Correct Answer: (a) कर्नाटक संगीत
Solution:- प्रश्नगत विकल्पों में कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य कर्नाटक संगीत से संबंधित है।
- कर्नाटक संगीत का महत्व
- कुचिपुड़ी के हर प्रदर्शन में कर्नाटक संगीत का उपयोग अनिवार्य होता है, जो दक्षिण भारत की प्राचीन परंपरा पर आधारित है।
- यह संगीत रागों (मेलodic स्वर संयोजनों) और तालों (लयबद्ध चक्रों) पर केंद्रित होता है
- जैसे आदि ताल या मिश्र चापु, जो नर्तक के जटिल फुटवर्क और मुद्राओं को सहारा देते हैं।
- कर्नाटक संगीत की तात्कालिक (improvisational) प्रकृति नृत्य को भावनात्मक गहराई प्रदान करती है
- विशेषकर भक्ति रस वाली कृष्ण लीला या भागवत पुराण की कथाओं में।
- इस संगीत का मूल सामवेद और नाट्यशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों से लिया गया है
- जो इसे हिंदुस्तानी संगीत से अलग करता है—जहाँ उत्तर भारतीय नृत्य जैसे कथक इसका उपयोग करते हैं।
- कुचिपुड़ी में संगीत न केवल पृष्ठभूमि होता है, बल्कि नाटकीय संवादों और अभिनय को भी समर्थन देता है।
- संगीत वाद्ययंत्र
- कुचिपुड़ी प्रदर्शन में कर्नाटक संगीत के लिए एक पूर्ण संगीत मंडली होती है:
- मृदंगम: मुख्य ताल वाद्य, जो लय की जटिलताएँ पैदा करता है।
- वायलिन: स्वरों को मधुरता से जोड़ता है, अक्सर गायक की सहायता करता है।
- बांसुरी (वीणा या पुल्लांकल): हल्के, प्रवाहमयी स्वर जो कृष्ण भक्ति के भाव जगाते हैं।
- घटम या मोरिसिंग: अतिरिक्त लय के लिए।
- गायक (नाथस्वरम या पदम) पदचिंतनई या जवली जैसे गीत गाता है
- जो नृत्य के tarangam (बाल संतुलन पर नृत्य) या sabdam (कथात्मक भाग) को निर्देशित करते हैं।
- यह संयोजन नृत्य को एक समग्र नाट्य अनुभव बनाता है।
- ऐतिहासिक संदर्भ
- कुचिपुड़ी की उत्पत्ति 17वीं शताब्दी में वैष्णव ब्राह्मणों से जुड़ी है, जब भगवत मेला नामक नृत्य-नाटक मंदिरों में किए जाते थे।
- सिद्धेंद्र योगी ने इसका प्रथम ग्रंथ "भामाकलापम" रचा, जो कर्नाटक संगीत पर आधारित था।
- आधुनिक कुचिपुड़ी में वेदांतम लक्ष्मीनारायण शास्त्री जैसे गुरुओं ने संगीत को और परिष्कृत किया, इसे solo प्रदर्शनों के लिए ढालते हुए।
- यह संगीत नृत्य की नारीय शैली (लास्य) और पुरुष प्रधान ऊर्जा (तांडव) दोनों को समाहित करता है, जैसे शिषु पांडवम में।
- प्रदर्शन संरचना में संगीत
- एक पूर्ण कुचिपुड़ी recital इस प्रकार होता है:
- पुष्पांजलि: मंगलाचरण, सरल राग-ताल में।
- स्वरारोहण-अवरोहण: संगीत की आधारशिला स्थापित करना।
- जातिस्वरम: शुद्ध नृत्य, ताल पर केंद्रित।
- शब्दम: अभिनय प्रधान, संवादों सहित।
- tarangam: बाल पर नृत्य, तेज लय में।