता है, जहाँ नृत्य आध्यात्मिक एकांत का प्रतीक है।
    • आधुनिक समय में भी यह शास्त्रीय नृत्यों में शांति रस का प्रतीक बना हुआ है। प्रदर्शन में समूह तालमेल अंतर्मुखी सौंदर्य को बढ़ाता है।

43. 'एलेलाक्कराडी' (Elelakkaradi) किस भारतीय राज्य का आदिवासी नृत्य है? [MTS (T-I) 11 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) केरल
Solution:
  • एलेलाक्कराडी (Elelakkaradi) केरल राज्य का आदिवासी नृत्य है।
  • यह नृत्य केरल राज्य की इरुलर (इरुला) नामक आदिवासी समूह द्वारा किया जाता है।
  • इस नृत्य में जंगली भालुओं के साथ आदिवासियों की लड़ाई को दर्शाया गया है, जो प्रायः उनकी बस्तियों पर हमला करते हैं।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • एलेलाक्कराडी की शुरुआत कुरिचिया या इरुलर योद्धाओं के मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षण से हुई मानी जाती है, जो उनकी ताकत और साहस का प्रतीक बनी।
    • यह नृत्य जंगली भालुओं के खिलाफ़ जनजातीय संघर्ष को दर्शाता है, जो उनके गाँवों पर हमला करते थे।​​
    • समय के साथ यह सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामुदायिक एकता का रूप ले लिया।​
  • प्रदर्शन और विशेषताएँ
    • यह समूह नृत्य है जिसमें पुरुष, महिलाएँ और बच्चे भाग लेते हैं, ऊर्जावान और समन्वित गतियों के साथ।
    • नर्तक पारंपरिक पोशाक पहनते हैं—कमर पर लपेटा लंबा कपड़ा, सिर पर पगड़ी, और हाथों में लकड़ी की छड़ें या डंडे।
    • ड्रम जैसे चेंडा और थप्पू की ताल पर गोलाकार बनाकर नृत्य होता है, जिसमें नाटकीय तत्व भी शामिल हैं।
  • अवसर और महत्व
    • यह मुख्यतः ओणम जैसे फसल त्योहारों पर किया जाता है, लेकिन अन्य उत्सवों और अनुष्ठानों में भी।
    • जनजातीय विरासत को संरक्षित करने का माध्यम है, जो वीरता और सामूहिकता दिखाता है।​​
    • केरल के आदिवासी नृत्यों में यह अनोखा है, जैसे कडारकली या कुरुम्बारकाली के साथ जुड़ा।​
  • संबंधित जनजातियाँ
    • इरुलर: पलक्कड़ के अट्टापडी में प्रचलित, भालू-संघर्ष थीम।
    • कुरिचिया: वायनाड के जंगलों में, योद्धा प्रशिक्षण से जुड़ा।
    • ये दोनों ही केरल के आदिवासी समुदाय इसे जीवंत रखते हैं।

44. कौन-सा लोकनृत्य देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच कृत्रिम युद्ध को दर्शाता है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) डांडिया रास
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में डांडिया रास गुजरात में नवरात्रि के दौरान किया जाने वाला प्रमुख लोकंनृत्य है।
  • इस लोकनृत्य में देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध का मंचन किया जाता है।
  • डांडिया रास का परिचय
    • यह गुजरात का प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो मुख्य रूप से नवरात्रि उत्सव के दौरान किया जाता है।
    • नर्तक रंग-बिरंगी लकड़ियों (डांडिया) का उपयोग करते हैं
    • जो देवी दुर्गा के तलवारों का प्रतीक हैं। यह नृत्य अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश देता है।​​
  • पौराणिक कथा से संबंध
    • हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर देवताओं को हराया था।
    • सभी देवताओं के तेज से देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ, जिन्होंने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया।
    • दसवें दिन दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। डांडिया रास इसी महायुद्ध का नृत्य रूप में चित्रण करता है।
  • नृत्य की विशेषताएँ
    • नर्तक जोड़े बनाकर लाठियों से एक-दूसरे पर प्रहार करते हुए नृत्य करते हैं, जो दुर्गा-महिषासुर युद्ध का अनुकरण है।
    • महिलाएँ चटकीले परिधानों में और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं।
    • तेज़ संगीत और थाप पर नृत्य होता है, जिसमें घुंघरू और ढोल की ध्वनि प्रमुख रहती है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • डांडिया रास न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है।
    • यह नवरात्रि के नौ रूपों (नवदुर्गा) की पूजा का भी माध्यम है।
    • गुजरात के अलावा राजस्थान और अन्य राज्यों में भी प्रचलित है।​​

45. चरी लोक नृत्य (Chari Folk dance) मुख्य रूप से किस भारतीय राज्य की महिलाओं द्वारा किया जाता है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) राजस्थान
Solution:
  • 'चरी नृत्य' राजस्थान का एक लोकप्रिय लोक नृत्य है, जो मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • यह नृत्य शैली किशनगढ़ के गुज्जर समुदाय और अजमेर के सैनी समुदाय में प्रमुख रूप से देखने को मिलता है।
  • किस राज्य और किन समुदायों का नृत्य
    • चरी नृत्य भारत के राजस्थान राज्य का अत्यंत लोकप्रिय लोक नृत्य है।
    • यह मुख्यतः अजमेर और किशनगढ़ क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहाँ यह विशेष रूप से प्रचलित है।
    • इसे खास तौर पर गुर्जर, सैनी और कंजर (कहीं–कहीं पर) समुदाय की महिलाओं का नृत्य माना जाता है।
  • कौन करता है और कब किया जाता है
    • यह नृत्य केवल महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है; पुरुष इसमें भाग नहीं लेते।
    • चरी नृत्य विवाह समारोहों, लड़के के जन्म पर, अच्छे फल या सुखद अवसरों के उत्सवों और प्रमुख त्यौहारों पर प्रस्तुत किया जाता है।
    • इसे शुभता, खुशी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है
    • इसलिए घर–परिवार की बड़ी खुशियों पर इसका आयोजन होता है।
  • उत्पत्ति और मूल भाव
    • चरी नृत्य की प्रेरणा राजस्थान के रेगिस्तान क्षेत्रों की उस दिनचर्या से मानी जाती है, जहाँ महिलाएँ मीलों दूर से सिर पर घड़ा या चरी रखकर पानी भरने जाती थीं।
    • पानी भरने जाते समय घड़े को संतुलित रखते हुए चलना, बातें करना और आनंद महसूस करना – इसी जीवन शैली ने इस नृत्य का रूप ले लिया।
    • यह नृत्य उस कठिन लेकिन आनंदपूर्ण दिनचर्या का उत्सव है
    • जिसमें महिलाएँ परिवार के लिए पानी लाती हैं और अपने परिश्रम को एक सुंदर कलात्मक अभिव्यक्ति में बदल देती हैं।
    • एक सरल उदाहरण के रूप में, मानिए किसी गाँव में शादी है: रात को चौपाल या आँगन में ढोलक, नगाड़े और हारमोनियम बजते हैं
    • दर्जनों महिलाएँ सिर पर चरी (घड़ा) रखकर गोल घेरा बनाकर नृत्य करती हैं – यही चरी नृत्य की जीवंत झलक है।
  • नृत्य की शैली और मुख्य विशेषताएँ
    • नर्तकियाँ अपने सिर पर मिट्टी या पीतल की चरी (घड़ा/पात्र) रखती हैं और उसे हाथ से छुए बिना संतुलित रखती हैं।
    • कई बार इन चरियों के अंदर जलते हुए दीये या कपास की बाती (तेल में भीगे बीज आदि) रखे जाते हैं, जिससे अँधेरे में घूमती हुई लौ की आकृतियाँ बहुत आकर्षक लगती हैं।​
    • महिलाएँ वृत्ताकार रूप में घूमते हुए हाथों, कमर और पैरों की सुंदर मुद्राओं के साथ तेज–धीमी लय में नृत्य करती हैं, जिससे जमीन पर रोशनी की रेखाएँ बनती दिखती हैं।​
    • नृत्य के साथ ढोल, ढोलक, नगाड़ा, थाली और हारमोनियम जैसे वाद्य बजाए जाते हैं, जो ताल और उत्साह को बढ़ाते हैं।​
  • पोशाक, आभूषण और सौंदर्य
    • नृत्य करते समय महिलाएँ पारंपरिक राजस्थानी घाघरा–चोली और ओढ़नी जैसे चमकीले व रंग–बिरंगे परिधान पहनती हैं।​
    • वे विभिन्न पारंपरिक स्वर्ण या नक़ली स्वर्ण आभूषण पहनती हैं
    • जैसे हँसली, तिमनिया, बांगड़ी, गजरा, करली, नवर (नवरत्न/नवर) आदि, जो नृत्य के साथ झिलमिलाते हैं।​
    • सिर पर रखी चरी, उसके भीतर जलती लौ, रंगीन घाघरे और घुँघरुओं की ध्वनि – सब मिलकर इस नृत्य को अत्यंत आकर्षक और मनमोहक बना देते हैं।​

46. फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी एक प्रशिक्षित ....... नृत्यांगना हैं। [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) भरतनाट्यम
Solution:
  • फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी एक प्रशिक्षित 'भरतनाट्यम' नृत्यांगना है।
  • हेमा मालिनी एक प्रशिक्षित भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं।
    • उनका नृत्य प्रशिक्षण बचपन से ही शुरू हुआ
    • जब उन्होंने भरतनाट्यम में विशेषज्ञता हासिल की और कुचिपुड़ी जैसे अन्य शास्त्रीय नृत्यों में भी निपुणता प्राप्त की।
    • उन्होंने अपनी नृत्य कला को फिल्मों में भी प्रदर्शित किया
    • जैसे 1963 की तमिल फिल्म "इदु साथी" में नृत्यांगना के रूप में डेब्यू किया।
  • नृत्य प्रशिक्षण की शुरुआत
    • हेमा मालिनी का जन्म 16 अक्टूबर 1948 को अम्मांदई (चेन्नई के पास) में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
    • बचपन से नृत्य में रुचि रखने वाली हेमा ने चेन्नई के सेंट जॉर्ज स्कूल से शिक्षा ली, लेकिन उनका मुख्य ध्यान शास्त्रीय नृत्य पर रहा।
    • उन्होंने भरतनाट्यम की औपचारिक ट्रेनिंग ली और विभिन्न प्रदर्शनियों में भाग लिया
    • जो उनकी फिल्मी करियर को मजबूत आधार प्रदान करने वाली साबित हुई।
  • शास्त्रीय नृत्य में विशेषज्ञता
    • हेमा मालिनी मुख्य रूप से भरतनाट्यम की प्रशिक्षित नृत्यांगना हैं, जो तमिलनाडु से उत्पन्न एक प्राचीन शास्त्रीय नृत्य शैली है।
    • इसके अलावा, वे कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश से) में भी पारंगत हैं और कथक के कुछ तत्वों का प्रदर्शन कर चुकी हैं।
    • उन्होंने "ड्रीम गर्ल" के नाम से प्रसिद्धि पाई, लेकिन शास्त्रीय मंचों पर गंगा अवतरण, दुर्गा आराधना और महिषासुरमर्दिनी जैसे विषयों पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर दुनिया भर में भारतीय नृत्य का प्रचार किया।
  • नृत्य संस्थान और विरासत
    • 1975 में हेमा मालिनी ने अपनी नृत्य अकादमी "हेमाजी की नृत्यशाला" की स्थापना की, जो भरतनाट्यम और अन्य शास्त्रीय नृत्यों का प्रशिक्षण प्रदान करती है।
    • उन्होंने अपनी बेटियों अहाना देओल और ईशा देओल को भी भरतनाट्यम सिखाया और उनके साथ कई जॉइंट परफॉर्मेंस दिए।
    • 76 वर्ष की उम्र में भी 2025 के वृंदावन महोत्सव में उन्होंने कथक और भरतनाट्यम का शानदार प्रदर्शन किया, जो वायरल हुआ।
  • फिल्मों में नृत्य का योगदान
    • फिल्मी करियर की शुरुआत 1968 की "सपनों का सौदागर" से हुई
    • लेकिन नृत्य ने उन्हें "शोले", "सीता और गीता", "प्रेम कहानी" जैसी हिट फिल्मों में विशेष पहचान दी।
    • हेमा ने 150 से अधिक फिल्मों में काम किया, जहां उनके नृत्य दृश्य हमेशा आकर्षण का केंद्र रहे।
    • राजनीति में प्रवेश के बाद भी (बीजेपी सांसद के रूप में) वे नृत्य को जारी रखती हैं, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
  • पुरस्कार और मान्यता
    • हेमा मालिनी को नृत्य और अभिनय के लिए पद्म भूषण (2000) जैसे सम्मान मिले।
    • उनके नृत्य शो ने भारतीय शास्त्रीय कला को वैश्विक मंच प्रदान किया
    • वे आज भी प्रेरणा स्रोत हैं। 2026 तक, उनकी उम्र 77 वर्ष होने के बावजूद नृत्य के प्रति समर्पण अटल है।

47. कमसले (Kamsale) निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य का लोकनृत्य है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) कर्नाटक
Solution:
  • कमसले (Kamsale) भारतीय राज्य कर्नाटक का लोकनृत्य है।
  • यह मुख्य रूप से भगवान महादेश्वर के भक्तों द्वारा किया जाता है
  • जो कर्नाटक के मुख्यतः दक्षिणी हिस्सों में पूजे जाने वाले देवता हैं।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • कमसले की उत्पत्ति पौराणिक काल से मानी जाती है
    • जब भक्त जंगलों से होकर तीर्थयात्रा करते हुए जंगली जानवरों से बचने के लिए जोरदार शोर मचाते थे।
    • यह माहादेश्वर हिल्स के मंदिर से जुड़ा है
    • जहां भक्त गीत गाते हुए भगवान शिव (महादेश्वर रूप) की महिमा का गुणगान करते हैं।
    • पहले यह लोककथा सुनाने की परंपरा थी, जो बाद में नृत्य रूप में विकसित हुई।
    • कुरुबा (हालू कुरुबा) जनजाति के पुरुष मुख्य कलाकार होते हैं, जो आजीवन भक्ति की शपथ लेते हैं।​
  • प्रदर्शन शैली
    • नृत्य में 10-12 कलाकार समूह में भाग लेते हैं, जो कांस्य के छोटे डिस्क या झांझ (कमसले नामक वाद्ययंत्र) बजाते हैं।
    • ये डिस्क हाथ या टखनों से बंधी होती हैं, जिनकी तेज लयबद्ध आवाज नृत्य का मुख्य आकर्षण है।
    • कलाकार वाद्ययंत्र को शरीर के चारों ओर घुमाते हुए आक्रामक-रक्षात्मक मुद्राएं दिखाते हैं
    • जो मार्शल आर्ट जैसी कुशलता प्रदर्शित करती हैं।
    • माहादेश्वर महाकाव्य के गीतों के साथ तालमेल रखते हुए यह मंदिरों या उत्सवों में किया जाता है।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भक्ति रस्म है जो महादेश्वर संप्रदाय की परंपराओं को संरक्षित रखता है।
    • मौखिक परंपरा से गुरु-शिष्य परंपरा में हस्तांतरित होने के कारण यह कन्नड़ संस्कृति का अभिन्न अंग है।
    • समूह प्रदर्शन में कलाकारों की एकता और शारीरिक शक्ति दर्शाती है
    • यह युद्धकला से प्रेरित है। कर्नाटक पर्यटन द्वारा इसे लोकप्रिय बनाया गया है।

48. कथक भारत के किस भाग का प्रमुख नृत्य है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) उत्तर-भारत
Solution:
  • कथक भारत के 'उत्तर भारत' की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली है।
  • बिरजू महाराज, सितारा देवी, उमा शर्मा आदि इस नृत्य शैली से जुड़ी प्रसिद्ध हस्तियां हैं।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    •  यह नृत्य 'नाट्यशास्त्र' से प्रेरित है और भक्ति आंदोलन (15वीं-16वीं शताब्दी) के दौरान विकसित हुआ
    • विशेषकर भगवान कृष्ण की लीलाओं पर आधारित।
    • मुगल काल में फारसी प्रभाव से इसमें चक्कर, तबला और घुंघरू जैसे तत्व जुड़े, जिससे यह दरबारी नृत्य बना।
    • जैतारण व बींदासर (राजस्थान) को मूल स्थानों में गिना जाता है, लेकिन जयपुर घराने ने इसे व्यवस्थित रूप दिया।
  • प्रमुख क्षेत्र
    • उत्तर प्रदेश कथक का केंद्र है, खासकर लखनऊ और जयपुर घराने के कारण।
    • यह उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा) से जुड़ा है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।​
  • घराने
    • कथक के चार प्रमुख घराने हैं:
    • लखनऊ घराना: अभिनय प्रधान, कृष्ण लीला पर जोर।
    • जयपुर घराना: पंडित बिन्दादीन महाराज द्वारा स्थापित, तकनीकी पक्ष मजबूत।
    • बनारस घराना: भावपूर्ण अभिनय।
    • रायगढ़ घराना: आधुनिक मिश्रण।​​
  • विशेषताएँ
    • कथक में तेज फुटवर्क (तत्कार), चक्कर (टर्न्स), हस्तमुद्राएँ और अभिनय प्रमुख हैं। नर्तक घुंघरू बाँधते हैं
    • जो तालबद्ध ध्वनि उत्पन्न करते हैं। संगीत में तबला, पखावज, सितार और वायलिन का प्रयोग होता है।
    • यह कहानी कहने वाला नृत्य है, जिसमें हिंदू पौराणिक कथाएँ प्रमुख हैं।
  • वेशभूषा और आभूषण
    • महिलाएँ चूड़ीदार, अनारकली या लहंगा पहनती हैं
    • कथई रंग (भूरा-पीला) प्रमुख। पुरुष धोती-कुर्ता।
    • आभूषणों में बिछिया, पायल, कंगन और बिंदिया शामिल।​
  • प्रसिद्ध कलाकार
    • बिरजू महाराज (लखनऊ घराने)।
    • उचित शर्मा, शोवना नारायण।
    • पंडित बिन्दादीन, हरिप्रसाद।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • कथक भक्ति, अध्यात्म और मुगल प्रभाव का संगम है। यह सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है
    • यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में शामिल है।
    • आज दिल्ली का कथक केंद्र (कथक केंद्र) इसका प्रचार करता है।

49. निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य रूप कर्नाटक से संबंधित नहीं है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) रउफ
Solution:
  • रउफ (Rauf) जम्मू और कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश से जुड़ा एक लोक नृत्य है।
  • यह लोक नृत्य रउफ जनजाति द्वारा किया जाता है। जबकि हुत्तरी, सुग्गी तथा करागा कर्नाटक के लोकनृत्य हैं।
  • कर्नाटक के प्रमुख लोक नृत्य
    • कर्नाटक की समृद्ध लोक संस्कृति में यक्षगान सबसे प्रसिद्ध है
    • जो तटीय क्षेत्रों में रामायण-महाभारत की कथाओं पर आधारित नाट्य-नृत्य है।
    • डोलू कुनीथा ढोल वाद्यों के साथ समूह नृत्य है, जबकि वीरगसे शिवरात्रि पर योद्धाओं की वीरता दिखाता है।
    • यक्षगान: रंग-बिरंगे वेशभूषा में संगीत, नृत्य और नाटक का मिश्रण।
    • हुट्टारी (हट्टारी): कोडागु क्षेत्र का फसल नृत्य।
    • सुग्गी: ग्रामीण उत्सवों से जुड़ा।
    • करागा: महिलाओं का समूह नृत्य।
    • ये सभी कर्नाटक की स्थानीय परंपराओं से जुड़े हैं।
  • कर्नाटक से असंबंधित नृत्य: रूफ
    • रूफ (Rouf या Rouf) जम्मू-कश्मीर का लोकप्रिय लोक नृत्य है, जो महिलाओं द्वारा बांस की टोकरियों पर नाचते हुए किया जाता है।
    • यह कश्मीरी रूफ जनजाति से जुड़ा है
    • त्योहारों में जल उत्सव या सामूहिक आनंद के लिए होता है। कर्नाटक का इससे कोई संबंध नहीं।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • कर्नाटक के नृत्य धार्मिक, कृषि और ऐतिहासिक कथाओं को दर्शाते हैं
    • जो सामुदायिक एकता बढ़ाते हैं। यक्षगान यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर है।
    • रूफ जैसा बाहरी नृत्य कश्मीर की भौगोलिक विविधता दिखाता है।

50. निम्नलिखित में से कौन-सा एक भारतीय शास्त्रीय नृत्य नहीं है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) भांगड़ा
Solution:
  • 'भांगड़ा' पंजाब का एक पुरुष प्रधान लोक नृत्य है। आमतौर पर यह नृत्य बैसाखी पर्व पर किया जाता है।
  • लेकिन सामान्यतः ऐसे प्रश्नों में यक्षगान, भांगड़ा या चाकियार कुथु जैसे नाम आते हैं, जिनमें से अधिकांश लोक नृत्य हैं।
  • शास्त्रीय नृत्य क्या हैं?
    • शास्त्रीय नृत्य शास्त्र-सम्मत होते हैं और नृत्य, नृत्य, नाट्य के तत्वों पर आधारित होते हैं।
    • भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त आठ शास्त्रीय नृत्य हैं: भरतनाट्यम, कत्थक, कथकली, कुचिपुड़ी, मणिपुरी, ओडिसी, मोहिनीअट्टम और सत्रिया।
    • ये नृत्य तांडव (पुरुष प्रधान) और लास्य (स्त्री प्रधान) भावों पर आधारित हैं तथा मुद्राओं, भावों और राग-ताल का कठोर अनुशासन रखते हैं।​
    • लोक नृत्य इनसे भिन्न होते हैं क्योंकि वे स्थानीय परंपराओं पर आधारित होते हैं बिना शास्त्रीय व्याकरण के।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • नाट्यशास्त्र (भरतमुनि) शास्त्रीय नृत्यों का आधार है। सनातन काल से ये मंदिरों और दरबारों में विकसित हुए।​
    • 2000 ई.पू. से लेकर आधुनिक काल तक इनकी शुद्धता संरक्षित रही
    • जैसे रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने भरतनाट्यम को पुनर्जनन दिया।​
    • आज ये यूनेस्को और सांस्कृतिक मंचों पर वैश्विक पहचान रखते हैं।