Correct Answer: (d) लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती
Solution:- भारत के बिहार राज्य का झिझिया प्रसिद्ध लोक नृत्य है, जिसे मिथिला क्षेत्र में किया जाता है।
- यह नृत्य केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है। संपूर्ण नवरात्रि में नौ रातों का यह त्योहार देवी लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती के तीन रूपों की पूजा करने के लिए मनाया जाता है।
- उत्पत्ति और क्षेत्र
- झिझिया नृत्य मिथिला (मिथिलांचल) क्षेत्र में प्रचलित है, जो बिहार के मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी जैसे जिलों और नेपाल के कुछ भागों तक फैला हुआ है।
- यह भोजपुरी क्षेत्रों में भी देखा जाता है और आश्विन मास (सितंबर-अक्टूबर) के दशहरा उत्सव के समय किया जाता है।
- पौराणिक रूप से यह मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है, जहां महिलाएं इसे अनुष्ठानिक रूप से प्रस्तुत करती हैं।
- नृत्य की विधि
- महिलाएं और कुवारी लड़कियां 5 से 15 के समूह में सिर पर मिट्टी का घड़ा (झिझिया या झिझरी) रखकर नृत्य करती हैं।
- घड़े में छोटे-छोटे छेद होते हैं, जिसमें जलता दीपक रखा जाता है, जो नृत्य के दौरान रोशनी बिखेरता है।
- नृत्य रात्रि के दूसरे-तीनरे पहर में होता है, बारी-बारी से महिलाएं घड़ा संभालती हैं और लोकगीत गाते हुए ताल पर थिरकती हैं।
- धार्मिक महत्व
- यह नृत्य संपूर्ण नवरात्रि (नौ रातों) के दौरान देवी के तीन रूपों—लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती—की पूजा के लिए मनाया जाता है।
- देवी दुर्गा को प्रसन्न करने, परिवार और बच्चों को बुरी शक्तियों, चुड़ैल, जादू-टोने से बचाने का उद्देश्य है।
- मान्यता है कि यदि कोई डायन घड़े के छेद गिन ले, तो नर्तकी को खतरा हो सकता है, इसलिए यह तांत्रिक सुरक्षा का प्रतीक है।
- सांस्कृतिक विशेषताएं
- झिझिया गीत भक्ति, लोककथाओं (जैसे राजा चित्रसेन-रानी प्रेमकथा) और जीवन संदेशों से भरे होते हैं।
- यह महिला सशक्तिकरण, सामाजिक एकता और मिथिला संस्कृति को जीवित रखने का माध्यम है।
- नवरात्रि के अलावा छठ पूजा के समय भी इसका आयोजन होता है, जो समृद्धि और शांति लाता है।
- आधुनिक संदर्भ
- आज झिझिया मिथिला की पहचान बन चुका है और उत्सवों में बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया जाता है।
- यह नृत्य बिहार की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है, जहां परंपरा और आस्था का संगम देखने को मिलता है।